Karur Vysya Bank Share : नतीजों के बाद 10% से ज्यादा की तेजी के साथ स्टॉक बना आज का हीरो, जानिए आगे का आउटलुक

Karur Vysya Bank Share : नतीजों के बाद करूर वैश्य बैंक (Karur Vysya Bank) में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। आज यह शेयर हीरो ऑफ द डे बना हुआ है। फिलहाल यह शेयर 12 बजे के आसपास 31.85 रुपए यानी 10.58 फीसदी की बढ़त के साथ 332 रुपए के ऊपर दिख रहा था। आज का इसका दिन का हाई 335.85 रुपए है। इसका 52 वीक हाई 343.45 रुपए पर है। करूर वैश्य बैंक के आउटपरफॉर्मेंस की बात करें तो जनवरी से अब तक इस शेयर में 20 फीसदी की तेजी आई है। वहीं, 1 साल में इसमें 44 फीसदी रिटर्न दिया है। जबकि, बैंक निफ्टी ने जनवरी से अब तक 3 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है। वहीं, 1 साल में इस इंडेक्स ने सिर्फ फीसदी रिटर्न दिया है।

करूर वैश्य बैंक में तेजी क्यों?

करूर वैश्य बैंक के मजबूत नतीजों ने इसमें जोश भर दिया है। पहली तिमाही में बैंक के नतीजे मजबूत रहे हैं। इस अवधि में इसका RoA 2.1% और कोर NIM 4.26% पर स्थिर रहा है। लोन ग्रोथ 17% और डिपॉजिट 15% बढ़ा है। प्रोविजन 24% घटा है। एसेट क्वालिटी भी मजबूत हुई है। तिमाही आधार पर बैंक की GNPA 0.74% और NNPA 0.19% रहा है। सालाना आधार पर CASA ग्रोथ 15% रहा है। वहीं, तिमाही आधार पर इसमें 9% इजाफा हुआ है।

30 जून, 2026 को खत्म हुई तिमाही में बैंक का नेट प्रॉफ़िट सालाना आधार पर लगभग 45% बढ़कर 756 करोड़ रुपये हो गया। यह पिछले 11 तिमाहियों में सबसे ज़्यादा प्रतिशत बढ़ोतरी है। इस तिमाही में बैंक ने 3,049 करोड़ रुपये की ब्याज आय दर्ज की है। जो सालाना आधार पर लगभग 19% ज्यादा है। कुल आय में इसका अहम योगदान रहा। पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 5% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि,जून तिमाही में अन्य आय में मामूली गिरावट का असर कुल आय पर पड़ा और इससे नेट प्रॉफ़िट में होने वाली बढ़ोतरी सीमित रही। जून तिमाही में बैंक की अन्य आय 442 करोड़ रुपये रही, जो सालाना आधार पर 1% से ज़्यादा और तिमाही आधार पर 28% से ज़्यादा की भारी गिरावट दिखाती है।

करूर वैश्य बैंक: गाइडेंस

बैंक का कहना है कि उसके तिमाही दर तिमाही यील्ड में 10 बेसिस प्वाइंट की गिरावट का अनुमान है। वहीं, कॉस्ट ऑफ डिपॉजिट में 10 बेसिस प्वाइंट बढ़ोतरी संभव है। NIM गाइडेंस करीब 3.8% पर बरकरार है। अगले क्वार्टर में NIM 4% से ऊपर रहने की उम्मीद है। वहीं, स्लिपेज 1% से नीचे रहने का अनुमान है। लोन ग्रोथ के इंडस्ट्री से करीब 2% ज्यादा का अनुमान है। GNPA 1.5% से नीचे रखने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, NNPA 1% से नीचे बनाए रखने का लक्ष्य है।

करूर वैश्य बैंक: वैल्युएशन

यह स्टॉक FY28 के प्राइस-टू-बुक (P/B) के 1.8 गुना मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है। यह इसको आकर्षक बनाता है।

