85 हजार की दवा भारत में 35 रुपये में मिल रही, अमेरिकी महिला बोली- हमें लूटा जा रहा

अमेरिका महिला ने कहा, ‘यूएस में हमारे साथ लूट हो रही है, जबकि भारत अपने लोगों को किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं देता है।’ उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसे 9.40 लाख से अधिक बार देखा जा चुका था।

Alpha Alia Bhatt Movie Review: मिसफिट आलिया भट्ट….तो स्पाई फिल्म में ग्लैमर डॉल बनकर रह गईं शरवरी वाघ, बॉबी देओल ने बचा ली थोड़ी इज्जत

फिल्म- ऐल्फा

निर्देशक- शिव रवैल

कलाकार- आलिया भट्ट, शरवरी, अनिल कपूर, बॉबी देओल

रेटिंग-2/5

Alpha Alia Bhatt Movie Review: जब यशराज ने फिल्म ऐल्फा का ऐलान किया था तो फैंस का एक्साइटमेंट और उम्मीदें काफी बढ़ी थीं। इसके बाद फिल्म की स्टार कास्ट का ऐलान हुआ तो आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, बॉबी देओल और अनिल कपूर का नाम सुनकर हर किसी की उम्मीदें और ज्यादा बढ़ गई थीं। लेकिन फिल्म देखकर आप ठगा हुआ सा महसूस करने वाले हैं।

कहानी

शिव रावेल की डायरेक्ट की गई फिल्म ऐल्फा में आलिया का किरदार ‘सीता’ आपको फुल एक्शन में नजर आती हैं। वह अजेय है, उससे कोई गलती नहीं होती, वह मौत को कई बार टक से छूकर वापस आती हैं। वहीं हवा में उछलकर ऐसे दुश्मनों को ढेर कर देती हैं जैसे ग्रेवटी से उनका लेना देना ही न हो। उसे ‘टेस्ट सब्जेक्ट’ के तौर पर बढ़ा किया जाता है। घर-परिवार प्यार से कोसों दूर होती है।

प्यार और हमदर्दी क्या होती है उसे नहीं पता है। उसे अपने इमोशंस भी जाहिर करने में भी काफी मुश्किल होती है। इसीलिए, जब वह अपनी अलग हो चुकी जुड़वां बहन दुर्गा के साथ कुछ प्यार भरे पल बिताती है, तो खुश होती है नया एहसास करती है। लेकिन आलिया पर उनका ये किरदार उतना जच नहीं रहा है। ‘अल्फा’ की कहानी 1999 के कारगिल युद्ध पर बेस्ड है, जिसमें दोनों तरफ काफी नुकसान हुआ था। बढ़ते खतरों के बीच भारत को अजेय बनाने के पक्के इरादे के साथ, कर्नल फतेह सिंह लखावत वैज्ञानिक डॉ. वर्गीज की मदद से एक खास टास्क फोर्स बनाने के लिए एक ‘बेहतरीन और एडवांस्ड प्रोग्राम’ तैयार करते हैं। जल्द ही, कुछ युवा पुरुषों को ‘अल्फा’ नाम का सीरम दिया जाता है, जिसे सुपरह्यूमन बनाने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया था।

यह सीरम देखने की क्षमता, रिफ्लेक्स, फेफड़ों की क्षमता और इंद्रियों की शक्ति को बढ़ाता है। इससे सुनने की क्षमता तेज हो जाती है और पानी के अंदर आठ मिनट तक सांस रोके रखने की काबिलियत मिलती है। लेकिन जल्द ही, सीरम के खतरनाक साइड इफेक्ट्स दिखने लगते हैं। इस बात से अनजान, लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रांत कौल अपनी पत्नी जानकी को यह सीरम दे देते हैं, जब प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा होता है।

नतीजा? एक बच्ची को जन्म देने के बाद जानकी की ऑपरेशन टेबल पर ही मौत हो जाती है। उस बच्ची को फतेह सिंह चुपके से बदल देते हैं और उसे एक ‘ऐल्फा’ सोल्जर के तौर पर पालते-पोसते हैं। दुनिया से दूर, राजस्थान की एक फैसिलिटी में कैद और किसी एक्सपेरिमेंट की तरह लगातार निगरानी में पली-बढ़ी सीता एक हथियार बन जाती है। लेकिन फतेह सिंह असल में वो नहीं हैं जो होने का दावा करते हैं। और इसी उतार-चढ़ाव भरे माहौल में एंट्री होती है उसकी जुड़वां बहन दुर्गा की, जो उससे अलग हो गई थी।

डायरेक्शन

बात अगर डायरेक्टर शिव रवैल की करें, जिन्होंने ऐल्फा को निर्देशित किया है। एक तरह से कहा जा सकता है कि शिव ने स्पाई थ्रिलर को स्टाइलिश थिलर बना दिया है। फिल्म को देखकर आपको बोरियत होने लगती है। एक सीन भी आपके अंदर एक्साइटमेंट नहीं जगाता है। फिल्म के कई सीन अधूरेपन का शिकार है। वहीं कई जगह आप को एक्शन देख ऐसा लगेगा कि ये आखिर क्यों हो रहा है?

