तानों से Teacher & Creator बनने तक | Rare Facial Condition | Laxmi Chaudhari | Inspiring Story

“इससे शादी कौन करेगा?”

एक सवाल… जो लक्ष्मी ने बचपन से बार-बार सुना। स्कूल ने ठुकराया, लोगों ने घूरा, कई सर्जरी हुईं, लेकिन फिर लक्ष्मी ने खुद को बदलने का नहीं, खुद को अपनाने का फैसला लिया।

आज वही चेहरा लाखों लोगों को सिखा रहा है कि हमारी पहचान हमारी शक्ल नहीं, हमारा हौसला तय करता है।
@laxme.unfiltered

Self Acceptance Story India, Rare Facial Condition, Overcoming Self Doubt

तानों से Teacher & Creator बनने तक | Rare Facial Condition | Laxmi Chaudhari | Inspiring Story |

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14 साल की उम्र में भारत के नाम Boxing में Gold Medal | Yasser Boxer | Asian Under-15 Boxing

14 साल के यासिर ने Boxing में जीता Gold Medal! जम्मू-कश्मीर के इस युवा Boxer ने Asian Under-15 Boxing Championship में भारत का नाम रोशन किया। यासिर की जीत सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि उस हौसले की कहानी है, जिसने मुश्किल हालातों के बावजूद सपनों का पीछा करना नहीं छोड़ा। देश में ऐसे कई युवा खिलाड़ी हैं, जिनमें आगे बढ़ने का हुनर है। जरूरत है उन्हें सही सपोर्ट, बेहतर सुविधाएं और आगे बढ़ने के मौके देने की… ताकि वो अपने खेल को ही अपनी पहचान और भविष्य बना सकें।
आइए, यासिर जैसे खिलाड़ियों की मेहनत को पहचान दें और उनका समर्थन करें, ताकि वो अपने खेल के जरिए अपने सपनों को पूरा कर सकें।
@yassertheboxer

(Yasser , Yasser Boxer, Boxing Champion, Asian Under-15 Boxing Championship, Asian Boxing Championship, Gold Medal, Gold Medalist, Jammu Kashmir Boxer }

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पत्नी ने मुश्किल समय में दिया साथ | 12th Fail Actor Vikrant Massey Love Story | Sheetal Massey

जब विक्रांत मैसी के पास ऑडिशन तक जाने के पैसे नहीं थे, तब शीतल ठाकुर ने सिर्फ़ उनका साथ नहीं दिया… उनके सपनों को भी ज़िंदा रखा।
आज लोग उनकी सफलता देखते हैं, लेकिन हर सफलता के पीछे किसी का अटूट भरोसा भी होता है।
कुछ रिश्ते प्यार से नहीं… संघर्ष में निभाए गए साथ से महान बनते हैं।

@vikrantmassey
@sheetalthakur

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पत्नी ने मुश्किल समय में दिया साथ | 12th Fail Actor Vikrant Massey Love Story | Sheetal Massey | Musafir Cafe

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एक इंजीनियर को मिले 20+ जॉब ऑफर, Adobe से Amazon तक कंपनियों की लगी लाइन! जानें सफलता का राज

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सफलता की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। उन्होंने बताया कि अपने करियर सफर के दौरान उन्हें दुनिया की कई नामी प्रोडक्ट बेस्ड कंपनियों से 20 से ज्यादा जॉब ऑफर मिले। यह उपलब्धि हासिल करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत, सीखने और असफलताओं से आगे बढ़ने का रास्ता चुना। उनकी LinkedIn पोस्ट में सिर्फ ऑफर्स की संख्या नहीं, बल्कि उस संघर्ष और तैयारी की झलक भी दिखाई गई है, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

बड़ी टेक कंपनियों से मिले इन ऑफर्स ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और कई यूजर्स ने उनकी मेहनत की जमकर तारीफ की। आखिर कैसे उन्होंने यह सफलता हासिल की और कौन-कौन सी बड़ी कंपनियों से मिले ऑफर? जानिए पूरी कहानी।

Adobe, Amazon और Tesla जैसी कंपनियों से मिले ऑफर

LinkedIn यूजर निशचय अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में बताया कि जॉब सर्च के दौरान उन्हें कई बड़ी कंपनियों से ऑफर मिले। इनमें Adobe, Tesla, Salesforce, Amazon, JioHotstar, eBay, CRED, Twilio, Autodesk और कई अन्य प्रतिष्ठित कंपनियां शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें एक इंटरनेशनल जॉब ऑफर भी मिला है।