शेयर प्राइस हिस्ट्री

पिछले 1 हफ्ते में यह शेयर 11.02 फीसदी भागा है। वहीं, 1 महीने में इसमें 14.14 फीसदी और तीन महीने में 14.53 फीसदी की तेजी आई है। इस साल अब तक यह शेयर 26.26 फीसदी भागा है। वहीं, 1 साल में इसमें 47.98 फीसदी की और तीन साल में 209.28 फीसदी की तेजी देखने को मिली है।

 

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Silver Rate Today: आज का चांदी का भाव! लगातार छठे दिन गिरावट, जानिए आज 1 किलो सिल्वर का ताजा भाव

Silver Price Today: अगर आप चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज चांदी की कीमत में 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद चांदी का भाव घटकर 2,21,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गया है। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,22,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बाजार में यह लगातार छठा कारोबारी सत्र है, जब चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

बाजार के जानकारों के अनुसार, 10 जुलाई से अब तक चांदी की कीमत में कुल 15,500 रुपये प्रति किलोग्राम यानी करीब 6.5 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। निवेशक वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों और भू-राजनीतिक तनाव पर नजर बनाए हुए हैं, जिसका असर चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सितंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा में हल्की तेजी दर्ज की गई। वायदा कारोबार में चांदी 1,618 रुपये (0.75%) बढ़कर 2,18,021 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम के आधार पर चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

दिल्ली में 1 किलो सिल्वर ₹2,35,100

अगर आप आज चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो पहले ताजा भाव जान लेना आपके लिए जरूरी है। आज दिल्ली में चांदी की कीमत ₹235.10 प्रति ग्राम और ₹2,35,100 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है। दिल्ली देश के सबसे बड़े सर्राफा बाजारों में से एक है। यहां चांदी की मांग हमेशा ऊंची रहती है। निवेश के साथ-साथ लोग चांदी का इस्तेमाल आभूषण, बर्तन, सजावटी सामान, सिक्के और उपहार के रूप में भी बड़े पैमाने पर करते हैं। इसी वजह से दिल्ली में चांदी की कीमतों पर निवेशकों और खरीदारों की लगातार नजर रहती है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर समय-समय पर बदलते रहते हैं। ऐसे में खरीदारी से पहले अपने शहर का ताज़ा रेट जरूर जांच लेना चाहिए। यदि आप निवेश या व्यक्तिगत उपयोग के लिए चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अधिकृत ज्वेलर्स या सर्राफा बाजार से मौजूदा कीमत की पुष्टि करने के बाद ही खरीदारी करें।

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Silver Gold Price:चढ़ गया सोने-चांदी का भाव, क्या अब भी कर रहे है सही मौके की तलाश, जानें क्या है एक्सपर्ट की राय की राय

Silver Gold Price: हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार, 21 जुलाई को सुबह के कारोबार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। दरअसल, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता से सोने-चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिला। हालांकि भले ही US में ज़्यादा ब्याज दरों की उम्मीदों ने बढ़त को सीमित रखा। COMEX सोना $4,041 प्रति औंस के इंट्राडे हाई को छूने के बाद 0.34% बढ़कर $4,029.60 प्रति औंस हो गया, जबकि COMEX चांदी 0.13% बढ़कर $57.145 प्रति औंस हो गई।

कीमती धातुओं का बाजार 2 अलग-अलग वजहों को बैलेंस कर रहा है। एक तरफ, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से सोने जैसे सेफ़-हेवन एसेट्स की मांग को सपोर्ट मिल रहा है। दूसरी तरफ, कच्चे तेल की ज़्यादा कीमतें महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रही हैं, जिससे यह उम्मीद मज़बूत हो रही है कि US फ़ेडरल रिज़र्व इस साल के आखिर में फिर से ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

सोने के लिए तेल क्यों ज़रूरी है

US और ईरान के बीच बीच-बचाव की कोशिशों की खबरों से कुछ समय के लिए सीज़फ़ायर की उम्मीद बढ़ने के बाद मंगलवार (21 जुलाई) को तेल की कीमतों में थोड़ी कमी आई। ब्रेंट क्रूड 0.4% गिरकर $88.87 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US WTI क्रूड $82.47 के करीब ट्रेड कर रहा था।

