PhonePe का FY26 में घाटा 62% बढ़ा, रेवेन्यू में रही 11% की ग्रोथ

डिजिटल पेमेंट्स प्लेटफॉर्म फोनपे (PhonePe) का वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 11 प्रतिशत बढ़ा। आंकड़ा ₹7,920 करोड़ दर्ज किया गया। एक साल पहले रेवेन्यू ₹7,115 करोड़ था। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में कंपनी की ओर से जमा की गई फाइलिंग के अनुसार, कंसोलिडेटेड नेट लॉस 62 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹2,792 करोड़ हो गया। वित्त वर्ष 2025 में यह ₹1,727 करोड़ था। PhonePe इस वक्त देश की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट कंपनी है। UPI पेमेंट में इसका मार्केट शेयर 45 प्रतिशत से ज्यादा है।

नॉर्मलाइज्ड ऑपरेशनल बेसिस पर, वित्त वर्ष 2026 में PhonePe का नेट लॉस ₹1,377 करोड़ रहा। रेवेन्यू में कंपनी की धीमी ग्रोथ के पीछे कई कारण हैं, जैसे कि पिछले वित्त वर्ष के बीच में क्रेडिट कार्ड से रेंट पेमेंट रोकना, सरकार की ओर से रियल मनी गेम्स (RMG) पर बैन लगाया जाना, पिछले साल UPI के लिए सरकारी सब्सिडी न मिलना।

फिलहाल के लिए टल चुका है PhonePe IPO

मार्च 2026 में खबर आई कि PhonePe ने मिडिल ईस्ट में युद्ध और मार्केट के अस्थिर माहौल का हवाला देते हुए अपना IPO टाल दिया। उम्मीद है कि कंपनी इस साल के आखिर में लिस्टिंग की प्रक्रिया फिर से शुरू करेगी। कंपनी ने जनवरी 2026 में IPO के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) जमा किया था। UDRHP के अनुसार, IPO में केवल ऑफर-फॉर-सेल (OFS) रहेगा। इसमें प्रमोटर WM डिजिटल कॉमर्स होल्डिंग्स और मौजूदा शेयरधारकों की ओर से 5.06 करोड़ इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखा जाएगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। इसलिए ऑफर से मिलने वाली पूरी रकम शेयर बिक्री करने वालों को मिलेगी।

वॉलमार्ट के पास कितनी हिस्सेदारी

WM डिजिटल कॉमर्स होल्डिंग्स का मालिकाना हक वॉलमार्ट इंटरनेशनल होल्डिंग्स इंक के पास है। इसकी PhonePe में 71.77 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वर्तमान में जनरल अटलांटिक सिंगापुर PPIL, फोनपे में 8.98 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी पब्लिक शेयरहोल्डर है। इसके बाद 5.73 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ हेडस्टैंड है। फोनपे में टाइगर ग्लोबल PIP 9-1 और माइक्रोसॉफ्ट ग्लोबल फाइनेंस भी निवेशक हैं। कहा जा रहा है कि OFS के जरिए टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट, फोनपे से एग्जिट करेंगी। इसके अलावा फोनपे में रिबिट कैपिटल, टीवीएस कैपिटल, टेनसेंट और कतर इनवेस्टमेंट अथॉरिटी जैसों का भी पैसा लगा हुआ है।

फोनपे ने सितंबर 2025 में IPO के लिए SEBI के पास कॉन्फिडेंशियल तरीके से ड्राफ्ट जमा किया था। कहा गया था कि मेगा IPO लगभग 12,000 करोड़ रुपये का रहेगा। कॉन्फिडेंशियल रूट कंपनियों को लिस्टिंग पर अंतिम फैसले पर पहुंचने तक गोपनीयता की सुविधा देता है। अगर जरूरी हो तो वे बाद में बाजार की स्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती हैं। SEBI ने 20 जनवरी 2026 को PhonePe के कॉन्फिडेंशियल DRHP को मंजूरी दी थी।

Juniper Green Energy IPO: जुनिपर ग्रीन का आईपीओ 30 जुलाई को खुलेगा, रिन्यूएबल एनर्जी पर दांव लगाने का बड़ा मौका