कहा- यह सिर्फ कंपनियों के नाम की कहानी नहीं है

निशचय ने अपनी पोस्ट में साफ किया कि उनका मकसद सिर्फ बड़ी कंपनियों के नाम दिखाना नहीं है, बल्कि उस मेहनत और सफर को साझा करना है, जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया। उन्होंने लिखा कि यह कहानी कंपनी के लोगो की नहीं, बल्कि उस यात्रा की है जिसके पीछे लगातार मेहनत छिपी है।

रातों की मेहनत और कई असफल इंटरव्यू का नतीजा

इंजीनियर ने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कई रातें सीखने में बिताईं। वीकेंड पर भी तैयारी की, कई इंटरव्यू में असफलता मिली और लंबे समय तक कोडिंग व डिबगिंग करते रहे।उन्होंने कहा कि कई बार आत्मविश्वास डगमगाया, लेकिन लगातार सीखने और आगे बढ़ने की आदत ने उन्हें सफलता दिलाई।

परिवार और टीम को दिया सफलता का श्रेय

निशचय ने अपने परिवार, मैनेजर्स, साथियों, रिक्रूटर्स और इंटरव्यू लेने वालों का आभार जताया। उन्होंने अपनी सफलता के लिए भगवान हनुमान का भी धन्यवाद किया और कहा कि हर चुनौती और अवसर ने उन्हें बेहतर इंजीनियर बनने में मदद की।

जॉब तलाशने वालों को दी खास सलाह

उन्होंने नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों को सलाह दी कि वे अपनी शुरुआत की तुलना किसी और की सफलता के अगले पड़ाव से न करें। उनका कहना था कि हर व्यक्ति की अपनी यात्रा होती है। लगातार सीखते रहना, नई चीजें बनाना, आवेदन करते रहना और खुद पर भरोसा रखना जरूरी है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए मजेदार रिएक्शन

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने निशचय की जमकर तारीफ की। कुछ लोगों ने उनकी सफलता को लेकर मजेदार कमेंट भी किए। एक यूजर ने मजाक में लिखा कि वह ऑफर लेटर ऐसे जमा कर रहे हैं जैसे पोकेमॉन कार्ड इकट्ठा किए जाते हैं। वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि वह सफलता की “समस्या” से जूझ रहे हैं। कई लोगों ने उनकी उपलब्धि को प्रेरणादायक बताया और कहा कि ऐसी सफलता हर टेक प्रोफेशनल का सपना होती है।

वायरल पोस्ट ने बढ़ाई चर्चा

निशचय की कहानी LinkedIn से आगे बढ़कर अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच गई। लोगों ने उनकी मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयास को सराहा। कई यूजर्स ने इसे टेक इंडस्ट्री में सफलता पाने वालों के लिए प्रेरणा बताया।

66 लाख रुपये की नौकरी छोड़ने वाली महिला ने खोला राज, बताया क्यों कम वेतन वाली नौकरी लगी बेहतर

कैसे जापान ने बाढ़ को हराया? | Japan Flood Control System | Flood control infrastructure

हर मानसून में भारत के कई शहर पानी में डूब जाते हैं।
लेकिन जापान ने इस समस्या का समाधान ज़मीन के नीचे ढूँढ लिया।
टोक्यो के नीचे बना G-Cans Underground Flood Control System लाखों लोगों को हर साल बाढ़ से बचाता है। सड़कें खुली रहती हैं, ट्रेनें चलती रहती हैं और शहर नहीं रुकता।
क्या भारत के शहरों में भी ऐसा सिस्टम बनना चाहिए?
अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।

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मां का फोन चेक करते ही बेटे के उड़ गए होश, UPI में छिपी इस सेटिंग से बिना पता चले कट रहे थे पैसे

डिजिटल पेमेंट और UPI ने लोगों की जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। बिजली का बिल भरना हो, ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो या किसी को तुरंत पैसे भेजने हों, अब ज्यादातर काम कुछ ही सेकंड में पूरे हो जाते हैं। यही वजह है कि हर उम्र के लोग तेजी से डिजिटल पेमेंट अपनाने लगे हैं। हालांकि, जितनी तेजी से तकनीक हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनी है, उतनी ही तेजी से उससे जुड़े नए जोखिम भी सामने आए हैं। कई बार लोग किसी ऐप या ऑनलाइन सेवा का इस्तेमाल करते समय बिना पूरी जानकारी पढ़े अनुमति दे देते हैं। बाद में यही छोटी-सी लापरवाही लंबे समय तक परेशानी का कारण बन सकती है।

