Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना ₹4300 चढ़ा, चांदी एक दिन में ₹10000 उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 20 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों को पंख लग गए। सोना 4,300 के उछाल के साथ 1,62,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने का तीन महीने का सबसे ज्यादा प्राइस है। चांदी में भी जोरदार तेजी दिखी। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमजोरी बताई जा रही है।

चांदी 10,000 रुपये के उछाल से 7 हफ्ते की उंचाई पर

20 अगस्त को चांदी में 10,000 रुपये की जोरदार तेजी आई। इससे इसका भाव 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। यह बीते सात हफ्तों में चांदी का सबसे ज्यादा भाव है। इससे पहले 3 जुलाई को चांदी की कीमतें इस लेवल पर थीं। लंबे समय बाद सोने और चांदी में अच्छी तेजी दिखी है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर से नरमी बुलियन को सपोर्ट 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “सोना गुरुवार को बीते दो महीनों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी है।” उन्होंने कहा कि डॉलर इंडेक्स तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया है। डॉलर में कमजोरी से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में नरमी दिखी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में नरमी देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 0.95 फीसदी गिरकर 4,475 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर हल्की तेजी के साथ 67 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया।

बेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के पार 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाया है। उधर, ईरान का कहना है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इस तनातनी की वजह से क्रूड की कीमतों में तेजी जारी है।

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क्रूड में तेजी जारी रहने से महंगाई बढ़ने का डर

अगर लंबे समय तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहती हैं तो इससे महंगाई बढ़ने का खतरा होगा। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सहित दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इसका सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ेगा।

Nifty में 7 सत्रों के बाद लौटी तेजी, क्या शेयर बाजारों में यह तेजी जारी रहेगी?

शेयर बाजारों में 20 अगस्त को रौनक लौट आई। निफ्टी में लगातार 7 सत्रों की गिरावट के बाद तेजी आई। चौतरफा खरीदारी ने बाजार में जोश भरा। हालांकि, मध्यपूर्व में तनाव घटने की जगह बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाया है। इससे क्रूड में तेज उछाल है। ब्रेंट क्रूड का भाव 94 डॉलर के पार हो गया है।

निफ्टी और सेंसेक्स में अच्छी रिकवरी

Nifty कारोबार खत्म होने पर 0.64 फीसदी यानी 153 अंक चढ़कर 24,231 पर बंद हुआ। सेंसेक्स भी 0.82 फीसदी यानी 628 अंक के उछाल के साथ 77,537 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में भी 0.45 फीसदी की मजबूती आई। शेयर बाजारों के करीब सभी प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए।

निफ्टी आईटी इंडेक्स में अच्छी तेजी

सबसे ज्यादा तेजी निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक और निफ्टी आईटी में आई। चढ़ने वाले प्रमुख शेयरों में मुथूट फाइनेंस, वेदांता, हिंदुस्तान जिंक, इटर्नल, श्रीराम फाइनेंस, जिंदल स्टील शामिल रहे। गिरने वाले वाले शेयरों में पीएफसी, आरईसीएल, सीमेंस एनर्जी, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और टाटा कंज्यूमर शामिल थे।

बुल और बेयर्स में किसका पलड़ा भारी

कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा कि आज प्रमुख सूचकांकों में पुलबैक दिखा। निफ्टी 154 अंक चढ़कर बंद हुआ। सेंसेक्स 628 अंक उछला। उन्होंने कहा कि डेली चार्ट्स पर डोजी कैंडलस्टिक पैटर्न दिख रहा है। यह बुल और बेयर्स के बीच मामला फंसे होने का संकेत है। इसका मतलब है कि पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि अभी किसका पलड़ा भारी है।

24,100 का लेवल बना रहा तो जारी रह सकती है पुलबैक

उन्होंने कहा कि निफ्टी का 50-डे SMA 24,150 है, जो ट्रेडर्स के लिए एक प्रमुख सपोर्ट लेवल दिख रहा है। जब तक बाजार इस लेवल के ऊपर बना रहेगा, पुलबैक जारी रह सकती है। तेजी की स्थिति में निफ्टी 24,350-24,500 तक जा सकता है। अगर निफ्टी 24,100 के नीचे जाता है तो ट्रेडर्स के लिए तेजी के सौदे काटना ठीक रहेगा।

