Vaibhav Sooryavanshi: इंग्लैंड सीरीज में नहीं होगा वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू? BCCI ने दिया ये बड़ा संकेत

वैभव सूर्यवंशी टीम इंडिया के लिए पहला मैच कब खेलेंगे? भारतीय क्रिकेट फैंस के बीच ये मिलियन डॉलर का सवाल बना हुआ है। अब भारत और इंग्लैंड का दूसरा टी20 मैच 4 जुलाई को मैंचेस्टर में खेला जाएगा। इन सबके बीच BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने टीम मैनेजमेंट के उस फैसले का समर्थन किया है, जिसमें वैभव सूर्यवंशी को अभी तक इंटरनेशनस क्रिकेट में पदार्पण का मौका नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि जब सही समय आएगा, तब वैभव को जरूर मौका मिलेगा।

भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने प्रेस कांफ्रेंस की और मीडिया के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने भी साफतौर पर इस बात का संकेत दे दिया है कि अभी भी वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका शायद नहीं मिलेगा और टीम इंडिया संजू सैमसन को बैक करेगी।

वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर BCCI ने तोड़ी चुप्पी

15 साल के वैभव सूर्यवंशी को आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद पहली बार भारतीय टीम में जगह मिली थी। उन्होंने पूरे सीजन में 237.30 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। हालांकि, टीम में चुने जाने के बावजूद उन्हें अब तक अंतिम एकादश में खेलने का मौका नहीं मिला है। आयरलैंड के खिलाफ सीरीज और इंग्लैंड के खिलाफ बारिश से प्रभावित पहले टी20 मैच में भी वह बाहर बैठे रहे। टीम प्रबंधन फिलहाल टॉप ऑर्डर में संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन की मौजूदा जोड़ी पर ही भरोसा जता रहा है।

भारतीय टीम प्रबंधन का कहना है कि वह उस टीम संयोजन में कोई बदलाव नहीं करना चाहता, जिसने भारत को 2026 का टी20 विश्व कप जिताया था। इसी वजह से युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को अभी इंतजार करने के लिए कहा गया है। हालांकि, कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर के इस फैसले की कई लोग आलोचना भी कर रहे हैं। इस मामले पर भारतीय क्रिकेट बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि वैभव बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और उन्होंने आईपीएल में अपने प्रदर्शन से यह साबित भी किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने टीम प्रबंधन और कोच के खिलाफ कई टिप्पणियां देखी हैं, लेकिन अंतिम फैसला कप्तान और कोच ही लेते हैं। राजीव शुक्ला ने कहा कि टीम मैनेजमेंट लगातार हालात पर नजर रखे हुए है। जैसे ही सही मौका मिलेगा, वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टीम की ओर से खेलने का अवसर जरूर दिया जाएगा।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि टीम चयन को लेकर टीम मैनेजमेंट की आलोचना करना सही नहीं है। उनका कहना है कि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को कब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौका देना है, इसका फैसला ड्रेसिंग रूम में मौजूद कप्तान, कोच और टीम प्रबंधन पर ही छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा, “ऐसे फैसले टीम प्रबंधन बेहतर तरीके से ले सकता है। इसलिए इस मुद्दे पर बेवजह की चर्चा और आलोचना करने की कोई जरूरत नहीं है।”

‘यूपी की नौकरशाही पॉलिसी पैरालिसिस की शिकार नहीं’: CM योगी का बड़ा बयान, 464 करोड़ की प्रशासनिक अकादमी का किया लोकार्पण

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की नौकरशाही अब पॉलिसी पैरालिसिस का शिकार नहीं है, बल्कि पूरी तेजी के साथ विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए दौड़ने को तैयार है। विकसित भारत की आधारशिला उत्तर प्रदेश बनेगा और इसके लिए प्रदेश के प्रत्येक गांव, कस्बे और वार्ड को आत्मनिर्भर बनाना होगा। राजनीतिक नेतृत्व केवल विजन दे सकता है, लेकिन उसे धरातल पर उतारने की पूरी ताकत प्रशासनिक मशीनरी के पास होती है। इसलिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सकारात्मक कार्यसंस्कृति बेहद जरूरी है।

 