हालांकि, यमन के ईरान-समर्थित हूतियों द्वारा सऊदी अरब पर नेवल ब्लॉकेड की धमकी देने के बाद जियोपॉलिटिकल रिस्क अभी भी बढ़े हुए हैं, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रुकावटों की चिंता बढ़ गई है। US और ईरान के बीच नए मिलिट्री हमलों ने भी बाज़ारों को किनारे पर रखा है।

कच्चे तेल की ज़्यादा कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। अगर महंगाई ज़्यादा बनी रहती है, तो फ़ेडरल रिज़र्व ब्याज़ दरों को ज़्यादा समय तक बनाए रख सकता है या फिर से दरें बढ़ा सकता है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसका असर आमतौर पर सोने जैसे बिना ब्याज़ वाले एसेट्स पर पड़ता है।

फेड की उम्मीदों ने बुलियन की बढ़त को रोका

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की AVP, कायनात चैनवाला के अनुसार, स्पॉट गोल्ड $4,020 प्रति औंस के करीब है, जबकि सिल्वर $57 प्रति औंस से ऊपर रिकवर हो गया है, लेकिन बढ़त सीमित है क्योंकि मार्केट ने साल के आखिर तक कम से कम एक और फेडरल रिजर्व रेट हाइक को काफी हद तक तय कर लिया है।

उन्होंने कहा कि US पॉलिसीमेकर्स के सख्त कमेंट्स और तेल की कीमतों में हालिया तेजी ने सितंबर में रेट हाइक की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है, जिससे जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स से बीच-बीच में मिल रहे सपोर्ट के बावजूद बुलियन की अपील कम हो गई है।

आखिर कहां तक जाएगी कीमतें

LKP सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के VP रिसर्च एनालिस्ट, जतीन त्रिवेदी ने कहा कि US में नरम महंगाई के आंकड़ों से गोल्ड में रिकवरी हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, मजबूत US डॉलर और फेड रेट में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदों को लेकर चिंताएं बढ़त को रोक रही हैं। घरेलू बाज़ार में, उन्हें MCX गोल्ड के लिए तुरंत सपोर्ट के तौर पर ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम दिख रहा है, जबकि आने वाले सेशन में ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम एक अहम रेजिस्टेंस लेवल हो सकता है।

इस बीच, चांदी ने हाल के निचले स्तरों से उबरने के बाद ज़्यादा मज़बूती दिखाई है, हालांकि दोनों कीमती धातुएं ग्लोबल तेल बाज़ारों में हो रहे बदलावों, पश्चिम एशिया संघर्ष और US मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर उम्मीदों के प्रति सेंसिटिव बनी हुई हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

गोल्ड पर ईरान युद्ध का कितना असर पड़ा? अब खरीदें या बेचने में भलाई, एक्सपर्ट्स से जानिए

Gold Price Outlook: जुलाई की शुरुआत में सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव था। ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली एसेट की ओर रुख करते हैं। हालांकि, यह तेजी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। मुनाफावसूली बढ़ने के साथ सोने की कीमतों में फिर गिरावट आ गई।

युद्ध के तनाव के अलावा अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतों ने भी सोने के भाव में बड़ा उतार-चढ़ाव पैदा किया।

जुलाई में सोने की चाल कैसी रही?

MCX पर 1 जुलाई को सोने का भाव करीब ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम था। सिर्फ दो कारोबारी सत्र में यह बढ़कर ₹1,47,650 पर पहुंच गया। यानी करीब 4.1% की तेजी आई।

लेकिन इसके बाद तस्वीर बदल गई। निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी और बाजार ने युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों का नए सिरे से आकलन किया। इसका असर यह हुआ कि 17 जुलाई तक सोना गिरकर ₹1,40,550 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। 20 जुलाई को सोने में हल्की रिकवरी जरूर देखने को मिली। इसका भाव फिर ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।

अगर लंबी अवधि की बात करें, तो 29 जनवरी को सोने ने ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम (करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस) से ऊपर का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद 30 जून तक इसमें करीब 30% की गिरावट आ चुकी थी और भाव करीब ₹1.40 लाख (करीब 3,960 डॉलर प्रति औंस) तक आ गया।

युद्ध के बावजूद सोना क्यों कमजोर पड़ा?