इंडिया वीआईएक्स 5 फीसदी गिरा

इंडिया वीआईएक्स इस बीच 5.01 फीसदी गिरकर 10.76 पर आ गया। यह 8 जून, 2026 के बाद इसका सबसे निचला क्लोजिंग लेवल है। यह अपने शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेजेज से भी नीचे है। इससे मार्केट में उतार-चढ़ाव कम रहने और स्टैबिलिटी का संकेत मिलता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर इंडेक्स में कमी से बाजार को सपोर्ट मिला है। लेकिन, मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ता दिख रहा है। इससे क्रूड की कीमतें लगातार चढ़ रही है। यह बाजार के लिए अच्छा नहीं है।

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तेजी लंबे समय तक जारी रहने पर संदेह

भारतीय बाजारों में तेजी जारी रहने के लिए क्रूड ऑयल की कीमतों का नीचे आना जरूरी है। ऐसा तभी होगा जब अमेरिका-ईरान में डील के लिए बातचीत शुरू होगी। फिलहाल इसके संकेत नहीं दिख रहे है। इसका मतलब है कि 20 अगस्त को बाजार में आई तेजी के लंबे समय तक जारी रहने की उम्मीद कम है।

मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने से ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर के पार, भारत के इंपोर्ट बिल में आ सकता है बड़ा उछाल

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने का असर 20 अगस्त को क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखा। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 94 डॉलर को पार कर गई। डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव भी 87 डॉलर के पार हो गया। क्रूड में उछाल का असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिला।

ट्रंप के आक्रामक रुख से मध्यपूर्व में संकट गहराया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ईरान के खिलाफ ऐसे सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जो अब तक किसी देश के खिलाफ नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने ईरान की आर्थिक रूप से मदद करने वाले देशों को भी चेताया है। इधर, ईरान पर ट्रंप के रुख का कोई असर नहीं पड़ा है। इससे मध्यपूर्व में स्थिति गंभीर हो गई है।

लगातार चौथे दिन क्रूड ऑयल की कीमतो में उछाल

ट्रंप के ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाने से लगातार चौथे दिन क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी रही। भारतीय समय के मुताबिक, शाम 5 बजे ब्रेंट क्रूड का भाव 2.63 फीसदी के उछाल के साथ 94.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3 फीसदी उछाल के साथ 86.92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

सीजफायर के बाद क्रूड ऑयल में आई थी नरमी

इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई थी। इसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया था। एक समय ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। जून में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के ऐलान से क्रूड में गिरावट आई थी। लेकिन, युद्धविराम की अवधि बीत जाने के बाद फिर से क्रूड में तेजी दिख रही है।

भारत 85 फीसदी क्रूड की जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है

क्रूड की कीमतों में उछाल भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। भारत अपनी जरूरत के करीब 85 फीसदी क्रूड का इंपोर्ट करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है। इसका सीधा असर भारत के व्यापार घाटा पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले तेज गिराव के बाद रुपये में स्थिरता दिख रही है। लेकिन, अगर क्रूड की कीमतें लंबे समय तक हाई लेवल पर बनी रहती हैं तो फिर से रुपये पर दबाव दिख सकता है।

अप्रैल-जुलाई के बीच इंपोर्ट बिल में 56 फीसदी उछाल

अप्रैल-जुलाई के बीच भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल 56.5 फीसदी बढ़कर 63.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, वॉल्यूम में ज्यादा बदलाव नहीं आया। इसका मतलब है कि क्रूड की कीमतों में उछाल इंपोर्ट बिल बढ़ने का मुख्य कारण है। इस साल अप्रैल-जुलाई में भारत ने 8.19 करोड़ टुन क्रूड का आयात किया। एक साल पहले की समान अवधि में 8.15 करोड़ टन क्रूड का आयात हुआ था।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां 4 बार बढ़ा चुकी हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

भारत सालाना 1.8-2 अरब बैरल क्रूड ऑयल का इंपोर्ट करता है। क्रूड की कीमतों में प्रति बैरल 1 डॉलर के इजाफा से देश का इंपोर्ट बिल एक साल में 2 अरब डॉलर तक बढ़ जाता है। जून में अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर से पहले क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ाई थीं। इसका सीधा असर लोगों के बजट पर पड़ा। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों सहित दूसरी चीजें भी महंगी हुईं।

