कभी एक्टिंग छोड़ना चाहती थीं अभिनेत्री तिलोत्तमा शोम | Tillotama Shome | Struggle Story | Ikka Movie

तुम कभी इतना पैसा नहीं कमा पाओगी।”
ये सुनकर टूटने के बजाय तिलोत्तमा शोम ने खुद से वादा किया —
“मैं साबित करके दिखाऊंगी।”
आज वो न सिर्फ एक शानदार एक्ट्रेस हैं, बल्कि इंडस्ट्री की वो आवाज़ भी हैं
जो उम्र और रंगभेद जैसे मुद्दों पर बेबाक बोलने से नहीं डरती।
ये है उनके संघर्ष की कहानी —
जो हर उस लड़की को ताक़त देगी
जिससे कभी कहा गया था — “तुम कुछ नहीं कर पाओगी…”

@tillotamashom

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IIT की डिग्री और हाई पैकेज के बाद भी क्यों छोड़ी नौकरी? पत्नी संग पहाड़ों में रहने लगा शख्स

कभी बड़े शहरों की भागदौड़ और कॉर्पोरेट करियर का हिस्सा रहे IIT कानपुर के पूर्व छात्र अर्जव मोदी ने अपनी जिंदगी को एक नए नजरिए से देखना शुरू किया। अच्छी नौकरी, बेहतर कमाई और शहर की सुविधाओं के बीच भी उन्हें एक अलग तरह के संतुलन की तलाश थी। इसी तलाश ने उन्हें हिमाचल प्रदेश के छोटे से पहाड़ी कस्बे बीर तक पहुंचाया, जहां उन्होंने अपनी पत्नी सिमरन चौधरी के साथ एक अलग जीवनशैली अपनाई।

यहां की शांत वादियां, धीमी रफ्तार और प्रकृति के करीब रहने का अनुभव उनके लिए किसी बदलाव से कम नहीं रहा। अर्जव और सिमरन की यह कहानी अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां लोग करियर, खुशी और जिंदगी की प्राथमिकताओं को लेकर नए सिरे से सोच रहे हैं।

कम कमाई लेकिन ज्यादा खुशी का एहसास

शहरों में अच्छी कमाई और सुविधाओं के बावजूद अर्जव को महसूस हुआ कि जीवन में संतुष्टि की कमी है। अब वह फ्रीलांस राइटिंग और कंटेंट का काम करते हैं, जबकि उनकी पत्नी रिमोट जॉब जारी रखे हुए हैं। दोनों की संयुक्त आय पहले से आधी से भी कम हो गई है, लेकिन उनका कहना है कि वे अब ज्यादा खुश और संतुष्ट हैं।

95 किलो से 72 किलो तक, बदली सिर्फ जिंदगी नहीं सोच भी

अर्जव ने लिंक्डइन पर अपने सफर को साझा करते हुए बताया कि 2021 में IIT से निकलने के बाद वह बेंगलुरु में तेज-तर्रार कॉर्पोरेट लाइफ जी रहे थे। उस समय उनका वजन 95 किलो था। 2026 में वह पहाड़ों में सादा जीवन जी रहे हैं, वजन करीब 72 किलो है और कम कमाई के बावजूद खुद को ज्यादा बेहतर महसूस करते हैं।

पहाड़ों ने सिखाया ‘घर’ का असली मतलब

सिमरन ने बताया कि बीर में रहने के बाद उनकी जीवनशैली पूरी तरह बदल गई है। वे ज्यादातर खाना घर पर बनाते हैं, कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटते हैं और प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल लगभग छोड़ चुके हैं। उनके अनुसार, पहाड़ों ने सिखाया कि घर सिर्फ खूबसूरत जगह या महंगे सामान से नहीं बनता, बल्कि उस जगह से जुड़ने और उसमें योगदान देने से बनता है।