Juniper Green Energy IPO: जुनिपर ग्रीन एनर्जी का आईपीओ 30 जुलाई को खुल जाएगा। यह आईपीओ 1,800 करोड़ रुपये का है। कंपनी इश्यू के जरिए इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू करेगी। इस आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि कंपनी के प्रमोटर्स या पुराने इनवेस्टर्स आईपीओ में अपने शेयर नहीं बेचेंगे।

एंकर इनवेस्टर्स के लिए 29 जुलाई को खुलेगा इश्यू

Juniper Green Energy ने पहले आईपीओ से 3,000 करोड़ रुपये जुटाने का प्लान बनाया था। बाद में उसने इश्यू का साइज घटा दिया। कंपनी आईपीओ में शेयरों के प्राइस बैंड सहित कई जानकारियां सोमवार यानी 27 जुलाई को इश्यू करेगी। यह इश्यू एंकर इनवेस्टर्स के लिए एक दिन पहले यानी 29 जुलाई को खुल जाएगा।

6 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट होंगे शेयर 

शेयरों का एलॉटमेंट 4 अगस्त को होने की उम्मीद है। कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंज में 6 जुलाई को लिस्ट होंगे। कंपनी ने 2 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर अपने एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व रखा है। इश्यू के आधे शेयर (एंप्लॉयीज का हिस्सा छोड़कर) क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हैं। 35 फीसदी शेयर्स रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हैं।

 टॉप 10 इंडिपेंडेंट रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल 

जुनिपर ग्रीन एनर्जी गुरुग्राम की कंपनी है। यह देश के सबसे बड़े 10 रिन्यूएबल इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स में शामिल है। इसके पोर्टफोलियो में 50 प्रोजेक्ट्स हैं। कंपनी की कुल बिजली उत्पादन क्षमता इस साल जून में 7,910.20 MW की थी। मार्च 2020 में कंपनी का सिर्फ एक सोलर प्रोजेक्ट था, जिसकी क्षमता 100 मेगावॉट थी। कंपनी के 50 प्रोजेक्ट्स में 20 ऑपरेशनल प्रोजेक्ट्स हैं। 19 कॉन्ट्रैक्टेड प्रोजेक्ट्स है, जिन पर काम चल रहा है। बाकी 11 अवॉर्डेड प्रोजेक्ट्स पर भी काम चल रहा है।

कंपनी आईपीओ से आए पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी

कंपनी आईपीओ से आए 1,411.9 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। बाकी पैसे का इस्तेमाल सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए होगा। इस साल जून में कंसॉलिडेटेड आधार पर कंपनी पर 13,266 करोड़ रुपये का कर्ज था। जुनिपर ग्रीन की प्रतिद्वंद्वी कंपनियों में ACME Solar Holdings, NTPC Green Energy और Adani Green Energy शामिल हैं। ये सभी कंपनियां स्टॉक्स एक्सचेंज में सूचीबद्ध (Listed) हैं।

FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 41 फीसदी बढ़ा

जुनिपर ग्रीन का प्रॉफिट FY26 में 10.9 फीसदी बढ़कर 40.5 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 41.3 फीसदी बढ़कर 718.9 करोड़ रुपये रहा। यह इश्यू उन निवेशकों के लिए एक मौका है, जो रिन्यूएनबल एनर्जी पर दांव लगाना चाहते हैं। देश में कुल बिजली उत्पादन में रन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। यह हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी पर पहुंच गई है।

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शेयर बाजार का सेंटिमेंट फिलहाल कमजोर

यह आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब मध्यपूर्व में बढ़ते टेंशन और क्रूड में उछाल से मार्केट का सेंटिमेंट कमजोर है। इस हफ्ते पांचों कारोबारी सत्रों में बाजार के प्रमुख सूचकांकों निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट आई। इस हफ्ते निफ्टी करीब 600 अंक गिरा है, जबकि सेंसेक्स 1500 अंक से ज्यादा टूटा है। निवेशकों को इश्यू में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर्स की राय लेने की सलाह है।