‘US अलग-थलग करने की कार्रवाई करेगा’; ईरान की मदद करने वाले देशों को ट्रंप की बड़ी धमकी

US-Iran War Update: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि जो भी देश, कंपनियां या संस्थाएं ईरान के साथ व्यापार करेंगी या उसकी अर्थव्यवस्था को किसी भी तरह से मदद पहुंचाएंगी, उन्हें ‘बहुत गंभीर आर्थिक परिणाम’ भुगतने पड़ सकते हैं।

ट्रंप ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलगाव की नीति अपनाने जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अमेरिका के साथ समझौता करने के अवसर थे। लेकिन उसने उन्हें गंवा दिया।

‘किसी भी देश के लिए होंगे गंभीर आर्थिक परिणाम’

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि कोई देश या उसकी वित्तीय संस्थाएं, कारोबारी प्रतिष्ठान, एयरपोर्ट अथवा सरकारी एजेंसियां ईरान को आर्थिक मदद या किसी तरह की ‘लाइफलाइन’ उपलब्ध कराती हैं, तो उसे अमेरिका की ओर से बहुत बड़े आर्थिक परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए व्यापक अभियान चलाएगा। इसका मकसद ईरान तक पहुंचने वाले आर्थिक संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क को रोकना होगा।

तेल तस्करी से लेकर कैश ट्रांसफर तक पर नजर

ट्रंप ने विशेष रूप से ईरान से जुड़े कई आर्थिक रास्तों को बंद करने की बात कही। इनमें तेल की तस्करी, करेंसी स्वैप व्यवस्था, कैश ट्रांसफर, एक्सचेंज हाउस के जरिए लेन-देन, जहाजों की रजिस्ट्री और ईरान से जुड़ी फ्रंट कंपनियां शामिल हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि इन माध्यमों के जरिए ईरान को मिलने वाली आर्थिक मदद उसकी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए अमेरिका इन चैनलों पर व्यापक कार्रवाई करना चाहता है।

ट्रंप ने इसे बताया ‘Economic D-Day’

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में इस अभियान को ‘Economic D-Day’ करार दिया। उन्होंने अमेरिका के सहयोगी देशों से भी इस अभियान में साथ आने की अपील की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सभी सहयोगियों को ईरान को अलग-थलग करने और उसके खतरे को खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ खड़ा होना चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, यह अभियान ईरान की आर्थिक क्षमता को कमजोर करने की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

‘ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे’

ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपना पुराना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि प्रस्तावित आर्थिक प्रतिबंध और अलगाव के कदम ईरान की वैश्विक स्तर पर आतंक फैलाने या अपनी ताकत का इस्तेमाल करने की क्षमता को कमजोर कर देंगे।

ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व के लिए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि वे मुश्किल स्थिति में हैं।अमेरिका द्वारा उठाए जाने वाले ये ऐतिहासिक कदम उन्हें और कमजोर कर देंगे।

वैश्विक कारोबार पर भी पड़ सकता है असर

अगर ट्रंप प्रशासन इन धमकियों को व्यापक आर्थिक प्रतिबंधों में बदलता है, तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रह सकता। ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों, तेल कारोबारियों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े संस्थानों पर भी अमेरिकी दबाव बढ़ सकता है।

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इससे उन देशों के सामने भी चुनौती खड़ी हो सकती है जो ईरान के साथ ऊर्जा, व्यापार या वित्तीय संबंध बनाए रखना चाहते हैं। ट्रंप की ताजा चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। अमेरिका का स्पष्ट संदेश है कि ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के अभियान में जो देश या कारोबारी संस्थाएं बाधा बनेंगी, उन्हें भी अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

Nifty 50 लगातार सातवें दिन गिरा, क्या यह 24000 के नीचे चला जाएगा? जानिए एक्सपर्ट्स के जवाब

निफ्टी में लगातार सातवें सत्र गिरावट आई। बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर शेयर बाजारों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगातार 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। इससे दुनियाभर में महंगाई के पैर पसारने का डर बढ़ गया है। बीते 7 सत्रों में निफ्टी 2.1 फीसदी गिरा है। बीएसई सेंसेक्स में बीते 7 सत्रों में से 6 में गिरावट आई है। वह भी इस दौरान 2.1 फीसदी गिरा है।

