Gold Price Today: चीन क्यों धड़ाधड़ खरीदने लगा सोना जबकि भारत में गोल्ड पर्चेज की रफ्तार पर लगा ब्रेक! अंदर की खबर ये है

भारत में सोने की डिमांड में कमी आने का सीजन शुरू हो चुका है। कीमतें 3 महीने के निचले स्तर से रिकवर हुई हैं, जिससे महंगे दाम पर खरीदी से बचा जा रहा है। हालांकि खरीद एकदम ठंडी भी नहीं है। रॉयटर्स के मुताबिक, ज्वेलर्स खरीदी कर रहे हैं लेकिन अस्थिर कीमतों को लेकर सावधान भी हैं। निकट अवधि में कोई बड़ा त्योहार भी नहीं है और न ही शादी का सीजन। लिहाजा गोल्ड की कम डिमांड वाला दौर शुरू हो गया है। वहीं दूसरी ओर चीन में डिमांड बढ़ी है।

हाल ही में मंगलवार को देश में सोने की कीमत 1,40,450 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गई थी, जो 27 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर था। लेकिन अब रिबाउंड देखने को मिला है। MCX पर 3 जुलाई को सोने का वायदा भाव 148069 रुपये प्रति 10 ग्राम के हाई तक गया। रॉयटर्स के मुताबिक, जून महीने में सोने की कीमत लगभग 8.4 प्रतिशत कमजोर हुई। मार्च महीने के बाद पहली बार किसी महीने में सोने में गिरावट देखी गई।

अंतरराष्ट्रीय कीमतें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव की बात करें तो यह पिछले 5 हफ्तों में पहली बार बढ़त की ओर बढ़ रहा है। हाजिर सोने की कीमत 4,184.75 डॉलर प्रति औंस है। वहीं अगस्त में डिलीवरी वाला US गोल्ड फ्यूचर्स 4,197.20 डॉलर प्रति औंस पर है। अमेरिका में नौकरियों का डेटा उम्मीद से कमजोर रहने से फेडरल रिजर्व द्वारा निकट अवधि में बेंचमार्क ब्याज दरें बढ़ाए जाने को लेकर चिंता कम हुई है। इससे सोने की कीमत को बल मिला। अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स का कहना है कि जून में नॉन-फार्म पेरोल में 57,000 नौकरियां बढ़ीं।

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चीन में 2 डॉलर प्रति डिस्काउंट पर ट्रेडिंग

चीन में इस हफ्ते सोना अंतरराष्ट्रीय कीमत के मुकाबले कभी समान भाव पर तो कभी 2 डॉलर प्रति औंस तक सस्ते में बिक रहा था। पिछले हफ्ते यह 3 से 7 डॉलर प्रति औंस तक डिस्काउंट पर बिक रहा था। डिस्काउंट कम होना इस बात का संकेत है कि खरीदार पहले की तुलना में थोड़ा ज्यादा सक्रिय हुए हैं, इसलिए विक्रेताओं को ज्यादा छूट देने की जरूरत नहीं पड़ी।

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बारिश का मौसम जहां एक तरफ गर्मी से राहत और ठंडी हवाओं का एहसास कराता है, वहीं दूसरी तरफ यह त्वचा के लिए कई तरह की परेशानियां भी लेकर आता है। इस दौरान हवा में नमी (humidity) का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिससे स्किन पर ऑयल का उत्पादन ज्यादा होने लगता है। अतिरिक्त तेल और गंदगी मिलकर स्किन के पोर्स को बंद कर देते हैं, जिसके कारण पिंपल्स, एक्ने, रैशेज और एलर्जी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। कई लोगों को इस मौसम में त्वचा पर खुजली और जलन की शिकायत भी होने लगती है, जिससे स्किन डल और अनइवन दिखने लगती है।

यही वजह है कि मॉनसून में सामान्य स्किन केयर रूटीन को और भी ज्यादा ध्यान से फॉलो करना जरूरी हो जाता है। सही देखभाल और हल्के प्राकृतिक उपाय अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है और त्वचा को हेल्दी रखा जा सकता है।

देसी नुस्खा जो सालों से है फेमस

स्किन केयर प्रोडक्ट्स के बीच आज भी एक पुराना घरेलू उपाय काफी लोकप्रिय है हल्दी और चंदन का फेस पैक। भारतीय घरों में इसे पीढ़ियों से इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि यह त्वचा को शांत और साफ रखने में मदद कर सकता है।

हल्दी क्यों फायदेमंद मानी जाती है?

हल्दी में करक्यूमिन नाम का तत्व होता है, जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। यह स्किन पर:

  • पिंपल्स की सूजन कम कर सकता है
  • लालपन (redness) को शांत कर सकता है
  • त्वचा को बाहरी नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है
  • स्किन टोन को थोड़ा बेहतर दिखा सकता है

चंदन के फायदे क्या हैं?

