नौकरी छोड़े महीनों बीते, लेकिन अटका रहा वेतन; कोलकाता प्रोफेशनल ने साझा किया दर्द

कोलकाता के एक प्रोफेशनल की LinkedIn पोस्ट ने इन दिनों नौकरी, वेतन भुगतान और कर्मचारी अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पूर्व कर्मचारी ने दावा किया है कि संगठन छोड़ने के लगभग एक साल बाद भी उसकी करीब ₹10,000 की बकाया सैलरी का भुगतान नहीं किया गया। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक छोटी रकम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सम्मान और भरोसे से जुड़ा है, जिसकी उम्मीद हर कर्मचारी अपने काम के बदले करता है। पोस्ट में उन्होंने बताया कि कई बार संपर्क करने और इंतजार करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

इसके बाद उन्होंने अपनी बात सार्वजनिक रूप से साझा करने का फैसला किया। इस मामले ने सोशल मीडिया पर कर्मचारियों के अधिकारों, कंपनियों की जिम्मेदारी और बेहतर वर्क कल्चर को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

अक्टूबर 2025 में छोड़ी थी नौकरी

पूर्व कर्मचारी के मुताबिक, उसने Go Future Digital Team में अप्रैल 2025 से अक्टूबर 2025 तक काम किया था। उसने 13 अक्टूबर 2025 को इस्तीफा दिया और 15 अक्टूबर उसका आखिरी कार्यदिवस था। उसका दावा है कि अक्टूबर के बाकी दिनों की सैलरी को लेकर उसने ज्यादा उम्मीद नहीं रखी, लेकिन करीब ₹10,000 की राशि अब तक लंबित है।

बार-बार संपर्क के बावजूद नहीं हुआ भुगतान

LinkedIn पोस्ट में कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसने कंपनी के मालिक Ayon Chatterjjee से कई बार संपर्क कर बकाया राशि का भुगतान करने की कोशिश की। उसके अनुसार, हर बार उसे कुछ और समय इंतजार करने को कहा गया और जल्द भुगतान का भरोसा दिलाया गया, लेकिन रकम कभी जारी नहीं हुई।

एक हफ्ते चुप रहो, पेमेंट हो जाएगा’ वाले मैसेज का दावा

कर्मचारी ने अपनी पोस्ट के साथ कुछ बातचीत के स्क्रीनशॉट भी साझा किए, जिनमें उसने कंपनी प्रतिनिधि के साथ भुगतान को लेकर हुई बातचीत का दावा किया। एक स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर जवाब दिया गया कि सात दिन तक कॉल और मैसेज न करने पर भुगतान कर दिया जाएगा। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पब्लिक पोस्ट करने की बताई वजह

पूर्व कर्मचारी ने कहा कि शुरुआत के करियर में ऐसा अनुभव काफी निराशाजनक रहा। उसने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अन्य नौकरी तलाशने वालों को सतर्क करना है। उसने कर्मचारियों को सलाह दी कि वे जॉइन करने से पहले कंपनी की भुगतान व्यवस्था समझें और सभी जरूरी दस्तावेज व रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

सोशल मीडिया पर लोगों ने जताया समर्थन

पोस्ट वायरल होने के बाद कई LinkedIn यूजर्स ने कर्मचारी के समर्थन में प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने कहा कि किसी भी कर्मचारी की मेहनत की कमाई समय पर मिलनी चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स ने अपने अनुभव भी साझा किए और दावा किया कि उन्हें भी वेतन भुगतान से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

वर्क कल्चर और कर्मचारियों के अधिकारों पर फिर चर्चा

इस मामले ने एक बार फिर नौकरी की दुनिया में वेतन भुगतान, कर्मचारियों के सम्मान और कंपनियों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है। हालांकि, LinkedIn पोस्ट में किए गए आरोपों और कमेंट्स की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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45 बार Egg Donation भारत का सबसे बड़ा IVF Scam | 45 Egg Donations | One Shocking IVF Scam

मजबूर महिलाओं की बेबसी को धंधा बनाने वाले एक अवैध Egg Donation रैकेट का आखिरकार पर्दाफाश हो गया।
फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे महिलाओं से बार-बार Egg Donation करवाया जाता था। एक महिला से तो 45 बार Eggs Donate करवाए गए।
लेकिन कुछ बहादुर पुलिस अधिकारियों की सतर्कता ने इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया और कई महिलाओं को शोषण से बचा लिया।
इंसाफ तभी ज़िंदा रहता है, जब कोई अन्याय के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत करता है।