मुख्यमंत्री शुक्रवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के 464 करोड़ रुपये से अधिक लागत से 22 एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल में निर्मित अत्याधुनिक नवीन परिसर का लोकार्पण करने के उपरांत प्रशासनिक अधिकारियों और प्रशिक्षुओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भवन का उद्घाटन किया और परिसर का निरीक्षण कर विभिन्न सुविधाओं व व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

 

टीमवर्क व सकारात्मक सोच ही सफलता का आधार

सीएम ने कहा कि इस अकादमी को भारत के अग्रणी स्कूल ऑफ पब्लिक लीडरशिप के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। नॉलेज टू डेवलपमेंट, डेवलपमेंट टू पब्लिक ट्रस्ट और पब्लिक ट्रस्ट टू नेशन बिल्डिंग की संकल्पना को साकार करने में यह संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसी उद्देश्य से आधुनिक सुविधाओं से युक्त अकादमी का निर्माण कराया गया है। एकला चलो की सोच या टीम को कमजोर करने की मानसिकता से अच्छे परिणाम नहीं मिल सकते। टीमवर्क, सकारात्मक सोच और नवाचार ही सफलता का आधार हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार सीखते रहने, तकनीक आधारित सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और नवाचार को अपनाने की आवश्यकता है।

 

नौ वर्षों में बदली उत्तर प्रदेश की पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की पिछले नौ वर्षों की विकास यात्रा स्वयं बहुत कुछ कहती है। शासन व आमजन के बीच प्रशासनिक अधिकारी सबसे महत्वपूर्ण सेतु होते हैं। यदि यह सेतु मजबूत होगा तो सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा और जनता की धारणा भी सकारात्मक बनेगी। वर्ष 2017 से पहले दो-तीन दशकों तक उत्तर प्रदेश की छवि बेहद नकारात्मक हो गई थी। लोग मानने लगे थे कि देश की कोई भी योजना उत्तर प्रदेश में सफल नहीं हो सकती। इसके लिए केवल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व भी जिम्मेदार था।

 

अब पहचान का संकट नहीं, टॉप-3 अर्थव्यवस्था में यूपी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपनी नई पहचान बनाई है। आज प्रदेश देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है। सुरक्षा, सुशासन, क्राउड मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी आधारित सुधार और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अब यहां किसी के सामने पहचान का संकट नहीं है। अब कोई इसे बीमारू राज्य नहीं कह सकता। प्रदेश लगातार छह वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बना हुआ है। भारत सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रदेश लगातार पहले या दूसरे स्थान पर रहता है।

 

मिशन कर्मयोगी और आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर भी यूपी नंबर-1

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मिशन कर्मयोगी के तहत आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर क्षमता निर्माण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पहले काफी पीछे था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों से अब देश में पहले स्थान पर है। यह हमारे प्रशासनिक तंत्र की कार्यक्षमता का प्रमाण है। विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश के विजन को लेकर प्रदेशभर में व्यापक संवाद अभियान चलाया गया। विधानमंडल से लेकर गांवों की चौपाल तक चर्चा हुई। 300 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों और पूर्व अधिकारियों ने विभिन्न वर्गों के बीच जाकर संवाद किया। प्रदेश सरकार के पोर्टल पर 98 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनके आधार पर विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया।

 

तकनीक ने खत्म किया भ्रष्टाचार, गरीब को मिला अधिकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी आधारित सुधारों ने आमजन के जीवन में बड़ा बदलाव किया है। राशन वितरण में ई-पॉस मशीनें लागू होने से शिकायतें समाप्त हो गईं और गरीबों को उनका पूरा अधिकार मिलने लगा। पहले राशन व्यवस्था में भ्रष्टाचार होता था, लेकिन अब पारदर्शिता आई है और जनता संतुष्ट है। गन्ना किसानों को पहले पर्ची, ब्लैक मार्केटिंग और घटतौली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब मोबाइल पर ही पूरी जानकारी उपलब्ध हो जाती है। डीबीटी व्यवस्था लागू होने से पेंशन और अन्य योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंच रहा है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है।

 

इन्फ्रास्ट्रक्चर में यूपी बना देश का अग्रणी राज्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश में सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाला राज्य है। देश के लगभग 60 प्रतिशत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं। फोर लेन और सिक्स लेन सड़क नेटवर्क तेजी से विकसित हुआ है। मेट्रो, एयरपोर्ट, रैपिड रेल, इनलैंड वॉटरवे जैसी परियोजनाएं उत्तर प्रदेश की नई पहचान बन चुकी हैं और यह सब डबल इंजन सरकार की ताकत का परिणाम है।

