Persistent Systems की हो जाएगी जर्मनी की Nagarro, खरीदेगी सारे शेयर; स्टॉक में दिख सकता है बड़ा उछाल

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जर्मनी की डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म Nagarro SE के सभी बकाया शेयर 81 यूरो प्रति शेयर की कैश डील में खरीदना चाहती है। इसके लिए कंपनी एक वॉलंटरी पब्लिक टेकओवर ऑफर दे रही है। यह खरीद सब्सिडियरी गैलेक्सी जर्मनी होल्डिंग के जरिए करने का प्लान है। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स का कहना है कि डील के अक्टूबर-दिसंबर 2026 या जनवरी-मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। पर्सिस्टेंट को पहले ही Nagarro की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर, Lantano Beteiligungen GmbH का साथ मिल चुका है, जिसने कंपनी में अपनी पूरी 21 प्रतिशत हिस्सेदारी पर्सिस्टेंट को बेचने पर सहमति जताई है।

Nagarro का मैनेजमेंट और सुपरवाइजरी बोर्ड भी इस ट्रांजेक्शन के सपोर्ट में है। फाइनल ऑफर डॉक्यूमेंट का रिव्यू करने के बाद उस पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। इस ट्रांजेक्शन पर अभी रेगुलेटरी मंजूरियां और जर्मनी के फाइनेंशियल रेगुलेटर BaFin की मंजूरी लिया जाना भी बाकी है। प्रस्तावित अधिग्रहण से Persistent की AI-बेस्ड इंजीनियरिंग और क्लाउड क्षमताएं, Nagarro की यूरोपियन डिजिटल इंजीनियरिंग, ERP और कस्टमर एक्सपीरियंस विशेषज्ञता के साथ आएंगी। इससे एक ऐसी कंपनी बनेगी, जिसका सालाना रेवेन्यू रन रेट लगभग 2.9 अरब डॉलर होगा। इसके 40 से अधिक देशों में 46,000 से अधिक कर्मचारी होंगे।

इस सौदे के लिए फंडिंग बार्कलेज (Barclays) से कमिटेड फाइनेंसिंग के जरिए की जाएगी। यह अधिग्रहण यूरोप में पर्सिस्टेंट सिस्टम्स की मौजूदगी को काफी मजबूत करेगा। इस ट्रांजेक्शन के बाद बनने वाली कंपनी के रेवेन्यू में यूरोप की हिस्सेदारी लगभग 22 प्रतिशत की होगी। नॉर्थ अमेरिका का योगदान लगभग 62 प्रतिशत रहेगा।

Nagarro डीलिस्ट होगी

जर्मनी के म्यूनिख में हेडक्वार्टर वाली Nagarro ने कैलेंडर वर्ष 2025 में लगभग 1 अरब यूरो का रेवेन्यू कमाया। इसके 40 से अधिक देशों में लगभग 18,500 कर्मचारी हैं। कंपनी की ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल, कंज्यूमर, टेलीकॉम और BFSI सेक्टर में अच्छी मौजूदगी है। डील पूरी होने के बाद पर्सिस्टेंट की योजना नगारो को फ्रैंकफर्ट स्टॉक एक्सचेंज के प्राइम स्टैंडर्ड सेगमेंट से डीलिस्ट करने की है। हालांकि, सौदा पूरा होने के बाद कम से कम दो साल तक डोमिनेशन और प्रॉफिट एंड लॉस ट्रांसफर एग्रीमेंट (DPLTA) करने का कोई इरादा नहीं है।

Persistent Systems का कहना है कि डील के अक्टूबर-दिसंबर 2026 या जनवरी-मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। 

सोमवार को चढ़ सकता है Persistent Systems का शेयर

इस नए डेवलपमेंट से सोमवार, 29 जून को Persistent Systems के शेयर में उछाल आ सकता है। शेयर की वर्तमान कीमत बीएसई पर 4840.45 रुपये है। शेयर 6 महीनों में 24 प्रतिशत गिरा है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 30.29 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी का मार्केट कैप 76300 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

सुदीप शाह ने कहा-Nifty 24500-24600 तक पहुंचा तो बाजार में आएगी बड़ी तेजी, इन 3 शेयरों पर दांव लगाने की दी सलाह

अमेरिका-ईरान डील के बाद शेयर बाजारों में रिकवरी दिखी है। लेकिन, निफ्टी के लिए 24,500-24,600 के जोन को पार करना आसान नहीं होगा। यह कहना है कि सुदीप शाह का। शाह एसबीआई सिक्योरिटीज में टेक्निकल डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड हैं। उन्होंने मनीकंट्रोल से बातचीत में शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति और आगे की चाल के बारे में कई अहम बाते बताईं। उनका मानना है कि हालिया रिकवरी के बावजूद निफ्टी में स्ट्रॉन्ग डायरेक्शनल मोमेंटम की कमी दिख रही है।