एक्टिंग

फिल्म ऐल्फा का लीड किरदार आलिया भट्ट हैं। बाकी पूरी कास्ट को यशराज ने सपोर्टिंग रोल में रखा है। फिल्म की कहानी आलिया के ईर्द-गिर्द ही घूमती हैं। फिल्म देख आपको बस एक ही सवाल खाए जाता है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी, जो आलिया ने इस फिल्म को हां कहा। जिगरा के बाद आलिया के करियर में एक और बुरी फिल्म एड हो गई है ‘ऐल्फा’। आलिया भट्ट जैसी दमदार एक्ट्रेस की फिल्म से हर किसी को काफी उम्मीदें रहती हैं। उन्होंने हाईवे, गंगूबाई बाई जैसी शानदार फिल्में दी हैं।

अब बात करते हैं शरवरी वाघ की। यशराज ने शरवरी को फिल्मी दुनिया में लॉन्च किया है। यशराज के अलावा वे और भी फिल्मों में शानदार काम के साथ नजर आई हैं। हाल में रिलीज हुई उनकी मैं वापस आउंगा हो या फिर महाराज दोनों ही फिल्मों में एक्ट्रेस का इतना शानदार है कि उनसे भी काफी उम्मीदें रहती हैं। लेकिन अफसोस निर्देशक एक्ट्रेस के टैलेंट का यूज न कर सके। फिल्म ऐल्फा में शरवरी को बहुत कम स्क्रीन टाइम दिया गया है। वहीं उनका रोल फिल्म के लिए जरूरी भी नहीं लगता है। अगर वह फिल्म में न होती तो भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था।

फिल्म की इज्जत थोड़ी बहुत बॉबी देओल ने अपनी दमदार एक्टिंग से बचा ली है। लेकिन बेतुक कमजोर कहानी ने उनका काम भी खराब किया है। वहीं अनिल कपूर भी अपने रोल के हिसाब से फिट हैं। फिल्म में ऋतिक के कबीर वाले कौमियो ने फिल्म को थोड़ी बहुत हाईप दिलाई है।

फिल्म को देखें या नहीं

फिल्म को न देखना कहना जायज नहीं होता है। एक फिल्म बनाने में कई लोगों की मेहनत होती है। लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिन्हें किसी भी हाल में टॉलरेट करना मुश्किल होता है। ऐल्फा के साथ भी कुछ ऐसा ही है। अगर आप लीड कास्ट के जबरा फैन हैं…यानी उनकी शक्ल देख चेन मिल जाता है, तो आप इसे देख सकते हैं। बाकि फिल्म में देखने लायक कुछ भी नहीं।

वैभव सूर्यवंशी को मौका क्यों नहीं दे रहे गौतम गंभीर? इस क्रिकेटर ने टीम मैनेजमेंट को दी बड़ी सलाह

भारतीय की टी20 क्रिकेट टीम इस समय इंग्लैंड दौरे पर है। बीते दिनों आयरैंड के हाथों सीरीज गंवाने के बाद टीम इंडिया, इंग्लैंड से पांच मैचों की टी20 सीरीज खेल रही है। वहीं इस सीरीज के पहले मैच में भी भारतीय क्रिकेट फैंस के टीम इंडिया के उभरते खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी का इंतजार था। आयरलैंड सीरीज के बाद इस मैच में वैभव के डेब्यू का इंजतार कर रहे फैंस के हाथों निराशा लगी। वहीं अब वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू को लेकर एक दिग्गज क्रिकेटर ने टीम के हेड कोच गौतम गंभीर को बड़ा सलाह दी है।

पार्थिव पटेल ने कही ये बात

भारत के पूर्व विकेटकीपर और बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने टीम मैनेजमैंट को सलाह दी है कि वैभव सूर्यवंशी को साफ तौर पर बताया जाए कि उन्हें अभी प्लेइंग इलेवन में मौका क्यों नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि 15 वर्षीय खिलाड़ी को यह समझाना जरूरी है कि उसे धैर्य रखने की जरूरत है और सही समय आने पर ही मौका मिलेगा। वैभव सूर्यवंशी को आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में चुना गया था। हालांकि, अब तक उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला है। वे बेलफास्ट में खेले गए तीनों मुकाबलों और इंग्लैंड के खिलाफ डरहम में खेले गए पहले टी20 मैच में भी बेंच पर ही बैठे रहे। यह मुकाबला पहली पारी के बाद बारिश की वजह से रद्द हो गया था।

वैभव सूर्यवंशी को बताई जाए ये बात

जियोस्टार से बातचीत में पार्थिव पटेल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मौजूदा टी20 सीरीज के दौरान वैभव सूर्यवंशी को खेलने का मौका जरूर मिलेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि टीम प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ को वैभव से साफ-साफ बात करनी चाहिए और उन्हें उनकी भूमिका के बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए। पार्थिव पटेल ने कहा, “मुझे लगता है कि इस सीरीज में किसी न किसी मैच में वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलेगा। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि कोचिंग स्टाफ खिलाड़ी से खुलकर बात करे और उसे साफ बताए कि टीम की क्या योजना है और उससे क्या उम्मीद की जा रही है।”

पार्थिव पटेल ने आगे कहा कि वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी के साथ बहुत सोच-समझकर व्यवहार करना चाहिए। अगर टीम मैनेजमेंट उन्हें कुछ समय तक प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं देना चाहता, तब भी इसकी वजह उन्हें साफ तौर पर बतानी चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर आप उन्हें अभी नहीं खिला रहे हैं, तो भी उनसे खुलकर बात करना जरूरी है। वह सिर्फ 15 साल के हैं। उन्हें धैर्य रखना सिखाना होगा और समझाना होगा कि भारतीय टीम में जगह बनाना आसान नहीं होता। यहां कई ऐसे खिलाड़ी होते हैं जिन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया होता है। इसलिए सही समय का इंतजार करना भी खिलाड़ी के विकास का अहम हिस्सा है।”

