अंग्रेजों ने भारत से लूटे 200 ट्रिलियन डॉलर! कभी दुनिया की 27% GDP था भारत, जानिए यहां से कितना लेकर गए

भारत और 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देश को 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजादी मिली थी। लेकिन आजादी मिलने के बाद देश को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था। आजादी के बाद देश की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में थी। अंग्रेजों ने करीब 200 साल तक भारत के संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल अपने लिए किया। वहीं करीब 200 साल के ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के संसाधनों और संपदा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल ब्रिटेन के हितों के लिए किया गया।

न्यूज 18 के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों के पुराने आकलनों के मुताबिक, 1765 से 1938 के बीच ब्रिटिश क्राउन और ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत से करीब 45 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति बाहर ले गई। लंबे समय तक चले इस आर्थिक शोषण का असर भारत की आर्थिक स्थिति पर पड़ा और आजादी के समय देश को कई बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

नेहरू के सामने बड़ी समस्या

1947 के बाद पीएम जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालना, उद्योगों को बढ़ावा देना और देश में बुनियादी ढांचे का विकास करना था। लगभग दो शताब्दियों के औपनिवेशिक शासन के बाद भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार को लंबे समय तक बड़े स्तर पर काम करना पड़ा।

करीब 200 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति गई बाहर

पुराने अनुमानों को अगर आज की आर्थिक स्थिति के हिसाब से देखा जाए और उनमें महंगाई, निवेश पर मिलने वाले रिटर्न और मौजूदा बाजार मूल्य को शामिल किया जाए, तो भारत से बाहर गई संपत्ति की अनुमानित कीमत 2026 में करीब 200 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। ये आंकड़ा बताते हैं कि ब्रिटिश शासन में भारत की संपदा बाहर जाती रही, जिससे आजादी के समय देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई।

‘काउंसिल बिल्स’ बड़ा तरीका

भारत से पैसा बाहर ले जाने का एक बड़ा तरीका ‘काउंसिल बिल्स’ व्यवस्था थी। 1765 से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी भारत से कपड़ा, मसाले और शोरा खरीदने के लिए ब्रिटेन से लाया गया सोना-चांदी इस्तेमाल करती थी। लेकिन बंगाल में टैक्स वसूलने का अधिकार मिलने के बाद कंपनी ने तरीका बदल दिया। इसके बाद भारत से मिले टैक्स के पैसे से ही भारतीय सामान खरीदा जाने लगा और इस तरह भारत की कमाई का बड़ा हिस्सा ब्रिटेन पहुंचने लगा।

  1. टैक्स वसूली: भारतीय किसानों और व्यापारियों से सीधे टैक्स लिया जाता था।
  2. टैक्स से खरीदारी: ब्रिटिश सरकार टैक्स से जुटाए गए राजस्व का करीब एक-तिहाई हिस्सा भारतीय सामान खरीदने में इस्तेमाल करती थी, जिसे बाद में ब्रिटेन भेज दिया जाता था।
  3. बिना असली भुगतान: भारतीयों को उनके ही टैक्स के पैसे से भुगतान किया जाता था, जिससे ब्रिटेन को भारत का कीमती सामान लगभग मुफ्त में मिलता था।

GDP में आई गिरावट

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया। 1700 के आसपास भारत का वैश्विक GDP में हिस्सा करीब 27% बताया जाता है, लेकिन 1947 तक यह घटकर 3% से भी कम रह गया। ब्रिटिश नीतियों का असर भारत के कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा। भारतीय कपड़ों पर ब्रिटेन में भारी टैक्स लगाया गया, जबकि ब्रिटिश सामान भारत में आसानी से बिकने लगा। इससे ढाका, मुर्शिदाबाद और सूरत जैसे पुराने औद्योगिक केंद्रों को बड़ा नुकसान हुआ। काम कम होने के बाद कई कारीगर और बुनकर खेती पर निर्भर हो गए और भारत धीरे-धीरे तैयार सामान के बजाय कपास, अफीम और नील जैसी कच्ची उपज के निर्यातक देश के रूप में बदल गया।