Lohia Corp IPO: जानिए दूसरे दिन इश्यू को कितना रिस्पॉन्स, कितना चल रहा जीएमपी

लोहिया कॉर्प के आईपीओ का आज दूसरा दिन है। अब तक इश्यू में निवेशकों ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। 24 जुलाई को दोपहर से पहले तक यह इश्यू करीब 45 फीसदी सब्सक्राइब हुआ था। यह जानकारी एनएसई के डेटा पर आधारित है। कंपनी इश्यू से 1,101.28 करोड़ रुपये जुटाने वाली है।

Lohia Corp आईपीओ में ऑफर फॉर सेल के जरिए 1,43,52,274 शेयर बेचेगी। रिटेल इनवेस्टर्स की कैटेगरी में यह इश्यू 84 फीसदी सब्सक्राइब हुआ है। क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) कैटेगरी में 43 फीसदी सब्सक्राइब हुआ है। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) की कैटेगरी में 19 फीसदी सब्सक्राइब हुआ है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है।

लोहिया कॉर्प ने आईपीओ में प्रति शेयर 405-425 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। इनवेस्टर गेन और आईपीओ वॉच के मुताबिक, लोहिया कॉर्प के शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम 15 रुपये चल रहा है। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर शेयर की लिस्टिंग 3.5 फीसदी प्रीमियम के साथ हो सकती है।

इस इश्यू में कम से कम शेयरों के लॉट के लिए अप्लाई करना होगा। एक लॉट 35 शेयरों का है। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर निवेशक के कम से कम 14,875 रुपये का निवेश करना होगा। एक इनवेस्टर मैक्सिमम शेयरों के 13 लॉट के लिए निवेश कर सकता है। FY26 में कंपनी का प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी की कुल इनकम 25.3 फीसदी बढ़कर 1,737.87 करोड़ रुपये रही।

आईपीओ में बोली लगाने वाले निवेशकों को शेयर का एलॉटमेंट 28 जुलाई को हो जाने की संभावना है। कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंजों पर 30 जुलाई को लिस्ट हो सकते हैं। शेयर बीएसई और एनएसई दोनों एक्सचेंजों पर लिस्ट होंगे। यह कंपनी टेक्निकल टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री के लिए मशीनरी बनाती है। यह कानपुर की कंपनी है। इस साल 31 मार्च को कंपनी का कुल एसेट्स 1,304.66 करोड़ रुपये का था।

यह आईपीओ ऐसे वक्त आया है, जब शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव दिख रहा है। इस हफ्ते बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लगातार पांचवें दिन गिरकर बंद हुए। निफ्टी 0.43 फीसदी यानी 102 अंक गिरकर 23,767 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.43 फीसदी यानी 331 अंक की कमजोरी के साथ 76,059 पर बंद हुआ। इसकी वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल है।

Caliber Mining & Logistics Listing: कैलिबर माइनिंग की अच्छी शुरुआत, शेयर 19% तक बढ़त में लिस्ट

Caliber Mining & Logistics की शुक्रवार, 24 जुलाई को लिस्टिंग अच्छी रही। BSE पर शेयर करीब 19 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 504 रुपये पर और NSE पर करीब 18 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 500.25 रुपये पर लिस्ट हुआ। फाइनल IPO प्राइस 424 रुपये था। कंपनी का 450 करोड़ रुपये का IPO 154.66 गुना भरा था। इसमें 400 करोड़ रुपये के 94 लाख नए शेयर जारी हुए। साथ ही 50 करोड़ रुपये के 12 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) था।

कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स लिमिटेड एक इंटीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर है। यह कोयला निकालने और कोयले की लॉजिस्टिक्स में विशेषता रखती है। महाराष्ट्र में स्थित यह कंपनी माइनिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सेवाएं देती है, जिनमें कोयला निकालना, ओवरबर्डन हटाना, कोयले की लोडिंग और अनलोडिंग, सड़क से ट्रांसपोर्टेशन और रेल ट्रांसपोर्टेशन का तालमेल बिठाना शामिल है। यह माइनिंग इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करते हुए, कोयला माइनिंग और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस के लिए एंड-टू-एंड समाधान देती है।

कंपनी के प्रमोटर मोहित सतीशकुमार चड्ढा, मनीष कृष्णलाल चड्ढा, राहुल रोशनलाल चड्ढा, अनुज कृष्णलाल चड्ढा और प्रिया अनुज चड्ढा हैं। कंपनी के पब्लिक इश्यू में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 253.88 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 281.99 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 43.40 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल

कैलिबर माइनिंग अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल कर्ज को कुछ हद तक या पूरी तरह चुकाने के लिए, मशीनरी की खरीद के लिए, सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए और IPO पर आए खर्च की भरपाई के लिए करेगी। कैलिबर माइनिंग ने IPO की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 135 करोड़ रुपये जुटाए थे।

Caliber Mining की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी की कुल इनकम 17 प्रतिशत बढ़कर 1,684.66 करोड़ रुपये हो गई। एक साल पहले इनकम 1,435.57 करोड़ रुपये थी। शुद्ध मुनाफा 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 157.90 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2025 में 131.55 करोड़ रुपये था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sotefin IPO Listing: ढहते मार्केट में अपर सर्किट, ₹187 के शेयरों ने लिस्टिंग पर मचाया धमाल

Sotefin IPO Listing: ऑटोमेटेड कार पार्किंग सिस्टम कंपनी सोटेफिन भारत के शेयरों की आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 3 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹187 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹205.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 9.63% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹215.25 (Sotefin Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 15.11% मुनाफे में हैं।

Sotefin Bharat IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

सोटेफिन भारत का ₹90 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 16-20 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 3.99 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 2.82 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 6.05 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.78 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 48 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹20.13 करोड़ कोलकाता में एक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने, ₹8.17 करोड़ प्रस्तावित नए ऑफिस प्रेमिसेज की जरूरतों, ₹40.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Sotefin के बारे में

सोफेटिन भारत मैकेनाइज्ड और ऑटोमेटेड पार्किस सॉल्यूशंस ऑफर करती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में फुल्ली ऑटोमेटेड रोबोटिक पार्किंग सिस्टम, पजल पार्किंग सिस्टम, टावर पार्किंग सिस्टम और स्टैक पार्किंग सिस्टम हैं। कंपनी O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) और आफ्टर सेल्स सर्विसेज भी ऑफर करती है। मार्च 2026 तक कंपनी 55 प्रोजेक्ट्स पूरे कर चुकी थी और फिलहाल देश कई कई शहरों के साथ-साथ अमेरिका और दुबई में 30 से अधिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 66% की अधिक रफ्तार से बढ़कर ₹17.37 करोड़ और टोटल इनकम 44% से अधिक तेजी से बढ़कर ₹118.23 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹24.01 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹70.57 करोड़ पड़े थे।

Lohia Corp IPO: 27 एंकर इनवेस्टर्स से जुटाए ₹492 करोड़

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Xtranet Technologies IPO: आईटी सेक्टर के इस आईपीओ में निवेश का मौका! क्या आपको करना चाहिए अप्लाई? यहां जानें

Xtranet Technologies IPO Details: आईपीओ में पैसे लगाने वाले निवेशकों के लिए आज से एक और नया मौका खुल गया है। मध्य प्रदेश की आईटी सॉल्यूशंस प्रोवाइडर कंपनी एक्सट्रानेट टेक्नोलॉजीज का ₹167 करोड़ का आईपीओ आज यानी 23 जुलाई से दांव लगाने के लिए खुल गया है। कंपनी के अनलिस्टेड शेयर ग्रे मार्केट में अच्छे प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। आइए आपको बताते हैं ब्रोकरेज की राय सहित इस आईपीओ से जुड़ी हर जरूरी बात।

Xtranet Technologies IPO का प्राइस बैंड और लॉट साइज

  • प्राइस बैंड: ₹120 से ₹127 प्रति शेयर।
  • रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश: ₹13,970
  • इश्यू ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 23-27 जुलाई
  • शेयर अलॉटमेंट डेट: 28 जुलाई
  • लिस्टिंग डेट (BSE & NSE): 30 जुलाई

एंकर इनवेस्टर्स से जुटाए ₹50 करोड़

यह ₹167 करोड़ का आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू है, जिसमें 1.31 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। आम लोगों के लिए आईपीओ खुलने से ठीक पहले कंपनी ने एंकर इनवेस्टर्स से ₹50.04 करोड़ जुटाए हैं। प्रमुख एंकर इनवेस्टर्स सेंट कैपिटल फंड, विनी ग्रोथ फंड, लॉन्गथ्राइव कैपिटल और टॉरस म्यूचुअल फंड शामिल हैं।