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Zomato पर महिला कर्मचारी के गंभीर आरोप, वायरल पोस्ट ने कंपनी के वर्क कल्चर पर उठाए सवाल

एक पूर्व कर्मचारी की LinkedIn पोस्ट ने Zomato से जुड़े एक मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज कर दी है। महिला ने अपनी पोस्ट में कंपनी में काम करने के दौरान कथित मानसिक दबाव और अनुचित व्यवहार का सामना करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि नौकरी शुरू करने के बाद उनकी परेशानियां बढ़ती गईं और शिकायत करने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली। महिला के अनुसार, उन्होंने अपनी बात कंपनी के आंतरिक शिकायत तंत्र और अधिकारियों तक पहुंचाई, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका। उनकी पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा, शिकायतों के समाधान और पारदर्शी जांच की जरूरत पर सवाल उठाए।

महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। खबर लिखे जाने तक Zomato की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

स्वास्थ्य बिगड़ा, फिर भी नहीं मिली राहत!

महिला के अनुसार, उन्होंने अप्रैल 2026 में कंपनी जॉइन की थी। कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर हाई ब्लड प्रेशर (210/119) होने की जानकारी दी। उन्होंने कुछ समय के लिए घर से काम (Work From Home) की अनुमति मांगी, लेकिन दावा है कि उनकी यह मांग स्वीकार नहीं की गई। उन्होंने बताया कि नौकरी जारी रखने के लिए उन्हें अपने खर्च पर ऑफिस के पास घर बदलना पड़ा।

टीम लीड पर लगाए मानसिक उत्पीड़न के आरोप

पूर्व कर्मचारी का कहना है कि उन्हें अपने टीम लीड की ओर से लगातार मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस बारे में कंपनी के अंदर शिकायत भी की, जिसके बाद स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें सुबह की शिफ्ट दी गई। हालांकि, उनका आरोप है कि इसके बाद भी उनके साथ अलग व्यवहार किया गया और बार-बार छुट्टी लेने के लिए कहा जाता रहा।

शिकायत के बाद नौकरी चली गई?

महिला ने आरोप लगाया कि 29 जून 2026 को उन्होंने अपनी मां की तबीयत खराब होने के कारण वर्क फ्रॉम होम की मांग की थी, लेकिन अनुमति नहीं मिली। उसी दिन उन्होंने अपने टीम लीड पर अनुचित शारीरिक व्यवहार का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई।

उनका दावा है कि शिकायत के तुरंत बाद उन्हें मीटिंग में बुलाकर नौकरी से निकालने की जानकारी दे दी गई। कुछ ही मिनटों में उनका लैपटॉप, ईमेल और स्लैक एक्सेस बंद कर दिया गया और बिना किसी औपचारिक दस्तावेज के ऑफिस छोड़ने को कहा गया।

न्याय चाहिए, सहानुभूति नहीं

महिला ने कहा कि उन्होंने कंपनी के Speak Up सिस्टम, HR और वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचाई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका यह भी आरोप है कि उन्हें अब तक रिलीविंग लेटर और एक्सपीरियंस लेटर नहीं दिया गया, जिससे नई नौकरी पाने में परेशानी हो रही है। उन्होंने लिखा कि उनका परिवार आर्थिक रूप से उन पर निर्भर है और उन्हें सिर्फ निष्पक्ष जांच, सम्मान और न्याय चाहिए। उनका दावा है कि उनके पास अपने आरोपों से जुड़े दस्तावेज और बातचीत के रिकॉर्ड भी मौजूद हैं।

सोशल मीडिया पर उठे कई सवाल

LinkedIn पर पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने महिला के समर्थन में टिप्पणियां कीं। कुछ लोगों ने वर्क फ्रॉम ऑफिस नीति पर सवाल उठाए, तो कई ने कहा कि कर्मचारियों की शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था अधिक पारदर्शी होनी चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स ने रोजगार से जुड़े दस्तावेज समय पर जारी न किए जाने को भी गंभीर मुद्दा बताया।

कंपनी की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं

खबर लिखे जाने तक Zomato की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। फिलहाल महिला के सभी आरोप दावे हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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100 रुपये लेने से मना किया, Blinkit राइडर ने जो कहा उसे सुन MBA मैनेजर भी रह गईं दंग