मार्केट का शॉर्ट टर्म ट्रेंड पॉजिटिव

शाह के मुताबिक, शॉर्ट टर्म में मार्केट का ट्रेंड पॉजिटिव दिख रहा है, क्योंकि निफ्टी में उसके 20-डे और 50-डे EMA से ऊपर ट्रेडिंग हो रही है। लेकिन, अभी स्ट्रॉन्ग ब्रेकआउट के लिए मोमेंटम इंडिकेटर्स का सपोर्ट नहीं दिख रहा। इसका मतलब है कि निफ्टी के लिए 24,500-24,600 के जोन को पार करना आसान नहीं होगा। इस हफ्ते शेयर बाजार में पांच की जगह चार दिन कारोबार हुआ। इस दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

24250-24300 पर पहला रेसिस्टेंस

उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म में 24,250-24,300 के जोन में निफ्टी को पहला रेसिस्टेंस मिलेगा। अगर निफ्टी निर्णायक रूप से 24,300 के ऊपर निकल जाता है तो इसके 24,500-24,600 के जोन तक जाने की संभावना बढ़ जाएगी। उसके बाद निफ्टी के लिए नए रिकॉर्ड हाई बनाने का रास्ता खुल जाएगा। गिरावट की स्थिति में 23,800-23,750 पर निफ्टी के लिए बड़ा सपोर्ट उपलब्ध है। जब तब यह सपोर्ट लेवल बना हुआ है, ट्रेंड पॉजिटिव बना रह सकता है।

बैंक निफ्टी में दिख रहा निफ्टी से ज्यादा स्ट्रेंथ

बैंक निफ्टी के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि इसमें निफ्टी 50 के मुकाबले ज्यादा टेक्निकल स्ट्रेंथ दिख रहा है। अगर यह ट्रेंड बना रहता है तो इसके निफ्टी 50 से पहले रिकॉर्ड हाई पर पहुंच जाने की संभावना है। बीते हफ्ते बैंक निफ्टी ने 7 दिनों के कंसॉलिडेशन फेज से ब्रेकआउट किया। पहले इसने 58,706 के लेवल को टच किया। इससे वीकली चार्ट पर हाई लेवल कैंडल बना है। यह हायर लेवल के करीब कुछ अनिर्णय की स्थिति का संकेत दे रहा है।

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अगले हफ्ते इन शेयरों में हो सकती है कमाई

अगले हफ्ते किन शेयरों में पैसा बन सकता है? इस सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि Samvardhana Motherson तकनीकी रूप से काफी स्ट्रॉन्ग दिख रहा है। इसने डेली चार्ट पर सिमेट्रिकल ट्रायंगल पैटर्न से ब्रेकआउट किया है। इससे इस शेयर में आगे तेजी जारी रहने की संभावना दिख रही है। CrditAccess Grameen में भी ट्रेंड स्ट्रॉन्ग दिख रहा है। इसने अपने 20-डे EMA से अच्छा पुलबैक दिखाया है। इसमें भी आगे तेजी दिख सकती है। Max Healthcare Institute में भी ट्रेंड स्ट्रॉन्ग दिख रहा है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Ashoka Buildcon को गुयाना में मिला ₹338 करोड़ का हाइवे प्रोजेक्ट, शेयर में आ सकती है अच्छी तेजी

कंस्ट्रक्शन सेक्टर की कंपनी अशोका बिल्डकॉन के शेयरों में सोमवार, 29 जून को अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है। इसकी वजह है कंपनी को दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना में एक प्रोजेक्ट मिलना। कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि उसने गुयाना की सेंट्रल हाउसिंग एंड प्लानिंग अथॉरिटी को एक प्रोजेक्ट के​ लिए बोली जमा की थी। यह प्रोजेक्ट वर्सेल्स, वेस्ट बैंक डेमेरारा से पारिका, ईस्ट बैंक एस्सेक्विबो, रीजन नंबर 3- लॉट 8 तक 4 लेन वाले हाइवे का निर्माण करने के लिए है।

कंपनी को इस प्रोजेक्ट के लिए लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस मिल गया है, यानि कि कंपनी ने यह प्रोजेक्ट हासिल कर लिया है। प्रोजेक्ट की एक्सेप्टेड वैल्यू 7,455,455,867 गुयानीज डॉलर या लगभग 3.54 करोड़ अमेरिकी डॉलर है। भारतीय करेंसी में यह वैल्यू 337.81 करोड़ रुपये से ज्यादा होती है।

प्रोजेक्ट को 20 महीनों के अंदर एग्जीक्यूट किया जाना है। एक्सचेंज फाइलिंग में अशोका बिल्डकॉन ने कहा है कि यह कॉन्ट्रैक्ट रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के तहत नहीं आता है।

