अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज पर अब 100 फीसदी अमेरिका का कंट्रोल रहेगा। वहीं, ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए उसके मुआवजे की मांग को ठुकरा दिया है, साथ ही ये भी ऐलान किया है
Crude Oil Price: कल कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन उछाल आया। मंगलवार, 11 अगस्त को एशिया में शुरुआती कारोबार में भी ये बढ़त बनी रही। ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ कड़ी मांगें रखने के बाद हुआ, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की किसी भी संभावित डील की उम्मीदें धुंधली हो गई।
ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में रात भर में 5% की बढ़ोतरी हुई। WTI आज सुबह $82 प्रति बैरल के स्तर पर बना रहा। ब्रेंट $87 प्रति बैरल से ऊपर बंद होने के बाद $90 प्रति बैरल के निशान की ओर बढ़ा।
ट्रंप ने आगे लिखा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे भविष्य की सभी बातचीत में इन नई मांगों को मजबूती से रखें। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पिछली किसी भी बैठक में मुआवजे का मुद्दा कभी नहीं उठा। हालांकि, ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए $300 बिलियन का फंड उस 14-सूत्रीय MoU (समझौता ज्ञापन) का हिस्सा है, जिस पर ट्रंप ने खुद जून में फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए थे।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि हालांकि ईरान और ओमान इस महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग (chokepoint) के भविष्य के प्रशासन पर द्विपक्षीय बातचीत में लगे हुए हैं, लेकिन जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक यह जलडमरूमध्य फिर से नहीं खुलेगा।
ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में ‘एनर्जी एस्पेक्ट्स’ की फाउंडर और मार्केट इंटेलिजेंस डायरेक्टर अमृता सेन ने बताया कि अभी होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल पांच जहाज गुजर रहे हैं। यह संख्या जून में MoU पर हस्ताक्षर के बाद ट्रैफिक के 14 के दैनिक औसत तक पहुंचने की तुलना में काफी कम है।
TD सिक्योरिटीज में कमोडिटी स्ट्रैटेजी के ग्लोबल हेड बार्ट मेलेक ने कहा, “यह देखते हुए कि जलडमरूमध्य अभी भी बंद है, ग्लोबल इन्वेंट्री में भारी कमी आई है और फ्लो सामान्य स्तर के आसपास भी नहीं है, हम ‘शॉर्ट्स कवर’ (short covering) में आक्रामक तेजी देख सकते हैं।” उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि ब्रेंट मौजूदा स्तर से $10-15 ऊपर ट्रेड करेगा।”
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Colombia Earthquake: सोमवार को आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने कोलंबिया के पश्चिमी हिस्से में भारी तबाही मचाई है। देश का सबसे गरीब विभाग चोको और मशहूर कॉफी एक्सिस इलाके इस भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बता दें कि इस भयानक आपदा से अब तक कम से कम 132 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 570 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
वहीं, भूकंप के तेज झटकों से दर्जनों इमारतें ढह गई हैं और मलबे में अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। फिलहाल, राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
कोलंबिया की जियोलॉजिकल सर्विस के मुताबिक, यह 21वीं सदी में देश में दर्ज किया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप है।
1. कोलंबिया का सबसे गरीब इलाका चोको, एक बड़ी बचाव चुनौती का सामना कर रहा है
भूकंप का केंद्र चोको विभाग के सैन जोस डेल पालमार के पास था। चोको कोलंबिया के सबसे गरीब इलाकों में से एक है, जहां दो-तिहाई से ज्यादा आबादी गरीबी में रहती है। इस इलाके में सड़क संपर्क बेहद सीमित है और कई गांव दूर-दराज के क्षेत्रों में बसे हैं। ऐसे में राहत और बचाव टीमों को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में काफी मुश्किल हो रही है। संचार व्यवस्था प्रभावित होने से रेस्क्यू और राहत अभियान की परेशानी और बढ़ गई है।