WhatsApp Username विवाद बढ़ा, सरकार की रडार पर Telegram और Signal, Arattai भी हटाएगा यूजरनेम फीचर

whatsapp

WhatsApp के नए Username फीचर को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। भारत सरकार की आपत्तियों के बाद अब सिर्फ WhatsApp ही नहीं, बल्कि Telegram, Signal और भारतीय मैसेजिंग ऐप Arattai भी सरकार की जांच के दायरे में आ गए हैं। इसी बीच Zoho के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबु ने घोषणा की है कि उनकी मैसेजिंग ऐप Arattai से भी Username फीचर हटाया जाएगा।  कुछ साइबर एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि सही सुरक्षा उपायों के साथ Username फीचर मोबाइल नंबर साझा किए बिना सुरक्षित बातचीत का बेहतर विकल्प भी बन सकता है। WhatsApp को मिला नोटिस, सरकार ने लगाई रोक

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हाल ही में WhatsApp ने घोषणा की थी कि वह अपने यूजर्स के लिए Username फीचर लाने जा रहा है। इस फीचर की मदद से लोग बिना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। लेकिन फीचर की घोषणा के तुरंत बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को नोटिस जारी कर इसकी लॉन्चिंग पर फिलहाल रोक लगाने को कहा। सरकार का कहना है कि पहले इस फीचर के प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर चर्चा और समीक्षा जरूरी है।

अब Telegram और Signal से भी मांगा जाएगा जवाब

WhatsApp के बाद अब सरकार की नजर Telegram और Signal पर भी है। इन दोनों मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर पहले से ही Username फीचर उपलब्ध है, जिससे यूजर बिना मोबाइल नंबर बताए दूसरे व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं। सरकार यह जानना चाहती है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर किसी यूजर की वास्तविक पहचान कैसे सत्यापित की जाती है और क्या कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था, सेलिब्रिटी या अन्य व्यक्ति जैसा फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों के साथ धोखाधड़ी कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों कंपनियों से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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Arattai भी हटाएगा Username फीचर

Zoho के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबु ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि भारतीय मैसेजिंग ऐप Arattai भी अपना Username फीचर बंद करने जा रही है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बदलते नियामकीय माहौल और संभावित नियमों के अनुरूप लिया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने किसी भी प्लेटफॉर्म पर Username फीचर पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर जवाब जरूर मांगा है।

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सरकार को किस बात की चिंता है?

 

सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि Username फीचर का गलत इस्तेमाल कर साइबर अपराधी किसी सरकारी विभाग, बैंक, सेलिब्रिटी या प्रसिद्ध संस्था से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं। चूंकि WhatsApp देश में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले मैसेजिंग ऐप्स में शामिल है, इसलिए इस तरह की धोखाधड़ी का खतरा और बढ़ सकता है।

WhatsApp ने सफाई में क्या कहा

Meta का कहना है कि Username फीचर को सुरक्षित बनाने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए गए हैं। सेलिब्रिटी और प्रमुख संस्थाओं से जुड़े यूजरनेम रिजर्व रखे जाएंगे, ताकि उनकी फर्जी पहचान न बनाई जा सके। यूजर चाहें तो Username Key फीचर चालू कर सकते हैं। इसके बाद किसी व्यक्ति को सिर्फ यूजरनेम ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ा चार अंकों का यूनिक कोड भी पता होना जरूरी होगा। WhatsApp पर Username की कोई सार्वजनिक Search Directory नहीं होगी, जिससे अनचाहे मैसेज और स्पैम की संभावना कम होगी।

सरकार जल्द नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का कर सकती है ऐलान, जानिए क्या है पूरा प्लान

सरकार नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का ऐलान कर सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने यह बताया। इस बारे में आधिकारिक घोषणा दो हफ्ते के अंदर हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि इस स्कीम के तहत 1,000 टन से ज्यादा सोना आने की उम्मीद है।

नई स्कीम में ज्वेलर्स होंगे कलेक्शन पार्टनर्स

देशभर के ज्वेलर्स को नई स्कीम में बतौर ‘कलेक्शन पार्टनर्स’ शामिल किया जा सकता है। उन्हें परिवारों से गोल्ड डिपॉजिट लेने की इजाजत होगी। पहले सिर्फ बैंकों को इसकी इजाजत थी। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने कहा, “प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बतौर कलेक्शन पार्टनर्स शामिल किया जा सकता है।”

गोल्ड के इंपोर्ट में कमी लाने में मिल सकती है मदद

देश में ज्वेलर्स से जुड़ी संस्थाओं ने सरकार से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बदलाव करने की गुजारिश की है। गोल्ड का इंपोर्ट घटाने के लिए उनका जोर ऐसे सॉल्यूशंस पर है, जिसका खराब असर इस सेक्टर से जुड़े लोगों की रोजीरोटी पर नहीं पड़े। अगर देश में परिवारों में रखा 5 फीसदी सोना भी मॉनेटाइज होता है तो इससे 90 अरब डॉलर की लिक्विडिटी मुमकिन हो सकती है।

पीएम मोदी ने की थी सोना नहीं खरीदने की अपील

हाल में प्रधानमंत्री ने देश के लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। इंडिया दुनिया में सोने की सबसे ज्यादा खपत वाले देशों में शामिल है। भारत में ज्वेलरी के साथ ही सुरक्षित निवेश के लिए लोग सोना खरीदते हैं। ज्वेलरी के खरीदने से सोने का ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो पाता है। इसलिए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के जरिए काफी सोना आ सकता है।

2015 में हुई थी गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम की शुरुआत