चंदन को उसकी ठंडक देने वाली प्रकृति और खुशबू के लिए जाना जाता है। यह:

  • त्वचा की जलन को शांत कर सकता है
  • एक्स्ट्रा ऑयल कम करने में मदद कर सकता है
  • स्किन को फ्रेश और रिलैक्स महसूस कराता है
  • गर्म और नमी वाले मौसम में राहत देता है

घर पर ऐसे बनाएं फेस पैक

इस फेस पैक को बनाना बेहद आसान है:

सामग्री:

  • 1 चम्मच चंदन पाउडर
  • हल्दी की एक चुटकी
  • गुलाब जल (पेस्ट बनाने के लिए)

कैसे लगाएं:

सभी चीजों को मिलाकर स्मूद पेस्ट बनाएं, चेहरे पर लगाएं, सूखने के बाद धो लें और हल्का मॉइश्चराइजर लगाएं।

कितनी बार इस्तेमाल करें?

इस फेस पैक का इस्तेमाल हफ्ते में 1 बार करना पर्याप्त माना जाता है। साथ ही नियमित सफाई और मॉइश्चराइजिंग भी जरूरी है।

हर किसी के लिए नहीं है यह नुस्खा

हालांकि यह प्राकृतिक उपाय है, लेकिन हर स्किन पर सूट नहीं करता। अगर स्किन सेंसिटिव है तो पहले पैच टेस्ट जरूर करें। जलन, लालपन या खुजली होने पर तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें।

क्या यह सच में एक्ने ठीक कर सकता है?

हल्दी और चंदन स्किन को शांत जरूर कर सकते हैं, लेकिन गंभीर एक्ने के लिए वैज्ञानिक रूप से यह पूरा इलाज नहीं माना जाता। लगातार या गंभीर पिंपल्स होने पर डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सही होता है।

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Nagabandham-The Secret Treasure Review: मंदिरों के रहस्य, रायल सीन्स और रोंगटे खड़े कर देने वाली मैथोलॉजिकल एक्शन फिल्म है ‘नागबंधम’

फिल्म- ‘नागबंधम – द सीक्रेट ट्रेजर’

कलाकार- विराट कर्णा, नभा नतेश, महेश मांजरेकर, जगपति बाबू, मुरली शर्मा, रामचंद्र राजू, अनसूया भारद्वाज, सरन्या पोनवन्नन, ऋषभ साहनी, दक्षा नागरकर

निर्देशक- अभिषेक नामा

रेटिंग- 3/5

Nagabandham-The Secret Treasure Review: भारतीय सिनेमा में जब भी पौराणिक रहस्य, प्राचीन मंदिरों की अनकही कहानियां और बड़े स्तर पर रचे गए रोमांच की बात होती है, दर्शकों की उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। ‘नागबंधम – द सीक्रेट ट्रेजर’ ऐसी ही एक फिल्म है जो दर्शकों को एक ऐसे संसार में लेकर जाती है जहां रहस्य, इतिहास, सनातन परंपराएं और छिपी हुई शक्तियां एक साथ जीवंत होती नजर आती हैं।

यह फिल्म सिर्फ खजाने की तलाश की कहानी नहीं है, बल्कि सनातन परंपराओं से जुड़े उन रहस्यों की यात्रा है, जिनके बारे में अक्सर केवल कथाएं सुनने को मिलती हैं।यह कहानियां अब तक फिल्मों में नजर नहीं आती थी।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी रहस्य के साथ शुरू होती है और धीरे-धीरे अपने बड़े कैनवास को दर्शकों के सामने खोलती है। एक तरफ अतीत में छिपे ऐसे रहस्य हैं, जो वर्षों से दुनिया से दूर हैं, तो दूसरी ओर वर्तमान में कुछ ऐसे लोग हैं जिनकी जिंदगी इन रहस्यों से अनजाने में जुड़ जाती है। रुद्र की जिंदगी अचानक एक दर्दनाक मोड़ लेती है, जहां परिवार पर हुए हमले के बाद उसके सामने ऐसे सवाल खड़े हो जाते हैं, जिनके जवाब सामान्य दुनिया में नहीं बल्कि सदियों पुराने इतिहास में छिपे हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, नागबंधम, ब्रह्मकमल और प्राचीन मंदिरों के रहस्य धीरे-धीरे खुलते जाते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह सिर्फ एक खजाने की खोज तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसे धार्मिक मान्यताओं, इतिहास और रहस्यमयी घटनाओं से जोड़कर एक बड़े अनुभव में बदल देती है।

निर्देशन

निर्देशक अभिषेक नामा ने फिल्म को केवल कहानी के स्तर पर नहीं बल्कि विजुअल स्केल पर भी बड़ा बनाने का प्रयास किया है। फिल्म के कई दृश्य ऐसे हैं जो थिएटर के बड़े पर्दे पर प्रभाव छोड़ते हैं। खास तौर से विशाल मंदिर, राजसी महलों जैसे सेट्स, गुफाओं की रहस्यमयी दुनिया और ऐतिहासिक वातावरण फिल्म को एक अलग पहचान देते हैं। सेट डिज़ाइन और आर्ट डायरेक्शन उल्लेखनीय है फिल्म की सिनेमैटोग्राफी इसकी बड़ी ताकत बनकर सामने आती है। कैमरा कई दृश्यों को भव्यता के साथ प्रस्तुत करता है। एक्शन दृश्यों को बड़े स्तर पर डिजाइन किया गया है और कई सीक्वेंस दर्शकों को चौंकाने की क्षमता रखते हैं। खासकर युद्ध और संघर्ष वाले दृश्य काफी प्रभावी बन पड़े हैं।

