India US Trade Deal: अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि एक साल से भी अधिक समय तक चली वार्ता के बाद भारत और अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। वहीं, भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि दोनों देश अब तकनीकी विवरणों को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और अगले कुछ हफ्तों के भीतर इस समझौते पर सहमति बन सकती है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब ट्रंप से भारत-अमेरिका ट्रेड डील की संभावनाओं पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘वे डील करना चाहते हैं। हम भी डील करने जा रहे हैं। हां, हम इसके बेहद करीब हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता ‘काफी अलग तरह का सौदा हो सकता है’, हालांकि उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी।
मार्को रुबियो बोले: ‘महीनों नहीं, हफ्तों में हो सकती है डील’
भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ‘नेटवर्क18’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को कुछ ही हफ्तों में अंतिम रूप दिया जा सकता है।
रुबियो ने कहा, ‘हम बेहद करीब हैं। मुझे लगता है कि हम अब उन तकनीकी विवरणों पर आ गए हैं जिन्हें सुलझाया जाना बाकी है। तकनीकी बारीकियां इसलिए मायने रखती हैं क्योंकि दोनों पक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि समझौते की भाषा और प्रावधानों का अर्थ दोनों देशों के लिए एक समान हो।’
रुबियो ने स्पष्ट किया कि हालांकि वे सीधे तौर पर बातचीत की मेज पर नहीं हैं और यह प्रक्रिया अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा संभाली जा रही है, लेकिन वे इसकी प्रगति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘वाशिंगटन को उम्मीद है कि यह समझौता महीनों में नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों के भीतर पूरा हो जाएगा।’
क्या भारत को मिलेंगे बेहतर टैरिफ रेट्स?
जब रुबियो से पूछा गया कि क्या भारत अन्य देशों की तुलना में अधिक अनुकूल टैरिफ दरों की उम्मीद कर सकता है, तो उन्होंने कहा कि किसी भी व्यापार समझौते का मुख्य उद्देश्य मौजूदा दरों की तुलना में बेहतर शर्तें हासिल करना होता है।
उन्होंने कहा, ‘जाहिर है कि डील करने का मकसद यही होता है कि अभी जो दरें हैं, उनसे बेहतर दरें मिलें।’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह समझौता लंबे समय तक टिकाऊ तभी रहेगा जब यह दोनों देशों के आर्थिक हितों को पूरा करेगा।
रुबियो ने स्वीकार किया कि भारत भी अन्य देशों की तरह बातचीत के दौरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा, लेकिन दोनों देशों के मजबूत रिश्ते मतभेदों को दूर करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा, ‘जब आप दोस्त और सहयोगी होते हैं, तो यही बात आपको मतभेदों को मिटाने और एक ऐसे समझौते पर पहुंचने में मदद करती है जो दोनों के लिए फायदेमंद हो।’
रणनीतिक स्तर पर बढ़ी उम्मीदें
दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों से लंबे समय से रुके इस व्यापार समझौते को लेकर उत्साह बढ़ा है। हाल ही में नई दिल्ली में ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे ने कहा था कि ‘मुख्य मुद्दों का समाधान हो गया है’ और दोनों देश समझौते के बहुत करीब हैं।
दूसरी ओर, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बातचीत की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा था कि दोनों पक्ष एक समझौते की ओर बढ़ रहे हैं।
कुल मिलाकर ट्रंप और रुबियो ने संकेत दिए हैं कि भारत और अमेरिका ऐतिहासिक ट्रेड डील के बेहद करीब हैं। रुबियो के अनुसार, वार्ता अब अंतिम चरण में है और केवल तकनीकी बारीकियों को सुलझाया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ हफ्तों में दोनों देश पारस्परिक रूप से फायदेमंद और बेहतर टैरिफ दरों वाले व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।







