Stocks to Watch: 15 अक्टूबर को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, राजेश एक्सपोर्ट्स से टाटा टेक्नोलॉजीज तक शामिल

Stocks to Watch: 15 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों से जुड़ी अहम खबरों के चलते निवेशकों की नजर कुछ चुनिंदा स्टॉक्स पर रहेगी। कहीं तिमाही नतीजों में मुनाफे की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है, तो कहीं कमाई पर दबाव दिखा है। कुछ कंपनियों को नए ऑर्डर मिले हैं, जबकि कुछ में बड़े कारोबारी फैसले हुए हैं। इन खबरों का असर गुरुवार को शेयरों की चाल पर पड़ सकता है।

HDB Financial Services

NBFC कंपनी HDB Financial Services का मुनाफा वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 34% बढ़कर 780 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 581 करोड़ रुपये था। कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 15.5% बढ़कर 2,534 करोड़ रुपये पहुंच गई। कंपनी के बोर्ड ने 10 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर 2 रुपये के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया है।

CEAT

टायर कंपनी CEAT का नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में 39.8% घटकर 112 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 26.2% बढ़कर 4,762 करोड़ रुपये पहुंच गया। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से मुनाफे पर दबाव पड़ा। EBITDA 9.1% गिरकर 457 करोड़ रुपये रहा और EBITDA मार्जिन 13.3% से घटकर 9.6% पर आ गया।

IDBI Bank

सरकारी बैंक IDBI Bank के रणनीतिक पुनर्गठन को कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने मंजूरी दे दी है। बैंक में हिस्सेदारी बेचने के लिए Fairfax Financials को सफल बोलीदाता चुना गया है। पुनर्गठन के बाद सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी 34% रहेगी। शेयर के लिए 75.99 रुपये का बेंचमार्क प्राइस तय किया गया था, जबकि 81 रुपये की सबसे ऊंची बोली स्वीकार की गई।

CSB Bank

निजी क्षेत्र के CSB Bank के सामने अब मर्जर या हिस्सेदारी बेचने का विकल्प हो सकता है। RBI के नियमों के मुताबिक, कोई प्रमोटर एक से ज्यादा बैंकों में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी नहीं रख सकता। IDBI Bank के पुनर्गठन की मंजूरी के बाद Fairfax को CSB Bank का मर्जर IDBI Bank में करना पड़ सकता है या अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ सकती है। प्रस्तावित ढांचे में दो साल के भीतर मर्जर का रास्ता शामिल है।

Rajesh Exports

SEBI ने Rajesh Exports और इसके चेयरमैन राजेश मेहता पर लगी अंतरिम पाबंदियां जारी रखने का फैसला किया है। कंपनी के वित्तीय खुलासों में गड़बड़ियों को लेकर रेगुलेटर की चिंताएं दूर नहीं हुई हैं। राजेश मेहता अगले आदेश तक कंपनी के शेयर खरीदने, बेचने या किसी भी तरह का कारोबार करने से प्रतिबंधित रहेंगे।

Reliance Industries

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी सब्सिडियरी Jio Platforms के IPO के लिए अहम दस्तावेज यानी रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) जमा कर दिया है। IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर को लगेगी। IPO में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित होंगे।

Tata Technologies

टाटा ग्रुप की इंजीनियरिंग कंपनी Tata Technologies का मुनाफा सालाना आधार पर 5% घटकर 171.4 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 181 करोड़ रुपये था। हालांकि, डॉलर में रेवेन्यू कॉन्स्टेंट करेंसी आधार पर 22% बढ़ा। सर्विसेज सेगमेंट का रेवेन्यू भी 26% बढ़ा। कंपनी को पूरे वित्त वर्ष में दोहरे अंकों की ग्रोथ की उम्मीद है।

