Kargil Vijay Diwas: ‘लक्ष्य’ से ‘शेरशाह’ तक…, हिंदी सिनेमा ने इन फिल्मों के जरिए जवानों की बहादुरी और बलिदान को किया सलाम

Kargil Vijay Diwas: भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 का कारगिल युद्ध देश के इतिहास की एक ऐतिहासिक घटना रही है और इस पर कई भारतीय फ़िल्में और शो भी बने हैं। जहाँ आने वाली सीरीज़ ‘ऑपरेशन सफ़ेद सागर’ इस युद्ध में एयर फ़ोर्स की भूमिका को दिखाएगी, वहीं आज कारगिल विजय दिवस के मौके पर हम उन प्रोजेक्ट्स पर नज़र डालते हैं जिन्होंने कारगिल युद्ध की वीरता को स्क्रीन पर जीवंत किया।

Operation Safed Sagar

कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना के ऐतिहासिक अभियान पर आधारित यह आने वाली वेब सीरीज, भारतीय वायु सेना के पायलटों के ‘गोल्डन एरोज़’ स्क्वाड्रन की कहानी बताती है। इन पायलटों ने हवाई युद्ध में शानदार काम करते हुए भारत को जीत दिलाई थी। इस सीरीज़ में जिमी शेरगिल, सिद्धार्थ, अभय वर्मा, मिहिर आहूजा, अर्णव भसीन, तारुक रैना, दीया मिर्ज़ा रेखी और प्राजक्ता कोली जैसे कलाकार शामिल हैं।

Shershaah

यह फ़िल्म कारगिल युद्ध में शहीद हुए और मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर आधारित है। सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​ने इसमें भारतीय सेना के अफ़सर की भूमिका निभाई है। फ़िल्म में दिखाया गया है कि उन्होंने किस तरह पूरे दिल से ज़िंदगी जी और उनकी हिम्मत व मज़बूती की वजह से भारत ने पॉइंट 5140 और पॉइंट 4875 पर कब्ज़ा किया। यह घटना युद्ध में भारत की जीत का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई।

LOC Kargil

जेपी दत्ता की डायरेक्ट की गई यह फ़िल्म भारतीय सेना के सफल ‘ऑपरेशन विजय’ पर आधारित है। यह ऑपरेशन मई 1999 में कारगिल सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठ और रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्ज़े के बाद शुरू किया गया था, ताकि लाइन ऑफ़ कंट्रोल (LoC) के भारतीय हिस्से से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ा जा सके। इस फ़िल्म में अक्षय खन्ना, सैफ अली खान, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, अभिषेक बच्चन और अजय देवगन जैसे कई कलाकार शामिल थे।

Gunjan Saxena: The Kargil Girl

इस बायोपिक ड्रामा में जाह्नवी कपूर ने इंडियन एयर फ़ोर्स की पायलट गुंजन सक्सेना का किरदार निभाया है, जो कॉम्बैट ज़ोन में उड़ान भरने वाली पहली महिलाओं में से एक थीं। उन्होंने कारगिल से घायल सैनिकों को निकालने, ज़रूरी सामान पहुँचाने और निगरानी में अहम भूमिका निभाई। सक्सेना ने कारगिल से 900 से ज़्यादा सैनिकों (घायलों और मृतकों) को निकालने के ऑपरेशन में भी हिस्सा लिया।

Tango Charlie

इस फ़िल्म में बॉबी देओल ने तरुण चौहान का किरदार निभाया है। फ़िल्म में एक पैरा-मिलिट्री जवान के तौर पर तरुण के सफ़र को दिखाया गया है—कैसे वह बॉर्डर पर तैनात एक नए रिक्रूट से भारतीय बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (BSF) के एक अनुभवी और मज़बूत फ़ाइटर में बदलता है। ‘टैंगो चार्ली’ के नाम से पहचाने जाने वाले तरुण को भारत के अलग-अलग इलाकों में हिंसक विद्रोहों, दंगों और आतंकवाद-विरोधी अभियानों का सामना करना पड़ता है। बाद में, इस BSF जवान और उसकी बटालियन को कारगिल भेजा जाता है।