इन सूचकांकों में सबसे ज्यादा गिरावट

19 अगस्त को निफ्टी आईटी का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। इसने बाजार को कुछ सहारा दिया है। सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी मीडिया, एनर्जी और एफएमसीजी इंडेक्स में आई। इससे निफ्टी 50 इंडेक्स 0.32 फीसदी गिरकर 24,078 पर क्लोज हुआ। सेंसेक्स भी 0.42 फीसदी गिरकर 76,909 अंक पर आ गया।

बीते 12 सत्रों से निफ्टी में कंसॉलिडेशन

एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी बीते 12 सत्रों से कंसॉलिडेशन में रहा है। अब इसके लिए अगला सपोर्ट 24,000-23,800 पर है। कोटक सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “इंट्राडे में मार्केट का टेक्स्चर कमजोर है। लेकिन, अगर निफ्टी एक बार 24,150 के लेवल को तोड़ देता है तो पुलबैक रेली से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद निफ्टी 24,300-24,350 तक जा सकता है।”

24000 के नीचे जाने पर बिकवाली बढ़ेगी

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरावट की स्थिति में अगर यह 24,000 के नीचे जाता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। फिर यह गिरकर 23,900-23,850 तक जा सकता है। एसबीआई सिक्योरिटीज के सुदीप शाह ने भी कहा कि शेयर बाजारों में रिस्क लेने की क्षमता घटी है। निफ्टी में लगातार बिकवाली का दबाव दिख रहा है।

क्रूड ऑयल की कीमतों का सेंटीमेंट पर असर

उन्होंने कहा कि शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर सबसे ज्यादा असर क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों का पड़ रहा है। क्रूड में उछाल की वजह यह है कि मध्यपूर्व में टेंशन कम होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है। इस वजह से ब्रेंट क्रूड उछलकर तीन महीनों के हाई पर पहुंच गया है। यह 92 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है।

मध्यपूर्व में टेंशन कम होने के फिलहाल संकेत नहीं 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 अगस्त को कहा कि ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला है। लेकिन, ईरान का दावा इसके उलट है। उसने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही नहीं हो रही है। दोनों पक्षों के दावा में विरोधाभास है। इससे यह संकेत मिलता है कि बीते छह महीनों से जारी यह लड़ाई जारी रह सकता है।

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ईरान और अमेरिका के बीच लगभग छह महीने से चल रहा युद्ध, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों से हुई थी, अब एक तनावपूर्ण गतिरोध में बदल गया है। जिसका नाम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। ट्रंप इस जलमार्ग पर बार बार दावा ठोक रहे हैं और ईरान कह रहा है कि ये जलमार्ग ईरान का था, ईरान का ही रहेगा। अब ताजा घटनाक्रम में ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेज़ाई ने होर्मुज़ (Strait of Hormuz) पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे का मज़ाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि होर्मुज को फिर से खोलने में अमेरिका की नाकामी और उस पर अपना दावा करने के बीच का फ़ासला, अमेरिका की राजधानी और होर्मुज के बीच की 7,000 मील की दूरी से भी ज़्यादा है। 

कोलकाता के होटल में लगी भयानक आग, 9 लोगों की मौत : कोलकाता से एक बेहद ही दर्दनाक खबर सामने आई है। कोलकाता में मिर्ज़ा ग़ालिब स्ट्रीट पर बने एक होटल में भीषण आग लग गई, जिसमें झुलसकर 9 लोगों की मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक होटल में आग आज देर रात दो बजे के बाद लगी। इस होटल के ज्यादातर लोग बांग्लादेश के सीमावर्ता इलाके के रहने वाले थे और बांग्लादेश से इलाज के लिए कोलकाता आए थे। रात के तीन बजे के बाद घटनास्थल से 9 लोगों को रेस्क्यू किया गया और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया। हॉस्पिटल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कहा जा रहा है कि होटल के खिलाफ आरोप है कि होटल पर आग बुझाने का कोई व्यवस्था नहीं था। कम से कम 2 घंटे के कोशिश के बाद आग पर अभी काबू पा लिया गया है।

