भंगार से कला गढ़ रहे हैं सूरत के साकीरभाई, अब अपने हुनर को पहचान दिलाने की कोशिश | Creative Person

भंगार से कला गढ़ रहे हैं सूरत के साकीरभाई, अब अपने हुनर को पहचान दिलाने की कोशिश | Creative Person

बचपन पूरा मजदूरी में बीता…
आज साकीरभाई सूरत के सबसे क्रिएटिव लोगों में गिने जाते हैं।
पिछले 18 सालों से वो भंगार से मिनी व्हीकल्स और अनोखी एंटिक चीज़ें बनाकर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
वो लोगों के लिए ऐसी यूनिक कलाकृतियां बनाते हैं, लेकिन अब उनका सपना है कि उनके इस हुनर को एक अलग पहचान मिले।
अगर आप भी भंगार से ऐसी एंटिक चीज़ें बनवाना चाहते हैं, तो साकीरभाई से 9898256082 पर संपर्क कर सकते हैं।
@shakirbatli

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हर 5 में से 1 फल में होता है Pesticide Residues | Dr Asmita Prabhune ने खोजा समाधान | Sophab

हर 5 में से 1 फल में होता है Pesticide Residues | Dr Asmita Prabhune ने खोजा समाधान | Sophab

क्या आपको लगता है कि आपके फल और सब्ज़ियां पूरी तरह साफ हैं? FSSAI के एक सर्वे में भारतभर में जांचे गए करीब हर 5 में से 1 प्रोड्यूस सैंपल में कीटनाशकों के अवशेष पाए गए।
इसी समस्या को देखते हुए पुणे की वैज्ञानिक डॉ. अस्मिता प्रभुने ने कई सालों की मेहनत के बाद Green Pyramid Biotech के साथ मिलकर Sophab तैयार किया – एक Concentrated Organic Produce Wash
कई Experiments और Testing के बाद, Sophab को 99% तक कीटनाशक, Pathogens और Chemical Residues हटाने के लिए तैयार किया गया है। क्या ये रोज़ाना फल-सब्ज़ियां साफ करने का तरीका आसान बना सकता है?

हर 5 में से 1 फल में होता है Pesticide Residues | Dr Asmita Prabhune ने खोजा समाधान | Sophab

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छोटे कमरे से बड़े मंच की तैयारी करती गाँव की सोनाली | Painter की बेटी Sonali का Dancer बनने का सपना

छोटे कमरे से बड़े मंच की तैयारी करती गाँव की सोनाली | Painter की बेटी Sonali का Dancer बनने का सपना

पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गाँव की सोनाली के पास न कोई बड़ी Dance Academy है, न महंगा कैमरा और न कोई शानदार सेटअप।
पिता एक मामूली पेंटर हैं, माँ ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करती हैं।
घर में आर्थिक तंगी की वजह से सोनाली की पढ़ाई तक छूट गई, लेकिन उनके बचपन का सपना एक बेहतरीन डांसर बनने का आज भी ज़िंदा है।
पुराने फोन से विडियोज बनाकर और यूट्यूब से सीखकर सोनाली रोज़ अपने सपने के थोड़ा और करीब बढ़ रही है।
क्योंकि उन्हें खुद पर यकीन है कि उनकी। मेहनत एक दिन उन्हें उस बड़े मंच तक पहुँचा देगी।

@sonalikt92

छोटे कमरे से बड़े मंच की तैयारी करती गाँव की सोनाली | Painter की बेटी Sonali का Dancer बनने का सपना | West Bengal |

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कौन हैं IIT Bombay के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला? छात्र की मौत के बाद क्यों गई डीन की कुर्सी

शुक्रवार को IIT बॉम्बे के पवई कैंपस में एक छात्र के सुसाइड मामले में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला जांच के दायरे में आ गए हैं, जिस वजह से संस्थान ने उनसे डीन का पद छीन लिया है। बताया जा रहा है कि BTech के इस द्वितीय वर्ष के छात्र की मौत से ठीक पहले हुई घटना के समय डूला ही इंस्ट्रक्टर और परीक्षा के इनविजिलेटर (निरीक्षक) थे।

खबरों के मुताबिक, IIT बॉम्बे ने सोमवार को सूर्यनारायण डूला को डीन के पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई, जब संस्थान ने छात्र की मौत से जुड़ी अपनी पहले की कुछ बातों को वापस ले लिया।

IIT बॉम्बे ने यह भी माना कि जांच पूरी होने से पहले मौत की परिस्थितियों को लेकर कुछ बातें कही गई थीं। संस्थान ने इन दावों के लिए माफी भी मांगी है।

कौन हैं प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला?

LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, डूला पावर सिस्टम और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के रिसर्चर हैं और उन्होंने IIT बॉम्बे में 17 साल से ज्यादा समय बिताया है।

उनका एकेडमिक काम स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, पावर-सिस्टम कंट्रोल और डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी रिसोर्स के इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।

उनकी प्रोफाइल में बताई गई रिसर्च की मौजूदा रुचियों में स्मार्ट ग्रिड और माइक्रोग्रिड, कन्वर्टर टोपोलॉजी और कंट्रोल, पावर सिस्टम के लिए कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल, डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी रिसोर्स का ग्रिड इंटीग्रेशन, और पावर सिस्टम ऑपरेशन और कंट्रोल शामिल हैं।

सूर्यनारायण डूला के प्रोफाइल में बताया गया है कि उनका एकेडमिक बैकग्राउंड पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर सिस्टम्स पर आधारित है।

IIT बॉम्बे में 17 साल

डूला सितंबर 2009 में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर IIT बॉम्बे से जुड़े और मार्च 2015 तक इस पद पर रहे। इसके बाद, मार्च 2015 से जुलाई 2019 तक वे एसोसिएट प्रोफेसर रहे।

उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, जुलाई 2019 से वे IIT बॉम्बे में फुल-टाइम प्रोफेसर हैं।

उन्होंने मार्च 2023 से जुलाई 2026 तक डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के तौर पर भी काम किया। जुलाई 2026 में उन्होंने डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स का पद संभाला। उनकी प्रोफाइल के अनुसार, वे अभी भी इस पद पर हैं।

इस तरह, डूला IIT बॉम्बे में शिक्षण और रिसर्च के साथ-साथ कई अहम प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं।

एकेडमिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड

IIT बॉम्बे में शामिल होने से पहले, डूला ने जनवरी से सितंबर 2009 के बीच ‘पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड’ में पावर-सिस्टम कंसल्टिंग का काम किया।

इससे पहले, उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने अगस्त 2006 से अक्टूबर 2008 के बीच ‘मशीन 2 मशीन’ में आर्किटेक्ट के तौर पर काम किया। उन्होंने 2002-03 में एलुरु के CRR कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में लेक्चरर के तौर पर भी काम किया।

डूला की एकेडमिक क्वालिफिकेशन भी पावर और एनर्जी सिस्टम के क्षेत्र में ही हैं। उन्होंने 2004 से 2006 के बीच IIT दिल्ली से पावर सिस्टम में PhD पूरी की। उससे पहले, उन्होंने 2000 से 2002 के बीच IIT बॉम्बे से एनर्जी सिस्टम्स एंड इंजीनियरिंग में M.Tech किया।

उन्होंने 1996 से 2000 के बीच बीच आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की।

विवाद के केंद्र में क्यों हैं डूला?

डूला इस विवाद के केंद्र में इसलिए आए क्योंकि वे मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कोर्स इंस्ट्रक्टर और इनविजिलेटर (निरीक्षक) थे। ANI की रिपोर्ट के अनुसार, IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम के बयान में कहा गया है कि उन्होंने एक छात्र को बिना इजाजत स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए देखा था।

फैकल्टी फोरम ने बताया कि डूला 18 सितंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक परीक्षा की निगरानी कर रहे फोरम के मुताबिक, उन्होंने जिस घटना को शैक्षणिक नियमों का उल्लंघन बताया, उसे देखने के बाद उन्होंने संस्थान के नियमों के अनुसार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।