Ashoka Buildcon का शेयर एक साल में लगभग 40 प्रतिशत कमजोर

अशोका बिल्डकॉन का शेयर BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर की कीमत गुरुवार, 25 जून को बीएसई पर 130.80 रुपये पर बंद हुई। शुक्रवार को मुहर्रम के चलते शेयर बाजार बंद हैं। कंपनी का मार्केट कैप 3600 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर एक साल में लगभग 40 प्रतिशत गिरा है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 54.48 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

हाल ही में कंपनी को छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से एक कॉन्ट्रैक्ट के लिए LoA (लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस) मिला था। यह कॉन्ट्रैक्ट रायपुर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क बनाने के लिए है। यह पार्क 38,922 वर्ग मीटर में बनेगा। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 51 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले एक जॉइंट वेंचर के जरिए बोली लगाई थी। कंस्ट्रक्शन पीरियड 5 साल है। कॉन्ट्रैक्ट रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के तहत नहीं आता है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

अशोका बिल्डकॉन का जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,771.88 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 48.86 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान रेवेन्यू 5,811.66 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 320.44 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

प्रॉपर्टी या म्यूचुअल फंड, लंबे समय में कौन आपको बनाएगा ज्यादा अमीर? 4 पॉइंट्स में समझिए कहां मिलेगा बंपर रिटर्न

Real Estate vs Mutual Funds: लॉंग टर्म के लिए निवेश कैसे करें? जमीन खरीदे या फिर म्यूचुअल फंड में पैसे लगाए। भारत के निवेशकों के बीच लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए सालों से यह बहस चली आ रही है। वैसे दशकों तक हमारे देश में प्रॉपर्टी यानी जमीन या मकान खरीदना ही अमीर बनने और सुरक्षित भविष्य का सबसे भरोसेमंद जरिया माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड्स एक बेहद जबरदस्त ऑप्शन के तौर पर उभरे हैं।

प्रॉपर्टी और म्यूचुअल फंड, दोनों ने ही निवेशकों को अमीर बनाया है। लेकिन जब बात लंबे समय के लिए निवेश की हो, तो आपके लिए कौन सा विकल्प सबसे बेहतर रहेगा? आइए समझते हैं दोनों का पूरा नफा-नुकसान।

1- रियल एस्टेट: क्यों आज भी प्रॉपर्टी पर फिदा हैं लोग?

रियल एस्टेट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एक ‘टैंजिबल एसेट’ है, यानी इसे आप देख सकते हैं, छू सकते हैं और खुद इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके अन्य बड़े फायदे इस प्रकार हैं:

किराए से रेगुलर इनकम: प्रॉपर्टी से आपको हर महीने रेंटल इनकम मिल सकती है, जो महंगाई के साथ बढ़ती जाती है।

बड़ी ग्रोथ की संभावना: अगर किसी इलाके में नया हाईवे, मेट्रो या कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आ रहा है, तो वहां की जमीन के दाम रातों-रात आसमान छू सकते हैं।

छिपी हुई लागत: प्रॉपर्टी खरीदते समय लोग अक्सर इसके अतिरिक्त खर्चों को भूल जाते हैं। स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज, सालाना प्रॉपर्टी टैक्स और मेंटेनेंस का खर्च आपके कुल मुनाफे को काफी कम कर देता है। इसके अलावा, अगर होम लोन लिया है, तो ब्याज का भारी बोझ भी जोड़ना पड़ता है।

2- लिक्विडिटी: सबसे बड़ा और मुख्य अंतर

रियल एस्टेट और म्यूचुअल फंड के बीच सबसे बड़ा फर्क पैसे की जरूरत पड़ने पर दिखता है। प्रॉपर्टी को तुरंत बेचना नामुमकिन होता है। एक सही खरीदार ढूंढने, डील पक्की करने और कागजी कार्रवाई पूरी करने में हफ्तों या महीनों का समय लग जाता है। मंदी के दौर में तो यह इंतजार और लंबा हो सकता है।

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म्यूचुअल फंड्स में लिक्विडिटी का कोई झंझट नहीं होता। आप जब चाहें अपने फंड्स को ऑनलाइन रिडीम कर सकते हैं और कुछ ही दिनों में पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आ जाता है।

3- म्यूचुअल फंड्स क्यों बन रहे हैं आम लोगों की पहली पसंद?