2. कॉफी उत्पादन वाले इलाके में भारी तबाही
कोलंबिया के कॉफी उत्पादन वाले इलाके के बीचों-बीच स्थित रिसराल्डा (Risaralda) सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है। यहां के परेरा (Pereira) में सबसे ज्यादा 60 लोगों की मौत हुई है, जबकि डॉस्क्यूब्राडास (Dosquebradas) में भी भारी तबाही हुई है। अधिकारी तबाही के पैमाने का आकलन कर रहे हैं और बचाव टीमें गिरी हुई और क्षतिग्रस्त इमारतों के बीच काम कर रही हैं।
3. 1,500 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त
राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने बताया कि 1,577 रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिनमें से 37 पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। 60 से ज्यादा इमारतें ढह गई हैं, जबकि 18 स्वास्थ्य केंद्र और 52 स्कूल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा, पांच राजधानी शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।
4. बचावकर्मी बचे हुए लोगों की तलाश कर रहे हैं, अस्पतालों को भी नुकसान
भूकंप ने कई शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। कैली में यूनिवर्सिटी अस्पताल का एक हिस्सा ढह गया, जिससे मरीज अंदर फंस गए। अस्पताल के बुनियादी ढांचे का लगभग 30% हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ, जिसमें बच्चों के इलाज (पीडियाट्रिक्स), इंटरनल मेडिसिन और नवजात शिशु इकाई (नियोनेटल यूनिट) वाले हिस्से शामिल हैं। मलबे से कम से कम चार लोगों को बचाया गया, जबकि अन्य मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
5. बचाव दल ने तेज किया रेस्क्यू ऑपरेशन
गिरी हुई इमारतों के मलबे में दबे लोगों को खोजने के लिए प्रभावित इलाकों में पुलिस, फायरफाइटर, सैनिक और वॉलंटियर्स को तैनात किया गया है। कैली में, बचावकर्मियों ने गिरी हुई एक इमारत से दो महिलाओं और दो बच्चों को जिंदा बाहर निकाला है। अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों को ढूंढना और उन्हें बचाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
6. तबाही से जूझ रहे कोलंबिया की मदद के लिए आगे आए कई देश
भूकंप से हुई भारी तबाही के बीच कई देशों ने कोलंबिया की मदद के लिए रेस्क्यू टीम, मेडिकल स्टाफ और जरूरी उपकरण भेजने की पेशकश की है। इक्वाडोर ने 47 बचावकर्मियों, खोजी कुत्तों और ऐसे उपकरणों की पेशकश की है, जो करीब सात दिनों तक बिना बाहरी मदद के काम कर सकते हैं। इसके अलावा, अल साल्वाडोर और मैक्सिको ने भी सहायता की पेशकश की है। जबकि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे कोलंबिया की मदद के लिए तैयार हैं।
बता दें कि यह भूकंप सोमवार को स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 7:34 बजे आया। US जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, इसका केंद्र चोको (Chocó) में सैन होज़े डेल पालमार के पास ज़मीन से 107 किलोमीटर की गहराई में था। बचाव कार्य जारी रहने के साथ ही, अधिकारी पश्चिमी और मध्य कोलंबिया में हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं और साथ ही टूटी हुई सड़कों, ठप पड़े संचार और ज़रूरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं से भी निपट रहे हैं।
Share Market News: एशियाई बाजारों में रौनक के बीच घरेलू स्टॉक मार्केट में आज बिकवाली का दबाव दिख रहा है। शुरुआती कारोबार में ग्रीन जोन में खुलने के बाद सेंसेक्स और निफ्टी 50 लाल हो गए। डे-हाई से सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24500 के काफी करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर मिला-जुला रुझान है। निफ्टी मिडकैप स्मॉलकैप 100 में फिलहाल हल्की गिरावट है तो निफ्टी मिडकैप 100 में बढ़त दिख रही है।
घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:07 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 61.28 प्वाइंट्स यानी 0.08% की गिरावट के साथ 78,437.89 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 24.60 प्वाइंट्स यानी 0.10% की फिसलन के साथ 24,546.05 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 177.81 प्वाइंट्स उछलकर 78,676.98 तक जाने के बाद 378.06 प्वाइंट्स टूटकर 78,298.92 और निफ्टी भी 50.30 प्वाइंट्स चढ़कर 24,620.95 तक पहुंचने के बाद 109.85 प्वाइंट्स फिसलकर 24,511.10 तक आ गया।