दूसरे विश्व युद्ध में हुआ नुकसान

1858 के बाद भी भारत की कमाई का बड़ा हिस्सा ब्रिटिश सरकार से जुड़े खर्चों पर ही लगाया जाता रहा। ‘होम चार्ज’ के तहत भारतीय करदाताओं के पैसों से ब्रिटिश अधिकारियों की पेंशन, रेलवे निवेश पर ब्याज और विदेशों में ब्रिटिश सेना के अभियानों का खर्च उठाया जाता था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यह आर्थिक दबाव और बढ़ गया। युद्ध के खर्च और कर्ज का असर भारत में महंगाई और खाद्य संकट के रूप में दिखाई दिया। लंबे समय तक चले इस आर्थिक बोझ के कारण 1947 में आजादी मिलने तक भारत की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी थी।

आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत

आजादी के समय भारत की नई सरकार के सामने पैसों और संसाधनों की बड़ी कमी थी। देश में गरीबी और खाद्य संकट गंभीर था, उद्योग कमजोर हो चुके थे और विभाजन के बाद बड़ी संख्या में आए शरणार्थियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी भी सरकार पर थी। सीमित सरकारी खजाने के बावजूद सड़कों, बिजली, सिंचाई और दूसरी जरूरी सुविधाओं के विकास पर काम शुरू करना पड़ा। लेकिन, आजादी के बाद के दशकों में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रगति की और आज वह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश अब लंबे समय के विकास लक्ष्यों पर ध्यान देते हुए अपनी आर्थिक ताकत को और बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका में 43 लाख की सर्जरी भारत में सिर्फ 4.3 लाख में हुई! फिर भी अमेरिकी महिला ने बताईं ये 3 कमियां

अमेरिका की एक महिला की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों तेजी से चर्चा में है। उन्होंने अपनी मां के इलाज से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने अलग-अलग देशों में मेडिकल खर्च को लेकर बहस छेड़ दी। मां की सर्जरी के लिए अमेरिका में मिले खर्च के अनुमान ने परिवार को दूसरे विकल्प तलाशने पर मजबूर किया। इसके बाद उन्होंने विदेश में इलाज कराने के बारे में सोचा और कई देशों पर विचार किया। इसी दौरान भारत का विकल्प भी उनके सामने आया। परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि इलाज के साथ नए देश में अस्पताल, सुविधाओं और पूरी प्रक्रिया को लेकर भी भरोसा जरूरी था।

लेकिन भारत पहुंचने के बाद सामने आया अनुभव उनके लिए उम्मीद से अलग रहा। महिला ने अपने अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद भारत की मेडिकल सुविधाओं और इलाज की लागत को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई।

डॉक्टर की सलाह पर भारत आए

इसी दौरान महिला के एक डॉक्टर दोस्त ने उन्हें भारत में इलाज कराने की सलाह दी। इसके बाद परिवार ने भारत आने का फैसला किया। महिला के अनुसार, भारत के एक बड़े अस्पताल में उनकी मां की सर्जरी हुई। अस्पताल में रहने का खर्च भी इसमें शामिल था।

सिर्फ ₹4.3 लाख में हुआ इलाज

महिला ने बताया कि भारत में सर्जरी और अस्पताल में रहने समेत कुल खर्च करीब 4,500 डॉलर यानी 4.3 लाख रुपये आया। अमेरिका में मिले अनुमान से तुलना करें तो यह रकम करीब दस गुना कम थी। हालांकि, इलाज का वास्तविक खर्च मरीज और बीमारी के हिसाब से अलग हो सकता है।

इलाज की गुणवत्ता ने किया प्रभावित

महिला ने केवल कम खर्च की तारीफ नहीं की। उन्होंने भारत में मिली मेडिकल सुविधाओं और देखभाल को भी अच्छा बताया। उनके मुताबिक, इलाज उनकी उम्मीद से बेहतर रहा। इसी वजह से उन्होंने भारत में मेडिकल टूरिज्म की संभावनाओं पर भी बात की।

भारत में मेडिकल टूरिज्म का बड़ा मौका

महिला का मानना है कि भारत अगर विदेशी मरीजों के लिए यात्रा, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा जैसी सुविधाओं को और बेहतर करे, तो मेडिकल टूरिज्म में देश और आगे बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, भारत के पास इस क्षेत्र में काफी बड़ी संभावनाएं हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने अमेरिका और भारत में इलाज की लागत पर चर्चा शुरू कर दी। कई यूजर्स ने सवाल किया कि अमेरिका जैसे विकसित देश में मेडिकल ट्रीटमेंट इतना महंगा क्यों है कि लोग इलाज के लिए विदेश जाने पर मजबूर हो रहे हैं।