सरकार ने 2015 में गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS) की शुरुआत की थी। इसका मकसद सोने के इंपोर्ट में कमी लाकर करेंट अकाउंट डेफिसिट को घटाना था। इनवेस्टर्स को फिजिकल गोल्ड खरीदने की जगह गोल्ड स्कीम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इनवेस्टर्स अपना सोना बैंक लॉकर्स में डिपॉजिट कर 2.25 से 2.5 फीसदी इंटरेस्ट कमा सकते हैं। विड्रॉल के समय इनवेस्टर्स के पास फिजिकल गोल्ड या उसके बराबर पैसा वापस लेने की इजाजत थी।

पुरानी स्कीम में 10 सालों में सिर्फ 38 टन सोना आया

स्कीम की शुरुआत के 10 साल बाद तक सिर्फ 38 टन सोना ही आ सका। यह इंडिया में परिवारों के पास रखे कुल सोना का बहुत कम हिस्सा है। इंडिया में परिवारों के पास 25,000 टन सोना होने का अनुमान है। सरकार ने स्कीम में मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट रोक दी थी। इस स्कीम में इनवेस्टर्स को इंटरेस्ट का पेमेंट सरकार करती है। इस वजह से यह स्कीम सरकार के लिए नुकसानदेह रही।

पुरानी स्कीम में सरकार को उठाना पड़ा लॉस

ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भाविक पटेल ने कहा, “आखिर में सरकार को इस स्कीम में लॉस उठाना पड़ा। सरकार को सोने की कीमतों में आए तेजी का बोझ उठाना पड़ता था। साथ ही उसे इनवेस्टर्स को सालाना 2 फीसदी इंटरेस्ट चुकाना पड़ता था।” यह स्कीम हेज्ड (Hedged) नहीं थी, जिससे विड्रॉल के समय सरकार को सोने की कीमतों में हुई वृद्धि का बोझ उठाना पड़ता था।

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इन वजहों से असफल रही पुरानी स्कीम

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि स्ट्रक्चरल वजहों से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम विफल रही। AIJGF ने कहा कि इस स्कीम में दिलचस्पी दिखाने के लिए बैंकों को किसी तरह के इनसेंटिव की व्यवस्था नहीं थी। नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम से गोल्ड के इंपोर्ट पर निर्भरता में कमी आ सकीत है। साथ ही घरों में बेकार पड़े सोने का इस्तेमाल इकोनॉमी के हित में हो सकेगा।

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 6 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 3 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार तीसरे सेशन में बढ़त के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,250 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 261.79 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 77,763.91 पर और निफ्टी 95.15 अंक या 0.39 प्रतिशत बढ़कर 24,270.85 पर बंद हुआ। आज लगभग 2182 शेयरों में बढ़त हुई,1879 शेयरों में गिरावट आई और 188 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,मैक्स हेल्थकेयर,बजाज फिनसर्व,अपोलो हॉस्पिटल्स और डॉ.रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि, गिरावट वाले शेयरों में एक्सिस बैंक,M&M, SBI,L&T और टेक महिंद्रा शामिल रहे।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिलाजुला रहा। निफ्टी रियल्टी सबसे ज़्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा,जिसमें 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद निफ्टी IT(1.7 प्रतिशत),निफ्टी फार्मा (1.7 प्रतिशत)और निफ्टी मेटल (0.7 प्रतिशत) की बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर निफ्टी PSU बैंक में सबसे ज़्यादा गिरावट (1.5 प्रतिशत) आई। इसके बाद निफ्टी एनर्जी (-1.30 प्रतिशत),निफ्टी ऑटो (-0.4 प्रतिशत),निफ्टी मीडिया (-0.4 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.3 प्रतिशत) और निफ्टी बैंक (-0.16 प्रतिशत) का नंबर रहा।

निफ्टी मिडकैप इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स बिना किसी बड़े बदलाव के सपाट स्तर पर बंद हुआ।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि बीच-बीच में उतार-चढ़ाव और प्रॉफ़िट-बुकिंग के बावजूद,घरेलू बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार को अच्छे ग्लोबल संकेतों से मदद मिली। US लेबर मार्केट के नरम आंकड़ों के बाद ब्याज दरों के माहौल में नरमी आने की उम्मीदें बढ़ीं हैं। भारत-जापान समिट के अच्छे नतीजों और IT सेक्टर में लगातार रिकवरी से भी बाजार का मूड बेहतर हुआ। घरेलू मोर्चे पर,कच्चे तेल की कीमतों में नरमी एक अहम पॉजिटिव फ़ैक्टर है। आगे चलकर बाजार का फोकस वित्त वर्ष 2027 के पहली तिमाही के नतीजों और कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर रहेगा। मॉनसून पर भी बाजार की नजर रहेगी। आगे बाजार में गिरावट पर खरीदारी का रुख बने रहने की संभावना है।

निफ्टी व्यू

कोटक सिक्योरिटीज के VP टेक्निकल रिसर्च,अमोल अठावले का कहना है कि इस हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स में अच्छी बढ़त रही। निफ्टी 0.89 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ है। जबकि सेंसेक्स में 663 अंकों की तेजी रही। सेक्टरों की बात करें तो रियल्टी इंडेक्स ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और इसमें 7.20 प्रतिशत की बढ़त हुई,जबकि एनर्जी इंडेक्स में 1.40 प्रतिशत की गिरावट आई। टेक्निकल नज़रिए से देखें तो शॉर्ट-टर्म करेक्शन के बाद निफ्टी ने एक बार फिर 23,800 के आसपास सपोर्ट लिया और तेजी से ऊपर की ओर बढ़ा। वीकली चार्ट पर, इसने एक बुलिश कैंडल बनाया है और’हायर बॉटम’फॉर्मेशन भी बनाए रखा है,जो काफी हद तक पॉजिटिव संकेत है।