आईपीओ से मिले पैसों का इस्तेमाल कंपनी ₹102 करोड़ वर्किंग कैपिटल जरूरतों, ₹20.2 करोड़ कर्ज चुकाने और ₹8.48 करोड़ नए सिस्टम व हार्डवेयर खरीदने पर खर्च करेगी।

कंपनी की वित्तीय सेहत और ऑर्डर बुक

2002 में स्थापित यह कंपनी एंटरप्राइज एप्लीकेशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, मैनेज्ड सर्विसेज और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स के क्षेत्र में एंड-टू-एंड आईटी सॉल्यूशंस प्रदान करती है।

फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) साल-दर-साल 35.6% बढ़कर ₹40.73 करोड़ हो गया। इस दौरान कुल रेवेन्यू 32.3% बढ़कर ₹365.3 करोड़ पर पहुंच गया। 30 अप्रैल 2026 तक कंपनी के पास ₹356.96 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक थी।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा है GMP?

IPO मार्केट पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, 23 जुलाई को एक्सट्रानेट टेक्नोलॉजीज का ग्रे मार्केट प्रीमियम ₹13 प्रति शेयर दर्ज किया गया। इस हिसाब से इसका संभावित लिस्टिंग प्राइस ₹140 रह सकता है। अगर GMP के अनुमानों के मुताबिक लिस्टिंग होती है तो इसमें पैसा लगाने वाले निवेशकों को करीब 10% से ज्यादा का मुनाफा हो सकता है।

एक्सपर्ट्स की राय: क्या लगाएं पैसा?

ब्रोकरेज फर्म स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट ने इस आईपीओ को मध्यम अवधि और मध्यम जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए ‘Subscribe’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ काफी मजबूत है और इसका वैल्यूएशन मौजूदा वित्तीय प्रदर्शन के हिसाब से सही है।

Indo-MIM IPO: पैसे कर लें तैयार! कल से खुलेगा ₹3,811 करोड़ का मेगा मेनबोर्ड आईपीओ, ग्रे मार्केट में 40% ऊपर चल रहा भाव

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Lohia Corp IPO: कल से खुलेगा लोहिया कॉर्प का ₹1101 करोड़ का आईपीओ, पैसा लगाने से पहले जान लें ब्रोकरेज की राय

Lohia Corp IPO GMP and Details: प्राइमरी मार्केट में निवेशकों को पैसा बनाने का एक और जबरदस्त मौका मिलने जा रहा है। टेक्निकल टेक्सटाइल और वोवन प्लास्टिक इंडस्ट्री के लिए मशीनरी बनाने वाली कंपनी लोहिया कॉर्प लिमिटेड का करीब ₹1,101 करोड़ का आईपीओ कल यानी 23 जुलाई से दांव लगाने के लिए खुल रहा है।

बाजार में एंट्री से पहले ही ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर अच्छे प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी ने भी इस इश्यू को लंबी अवधि के लिए ‘सब्सक्राइब’ करने की सलाह दी है। आइए जानते हैं इस आईपीओ का प्राइस बैंड, जीएमपी, जरूरी तारीखें, कंपनी की वित्तीय सेहत और ब्रोकरेज की राय।

Lohia Corp IPO का प्राइस बैंड और लॉट साइज

  • प्राइस बैंड: ₹404 से ₹425 प्रति शेयर
  • रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश: ₹14,875
  • इश्यू ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 23-27 जुलाई
  • शेयर अलॉटमेंट डेट: 28 जुलाई
  • लिस्टिंग डेट (BSE & NSE): 30 जुलाई

यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित है। इश्यू का साइज ₹1,101.28 करोड़ है जिसमें प्रमोटर्स 2.59 करोड़ शेयरों की बिक्री कर रहे है। चूंकि यह पूरी तरह से OFS है, इसलिए आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स को जाएगी, कंपनी के खाते में कोई फंड नहीं आएगा।

कंपनी का बिजनेस मॉडल और वित्तीय सेहत

लोहिया कॉर्प टेक्निकल टेक्सटाइल और Raffia इंडस्ट्री के लिए मशीनरी और इक्विपमेंट बनाने वाली ग्लोबल दिग्गज है। यह सीमेंट, उर्वरक, केमिकल्स, फूड ग्रेंस और बैग्स की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक और बोरे बनाने की मशीनें बनाती है।