निजी अस्पतालों की भी हुई तारीफ

कुछ यूजर्स ने भारत के निजी अस्पतालों की तारीफ की। उनका कहना था कि कई अस्पताल कम लागत में अच्छी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि भारत की सरकारी और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में अभी सुधार की जरूरत है।

विदेशी मरीजों को मिलती है मदद

मेडिकल टूरिज्म से जुड़े लोगों के मुताबिक, कई भारतीय अस्पताल विदेशी मरीजों को इलाज के साथ दूसरी सुविधाओं में भी मदद करते हैं। इनमें एयरपोर्ट ट्रांसफर, रहने की व्यवस्था, अपॉइंटमेंट और इलाज का शेड्यूल शामिल हो सकता है।

 

Windfall Gains Tax: सरकार ने फ्यूल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल गेन्स टैक्स घटाया, पेट्रोल के लिए शून्य हुई दर

भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल गेन्स टैक्स को कम कर दिया है। एक सरकारी आदेश के मुताबिक, डीजल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी को 25.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं पेट्रोल पर ड्यूटी को 3.5 रुपये से घटाकर शून्य रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर टैक्स को पहले के 22 रुपये से घटाकर 19.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

विंडफॉल गेन्स टैक्स की नई दरें शनिवार, 15 अगस्त से लागू हो गई हैं। इससे पहले 3 अगस्त 2026 को सरकार ने विंडफॉल गेन्स टैक्स बढ़ाया था। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी को 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। डीजल के एक्सपोर्ट पर कुल लेवी 15.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 25.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर ड्यूटी 14.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दी थी। डीजल पर 25.5 रुपये की लेवी में दो तरह की ड्यूटी शामिल थीं- स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC)।

क्या है विंडफॉल गेन्स टैक्स

अगर ऑयल कंपनियां 75 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा पर कच्चे तेल की बिक्री करती हैं, तो इससे हासिल होने वाले प्रॉफिट पर विंडफॉल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं डीजल, एटीएफ और पेट्रोल के निर्यात के लिए यह लेवी तब लागू होती है, जब मार्जिन 20 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाता है। पिछले दो सप्ताह में तेल की औसत कीमतों के आधार पर हर 15 दिनों पर विंडफॉल गेन्स टैक्स की रेट का रिव्यू किया जाता है। बता दें कि कच्चे तेल को जमीन और समुद्र से निकाल कर रिफाइन किया जाता और इसे पेट्रोल, डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) में कनवर्ट किया जाता है।

मार्च 2026 से फिर लगने लगा है यह टैक्स

भारत ने विंडफॉल गेन्स टैक्स सबसे पहले जुलाई 2022 में लागू किया था। फिर 2 साल बाद दिसंबर 2024 में इसे हटा दिया। लेकिन फिर फरवरी 2026 में ईरान के खिलाफ शुरू हुए अमेरिका-इजराइल युद्ध से तेल की कीमतों में तगड़ा उछाल आया। इसे देखते हुए मार्च 2026 में यह लेवी फिर से लागू की गई।

Petrol Diesel Price Today: 15 अगस्त को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, जानें आपके शहर में आज का रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 15 आगस्त 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Gold Price Today on I-Day: स्वतंत्रता दिवस पर सोना हुआ सस्ता, 24 और 22 कैरेट दोनों का लुढ़का भाव

आज, शनिवार को पूरा देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्त के दिन देश में सोने की कीमत में गिरावट दिख रही है। राजधानी दिल्ली में सुबह के वक्त 24 कैरेट गोल्ड की कीमत घटकर 153030 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। अन्य शहरों में भी ​सोने का भाव टूटा है। सोने में हाल के दिनों में दिखी तेजी के बाद मुनाफावसूली हुई, जिससे कीमतें ​नीचे आई हैं।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने में हल्की तेजी है। हाजिर सोना 4,379.95 डॉलर प्रति औंस हो गया है। डॉलर में आई कमजोरी से सोने की वैश्विक कीमतों को बल मिला है। इस हफ्ते आए अमेरिकी महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहे, जिससे संकेत मिला कि अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अगले महीने होने वाली मीटिंग में बेंचमार्क ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

अमेरिका में लेबर डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, जुलाई महीने में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि जून में गिरावट आई थी। वहीं जुलाई तक के 12 महीनों में अमेरिका में खुदरा महंगाई 3.4 प्रतिशत बढ़ी। यह अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक रही। US प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स में जून के मुकाबले कोई बदलाव नहीं हुआ। जुलाई तक के 12 महीनों में यानि​ कि सालाना आधार पर प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 153030 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140290 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 140140 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 152880 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 153160 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140390 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 152880 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 140140 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली140290153030
मुंबई140140152880
अहमदाबाद140190152930
चेन्नई140390153160
कोलकाता140140152880
हैदराबाद140140152880
जयपुर140290153030
भोपाल140190152930
लखनऊ140290153030
चंडीगढ़140290153030

चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में भी गिरावट है। 15 अगस्त की सुबह कीमत गिरकर 254900 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 64.88 डॉलर प्रति औंस है।

दावा- चीनी सामान भारत के रास्ते अमेरिका भेजा जा रहा:टैरिफ से बचने की कोशिश; अमेरिकी रिपोर्ट में पुणे, गुजरात और चेन्नई नेटवर्क का हिस्सा

अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए चीनी प्रोडक्ट्स को भारत के रास्ते अमेरिकी बाजारों में पहुंचाया जा रहा है। यह दावा व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम: राइज, स्कोप एंड कॉस्ट्स’ में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से आने वाले सामान या पार्ट्स को पहले भारत समेत दूसरे एशियाई देशों में भेजा जाता है। वहां उन्हें प्रोसेस, असेंबल या किसी दूसरे प्रोडक्ट में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद तैयार सामान को अमेरिका निर्यात किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इससे चीन पर लगाए गए टैरिफ से बचने का रास्ता मिल सकता है। रिपोर्ट में इसके लिए दुनिया भर में ट्रेड रूट्स का नेटवर्क बनने की बात कही गई है। भारत के पुणे, गुजरात और चेन्नई को चीन से आने वाले सामान के एक अहम रास्ते के तौर पर बताया गया है। रिपोर्ट में यहां बनने वाले इंडस्ट्रियल पंप और कंप्रेसर में चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल होने की संभावना का खास तौर पर जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में रूट नेटवर्क को ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया चीनी सामान को तीसरे देशों के जरिए अमेरिका भेजने के लिए इस्तेमाल हो रहे रूट नेटवर्क को रिपोर्ट में ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया है। इसका मतलब शहरों की सुंदरता या बदसूरती से नहीं है। यह शब्द अलग-अलग देशों के ऐसे औद्योगिक शहरों के लिए इस्तेमाल किया गया है, जहां एक जैसे प्रोडक्ट बनते हैं और वे अमेरिकी बाजार में एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं। भारत के मामले में रिपोर्ट ने पुणे, गुजरात और चेन्नई की तुलना अमेरिका के ओहायो राज्य के सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस से की है। इन अमेरिकी शहरों में भी पंप, कंप्रेसर और दूसरे औद्योगिक सामान का उत्पादन और कारोबार होता है। रिपोर्ट का तर्क है कि अगर तीसरे देशों के जरिए कम टैरिफ पर सामान अमेरिका पहुंचता है, तो वहां के स्थानीय निर्माताओं को नुकसान हो सकता है। अमेरिकी कंपनियों को कम कीमत वाले आयात से मुकाबला करना पड़ सकता है। इसका असर उत्पादन, ऑर्डर और नौकरियों पर भी पड़ सकता है। मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड का भी जिक्र व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में सिर्फ भारत का जिक्र नहीं है। इसमें मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड के उन इलाकों का भी जिक्र है, जहां बड़े पैमाने पर सामान बनाया और दूसरे देशों को भेजा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे रास्तों से हर साल अरबों डॉलर का सामान अमेरिकी बाजार तक पहुंच सकता है, जिसमें चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया हो। क्या ये टैरिफ से बचने की कोशिश को साबित करता है? किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट का इस्तेमाल होना और चीन का सामान सिर्फ भारत के रास्ते अमेरिका भेजना, दोनों अलग बातें हैं। अगर भारत में किसी प्रोडक्ट की असली मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और उस पर काफी काम हो रहा है, तो उसे सिर्फ चीन का सामान घुमाकर अमेरिका भेजना नहीं माना जा सकता। इसलिए यह देखा जाता है कि प्रोडक्ट बनाने में असल काम और प्रोडक्ट की कीमत में कितना हिस्सा किस देश में तैयार हुआ है। सिर्फ किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट लगा होने से यह साबित नहीं होता कि टैरिफ से बचने की कोशिश हुई है। आज की ग्लोबल सप्लाई चेन में एक प्रोडक्ट के अलग-अलग पार्ट कई देशों में बनते हैं और उसकी आखिरी असेंबली किसी दूसरे देश में हो सकती है। अमेरिका अब AI और डेटा से संदिग्ध शिपमेंट पकड़ेगा रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका तीसरे देशों के जरिए टैरिफ से बचने की कोशिशों पर निगरानी बढ़ा रहा है। व्हाइट हाउस ने सीमा पर आने वाले सामान की जांच में टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिसिस के ज्यादा इस्तेमाल की बात कही है। रिपोर्ट में ऐसे AI सिस्टम का भी जिक्र है, जो अमेरिकी कस्टम अधिकारियों को संदिग्ध शिपमेंट की पहचान करने में मदद कर सकता है। इसका मकसद पूरी सप्लाई चेन को ट्रैक करना है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी सर्वे-10 में 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं: भारतीयों के लिए रूस सबसे अहम पार्टनर, पाकिस्तानियों की पहली पसंद चीन 10 में से 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं, ये बात अमेरिकी प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में सामने आई है। इंडियंस भी अपना सबसे बड़ा दुश्मन पाकिस्तान को ही मानते हैं। सर्वे में कहा गया कि दोनों देशों के लोग पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन भरोसे की कमी है। पूरी खबर पढ़ें…