Lakshya

ऋतिक रोशन की यह फ़िल्म करण नाम के एक ऐसे युवा की कहानी है जिसका जीवन में कोई मकसद नहीं है। वह अचानक भारतीय सेना में शामिल तो हो जाता है, लेकिन एक सैनिक की चुनौतियों का सामना करने से घबराकर पीछे हट जाता है। हालाँकि, जब इस वजह से उसकी गर्लफ्रेंड (प्रीति ज़िंटा) के साथ अनबन हो जाती है, तो वह उसे गर्व महसूस कराने के लिए सेना में दोबारा शामिल हो जाता है और कारगिल युद्ध में अपनी बटालियन के साथ ‘पॉइंट 5179’ को सुरक्षित करने के मिशन पर लड़ता है।

Kurukshetra

2006 की फ़िल्म ‘कीर्ति चक्र’ का सीक्वल और ‘मेजर महादेवन’ फ़िल्म सीरीज़ की दूसरी फ़िल्म, 2008 में रिलीज़ हुई इस मलयालम फ़िल्म में मोहनलाल ने कर्नल महादेवन का किरदार दोबारा निभाया है और इसकी कहानी कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह फ़िल्म भारतीय सेना के कर्नल महादेवन और पाकिस्तानी सेना के कर्नल चंगेज के बीच हुई टोलोलिंग की लड़ाई पर केंद्रित है।

Alpha Alia Bhatt Movie Review: मिसफिट आलिया भट्ट….तो स्पाई फिल्म में ग्लैमर डॉल बनकर रह गईं शरवरी वाघ, बॉबी देओल ने बचा ली थोड़ी इज्जत

फिल्म- ऐल्फा

निर्देशक- शिव रवैल

कलाकार- आलिया भट्ट, शरवरी, अनिल कपूर, बॉबी देओल

रेटिंग-2/5

Alpha Alia Bhatt Movie Review: जब यशराज ने फिल्म ऐल्फा का ऐलान किया था तो फैंस का एक्साइटमेंट और उम्मीदें काफी बढ़ी थीं। इसके बाद फिल्म की स्टार कास्ट का ऐलान हुआ तो आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, बॉबी देओल और अनिल कपूर का नाम सुनकर हर किसी की उम्मीदें और ज्यादा बढ़ गई थीं। लेकिन फिल्म देखकर आप ठगा हुआ सा महसूस करने वाले हैं।

कहानी

शिव रावेल की डायरेक्ट की गई फिल्म ऐल्फा में आलिया का किरदार ‘सीता’ आपको फुल एक्शन में नजर आती हैं। वह अजेय है, उससे कोई गलती नहीं होती, वह मौत को कई बार टक से छूकर वापस आती हैं। वहीं हवा में उछलकर ऐसे दुश्मनों को ढेर कर देती हैं जैसे ग्रेवटी से उनका लेना देना ही न हो। उसे ‘टेस्ट सब्जेक्ट’ के तौर पर बढ़ा किया जाता है। घर-परिवार प्यार से कोसों दूर होती है।

प्यार और हमदर्दी क्या होती है उसे नहीं पता है। उसे अपने इमोशंस भी जाहिर करने में भी काफी मुश्किल होती है। इसीलिए, जब वह अपनी अलग हो चुकी जुड़वां बहन दुर्गा के साथ कुछ प्यार भरे पल बिताती है, तो खुश होती है नया एहसास करती है। लेकिन आलिया पर उनका ये किरदार उतना जच नहीं रहा है। ‘अल्फा’ की कहानी 1999 के कारगिल युद्ध पर बेस्ड है, जिसमें दोनों तरफ काफी नुकसान हुआ था। बढ़ते खतरों के बीच भारत को अजेय बनाने के पक्के इरादे के साथ, कर्नल फतेह सिंह लखावत वैज्ञानिक डॉ. वर्गीज की मदद से एक खास टास्क फोर्स बनाने के लिए एक ‘बेहतरीन और एडवांस्ड प्रोग्राम’ तैयार करते हैं। जल्द ही, कुछ युवा पुरुषों को ‘अल्फा’ नाम का सीरम दिया जाता है, जिसे सुपरह्यूमन बनाने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया था।

यह सीरम देखने की क्षमता, रिफ्लेक्स, फेफड़ों की क्षमता और इंद्रियों की शक्ति को बढ़ाता है। इससे सुनने की क्षमता तेज हो जाती है और पानी के अंदर आठ मिनट तक सांस रोके रखने की काबिलियत मिलती है। लेकिन जल्द ही, सीरम के खतरनाक साइड इफेक्ट्स दिखने लगते हैं। इस बात से अनजान, लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रांत कौल अपनी पत्नी जानकी को यह सीरम दे देते हैं, जब प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा होता है।