म्यूचुअल फंड्स ने निवेश की पूरी प्रक्रिया को बहुत आसान और सुलभ बना दिया है। जहां प्रॉपर्टी खरीदने के लिए आपको एक साथ लाखों-करोड़ों रुपयों का इंतजाम करना पड़ता है या बड़ा लोन लेना पड़ता है, वहीं म्यूचुअल फंड में आप SIP के जरिए हर महीने महज ₹500 जैसी छोटी रकम से भी शुरुआत कर सकते हैं।

प्रॉपर्टी में निवेश करते समय आपका पूरा पैसा एक ही जगह ब्लॉक हो जाता है। इसके विपरीत, म्यूचुअल फंड आपका पैसा अलग-अलग कंपनियों और सेक्टर्स में लगाते हैं। इस डायवर्सिफिकेशन से रिस्क काफी कम हो जाता है।

4- वेल्थ क्रिएशन का ट्रैक रिकॉर्ड: कहां हुई ज्यादा कमाई?

इसका कोई एक तय जवाब नहीं है क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने क्या और कब खरीदा है।

रियल एस्टेट का गणित: एक बेहतरीन लोकेशन पर ली गई प्रॉपर्टी आपको रेंटल और कैपिटल एप्रिसिएशन यानी कीमत बढ़ना दोनों से तगड़ा रिटर्न दे सकती है। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि भारी उम्मीदों के बावजूद किसी इलाके में प्रॉपर्टी के दाम सालों तक एक ही जगह थमे रहते हैं।

म्यूचुअल फंड का गणित: शेयर बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव का असर म्यूचुअल फंड पर जरूर पड़ता है। लेकिन जो निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव की परवाह किए बिना अपनी एसआईपी जारी रखते हैं, उन्हें लंबे समय में कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर ब्याज का जबरदस्त फायदा मिलता है, जो वेल्थ को कई गुना बढ़ा देता है।

आपके लिए क्या हो सकता है बेस्ट?

अक्सर लोग सोचते हैं कि रियल एस्टेट या म्यूचुअल फंड में से किसी एक को ही चुनना होगा। लेकिन असलियत में कई सफल निवेशक दोनों में पैसा लगाते हैं। प्रॉपर्टी जहां आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता और रेंटल इनकम देती है, वहीं म्यूचुअल फंड आपको लिक्विडिटी, डायवर्सिफिकेशन और तेजी से बढ़ने का मौका देते हैं।

निवेश करने से पहले यह न पूछें कि कौन सा एसेट क्लास बेहतर है, बल्कि यह देखें कि आपके वित्तीय लक्ष्य, आपकी जेब और आपकी जरूरत के हिसाब से आपके लिए कौन सा विकल्प सही बैठता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price Crash: रिकॉर्ड हाई से 29% टूटा सोना, अभी खरीदना सही या फिर करें और इंतजार? एक्सपर्ट ने ये बताया

Gold Price Fall: ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों और मजबूत होते डॉलर के कारण शुक्रवार, 26 जून को सोने की कीमतें लगातार चौथे हफ्ते गिरावट की राह पर रहीं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना इस समय $4000 प्रति औंस के लेवल के आस पास संघर्ष कर रहा है। बुधवार को यह नवंबर 2025 के बाद पहली बार $4000 के स्तर से नीचे भी फिसल गया था। अगर आप भी सोने या चांदी में निवेश करते हैं, तो ग्लोबल मार्केट का यह पूरा गणित आपके लिए समझना बेहद जरूरी है।

लगातार चौथे हफ्ते टूटा सोना

शुक्रवार को हाजिर सोना 0.6% गिरकर $4002.77 प्रति औंस पर आ गया। वहीं, अगस्त डिलीवरी वाला अमेरिकी सोना वायदा भी 0.7% की गिरावट के साथ $4017.30 पर ट्रेड कर रहा था। इस पूरे हफ्ते की बात करें तो सोने ने करीब 3.8% की भारी गिरावट दर्ज की है।

रिकॉर्ड हाई से 29% की भारी गिरावट

इस साल 29 जनवरी को अमेरिका-इरान युद्ध के कारण बढ़ी वैश्विक महंगाई के चलते सोने ने $5594.82 प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड बनाया था। लेकिन उसके बाद से अब तक सोने की कीमतों में करीब 29% की बड़ी करेक्शन आ चुकी है।

OANDA के सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग का मानना है कि सोने में चल रहा यह गिरावट का दौर अभी और लंबा खिंच सकता है और लंबी अवधि में सोना फिसलकर $3400 के स्तर तक भी जा सकता है। यानी मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

क्यों आ रही है सोने की कीमतों में गिरावट?