 

इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, मुख्य सचिव एसपी गोयल, पूर्व मुख्य सचिव आर. रमणी, अतुल गुप्ता, आलोक रंजन, अनूप चंद्र पांडेय, दुर्गा शंकर मिश्र, मनोज कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में प्रदेश के सेवारत एवं सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी और प्रशिक्षु अधिकारी मौजूद रहे।

ई-रिक्शा को बंद करने वाली ऐप्स के खिलाफ एक्शन! Google और Apple को 7 ऐप हटाने का नोटिस

E-Rickshaw Shutdown App: ई-रिक्शा को बंद करने वाली दो ऐप्स के खिलाफ एक्शन लिया गया है। सरकार ने गूगल एंड्रॉयड और ऐपल से BAT BMS जैसे लगभग 7 ऐप्स को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने को कहा है। आरोप है कि इन ऐप्स का गलत इस्तेमाल करके ई-रिक्शा और दूसरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी को बंद किया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने गूगल एंड्रॉयड और एप्पल आईओएस को नोटिस भेजा है। मंत्रालय ने दोनों कंपनियों से कहा है कि वे अपने ऐप स्टोर से ऐसे सात ऐप हटा दें, जिनका गलत तरीके से ई-रिक्शा और दूसरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी बंद करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

ई-रिक्शा को बंद करने वाली ऐप्स के खिलाफ एक्शन

बता दें कि पिछले 2-3 दिन से सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोग चाइनीज ऐप की मदद से सड़क चलते ई-रिक्शा को बंद कर रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया था और अब दो ऐप्स के खिलाफ एक्शन लेने की जानकारी सामने आई है। इसे देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। सूत्रों का कहना है कि जिन ऐप्स की पहचान की गई है, उनमें BAT-BMS, SMART BMS और LOSSIGY जैसे ऐप शामिल हैं।

सरकार ने भेजा नोटिस

हाल के दिनों में कई ई-रिक्शा चालकों ने शिकायत की थी कि उनकी गाड़ियां चलते-चलते अचानक बंद हो रही हैं, जिससे उनके काम पर असर पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ ऐप्स का गलत इस्तेमाल करके ई-रिक्शा की बैटरी को बंद किया जा रहा था। इससे न सिर्फ गाड़ियों का संचालन प्रभावित हो रहा था, बल्कि चालकों और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई थी। इन शिकायतों के बाद केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया। जांच में ऐप्स के गलत इस्तेमाल की आशंका सामने आने पर अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच शुरू की और स्थिति को सुधारने के लिए जरूरी कदम उठाए।

सामने आई ये जानकारी

इस मामले पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि कुछ ऐसे ऐप्स सरकार के ध्यान में आए थे, जिनका गलत इस्तेमाल हो रहा था। उन्होंने बताया कि उन ऐप्स को ऐप स्टोर से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि ऐप स्टोर की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि लोगों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले ऐप किसी भी तरह से सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा न बनें और उनका इस्तेमाल गैर-कानूनी कामों में न हो। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस मुद्दे पर ऐप स्टोर चलाने वाली कंपनियों से बात करेगी, ताकि भविष्य में ऐसे नुकसान पहुंचाने वाले ऐप्स लोगों तक न पहुंच सकें।

भारत में इलेक्ट्रिक रिक्शा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कम खर्च और पर्यावरण के लिए बेहतर होने की वजह से ये शहरों और छोटे कस्बों में लोगों के आने-जाने का अहम साधन बन गए हैं। स्मार्टफोन और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऐसे खतरनाक ऐप्स से बचाव की जरूरत भी बढ़ गई है, जो गाड़ियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं या धोखाधड़ी का जरिया बन सकते हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक यह नहीं बताया है कि ये ऐप्स तकनीकी रूप से कैसे काम करते थे।

जिस आवाज़ पर देश झूमा, वही सुनना भूल गई | Alka Yagnik | Hearing Loss | Padma Bhushan