MRPL

ONGC की सब्सिडियरी तेल कंपनी MRPL का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट करीब 195% बढ़कर 1,881 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 639 करोड़ रुपये था। कंपनी का रेवेन्यू 37.1% बढ़कर 35,590 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, EBITDA दोगुने से ज्यादा बढ़कर 3,210 करोड़ रुपये हो गया, जबकि प्रॉफिट बिफोर टैक्स 2,519 करोड़ रुपये रहा।

Enviro Infra

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Enviro Infra को Arie Energy से महाराष्ट्र में 100 मेगावाट के अजनी विंड पावर प्रोजेक्ट के विकास के लिए 228 करोड़ रुपये का लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) मिला है। यह ऑर्डर कंपनी के रिन्यूएबल एनर्जी कारोबार को बढ़ाने से जुड़ा है।

Aeroflex Industries

औद्योगिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी Aeroflex Industries मार्च 2028 तक 202 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस रकम से स्टेनलेस स्टील होज, होज असेंबली और लिक्विड कूलिंग सिस्टम बनाने की क्षमता बढ़ाई जाएगी। कंपनी को डेटा सेंटर और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों से बढ़ती मांग का फायदा मिलने की उम्मीद है।

Bajaj Consumer Care

FMCG कंपनी Bajaj Consumer Care का नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 67.1% बढ़कर 70.2 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 42 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। रेवेन्यू 25.7% बढ़कर 333 करोड़ रुपये पहुंच गया।

Cemindia Projects

अदाणी ग्रुप की कंपनी Cemindia Projects ने संस्थागत निवेशकों से पैसा जुटाने के लिए QIP लॉन्च किया है। कंपनी 90.3 लाख तक शेयर जारी करेगी। इश्यू का फ्लोर प्राइस 1,158.58 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। संकेतात्मक इश्यू प्राइस 1,108 रुपये है, जो बुधवार के 1,153.50 रुपये के बंद भाव से करीब 4% डिस्काउंट पर है।

Jio Platforms IPO: जियो आईपीओ का प्राइस बैंड तय, 21 अक्टूबर से लगा सकेंगे पैसा; जानिए 8 बड़ी बातें

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tripura Civic Polls: स्थानीय निकाय चुनाव के लिए त्रिपुरा SEC ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, नवंबर में होंगे अगरतला सहित 21 नगरपालिकाओं में चुनाव

Tripura Civic Polls: देश पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में नवंबर में नगरपालिकाओं का चुनाव कराया जाएगा। इस दौरान राज्य की राजधानी अगरतला सहित 21 नगरपालिकाओं में चुनाव होंगे। राज्य में अर्बन लोकल बॉडी चुनाव की तैयारियों के तहत राज्य चुनाव आयोग ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया था। इस बैठक की अध्यक्षता राज्य चुनाव आयुक्त प्रदीप कुमार ने की। बैठक के बाद कुमार ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में चुनावों के लिए उठाए जा रहे तैयारी के कदमों पर चर्चा की गई। बैठक में राज्य के पुलिस पुलिस प्रमुख भी मौजूद थे। उन्होंने राज्य में उपस्थित केंद्रीय सुरक्षा बलों के चुनाव में उपयोग का मुद्दा उठाया।

बैठक के बाद स्टेट सेक्रेटेरिएट में रिपोर्टर्स से बात करते हुए, राज्य चुनाव आयुक्त (SEC) प्रदीप कुमार ने कहा कि उन्होंने चुनावों के लिए उठाए जा रहे तैयारी के कदमों पर चर्चा की, जिसमें सुरक्षा बल की तैनाती और अलग-अलग स्तरों पर दूसरे उपाय शामिल हैं। त्रिपुरा में नवंबर में अर्बन लोकल बॉडी चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर स्टेट इलेक्शन कमीशन ने बुधवार को एक ऑल-पार्टी मीटिंग बुलाई थी। अगरतला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन समेत 21 म्युनिसिपल बॉडीज में चुनाव होंगे।