वित्त वर्ष 2025 में भारतीय वोवन राफिया मशीनरी बाजार में कंपनी की 40.7% की हिस्सेदारी थी, जबकि वैश्विक बाजार में इसकी हिस्सेदारी 15.4% है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) 64.16% बढ़कर ₹193.45 करोड़ हो गया, जो वित्त वर्ष 2025 में ₹117.84 करोड़ था। इसी दौरान कंपनी का रेवेन्यू 24.70% बढ़कर ₹1,717 करोड़ पर पहुंच गया।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा है जीएमपी?

InvestorGain के आंकड़ों के मुताबिक, 22 जुलाई को लोहिया कॉर्प का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹40 प्रति शेयर दर्ज किया गया। इसका अपर प्राइस बैंड ₹425 है इस हिसाब से अनुमानित लिस्टिंग प्राइस: ₹465 प्रति शेयर (₹425 + ₹40) रह सकता है। इस GMP पर निवेशकों को करीब 10% का लिस्टिंग गेन मिलने की संभावना है।

Indo-MIM IPO: पैसे कर लें तैयार! कल से खुलेगा ₹3,811 करोड़ का मेगा मेनबोर्ड आईपीओ, ग्रे मार्केट में 40% ऊपर चल रहा भाव

ब्रोकरेज की राय क्या है?

ब्रोकरेज हाउस आनंद राठी ने इस आईपीओ को ‘Subscribe for Long Term’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि हालांकि कंपनी का राजस्व मुख्य रूप से एक ही सेगमेंट पर निर्भर है, लेकिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मजबूत पकड़ और ग्रोथ क्षमता को देखते हुए लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक अच्छा विकल्प है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Indo-MIM IPO: पैसे कर लें तैयार! कल से खुलेगा ₹3,811 करोड़ का मेगा मेनबोर्ड आईपीओ, ग्रे मार्केट में 40% ऊपर चल रहा भाव

Indo MIM IPO Details & GMP: अगर आप आईपीओ मार्केट में दांव लगाने की योजना बना रहे हैं, तो बेंगलुरु बेस्ड प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर इंडो-एमआईएम का बड़ा आईपीओ कल यानी 23 जुलाई से खुल रहा है। ₹3,811.21 करोड़ का यह मेनबोर्ड आईपीओ बाजार में दस्तक देने से पहले ही ग्रे मार्केट में धमाल मचा रहा है।

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, कंपनी के शेयर ग्रे मार्केट में करीब 40% के तगड़े प्रीमियम (GMP) पर ट्रेड कर रहे हैं, जो लिस्टिंग के दिन शानदार रिटर्न का संकेत दे रहा है। आइए जानते हैं इस आईपीओ की प्राइस बैंड, जरूरी तारीखें, वित्तीय सेहत और अन्य प्रमुख बातें।

Indo-MIM IPO की सभी जरूरी डिटेल्स

  • एंकर इनवेस्टर्स के लिए बिडिंग: 22 जुलाई
  • इश्यू ओपनिंग और क्लोजिंग डेट: 23 से 27 जुलाई
  • प्राइस बैंड: ₹461 से ₹485 प्रति शेयर
  • रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश: ₹14,550
  • शेयर अलॉटमेंट की तारीख: 28 जुलाई
  • लिस्टिंग डेट (BSE & NSE): 30 जुलाई

इश्यू साइज और फंड का इस्तेमाल

यह आईपीओ कुल ₹3,811.21 करोड़ का है जिसमें ₹500 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹3,312 करोड़ ऑफर फॉर सेल (OFS) है। ओएफएस के तहत ग्रीन मीडोज इन्वेस्टमेंट्स 6.05 करोड़ शेयर, अनुराधा कोडुरी 54.59 लाख शेयर और आईआईटी मद्रास 23.07 लाख शेयर बेच रहे हैं।

फ्रेश इश्यू से मिलने वाले ₹500 करोड़ में से ₹400 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। कंपनी का मई 2026 तक कंपनी पर कुल ₹1,212.3 करोड़ का बकाया कर्ज था। बाकी फंड का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए होगा।

कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और बिजनेस

1996 में स्थापित इंडो-एमआईएम (Indo-MIM) मेटल इंजेक्शन मोल्डिंग (MIM) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स बनाती है। कंपनी ऑटोमोटिव, डिफेंस, मेडिकल, कंज्यूमर और एयरोस्पेस सेक्टर्स के लिए काम करती है। फाइनेंशियल ग्रोथ की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल (YoY) 26% बढ़कर ₹533.5 करोड़ हो गया। इसी अवधि में परिचालन राजस्व भी 26% बढ़कर ₹4,193 करोड़ पर पहुंच गया।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा है जीएमपी?

आईपीओ मार्केट पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म्स Investorgain और IPO Watch के मुताबिक, 22 जुलाई की सुबह इंडो-एमआईएम के शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹194 से ₹195 प्रति शेयर दर्ज किया गया। इसकी संभावित लिस्टिंग प्राइस ₹485 (अपर प्राइस बैंड) + ₹195 (GMP) = ₹680 प्रति शेयर हो सकती है। निवेशकों को इस आईपीओ की लिस्टिंग पर ही करीब 40.21% का मुनाफा हो सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Funds Management Shares: ₹750 तक जा सकता है स्टॉक, Emkay ने खरीदने की सलाह दी

SBI Funds Management Shares: SBI Mutual Fund चलाने वाली कंपनी SBI Funds Management की शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत हुई। कंपनी का शेयर ₹574 के IPO प्राइस के मुकाबले 6.84% प्रीमियम के साथ ₹613.30 पर NSE में लिस्ट हुआ। कारोबार के दौरान यह ₹624.95 तक पहुंचा। हालांकि दिन के अंत में शेयर ₹609.75 पर बंद हुआ, जो लिस्टिंग प्राइस से 0.58% नीचे है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹1.24 लाख करोड़ रहा।

Emkay ने दी ‘Buy’ रेटिंग

ब्रोकरेज फर्म Emkay Global ने शेयर पर कवरेज शुरू करते हुए ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने ₹750 का टारगेट प्राइस रखा है। यह IPO प्राइस के मुकाबले करीब 31% और मौजूदा क्लोजिंग भाव के मुकाबले करीब 23% की संभावित तेजी दिखाता है।

Emkay के बुलिश रुख की वजह

Emkay का मानना है कि भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की लंबी अवधि की ग्रोथ का सबसे बड़ा फायदा SBI Funds Management को मिल सकता है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, SBI का मजबूत ब्रांड और बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क कंपनी की सबसे बड़ी ताकत है। फिलहाल SBI Mutual Fund के करीब 55 लाख ग्राहक हैं, जबकि SBI के 2.1 करोड़ सैलरी अकाउंट हैं। यानी अभी भी कंपनी के पास नए ग्राहकों को जोड़ने की बड़ी गुंजाइश है, खासकर B-30 शहरों और ग्रामीण इलाकों में।

अब किस फैक्टर पर फोकस रहेगा?

Emkay को उम्मीद है कि कंपनी धीरे-धीरे इक्विटी म्यूचुअल फंड, AIF और PMS जैसे ज्यादा मार्जिन वाले प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ाएगी। इससे कमाई बेहतर हो सकती है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY26 से FY29 के बीच कंपनी का EBITDA CAGR करीब 17% रह सकता है।

क्या हैं जोखिम?

Emkay ने कुछ जोखिम भी बताए हैं। SBI के नेटवर्क से नए ग्राहक कम जुड़ सकते हैं। म्यूचुअल फंड स्कीमों का प्रदर्शन कमजोर पड़ सकता है। शेयर बाजार में लंबे समय तक सुस्ती रह सकती है। रेगुलेटरी नियमों में बदलाव भी कंपनी की ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं।

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जब इंफोसिस के ड्राइवर, इलेक्ट्रीशियन बने करोड़पति! जानें नारायण मूर्ति का वो फैसला जो बनी कॉरपोरेट इंडस्ट्री की सबसे अनोखी कहानी