जिस आवाज़ ने चार दशकों तक करोड़ों भारतीयों की मोहब्बत, खुशियों और यादों को सुर दिए, उसी आवाज़ को एक Rare Viral Attack के बाद सुनने में दिक्कत होने लगी। अल्का याज्ञनिक सिर्फ़ 6 साल की थी जब उन्होंने गाना शुरू किया और भारत की सबसे प्रतिष्ठित पार्श्व गायिकाओं में से एक बनी।

इस साल उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

आपको अल्का याज्ञनिक का कौन सा गाना सबसे ज्यादा पसंद हैं कमेंट में जरूर बताये।

@therealalkayagnik

जिस आवाज़ पर देश झूमा, वही सुनना भूल गई | Alka Yagnik | Hearing Loss | Padma Bhushan

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Income Tax Return: अगर आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो है तो भी न करें ये भूल! इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

नौकरीपेशा लोगों के बीच अक्सर यह आम धारणा होती है कि अगर उनके फॉर्म 16 में कोई टैक्स नहीं कटा है या फिर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती है तो उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक फॉर्म 16 में टैक्स लायबिलिटी निल होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको आईटीआर दाखिल करने से छूट मिल गई है। ऐसा न करना आपको भारी पड़ सकता है।

फॉर्म 16 नहीं है आपकी वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर

King Stubb & Kasiva, Advocates and Attorneys के पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य का कहना है कि एक आम गलतफहमी यह है कि अगर फॉर्म 16 में कोई टीडीएस या देय टैक्स नहीं है तो आईटीआर फाइल करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, फॉर्म 16 सिर्फ इंप्लॉयर द्वारा भुगतान किए गए वेतन और काटे गए टैक्स (अगर कोई है तो) का एक रिकॉर्ड है। यह किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय तस्वीर को नहीं दर्शाता है। आईटीआर फाइल करने की अनिवार्यता इनकम टैक्स एक्ट के प्रावधानों, आपकी कुल आय और वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए वित्तीय लेनदेन पर निर्भर करती है।

इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

भले ही आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो दिख रहा हो लेकिन नीचे दी गई स्थितियों और फायदों के लिए आपको आईटीआर जरूर दाखिल करना चाहिए-

1- टैक्स रिफंड का दावा करने के लिए

कई बार ऐसा होता है कि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर टीडीएस काट लेते हैं या फिर नौकरी बदलने की स्थिति में पिछला इंप्लॉयर नौकरी छोड़ने से पहले टैक्स काट लेता है। भले ही वित्तीय वर्ष के अंत में आपकी कुल अंतिम टैक्स देनदारी शून्य ही क्यों न हो, लेकिन इस कटे हुए एक्स्ट्रा टैक्स को वापस पाने का एकमात्र जरिया आईटीआर है। बिना रिटर्न फाइल किए आप रिफंड क्लेम नहीं कर सकते।

2- वित्तीय घाटे को आगे बढ़ाने के लिए

अगर आप शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी से कोई कैपिटल लॉस उठाते हैं तो नियमों के तहत आप इस घाटे को भविष्य के मुनाफे के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। यह लाभ आपको तभी मिलेगा जब आप निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना आईटीआर दाखिल करेंगे। डेडलाइन चूकने का मतलब है कि आप इस मूल्यवान टैक्स लाभ को हमेशा के लिए खो देंगे।

3- इन विशेष सरकारी शर्तों/नियमों को पूरा करने के लिए

टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार भले ही आपका अंतिम टैक्स शून्य हो लेकिन अगर आप वित्तीय वर्ष में निम्नलिखित में से किसी भी शर्त के दायरे में आते हैं तो आपके लिए आईटीआर फाइल करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है:

  • एक या अधिक सेविंग्स बैंक अकाउंट्स में 50 लाख रुपये से अधिक जमा करना।
  • एक या अधिक करंट अकाउंट्स (चालू खातों) में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक जमा करना।
  • अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च करना।
  • एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल चुकाना।
  • अगर आप भारत के निवासी हैं और विदेशों में संपत्ति रखते हैं, किसी विदेशी संस्था में वित्तीय हित रखते हैं, विदेशी बैंक खाते में हस्ताक्षर करने का अधिकार रखते हैं या विदेशी संपत्तियों के लाभार्थी हैं।
  • वर्ष के दौरान कुल टीडीएस (TDS) या टीसीएस (TCS) 25000 रुपये या उससे अधिक हो (वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 50000 रुपये है)।
  • ऐसे प्रोफेशनल्स जिनकी कुल प्राप्तियां 10 लाख रुपये से अधिक हैं, भले ही उनकी टैक्स योग्य आय बुनियादी छूट सीमा से कम ही क्यों न हो।