एसईसी ने कहा, “यह पहली ऑल-पार्टी मीटिंग थी। चुनावों से पहले एक जरूरी काम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल का पब्लिकेशन है, जिसके बाद उसका फाइनल पब्लिकेशन होगा।” उन्होंने पत्रकारवार्ता में कहा, “हमने नामांकन प्रक्रिया, नॉमिनेशन फाइल करने का तरीका, स्क्रूटनी और नाम वापस लेने जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की। हमने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट, चुनावों की घोषणा के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों की जिम्मेदारियों और अधिकारियों की ड्यूटी पर भी चर्चा की।”

चक्रवर्ती ने कहा, “हमने राजनीतिक दलों से चुनाव के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की। हमने चुनाव के दौरान सिक्योरिटी फोर्स की तैनाती पर भी चर्चा की। पॉलिटिकल पार्टियों ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स की तैनाती की मांग की है।” उन्होंने आगे कहा, “स्टेट पुलिस चीफ (इनचार्ज) जी एस राव ने बैठक में कहा कि राज्य में मौजूद केंद्रीय सुरक्षा बल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।”

Delhi industrial policy: कैबिनेट ने दिल्ली को इंडस्ट्रियल हब बनाने की दी मंजूरी, मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना पर खर्च किए जाएंगे 1000 करोड़ रुपये

IDBI Bank में स्टेक सेल से विनिवेश के टारगेट से ज्यादा पैसे आएंगे

केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 88,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। इससे FY19 के बाद पहली बार यह पैसा बजट में तय लक्ष्य से ज्यादा होगा। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। इसमें आईडीबीआई के निजीकरण को बड़ा हाथ होगा।

बजट में 80000 करोड़ जुटाने का टारगेट 

सरकार ने बजट में FY27 में विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट तय किया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आईडीबीआई बैंक की स्ट्रेटेजिक स्ट्रक्चरिंग से केंद्र सरकार को करीब 26,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। यूनियन कैबिनेट ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक की स्ट्रेटेजिक रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी।

सरकार आईडीबीआई बैंक में बेच रही हिस्सेदारी

सरकार और एलआईसी दोनों आईडीबीआई बैंक में कंबाइंड 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सब्सिडियरी कनाडा इंक यह हिस्सेदारी खरीदेगी। इस डील और शेयर पर्चेज एग्रीमेंट के इस साल दिसंबर तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के मुताबिक, सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि LIC अपनी 30.24 हिस्सेदारी बेचेगी।

सरकार पहले ही जुटा चुकी है 62,124 करोड़ रुपये

इस डील के बाद भी IDBI Bank में सरकार और LIC की कंबाइंड 34 फीसदी हिस्सेदारी बनी रहेगी। इस साल 10 सितंबर तक सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 62,124 करोड़ रुपये जुटा लिए थे। यह इस वित्त वर्ष के लिए तय बजट टारगेट से सिर्फ 17,876 करोड़ रुपये कम था। आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी की बिक्री से यह टारगेट पूरा हो जाएगा।

FY19 के बाद पहली बार टारगेट से ज्यादा पैसे आएंगे

सरकार वित्त वर्ष 2018-19 के बाद पहली बार विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से बजट में तय लक्ष्य से ज्यादा पैसे जुटाएगी। पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 45,306 करोड़ रुपये जुटाए थे, जो 47,000 करोड़ रुपये के तय लक्ष्य का करीब 96 फीसदी था। इसमें से 16,886 करोड़ रुपये विनिवेश से आए थे, जबकि 28,420 करोड़ रुपये एसेट मॉनेटाइजेशन से आए थे।

यह भी पढ़ें: IDBI Bank का शेयर मार्च के निचले स्तर से 46% चढ़ा है, 15 अक्तूबर को शेयर पर दिखेगा डील का असर

जियोपॉलिटिकल टेंशन की वजह से बढ़ा विनिवेश पर फोकस

जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने की वजह से विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन पर सरकार का फोकस बढ़ा है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका और ईरान की लड़ाई के बाद की स्थितियों ने सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ाया है। क्रूड की कीमतें इस लड़ाई की वजह से काफी बढ़ी हैं। पिछले कुछ हफ्तों से तो ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। इससे सरकार का इंपोर्ट बिल लगातार बढ़ रहा है।