इसके बाद फोरम ने डूला का समर्थन करते हुए कहा कि वे संस्थान की सीनेट द्वारा मंजूर शैक्षणिक नीतियों के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे।

बता दें कि IIT बॉम्बे के पहले के बयान में कहा गया था कि छात्र ने कथित तौर पर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया और जवाब पाने के लिए प्रश्न-पत्र को ChatGPT पर अपलोड किया।

बाद में संस्थान ने इस बात के लिए माफी मांगी कि उसने जांच की सही प्रक्रिया से पुष्टि होने से पहले ही ये विवरण सार्वजनिक कर दिए थे।

प्रोफेसर के खिलाफ पुलिस केस दर्ज

वहीं, छात्र के माता-पिता की ओर से उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद यह विवाद बढ़ गया।

इसके बाद डूल्ला को आरोपी बनाते हुए एक FIR दर्ज की गई। आरोपों में यह भी शामिल था कि उन्होंने तीन महीने तक छात्र के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।

फिलहाल, मामले को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। डूल्ला पर लगे आरोप अभी चल रही जांच का हिस्सा हैं और इन्हें अभी तक तथ्य के तौर पर साबित नहीं किया गया है।

बता दें कि यह घटनाक्रम कैंपस में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और संस्थान से जवाबदेही की बढ़ती मांगों के बीच सामने आया। इसके बाद IIT बॉम्बे ने डूल्ला की डीनशिप सस्पेंड कर दी और साथ ही घटनाओं के बारे में अपनी पिछली बात भी वापस ले ली।

यह भी पढ़ें: IIT बॉम्बे के छात्र ने कैंपस में दी जान, परीक्षा के दौरान टीचर ने ChatGPT का यूज करते पकड़ा था

Gorilla Costume में Police बनने का सपना| Gorilla Costume Performer |Piyush Parmar | Indore

Gorilla Costume में Police बनने का सपना| Gorilla Costume Performer |Piyush Parmar | Indore

दिन में मां के साथ लॉन्ड्री का काम, पढ़ाई के लिए लाइब्रेरी और फिर 15 किलो का Gorilla Costume पहनकर शोज़ में perform करना—इंदौर के 20 साल के पीयूष परमार की जिंदगी में जिम्मेदारियों की कोई कमी नहीं है।

पिता के paralysis के बाद घर की जिम्मेदारी पीयूष के कंधों पर आ गई। लेकिन उन्होंने अपने पुलिस में भर्ती होने के सपने को पीछे नहीं छोड़ा। परिवार का खर्च हो या अपनी पढ़ाई, पीयूष हर जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
उनकी कहानी सिर्फ संघर्ष की नहीं, बल्कि उस सोच की है कि कोई काम छोटा नहीं होता और हालात चाहे जैसे हों, अपने सपने के लिए रास्ता निकाला जा सकता है।

@drycleaner_to_dreamer

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Single Father ने सिखाया कि प्यार किसी Gender का मोहताज नहीं | Father raised her daughter alone

Single Father ने सिखाया कि प्यार किसी Gender का मोहताज नहीं | Father raised her daughter alone

“तुम अकेले बेटी नहीं पाल पाओगे”
ये बात विराज़ ने कई बार सुनी।
लेकिन उन्होंने जवाब शब्दों से नहीं दिया।
हर रात कुछ नया सीखा।
हर सुबह एक बेहतर पिता बनने की कोशिश की।
आज उनकी 6 साल की बेटी स्कूल से लौटकर सबसे पहले अपने पापा को ही ढूँढती है, क्योंकि उसके लिए वही उसकी सबसे सुरक्षित जगह हैं।

कुछ कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि प्यार किसी रिश्ते का नाम नहीं, निभाने का नाम है।

क्या आपको लगता है कि Parenting किसी एक Gender की ज़िम्मेदारी है? कमेंट में बताइए।

@v_cube
@elvworld

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न नौकरी की तलाश, न कोई पहचान… फिर CMO को भेजा एक मैसेज और मिल गया ₹17 लाख का ऑफर