4- लोन और वीजा के लिए पुख्ता इनकम प्रूफ

‘दिनेश आर्जव एंड एसोसिएट्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स’ की पार्टनर और एनआरआई टैक्स एक्सपर्ट प्रियल गोयल जैन कहती हैं कि कंप्लायंस के नजरिए से परे आपका आईटीआर चुपचाप आपके लिए दूसरी जगहों पर भी बहुत काम करता है। बैंक और वीजा कार्यालय अक्सर आय के प्रमाण के रूप में इसी दस्तावेज को मांगते हैं। इसलिए रिकॉर्ड में आईटीआर का होना बेहद फायदेमंद है, भले ही तकनीकी रूप से आपके लिए इसे फाइल करना जरूरी न रहा हो।

ऐसे में फॉर्म 16 में जीरो टैक्स देखकर आईटीआर न भरने की धारणा नुकसानदेह हो सकती है। ‘AQUILAW’ की लीड कंसलटेंट (टैक्स) – IDT डिंपल जोगानी के मुताबिक, फाइलिंग की आवश्यकता को नजरअंदाज करने से टैक्सपेयर्स न सिर्फ अपना रिफंड खो सकते हैं बल्कि नुकसान को कैरी फारवर्ड करने का मौका भी गंवा सकते हैं। अगर आयकर विभाग बाद में यह पाता है कि आपके लिए फाइलिंग अनिवार्य थी तो आपको स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भी मिल सकता है। मामले के तथ्यों के आधार पर लेट फाइलिंग फीस, ब्याज या अन्य परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने अब ऐसी गलतफहमियों की गुंजाइश को खत्म कर दिया है। इंप्लॉयर, बैंकों, म्यूचुअल फंडों, स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाली जानकारी अब टैक्सपेयर के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में दिखाई देती है। इसके जरिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके द्वारा किए गए वित्तीय लेनदेन की तुलना आपके रिटर्न में घोषित आय से आसानी से कर लेता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह: सिर्फ फॉर्म 16 पर न रहें निर्भर

जैसे-जैसे टैक्स फाइलिंग का सीजन तेज हो रहा है विशेषज्ञ टैक्सपेयर्स को सलाह देते हैं कि वे ‘जीरो टीडीएस’ को ‘जीरो कंप्लायंस’ समझने की भूल न करें। सिर्फ फॉर्म 16 पर निर्भर रहने की बजाय, व्यक्तियों को अपनी आय के सभी स्रोतों की समीक्षा करनी चाहिए। अपने फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की जांच करनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे आईटीआर फाइल करने की शर्तों के दायरे में आते हैं या नहीं।

त्योहार-शादी के सीजन में देश में हो सकती है चांदी की कमी, भाव 100 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है

अगर इंपोर्ट पर पाबंदी जारी रहती है तो देश में त्योहारों और शादी के सीजन में चांदी की कमी हो सकती है। आगे चांदी की डिमांड बढ़ने की संभावना है। मेटल्स फोकस में सीनियर कंसल्टेंट (साऊथ एशिया एंड मिडिल ईस्ट) हर्षल बरोट ने यह अनुमान जताया।

ज्यादातर तरह के सिल्वर के लिए लाइसेंस जरूरी

ज्यादातर एचएस कोड्स के तहत अभी सिल्वर के इंपोर्ट के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) से लाइसेंस जरूरी है। इसके चलते सिल्वर की नई सप्लाई हासिल करना मुश्किल हो गया है। इस वजह घरेलू बाजार की निर्भरता मौजूदा इनवेंट्रीज पर रिसाइक्ल्ड सिल्वर पर बढ़ गई है। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में भी बिकवाली बढ़ी है। इससे प्रीमियम करीब 10 फीसदी रह गया है।