परफॉर्मेंस

रुद्र के किरदार में विराट कर्णा पूरी फिल्म का मजबूत केंद्र दिखाई देते हैं। एक्शन दृश्यों में उनका आत्मविश्वास और भावनात्मक दृश्यों में उनकी संवेदनशीलता दोनों प्रभाव छोड़ती हैं। विशेष रूप से उनके नागा रूप वाले दृश्य आकर्षक लगते हैं। पार्वती के रूप में नभा नतेश अपने किरदार में सहज दिखाई देती हैं और स्क्रीन पर अच्छा प्रभाव छोड़ती हैं। जगपति बाबू अपने अनुभव के साथ किरदार में गंभीरता लेकर आते हैं और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा की तरह मजबूत है। महेश मांजरेकर अपने सीमित दृश्यों में भी प्रभाव पैदा करने में सफल रहते हैं। मुरली शर्मा एक बार फिर अपने संतुलित और स्वाभाविक अभिनय से किरदार को मजबूती देते हैं। रामचंद्र राजू अपने नकारात्मक किरदार में प्रभावी दिखाई देते हैं और कहानी में खतरे का एहसास बनाए रखते हैं।

ऋषभ साहनी फिल्म में एक सरप्राइज पैकेज साबित होते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज, आक्रामकता और स्क्रीन प्रेजेंस विरोधी किरदार को दमदार बनाती है। अनसूया भारद्वाज, सरन्या पोनवन्नन और दक्षा नागरकर भी अपने-अपने हिस्से में अच्छा योगदान देती हैं।

‘नागबंधम – द सीक्रेट ट्रेजर’ सिर्फ एक एडवेंचर फिल्म नहीं बल्कि रहस्य, इतिहास, सनातन परंपराओं और बड़े पैमाने पर प्रस्तुत किए गए सीन संसार का मिक्चर है। फिल्म की भव्यता, विशाल सेट्स, रहस्य से भरी कहानी, हैरतअंगेज एक्शन और कलाकारों का प्रभावी अभिनय इसे एक अलग अनुभव बनाते हैं। यदि आपको प्राचीन मंदिरों के रहस्य, छिपे खजानों की कहानियां और बड़े कैनवास पर बनी विजुअली शानदार फिल्में पसंद हैं, तो ‘नागबंधम’ थिएटर में देखनी चाहिए।

Gold-Silver ETFs : गोल्ड और सिल्वर ETF 3% तक भागे, US में ब्याज दरों को लेकर नरम रुख की उम्मीद ने भरा जोश

Gold-Silver ETFs : शुक्रवार को भारत में गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में 2-3 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। यह बढ़त ग्लोबल मार्केट में प्रोसियस मेटल्स की कीमतों में आई तेजी के कारण हुई। अमेरिकी लेबर मार्केट के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे हैं। इससे यह उम्मीद मजबूत हुई कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपना सकता है।

आज दोपहर के कारोबार में निप्पॉन इंडिया ETF गोल्ड BeES 2.4 प्रतिशत बढ़कर 120.51 रुपये पर पहुंच गया,जबकि ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ETF 2.4 प्रतिशत बढ़कर 124.90 रुपये पर कारोबार करता दिखा। SBI गोल्ड ETF 2.3 प्रतिशत बढ़कर 124.25 रुपये और टाटा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड 2.3 प्रतिशत बढ़कर 14.14 रुपये पर पहुंच गया।

इंटरनेशनल मार्केट में चांदी की कीमतों में तेज उछाल आने के कारण सिल्वर ETF ने गोल्ड ETF के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। निप्पॉन इंडिया सिल्वर BeES 2.6 प्रतिशत बढ़कर 221.95 रुपये पर,टाटा सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड 2.6 प्रतिशत बढ़कर 22.55 रुपये पर,SBI सिल्वर ETF 2.5 प्रतिशत बढ़कर 227.28 रुपये पर और ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF 2.4 प्रतिशत बढ़कर 231.28 रुपये पर पहुंच गया।

 स्पॉट गोल्ड 1% बढ़कर $4,165.29 प्रति औंस पर पहुंचा

ग्लोबल मार्केट में बुलियन की कीमतों में आई तेजी के बाद भारतीय बाजार में यह रैली देखने को मिली है। आज स्पॉट गोल्ड 1% बढ़कर $4,165.29 प्रति औंस पर पहुंच गया,जबकि इससे पहले सेशन में यह 23 जून के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। अगस्त डिलीवरी वाला US गोल्ड फ्यूचर्स 1.3% बढ़कर $4,178.50 पर पहुंच गया है। गोल्ड-सिल्वर अपनी पहली साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहे हैं। इस हफ्ते इनमें लगभग 1.8% की बढ़ोतरी हुई है। US नॉन-फार्म पेरोल्स और प्राइवेट पेरोल्स के आंकड़े उम्मीद से कमज़ोर रहे,जिससे लगातार बनी महंगाई और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका को लेकर चिंताएं कम हुईं है, इसका फायदा सोने-चांदी को मिल रहा है।