Delhi industrial policy: कैबिनेट ने दिल्ली को इंडस्ट्रियल हब बनाने की दी मंजूरी, मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना पर खर्च किए जाएंगे 1000 करोड़ रुपये

Delhi industrial policy: दिल्ली सरकार ने देश की राजधानी को इंडस्ट्रियल हब बनाने की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली औद्योगिक नीति 2026 को मंजूरी दी गई। इस योजना का मकसद अगले 10 सालों में राष्ट्रीय राजधानी को साफ, हाई-वैल्यू उद्योग, ज्ञान और प्राद्योगिकी आधारित बिजनेस को बढ़ावा देना है।

इसमें वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक, पांच सालों में मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना पर 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है। इसका मकसद नए उद्योगों को बढ़ावा देना और रोजगार के ज्यादा मौके बनाना है। CM गुप्ता ने कहा कि दिल्ली इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 का मकसद राजधानी को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, डेटा सेंटर्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, हेल्थकेयर सर्विसेज़, अर्बन लॉजिस्टिक्स, सर्कुलर इकॉनमी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक बड़ा हब बनाना है।

यह योजना साफ-सुथरी, हाई-वैल्यू इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देगी, नया निवेश लाएगी, मौजूदा उद्योगों को आधुनिक बनाएगी, महिला उद्यमियों को बढ़ावा देगी और युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि 10 प्राथमिक क्षेत्रों की जरूरतों के हिसाब से प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इसमें पूंजी निवेश, ऑफिस या वर्कस्पेस रेंटल, नई रिक्रूटमेंट, रिसर्च, सर्टिफिकेशन, टेक्नोलॉजिकल मॉडर्नाइजेशन, एनर्जी एफिशिएंसी और स्किल डेवलपमेंट शामिल हैं। यह नीति स्रोत के दोबारा इस्तेमाल और वेस्ट कम करने को भी बढ़ावा देगी।

दिल्ली कैबिनेट बैठक में इन क्षेत्रों को प्रोत्साहन पर जोर

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट पर 25% इंसेंटिव, जो 10 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) होगा, तीन साल के लिए मिलेगा। ऑफिस रेंटल में 40 परसेंट की मदद, जो 2 करोड़ रुपये तक होगी, तीन साल के लिए भी दी जाएगी। बैंडविड्थ और क्लाउड सर्विसेज दो साल के लिए 25% मदद के लिए क्वालिफाई करेंगी, जिसकी सालाना सीमा 10 लाख रुपये होगी। हर नई नियुक्ति पर 40,000 से 50,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश पर 25% प्रोत्साहन, 50 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 60 करोड़ रुपये), पांच साल के लिए उपलब्ध होगा। 40% की ऑफिस किराया सहायता, 2 करोड़ रुपये तक, दो साल के लिए प्रदान की जाएगी। प्रत्येक नया कर्मचारी 1 लाख रुपये से 1.2 लाख रुपये के प्रोत्साहन के लिए पात्र होगा। यह नीति प्रमाणन के लिए 50% सहायता, 25 लाख रुपये तक, अनुसंधान और विकास के लिए 30% प्रोत्साहन, 5 करोड़ रुपये तक; और कार्यक्षेत्र विकसित करने वाली इकाइयों के लिए 25% सहायता, 10 करोड़ रुपये तक प्रदान करती है।

पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत प्रोत्साहन, 10 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) उपलब्ध होगा। यह नीति कम पानी की खपत वाले शीतलन प्रणालियों के लिए 30% सहायता प्रदान करती है, और रेगुलेटरी कम्प्लायंस की तैयारी के लिए 50% मदद, 25 लाख रुपये तक।