शॉर्ट-टर्म के लिए मार्केट का मिजाज पॉजिटिव है,लेकिन ट्रेडर्स के लिए सबसे अच्छी रणनीति गिरावट पर खरीदारी और तेज़ी पर बिकवाली की होगी। नीचे की तरफ,24,150-24,000 अहम सपोर्ट जोन होंगे। जबकि बुल्स के लिए 24,500-24,700 अहम रेजिस्टेंस एरिया होंगे। हालांकि,24,000 के नीचे जाने पर मार्केट का सेंटीमेंट बदल सकता है। 24,000 के नीचे गिरावट आने पर 23,800-23,750 के लेवल दोबारा टेस्ट हो सकते हैं।

बैंक निफ्टी व्यू

एलकेपी सिक्योरिटीज में तकनीकी विश्लेषक वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी ने वीकली चार्ट पर एक छोटी कैंडलस्टिक बनाकर हफ़्ते की क्लोजिंग की। जबकि डेली चार्ट हालिया तेजी के बाद एक सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव (रेंज-बाउंड कंसोलिडेशन) का संकेत दे रहा है। इस कंसोलिडेशन के बावजूद,मार्केट का ओवरऑल रुख बुलिश बना हुआ है। इंडेक्स अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है। यह बड़ा पॉजिटिव संकेत है।

इंडेक्स के लिए तत्काल सपोर्ट 57,500–57,200 के लेवल पर हैं। जबकि रेजिस्टेंस 58,500–58,800 के आसपास दिख रहा है। अच्छे रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो के लिए ट्रेडर्स सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं। जब इंडेक्स रेजिस्टेंस जोन के पास पहुेचे तो प्रॉफ़िट बुकिंग करने की सलाह होगी।

अमोल अठावले का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए हायर बॉटम सपोर्ट 57,500 के आस-पास है। इस लेवल के ऊपर,पॉजिटिव मोमेंटम 58,700-59,000 की तरफ जारी रह सकता है। इसके विपरीत,57,500 के नीचे गिरावट आने पर अपट्रेंड कमजोर पड़ सकता है। इस लेवल के नीचे,ट्रेडर्स अपनी लॉन्ग पोजीशन से बाहर निकलना पसंद कर सकते हैं।

 

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Totapuri Mango Price Crash: तोतापरी आम के दामों में भारी गिरावट की टेंशन! अब इसके लिए हाई लेवल कमेटी का ऐलान

आंध्र प्रदेश में तोतापरी आम की कीमतों में आई भारी गिरावट और इसके कारण किसानों के बीच पैदा हुए संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने इस समस्या के अध्ययन के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में आंध्र प्रदेश का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान किसानों ने उनके सामने पिछले कुछ महीनों में तोतापरी आम की कीमतों में आई भारी गिरावट का मुद्दा उठाया था। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक किसानों ने बताया कि मुख्य रूप से प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए उगाए जाने वाले इस आम के दाम गिरने से उनकी इनकम पर बहुत बुरा असर पड़ा है। किसानों की इसी चिंता को देखते हुए कृषि मंत्री ने कमेटी गठन करने का आदेश जारी किया।

वैल्यू चेन की पूरी समीक्षा करेगी वैज्ञानिकों की कमेटी

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक वैज्ञानिकों और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों को मिलाकर बनाई गई यह कमेटी तोतापरी आम की पूरी वैल्यू चेन की विस्तृत समीक्षा करेगी। इस समीक्षा के दायरे में नीचे दिए गए विषय शामिल होंगे-

तोतापरी आम की खेती

  • प्रोसेसिंग
  • मार्केटिंग
  • घरेलू व्यापार
  • निर्यात

इसके साथ ही यह पैनल किसानों की कमाई में सुधार करने और इस पूरे सेक्टर को एक टिकाऊ व मजबूत स्थिति में लाने के लिए जरूरी उपायों के सुझाव भी देगा।

डॉ टी दामोदरन संभालेंगे कमेटी की कमान

लखनऊ स्थित ICAR-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान से जारी आदेश के मुताबिक इस उच्च स्तरीय समिति की कमान डॉ टी दामोदरन (निदेशक, ICAR-CISH) को सौंपी गई है। वही इसके अध्यक्ष होंगे। कमेटी में इनके अलावा डॉ. एम शंकरण, प्रमुख, फल फसल प्रभाग, ICAR-IIHR, बेंगलुरु, डॉ. एच एस सिंह, प्रधान वैज्ञानिक, ICAR-CISH, डॉ. डी श्रीनिवास रेड्डी, प्रोफेसर, कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर (अनंतराजुपेटा), डॉ. वाईएसआर हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी, आंध्र प्रदेश के बागवानी निदेशक या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे।

10 दिनों के भीतर ग्राउंड जीरो पर जाएगी कमेटी

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वे अगले 10 दिनों के भीतर आंध्र प्रदेश के प्रमुख तोतापरी उत्पादक क्षेत्रों का दौरा करें। ग्राउंड लेवल की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए कमेटी को किसानों, प्रोसेसर्स, निर्यातकों, राज्य के बागवानी अधिकारियों और किसान उत्पादक संगठनों के साथ सीधा परामर्श करने के लिए कहा गया है।