सोने के दाम गिरने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण काम कर रहे हैं:

1. मजबूत अमेरिकी डॉलर: फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद से अपने सबसे मजबूत स्तर के करीब बना हुआ है। डॉलर लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त की ओर है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं जैसे- भारतीय रुपया में सोना खरीदना काफी महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है।

2. अमेरिका में बढ़ती महंगाई और ब्याज दरें: गुरुवार को आए आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में खुदरा महंगाई मई महीने में 4% के पार निकल गई है, जो पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा है। आमतौर पर सोने को महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन जब महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं, तो सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सोने पर कोई ब्याज या यील्ड नहीं मिलता।

ट्रेडर्स को उम्मीद है कि अमेरिकी फेड इस साल तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, जिसमें सितंबर में रेट हाईक होने की संभावना 64% तक जताई जा रही है।

चांदी, प्लेटिनम और पैलेडियम का भी बुरा हाल

सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं के लिए भी यह हफ्ता बेहद निराशाजनक रहा:

हाजिर चांदी: 2.6% टूटकर $56.39 प्रति औंस पर आ गई।

प्लेटिनम: 2% की गिरावट के साथ $1568.55 पर आ गया।

पैलेडियम: 0.6% फिसलकर $1177.12 पर ट्रेड कर रहा था।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

Asian Market Today: टेक शेयरों में बिकवाली से एशियाई मार्केट में दबाव, निक्केई 4%, कोस्पी में 7% गिरा

Asian Market Today: वॉल स्ट्रीट पर उतार-चढ़ाव वाले सेशन के बाद शुक्रवार, 26 जून को एशियाई मार्केट में गिरावट आई। हैवीवेट टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में कमजोरी ने सेमीकंडक्टर कंपनियों से मिली अच्छी गाइडेंस से मिली उम्मीद को कम कर दिया।

सुबह 8.25 बजे के आसपास निक्केई करीब 4.18 फीसदी की गिरावट के  साथ 69,341.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.89 फीसदी की  कमजोरी दिखा रहा है।  ताइवान का बाजार 2.28 फीसदी  गिरकर 45,200.59 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 2.32 फीसदी की गिरावट के साथ 22,541.00  के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 7.38 फीसदी की गिरावट के साथ  कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 2.57 फीसदी की बढ़त के साथ 4,014.45 के स्तर पर दिख रहा है।

भारतीय स्टॉक मार्केट आज, 26 जून को मुहर्रम की छुट्टी के कारण बंद है। दोनों बड़े स्टॉक एक्सचेंज, BSE और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर आज ट्रेडिंग बंद रहेगी।

वॉल स्ट्रीट की रैली की रफ़्तार पड़ी फीकी 

गुरुवार को US स्टॉक मार्केट मिला-जुला रहा, जिसमें नैस्डैक बड़े टेक शेयरों में गिरावट के कारण नीचे बंद हुआ।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 71.72 पॉइंट्स या 0.14% बढ़कर 51,920.62 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 0.73 पॉइंट्स या 0.01% गिरकर 7,357.49 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 118.03 पॉइंट्स या 0.46% गिरकर 25,358.60 पर बंद हुआ।

यह कमजोरी वॉल स्ट्रीट पर मिले-जुले सेशन के बाद आई, जहां माइक्रोन टेक्नोलॉजी की अच्छी कमाई और गाइडेंस से मिली शुरुआती बढ़त को बनाए रखने में नाकाम रहने के बाद S&P 500 काफी हद तक बिना बदले बंद हुआ।

Apple सेंटीमेंट पर सबसे बड़ी रुकावट बनकर उभरा, जिसके शेयर 6.1% गिर गए, जब कंपनी ने Macs, iPads और होम डिवाइस की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की। इस गिरावट का असर टेक्नोलॉजी स्टॉक्स के बड़े मैग्निफिसेंट सेवन ग्रुप पर भी पड़ा।

होर्मुज स्ट्रेट की चिंता बनी रहने से तेल की कीमतों में नरमी

गुरुवार को बढ़त के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट आई, जब होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज पर प्रोजेक्टाइल के हमले की खबरों ने दुनिया के सबसे अहम एनर्जी ट्रेड रूट में से एक के ज़रिए शिपिंग की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दीं।

इस बीच, US सेंट्रल बैंक के पसंदीदा महंगाई गेज के उम्मीद से कम बढ़ने के बाद बॉन्ड मार्केट ने फेडरल रिजर्व के ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया।

AI से चलने वाली अस्थिरता निवेशकों को सतर्क रखती है

ग्लोबल इक्विटी मार्केट एक अस्थिर हफ्ते के आखिर में इस चिंता के साथ खत्म होने वाले हैं कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बड़े निवेश से काफी रिटर्न मिलेगा, जिससे टेक्नोलॉजी स्टॉक में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

हालांकि माइक्रोन के मजबूत तिमाही नतीजों और आशावादी नजरिए ने निवेशकों को कुछ भरोसा दिया, लेकिन सावधानी अभी भी बनी हुई है। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स और S&P 500 दोनों ही तिमाही में अपनी पहली महीने की गिरावट दर्ज करने की राह पर हैं।