पूंजीगत निवेश पर 25% इंसेंटिव, 10 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) मिलेगा। शोध कार्य 50% ग्रांट के लिए क्वालिफाई करेंगी, जिसकी सीमा 50 लाख रुपये होगी। पेटेंट से जुड़ी मदद में लागत का 25% कवर होगा, जो हर पेटेंट के लिए 5 लाख रुपये तक होगा, अधिक से अधिक चार पेटेंट के लिए। लैबोरेटरी एक्रेडिटेशन से जुड़े खर्चों के लिए 25% प्रोत्साहन, 25 लाख रुपये तक, भी दिया जाएगा।

कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 25 % इंसेंटिव, जो आम तौर पर 10 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) तक होगा, मिलेगा। 1,000 या उससे अधिक बेड वाले हॉस्पिटल 100 करोड़ रुपये तक की मदद के लिए योग्य होंगे। वेलनेस एक्टिविटीज को 5% प्रोत्साहन मिलेगा, जो ज्यादा से ज्यादा 1 करोड़ रुपये तक होगा, जबकि NABH, NABL और JCI जैसी संस्थाओं से प्रमाणन पर 50% मदद मिलेगी, जो ज्यादा से ज्यादा 20 लाख रुपये होगी। विशेषज्ञ डॉक्टर की हर नई अपॉइंटमेंट पर 50,000 रुपये से 60,000 रुपये तक का इंसेंटिव मिलेगा।

नई वेयरहाउसिंग यूनिट्स को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो ज्यादा से ज्यादा 10 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) तक होगा, जबकि मौजूदा यूनिट्स को 25% मदद मिलेगी, जो अधिकतम 1 करोड़ रुपये होगी। कोल्ड-चेन फैसिलिटीज को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो अधिकतम 2 करोड़ रुपये होगा। लॉजिस्टिक्स में टेक्नोलॉजी अपनाने पर 40% मदद मिलेगी, जो ज्यादा से ज्यादा 50 लाख रुपये होगी, जबकि ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल पर 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो अधिक से अधिक 2 करोड़ रुपये होगा।

रीसाइक्लिंग यूनिट्स को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो ज्यदा से ज्यादा 1 करोड़ रुपये होगा। रोज 10 टन से अधिक ऑर्गेनिक वेस्ट प्रोसेस करने वाली इकाइयों को 25% मदद मिलेगी, जो ज़्यादा से ज़्यादा 1 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 1.2 करोड़ रुपये) तक होगी। ई-वेस्ट मैनेजमेंट को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो ज़्यादा से ज़्यादा 2 करोड़ रुपये होगा, जबकि एनवायरनमेंटल सर्टिफिकेशन के लिए 50% मदद मिलेगी, जो अधिकतम 10 लाख रुपये होगी। इन नियमों का मकसद वेस्ट मैनेजमेंट को बेहतर बनाना, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना और रिसोर्स के दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 25% इंसेंटिव, जो अधिकतम 5 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 6 करोड़ रुपये) तक होगा, मिलेगा। रेंटल में 20% मदद मिलेगी, जो अधिकतम 50 रुपये होगी। सालाना 2 लाख रुपये, दो साल तक दिए जाएंगे। अप्रेंटिस के स्टाइपेंड के लिए छह महीने तक अतिरिक्त मदद भी मिलेगी।

कौशल विकास ढांचे के लिए 25% इंसेंटिव, 2 करोड़ रुपये तक, मिलेगा, जिसके लिए कम से कम 50 लाख रुपये का निवेश करना होगा। सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए भी 25% मदद मिलेगी, जिसकी लिमिट 2 करोड़ रुपये होगी, जिसके लिए कम से कम 75 लाख रुपये का निवेश करना होगा।

तकनीकी आधुनिकीकरण के लिए 25% प्रोत्साहन, 5 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 7 करोड़ रुपये) मिलेगा। एनर्जी एफिशिएंसी सुधारने और रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए 25% इंसेंटिव, जिसकी लिमिट 50 लाख रुपये होगी, भी दिया जाएगा। अप्रेंटिस के स्टाइपेंड के लिए छह महीने तक एक्स्ट्रा मदद मिलेगी। इन नियमों का मकसद MSMEs को मॉडर्न टेक्नोलॉजी अपनाने, प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने और एनर्जी बचाने में मदद करना है।