कभी-कभी करियर का बड़ा बदलाव किसी नौकरी के आवेदन से नहीं, बल्कि एक छोटे से मैसेज से शुरू होता है। कारोबारी विशाल ठाकुर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्होंने एक कंपनी के CMO को LinkedIn पर बिना किसी जान-पहचान के मैसेज किया, ताकि यह पता चल सके कि बाजार में उनकी स्किल्स की असली कीमत कितनी है। उस समय विशाल नौकरी बदलने की तलाश में भी नहीं थे। लेकिन कुछ ही दिनों में CMO का जवाब आया और बातचीत आगे बढ़ते-बढ़ते इंटरव्यू तक पहुंच गई। इसके बाद जो हुआ, उसने विशाल को भी हैरान कर दिया। उन्हें ऐसी नौकरी का ऑफर मिला, जिसकी सैलरी उनकी मौजूदा कमाई से करीब तीन गुना थी।

नौकरी बदलने का इरादा नहीं था, बस खुद को परखना चाहते थे

यह कहानी 2021 की है। उस वक्त विशाल की सालाना कमाई करीब ₹6 लाख थी। खास बात यह थी कि वह सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश भी नहीं कर रहे थे। उनके मन में बस एक सवाल था क्या उनकी स्किल्स की मार्केट वैल्यू उनकी मौजूदा सैलरी से कहीं ज्यादा हो सकती है? इसी सवाल का जवाब पाने के लिए उन्होंने सामान्य नौकरी तलाशने के बजाय एक अलग रास्ता चुना।

सीधे कंपनी के CMO को भेज दिया मैसेज

विशाल ने एक B2B कंपनी के CMO को LinkedIn पर Cold Message और ईमेल भेजा। मकसद नौकरी मांगना नहीं, बल्कि बातचीत शुरू करना था। कुछ दिनों के भीतर ही उन्हें जवाब मिल गया। इसके बाद बातचीत आगे बढ़ी और मामला कई राउंड के इंटरव्यू तक पहुंच गया। हालांकि, इंटरव्यू का अनुभव विशाल के लिए बिल्कुल आसान नहीं था।

फाइनल इंटरव्यू के बाद लगा था शायद मौका हाथ से गया

अंतिम बातचीत कंपनी के CMO के साथ हुई। विशाल के मुताबिक, इस दौरान कई सवालों के जवाब वह ठीक तरह से नहीं दे पाए। इंटरव्यू खत्म होने के बाद उन्हें खुद भी लगा कि शायद उन्होंने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट अभी बाकी था।

जिस ऑफर की उम्मीद नहीं थी, वही सामने आ गया

इंटरव्यू के बाद कंपनी ने विशाल को ₹17 लाख सालाना के पैकेज का ऑफर दिया। यानी उनकी उस समय की ₹6 लाख सालाना कमाई के मुकाबले करीब तीन गुना। विशाल के लिए यह फैसला चौंकाने वाला था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इंटरव्यू में कुछ सवालों के जवाब न दे पाने के बावजूद कंपनी ने उन्हें क्यों चुना।

CMO ने बताया आखिर उनमें क्या खास दिखा

इस सवाल का जवाब उन्हें बाद में खुद CMO से मिला। कंपनी के अधिकारी ने बताया कि उन्हें विशाल की सीखने की इच्छा, उत्साह और जिज्ञासा प्रभावित कर गई थी। उनका मानना था कि अगर किसी व्यक्ति में सीखने और समस्याओं को हल करने का सही रवैया है, तो वह कुछ महीनों में अपनी जानकारी की कमियों को दूर कर सकता है। यानी इस बार नौकरी सिर्फ इस आधार पर नहीं मिली कि उम्मीदवार पहले से कितना जानता था, बल्कि इस बात पर भी मिली कि वह कितना सीखने को तैयार था।

₹17 लाख का ऑफर मिला, फिर भी नहीं की नौकरी

दिलचस्प बात यह है कि विशाल ने आखिरकार ₹17 लाख का ऑफर स्वीकार नहीं किया। उन्होंने एक दूसरी opportunity चुनी, जिसमें Remote Work और ज्यादा flexibility मिल रही थी। फिर भी यह इंटरव्यू उनके करियर में एक बड़ा मोड़ बन गया।