चांदी की कीमतों में भी तेजी जारी

चांदी की कीमतों में भी तेजी जारी है। इसका हाजिर भाव 2.1 प्रतिशत बढ़कर $62.28 प्रति औंस हो गया है। दूसरी कीमती धातुओं की बात करें तो प्लेटिनम की कीमत 2.4 प्रतिशत बढ़कर $1,655.15 पर आ गई है। जबकि पैलेडियम 0.9 प्रतिशत बढ़कर $1,278.89 पर पहुंच गया है। ये तीनों धातुएं एक हफ्तो से ज्यादा समय के अपने उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रही है।

शेयर बाजार का भी मूड सुधरा

गोल्ड-सिल्वर ETF में बढ़त के साथ ही आज शेयर बाजार का मूड भी अच्छा बना हुआ था। 3 बजे के आसपास सेंसेक्स 287.65 अंक या 0.37 प्रतिशत बढ़कर 77,789.77 पर और निफ्टी 101.95 अंक या 0.42 प्रतिशत बढ़कर 24,277.65 पर दिख रहा था। लगभग 2016 शेयरों में बढ़त दिख रही थी। 1828 शेयरों में गिरावट आई थी और 178 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में 3.34 प्रतिशत की गिरावट आई। यह बाजार में उतार-चढ़ाव की उम्मीदों में कमी का संकेत है। इससे तेजड़ियों को राहत मिल सकती है।

 

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Waterways Leisure Tourism में और 10% तेजी की लहर, लगातार दूसरे दिन अपर सर्किट

मुंबई स्थित क्रूज ऑपरेटर वॉटरवेज लीश़र टूरिज्म के शेयर में 3 जुलाई को लगातार दूसरे दिन तेजी है। शेयर बीएसई पर 10 प्रतिशत चढ़ा और लगातार दूसरे दिन अपर सर्किट लगा। कीमत 807.45 रुपये हो गई है। कंपनी 1 जुलाई को BSE और NSE पर लिस्ट हुई थी। दिन के आखिर में शेयर BSE पर 667.35 रुपये पर बंद हुआ था। उसके बाद 2 जुलाई को भी यह 10 प्रतिशत चढ़ा और अपर सर्किट लगा। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 5800 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है।

वॉटरवेज लीश़र टूरिज्म का 585 करोड़ रुपये का IPO 1.53 गुना भरा था। यह कंपनी कॉर्डेलिया क्रूज ब्रांड के तहत कारोबार करती है। देश में पहली बार किसी क्रूज ऑपरेटर का शेयर लिस्ट हुआ है। कॉर्डेलिया क्रूज भारत की प्रीमियम क्रूज लाइन है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 89.35 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Waterways Leisure Tourism की वित्तीय स्थिति

कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 52.14 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। इससे पहले के वित्त वर्ष में कंपनी को 168.19 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। वित्त वर्ष 2026 में इनकम 586.99 करोड़ रुपये रही, जो वित्त वर्ष 2025 में 597.68 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर 101.90 करोड़ रुपये की उधारी थी।

Waterways Leisure Tourism के IPO में 72 लाख नए शेयर जारी हुए थे। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 72 प्रतिशत, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.23 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 4.40 गुना भरा।

क्या खरीदने लायक है शेयर?

स्वास्तिका इनवेस्टस्मार्ट में वेल्थ हेड शिवानी न्याति का कहना है, “आईपीओ अलॉटमेंट के तहत जिन निवेशकों को शेयर मिले हैं, वे लंबे समय के नजरिए से उन्हें अपने पास रख सकते हैं। नए निवेशकों को बेहतर कमाई की संभावना और एंट्री के लिए ज्यादा आकर्षक लेवल का इंतजार करना चाहिए। इस स्टॉक पर राय न्यूट्रल है, और क्लोजिंग के आधार पर स्टॉप-लॉस ₹640 है।”

Maatrubhumi: सलमान खान की ‘मातृभूमि’ पर मंडराया खतरा, टाइटल बदलने के बावजूद सेंसर बोर्ड ने रिलीज पर लगाई रोक

Maatrubhumi: सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) ने सलमान खान की फ़िल्म ‘मातृभूमि’ (जिसका पहले नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ था) के लिए क्लीयरेंस सर्टिफ़िकेट को अगले आदेश तक रोक दिया है। भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच 2020 में हुई गलवान घाटी की झड़प पर आधारित यह फ़िल्म पहले ईद से ठीक पहले 17 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली थी। हालांकि, रिलीज़ की तारीख़ को आगे बढ़ा दिया गया था और इसके अगस्त में रिलीज़ होने की उम्मीद थी।

NDTV के अनुसार, फ़िल्म अगस्त की तारीख़ पर रिलीज नहीं हो पाएगी। ‘मातृभूमि’ का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है और इसे सलमान खान फ़िल्म्स बैनर के तहत सलमा खान ने प्रोड्यूस किया है। इसमें चित्रांगदा सिंह भी हैं। फिल्म रिलीज होने से पहले ही चीन में कुछ वर्गों ने इसकी आलोचना की है।