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना लगातार दूसरे दिन गिरा, चांदी की कीमतें अपरिवर्तित

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 14 अगस्त यानी शुक्रवार को सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। हालांकि, चांदी की कीमतों में स्थिरता रही। सोना 800 रुपये गिरकर 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी बगैर किसी बदलाव के 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी रही।

अंतरराष्ट्रीय बाजार से कमजोर संकेतों का असर

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के कमजोर संकेतों का असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर पड़ा। हालांकि, अमेरिका में प्रोड्यूसर प्राइस डेटा उम्मीद के मुकाबले नरम रहे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में गिरावट की दूसरी वजह मुनाफावसूली रही।

लगातार 7 सत्रों की तेजी के बाद सोने में मुनाफावसूली

13 अगस्त से पहले लगातार सात सत्रों में सोने में तेजी दिखी थी। इससे इसका भाव 12000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा चढ़ गया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी तेजी आने के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक है। इनवेस्टर्स सोने में उछाल के बाद नई खरीदारी करने से हिचक रहे हैं। इसका असर भी सोने की कीमतों पर पड़ा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में हल्की नरमी दिखी। इसका भाव 4,351 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, चांदी में तेजी दिखी। इसका भाव 0.33 फीसदी की तेजी के साथ 64.68 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड की कीमतों में 14 अगस्त को तेजी दिखी। जब तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहेगी, महंगाई बढ़ने का डर बना रहेगा। इससे फेडरल रिजर्व अनुमान से पहले इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

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क्रूड में उछाल जारी रहने से महंगाई बढ़ने का डर

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के कोई संकेत नहीं दिखे हैं। इसका सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ रहा है। इस रास्ते ऑयल टैंकर्स की आवाजाही नाममात्र की हो रही है। इससे क्रूड की सप्लाई में कमी दिखी रही है। अगर यह स्थिति बनी रहती है तो क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा।

हाथों में कटोरा लेकर आजादी मना रहा 80 साल का पाकिस्तान! कंगाली के ये निशान बयान कर रहे उसके असली हालात

पाकिस्तान को बने करीब 80 साल हो चुके हैं, लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था आज भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के कर्ज पर निर्भर है। पिछले कई दशकों में पाकिस्तान को कई बार कर्ज और आर्थिक सुधारों के लिए मदद मिली है। इसके बावजूद देश बार-बार भुगतान संकट में फंसता रहा है और उसे अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए आईएमएफ का सहारा लेना पड़ता है। फिलहाल पाकिस्तान करीब 7 अरब डॉलर के IMF प्रोग्राम के तहत है। वहीं, देश पर सरकारी कर्ज उसकी अर्थव्यवस्था के कुल आकार यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 70 फीसदी है।

सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज और उसका ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने रक्षा पर अपना खर्च बढ़ाया है, जबकि विकास से जुड़े कामों पर खर्च काफी सीमित है। आईएमएफ के हालिया कार्यक्रम से पाकिस्तान को 2023 के लगभग डिफॉल्ट की स्थिति के बाद अपनी विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को कुछ हद तक स्थिर करने में मदद मिली है। हालांकि, देश की कई पुरानी आर्थिक समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। इन्हीं समस्याओं के कारण पाकिस्तान को बार-बार आईएमएफ से कर्ज लेना पड़ता है।