Share Market Fall: इस कारण दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी मांगें रख दीं। इनमें अरबों डॉलर का अमेरिकी भुगतान, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। इससे मार्केट पर दबाव बढ़ा है।
कच्चे तेल में उबाल: ईरान की नई शर्तों ने कच्चे तेल में उबाल लाया तो मार्केट को झटका लगा। फिलहाल ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक उछलकर प्रति बैरल $84 के पार पहुंच गया।
India VIX में उछाल: मार्केट की घबराहट मापने वाले इंडिया विक्स की उछाल ने मार्केट पर दबाव बनाया है। फिलहाल यह 4.64% की गिरावट के साथ 12.72 पर है। इसके अधिक होने से अगले 30 दिनों में मार्केट में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका होती है तो कम होने से इसके कम होने के आसार दिखते हैं।
सरकारी बैंक और एफएमसीजी स्टॉक्स डाल रहे दबाव: मार्केट को सरकारी बैंक और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर नीचे लाने की कोशिश कर रहे हैं। इनके निफ्टी इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की गिरावट है।
Share Market Rise: इन बातों से मिल रहा सपोर्ट
IT-Auto खींच रहे ऊपर: मार्केट को आईटी और ऑटो सेक्टर ऊपर खींचने का पूरा जोर लगा रहे हैं। इनके निफ्टी इंडेक्स में फिलहाल करीब आधे फीसदी की बढ़त है।
अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने के आसार फीके: जुलाई की उम्मीद से कमजोर जॉब रिपोर्ट के बाद सितंबर में ब्याज बढ़ने की आशंका कम होने से अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी आई। इससे भारतीय मार्केट को भी सपोर्ट मिला।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी: शुक्रवार 7 अगस्त को विदेशी निवेशकों ने बिकवाली से अधिक खरीदारी की जिससे मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है। लगातार दो दिनों की नेट बिकवाली के बाद शुक्रवार को FIIs (फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स) ने ₹480.24 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की।
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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Ethanol-Petrol Controversy: देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर जारी विवाद के बीच मध्य प्रदेश के रीवा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जनार्दन मिश्रा ने रविवार (9 अगस्त) को इस पॉलिसी के बचाव में विरोधियों पर निशाना साधते हुए एक विवादित टिप्पणी की। रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए ‘नई उड़ान’ सेवाओं के उद्घाटन के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते मिश्रा ने कहा कि भारत में केवल 20 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन होता है। जबकि 80 प्रतिशत तेल विदेश से आयात करना पड़ता है। इस दौरान एथेनॉल-ब्लेंडिंग नीति का बचाव करते हुए बीजेपी सांसद ने विवादित बयान देते हुए कहा कि शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के यहां से आएगा जब देश में शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं…।
वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए बीजेपी सांसद मिश्रा ने कहा कि तेल आपूर्ति के लिए जहाजों को 18,000 किलोमीटर के करीब अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। उन्होंने कहा, “ऐसी परिस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की बात करते हैं तो कुछ लोग विरोध में आंदोलन करने लगते हैं।” उन्होंने आक्रामक अंदाज में बघेली भाषा में कहा, “आंदोलन हो रहा है एथेनॉल नहीं चलेगा, शुद्ध पेट्रोल चलेगा। शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा? शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं देश में तो कहां से आएगा?”