पिछली रैली के बाद चिप स्टॉक्स में गिरावट

हालांकि नैस्डैक 100 गुरुवार को 0.8% ऊपर बंद हुआ, जबकि सेशन के दौरान यह 2.1% तक बढ़ा था, लेकिन यह बढ़त एशियाई मार्केट में पॉजिटिव सेंटिमेंट बनाए रखने के लिए काफी नहीं थी।

माइक्रोन के साथ-साथ, क्वालकॉम के शेयर भी बढ़े, जब कंपनी ने फिस्कल ईयर 2029 तक सालाना AI डेटा-सेंटर कंपोनेंट की बिक्री $15 बिलियन से ज़्यादा होने का अनुमान लगाया।

हालांकि, शुक्रवार को एशियाई सेमीकंडक्टर स्टॉक्स ने रुख बदल दिया। पिछले सेशन में उछाल के बाद MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स पर SK हाइनिक्स, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और कियॉक्सिया होल्डिंग्स के शेयर सबसे बड़ी गिरावट में रहे।

ओपनAI के IPO में कथित तौर पर देरी हुई

इसके अलावा, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की अंदरूनी बातचीत से जुड़े लोगों के हवाले से कहा गया है कि ओपनAI अपनी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग को 2027 तक टालने की ओर झुक रहा है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Emcure Pharma: नमिता थापर की कंपनी से 12 साल बाद बेन कैपिटल का एग्जिट, ₹352 करोड़ में बेचा हिस्सा; खरीदार कौन

प्राइवेट इक्विटी फर्म बेन कैपिटल ने 25 जून को NSE पर एक ब्लॉक डील में एमक्योर फार्मा में 1 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी। खरीदार HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस, एक्सिस म्यूचुअल फंड और आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड जैसे इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर रहे। बेन कैपिटल ने 12 साल पहले पहली बार एमक्योर फार्मा में निवेश किया था। अब यह इस दवा कंपनी में बची हुई पूरी हिस्सेदारी बेचकर एग्जिट कर गई है।

बेन कैपिटल ने एमक्योर फार्मा के 19.4 लाख शेयर 352 करोड़ रुपये में बेचे। ब्लॉक डील के डेटा के मुताबिक, ये शेयर औसतन 1,817 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर बेचे गए। दूसरी ओर HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस ने 130 करोड़ रुपये में 7.1 लाख शेयर खरीदे। आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड ने 47.5 करोड़ रुपये में 2.6 लाख शेयर खरीदे।

एक्सिस म्यूचुअल फंड ने भी 50 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। अन्य इंस्टीट्यूशनल खरीदारों में HSBC म्यूचुअल फंड, गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली और BNP पारिबा शामिल थे, जिन्होंने 25-25 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

जुलाई 2024 में लिस्ट हुई थी Emcure Pharma

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड का नाता शार्क टैंक इंडिया में जज के तौर पर दिख चुकीं नमिता थापर से है। वह इसमें होल टाइम डायरेक्टर हैं। नमिता के पिता सतीश रमनलाल मेहता कंपनी के फाउंडर, CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। एमक्योर फार्मा जुलाई 2024 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,952.03 करोड़ रुपये का रहा था। कंपनी का मार्केट कैप 35600 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 1881.90 रुपये है।

एमक्योर फार्मा का शेयर एक साल में 40 प्रतिशत और 6 महीनों में 30 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुआ है। 2 सप्ताह में 12 प्रतिशत चढ़ा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 77.87 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

एमक्योर फार्मा का जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,467.70 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 233.70 करोड़ रुपये था। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 5,243.19 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 732.96 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Crude Oil Price: होर्मुज स्ट्रेट से शिपमेंट फिर से शुरू होने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट क्रू़ड $75 के नीचे फिसला

Crude Oil Price: शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और हफ़्ते में भारी गिरावट की ओर बढ़ रही है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से ज़्यादा फंसे हुए तेल टैंकरों के निकलने के बाद सप्लाई की चिंता कम हो गई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.56% गिरकर $74.84 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.50% गिरकर $71.56 प्रति बैरल पर आ गया।

इस हफ़्ते ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों में लगभग 7% की गिरावट आने वाली है।

पिछले सेशन में, ओमान के पास एक कार्गो जहाज़ के किसी अनजान प्रोजेक्टाइल से टकराने के बाद दोनों बेंचमार्क कॉन्ट्रैक्ट्स में 2% से ज़्यादा की तेज़ी आई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने कहा कि होर्मुज के तय रास्तों के बाहर से गुज़रने वाले जहाजों की सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