पाकिस्तान में टैक्स से होने वाली कमाई कम है, निर्यात का दायरा सीमित है और कर्ज चुकाने में सरकार का बड़ा पैसा चला जाता है। इसके अलावा, ऊर्जा क्षेत्र की हालत भी खराब है और देश अपनी जरूरतों के लिए लगातार विदेशी कर्ज और आर्थिक मदद पर निर्भर रहता है। ऐसे में पाकिस्तान जब अपनी आजादी की 80वीं सालगिरह मना रहा है, तो बड़ा सवाल यह है कि उसे बार-बार आईएमएफ के पास क्यों जाना पड़ता है। साथ ही, कई वर्षों से चल रहे आर्थिक सुधार कार्यक्रम आखिर इस कर्ज के चक्र को खत्म करने में सफल क्यों नहीं हो पाए हैं।

पाकिस्तान 25 बार आईएमएफ के पास जा चुका है

आईएमएफ के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान 1950 में इस संस्था का सदस्य बना था। इसके बाद से वह 25 बार आईएमएफ के साथ अलग-अलग समझौते कर चुका है। इन समझौतों में कई तरह के कर्ज कार्यक्रम शामिल हैं। हालांकि, इनमें से हर कार्यक्रम को आर्थिक संकट से बाहर निकालने वाला बेलआउट पैकेज नहीं कहा जा सकता। फिर भी, बार-बार आईएमएफ की मदद लेने से पता चलता है कि पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक और विदेशी मुद्रा की कमी से जूझता रहा है।

पाकिस्तान का मौजूदा ‘विस्तारित कोष सुविधा’ कार्यक्रम करीब 7 अरब डॉलर का है। इसे सितंबर 2024 में 37 महीने के लिए मंजूरी दी गई थी। इससे पहले 2023 में पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की ‘स्टैंडबाय व्यवस्था’ मिली थी। उस समय देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से कम हो रहा था और पाकिस्तान के कर्ज न चुका पाने यानी डिफॉल्ट का खतरा बढ़ गया था।

आईएमएफ ने मई 2026 में पाकिस्तान के मौजूदा आर्थिक कार्यक्रम की समीक्षा पूरी की। इसके बाद करीब 1.1 अरब डॉलर की एक और कर्ज की किस्त जारी करने को मंजूरी दी गई। आईएमएफ के मुताबिक, अलग ‘लचीलापन और स्थिरता सुविधा’ के तहत मिलने वाली रकम को जोड़ने पर दोनों कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को अब तक करीब 4.8 अरब डॉलर जारी किए जा चुके थे।

इसी आर्थिक स्थिति के बीच पाकिस्तान अपनी आजादी के 80वें साल में प्रवेश कर रहा है। आईएमएफ के नए कार्यक्रमों से देश को कुछ समय के लिए आर्थिक स्थिरता जरूर मिली है, लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बार-बार संकट में डालने वाली बुनियादी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।

पाकिस्तान के हालात हैं बेहद खराब

पाकिस्तान की सबसे बड़ी आर्थिक समस्याओं में से एक लगातार विदेशी मुद्रा की कमी रही है। जब देश का आयात खर्च, पुराने कर्ज की किस्तें और दूसरी विदेशी देनदारियां उसकी निर्यात से होने वाली कमाई और विदेश से आने वाली रकम से ज्यादा हो जाती हैं, तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को भुगतान संकट से बचने के लिए दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक मदद लेनी पड़ती है। पाकिस्तान के आर्थिक इतिहास में यह स्थिति बार-बार देखने को मिली है। हर कुछ साल बाद देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट खड़ा होता है और उसे आईएमएफ से मदद लेनी पड़ती है।

2023 में पाकिस्तान डिफॉल्ट के करीब पहुंच गया था। इसके बाद सितंबर 2024 में आईएमएफ ने उसके लिए एक नया आर्थिक कार्यक्रम मंजूर किया। करीब 7 अरब डॉलर के इस कार्यक्रम का मकसद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिर करना, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना, टैक्स से होने वाली कमाई बढ़ाना, सरकारी कंपनियों में सुधार करना और ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति बेहतर करना था। इसके साथ ही, लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए बेहतर माहौल तैयार करने पर भी जोर दिया गया।

आजादी के 80 साल बाद भी पाकिस्तान का आईएमएफ के एक बड़े कार्यक्रम पर निर्भर रहना बताता है कि देश की कई पुरानी आर्थिक कमजोरियां अब तक दूर नहीं हो पाई हैं।