एथेनॉल से चलने वाले वाहनों का समर्थन किया
मिश्रा ने कहा कि भारत में वाहन एथेनॉल-ब्लेंडिंग ईंधन से चल सकते हैं। लेकिन कुछ लोग एथेनॉल के इस्तेमाल का विरोध करते हुए इसे पेट्रोल में नहीं मिलाने की बात कह रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “एथेनॉल नहीं बनेगा तो पेट्रोल कहां से आएगा, डीजल कहां से आएगा?” पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राजील में तो गाडियां 100 प्रतिशत एथेनॉल से चल रहीं। लेकिन इसके बावजूद वहां वाहनों में ऐसी कोई समस्या नहीं है। मिश्रा पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने के सरकार के लक्ष्य का बचाव कर रहे थे।
उन्होंने जनता को याद दिलाया कि ब्राजील दुनिया में सबसे ज्यादा एथेनॉल का उत्पादन करता है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि वहां 100 फीसदी एथेनॉल से गाड़ियां चल रही हैं। अक्सर अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए सुर्खियों में रहने वाले मिश्रा ने कहा कि भारत में भी विशेषज्ञों की राय है कि एथेनॉल से गाड़ियों के इंजन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। लेकिन इसके बावजूद बेवजह विरोध किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया में सबसे कम महंगाई और सबसे अधिक रोजगार कहीं है तो वह भारत में है।
एथेनॉल पर बहस तेज
मिश्रा की ये बातें केंद्र के इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर चल रही बहस के बीच आई हैं। इस बहस में मुख्य रूप से गाड़ियों की कम्पैटिबिलिटी, फ्यूल एफिशिएंसी और ग्राहकों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। सरकार E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। इसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल होता है। यह कदम कच्चे तेल के आयात को कम करने और देश में बने वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की कोशिशों का हिस्सा है।
केंद्र का कहना है कि E20 की टेस्टिंग और फील्ड अनुभव से इंजन में असामान्य टूट-फूट, जंग लगने या गाड़ी की उम्र कम होने का कोई सबूत नहीं मिला है। मिश्रा ने बायोगैस और CNG जैसे वैकल्पिक ईंधन के लिए सरकार की व्यापक कोशिशों का भी समर्थन किया। साथ ही हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों पर भी जोर दिया। फिलहाल, उनका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। विपक्षी पार्टियां भगवा पार्टी पर हमलावर हैं।
पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने पर आंदोलन हो रहा, शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा, शुद्ध पेट्रोल देश में है हीं नहीं – जनार्दन मिश्रा… रीवा सांसद pic.twitter.com/e3xsks0cIJ
— Brajesh Rajput (@drbrajeshrajput) August 9, 2026
देश में सोने की कीमत और बढ़ गई है। 8 अगस्त की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड 150050 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। मुंबई और कोलकाता में भाव 149900 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। कमजोर अमेरिकी डॉलर और विदेशी बाजारों में सोने की कीमत में उछाल के कारण देश के अंदर भी सोने के भाव में तेजी है। जुलाई में U.S. नॉन-फार्म पेरोल में 23000 जॉब्स की गिरावट दर्ज की गई। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से प्रमुख ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना कम हो गई है।
बेंचमार्क ब्याज दरों में बढ़ोतरी सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए एक नेगेटिव फैक्टर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,336.02 डॉलर प्रति औंस पर है। सोने की वैश्विक कीमत इस सप्ताह में अब तक 7 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ऐसी उम्मीद है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से पूरी तरह खुल जाएगा। इस उम्मीद ने महंगाई की चिंताओं को कम किया है। इससे भी अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से बेंचमार्क ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने को लेकर कम हुई है।
देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट
दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 150050 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 137560 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 137410 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 149900 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 149990 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 137510 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 149900 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 137410 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
| शहर | 22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹) | 24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹) |
| दिल्ली | 137560 | 150050 |
| मुंबई | 137410 | 149900 |
| अहमदाबाद | 137460 | 149950 |
| चेन्नई | 137490 | 149990 |
| कोलकाता | 137410 | 149900 |
| हैदराबाद | 137410 | 149900 |
| जयपुर | 137560 | 150050 |
| भोपाल | 137460 | 149950 |
| लखनऊ | 137560 | 150050 |
| चंडीगढ़ | 137560 | 150050 |
इन 10 म्यूचुअल फंडों ने SIP के निवेशकों को बीते 5 साल में दिए सबसे ज्यादा रिटर्न, देखें पूरी लिस्ट
चांदी की कीमत
दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में 8 अगस्त की सुबह देश के अंदर गिरावट है। चांदी अब 239900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 63.29 डॉलर प्रति औंस है।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने ‘मुस्लिम नाटो’ की दिशा में बढ़ा कदम उठाया है। तीनों देशों ने शुक्रवार को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के मुताबिक, अगर तीनों में से किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे तीनों देशों पर अटैक माना जाएगा। इस समझौते पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन ने संयुक्त रक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान साइन किए। समझौते के तहत तीनों देश आपस में रक्षा सहयोग बढ़ाएंगे। इसके लिए संयुक्त सैन्य ट्रेनिंग, सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा करने और सुरक्षा समन्वय बढ़ाने पर काम किया जाएगा। साथ ही तीनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग भी मजबूत किया जाएगा। समझौते के तहत सैन्य मदद कितनी तय है विश्लेषकों के मुताबिक, तीनों देशों ने क्षेत्रीय विरोधियों को नाराज करने से बचने की कोशिश की है। यह अभी साफ नहीं है कि समझौता अपने किसी सदस्य पर हमला होने पर बाकी सदस्यों को उसकी रक्षा के लिए कितना मजबूर करेगा। किलोवेन ग्रुप सलाहकार कंपनी के चेयरमैन हार्लन उलमैन ने अल जजीरा से कहा, “हमने अभी मक्का घोषणा नहीं देखी है। हमारा मानना है कि इसमें कहा गया है कि एक पर हमला सभी पर हमला माना जाना चाहिए। यहां ‘माना जाना चाहिए’ महत्वपूर्ण शब्द हैं, क्योंकि इसका मतलब ‘जरूरी तौर पर’ नहीं है।” क्षेत्रीय खतरे इन देशों से दूर नहीं हैं। पाकिस्तान फरवरी से अफगानिस्तान के साथ सीमा संघर्ष में उलझा हुआ है। मई 2025 में उसका परमाणु शक्ति संपन्न भारत के साथ भी कई दिनों तक गोलीबारी का आदान-प्रदान हुआ था। सऊदी अरब पर फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान और उसके सहयोगी बार-बार हमले कर चुके हैं। तुर्किये कई साल से देश के अंदर और बाहर कुर्द सशस्त्र समूहों से लड़ता रहा है। इजराइल के साथ उसका तनाव भी बढ़ा है। उलमैन जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौता तीनों देशों को इनमें से किसी संघर्ष में कैसे खींच सकता है। उलमैन ने कहा, “मान लीजिए यमन में हूती सऊदी अरब पर हमला करते हैं, तो क्या इससे तुर्किये इसमें शामिल होगा? क्या पाकिस्तान शामिल होगा? यह अभी देखा जाना बाकी है।” मध्य पूर्व में बदलते समीकरण मध्य पूर्व में पिछले कुछ सालों में काफी उथल-पुथल हुई है। इसमें सबसे अहम घटनाएं 7 अक्टूबर 2023 को हमास का इजराइल पर हमला और उसके बाद गाजा में इजराइल का नरसंहार हैं। ईरान और इजराइल के बीच दशकों से चल रही धमकियां भी ऐसे क्षेत्रीय युद्ध में बदल गई हैं, जो अभी खत्म नहीं हुआ है। अब मध्य पूर्व और उसके बाहर के कई देश इस अव्यवस्था से निपटने और अगले दौर की तैयारी का तरीका तलाश रहे हैं। इनमें से कई देश पुराने मतभेद पीछे छोड़कर आपसी खतरों के सामने व्यावहारिक रास्ता अपनाने का फैसला करते दिख रहे हैं। तुर्किये और सऊदी अरब इसके उदाहरण हैं। 