होर्मुज स्ट्रेट से ट्रैफिक बढ़ा

डेटा से पता चला है कि सीजफायर डील के बाद वॉटरवे को फिर से खोलने के बाद, इस हफ़्ते होर्मुज स्ट्रेट से क्रूड शिपमेंट फरवरी में US-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अपने सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया। हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को लड़ाई शुरू होने से पहले, स्ट्रेट से रोज़ाना औसतन 125 जहाज़ गुज़रते थे, लेकिन कुल ट्रैफिक बहुत कम रहा।

इस बीच, गुरुवार को वेनेजुएला में आए भूकंप से भी सप्लाई की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि देश के बड़े तेल, गैस और रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अब तक कम नुकसान हुआ है।

इस हफ्ते की शुरुआत में, पर्शियन गल्फ का तेल युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे तेज रफ़्तार से पानी के रास्ते से बाहर निकल रहा था। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक. ने कहा कि उसे लगता है कि गल्फ एक्सपोर्ट अब नॉर्मल लेवल के लगभग दो-तिहाई पर चल रहा है, जबकि ग्लोबल इन्वेंट्री में दिख रही गिरावट की रफ़्तार धीमी हो गई है। फ़ारस की खाड़ी के प्रोड्यूसर तेज़ी से प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं, लेकिन तेल बाहर ले जाने के लिए टैंकर मिलना मुश्किल हो रहा है। कमी की वजह से इराक को अपने एक खास फ़ील्ड में प्रोडक्शन रोकने का ऑर्डर देना पड़ा है। यूनाइटेड अरब अमीरात, कुवैत और क़तर सभी सप्लाई बढ़ा रहे हैं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Passport Fee Hike: 1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा, सरकार ने बढ़ाई फीस; जानिए नए रेट

Passport Fee Hike: अगर आप नया पासपोर्ट बनवाने या पुराना रिन्यू कराने की सोच रहे हैं, तो आपको जेब ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार रहना चाहिए। 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाने के लिए पहले से ज्यादा पैसे देने होंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट नियम, 1980 में बदलाव करते हुए नई फीस तय की है। नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी।

सरकार ने 20 जून को जारी अधिसूचना में बताया कि पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 लागू किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पासपोर्ट नियम, 1980 की Schedule-IV को भी नए शुल्क के साथ बदल दिया गया है।

नए पासपोर्ट के लिए कितनी फीस देनी होगी?

अगर आप 36 पेज वाला नया पासपोर्ट बनवाते हैं या उसे दोबारा जारी (Reissue) कराते हैं, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹2,500 फीस देनी होगी। पहले इसके लिए ₹1,500 लगते थे। अगर आप तत्काल (Tatkaal) सेवा चुनते हैं, तो अब ₹5,000 देने होंगे। पहले इसकी फीस ₹3,500 थी।

अगर आपको 60 पेज वाला पासपोर्ट चाहिए, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹3,500 फीस देनी होगी। पहले इसके लिए ₹2,000 लगते थे। वहीं, तत्काल सेवा के लिए अब ₹6,000 देने होंगे। पहले इसकी फीस ₹4,000 थी।

ये नई फीस बालिगों पर लागू होगी। इसके अलावा 15 से 18 साल के वे नाबालिग भी इसी श्रेणी में आएंगे, जो बालिग कैटेगरी में पासपोर्ट के लिए आवेदन करते हैं।

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खोया या खराब पासपोर्ट बनवाना पड़ेगा महंगा

सबसे ज्यादा बढ़ोतरी खोए या खराब हुए पासपोर्ट के रीप्लेसमेंट की फीस में की गई है।

अगर 36 पेज वाला पासपोर्ट खो जाता है या खराब हो जाता है, तो नया पासपोर्ट बनवाने के लिए सामान्य प्रक्रिया में ₹5,000 और तत्काल सेवा में ₹7,500 देने होंगे।

अगर 60 पेज वाला पासपोर्ट रीप्लेस कराना है, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹6,000 और तत्काल सेवा में ₹8,500 खर्च होंगे। अगर किसी नाबालिग का 36 पेज वाला पासपोर्ट खो जाता है या खराब हो जाता है, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹4,250 और तत्काल सेवा में ₹6,750 फीस देनी होगी।

PCC और दूसरी सेवाओं की फीस भी बदली

पासपोर्ट से जुड़ी दूसरी सेवाएं भी महंगी हो गई हैं। पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC), सरेंडर सर्टिफिकेट, ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन और दूसरे सर्टिफिकेट के लिए अब ₹750 फीस देनी होगी। वहीं, सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी बनवाने के लिए ₹1,000 देने होंगे।

अगर ये सेवाएं विदेश में ली जाती हैं, तो इमरजेंसी सर्टिफिकेट के लिए 15 अमेरिकी डॉलर और सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी के लिए 50 अमेरिकी डॉलर फीस देनी होगी। इन सेवाओं के लिए तत्काल (Tatkaal) सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