कछुए की चाल से बढ़ रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान की आर्थिक रिकवरी अभी भी बहुत धीमी है। आईएमएफ के जुलाई 2026 के अनुमान के मुताबिक, 2026 में पाकिस्तान की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 3.6 फीसदी रहने की उम्मीद है। वहीं, खुदरा महंगाई करीब 7.2 फीसदी रह सकती है। 2025 में पाकिस्तान की कुल अर्थव्यवस्था का आकार करीब 407.8 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया था। आईएमएफ ने मई 2026 की समीक्षा में कहा था कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर में सुधार हुआ है। महंगाई भी नियंत्रण में रही और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने की दिशा में उम्मीद से बेहतर काम हुआ। हालांकि, आईएमएफ ने यह भी चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सामने आगे भी अनिश्चितता बनी हुई है और जोखिम कम नहीं हुए हैं।

पाकिस्तान का रक्षा खर्च भी बढ़ा

पाकिस्तान की आर्थिक परेशानियों का एक संबंध देश में सेना की बढ़ती राजनीतिक ताकत से भी जोड़ा जा रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को पाकिस्तान की विदेश नीति पर सबसे ज्यादा प्रभाव रखने वाली शख्सियतों में से एक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनका प्रभाव अब सिर्फ सैन्य मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में भी उनकी भूमिका बढ़ गई है।

2025 में फील्ड मार्शल बनने के बाद आसिम मुनीर की स्थिति और मजबूत हुई है। इसी बीच, आईएमएफ के आर्थिक कार्यक्रम के तहत वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की जरूरत के बावजूद पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पाकिस्तान सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 18 फीसदी ज्यादा है। दूसरी ओर, सरकार ने विकास से जुड़े कामों के लिए सिर्फ 1 लाख करोड़ रुपये का संघीय बजट रखा है। इससे साफ है कि आर्थिक दबाव के बावजूद पाकिस्तान में रक्षा खर्च को विकास खर्च की तुलना में ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।

Share Market Fall: निफ्टी में लगातार चौथे दिन गिरावट, सेंसेक्स 71 अंक टूटा; निवेशकों की दौलत ₹1.97 लाख करोड़ घटी

शेयर बाजार में शुक्रवार, 14 अगस्त को बिकवाली का आलम रहा। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले सेंसेक्स 70.71 अंकों की गिरावट के साथ 78,009.25 पर और निफ्टी 29.85 अंकों की गिरावट के साथ 24,366 पर बंद हुआ। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 1.97 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया। दिन में सेंसेक्स पिछले बंद भाव से 395.66 अंक तक टूटकर 77,684.37 के लो तक गया। इसी तरह निफ्टी भी पिछली क्लोजिंग से 99 अंक तक टूटकर 24,296.80 के लो तक गया। निफ्टी में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट रही।

गुरुवार, 13 अगस्त को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,94,13,560.799 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को यह घटकर 4,92,16,152.08 करोड़ रुपये रह गया। यानि कि 1,97,408.719 करोड़ रुपये की कमी।

मार्केट बंद होने पर NSE पर अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज, भारती एयरटेल, अदाणी पोर्ट्स, अदाणी एंटरप्राइजेज और ICICI Bank टॉप गेनर रहे। दूसरी ओर टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, एशियन पेंट्स, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और ONGC टॉप लूजर रहे।

गुरुवार को कैसा रहा था कारोबार

गुरुवार को कारोबार के अंतिम घंटे में हुई बाइंग से सेंसेक्स 113.61 अंक या 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,079.96 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 40.10 अंक या 0.16 प्रतिशत टूटकर 24,395.85 पर बंद हुआ था। BSE मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक में 0.53 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि स्मॉलकैप सेलेक्ट में 0.35 प्रतिशत का लाभ रहा।

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वैश्विक बाजारों का हाल

एशियाई बाजारों में हेंग सेंग, SET कंपोजिट और ताइवान वेटेड में गिरावट है। वहीं कॉस्पी, निक्केई 225, शंघाई कंपोजिट और जकार्ता कंपोजिट बढ़त में हैं। यूरोपीय बाजार हरे निशान में हैं। अमेरिकी बाजार गुरुवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे।