Augmont की हेड ऑफ रिसर्च रेनिशा चैनानी का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद इस महीने सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया, जो जून के आखिर के बाद का सबसे निचला स्तर है।

उनके मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा है। इससे बाजार को लगता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। यही वजह है कि सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग से ज्यादा असर ब्याज दरों की चिंता का पड़ा।

अभी खरीदें, होल्ड करें या बेच दें?

Geojit Investments के हेड ऑफ कमोडिटी रिसर्च हरीश वी का कहना है कि युद्ध से जुड़े जोखिम का बड़ा हिस्सा पहले ही सोने की कीमतों में शामिल हो चुका है। अब निवेशकों का फोकस सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि ब्याज दरों, महंगाई और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद पर ज्यादा है।

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन निवेशकों के पास पहले से सोना है, वे फिलहाल होल्ड कर सकते हैं। वहीं, नए निवेशकों को तेजी के दौरान खरीदारी करने के बजाय कीमतों में गिरावट का इंतजार करना चाहिए।

‘घबराकर बेचने की जरूरत नहीं’

रेनिशा चैनानी का कहना है कि अभी होल्ड की रणनीति बेहतर रहेगी। जिन लोगों ने पहले से निवेश किया हुआ है, वे बाजार की मौजूदा उतार-चढ़ाव वाली स्थिति का इंतजार कर सकते हैं। वहीं, लंबे समय के निवेशक 3,950 से 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास गिरावट आने पर खरीदारी पर विचार कर सकते हैं।

हालांकि, उनका यह भी कहना है कि फिलहाल घबराकर बेचने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर फेडरल रिजर्व फिर से ब्याज दरें बढ़ाता है या कच्चे तेल की कीमतों में और तेज उछाल आता है, तो सोने की कीमतें 3,900 डॉलर प्रति औंस तक भी फिसल सकती हैं।

Gold Silver Price Today: चांदी 6 दिन में ₹15500 सस्ती हुई, सोने का बढ़ा दाम

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Bitcoin Price Today: बिटकॉइन एक साल में 45% क्रैश हुआ, एक्सपर्ट्स बोले – अभी दूर रहने में ही भलाई

Bitcoin Price Today: क्रिप्टो बाजार में सोमवार को दबाव देखने को मिला। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन करीब 1.63% टूटकर 63,500 डॉलर के आसपास पहुंच गई। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। निवेशकों को डर है कि अगर महंगाई फिर बढ़ी, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकता है।

एक साल में 45% क्रैश हुआ

बिटकॉइन की कीमत में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले 6 महीने में यह 30.05% गिर चुका है। वहीं, 1 साल में बिटकॉइन 45.44% टूटा है। हालांकि, पिछले 5 साल में इसने 87.77% का रिटर्न जरूर दिया है। लेकिन, इसके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यह बेहद कम है।

बिटकॉइन की कीमत गिरने की 5 बड़ी वजह

1. अमेरिका-ईरान तनाव : बिटकॉइन की गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ने से दुनियाभर के बाजारों में डर का माहौल है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। वे क्रिप्टो से पैसा निकालकर सोना और डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं। इसका असर बिटकॉइन पर भी साफ दिखा।

2. कच्चा तेल महंगा : तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया। महंगा तेल मतलब महंगाई बढ़ने का खतरा। अगर महंगाई बढ़ती है, तो ब्याज दरें भी लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। यही डर क्रिप्टो बाजार पर भारी पड़ रहा है।

3. फेड की ब्याज दर : निवेशकों को लग रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरें कम नहीं करेगा। कुछ लोगों को तो यह भी उम्मीद है कि साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऊंची ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर बिटकॉइन जैसी जोखिम वाली एसेट्स के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

4. अहम स्तर पार न कर पाना : बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर के बीच का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद कई ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। बिकवाली बढ़ी और कीमत 63,500 डॉलर के करीब पहुंच गई। तकनीकी चार्ट भी फिलहाल कमजोरी का संकेत दे रहे हैं।

5. खरीद से ज्यादा बिकवाली : एक अच्छी बात यह है कि स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार पैसा आ रहा है। इसका मतलब बड़े निवेशकों की दिलचस्पी अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन दूसरी तरफ, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। इसलिए खरीदारी का असर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा और बिटकॉइन दबाव में बना हुआ है।

बिटकॉइन के लिए अहम लेवल क्या हैं?