टीजर ऑनलाइन प्रसारित होने के बाद, चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर कई उपयोगकर्ताओं ने फिल्म पर गलवान घाटी संघर्ष से संबंधित घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया। जनवरी में, विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत में फिल्म निर्माण से संबंधित मामलों का निपटारा “संबंधित अधिकारियों” द्वारा किया जाता है, और विदेश मंत्रालय की इस या इसी तरह की परियोजनाओं में “कोई भूमिका नहीं” है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से उन खबरों पर टिप्पणी करने को कहा गया, जिनमें दावा किया गया था कि मंत्रालय ने छह साल पहले गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प पर आधारित फिल्म पर “आपत्ति जताई” है। उन्होंने कहा, “हमें पता है कि इस तरह की फिल्म बनाने की योजना है। जैसा कि आप जानते हैं, भारत में फिल्म निर्माण से जुड़े मामलों को संबंधित अधिकारी देखते हैं। और जहां तक ​​हमारी बात है, विदेश मंत्रालय की ऐसी फिल्मों या प्रोजेक्ट्स में कोई भूमिका नहीं होती है।”

सूत्रों ने बताया, “हाल ही में फिल्म का टाइटल ‘बैटल ऑफ गलवान’ से बदलकर ‘मातृभूमि’ कर दिया गया है। उसी के अनुसार बदलाव किए जा रहे हैं। संभावना है कि फिल्म की रिलीज में और देरी हो सकती है। इसे अगस्त में स्वतंत्रता दिवस के आसपास रिलीज किए जाने की उम्मीद है।”

फिल्म के निर्माताओं ने सलमान खान के 60वें जन्मदिन के मौके पर 27 दिसंबर, 2025 को फिल्म का टीज़र जारी किया था। इस फ़िल्म में सलमान खान 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफ़िसर कर्नल संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने बॉर्डर पर डिसइंगेजमेंट एग्रीमेंट लागू करते समय हुई झड़प के दौरान भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया था।

‘मातृभूमि’ में अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया भी अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे। इस फ़िल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने दिया है। सलमान खान को आख़िरी बार ए.आर. मुरुगाडोस की फ़िल्म ‘सिकंदर’ में देखा गया था, जिसमें रश्मिका मंदाना भी हैं।

BaaS मॉडल के साथ Hyundai की Creta Electric लॉन्च, कीमत में आई भारी गिरावट

Hyundai Creta Electric: अगर आप इलेक्ट्रिक SUV खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। दरअसल, Hyundai Motor India Ltd ने Creta Electric के लिए ‘बैटरी-एज-ए-सर्विस’ (BaaS) ओनरशिप मॉडल पेश किया है। इस कदम से इलेक्ट्रिक SUV की शुरुआती कीमत, बैटरी की लागत को छोड़कर, रेगुलर ₹18.03 लाख से घटकर ₹10.99 लाख (एक्स-शोरूम) हो गई है।

इस नई व्यवस्था के तहत, खरीदारों के पास गाड़ी अलग से खरीदने और बैटरी के लिए EMI प्लान (जो ₹3.9 प्रति किलोमीटर से शुरू होगा) चुनने का विकल्प होगा, जिससे इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने की शुरुआती लागत कम हो जाएगी।

Hyundai का मकसद EV को ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ऑटो कंपनियां भारत में ग्राहकों के सामने आने वाली सबसे बड़ी समस्या यानी ज्यादा शुरुआती कीमत को कम करने के लिए अलग-अलग ओनरशिप मॉडल अपना रही हैं। बैटरी की कीमत को गाड़ी की कीमत से अलग करने से शुरुआती खरीद लागत कम हो जाती है, जबकि गाड़ी की लिस्ट कीमत पर कोई असर नहीं पड़ता। इससे इलेक्ट्रिक वाहन ज्यादा किफायती और आसान हो जाते हैं।

फॉर्च्यून इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, लॉन्च के मौके पर Hyundai Motor India Ltd के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO तरुण गर्ग ने कहा, “हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक के लिए ‘बैटरी-एज-ए-सर्विस’ (BaaS) की शुरुआत भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम है।”

उन्होंने कहा, शुरुआती कीमत को काफी कम करके और फ्लेक्सिबल बैटरी रेंटल प्लान देकर देकर, हम ज्यादा ग्राहकों को भरोसे के साथ EV अपनाने में मदद कर रहे हैं, जिससे वे हुंडई की भरोसेमंद तकनीक, सुरक्षा और इनोवेशन का लाभ उठा सकें।

क्रेटा इलेक्ट्रिक की कीमत अभी ₹18.02 लाख से ₹24.55 लाख (एक्स-शोरूम) के बीच है। यह दो बैटरी पैक ऑप्शन के साथ आती है: एक 42 kWh यूनिट जिसकी ड्राइविंग रेंज 420 km बताई गई है, और दूसरी 51.4 kWh यूनिट जिसकी रेंज 510 km बताई गई है। यह SUV DC फास्ट चार्जिंग को भी सपोर्ट करती है, जिससे बैटरी को लगभग 39 मिनट में 10% से 80% तक तेजी से चार्ज किया जा सकता है।