सरकार को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

अपने फील्ड स्टडी और सभी पक्षों के साथ किए गए विचार-विमर्श के आधार पर यह कमेटी कृषि मंत्रालय को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट में कीमतों को स्थिर करने, वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने, प्रोसेसिंग व एक्सपोर्ट क्षमता को मजबूत करने के लिए अहम सिफारिशें शामिल होंगी। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलकर की जाने वाली संयुक्त कार्रवाई के लिए FPOs, प्रोसेसर्स और निर्यातकों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का रोडमैप भी सुझाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने साफ तौर पर कहा है कि तोतापरी उत्पादकों की आय और उनकी आजीविका की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कमेटी की रिपोर्ट और निष्कर्षों के आधार पर किसानों की मदद करने, वैल्यू एडिशन को बढ़ाने और इस सेक्टर में निर्यात व निवेश के अवसरों का विस्तार करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। आपको बता दें कि आंध्र प्रदेश में इस समय तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की सरकार है। टीडीपी केंद्र और राज्य दोनों ही जगहों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की एक बेहद महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टी है।

Alpha Movie: ‘ऐल्फा’ में आलिया भट्ट-शरवरी वाघ के बिकनी सीन को यूजर्स ने बताया निरमा ऐड, बोले- धुरंधर बनने चले थे…

Alpha Movie: बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट और शरवरी की स्पाई-एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘ऐल्फा’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से मिले-जुले से लेकर नेगेटिव रिव्यूज मिले हैं। फिल्म के कई सीन ऑनलाइन लीक हो गए हैं, जिनमें से एक में आलिया और शरवरी का बिकिनी सीन भी शामिल है। हालांकि, इंटरनेट पर इसे लेकर कोई खास उत्साह नहीं दिख रहा है।

‘ऐल्फा’ फिल्म का एक सीन X पर सामने आया है, जिसमें आलिया और शरवरी बिकिनी पहने हुए पानी से बाहर निकलती हुई दिख रही हैं। इस सीन में दोनों एक्ट्रेस बिकिनी में अपनी कर्वी बॉडी दिखाती नजर आ रही हैं। हालांकि, इस सीन ने कई दर्शकों को निराश किया है। लोगों ने YRF की इस बात के लिए आलोचना की है कि एक्शन थ्रिलर फिल्म होने के बावजूद, वे फीमेल एक्ट्रेस के लिए बिकिनी वाले सीन जरूर रखते हैं। कई यूजर्स ने इस सीन की तुलना निर्मा (Nirma) के विज्ञापन से भी की है।

एक ट्वीट में लिखा था, “उन्होंने YRF की ‘Alpha’ फिल्म में निरमा का ऐड क्यों डाल दिया?” एक और ट्वीट में कहा गया, “YRF वही कर रहा है जो वह हमेशा करता है – जासूसी फिल्म में बिकिनी सीन ज़बरदस्ती डालना।” एक और यूज़र ने कमेंट किया, “क्या जासूसी फिल्म ऐसी दिखनी चाहिए? यह तो बिकिनी पहनकर हनीमून मना रहे लेस्बियन कपल की फ़िल्म जैसी लग रही है। YRF को बिकिनी का इतना जुनून क्यों है…?”

एक और व्यक्ति ने लिखा, “मुझे पता था!! YRF जासूसी फ़िल्म बनाए और उसमें बिकिनी सीन न हो? नामुमकिन। उन्होंने इस बार दर्शकों को बेवकूफ़ बनाने के लिए टीजर और ट्रेलर में इसे नहीं दिखाया।” एक और ट्वीट में लिखा था, “बड़ा घोटाला, बिकिनी में भारतीय महिला एजेंट?????? मिस्टर चोपड़ा, आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? आपको भारतीय RAW एजेंटों को बिकिनी क्वीन की तरह दिखाने का अधिकार किसने दिया?”

यह पहली बार नहीं है जब YRF स्पाई यूनिवर्स को अपनी महिला जासूसों की स्टाइलिंग को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा है। ‘वॉर 2’ में कियारा आडवाणी के बिकिनी सीन पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ दर्शकों ने जासूस को इतने ग्लैमरस अवतार में दिखाए जाने पर सवाल उठाए। इससे पहले, ‘पठान’ फिल्म के गाने ‘बेशर्म रंग’ में दीपिका पादुकोण की ऑरेंज बिकिनी को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। कॉस्ट्यूम के रंग को लेकर फिल्म के बहिष्कार की मांग उठी थी और राजनीतिक विरोध भी हुआ था।

शिव रवैल की डायरेक्ट की हुई ‘ऐल्फा’, YRF स्पाई यूनिवर्स की सातवीं फिल्म है। इस फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी मुख्य भूमिकाओं में हैं, साथ ही अनिल कपूर और बॉबी देओल भी हैं। यह फ़िल्म एक ऐसी ट्रेंड मर्डरर की कहानी है जिसे सुपर-सोल्जर सीरम दिया गया है, और उसे अपने ही मेंटर के खिलाफ लड़ना पड़ता है। यश राज फिल्म्स के बैनर तले आदित्य चोपड़ा द्वारा प्रोड्यूस की गई ‘अल्फा’ की कहानी उदय चोपड़ा ने लिखी है, और इसका स्क्रीनप्ले सौमिल शुक्ला, श्रीधर राघवन और इशिता मोइत्रा ने तैयार किया है। यह YRF स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला-प्रधान स्पाई एक्शन फिल्म है, इससे पहले इस यूनिवर्स की फिल्मों में ऋतिक रोशन, सलमान खान और शाहरुख खान जैसे पुरुषमेल सुपरस्टार्स मुख्य भूमिकाओं में रहे हैं।

क्या दूसरे T-20i मैच में होगा वैभव बनाम आर्चर का मुकाबला?