कभी-कभी जिंदगी की बड़ी सीख किसी खास मौके या बड़ी जगह से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी घटनाओं से मिलती है। ऐसा ही एक अनुभव एक प्रोडक्ट मैनेजर के साथ हुआ, जब एक Blinkit डिलीवरी पार्टनर की सोच ने उन्हें हैरान कर दिया। एक सामान्य-सी डिलीवरी के दौरान हुई बातचीत ने मेहनत, जिम्मेदारी और सफलता को देखने का नजरिया बदल दिया। इस घटना ने यह दिखाया कि काम में बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है।

जहां कॉर्पोरेट दुनिया में अप्रेजल और लक्ष्य अहम माने जाते हैं, वहीं एक डिलीवरी पार्टनर ने अपनी रेटिंग को ही अपनी मेहनत का पैमाना बना लिया। उनकी बातों ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा और कई यूजर्स को सोचने पर मजबूर कर दिया कि असली प्रोफेशनलिज्म आखिर होता क्या है।

गलत पते पर पहुंचा ऑर्डर, फिर भी नहीं बदला रवैया

यह कहानी प्रोडक्ट मैनेजर मानसी शर्मा ने LinkedIn पर शेयर की। उन्होंने बताया कि एक दिन Blinkit से सामान मंगाते समय गलती से पुराना सेव किया हुआ पता चुन लिया। डिलीवरी पार्टनर ने कॉल कर बताया कि दिए गए पते पर कोई गेट नहीं खोल रहा है। गलती का पता चलने पर मानसी ने माफी मांगी और पूछा कि क्या डिलीवरी पार्टनर उनका सही पता ढूंढकर वहां सामान पहुंचा सकता है। नया पता करीब 3 किलोमीटर दूर था।

जब डिलीवरी बॉय ने दिखाई ‘एक्स्ट्रा माइल’ वाली सोच

आम तौर पर ऐसी स्थिति में कोई भी डिलीवरी रोक सकता था या नया ऑर्डर करने को कह सकता था। लेकिन इस डिलीवरी पार्टनर ने बिना किसी शिकायत के हां कर दी। वह 3 किलोमीटर दूर गया, सामान पहुंचाया और चेहरे पर मुस्कान के साथ डिलीवरी पूरी की।

100 रुपये का ऑफर भी ठुकराया

मानसी को लगा कि डिलीवरी पार्टनर को हुई परेशानी के लिए कुछ अतिरिक्त देना चाहिए। उन्होंने उसे 100 रुपये देने चाहे, लेकिन उसने विनम्रता से पैसे वापस कर दिए। इसके बाद उसने जो बात कही, उसने पूरी कहानी का नजरिया बदल दिया।

रेटिंग ही मेरी अप्रेजल है’

डिलीवरी पार्टनर ने कहा, “पिछले महीने मेरी रेटिंग 4.2 थी। जब मैं एक्स्ट्रा माइल जाता हूं तो यह 4.8 हो जाती है। यही मेरी अप्रेजल है।” उसकी यह सोच बताती है कि वह सिर्फ एक ऑर्डर पूरा नहीं कर रहा था, बल्कि अपनी रोज की मेहनत से अपने प्रदर्शन रिकॉर्ड को बेहतर बना रहा था।

MBA से ज्यादा असरदार निकली उसकी सोच

मानसी ने कहा कि उनके पास MBA की डिग्री है, लेकिन उस डिलीवरी पार्टनर ने परफॉर्मेंस और मोटिवेशन को जिस तरह समझा, वह कई मैनेजर्स के लिए भी सीखने वाली बात है। जहां कॉर्पोरेट कर्मचारियों की परफॉर्मेंस साल में एक-दो बार मापी जाती है, वहीं गिग वर्कर्स को हर ऑर्डर के साथ अपनी रेटिंग सुधारने का मौका मिलता है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा ‘यही असली मैनेजमेंट है’

मानसी की पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने डिलीवरी पार्टनर की सोच और काम के प्रति लगन की तारीफ की। लोगों ने कहा कि बिना बड़ी डिग्री के भी कई लोग जिंदगी और काम की ऐसी समझ रखते हैं, जो किताबों से नहीं मिलती।

एक यूजर ने लिखा, “कुछ लोग डिग्री से ज्यादा बड़ी सीख दे जाते हैं।” वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि असली मोटिवेशन अक्सर टाइटल से नहीं, बल्कि उस चीज से आता है जो किसी व्यक्ति के भविष्य को प्रभावित करती है।

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रात में Security Guard, दिन में MMA Fighter | Vicky Singh Tomkyal | MMA Fighter India