रुपये में आई 3 पैसे की मजबूती

विदेशी बाजारों में अमेरिकी डॉलर के कमजोर रुख के बीच रुपया शुक्रवार को 3 पैसे की बढ़त के साथ 95.42 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ। घरेलू शेयर बाजार से विदेशी पूंजी की निकासी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये पर दबाव बना रहा। रुपया गुरुवार को 12 पैसे की गिरावट के साथ 95.45 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trading plan: बाजार कह रहा है कुछ दिन ट्रेडिंग ना करें, एकदम पक्का भरोसा मिले तभी करें ट्रेड

Trading plan : पूरे दिन एक रेंज में घूमने के बाद बाजार में निचले स्तरों से रिकवरी आई है। बैंक निफ्टी में भी दिन के लो से सुधार हुआ है। इधर मिडकैप और स्मॉलकैप में हल्का दबाव है। कच्चा तेल 88 डॉलर के ऊपर आ गया है। आज अर्निंग्स सीजन का आखिरी दिन भी है। मेटल और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी आई है। दोनों सेक्टर इंडेक्स करीब करीब एक फीसदी फिसले हैं। साथ ही कैपिटल मार्केट,केमिकल्स और FMCG पर भी दबाव है। वहीं कंज्यूमर ड्यूरेबल और कैपिटल गुड्स में हल्की खरीदारी आई है।

चुनिंदा प्रीपेड प्लान महंगे होने की खबर के बाद टेलीकॉम शेयरों में जबरदस्त एक्शन देखने को मिला है। 3 फीसदी की तेजी के साथ भारती एयरटेल में ब्रेकआउट देखने को मिला है। वोडाफोन आइडिया भी 4 फीसदी भागा है। भारती हेक्सा भी ऊपर कारोबार कर रहा है। कल के नतीजों और ब्रोकरेज की बुलिश रिपोर्ट्स के दम पर जुबिलेंट फूड भागा है। यह शेयर करीब 4 फीसदी चढ़कर वायदा का टॉप गेनर बना है। वहीं अच्छे नतीजों के बाद वेल्सपन लिविंग 5 फीसदी उछला है। साथ ही इंडिगो पेंट्स में भी जोरदार तेजी आई है। उधर नतीजों के बाद ओपोलो हॉस्पिटल में भी लगातार दूसरे दिन तेजी कायम है।

खराब रिजल्ट के बाद टाटा मोटर्स PV में तेज गिरावट देखने को मिली है। JLR फिर सिरदर्द बना है। यह शेयर 5 फीसदी टूटकर निफ्टी का टॉप लूजर बना है। वहीं ब्राजील की कंपनी ALUNORTE की एल्युमिना प्रोडक्शन बढ़ाने की खबर से नाल्को 5 फीसदी टूटा है।

बाजार: उलझन भरा दिन और हफ्ता

सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि पूरे दिन और पूरा हफ्ते बाजार एक दायरे में रहा। निफ्टी न चलने को तैयार है,न गिरने को। बैंक निफ्टी और निफ्टी IT में भी कोई बड़ा ट्रेंड नहीं है। आज मिड और स्मॉलकैप्स में भी काफी कम मौके रहे। Adv/Dec आज थोड़ा खराब रहा। इंडिया VIX में कोई बदलाव नहीं हुआ, PCR भी समान रहा। आज अर्निंग्स सीजन का भी आखिरी दिन है। कच्चा तेल भी वापस $88.5 के स्तर पर आ गया है।

बाजार: अब क्या?

बाजार कह रहा है कुछ दिन ट्रेडिंग ना करें। एकदम ही भरोसा मिले तभी ट्रेड करें। वरना रेंज को स्मार्टली किनारों पर ट्रेड करें। आज भी निफ्टी ने दोनों तरफ के SL नहीं छुए। लेकिन निफ्टी ट्रेड्स में 50-60 अंक मिल रहे हैं। ऐसा मार्केट्स आमतौर पर आपको थका देता है। इसलिए जरूरी है कि ओवरट्रेडिंग न करें। जबरदस्ती ट्रेड न ढूंढें, ट्रेड को आने दें। टेलीकॉम में बड़ी खबर के बाद ब्रेकआउट देखने को मिला है। डिफेंस एक और मजबूत पॉकेट है।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 24,250-24,300 पर सपोर्ट और 24,450-24,500 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 57,100-57,300 पर सपोर्ट और 57,600-57,800 पर रेजिस्टेंस है।

 

आगे खपत से जुड़ी कंपनियों में दिखेगी जोरदार तेजी, फिनटेक और क्विक कॉमर्स शेयरों पर रहे नजर – आशीष चतुरमोहता

 

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