सपा नेता आज़म ख़ान के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी : समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान के ठिकानों पर आज अहले सुबह से ईडी की छापेमारी जारी है। ईडी की ये छापेमारी जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में काले धन के इस्तेमाल को लेकर दर्ज मामले में कार्रवाईसे संबंधित है। आज़म खान के ख़िलाफ़ दर्ज करीब कई दर्जन मामलों की लिस्ट ED से साथ शेयर हुई थी। जानकारी के मुताबिक ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी पर भी छापेमारी की जा रही है। आजम खान के रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली सहित कुल 10 ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई जारी है। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के लखनऊ ज़ोनल ऑफ़िस ने आज मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में 10 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की चल रही जांच के सिलसिले में की गई। यह जांच सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के फंड को प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स के ज़रिए दूसरी जगह लगाने और बाद में उनके इस्तेमाल (जिसमें यूनिवर्सिटी/ट्रस्ट के लिए संपत्ति बनाना भी शामिल है) से जुड़ी है।

धमकी देते-देते अमेरिका ने कर लिया होर्मुज पर कब्जा? डोनाल्ड ट्रंप के पोस्ट से ईरान का पारा हाई, दुनिया में बढ़ेगी टेंशन

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बयान दे रहे हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने सोशल मीडिया ट्रुथ पर एक पोस्ट में लिखा था कि होर्मुज पर हमने ‘स्टील की दीवार’ खड़ी कर दी है और वह पूरी तरह अमेरिका के नियंत्रण में है। जिसका ईरान ने पूरी तरह से खंडन किय

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Strait of Hormuz Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक दावे ने ‘होर्मुज की खाड़ी’ में तनाव को और भड़का दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर स्ट्रैट ऑफ होर्मुज का एक नक्शा शेयर करते हुए उसे ‘New U.S. Territory’ यानी उन्होंने अपने पोस्ट में होर्मुज को अमेरिका का नया क्षेत्र करार दिया है।

ट्रंप का यह पोस्ट ऐसे समय में आया है जब ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को फिर से खोलने की इजाजत नहीं देगा।

ट्रंप का नक्शा और ‘US Territory’ का दावा

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर होर्मुज की खाड़ी का नक्शा जारी कर उस पर ‘New U.S. Territory’ लिखा। इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका का इस जलमार्ग पर ‘पूरा नियंत्रण’ है और उन्होंने ईरान से ‘आत्मसमर्पण का सफेद झंडा’ उठाने की मांग की थी।

इतना ही नहीं, ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान ओमान को भी सीधी चेतावनी दे डाली। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते के रास्ते में ओमान रुकावट बनता है, तो अमेरिका ‘ओमान पर भारी बमबारी करने से पीछे नहीं हटेगा।’

जब तक शर्तें पूरी नहीं होंगी, बंद रहेगी खाड़ी

ईरानी संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने ईरानी सरकारी टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि जब तक अमेरिका जून में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को खोला नहीं जाएगा।

ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं है ये मुख्य शर्तें

  • नौसैनिक नाकाबंदी का अंत: अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी तुरंत हटाई जाए।
  • तेल प्रतिबंध हटाए जाएं: ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को खत्म किया जाए।
  • जब्त संपत्तियों को अनफ्रीज करना: विदेशों में फंसे ईरान के वित्तीय एसेट्स (जब्त संपत्तियों) को वापस दिया जाए।

गालीबाफ ने कहा कि ईरान किसी भी सैन्य दुस्साहस का करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ओमान के साथ बैकचैनल वार्ता और ट्रंप की बौखलाहट

एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ ईरान और ओमान मिलकर एक वैकल्पिक नौवहन समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देश होर्मुज की खाड़ी में एक निर्दिष्ट सुरक्षित मार्ग के भौगोलिक निर्देशांकों पर सहमत हो गए हैं। दोनों पक्ष एक ‘संयुक्त बयान’ का प्रारूप तैयार कर रहे हैं ताकि वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन फिर से शुरू हो सके।

हालांकि, अमेरिका को दरकिनार कर ओमान और ईरान के बीच हो रही इस शांति वार्ता से राष्ट्रपति ट्रम्प खासे नाराज हैं, जिसके चलते उन्होंने ओमान को सैन्य हमले की धमकी दी है।

आखिर क्यों इतना अहम है स्ट्रैट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रैट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद संकरा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल के लगभग 20% हिस्से का परिवहन इसी रास्ते से होता है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद से इस इलाके में जहाजों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है। ईरान वर्तमान में इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से अनुमति मांगने और ट्रांजिट फीस देने की मांग कर रहा है, जिसका अमेरिका कड़ा विरोध कर रहा है।