सपने पूरे करने के लिए हमेशा बड़ी सुविधाओं की ज़रूरत नहीं होती… कभी-कभी एक तकिया, एक गैस सिलेंडर और हार न मानने की जिद ही काफी होती है।
उत्तराखंड के मुनस्यारी के रहने वाले विक्की सिंह टॉमक्याल दिन में MMA फाइटर बनने के लिए कड़ी ट्रेनिंग करते हैं और रात में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करके अपनी डाइट और ट्रेनिंग का खर्च खुद उठाते हैं। उनका एक ही लक्ष्य है—भारत के लिए मेडल जीतना।
आज पूरे देश से लोग उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। 18 जुलाई को उनका अगला मुकाबला है।
कमेंट में विक्की को “All The Best” ज़रूर लिखिए।

@vicky_singh_tomkyal

Vicky Singh Tomkyal MMA Fighter, Indian Athlete Struggle, Boxing to MMA Journey

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The Better India की कहानी का असर, 8 राज्यों से बच्चों के लिए पहुँची मदद | Delhi | Road Side School

की सड़क किनारे रहने वाले बच्चों को मुफ़्त में पढ़ाने वाले कृष्णा सर अपनी नौकरी के साथ हर दिन 50 से ज़्यादा बच्चों को पढ़ाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। जब हमने उनकी प्रेरणादायक कहानी The Better India पर साझा की, तो वह सिर्फ एक कहानी बनकर नहीं रह गई—वह बदलाव की शुरुआत बन गई।
इस कहानी का असर देशभर में देखने को मिला। 8 राज्यों से लोगों ने आगे आकर मदद की। बच्चों के लिए राशन, स्टेशनरी, ज़रूरी सामान और पोर्टेबल (फोल्डिंग) टॉयलेट उपलब्ध कराए गए, ताकि सड़क किनारे रहने वाले इन बच्चों को पढ़ाई के साथ सम्मानजनक सुविधाएं भी मिल सकें।
यही एक कहानी की ताकत है। जब सही कहानी सही लोगों तक पहुंचती है, तो वह सिर्फ प्रेरित नहीं करती, बल्कि ज़िंदगियां बदल देती है। कृष्णा सर जैसे लोग उम्मीद जगाते हैं, और आप जैसे लोगों का साथ उस उम्मीद को हकीकत में बदल देता है। :heart:
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जगन्नाथ के रथ बदल रहे हैं बच्चों की ज़िंदगी|Young Artist Is Funding Education Through Jagannath Rath

ओडिशा के 20 वर्षीय सुमित कुमार दास आर्ट कॉलेज में पढ़ाई के साथ भगवान जगन्नाथ के रथ बनाते हैं। वह गरीब बच्चों को मुफ्त में रथ बनाना सिखाते हैं और रथ बेचकर होने वाले मुनाफे का एक हिस्सा भी उन्हें देते हैं, ताकि वे ट्यूशन फीस भर सकें, किताबें खरीद सकें और अपने परिवार की मदद कर सकें।
आज उनके हाथों से बने रथ देश के कई शहरों तक पहुंचते हैं और उनकी कमाई कई बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रही है।
सुमित ने साबित कर दिया कि सबसे खूबसूरत सफलता वही है, जो अपने साथ-साथ दूसरों का भविष्य भी संवार दे। :heart:

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इस IAS ने हज़ारों लीटर मिलावटी दूध नालियों में बहा दिया | IAS Tukaram Mundhe | Milk Adulteration

महाराष्ट्र में जाँच के दौरान 79% दूध के सैंपल शुद्धता की परीक्षा में फेल हो गए थे। इसके बाद IAS तुकाराम मुंढे ने दूध माफिया के खिलाफ़ बड़ी कार्रवाई शुरू की। सिर्फ़ 30 दिनों में सैकड़ों छापे, FIR और गिरफ्तारियां हुईं। एक ईमानदार अफसर ने जनता की सेहत को प्राथमिकता देते हुए मिलावट के खिलाफ़ सख्त कदम उठाए।

अगर हर राज्य में ऐसी कार्रवाई हो
तो क्या मिलावट पर लगाम लग सकती है?
अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।

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AI के दौर में नौकरी गई तो क्या करें? 15 दिन में नई जॉब पाने वाले इंजीनियर ने बताए टिप्स

AI के बढ़ते प्रभाव और कंपनियों में लगातार हो रही छंटनी ने नौकरीपेशा लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर टेक सेक्टर में बदलते हालात के बीच कर्मचारियों के लिए हर दिन नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में एक भारतीय टेक प्रोफेशनल की कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर खूब चर्चा बटोर रही है। नौकरी जाने के बाद जहां कई लोग लंबे समय तक नए अवसर की तलाश में संघर्ष करते हैं, वहीं इस शख्स ने मुश्किल वक्त में हार मानने के बजाय तेजी से कदम उठाए। उसने अपने अनुभव, नेटवर्क और लगातार कोशिशों के दम पर कुछ ही दिनों में नई नौकरी हासिल कर ली।