इन्हें मिलेगी 10% तक की छूट

सरकार ने एक और राहत भी दी है। 8 साल तक के बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को नया पासपोर्ट बनवाने (फ्रेश आवेदन) पर फीस में 10% की छूट मिलेगी। हालांकि, यह छूट पासपोर्ट दोबारा जारी (री-इश्यू) कराने पर नहीं मिलेगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है। यह एक यात्रा दस्तावेज है। इसका इस्तेमाल विदेश यात्रा करने और विदेश में धारक की पहचान साबित करने के लिए किया जाता है।

पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं

सरकार ने साफ किया है कि सिर्फ फीस बदली है। पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

बालिगों को जारी होने वाला पासपोर्ट पहले की तरह 10 साल तक वैध रहेगा। वहीं, नाबालिगों का पासपोर्ट 5 साल या 18 साल की उम्र पूरी होने तक, जो भी पहले हो, वैध रहेगा।

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Anant Raj Share: नोमुरा ने इस डेटा सेंटर स्टॉक का घटाया टारगेट, अब क्या करें निवेशक?

Anant Raj Share: ब्रोकरेज हाउस Nomura ने रियल एस्टेट और डेटा सेंटर कंपनी Anant Raj पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस को 700 रुपये से घटाकर 650 रुपये कर दिया है। नया टारगेट 25 जून के क्लोजिंग भाव 521.35 के मुकाबले अब भी करीब 25% से संभावित तेजी का संकेत देता है।

आइए जानते हैं कि ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस में कटौती क्यों की है और अब निवेशकों को क्या करना चाहिए।

क्लाउड बिजनेस से कमाई में देरी

Nomura का कहना है कि अनंत राज की नई 1.5 मेगावॉट क्लाउड क्षमता से किराये की कमाई उम्मीद से देर से शुरू होगी। पहले यह आय FY26 के अंत तक आने की उम्मीद थी, लेकिन अब इसके FY27 की दूसरी तिमाही से शुरू होने का अनुमान है। इसकी वजह यह है कि ग्राहकों की टेस्टिंग और हैंडओवर प्रक्रिया में अपेक्षा से ज्यादा समय लग रहा है।

रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट लॉन्च टले

ब्रोकरेज के मुताबिक, अनंत राज का Luxury Group Housing 2 (GH2) प्रोजेक्ट भी तय समय पर लॉन्च नहीं हो पाएगा। पहले इसे FY26 के अंत तक लॉन्च होने की उम्मीद थी। लेकिन अब इसके FY27 की दूसरी तिमाही में लॉन्च होने की संभावना है। कंपनी को लाइसेंस और अन्य मंजूरियां मिल चुकी हैं। RERA की मंजूरी पहली तिमाही के अंत तक मिलने की उम्मीद है।

क्षमता बढ़ाने का अनुमान घटाया

Nomura ने क्लाउड क्षमता बढ़ाने के अपने अनुमान को भी कम कर दिया है। अब ब्रोकरेज हर साल 3 मेगावॉट क्षमता बढ़ने का अनुमान लगा रहा है, जबकि पहले यह अनुमान 4 मेगावॉट का था।

इसके अलावा डेटा सेंटर कारोबार में क्लाउड से आने वाले रेवेन्यू का अनुमान भी घटाकर 10-11% कर दिया गया है। पहले यह 13-14% रहने का अनुमान था। कंपनी मैनेजमेंट 25% क्लाउड हिस्सेदारी का लक्ष्य बता चुका है। इन कारणों से Nomura ने FY27 और FY28 के लिए अपने EPS अनुमान क्रमशः 8% और 10% घटा दिए हैं।

मार्च तिमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?

वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 23.6% बढ़कर 146.6 करोड़ रुपये रहा। वहीं, रेवेन्यू 19.6% बढ़कर 646.8 करोड़ रुपये हो गया।

EBITDA 17.6% बढ़कर 167.4 करोड़ रुपये रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 26.3% से घटकर 25.9% पर आ गया। पूरे FY26 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 21.92% बढ़कर 2,511.60 करोड़ रुपये रहा।

अब क्या करें अनंत राज के निवेशक?

निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात कंपनी के कारोबार की रफ्तार पर नजर रखना है। Nomura ने BUY रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन क्लाउड बिजनेस से कमाई में देरी और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के लॉन्च टलने की वजह से टारगेट प्राइस घटाया है।

ऐसे में जिन निवेशकों के पास पहले से यह शेयर है, वे कंपनी की आने वाली तिमाहियों में प्रोजेक्ट्स की प्रगति और क्लाउड रेवेन्यू पर नजर रखें। वहीं, नए निवेशकों को किसी भी फैसले से पहले अपने जोखिम लेने की क्षमता और निवेश के समय का आकलन जरूर कर लेना चाहिए।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।