Delta Exchange की रिसर्च एनालिस्ट रिया सहगल का कहना है कि कि बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद मुनाफावसूली बढ़ी और कीमत नीचे आ गई।

उनके मुताबिक, अगर बिटकॉइन 63,000 डॉलर के नीचे जाता है, तो यह 62,300 से 61,800 डॉलर तक फिसल सकता है। अब बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यही चीजें आगे बिटकॉइन की दिशा तय कर सकती हैं।

क्या अब बिकवाली थम रही है?

Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत का कहना है कि गिरावट के बीच कुछ अच्छे संकेत भी मिल रहे हैं। Glassnode के ऑन-चेन डेटा से पता चलता है कि लंबे समय से बिटकॉइन होल्ड करने वाले निवेशकों की बिकवाली अब कम होने लगी है। इसका मतलब है कि घबराहट में होने वाली बड़ी बिकवाली शायद अपने आखिरी दौर में है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में स्पॉट बिटकॉइन ETF में करीब 290 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश आया है। इससे बाजार को सहारा मिला है। हालांकि, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। यही वजह है कि बिटकॉइन अभी भी अपने 50 महीने के मूविंग एवरेज यानी करीब 65,900 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है।

निवेशकों के लिए क्या सलाह है?

Pi42 के को-फाउंडर और सीईओ अविनाश शेखर का कहना है कि ETF में लगातार पैसा आना अच्छी बात है। इससे पता चलता है कि बड़े निवेशकों का भरोसा अभी भी बना हुआ है। उनके मुताबिक, बाजार इस समय एक हेल्दी कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है। यानी आगे की तेजी से पहले यह सामान्य ठहराव हो सकता है।

वहीं, Giottus के सीईओ विक्रम सुब्बुराज का कहना है कि छोटी अवधि की तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक बिटकॉइन 65,000 डॉलर के ऊपर टिक नहीं जाता और ETF में लगातार मजबूत निवेश नहीं आता, तब तक थोड़ा-थोड़ा निवेश करना और ज्यादा जोखिम लेने से बचना बेहतर रणनीति होगी।

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Gold Silver Price Today: चांदी 6 दिन में ₹15500 सस्ती हुई, सोने का बढ़ा दाम

Gold Silver Price Today: पिछले हफ्ते की तेज गिरावट के बाद सोमवार को सोने की कीमतों में जोरदार वापसी देखने को मिली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोना ₹1,400 चढ़कर करीब ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सोमवार को चांदी ₹1,000 सस्ती हो गई और यह लगातार छठे कारोबारी सत्र में कमजोर रही।

सोने का ताजा भाव

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाला सोना सोमवार को ₹1,46,900 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,45,500 प्रति 10 ग्राम था। यानी एक दिन में सोने की कीमत ₹1,400 बढ़ गई।

चांदी में लगातार छठे दिन गिरावट

दूसरी ओर, चांदी की कीमत ₹1,000 घटकर ₹2,21,500 प्रति किलोग्राम रह गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,22,500 प्रति किलो था।

अगर 10 जुलाई से अब तक की बात करें, तो चांदी की कीमत में कुल ₹15,500 यानी करीब 6.5% की गिरावट आ चुकी है।

क्यों बढ़ा सोने का भाव?

बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले हफ्ते की बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों ने सस्ते भाव पर सोने की खरीदारी शुरू की। इसी वजह से कीमतों में रिकवरी देखने को मिली।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले सकारात्मक संकेत और डॉलर में नरमी की वजह से सोने को समर्थन मिला। डॉलर कमजोर होने पर विदेशी निवेशकों के लिए सोना खरीदना कुछ सस्ता हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या हुआ?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 2% की बढ़त के साथ 57 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।

Kotak Securities की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि, दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। इसी वजह से निवेशकों का रुख लगातार बदल रहा है।

कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की चिंता

भूराजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। WTI क्रूड भी 85 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया।

हालांकि बाद में ईरान की ओर से बातचीत के संकेत मिलने के बाद तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई। जानकारों का कहना है कि अगर तनाव फिर बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड दोबारा 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जा सकता है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का मानना है कि फिलहाल सोने की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका की ब्याज दरों और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगी।

MCX गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

वहीं, LKP Securities के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी एंड करेंसी) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि MCX पर सोने में करीब ₹900 की तेजी आई है और यह ₹1,41,850 के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX गोल्ड 3,975 डॉलर के सपोर्ट से उछलकर करीब 4,020 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है।

उनके मुताबिक, जून के नरम अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से सोने को शुरुआती समर्थन मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से आने वाले महीनों में महंगाई फिर बढ़ सकती है। अगर ऐसा होता है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सितंबर या दिसंबर में एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है।

गोल्ड के लिए अहम लेवल

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों की आशंका, मजबूत अमेरिकी डॉलर और महंगे कच्चे तेल की वजह से फिलहाल सोने की तेजी सीमित रह सकती है। तकनीकी स्तर पर MCX गोल्ड के लिए ₹1,40,000 मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, ₹1,42,500 निकट अवधि का अहम रेजिस्टेंस स्तर हो सकता है।

Gold Price : मिडिल ईस्ट तनाव और फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के बीच सोने की चाल सपाट,जानिए क्या हो निवेश रणनीति

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किराए के मकान के साथ चल रहा है होम लोन? ITR दाखिल करते समय ऐसे उठाएं डबल टैक्स छूट का फायदा, बचेंगे लाखों

HRA and Home Loan Tax Benefit: नया घर खरीदने के बाद भी किराए के मकान में रहने वाले या नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहर में रहने वाले नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स के मन में अक्सर एक सवाल उठता है। ‘क्या मैं एक साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और होम लोन दोनों पर टैक्स छूट का दावा कर सकता हूं?’

एक व्यक्ति ने एक्सपर्ट से सवाल किया कि, ‘मैंने एक अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट के लिए होम लोन लिया था, जिसका पजेशन मुझे अगस्त 2025 में मिला। मैंने तुरंत इस फ्लैट को किराए पर दे दिया और खुद एक दूसरे किराए के फ्लैट में रह रहा हूं। क्या मैं फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए आईटीआर फाइल करते समय पूरे साल के लिए HRA और होम लोन दोनों पर टैक्स लाभ का दावा कर सकता हूं?’

आइए टॉप फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के हवाले से समझते हैं कि इनकम टैक्स एक्ट इस बारे में क्या कहता है और इसका पूरा नियम क्या है।

1. क्या एक साथ मिल सकती है HRA और होम लोन पर छूट?

जी हां, बिल्कुल! इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत एक ही समय में HRA और होम लोन दोनों पर टैक्स बेनिफिट क्लेम करने पर कोई कानूनी पाबंदी नहीं है। बशर्ते आप इन दोनों क्लेम से जुड़ी बुनियादी शर्तों को पूरा करते हों:

HRA के लिए शर्त: इनकम टैक्स की धारा 10(13A) के तहत आपको अपनी कंपनी से HRA मिलता हो, आप वास्तव में उस घर का किराया चुका रहे हों जिसमें आप रह रहे हैं, और वह घर आपके खुद के नाम पर नहीं होना चाहिए।

होम लोन के लिए शर्त: जिस वित्तीय वर्ष में आपको प्रॉपर्टी का पजेशन मिलता है, आप उस पूरे साल के लिए होम लोन के टैक्स बेनिफिट का दावा करने के हकदार हो जाते हैं।

2. पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलेगा अधिकतम फायदा

ध्यान रखें कि HRA और होम लोन के मूलधन पर मिलने वाली टैक्स छूट पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कौन सा टैक्स व्यवस्था चुना है। धारा 10(13A) के तहत HRA पर छूट और धारा 80C के तहत होम लोन के मूलधन पुनर्भुगतान पर ₹1.50 लाख तक की छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में ही मिलती है। अगर आप नई टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो ये दोनों छूट खत्म हो जाएंगी।

3. होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट का नियम

लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट का गणित इस बात पर निर्भर करता है कि घर से आपको क्या कमाई हो रही है और आपने कौन सा टैक्स रिजीम चुना है। टैक्स व्यवस्था होम लोन के ब्याज (Section 24b) पर मिलने वाली छूट के नियम:

पुरानी टैक्स व्यवस्था- आप साल भर में चुकाए गए पूरे ब्याज को मकान से मिले किराए के एवज में क्लेम कर सकते हैं। इसके अलावा, हाउस प्रॉपर्टी हेड के तहत होने वाले ₹2 लाख तक के नुकसान को अपनी अन्य आय के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। अगर नुकसान ₹2 लाख से ज्यादा है, तो उसे अगले 8 सालों तक आगे ले जाया जा सकता है।

नई टैक्स व्यवस्था- नई टैक्स व्यवस्था में होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली कटौती केवल आपके द्वारा कमाए गए टैक्स योग्य किराए की रकम तक ही सीमित रहेगी। इसमें हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान को किसी अन्य आय के साथ सेट-ऑफ करने या भविष्य के लिए कैरी फॉरवर्ड करने की अनुमति नहीं है।

4. प्री-कंस्ट्रक्शन इंटरेस्ट का अतिरिक्त लाभ

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पजेशन मिलने वाले साल में टैक्सपेयर्स के लिए एक और बड़ा फायदा होता है। आप पजेशन वाले पूरे साल के होम लोन ब्याज का दावा तो कर ही सकते हैं। इसके साथ ही, घर का पजेशन मिलने से पहले की अवधि के दौरान आपने जो भी कुल ब्याज चुकाया था, उसका 1/5 हिस्सा भी हर साल क्लेम कर सकते हैं।

कुल मिलाकर आपकी प्रॉपर्टी किराए पर उठाई गई है और आप खुद किसी अन्य मकान में किराया देकर रह रहे हैं, तो आप नियमों का पालन करते हुए एक ही साल में HRA और होम लोन (ब्याज + मूलधन) दोनों पर डबल टैक्स ब्रेक का फायदा उठा सकते हैं। बेहतर लाभ के लिए अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार सही टैक्स रिजीम का चुनाव करें।

Gold-Silver Outlook: गोल्ड-सिल्वर मार्केट में मचा हाहाकार! भारी मंदी के बीच रॉबर्ट कियोसाकी ने कर दी ये बड़ी भविष्यवाणी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी का मुनाफा 264% उछला, ₹1000 करोड़ जुटाने की तैयारी

Q1 Results: बेंगलुरु की रियल एस्टेट कंपनी Sobha Ltd ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू, दोनों में शानदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके साथ ही कंपनी ने ₹1,000 करोड़ तक का फंड जुटाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

264% बढ़ गया कंपनी का मुनाफा

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में Sobha का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) सालाना आधार पर 264.3% बढ़कर ₹51 करोड़ रहा। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी ने ₹14 करोड़ का मुनाफा कमाया था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी शानदार रहा। यह एक साल पहले के ₹851.9 करोड़ से बढ़कर ₹1,278.1 करोड़ पहुंच गया। यानी कंपनी के रेवेन्यू में करीब 50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ऑपरेटिंग कमाई में भी बड़ा सुधार

शोभा लिमिटेड का EBITDA भी काफी मजबूत रहा। यह पिछले साल के ₹23.7 करोड़ से बढ़कर ₹77.6 करोड़ हो गया।

कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 2.8% से बढ़कर 6.1% पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि कंपनी की ऑपरेटिंग एफिशिएंसी पहले के मुकाबले बेहतर हुई है।

₹1,000 करोड़ जुटाएगी कंपनी

तिमाही नतीजों के साथ शोभा लिमिटेड ने एक और बड़ा फैसला लिया है। Sobha के बोर्ड ने प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए ₹1,000 करोड़ तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने को मंजूरी दे दी है।

यह रकम एक बार में या फिर एक से ज्यादा चरणों (Tranches) में जुटाई जा सकती है।

कौन तय करेगा पूरी प्रक्रिया?