भारत के इन 5 राज्यों में बढ़ रहा इंसान और हाथी टकराव! WII ने मैप किए 5 राज्यों के बड़े हॉटस्पॉट्स

भारत में इंसानों और हाथियों के बीच बढ़ता टकराव एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और प्रोजेक्ट एलिफेंट डिवीजन ने देश के 5 प्रमुख राज्यों कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मानव-हाथी संघर्ष के प्रमुख हॉटस्पॉट्स को मैप किया है। WII की इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य उन इलाकों की पहचान करना है जहां जोखिम सबसे अधिक है, ताकि संरक्षण और सुरक्षा प्रयासों को सही दिशा में फोकस किया जा सके।

रिसर्चर्स ने इन राज्यों के लंबे समय के डेटा की स्टडी की है। इनमें से कुछ आंकड़े साल 2000 तक पुराने हैं। इस पूरी सीरीज में ओडिशा की रिपोर्ट सबसे डिटेल है। 128 पन्नों की इस रिपोर्ट में कई सालों के डेटा का इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट का लक्ष्य उन स्थानों और दोहराए जाने वाले पैटर्न की पहचान करना है जहां हाथियों और इंसानों का आमना-सामना सबसे ज्यादा होता है।

इंसानी बस्तियों में क्यों आ रहे हैं हाथी?

रिपोर्ट के मुताबिक इंसानों और हाथियों के बीच संघर्ष की मुख्य वजह उनके प्राकृतिक आवासों (हाथी पर्यावास) और इंसानी गतिविधियों के बीच बढ़ता ओवरलैप है। जंगल लगातार छोटे-छोटे हिस्सों में बंटते जा रहे हैं। जंगलों के बीच से गुजरने वाली सड़कें और रेलवे लाइनें हाथियों के पारंपरिक रास्तों को काटती हैं। इसके अलावा बिजली की बाड़ और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर भी हाथियों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। जंगलों के करीब गांवों और इंसानी बस्तियों के विस्तार ने लोगों और हाथियों को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है।

एलिफेंट कॉरिडोर के आसपास भी मुश्किलें

हाथियों को भोजन और पानी की तलाश के साथ-साथ एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित आवाजाही के लिए बड़े क्षेत्र की जरूरत होती है। जब हाथियों के ये पारंपरिक कॉरिडोर या रास्ते ब्लॉक हो जाते हैं, तो वे वैकल्पिक रास्तों की तलाश करते हैं। ये वैकल्पिक रास्ते अक्सर खेतों, गांवों या बस्तियों से होकर गुजरते हैं। हाथियों के इस मूवमेंट से फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है। इंसानों से मुठभेड़ का खतरा बढ़ जाता है और कई बार इंसानों व हाथियों दोनों को अपनी जान गंवानी पड़ती है या गंभीर चोटों का सामना करना पड़ता है।

वैज्ञानिकों ने हॉटस्पॉट आधारित समाधान की उठाई मांग

WII की यह रिपोर्ट अधिकारियों को उन संवेदनशील क्षेत्रों की तुरंत पहचान करने में मदद करेगी जहां तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि इन हॉटस्पॉट्स में बेहतर अर्ली-वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) लागू की जानी चाहिए। सुरक्षित रेलवे और सड़क योजनाएं बनाना, वन विभागों द्वारा हॉटस्पॉट क्षेत्रों में रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करना और हाथियों के गलियारों को सुरक्षा प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

संकट से निपटने के लिए बचाव रणनीति की जरूरत

यह रिपोर्ट सिर्फ अतीत में हुए संघर्षों का रिकॉर्ड भर नहीं है बल्कि यह दिखाती है कि संघर्ष कहां, कब और किन कारणों से हो रहे हैं। यह डेटा अधिकारियों को घटनाओं के होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें पहले से रोकने में मदद कर सकता है। भारत के लिए यह चुनौती बिल्कुल स्पष्ट है कि हाथियों की रक्षा करने का सीधा मतलब उन प्राकृतिक भू-भागों और रास्तों की सुरक्षा करना है, जिनका उपयोग हाथी अपनी आवाजाही के लिए करते हैं।

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