2018 में सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की अपने देश के इस्तांबुल वाणिज्य दूतावास में हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्तों में गहरी दरार आ गई थी। यह तनाव कई साल तक बना रहा। लेकिन 2022 तक रियाद और अंकारा ने पुराने मतभेद पीछे रखने शुरू कर दिए। सऊदी अरब पूरे क्षेत्र में तनाव कम करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा था, जबकि तुर्किये अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करना चाहता था। इसके बाद से इजराइल और ईरान ने मध्य पूर्व पर दबाव बनाया है और इस क्षेत्र के लिए अलग-अलग योजनाओं पर आगे बढ़े हैं। माना जाता है कि इसी दबाव ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये को एक-दूसरे के करीब आने में मदद की है। तीनों देशों की अलग-अलग ताकत मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का मकसद तीनों देशों के सामने आने वाले किसी भी खतरे को रोकना है। अल जजीरा के संवाददाता उसामा बिन जावेद ने कहा कि तीनों देश इस समझौते में अलग-अलग ताकत लेकर आए हैं। बिन जावेद ने कहा, “इनमें से हर देश अपनी खास क्षमता लेकर आया है। पाकिस्तान के पास युद्ध का अनुभव रखने वाली सेना, हथियार और परमाणु हथियार हैं। मुस्लिम बहुल देश में परमाणु हथियार रखने वाला यह इकलौता देश है।” उन्होंने कहा, “नाटो के महत्वपूर्ण सदस्य तुर्किये के पास दुनिया की बेहतरीन ड्रोन तकनीक और उन्नत रक्षा निर्माण क्षमता है। सऊदी अरब इन सबको आर्थिक ताकत देने का काम करेगा।” अमेरिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नए सैन्य गठबंधनों और खतरों से बचाव के नए तरीकों की जरूरत और ज्यादा महसूस की जा रही है। सऊदी अरब और कुछ हद तक तुर्किये लंबे समय से अमेरिका को अपना प्रमुख सुरक्षा सहयोगी मानते रहे हैं। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की विदेश नीति लगातार बदलती और अनिश्चित होती जा रही है। ऐसे में दुनिया के कई देश दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि मध्य पूर्व में इजराइल अमेरिका की विदेश नीति की सबसे बड़ी प्राथमिकता दिखाई देता है। इससे यह चिंता बढ़ी है कि अमेरिका अपने दूसरे सहयोगियों की रक्षा करने के लिए कितना तैयार होगा। उलमैन ने कहा, “ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि सहयोगियों को अपनी रक्षा खुद करनी होगी। मेरे लिए यह साफ है कि हमारे सहयोगी दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं।” इजराइल और ईरान को लेकर सावधानी इजराइल और ईरान ने खुद को क्षेत्रीय खतरे के रूप में दिखाया है। फिर भी मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में शामिल देशों ने यह बताने से सावधानी बरती है कि यह गठबंधन किसी बाहरी ताकत के खिलाफ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इजराइल और ईरान से पैदा होने वाले खतरे साफ हैं। बिन जावेद ने कहा, “तीनों देशों के लिए इजराइल क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता का सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है।” उन्होंने कहा, “ईरान इस खतरे की सूची में उसके ठीक बाद आता है। खासकर ईरान की ओर से वॉशिंगटन के हितों पर हमलों के बाद सऊदी अरब के लिए यह खतरा और ज्यादा है।” क्षेत्र के कई लोगों का मानना है कि इजराइल ने 2023 के बाद यह दिखाया है कि वह मतभेदों को बातचीत से सुलझाने के बजाय सैन्य ताकत से सुलझाने में ज्यादा रुचि रखता है। इससे पहले इजराइल ने सऊदी अरब के साथ रिश्ते सामान्य करने की कोशिश की थी। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उभरते हुए “सुन्नी गठबंधन” के खतरों की बात भी शुरू की है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया है कि उनका मतलब किस गठबंधन से है। विशेषज्ञों का कहना है कि नेतन्याहू के बयान ऐसी स्थिति पैदा कर सकते हैं, जिसमें सुन्नी बहुल ताकतें वास्तव में एक साथ आ जाएं। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये तीनों देशों में सुन्नी बहुसंख्यक हैं। ईरान पहले ही सऊदी अरब पर हमला कर चुका है। ईरान समर्थित दूसरे समूह भी सऊदी अरब पर हमले कर चुके हैं। इसके जवाब में सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित समूहों पर हमले किए हैं। क्या गठबंधन में नए देश जुड़ेंगे यह अभी साफ नहीं है कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में मिस्र, कतर, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई जैसे दूसरे देश भी शामिल होंगे या नहीं। ऐसे गठबंधन के फायदे समझ में आते हैं। मध्य पूर्व के सुन्नी बहुल देश अक्सर अलग-अलग रहे हैं। कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि इसी वजह से वे इजराइल और ईरान से पैदा होने वाले खतरों से निपट नहीं पाए हैं। हालांकि, पुराने मतभेद और अलग-अलग हित इस गठबंधन के विस्तार को तय नहीं मानने की वजह देते हैं। सीरिया इस समय 13 साल चले भीषण संघर्ष के बाद युद्ध के बाद पुनर्निर्माण पर ध्यान दे रहा है। इजराइल की उत्तरी सीमा पर उसकी स्थिति ऐसी है कि वह ऐसे समझौते में शामिल होने से हिचक सकता है, जिसे इजराइल नकारात्मक नजर से देखे। मिस्र ने भी साफ संकेत दिए हैं कि उसका ध्यान अर्थव्यवस्था पर है और वह देश के अंदर किसी उथल-पुथल से बचना चाहता है। अतीत में वह क्षेत्र में जहाजों के रास्तों की सुरक्षा के लिए सऊदी अरब की अगुआई वाले समुद्री गठबंधन में शामिल होने से हिचक चुका है। मिस्र को डर था कि वह क्षेत्रीय संघर्ष में खिंच सकता है। यूएई भी सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के गठबंधन में संभावित सदस्य हो सकता है। लेकिन हाल के सालों में यूएई के रुख कई बार इन देशों से अलग रहे हैं। यमन और इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने जैसे मुद्दों पर यह अंतर सबसे ज्यादा दिखाई दिया है। अमेरिका के समर्थन से हुए अब्राहम समझौते इजराइल के साथ ज्यादा करीबी रखने वाले एक दूसरे क्षेत्रीय समूह को सामने लाते हैं। इसे मक्का गठबंधन में शामिल देशों के प्रतिद्वंद्वी समूह के रूप में देखा जा सकता है। गठबंधन की असली परीक्षा कब होगी मध्य पूर्व के रिश्तों की जटिलता शुक्रवार को हुए समझौते के बाद नए क्षेत्रीय समीकरण के उभरने वाली किसी भी धारणा की मुश्किलें दिखाती है। इस क्षेत्र में गठबंधन दशकों से बदलते रहे हैं। आगे भी इनमें बदलाव हो सकते हैं। इस गठबंधन का असली आकलन तब होगा, जब इसकी वास्तविक परीक्षा होगी। इजराइल और ईरान ने दिखाया है कि वे युद्ध करने और उसके नतीजे झेलने के लिए तैयार हैं। अब सवाल यह है कि क्या सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान एक-दूसरे के लिए ऐसा करने को तैयार हैं। आज के मध्य पूर्व में ऐसी स्थिति बन सकती है, जो उन्हें यह फैसला लेने के लिए मजबूर करे। आखिरकार, उनके फैसले ही साफ करेंगे कि क्या वास्तव में एक तीसरा क्षेत्रीय ध्रुव उभर रहा है।
Donald Trump Statement: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरान के साथ महीनों के टकराव के बाद अमेरिका के पास अहम मिसाइलों का स्टॉक कम हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना के पास हथियारों की पर्याप्त आपूर्ति है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ हथियारों का स्टॉक “थोड़ा कम” हो गया है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) के पास अभी भी हथियारों का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरान के साथ पांच महीने के संघर्ष के दौरान देश ने अपनी सटीक मारक क्षमता वाली लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है।
ट्रंप ने हथियारों की कमी के दावों को किया खारिज
हथियारों की व्यापक कमी के दावों को खारिज करते हुए, उन्होंने माना कि कुछ तरह के हथियारों की सप्लाई दूसरों की तुलना में कम थी। उन्होंने कहा, “कुछ मामलों में सप्लाई थोड़ी कम है।”
हालांकि, उन्होंने बड़े स्तर पर हथियारों की कमी की खबरों को खारिज करते हुए माना कि हथियारों की सप्लाई दूसरों की तुलना में कम थी। उन्होंने कहा, कुछ मामलों में सप्लाई थोड़ी कम है।”
उन्होंने कहा कि अमेरिका “बहुत अच्छी स्थिति” में है और जaर देकर कहा, “हमारे पास सचमुच भारी मात्रा में गोला-बारूद है।”
“We have literally massive amounts of ammunition.”
President Trump pushed back on reports that the U.S. was running low on missile stockpiles after months of conflict with Iran, insisting the military remains fully supplied.