शोभा के बोर्ड ने इस फंड जुटाने की पूरी प्रक्रिया Investments and Borrowings Committee को सौंप दी है।

यही कमेटी तय करेगी कि NCD कब जारी होंगे, उनकी अवधि कितनी होगी, निवेशकों को कितना कूपन (ब्याज) मिलेगा, ब्याज का भुगतान कैसे होगा और लिस्टिंग समेत बाकी शर्तें क्या रहेंगी। कंपनी ने कहा है कि इन सभी बातों की जानकारी बाद में दी जाएगी।

शोभा के शेयरों के हाल

Sobha का शेयर ₹9.30 यानी 0.63% की गिरावट के साथ ₹1,455.35 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 7% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 14.24% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 15.62 हजार करोड़ रुपये है।

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 21 जुलाई को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold-Silver Price : MCX पर सोने-चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार, जानिए आगे कैसी रह सकती है इनकी चाल

Gold-Silver Price : सोमवार,20 जुलाई को वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह हाजिर बाजार में मजबूत मांग और चांदी के लिए ग्लोबल स्तर पर पॉजिटिव रुझान के बीच ट्रेडर्स का नई पोजीशन बनाना रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर,अगस्त डिलीवरी वाले फ्यूचर्स में ₹294 या 0.21% की बढ़ोतरी हुई है और यह ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इस कॉन्ट्रैक्ट में 720 लॉट का कारोबार हुआ। एनालिस्ट्स ने इस बढ़ोतरी की वजह मार्केट में नई खरीदारी को बताया है।

सिल्वर फ्यूचर्स में भी तेजी आई है। MCX पर सितंबर का सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट ₹1,618 या 0.75% बढ़कर ₹2.18 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गया है, जिसमें 1,371 लॉट का कारोबार हुआ।

ग्लोबल स्तर पर चांदी की कीमतें मजबूत बनी रहीं। Comex सिल्वर फ्यूचर्स 1.21% बढ़कर $56.59 प्रति औंस पर आ गया है। हालांकि,न्यूयॉर्क में गोल्ड फ्यूचर्स में थोड़ी गिरावट देखी गई और ये 0.17% गिरकर $4,011 प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा।

सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव की क्या है वजह ?

भू-राजनीतिक तनाव,महंगाई की चिंता और अमेरिकी ब्याज दरों के फैसलों से जुड़ी उम्मीदे जैसे ग्लोबल संकेतों के कारण हाल के दिनों में प्रेशियस मेटल्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर,इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड के प्रेसिडेंट और जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन के चेयरमैन पृथ्वीराज कोठारी का कहना है कि पिछले हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई। इसमें भी चांदी में ज्यादा गिरावट आई।

उन्होंने आगे कहा कि एक अजीब ट्रेंड देखने को मिल रहा है,जिसमें वेस्ट एशिया में तनाव ने कीमती धातुओं को पुश करने के बजाय उन पर दबाव बनाया है। US-ईरान के बीच टकराव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर बन चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं हैं,जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ गईं और सितंबर में US फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना और मजबूत हो गई है।

आगे कैसी रह सकती है सोने-चांदी की चाल

पृथ्वीराज कोठारी की राय है कि सेंट्रल बैंक की खरीदारी(खासकर चीन की तरफ से) सोने की कीमतों को सपोर्ट देती रही है,जबकि वेस्टर्न एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और भारतीय रिटेल निवेशकों की तरफ से मांग में कमी के कारण बाजार का मूड सतर्क बना हुआ है। इस समय सोने की फेयर वैल्यू 4,100 डॉलर प्रति औंस के आस-पास है। अगर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे जाता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इसके भाव 3,900 डॉलर प्रति औंस की ओर गिर सकते हैं। वहीं,अगर यह 4,200 डॉलर प्रति औंस से ऊपर बना रहता है,तो इसके 4,500 डॉलर तक पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है।

 

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।