इस मॉडल की अन्य खूबियों में व्हीकल-टू-लोड (V2L) क्षमता, हुंडई स्मार्टसेंस लेवल 2 ADAS, डिजिटल की, सिंगल ड्राइव (i-पेडल), एक्टिव एयर फ्लैप्स और 8 साल/1.6 लाख km की बैटरी वारंटी शामिल हैं।

Hyundai भारत में EV इकोसिस्टम को मजबूत करने की योजना बना रही है

अपने प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाने के साथ-साथ, हुंडई देश में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश कर रही है। फॉर्च्यून इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अगले सात सालों में लगभग 600 फास्ट पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना बना रही है। साथ ही, कंपनी ने पहले ही 183 जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया है, जिसमें 214 DC चार्जर और 399 चार्जिंग पॉइंट शामिल हैं।

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Ketan Agarwal Murder Case: पुणे पुलिस को शक! केतन मर्डर केस में आ सकता है ‘सोनम रघुवंशी जैसा मोड़’

Ketan Agarwal Murder Case: मेघालय हनीमून मर्डर केस में सोनम रघुवंशी को जमानत दिलाने वाली कानूनी खामियों से सबक लेते हुए, पुणे ग्रामीण पुलिस अब पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की लोणावला (लोहगढ़ किले) में हुई हत्या के मामले में एक “पूरी तरह मजबूत और बिना गलती वाली” चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। यह जानकारी महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष सूत्रों ने न्यूज18 को दी है।

जांच अधिकारी केतन की मंगेतर और मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ (झूठ पकड़ने वाला) टेस्ट कराने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, यह टेस्ट कोर्ट में सीधे सबूत के तौर पर मान्य नहीं होता, लेकिन पुलिस का मानना है कि इससे कुछ अहम सुराग मिल सकते हैं, जिन्हें बाद में डिजिटल या फॉरेंसिक सबूतों से जांचकर पक्का किया जा सकता है।

यह सावधानी हाल ही में हुए सोनम रघुवंशी मामले को देखते हुए बरती जा रही है, जिसमें गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई तकनीकी खामियों के कारण आरोपी को जमानत मिल गई थी और बाद में हाई कोर्ट ने भी उस जमानत को बरकरार रखा था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि सिया के खिलाफ उनके मुकदमे को किसी भी तरह की ऐसी तकनीकी चूक से कमजोर न होने दिया जाए।

पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों करवाना चाहती है?

भारतीय कानून के तहत, पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजे अदालत में मुख्य सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं होते हैं। हालांकि, जांचकर्ताओं का कहना है कि यह टेस्ट जांच के दौरान नई जानकारियां या सुराग हासिल करने के लिए एक टूल के तौर पर काम आ सकता है।

महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से ऐसी जानकारी मिल सकती है जो पहले पता नहीं थी। उदाहरण के लिए, अगर सिया अनजाने में यह बता देती है कि उसने लोहागढ़ किले की चट्टान की ऊंचाई के बारे में जानकारी जुटाई थी, या ऐसी किसी डिजिटल गतिविधि का जिक्र करती है जिसके बारे में जांचकर्ताओं को पहले पता नहीं था, तो पुलिस उस डिजिटल सबूत को स्वतंत्र रूप से हासिल कर सकती है।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ब्राउजर हिस्ट्री, लोकेशन डेटा या डिलीट की गई सर्च जैसी जानकारी, अगर सही कानूनी प्रक्रियाओं से हासिल की जाए, तो कोर्ट में सबूत के तौर पर मानी जा सकती है, भले ही पॉलीग्राफ टेस्ट के जवाब खुद सबूत के तौर पर मान्य न हों।

पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “मकसद पॉलीग्राफ रिपोर्ट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना नहीं है। इसका मकसद छिपे हुए तथ्यों का पता लगाना है, जिनकी बाद में कानूनी रूप से मान्य डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों से पुष्टि की जा सके।”

प्रत्यक्ष सबूत नहीं, केवल परिस्थिति पर टिका पूरा मामला

जांच करने वाले मानते हैं कि उन्हें सबूत जुटाने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा कोई चश्मदीद गवाह नहीं है जिसने केतन को चट्टान से धक्का देते हुए देखा हो। न ही इस कथित घटना का कोई CCTV फुटेज मौजूद है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उपलब्ध CCTV फुटेज में सह-आरोपी और सिया के प्रेमी चेतन चौधरी को हुडी पहने हुए घटना वाली जगह के पास ही देखा गया है, लेकिन इससे हत्या साबित नहीं होती।

पुलिस ने डमी का इस्तेमाल करके कथित अपराध वाली जगह का सीन भी दोबारा बनाया है, लेकिन अधिकारी निजी तौर पर मानते हैं कि ऐसे प्रदर्शनों का सबूत के तौर पर बहुत कम महत्व होता है। एक सूत्र ने कहा, “डमी किस तरह गिरती है, यह उसके वजन के बंटवारे, कोण और गति पर निर्भर करता है। इससे वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं किया जा सकता कि पीड़ित को जान-बूझकर धक्का दिया गया था या वह गलती से फिसल गया था।”