शहर की दौड़ बनाम पहाड़ों की शांति

अर्जव ने अपनी पोस्ट में दो तरह की जिंदगी की तुलना की। एक तरफ महानगर में रहने वाला युवा प्रोफेशनल है, जिसकी कमाई ज्यादा है, लेकिन लगातार दूसरों से तुलना, करियर का दबाव और अकेलेपन का सामना करना पड़ता है।

दूसरी तरफ पहाड़ी इलाके में रहने वाला व्यक्ति है, जिसकी आय कम हो सकती है, लेकिन वह प्रकृति, रिश्तों और रोजमर्रा के छोटे-छोटे पलों का आनंद लेता है।

पहाड़ों में चले जाओ’ नहीं, सोच बदलने की बात

अर्जव ने साफ किया कि उनका मकसद सभी को शहर छोड़कर पहाड़ों में बसने की सलाह देना नहीं है। उनका संदेश सिर्फ इतना है कि जिंदगी की खुशी केवल ज्यादा कमाई या दूसरों से आगे निकलने में नहीं, बल्कि अपनी प्राथमिकताओं को समझने और संतुलन बनाने में भी है।

हर ऑटो ड्राइवर एक जैसा नहीं! बेंगलुरु के इस शख्स का अंदाज देख मुस्कुरा उठेंगे आप

Housewife से Dancer Mom तक का सफर | Housewife to Dancer | Nashik | Maharashtra |

नाशिक की एक साधारण हाउसवाइफ, 2 बच्चों की माँ, ना कोई ट्रेनिंग, ना कोई क्लास।
घर की जिम्मेदारियों के बीच 4 साल तक लगातार मेहनत करती रहीं, लोगों के ताने सुने, लेकिन सबर नहीं छोड़ा।
पति के सपोर्ट और अपने जुनून से आज वही महिला “Dancer Mom” बनकर लाखों लोगों को Inspire कर रही है।
ये कहानी सिर्फ़ टैलेंट की नहीं, सब्र की है।

@deepali_saras

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Housewife से Dancer Mom तक का सफर | Housewife to Dancer | Nashik | Maharashtra |
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फटे जूतों से Lord’s Honours Board तक का सफर  | First Indian woman on Lord’s Honours Board

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26 साल में 6500+ लावारिस शवों का अंतिम संस्कार | Vishnu Kumar Bunty | Manav Upkar Sanstha | Aligarh

26 साल पहले अलीगढ़ में एक लावारिस शव को देखकर विष्णु कुमार बंटी ने ऐसा संकल्प लिया जिसने हजारों ज़िंदगियों और परिवारों को छू लिया। आज उनकी “मानव उपकार संस्था” 6500 से ज़्यादा लावारिस शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर चुकी है। संस्था 25 डीप फ्रीज़र सेवा, अन्नपूर्णा रसोई, प्रवासी मज़दूरों की मदद और ज़रूरतमंद परिवारों के लिए लगातार काम कर रही है। यह कहानी इंसानियत, सेवा और सम्मान की है।
@manav_upkar_sanstha

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18 टांके, Cervical Injury फिर भी मैंने हारना नहीं जीना चुना | Real Life Comeback |

एक भयानक एक्सीडेंट के बाद प्राजक्ता चल भी नहीं पा रही था।
जब सब उम्मीद छोड़ रहे थे… प्राजक्ता ने हिम्मत दिखाई।

अस्पताल बेड पर लेते हुए खुद से एक वादा किया –
“एक दिन मैं फिर चलूंगी और मैराथन दौड़ूंगी।

आज प्राजक्ता ने अपनी पहली 5KM मैराथन पूरी कर ली है और अब उनका अगला लक्ष्य है – Tata Marathon

प्राजक्ता ने सिखाया कि हिम्मत, विश्वास और जिद से ज़िंदगी के हर पड़ाव पर भी Comeback मुमकिम है।

@prajuu_33

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IPS दमयंती सेन: ‘बंगाल टाइग्रेस’ जिसने इंसाफ़ के लिए लड़ाई लड़ी| The Better India Hindi