दीपावली से पहले चकाचक होंगी कानपुर की 500 सड़कें, 50 लाख की आबादी को मिलेगा गड्ढों से छुटकारा

IDBI Bank का शेयर मार्च के निचले स्तर से 46% चढ़ा है, 15 अक्तूबर को शेयर पर दिखेगा डील का असर

आईडीबीआई बैंक के शेयर में 14 अक्तूबर को पंख लग गए। एक समय शेयर 13 फीसदी तक चढ़ गया था। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। कारोबार के अंत में यह 8.33 फीसदी चढ़कर 89.85 रुपये पर बंद हुआ। इस साल मार्च के अपने निचले स्तर से यह शेयर 46 फीसदी चढ़ा है।

आईडीबीआई बैंक का नियंत्रण फेयरफैक्स को ट्रांसफर होगा

IDBI Bank में फेयरफैक्स नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। 14 अक्तूबर को यूनियन कैबिनेट ने इस प्लान को मंजूरी दे दी। इस डील पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर हो जाने की उम्मीद है। उसके बाद आईडीबीआई बैंक का नियंत्रण फेयरफैक्स की सब्सिडियरी कनाडा इंक के पास चली जाएगी।

14 अक्टूबर को IDBI Bank के शेयर में तूफानी तेजी

14 अक्तूबर को कमजोर बाजार में आईडीबीआई बैंक के शेयरों में तूफानी तेजी ने मार्केट को चौंकाया था। माना जा रहा था कि शेयर में तेजी की वजह 12 अक्तूबर को बैंक का ऐलान था जिसमें कहा गया था कि उसके बोर्ड की बैठक 17 अक्तूबर को होगी। इसमें सितंबर तिमाही के अनऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स को मंजूरी मिलेगी।

शेयर में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी औसत का 8 गुना था

खास बात यह है कि 14 अक्तूबर को आईडीबीआई बैंक के शेयरों में तेजी के साथ ही ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी जबर्दस्त उछाल दिखा था। ट्रेडिंग वॉल्यूम औसत के मुकाबले करीब 8 गुना था। आईडीबीआई बैंक के शेयरों में बीते छह महीनों में करीब 21 फीसदी तेजी आई है। इस दौरान बैंक निफ्टी 1.82 फीसदी गिरा है।

15 अक्टूबर को शेयर पर डील का दिखेगा असर 

आईडीबीआई बैंक के शेयर पर 15 अक्तूबर को डील का असर दिखेगा। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सीएसबी बैंक में पहले से 40 फीसदी हिस्सेदारी है। इसका मतलब है कि यह कंपनी पहले से भारत के बैंकिंग सेक्टर में मौजूद है। वह आगे आईडीबीआई बैंक में सीएसबी बैंक के विलय का ऐलान कर सकती है या सीएसबी बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। आरबीआई के नियम के मुताबिक उसे दोनों में से किसी एक विकल्प का इस्तेमाल करना होगा।

यह भी पढ़ें: IDBI Bank की रीस्ट्रक्चरिंग को कैबिनेट की मंजूरी, फेयरफैक्स खरीदेगी सरकार और LIC से हिस्सेदारी

फेयरफैक्स को ओपन ऑफर पेश करना होगा 

सरकार ने कई साल पहले आईडीबीआई बैंक की निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन, उसकी कोशिश सफल नहीं हुई थी। इस बीच, सरकार ने कहा है कि आईडीबीआई बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग से बैंकिंग सेक्टर में नई पूंजी आने का रास्ता खुलेगा। इससे एमएसएमई के लिए कर्ज की उपलब्धता बढ़ेगी। शेयर पर्चेज एग्रीमेंट के पूरा होने पर फेयरफैक्स को आईडीबीआई बैंक के मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर पेश करना होगा।