इन्हीं सब वजह से, जांचकर्ता इस मामले को पूरी तरह से परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित मानते हैं, जिसमें अपराध साबित करने के लिए हर सबूत का आपस में सही ढंग से जुड़ना जरूरी है ताकि कोई शक न रहे।

अभियोजन पक्ष मकसद और डिजिटल सबूतों पर भरोसा कर रहा है

जांचकर्ताओं के मुताबिक, प्रॉसिक्यूशन की मुख्य थ्योरी यह है कि सिया और चेतन ने केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी, क्योंकि सिया कथित तौर पर उससे शादी नहीं करना चाहती थी।

इसलिए, चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस डिजिटल, फोरेंसिक और हालात से जुड़े सबूत इकट्ठा करने पर ध्यान दे रही है, जो इस कथित साजिश को पुख्ता कर सकें।

जांचकर्ता डिजिटल सर्च हिस्ट्री, मोबाइल फोन डेटा और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच कर रहे हैं, जिनसे साजिश या पहले से योजना बनाने की बात साबित हो सके। सूत्रों का कहना है कि ऐसे डिजिटल सबूत हासिल करना, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके, जांच की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

‘एक कमजोर कड़ी पूरे केस को गिरा सकती है’

पुलिस सूत्रों का मानना ​​है कि केस का नतीजा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वे घटनाओं की एक अटूट कड़ी बना पाते हैं या नहीं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अगर बचाव पक्ष उस कड़ी की एक भी अहम कड़ी को तोड़ने में कामयाब हो जाता है, तो अभियोजन पक्ष का केस काफी कमजोर पड़ सकता है।” उन्होंने ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों का जिक्र किया जिनमें सबूतों की कमी के कारण कोर्ट में मुश्किलें आईं।

यही एक वजह है कि जांच करने वाले अधिकारी फाइनल चार्जशीट दाखिल करने से पहले बहुत सावधानी बरत रहे हैं।

सोनम रघुवंशी का मामला एक सबक क्यों बन गया है?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाल ही का सोनम रघुवंशी मामला-जिसमें उन पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है-अब पुलिस के लिए एक चेतावनी बन गया है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जांच प्रक्रिया के कड़ाई से पालन करने के महत्व को और पुख्ता करता है।

सोनम के मामले में, कोर्ट में प्रक्रिया से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद अभियोजन पक्ष को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जमानत के आदेश के मुताबिक, पुलिस आरोपी को हिरासत में लेते समय गिरफ्तारी के असल कारणों के बारे में साफ तौर पर नहीं बता पाई। गिरफ्तारी मेमो और उससे जुड़े दस्तावेजों में BNS की धारा 403(1) का जिक्र किया गया था, जो संपत्ति के बेईमानी से गबन से जुड़ी है, जबकि हत्या के मामले में उसकी जांच धारा 103(1) के तहत हो रही थी।

कोर्ट ने माना कि ऐसी गलतियों की वजह से आरोपी के संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ा, जिससे उसे शुरुआती जांच चरण में अपना बचाव ठीक से करने का मौका नहीं मिला। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि मजबूत जनमत या मीडिया की कड़ी नजर भी अदालत में हुई प्रक्रियात्मक गलतियों की भरपाई नहीं कर सकती। महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ सूत्र ने News18 को बताया, “अदालतें सबूतों और कानूनी वैधता के आधार पर मामले तय करती हैं। यहां तक ​​कि क्लर्क की कोई छोटी सी गलती या तय कानूनी प्रक्रिया का पालन न करना भी बचाव पक्ष के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।”

चूंकि कोई चश्मदीद गवाह या सीधा वीडियो सबूत नहीं है, इसलिए पुणे ग्रामीण पुलिस अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि प्रक्रिया का हर कदम कानूनी रूप से सही हो। साथ ही, वे डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को भी मजबूत कर रहे हैं, जिनके बारे में उनका मानना ​​है कि ये सिया के खिलाफ उनके मामले का मुख्य आधार बनेंगे।

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भारत के खिलाफ प्लेयर ऑफ द सीरीज बने जय मुंद्रा खेलेंगे यह यूरोपीय लीग

 

भारत पर ऐतिहासिक टी20 श्रृंखला जीत के नायक रहे आयरलैंड के युवा क्रिकेटर जय मूंदड़ा को गुरुवार को आयोजित यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग (ETPL) के पहले खिलाड़ी ड्राफ्ट (Auction) में रॉटरडम डॉकर्स ने अपनी टीम में शामिल किया।लीग की छह फ्रेंचाइजी ने ड्राफ्ट के दौरान कुल 36 खिलाड़ियों का चयन किया। इनमें आयरलैंड, स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स के 12-12 खिलाड़ी शामिल थे।

एम्स्टर्डम फ्लेम्स और रॉटरडम डॉकर्स ने नीदरलैंड के अधिकांश खिलाड़ियों को चुना, जबकि एडिनबर्ग कैसल रॉकर्स और ग्लासगो कॉस्मिक ने स्कॉटलैंड के 12 में से नौ खिलाड़ियों को अपनी टीम में शामिल किया। वहीं डबलिन गार्जियंस और बेलफास्ट वुल्व्स ने आयरलैंड के 12 में से सात खिलाड़ियों का चयन किया।