Infosys Drivers-Electricians Became Crorepatis: भारतीय कॉरपोरेट जगत के इतिहास में जब भी संपत्ति बनाने की बात आती है, तो इंफोसिस का नाम सबसे ऊपर आता है। यह कहानी सिर्फ एक आईटी कंपनी के सफल होने की नहीं है, बल्कि एक दूरदर्शी संस्थापक के उस फैसले की है जिसने आम मध्यमवर्गीय कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि ऑफिस के ड्राइवर्स और इलेक्ट्रिशियन तक की किस्मत हमेशा के लिए बदल दी।

साल 1999 में जब इंफोसिस के कर्मचारी करोड़पति बने, तो पूरा भारतीय कॉरपोरेट जगत हैरान रह गया था। आइए जानते हैं कि नारायण मूर्ति के उस एक फैसले ने कैसे इतिहास रच दिया।

1993 में आया था IPO, जब मॉर्गन स्टेनली बनी ‘मददगार’

बहुत कम लोग जानते हैं कि 1993 में जब इंफोसिस का IPO ₹95 प्रति शेयर के भाव पर आया था, तो शुरुआत में इसे पर्याप्त सब्सक्रिप्शन नहीं मिला था। उस समय ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली आगे आई और इश्यू प्राइस पर कंपनी की 13% हिस्सेदारी खरीदकर इसे बचाया। किसी को अंदाजा नहीं था कि भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में यह अब तक का सबसे सफल दांव साबित होने वाला है।

ESOP पर 1994 का वो ऐतिहासिक फैसला जिससे पलटी किस्मत 

साल 1994 में इंफोसिस ने ‘एंप्लॉय स्टॉक ऑप्शन प्लान’ (ESOP) शुरू किया। इंफोसिस ऐसा करने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी। पूर्व सीएफओ टी.वी. मोहनदास पाई के अनुसार, इस योजना का दायरा इतना बड़ा था कि यह केवल सीनियर इंजीनियर्स और मैनेजरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कंपनी के निचले स्तर के कर्मचारियों को भी दी गई।

नारायण मूर्ति का स्पष्ट मानना था कि, ‘कंपनी का विकास तभी सार्थक है, जब उसे बनाने वाले हर एक स्टेकहोल्डर और कर्मचारी का विकास उसके साथ हो।’

1999 में Nasdaq पर लिस्टिंग और शेयर में छप्परफाड़ तेजी

मार्च 1999 में इंफोसिस अमेरिका के नेस्डैक एक्सचेंज पर लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी। इस ग्लोबल लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरों की मांग पूरी दुनिया में रातों-रात बढ़ गई।

इश्यू प्राइस (1993): ₹95 प्रति शेयर

शेयर प्राइस (1999): ₹8,100 के करीब

मात्र 6 साल के भीतर शेयर की कीमत में आई इस ऐतिहासिक तेजी ने कागजी संपत्ति को असली पैसों में बदल दिया।

जब ड्राइवर और बिजली मिस्त्री भी बन गए ‘करोड़पति’

1999 के समय में जहां एक औसत इंजीनियर की सैलरी लगभग ₹8,000 प्रति महीना होती थी, वहीं इंफोसिस के लगभग 1,800 कर्मचारी ESOP की बदौलत डॉलर मिलियनेयर बन चुके थे। इसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि कंपनी में काम करने वाले ड्राइवर्स, इलेक्ट्रिशियन और सपोर्ट स्टाफ, जिन्हें स्टॉक ऑप्शंस मिले थे, वे भी रातों-रात करोड़पति बन गए थे।

भारत के मध्यमवर्ग के लिए केवल सैलरी से नहीं, बल्कि कंपनी के शेयर लंबे समय तक होल्ड करके इतनी बड़ी संपत्ति बनाने का यह बिल्कुल नया और आंखें खोल देने वाला विचार था।

₹10,000 से ₹4 लाख करोड़ तक का सफर

मात्र ₹10,000 की उधारी पूंजी से शुरू हुई इंफोसिस ने आगे चलकर ₹4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के मार्केट कैप के आंकड़े को पार किया। 1999 का दौर वह मोड़ था जिसने यह साबित किया कि यदि कंपनी अपनी सफलता में हर योगदान देने वाले को हिस्सेदार बनाती है, तो साधारण लोग भी असाधारण रूप से समृद्ध हो सकते हैं।