कैबिनेट ने सामाजिक सहायता योजना के लिए 53428 करोड़ रुपये किए मंजूर , विकलांग पेंशन में भी हुई बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम’ (NSAP) को 2026-27 से 2030-31 तक, यानी पांच साल के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव में कार्यक्रम और उसके जुड़ी योजनाओं का नाम बदलना,विकलांग पेंशन के नियमों में बदलाव करना और वृद्धावस्था पेंशन,विधवा पेंशन तथा पारिवारिक लाभ योजनाओं को उनके मौजूदा स्वरूप में जारी रखना शामिल है।

इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “दुनिया के सबसे व्यापक सोशल सिक्योरिटी नेट में से एक का विस्तार किया गया है और इसे 2031 तक बढ़ा दिया गया है। इस विस्तारित सोशल सिक्योरिटी नेट के लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “विकलांग लोगों के लिए, विकलांगता पेंशन पाने की पिछली पात्रता सीमा 80 प्रतिशत विकलांगता थी। अब इस सीमा को घटाकर आधा यानी 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसका मतलब है कि 40 प्रतिशत विकलांगता वाले लोग भी विकलांग पेंशन पाने के पात्र होंगे।”

विकलांगता पेंशन में बदलाव

सबसे अहम बदलाव विकलांगता पेंशन के नियमों में हुए हैं। इसके तहत 0 से 79 साल की उम्र के लाभार्थियों को हर महीने 375 रुपये और 80 साल या उससे ज़्यादा उम्र के लोगों को 625 रुपये की मदद मिलेगी।

विकलांगता के लिए पात्रता की सीमा (बेंचमार्क) को मौजूदा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया जाएगा। न्यूनतम उम्र की शर्त भी हटा दी जाएगी, जिससे विकलांग लोग जन्म से ही इसके लिए पात्र हो सकेंगे।

वृद्धावस्था पेंशन,विधवा पेंशन और फेमिली बेनिफिट योजनाएं बिना किसी बदलाव के जारी रहेंगी।

कैबिनेट ने कहा कि सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को इसमें शामिल किया जाएगा। विकलांगता पेंशन योजना के तहत संशोधित पात्रता शर्तों, लाभार्थियों की संख्या और सहायता की दर के बारे में विस्तार से बताने वाली गाइडलाइंस तीन महीने के भीतर जारी और लागू की जाएंगी।

IDBI Bank की रीस्ट्रक्चरिंग को कैबिनेट की मंजूरी, फेयरफैक्स खरीदेगी सरकार और LIC से हिस्सेदारी

इन योजनाओं के बदलेंगे नाम

नाम बदलने की कवायद के तहत,NSAP अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना बन जाएगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना कर दिया जाएगा, जबकि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना बन जाएगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना कर दिया जाएगा और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना हो जाएगा।

बता दें कि NSAP को 15 अगस्त 1995 को गरीब परिवारों को मदद देने के लिए शुरू किया गया था। यह संविधान के अनुच्छेद 41 (जो राज्य की नीति के निर्देशक सिद्धांतों में से एक है) के तहत केंद्र की ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए किया गया था। इस प्रोग्राम के लिए पूरा पैसा केंद्र सरकार देती है, ताकि पूरे देश में एक जैसी मदद मिल सके।

विकलांग पेंशन में किए गए बदलाव ‘विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016’ के तहत किए गए हैं। यह कानून ‘बेंचमार्क विकलांगता’ को 40 प्रतिशत की सीमा के आधार पर परिभाषित करता है और यह प्रावधान करता है कि विकलांगता से जुड़ी सहायता राशि, अन्य श्रेणियों के लाभार्थियों के लिए समान योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता से कम से कम 25 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए।

 

दिवाली पर रेलवे का धमाकेदार ऐलान! 11.5 लाख कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस, खाते में आएगा मोटा पैसा

Suzlon Energy Share: चार दिन में 12% चढ़ा सुजलॉन, अब भी तूफानी तेजी की उम्मीद; मोतीलाल ओसवाल ने ₹65 का टारगेट दिया