हाल ही में मुंबई के एक शख्स ने सोशल मीडिया पर अपनी मां से जुड़ा एक अनुभव साझा किया, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि डिजिटल दुनिया में सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल करना ही नहीं, बल्कि उसके नियम और शर्तों को समझना भी उतना ही जरूरी है।

फ्री ट्रायल के जाल में फंस रहे हैं लोग

लोकेश ने बताया कि उनकी मां ने कुछ ऐप्स के फ्री ट्रायल लिए थे। ट्रायल शुरू करते समय 0 रुपये भुगतान के साथ AutoPay की अनुमति भी दे दी गई। ट्रायल खत्म होते ही हर महीने अपने-आप पैसे कटने लगे, लेकिन उन्हें इसका एहसास तक नहीं हुआ।

छोटी रकम, बड़ा नुकसान

लोकेश के मुताबिक 79 या 99 रुपये जैसी छोटी रकम अक्सर सैकड़ों UPI ट्रांजैक्शन के बीच नजर ही नहीं आती। यही वजह है कि लोग महीनों तक बिना जाने सब्सक्रिप्शन का भुगतान करते रहते हैं।

‘असल प्रोडक्ट फ्री ट्रायल नहीं, AutoPay है’

LinkedIn पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि कई कंपनियों का असली मकसद फ्री ट्रायल देना नहीं, बल्कि AutoPay की मंजूरी हासिल करना होता है। एक बार अनुमति मिल जाए तो हर महीने भुगतान अपने-आप कटता रहता है।

डिजिटल साक्षरता का बदला मतलब

लोकेश ने कहा कि पहले ऑनलाइन गलत चीज खरीदने का डर होता था, लेकिन अब सबसे बड़ा खतरा बिना समझे किसी शर्त से सहमति देना है। AutoPay, ऐप परमिशन, लोकेशन एक्सेस और रिकरिंग सब्सक्रिप्शन जैसे फैसले कुछ सेकंड में होते हैं, लेकिन उनका असर लंबे समय तक रहता है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने साझा किए अपने अनुभव

इस पोस्ट पर कई लोगों ने माना कि पेमेंट पेज पर अक्सर One-Time Payment का विकल्प नहीं मिलता और AutoPay अपने-आप चुन लिया जाता है। कुछ यूजर्स ने बताया कि जब तक अगली किस्त नहीं कटती, तब तक उन्हें सब्सक्रिप्शन का पता ही नहीं चलता। इसके बाद वो सोचते हैं कि अब एक महीना और इस्तेमाल कर लेते हैं और फिर इसे रद्द करना भूल जाते हैं।

सीख क्या है?

डिजिटल दुनिया में सिर्फ UPI चलाना सीखना काफी नहीं है। किसी भी फ्री ट्रायल, AutoPay Mandate या ऐप परमिशन को स्वीकार करने से पहले उसकी शर्तों को ध्यान से पढ़ना और समय-समय पर एक्टिव सब्सक्रिप्शन की जांच करना भी उतना ही जरूरी है।

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वह बाघिन जिसने 3 राज्यों के जंगल पार कर बदल दी भारत के वन्यजीव संरक्षण की कहानी | Tigress Zeenat

भारत में हजारों बाघ हैं, लेकिन कुछ बाघ अपनी अनोखी यात्रा की वजह से इतिहास में दर्ज हो जाते हैं। Tigress Zeenat ऐसी ही एक बाघिन है।
उसकी कहानी सिर्फ एक जंगल से दूसरे जंगल में जाने की नहीं है। यह कहानी है एक जंगली जानवर की हिम्मत, उसकी आज़ादी की चाह और इंसानों द्वारा प्रकृति को समझने की कोशिश की।
आखिरकार ज़ीनत ने 4 शावकों को जन्म देकर ना केवल बाघों की आबादी बढ़ाई, बल्कि सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में Genetic Diversity लाकर आने वाली पीढ़ियों को मज़बूत और स्वस्थ बना दिया। 

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लद्दाख के हीरो- बचाईं कंबल और जाल से 47 Snow Leopards की जान | Khenrab Phuntsog | Ladakh