Trigger Warning: यौन हिंसा
जब कुछ ताकतवर लोग चाहते थे कि एक मामला हमेशा के लिए दब जाए, तब IPS अधिकारी दमयंती सेन ने समझौता करने के बजाय सच और न्याय का साथ चुना।
2012 में उन्होंने कोलकाता के सबसे चर्चित मामलों में से एक की जांच भारी दबाव और विरोध के बावजूद पूरी ईमानदारी से की। उन्होंने साबित किया कि न्याय की लड़ाई लड़ने वाले लोग आज भी मौजूद हैं।
आज, महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच से जुड़े पश्चिम बंगाल के एक आयोग में उनकी नियुक्ति के बाद उनकी कहानी फिर चर्चा में है। यह कहानी हमें ईमानदारी, जवाबदेही और हर मुश्किल में सच का साथ देने की प्रेरणा देती है।

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Cricketer बनने का सपना था पर बन गया Actor | Ramandeep Yadav | Raakh Web Series | Rajjo

राख’ वेब सीरीज़ में ‘राज्जो’ का किरदार निभाने वाले रामनदीप यादव क्रिकेटर बनने का सपना लिया हर रात सोते थे पर क़िस्मत में उन्हें अभिनय से मिलवा दिया थिएटर, नुक्कड़ नाटक और लगातार ऑडिशन, Manmarziyan, Cat जैसे प्रोजेक्ट का हिस्सा रहे लेकिन फिर चार साल तक काम का इंतज़ार करना पड़ा पर फिर एक ऐसा किरदार जिसने उन्हें नई पहचान दिलाई, Raakh Web Series में रज्जो का किरदार। रमनदीप का सफ़र बताता है कि हुनर, धैर्य और खुद पर भरोसा कितनी दूर तक ले जा सकते हैं।
@_ramandeep_yadav

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‘जॉब मिलने की थी पूरी उम्मीद, फिर कंपनी ने…’ सोशल मीडिया पर वायरल हुई उम्मीदवार की पोस्ट

नई नौकरी की तलाश के दौरान उम्मीदवारों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में नई नौकरी की तलाश कर रही एक उम्मीदवार ने इंटरव्यू से जुड़ा अपना अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने बताया कि, इंटरव्यू के दौरान सब कुछ ठीक चल रहा था और उन्हें लगा कि जल्द ही नौकरी मिल जाएगी। लेकिन बाद में काफी इंतजार और कई बार संपर्क करने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। LinkedIn पर शेयर किया गया ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर ये एक्सपीरिएंश श्रुति राय ने LinkedIn पर शेयर किया, जहां उन्होंने इसे “अब तक का सबसे बुरा अनुभव” बताया।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

श्रुति राय ने पोस्ट में कहा, “अब तक का सबसे बुरा अनुभव। मैंने हाल ही में एक एजेंसी में इंटरव्यू दिया, जहां मैं पहले काम कर चुकी थी। इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही मैंने अपनी सैलरी की उम्मीदें साफ तौर पर बता दी थीं। मैंने उनसे ये भी कहा था कि अगर मेरी अपेक्षाएं उनके बजट में फिट नहीं बैठतीं, तो मैं किसी का समय बर्बाद नहीं करना चाहूँगी। इसके बावजूद उन्होंने इंटरव्यू की प्रक्रिया जारी रखने पर जोर दिया।”

क्या यहीं है हायरिंग का सही तरीका

उन्होंने कहा, “इंटरव्यू खुद अजीब लगा। मेरे अनुभव, मेरे काम या मेरे द्वारा लीड किए गए कैंपेन को समझने की कोशिश करने के बजाय, ऐसा लगा कि इंटरव्यू लेने वाला किसी सार्थक बातचीत के बजाय अपनी बात साबित करने में ज्यादा दिलचस्पी रखता था। मेरे हर जवाब पर एक नया सवाल खड़ा कर दिया जाता था, मानो उम्मीदवार को असहज करना ही मकसद हो। अगर यही हायरिंग का तरीका है, तो मुझे सच में लगता है कि ये अब पुराना हो चुका है। इंटरव्यू का उद्देश्य किसी की काबिलियत को परखना होना चाहिए, न कि बेवजह पावर डायनामिक बनाना।”

मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं

राय ने बताया कि उन्हें पूरा भरोसा था कि जल्द ही नौकरी का ऑफर मिल जाएगा। इसी वजह से उन्होंने एक दूसरे नौकरी के अवसर को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया। लेकिन जब उन्होंने तय समय के बाद कंपनी से संपर्क किया, तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं है, अगर फैसला यही है तो। कंपनियों को किसी दूसरे उम्मीदवार को चुनने का पूरा अधिकार है। लेकिन परेशानी इस बात से है कि उम्मीदवार से समय देने की उम्मीद की जाती है, जबकि उसके समय की कोई कद्र नहीं की जाती।

उन्होंने आगे लिखा, “अगर आप आगे नहीं बढ़ना चाहते, तो साफ बता दीजिए। अगर आपके प्लान बदल गए हैं, तो इसकी जानकारी दे दीजिए। उम्मीदवार भी इंसान होते हैं, कोई ऐसी जगह नहीं जहां आप बिना कुछ बताए चीजें लंबित छोड़ दें।”

उन्होंने आगे लिखा, “मुझे सच में उम्मीद है कि कंपनियां समझेंगी कि उनकी हायरिंग प्रक्रिया भी उनके कार्य संस्कृति को उतना ही दिखाती है, जितना किसी उम्मीदवार का इंटरव्यू उसकी काबिलियत को दिखाता है। P.S. इस वजह से मैंने एक और अच्छा मौका खो दिया, और यही बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है।”

यूजर्स ने किया कमेंट

एक यूजर ने लिखा, “मैं पूरी तरह सहमत हूं। यही सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात होती है। मुझे समझ नहीं आता कि इतने सारे उम्मीदवारों को जानबूझकर तनाव और बेचैनी में रखने के बाद लोग चैन से कैसे रह लेते हैं।” एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “आपने बिल्कुल सही कहा। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है। उन लोगों ने मुझसे काफी बातचीत की, लेकिन आखिर में बिना किसी जवाब के गायब हो गए।” एक और यूजर ने कहा, “यह वाकई मुश्किल होता है। मेरे साथ भी ऐसा हो चुका है। एक बार तो मुझसे मेरी खुद की जॉब डिस्क्रिप्शन तक लिखवाई गई और उसके बाद मुझे कोई जवाब नहीं मिला। फिर भी आगे बढ़ना ही पड़ता है। आप यह कर सकते हैं।”

नौकरी से पहले ही रख दीं सारी शर्तें, कैंडिडेट का WhatsApp मैसेज देख HR भी हैरान

आज के समय में नौकरी पाना जितना चुनौतीपूर्ण हो गया है, उतना ही बदल गया है नौकरी तलाशने का तरीका भी। अब उम्मीदवार सिर्फ अपनी योग्यता ही नहीं, बल्कि अपनी अपेक्षाओं को भी खुलकर सामने रखने लगे हैं। हाल ही में ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया, जहां एक जॉब सीकर का WhatsApp मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इस मैसेज ने लोगों को हैरान भी किया और हंसने पर भी मजबूर कर दिया। किसी ने इसे जबरदस्त आत्मविश्वास बताया, तो किसी ने इसे जरूरत से ज्यादा कॉन्फिडेंस करार दिया।

वहीं कई यूजर्स ने कहा कि उम्मीदवार ने अपनी शर्तें पहले ही साफ कर दीं, जिससे बाद में किसी तरह की गलतफहमी की गुंजाइश नहीं रहती। इस वायरल चैट ने एक बार फिर नौकरी, सैलरी और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