नतीजा? एक बच्ची को जन्म देने के बाद जानकी की ऑपरेशन टेबल पर ही मौत हो जाती है। उस बच्ची को फतेह सिंह चुपके से बदल देते हैं और उसे एक ‘ऐल्फा’ सोल्जर के तौर पर पालते-पोसते हैं। दुनिया से दूर, राजस्थान की एक फैसिलिटी में कैद और किसी एक्सपेरिमेंट की तरह लगातार निगरानी में पली-बढ़ी सीता एक हथियार बन जाती है। लेकिन फतेह सिंह असल में वो नहीं हैं जो होने का दावा करते हैं। और इसी उतार-चढ़ाव भरे माहौल में एंट्री होती है उसकी जुड़वां बहन दुर्गा की, जो उससे अलग हो गई थी।

डायरेक्शन

बात अगर डायरेक्टर शिव रवैल की करें, जिन्होंने ऐल्फा को निर्देशित किया है। एक तरह से कहा जा सकता है कि शिव ने स्पाई थ्रिलर को स्टाइलिश थिलर बना दिया है। फिल्म को देखकर आपको बोरियत होने लगती है। एक सीन भी आपके अंदर एक्साइटमेंट नहीं जगाता है। फिल्म के कई सीन अधूरेपन का शिकार है। वहीं कई जगह आप को एक्शन देख ऐसा लगेगा कि ये आखिर क्यों हो रहा है?

एक्टिंग

फिल्म ऐल्फा का लीड किरदार आलिया भट्ट हैं। बाकी पूरी कास्ट को यशराज ने सपोर्टिंग रोल में रखा है। फिल्म की कहानी आलिया के ईर्द-गिर्द ही घूमती हैं। फिल्म देख आपको बस एक ही सवाल खाए जाता है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी, जो आलिया ने इस फिल्म को हां कहा। जिगरा के बाद आलिया के करियर में एक और बुरी फिल्म एड हो गई है ‘ऐल्फा’। आलिया भट्ट जैसी दमदार एक्ट्रेस की फिल्म से हर किसी को काफी उम्मीदें रहती हैं। उन्होंने हाईवे, गंगूबाई बाई जैसी शानदार फिल्में दी हैं।

अब बात करते हैं शरवरी वाघ की। यशराज ने शरवरी को फिल्मी दुनिया में लॉन्च किया है। यशराज के अलावा वे और भी फिल्मों में शानदार काम के साथ नजर आई हैं। हाल में रिलीज हुई उनकी मैं वापस आउंगा हो या फिर महाराज दोनों ही फिल्मों में एक्ट्रेस का इतना शानदार है कि उनसे भी काफी उम्मीदें रहती हैं। लेकिन अफसोस निर्देशक एक्ट्रेस के टैलेंट का यूज न कर सके। फिल्म ऐल्फा में शरवरी को बहुत कम स्क्रीन टाइम दिया गया है। वहीं उनका रोल फिल्म के लिए जरूरी भी नहीं लगता है। अगर वह फिल्म में न होती तो भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था।

फिल्म की इज्जत थोड़ी बहुत बॉबी देओल ने अपनी दमदार एक्टिंग से बचा ली है। लेकिन बेतुक कमजोर कहानी ने उनका काम भी खराब किया है। वहीं अनिल कपूर भी अपने रोल के हिसाब से फिट हैं। फिल्म में ऋतिक के कबीर वाले कौमियो ने फिल्म को थोड़ी बहुत हाईप दिलाई है।

फिल्म को देखें या नहीं

फिल्म को न देखना कहना जायज नहीं होता है। एक फिल्म बनाने में कई लोगों की मेहनत होती है। लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिन्हें किसी भी हाल में टॉलरेट करना मुश्किल होता है। ऐल्फा के साथ भी कुछ ऐसा ही है। अगर आप लीड कास्ट के जबरा फैन हैं…यानी उनकी शक्ल देख चेन मिल जाता है, तो आप इसे देख सकते हैं। बाकि फिल्म में देखने लायक कुछ भी नहीं।