पहले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भारत जीत से महरूम रह गया। लेकिन इस मैच में भारत और इंग्लैंड को कई सबक मिल गए। भारत को यह सबक मिल गया कि शीर्ष क्रम आउट ऑफ फॉर्म है। वहीं इंग्लैंड को यह समझ आ गया कि तेज गेंदबाजी में धार कम है। ऐसे में अब सबकी निगाहें वैभव सूर्यवंशी बनाम जोफ्रा आर्चर के मुकाबले पर टिकी है लेकिन शायद शनिवार को भी क्रिकेट प्रेमी को निराशा हाथ लग सकती है।

गौरतलब है कि इंडियन प्रीमियर लीग में वैभव सूर्यवंशी और जोफ्रा आर्चर दोनों ही राजस्थान रॉयल्स की टीम से खेलते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों में शामिल जोफ्रा आर्चर को भारत के खिलाफ पहले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच से आराम दिया गया है। उनको शायद दूसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भी मौका नहीं मिलेगा और अंतिम तीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में ही वह इंग्लैंड का हिस्सा बनेंगे। उनको कार्यभार प्रबंधन के तहत बैंच पर बैठाया गया है।हालांकि पहले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में इंग्लैंड की गेंदबाजी अपेक्षाअनुसार नहीं रही थी तो उनको दूसरे मैच में मौका मिल सकता है।

पूरी सीरीज से पहले सबसे बड़ी चर्चा 15 वर्षीय विस्फोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर है। पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्करने साफ कहा है कि अगर भारत को इंग्लैंड को चौंकाना है तो वैभव को टी20 में मौका देना चाहिए।गावस्कर का मानना है कि युवा खिलाड़ी को सिर्फ इसलिए बाहर नहीं बैठाया जाना चाहिए क्योंकि वह नया है। उनके मुताबिक वैभव को ओपनिंग या नंबर-3 पर उतारकर इंग्लैंड के गेंदबाजों पर शुरुआत से दबाव बनाया जा सकता है।

हालांकि की ओर से सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने संकेत दिए हैं कि वैभव को अपनी बारी का इंतजार करना होगा। ऐसे में प्लेइंग इलेवन को लेकर सबसे बड़ा सस्पेंस इसी युवा बल्लेबाज पर टिका हुआ है।लेकिन संजू सैमसन की लगातार 3 विफलता के कारण टीम प्रबंधन अपनी सोच बदलने पर मजबूर हो सकता है।

भारत की टी20 विश्व कप में खिताबी जीत के सूत्रधार रहे सैमसन को कम से कम एक साल तक मौका दिया जा सकता था लेकिन अब जबकि भारतीय क्रिकेट को सूर्यवंशी के रूप में एक असाधारण प्रतिभाशाली क्रिकेटर मिल गया है।ऐसे में सैमसन के लिये गलती की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है और टी20 विश्व कप का शानदार प्रदर्शन भी टीम में उनकी जगह की गारंटी नहीं हो सकता।अभिषेक शर्मा ने पिछले तीन मैचों में से दो में 49 और 59 रन बना लिये हैं जिससे सारा दबाव अब सैमसन पर है।

बारिश के कारण रद्द हुए पहले मैच में सैमसन ने सात गेंद में एक रन बनाया था और एक बार भी नहीं लगा कि वह आक्रामक खेलने के मूड में हैं । सीम लेती पिचों पर तकनीक के मामले में उनकी कमजोरी सामने आती है।राजस्थान के टोंक के रहने वाले आयरलैंड के गुमनाम से तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा ने उनकी कमजोरी का फायदा उठाकर उनका विकेट लिया।टीम प्रबंधन 15 वर्ष के सूर्यवंशी को लेकर कोई हड़बड़ी नहीं करना चाहता लेकिन अगले कुछ मैचों में उन्हें नहीं उतारा गया तो इस फैसले पर सवाल उठने तय हैं।

धरती के वो अनछुए कोने खामोश वादियां गूंजते राज, जहां नहीं पड़े इंसानी कदम आज तक!

दुनिया में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जिन्हें देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है। कहीं झील के बीच तैरते हुए द्वीप हैं, तो कहीं ऐसी नदी जिसका पानी हमेशा उबलता रहता है। कुछ जगहें विज्ञान के लिए भी आज तक रहस्य बनी हुई हैं। आइए जानते हैं दुनिया की ऐसी 5 अद्भुत जगहों के बारे में, जिन्हें अपनी जिंदगी में एक बार जरूर देखना चाहिए:

1. लोकटक झील, भारत – दुनिया की तैरती झील का अनोखा नज़ारा

लोकटक झील: भारत के मणिपुर में एक तैरता हुआ स्वर्ग

मणिपुर में लोकटक झील भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके ‘फुमदी’ हैं। फुमदी मिट्टी, घास, पेड़-पौधों और जैविक पदार्थों से बने तैरते हुए छोटे-छोटे द्वीप होते हैं, जो पानी की सतह पर लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं। यही कारण है कि यह झील दुनिया की सबसे अनोखी झीलों में गिनी जाती है। यहां केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क दुनिया का इकलौता तैरता हुआ नातिरोनल पार्क है, जहां दुर्लभ संगाई हिरण पाया जाता है। झील में बोटिंग, फोटोग्राफी, बर्ड वॉचिंग और सूर्योदय-सूर्यास्त का नजारा टूरिस्ट को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहां ठहरने के लिए होमस्टे, कॉटेज और होटल उपलब्ध हैं, जिनका खर्च लगभग ₹1,500 से ₹5,000 प्रति रात होता है, जबकि खाने का खर्च ₹400 से ₹1,000 प्रतिदिन तक आता है।