डिजिटल मार्केटिंग की नौकरी के लिए किया संपर्क

मार्केटिंग स्ट्रैटेजिस्ट और फाउंडर नैंसी श्रीवास्तव ने लिंक्डइन पर एक स्क्रीनशॉट शेयर किया। उनके मुताबिक, एक उम्मीदवार ने डिजिटल मार्केटिंग/कंटेंट राइटर की नौकरी के लिए WhatsApp पर संपर्क किया।

उम्मीदवार ने अपने पोर्टफोलियो के साथ लिखा कि उसे सोशल मीडिया पोस्ट बनाने का अनुभव है और वह एडवांस प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की मदद से AI आधारित कंटेंट राइटिंग में भी अच्छी पकड़ रखता है।

मैसेज में रखीं साफ-साफ शर्तें

नौकरी के लिए आवेदन करते हुए उम्मीदवार ने अपनी अपेक्षाएं भी बिना किसी झिझक के बता दीं। उसने लिखा कि उसे ₹40,000 से ₹50,000 तक की सैलरी चाहिए और इससे कम पर वह काम नहीं करेगा। यही नहीं, उसने यह भी कहा कि उसे शनिवार और रविवार की फिक्स छुट्टी चाहिए। साथ ही उसने अनुरोध किया कि उससे फोन कॉल नहीं, सिर्फ WhatsApp पर ही संपर्क किया जाए।

फाउंडर ने कहा- समझ नहीं आया भर्ती कौन कर रहा था

इस बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए नैंसी श्रीवास्तव ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि मैसेज पढ़ने के बाद उन्हें ही समझ नहीं आया कि नौकरी कौन दे रहा है और कौन ले रहा है। उन्होंने लिखा कि उम्मीदवार ने सैलरी, वीकेंड ऑफ और कम्युनिकेशन का तरीका पहले ही तय कर दिया। बस ऑफर लेटर और जॉइनिंग डेट पूछना बाकी रह गया था।

सोशल मीडिया पर आई मजेदार प्रतिक्रियाएं

पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने तरह-तरह के कमेंट किए।

  • एक यूजर ने लिखा, “इतना कॉन्फिडेंस चाहिए, कृपया इसका कोचिंग सेंटर बता दीजिए।”
  • दूसरे ने कहा, “कम से कम उम्मीदवार को पता तो है कि उसे क्या चाहिए।”
  • एक अन्य यूजर ने मजाक में लिखा, “मैं भी इसी उम्मीदवार के साथ जॉइन करना चाहता हूं।”
  • वहीं किसी ने इसे Gen Z का नया अंदाज बताया।

कुछ लोगों ने उम्मीदवार का किया समर्थन

जहां कई लोगों ने इस मैसेज पर हंसी-मजाक किया, वहीं कुछ यूजर्स ने उम्मीदवार की साफगोई की तारीफ भी की।

उनका कहना था कि अपनी उम्मीदें पहले ही बता देना गलत नहीं है। इससे उम्मीदवार और कंपनी दोनों का समय बच सकता है।

viral (55)

वायरल पोस्ट पर उठे सवाल भी

हालांकि, हर कोई इस वायरल पोस्ट पर भरोसा करने को तैयार नहीं था। कुछ यूजर्स ने दावा किया कि यह बातचीत नकली भी हो सकती है। उनका कहना था कि इतने कम समय में इतने सारे मैसेज टाइप होना थोड़ा अजीब लगता है। इसलिए कुछ लोगों ने स्क्रीनशॉट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।

कॉन्फिडेंस या ओवरकॉन्फिडेंस?

यह वायरल WhatsApp चैट अब सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गई है। कुछ लोग इसे आत्मविश्वास की मिसाल मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि नौकरी मांगते समय पेशेवर व्यवहार और बातचीत का तरीका भी उतना ही जरूरी होता है।

एक महीने में भेजे 500 रिज्यूमे, नहीं आया एक भी कॉल, फ्रेशर्स की मुश्किलें आईं सामने