बर्फ से ढके पहाड़ों में रहने वाला Snow Leopard सिर्फ एक खूबसूरत जानवर नहीं, बल्कि पूरे हिमालय के संतुलन के लिए बहुत ज़रूरी है। लेकिन Climate Change, कम होते प्राकृतिक आवास और इंसानों के साथ बढ़ते टकराव की वजह से आज इनका अस्तित्व खतरे में है।
ऐसे समय में खेनरब फुंत्सोग जैसे लोग हमें याद दिलाते हैं कि प्रकृति की रक्षा सिर्फ जंगलों में नहीं, बल्कि हमारी सोच से भी शुरू होती है। एक व्यक्ति का समर्पण कई बार उन ज़िंदगियों को बचा लेता है, जिनकी आवाज़ हम तक कभी पहुंच ही नहीं पाती।
अगर हम इंसान और वन्यजीव साथ मिलकर जीना सीख जाएं, तो आने वाली पीढ़ियां भी हिमालय की वादियों में Snow Leopard की दहाड़ सुन सकेंगी।

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NTA Young Professional Vacancy 2026: एनटीए ने 16 युवा पेशेवरों के पदों पर शुरू की भर्ती, यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए करें आवेदन

NTA Young Professional Vacancy 2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने युवा पेशवरों (यंग प्रोफेशनल YP) की भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। एजेंसी ने आधिकारिक वेबसाइट पर इस भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए 16 यंग प्रोफेशनल (YP) के पद भरे जाएंगे। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

एजेंसी के अपनी परीक्षा और शोध गतिविधियों में विस्तार के बीच इस भर्ती का मकसद शैक्षिक, कानूनी और वित्तीय मामलों में एजेंसी की स्थिति मजबूत करना है। ऑफिशियल नोटिफिकेशन के मुताबिक, ये पद तीन स्ट्रीम में उपलब्ध हैं। एकेडमिक रिसर्च में 12 पद, लीगल रिसर्च में 2 पद, और फाइनेंस और अकाउंट्स रिसर्च में 2 पद हैं। चयनित उम्मीदवार दिल्ली में एनटीए मुख्यालय में काम करेंगे। आधिकारिक काम के आधार पर कभी-कभी भारत के अंदर ट्रैवल भी करना पड़ सकता है। एजेंसी के साथ युवा पेशेवरों का जुड़ाव शुरू में 24 महीने के लिए होगा और प्रदर्शन और ऑर्गेनाइजेशनल जरूरतों के आधार पर इसे 12 महीने और बढ़ाया जा सकता है।

वैकेंसी डिटेल्स

स्ट्रीम पोस्ट की संख्या

एकेडमिक रिसर्च 12

लीगल रिसर्च 2

फाइनेंस और अकाउंट्स रिसर्च 2

कुल 16

आवेदन के लिए जरूरी योग्यता

सिर्फ यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल पर पंजीकृत उम्मीदवारों के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

एकेडमिक रिसर्च

  • कैंडिडेट्स को सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होना चाहिए और प्रतिभा सेतु पोर्टल पर लिस्टेड होना चाहिए।
  • बेहतर होगा कि उनके पास संबंधित विषय में पोस्टग्रेजुएट डिग्री हो।
  • जिन कैंडिडेट्स के पास डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PhD) डिग्री या रिसर्च और टीचिंग का अनुभव है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।

लीगल रिसर्च

  • कैंडिडेट्स के पास सिविल सेवा परीक्षा में वैकल्पिक विषया के तौर पर लॉ होना चाहिए।
  • किसी मान्यता प्रापत विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ लॉज (LLM) डिग्री होनी चाहिए।
  • लीगल रिसर्च या लिटिगेशन में अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

फाइनेंस और अकाउंट्स रिसर्च

  • भर्ती प्रक्रिया में शामिल उम्मीदवारों को सीएसई में शामिल होना और प्रतिभा सेतु पोर्टल पर होना जरूरी है।
  • कॉमर्स, इकोनॉमिक्स, फाइनेंस या इससे जुड़े सब्जेक्ट में पोस्टग्रेजुएट डिग्री हो, या चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (CMA) या कंपनी सेक्रेटरी (CS) जैसी प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन हो।
  • फाइनेंस, बजटिंग या ऑडिटिंग में अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

कैंडिडेट्स की उम्र भी यूपीएससी प्रतिभा सेतु स्कीम के तहत तय उम्र सीमा के अंदर होनी चाहिए।