उसकी पोस्ट अब हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। कई यूजर्स इसे मौजूदा जॉब मार्केट की सच्चाई और सही रणनीति का उदाहरण बता रहे हैं। यह कहानी बताती है कि बदलते दौर में सिर्फ स्किल्स ही नहीं, बल्कि नेटवर्किंग, तैयारी और धैर्य भी सफलता की बड़ी कुंजी बन चुके हैं।

घबराने के बजाय अपनाई नई रणनीति

नौकरी जाने के बाद उसने समय बर्बाद नहीं किया और तुरंत नए अवसरों की तलाश शुरू कर दी। उसने LinkedIn पर रिक्रूटर्स से संपर्क किया, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा उसे अपने नेटवर्क और दोस्तों से मिला। उसने अपने परिचितों से अलग-अलग कंपनियों में रेफरल दिलाने के लिए मदद मांगी।

15 दिनों में बदली तस्वीर, मिले कई ऑफर

लगातार कोशिशों का नतीजा यह रहा कि उसे पांच कंपनियों में इंटरव्यू के मौके मिले। इनमें से दो कंपनियों ने मना कर दिया, लेकिन तीन कंपनियों ने उसे जॉब ऑफर दे दिए। आखिरकार उसने नोएडा की एक HCM डोमेन वाली प्रोडक्ट कंपनी का ऑफर स्वीकार किया और पुणे की दो स्टार्टअप कंपनियों के प्रस्ताव ठुकरा दिए।

लेऑफ के बावजूद नहीं मिला सेवरेंस

टेक प्रोफेशनल ने बताया कि पुरानी कंपनी ने उसे 31 जुलाई तक पेरोल पर रखा था, लेकिन प्रोबेशन पीरियड में होने के कारण उसे सेवरेंस पैकेज नहीं मिला। इसके बावजूद उसने इस मुश्किल दौर को हार मानने की बजाय नई शुरुआत का मौका बनाया।

नौकरी मिल गई, लेकिन तैयारी नहीं रुकेगी

अपने अनुभव से सीख लेते हुए उसने अन्य प्रोफेशनल्स को सलाह दी कि नौकरी मिलने के बाद भी तैयारी बंद नहीं करनी चाहिए। उसका कहना है कि मौजूदा जॉब मार्केट काफी चुनौतीपूर्ण है और भविष्य में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है। इसलिए वह नई नौकरी मिलने के बाद भी DSA और सिस्टम डिजाइन जैसी स्किल्स पर काम जारी रखेगा।

Reddit पर लोगों ने की हिम्मत की तारीफ

इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने उसकी मेहनत और सही समय पर नेटवर्किंग करने की रणनीति की सराहना की। कुछ लोगों ने कहा कि लेऑफ के बाद जल्दी नौकरी मिलना आत्मविश्वास बढ़ाता है, वहीं कई यूजर्स ने इसे आज के अनिश्चित जॉब मार्केट में तैयारी की जरूरत का उदाहरण बताया।

सावन की फुहार और चूड़ियों की खनक, इन हरी डिजाइनर चूड़ियों के साथ सजाएं अपने हाथों की खूबसूरती!

20 साल से बचा रहे हैं सांपों की जान | Arshad Khan | Snake whisperer | Wildlife rescuer

भारत में 350+ Snake Species पाई जाती हैं, लेकिन डर की वजह से ज़्यादातर सांपों को मार दिया जाता है।

इसी सोच को बदलने का काम पिछले 20 सालों से कर रहे हैं अरशद खान

8वीं क्लास से शुरू हुआ उनका सफर आज उन्हें उत्तराखंड Forest Department के सबसे अनुभवी Snake Rescuers में शामिल करता है। अब तक वे 10,000+ कोबरा, हजारों दूसरे सांपों के साथ 75+ भालू , 30+ तेंदुए और कई अन्य वन्यजीवों का Rescue कर चुके हैं।

यह कहानी सिर्फ एक Snake Rescuer की नहीं, बल्कि इंसानों और Wildlife के बीच भरोसा कायम करने की है।

अगर कभी सांप दिखे, तो उसे मारने नहीं… सही मदद बुलाने की कोशिश कीजिए।

@wild_whisperer

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