Speaking to reporters, Trump said the U.S. is “in… pic.twitter.com/W2pXecgJK1
— Fox News (@FoxNews) August 6, 2026
रक्षा कंपनियां प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि रक्षा कंपनियां अपना प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं, जिसमें पैट्रियट और टॉमहॉक मिसाइलें बनाने के लिए नई सुविधाएं तैयार करना भी शामिल है। उन्होंने कहा, “हम हमेशा और ज्यादा चाहते हैं। हमारे पास और ज्याद होना चाहिए।”
वहीं, कई अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के साथ चले युद्ध के दौरान पेंटागन ने अपनी वैश्विक मिसाइल भंडार का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किया है। इनमें बेहद सटीक मारक क्षमता वाली लंबी दूरी की मिसाइलें भी शामिल हैं।
ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा
ट्रंप ने भरोसा जताया कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। मुझे नहीं लगता कि वे इसे ज़्यादा देर तक खींच पाएंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि वे तेहरान के साथ बातचीत में शामिल हैं। “सब ठीक चल रहा है। जल्द ही कोई समझौता हो सकता है।”
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Gold Silver price Today: देश और दुनिया में सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला। COMEX पर, सोने के वायदा (futures) $4,319.30 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहे थे, जो $19.70 या 0.46% ज़्यादा थे। शुरुआती कारोबार में चांदी के वायदा 1.48% बढ़कर $62.515 प्रति औंस हो गए, जिससे उसने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया।
निवेशक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों के बारे में नए संकेत पाने के लिए US की ‘नॉन-फार्म पेरोल’ रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे थे, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं। सबकी नजरें US की जुलाई की जॉब्स रिपोर्ट पर टिकी हैं,जो आज बाद में आने वाली है।
इस डेटा से बाजार की उम्मीदें तय होने की संभावना है कि क्या फेडरल रिज़र्व सितंबर में अपनी पॉलिसी मीटिंग में ब्याज दरें बढ़ाएगा या नहीं।
क्रूड में गिरावट ने सोने को दिया सपोर्ट
सोना जनवरी के बाद से अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। इस कीमती धातु को कच्चे तेल की कीमतों में कमी से सहारा मिला है, जिससे महंगाई की चिंताएं कम हुई हैं। ऊर्जा की कम कीमतों से इस उम्मीद में कमी आ सकती है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी; यह एक ऐसा कारक है जो आम तौर पर सोने जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों की मांग को बढ़ाता है।
हालांकि, बढ़त सीमित रही क्योंकि ट्रेडर्स US में एक और बार ब्याज दरें बढ़ने की संभावना को ध्यान में रख रहे हैं।
इन डेटा पर होगी नजर
CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाज़ार अभी सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना लगभग 55% मान रहा है। फेडरल रिज़र्व के अधिकारियों की हालिया टिप्पणियों ने भी ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें ऊंची रखी हैं। सेंट लुइस फेड के प्रेसिडेंट अल्बर्टो मुसालेम ने कहा कि सेंट्रल बैंक को जुलाई की मीटिंग में दरें बढ़ानी चाहिए थीं, जबकि पॉलिसी बनाने वालों ने बेंचमार्क ब्याज दर को 3.5%-3.75% पर ही बनाए रखा, भले ही महंगाई फेड के 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई थी।
इस बीच, रात में जारी US लेबर मार्केट डेटा ने मिली-जुली तस्वीर पेश की। पिछले हफ़्ते शुरुआती बेरोज़गारी दावों (initial jobless claims) में थोड़ी बढ़ोतरी हुई, जबकि जुलाई में छंटनी (layoffs) दो साल के निचले स्तर पर आ गई, जिससे पता चलता है कि लेबर मार्केट मोटे तौर पर मज़बूत बना हुआ है।
निवेशक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी नजर रख रहे हैं, क्योंकि US के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ टकराव जल्द ही खत्म हो सकता है, हालांकि उन्होंने कुछ सैन्य उपकरणों को प्रभावित करने वाली सप्लाई की समस्याओं को भी स्वीकार किया।
US की रोज़गार रिपोर्ट, साथ ही वेतन वृद्धि और बेरोजगारी के डेटा के निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतों के लिए मुख्य कारक होने की उम्मीद है। उम्मीद से बेहतर जॉब डेटा से ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें और मजबूत हो सकती हैं, जबकि कमज़ोर आंकड़े मॉनेटरी टाइटनिंग (मौद्रिक सख्ती) में रोक लगने की उम्मीद बढ़ाकर बुलियन (कीमती धातुओं) को बढ़ावा दे सकते हैं।
Gold Rate Today: सोने का भाव और बढ़ा; मुंबई, कोलकाता में ₹137260 पर 22 कैरेट
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। वॉशिंगटन के आसमान में उस समय हड़कंप मच गया जब ट्रंप को लेकर जा रहा मिलिट्री हेलिकॉप्टकर और एक यात्री विमान एक दूसरे के बेहद करीब पहुंच गया। हेलीकॉप्टर और प्लेन के बीच महज 1 मील का फासला था। यानि