2. डोर टू हेल, तुर्कमेनिस्तान – 50 साल से जलता रहस्यमयी गड्ढा

The 'Gates of Hell' could soon be extinguished in Turkmenistan due to its ecological damage | World News | Sky News

तुर्कमेनिस्तान के कराकुम रेगिस्तान में स्थित डोर टू हेल दुनिया के सबसे रहस्यमय टूरिस्ट डेस्टिनेशन में से एक है। यह एक विशाल गैस क्रेटर है, जिसमें 1971 से लगातार आग जल रही है। माना जाता है कि नेचुरल गैस की खुदाई के दौरान जमीन धंस गई थी और गैस के रिसाव को रोकने के लिए उसमें आग लगा दी गई, लेकिन वह आज तक नहीं बुझी। रात के समय यह गड्ढा चमकते हुए आग के समुद्र जैसा दिखाई देता है। इसका व्यास लगभग 70 मीटर और गहराई करीब 30 मीटर है। यहां होटल बहुत कम हैं, इसलिए ज्यादातर टूरिस्ट रेगिस्तान में कैंपिंग का एक्सपीरियंस लेते हैं। कैंप और टूर पैकेज का खर्च लगभग ₹8,000 से ₹20,000 तक हो सकता है, जबकि खाने का खर्च ₹1,000 से ₹2,500 प्रतिदिन रहता है।

3. सलार दे उयुनी, बोलिविया – दुनिया का सबसे बड़ा नटुरेल आईना

HD wallpaper: Salar de Uyuni, Bolivia, white clouds, nature, 1920x1080 | WallpaperFlare

बोलिविया का सलार दे उयुनी दुनिया का सबसे बड़ा नमक का मैदान है, जो लगभग 10,500 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। बारिश के मौसम में इसकी सतह पर पानी की एक पतली परत जम जाती है, जिससे पूरी जमीन एक विशाल आईने की तरह आसमान का लुक दिखाने लगती है। ऐसा लगता है जैसे लोग बादलों के ऊपर चल रहे हों। यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे फोटोजेनिक जगहों में गिना जाता है। यहां सूर्योदय और सूर्यास्त का व्यू बेहद शानदार होता है। टूरिस्ट जीप सफारी, फोटोग्राफी और नमक से बने होटलों में ठहरने का एक्सपीरियंस लेते हैं। यहां रहने का खर्च लगभग ₹3,000 से ₹10,000 प्रति रात और खाने का खर्च ₹800 से ₹2,000 प्रतिदिन हो सकता है।

4. रेसट्रैक प्लाया, अमेरिका – अपने आप चलने वाले पत्थरों का रहस्य

mystery of moving stone in California death valley | वो घाटी जहां अपने आप चलते हैं पत्थर

अमेरिका के डेथ वैली नेशनल पार्क में स्थित रेसट्रैक प्लाया एक सूखी झील का मैदान है, जो अपने चलने वाले पत्थरों के लिए पूरी दुनिया में पॉपुलर है। यहां बड़े-बड़े पत्थर बिना किसी इंसान या जानवर की मदद के अपनी जगह बदलते हुए दिखाई देते हैं और पीछे लंबी लकीरें छोड़ जाते हैं। कई वर्षों तक यह एक रहस्य बना रहा, लेकिन बारिश, बर्फ की पतली परत और तेज हवा मिलकर इन पत्थरों को धीरे-धीरे खिसकाती हैं। यहां का सुनसान और विशाल रेगिस्तानी इलाका एडवेंचर पसंद लोगों को खूब अट्रैक्ट करता है। यहां ठहरने के लिए डेथ वैली के आसपास होटल अवेलेबल हैं, जिनका खर्च लगभग ₹8,000 से ₹20,000 प्रति रात होता है, जबकि खाने का खर्च ₹1,500 से ₹3,000 प्रतिदिन तक हो सकता है।

5. शनाय-टिम्पिशका, पेरू – उबलती नदी का रहस्य

दुनिया की एकमात्र उबलती नदी, शनाय-टिम्पिश्का नदी, जिसे "अमेज़न की उबलती नदी" भी कहा जाता है, पेरू में स्थित है। इसका पानी 45°C (113°F) से लेकर लगभग ...

पेरू के अमेजन वर्षावन में स्थित शनाय-टिम्पिशका को दुनिया की सबसे रहस्यमयी नदियों में गिना जाता है। यह नदी कई स्थानों पर इतनी गर्म हो जाती है कि इसका टेम्परेचर 80 से 100 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। माना जाता है कि इसमें गिरने वाला कोई भी छोटा जीव कुछ ही मिनटों में मर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती के अंदर Geothermal एनर्जी के कारण यह पानी इतना गर्म रहता है। यहां जाने के लिए गाइड के साथ यात्रा करना सबसे सुरक्षित माना जाता है। आसपास इको-लॉज और जंगल रिसॉर्ट उपलब्ध हैं, जिनका खर्च लगभग ₹4,000 से ₹12,000 प्रति रात होता है, जबकि खाने का खर्च ₹800 से ₹2,000 प्रतिदिन तक हो सकता है।

इन पांचों जगहों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये नेचर के ऐसे अजूबे हैं, जिन्हें देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है। अगर आप भी टिपिकल टूरिस्ट डेस्टिनेशन से हटकर कुछ अनोखा और यादगार एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो ये डेस्टिनेशन आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होने चाहिए।