सैलरी और कार्यकाल

चयनित उम्मीदवारों को ₹80,000 का फिक्स्ड मंथली सैलरी। शुरुआती कॉन्ट्रैक्ट 24 महीने का होगा, जिसे परफॉर्मेंस के आधार पर 36 महीने तक बढ़ाया जा सकता है। साल में प्रो-राटा बेसिस पर आठ दिन की छुट्टी। दिल्ली में एनटीए ऑफिस में फुल-टाइम, पांच दिन का वर्क वीक। नोटिफिकेशन में यह साफ किया गया है कि यह एंगेजमेंट पूरी तरह से कॉन्ट्रैक्ट पर है और सरकार या एनटीए में स्थायी नियुक्ति की गारंटी नहीं देता है।

चयन प्रक्रिया

एलिजिबल कैंडिडेट्स को उनकी प्रोफाइल और रिलेवेंट स्ट्रीम के आधार पर शॉर्टलिस्ट करना।

एक इंटरव्यू, जो पर्सनली या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो सकता है।

अगर जरूरी हो, तो एनटीए अंतिम चयन से पहले एक लिखित परीक्षा या टास्क-बेस्ड असेसमेंट भी कर सकता है।

एनटीए ने यह भी कहा है कि सिर्फ एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया पूरा करने से शॉर्टलिस्टिंग या चयन की गारंटी नहीं मिलती है। एजेंसी बिना कोई कारण बताए वैकेंसी की संख्या बदलने या किसी भी पोस्ट को न भरने का अधिकार रखती है।

देश में नौकरी देने में ये 10 नॉन-मेट्रो शहर सबसे आगे, LinkedIn की लिस्ट में शामिल हैं ये टॉप पर

UP Highway News: कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी, अब 3.5 घंटे का सफर 1.5 घंटे में होगा पूरा, लोगों को जाम से मिलेगी राहत

UP Highway News: उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी को मजबूती देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के कानपुर-कबराई खंड पर ₹7,145.14 करोड़ की लागत से 4/6 लेन वाले नए ‘एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे’ के निर्माण को मंजूरी दे दी है।

यह निर्णय न केवल यूपी के औद्योगिक क्षेत्रों को बढ़ावा देगा, बल्कि बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के साथ व्यापारिक व आर्थिक रिश्तों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

परियोजना की मुख्य बातें:

  • लागत और मॉडल: इस प्रोजेक्ट की कुल पूंजीगत लागत ₹7,145.14 करोड़ है और इसका निर्माण बीओटी (टोल) मोड पर किया जाएगा।
  • भविष्य के अनुकूल: यह शुरुआती तौर पर 4-लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर होगा, जिसे भविष्य में 6 लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान रखा गया है।
  • सफर के समय में 58% की भारी कटौती: कानपुर और कबराई (महोबा) के बीच यात्रा का समय वर्तमान 3.5 घंटे से घटकर मात्र 1.5 घंटे रह जाएगा।
  • डिजाइन स्पीड: यह हाईवे 80 से 100 किमी/घंटे की परिचालन गति के लिए डिजाइन किया गया है।
  • भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: यह नया हाईवे भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारे का एक अहम हिस्सा है। यह मध्य प्रदेश के सागर, भोपाल को यूपी के कानपुर से सीधे जोड़ेगा।

किन्हें मिलेगा सीधा लाभ?

  1. यूपी के जिले: कानपुर, हमीरपुर और आकांक्षी जिले महोबा को इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा लाभ मिलेगा।
  2. पीएम गति शक्ति से जुड़ाव: यह परियोजना पीएम गति शक्ति मिशन के तहत 4 आर्थिक केंद्रों और 10 लॉजिस्टिक्स केंद्रों को आपस में जोड़ेगी।
  3. औद्योगिक और कृषि गलियारा: यूपी के औद्योगिक/लॉजिस्टिक्स हब को मध्य प्रदेश के खनिज-समृद्ध और कृषि क्षेत्रों से जोड़कर व्यापार को सुगम बनाएगा।

रोजगार और सुरक्षा:

  • रोजगार सृजन: निर्माण के दौरान प्रति लेन प्रति किलोमीटर लगभग 11.18 प्रत्यक्ष और 11,985 अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
  • सड़क सुरक्षा और ईंधन बचत: सुचारू आवाजाही से वाहन परिचालन लागत कम होगी और यात्रा अधिक सुरक्षित एवं ईंधन-बचत वाली बनेगी।

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