एक इंटरव्यू ने बदल दी खुद को देखने की नजर

विशाल के मुताबिक, इस अनुभव ने उन्हें यह भरोसा दिया कि वह अपनी कल्पना से कहीं बड़े अवसरों के लिए तैयार हो सकते हैं। इसी आत्मविश्वास ने बाद में उन्हें करियर में बड़े जोखिम लेने के लिए प्रेरित किया। आज वह एक मार्केटिंग एजेंसी और AI स्टार्टअप चला रहे हैं। उनका मानना है कि अगर उस समय CMO ने उनकी क्षमता पर भरोसा नहीं जताया होता, तो शायद आगे की उनकी पेशेवर यात्रा भी अलग होती।

Video: बुरे सपने में बदला कपल का हनीमून, दार्जिलिंग में बारबेक्यू के दौरान हुआ हादसा, बुरी तरह से झुलसी महिला

अंग्रेज़ों को चकमा देकर जापान कैसे पहुंचे रासबिहारी बोस | Rash Behari Bose Escaped the British

अंग्रेज़ों को चकमा देकर जापान कैसे पहुंचे रासबिहारी बोस | Rash Behari Bose Escaped the British

The Revolutionaries में Bhuvan Bam जिस क्रांतिकारी का किरदार निभा रहे हैं, उनकी असली कहानी भी बेहद दिलचस्प है। 🇮🇳
मिलिए रासबिहारी बोस से—उस क्रांतिकारी से, जिन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से पहले आज़ाद हिंद फ़ौज का सपना देखा था।
अंग्रेज़ों को चकमा देकर जापान पहुंचने से लेकर INA की नींव रखने तक, आइए जानते हैं रासबिहारी बोस के उस सफर के बारे में, जिसने भारत की आज़ादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी।

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विसर्जन के बाद कचरे में नहीं, बच्चों की पढ़ाई में काम आया POP |Ganesh Chaturthi | Recycling Ganesha

विसर्जन के बाद कचरे में नहीं, बच्चों की पढ़ाई में काम आया POP |Ganesh Chaturthi |  Recycling Ganesha

गणपति विसर्जन के बाद कचरे में जाने वाली POP की मूर्तियों को रीसायकल कर Malhar और Binish अब उनसे स्टडी टेबल्स और बेंच समेत 12+ तरह के प्रोडक्ट्स बना रहे हैं। अब तक 3,000+ किलो POP से 760 स्टडी टेबल्स बनाई जा चुकी हैं, जिनसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई में मदद मिल रही है। जानिए कैसे एक पर्यावरणीय समस्या को बच्चों की पढ़ाई के लिए एक उपयोगी पहल में बदला जा रहा है।
@kalambemalhar
@binishdesai
@beachpleaseindia
@pushpam.co

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BB Ki Vines से Revolutionaries Show तक | Bhuvan Bam की 11 साल की Journey | Prime Video

BB Ki Vines से Revolutionaries Show तक | Bhuvan Bam की 11 साल की Journey | Prime Video

11 साल पहले एक Phone Camera के सामने खड़े होकर कई किरदार बनाए।
और Revolutionaries Show को लीड करते Bhuvan Bam.
इस 11 साल के सफर के बीच में सिर्फ सफलता नहीं थी, Struggle, Self-doubt, Loss और बार-बार खुद को फिर से शुरू करने की हिम्मत थी।
Bhuvan Bam की कहानी शायद इसलिए खास है क्योंकि जब उन्होंने शुरुआत की थी, उन्हें भी नहीं पता था कि ये सफर उन्हें कहां ले जाएगा।
शायद आपकी शुरुआत भी अभी छोटी हो।
लेकिन कभी-कभी जवाब कोशिश करने के बाद ही मिलता है।
मेहनत करते रहिए।
Risk लेने से मत डरिए।
हो सकता है आज की छोटी शुरुआत ही कल आपकी पूरी कहानी बन जाए।

@bhuvan.bam22

BB Ki Vines से Revolutionaries Show तक | Bhuvan Bam की 11 साल की Journey | Prime Video

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