Suzlon Energy Share: स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच Suzlon Energy के शेयरों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही। यह बीते चार सत्र में 12% चढ़ चुका है। सुजलॉन बुधवार को 1.52% की बढ़त के साथ 40.80 रुपये पर बंद हुआ।

हालांकि, इसके बावजूद शेयर का प्रदर्शन अब तक कमजोर रहा है। पिछले एक साल में इसमें 25% की गिरावट आई है। वहीं, इस साल अब तक शेयर 22% टूट चुका है। पिछले छह महीने में इसमें 17% और एक महीने में 5% की गिरावट दर्ज की गई है।

सुजलॉन पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज  का सुजलॉन पर रुख काफी बुलिश है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने अपनी 12 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट में सुजलॉन पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी। साथ ही, 65 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 60% की तेजी का संकेत देता है।

सुजलॉन फिलहाल अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर के करीब है। मोतीलाल ओसवाल ने सुजलॉन के शेयरों में संभावित तेजी की पांच बड़ी वजहें बताई हैं।

1. गिरावट के बाद शेयर का वैल्यूएशन आकर्षक

Suzlon Energy के शेयर में पिछले तीन महीनों में करीब 31% की गिरावट आई है। Motilal Oswal का मानना है कि इतनी गिरावट के बाद शेयर का वैल्यूएशन आकर्षक हो गया है। कंपनी की कमाई को लेकर भी तस्वीर पहले से बेहतर दिख रही है।

2. मजबूत ऑर्डर बुक से मिलेगा सहारा

जून तिमाही के अंत में Suzlon Energy के पास 5.9 GW के ऑर्डर थे। Motilal Oswal के मुताबिक, यह ऑर्डर बुक वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक कंपनी की डिलीवरी के अनुमान को पूरा सपोर्ट देती है।

3. देश में बढ़ रही है विंड पावर की क्षमता

भारत में चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 3 GW विंड पावर क्षमता जोड़ी गई। Motilal Oswal के मुताबिक, पिछले रुझानों को देखें तो दूसरी छमाही में इंस्टॉलेशन पहली छमाही से करीब 1.5 गुना रह सकता है। विंड पावर क्षमता बढ़ने से Suzlon जैसी कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।

4. शाम को बिजली की ज्यादा मांग से फायदा

देश में बिजली की मांग बढ़ रही है। खासकर शाम के समय पीक डिमांड ज्यादा रहती है। Motilal Oswal के मुताबिक, इससे विंड-सोलर हाइब्रिड और FDRE प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिल सकता है।  इसका फायदा Suzlon को भी मिलने की उम्मीद है।

5. नए कारोबार से बढ़ेगी कमाई की उम्मीद

Motilal Oswal के मुताबिक, Suzlon का DevCo मॉडल तेजी से आगे बढ़ रहा है। वित्त वर्ष की शुरुआत के चार महीनों में इस मॉडल के तहत 600 MW से ज्यादा के ऑर्डर मिले हैं। ये कंपनी के कुल ऑर्डर का करीब 60% हैं। कंपनी विदेशों में भी कारोबार बढ़ाने के मौके तलाश रही है। ब्रोकरेज के मुताबिक, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में अच्छी संभावनाएं हैं।

Suzlon Energy पर एनालिस्टों की क्या राय है?

Suzlon Energy को कवर करने वाले 12 एनालिस्ट में से 10 ने शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग दी है। दो एनालिस्ट ने इसे ‘Hold’ रेटिंग दी है। किसी भी एनालिस्ट ने शेयर बेचने की सलाह नहीं दी है। सभी एनालिस्ट के टारगेट प्राइस के औसत के हिसाब से शेयर में मौजूदा स्तर से करीब 67% की तेजी की संभावना है।

IDBI Bank की रीस्ट्रक्चरिंग को कैबिनेट की मंजूरी, फेयरफैक्स खरीदेगी सरकार और LIC से हिस्सेदारी

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।