रॉटरडैम डॉकर्स ने अपने पहले चयन के रूप में मूंदड़ा को टीम में शामिल किया। राजस्थान के मूंदड़ा ने हाल ही में भारत के खिलाफ टी20 श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘श्रृंखला के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी’ का पुरस्कार जीता था।डॉकर्स ने नीदरलैंड्स के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी माइकल लेविट, रियान क्लेन, विक्रमजीत सिंह और साकिब जुल्फिकार को टीम में शामिल किया।

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बेलफास्ट वुल्व्स ने आयरलैंड के अनुभवी पॉल स्टर्लिंग और उभरते बाएं हाथ के स्पिनर मैथ्यू हम्फ्रीज को अपनी टीम में शामिल कर अपनी ताकत बढ़ाई।रॉटरडम डॉकर्स के सह-मालिक जोंटी रोड्स ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह जय मूंदड़ा ने अपनी पहचान बनाई है, उसे देखते हुए हम उन्हें अपनी टीम में शामिल करने के लिए बेहद उत्सुक थे। वह असाधारण क्षमता वाले प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी हैं और हमें खुशी है कि हमने उन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाया।’’

ICICI प्रूडेंशियल के चिंतन हरिया से जानें वेल्थ क्रिएशन के मंत्र, बाजार में अब कहां से निकलें और कहां बढ़ाएं निवेश

बाजार में आज तेजी का मोमेंटम बढ़ा है,निफ्टी 150 अंक से ज्यादा चढ़कर 7 मई के बाद पहली बार 24300 के पार निकला है। ICICI BANK, HDFC BANK, BHARTI और टाटा स्टील ने जोश भरा है। आज बैंक निफ्टी भी चला है। लेकिन मिडकैप-स्मॉलकैप में हल्की बढ़त है। वोलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX 3% से ज्यादा फिसलकर 12 के नीचे आ गया है। रियल्टी,मेटल और फार्मा में आज सबसे ज्यादा खरीदारी आई है। तीनों सेक्टर इंडेक्स 1.5 फीसदी से ज्यादा चढ़े हैं। साथ ही IT में लगातार दूसरे दिन तेजी है। आईटी इंडेक्स 1.5 फीसदी चढ़ा। वहीं दूसरी ओर सरकारी बैंकों में आज दबाव है। पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 1 फीसदी फिसला है। बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक 3 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं।

निवेशक चाहें तो कर सकते हैं लार्जकैप में एकमुश्त निवेश

ऐसे में बाजार की आगे की दशा और दिशा पर बात करते हुए ICICI प्रूडेंशियल AMC के प्रिंसिपल इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट चिंतन हरिया ने कहा कि 2 साल से भारतीय बाजार और रुपये ने अंडरपरफॉर्म किया है। RBI के कदमों से रुपया काफी संभला है। कच्चे तेल के दाम युद्ध से पहले के भाव पर आ गए हैं। कमजोर मॉनसून से भी ज्यादा चिंता नहीं है। ऐसे में लार्जकैप में अच्छे मौके बन रहे हैं। निवेशक चाहें तो लार्जकैप में एकमुश्त निवेश कर सकते हैं।

मिडकैप और स्मॉलकैप में एक्टिव फंड चुनें, लार्जकैप में पैसिव फंड्स में निवेश करें

चिंतन हरिया ने आगे कहा कि लार्जकैप के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप ने आउटपरफॉर्म किया है। मिडकैप और स्मॉलकैप के वैल्युएशन अभी भी सस्ते नहीं हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप की ग्रोथ का अनुमान लगाना मुश्किल है। मिडकैप और स्मॉलकैप में एक्टिव फंड चुनें। लार्जकैप में पैसिव फंड्स में निवेश करें।

हालात स्थिर रहे तो दीवाली तक लार्जकैप में उछाल संभव

उन्होंने आगे कहा कि जून तिमाही के नतीजों में कमजोरी देखने को मिल सकती है। हालात स्थिर रहे तो दीवाली तक लार्जकैप में उछाल संभव है। FCNB डिपॉजिट का फायदा बैंकों को मिलेगा। बैंकिंग सेक्टर अच्छा लग रहा है। एनर्जी सेक्टर भी पसंद है। इस सेक्टर कोकच्चे तेल की कीमतें घटने का फायदा मिलेगा। वहीं, डिफेंस और मेटल शेयर काफी चल चुके हैं। अब इनमें मुनाफावसूली संभव है।

चिंतन हरिया का मानना है कि लंबी अवधि में ऑटो सेक्टर अच्छा कर सकता है। ऑटो सेक्टर को एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी का भी फायदा मिलेगा। निवेशकों के लिए लार्जकैप एक्टिव और पैसिव फंड्स में निवेश करने का मौका है। मल्टी एसेट बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में निवेश कर सकते हैं। किसी भी फ्लैक्सीकैप फंड्स में SIP कर सकते हैं। आज जो निवेश करेंगे उसका फायदा 3-5 साल में मिलेगा।

 

 

Market Insight : अगले 6-8 हफ्ते में निफ्टी में देखने को मिल सकता है 25500 का लेवल, IT में 10-15% रिकवरी की उम्मीद

 

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