चांदी के पुराने स्टॉक से फिलहाल चल रहा काम

बारोट ने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कहा, “मार्केट में सप्लाई कम है। नया मेटल उपलब्ध नहीं है। इसलिए मार्केट पहले से मौजूद स्टॉक से काम चला रहा है। कुछ रिसाइकल्ड सिल्वर बाजार में आ रहा है। लेकिन, नया इंपोर्ट अभी बहुत कम हो रहा है।” फिलहाल इसका ज्यादा असर नहीं दिख रहा, क्योंकि यह कमजोर डिमांड वाला सीजन है। लेकिन, अगस्त से हालात बदल सकते हैं। इसकी वजह यह है कि आम तौर पर त्योहार और शादी के सीजन से पहले खरीदारी शुरू हो जाती है।

अगस्त-सितंबर के बाद बढ़ने लगेगी चांदी की डिमांड

उन्होंने कहा, “हमें अगस्त-सितंबर के बाद डिमांड शुरू हो जाने की उम्मीद है। आम तौर पर तब भारत में त्योहारों और शादी का सीजन शुरू हो जाता है।” उन्होंने कहा कि अगर तब तक इंपोर्ट शुरू नहीं होता है तो मार्केट में असाधारण स्थिति बन सकती है। तब डिमांड ज्यादा होगी, लेकिन सप्लाई कम होगी। उन्होंने बताया कि ट्रेडर्स इंपोर्ट के वैकल्पिक रास्तों के बारे में सोच रहे हैं। इनमें सिल्वर डोर की सोर्सिंग शामिल है। अगर इंपोर्ट शुरू हो जाता है तो घरेलू प्रीमियम घट सकता है।

अगले साल 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है सिल्वर

अभी चांदी की घरेलू मांग कम है, लेकिन कीमतों में तेजी के बावजूद इंडस्ट्रियल मांग स्ट्रॉन्ग है। बारोट ने कहा कि इनवेस्टर्स सिल्वर को लेकर बुलिश हैं। ईटीएफ में कुछ बिकवाली के बावजूद चांदी में बड़ी बिकवाली देखने को नहीं मिली है। मेटल फोकस का मानना है कि अगले साल सिल्वर की कीमतों में तेजी दिखेगी। अगले 12 महीनों में सिल्वर की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर पिछले साल की तरह डिमांड मजबूत रहती है तो चांदी 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।

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E20 Petrol: क्या सच में एथेनॉल वाले पेट्रोल से कम हो जाता है गाड़ी का माइलेज और खराब होता है इंजन? इस डिटेल FAQ में हर सवाल का जवाब

देश में इस समय एथेनॉल और E20 पेट्रोल की काफी चर्चा हो रही है। E20 फ्यूल का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत साधारण पेट्रोल मिला होता है। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई कह रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है, तो कोई दावा कर रहा है कि इससे गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि E20 बनाने में हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है।

वहीं इन दावों पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी जारी करते हुए कहा है कि ये बातें पूरी तरह गलत, बेबुनियाद और वैज्ञानिक तथ्यों से परे हैं। मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल अनुसंधान संस्थानों और वाहन उद्योग से जुड़ी कई रिपोर्टों का हवाला देते हुए इन अफवाहों को खारिज किया है।

  • E20 पेट्रोल क्या है और इसकी इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल एक जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे गन्ना, मक्का और अतिरिक्त चावल जैसी कृषि फसलों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाना और देश में जैव ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

भारत ने दिसंबर 2025 तक पूरे देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया, जबकि यह लक्ष्य पहले 2030 तक पूरा करना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि इसका गाड़ी के इंजन, माइलेज, वारंटी और लंबे समय तक वाहन के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा।

  • क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब होता है या माइलेज कम हो जाता है?

केंद्र सरकार ने उन दावों को गलत बताया है, जिनमें कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है या गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। सरकार ने बताया कि इस विषय पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), इंडियन ऑयल, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (देहरादून) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मिलकर अध्ययन किया था। इसमें अलग-अलग तरह के वाहनों पर E20 पेट्रोल की जांच की गई।

स्टडी के अनुसार, कारों पर 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक किए गए टेस्च में इंजन की एफिशिएंसी, गाड़ी स्टार्ट होने या धातु और प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई बड़ी समस्या नहीं मिली। हालांकि, कुछ पुराने मॉडल की गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों और गैस्केट को पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

केंद्र सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल, सामान्य पेट्रोल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम करता है। सरकार के अनुसार, इथेनॉल की ऑक्टेन क्षमता अधिक होने के कारण ई20 के लिए तैयार किए गए वाहनों में इंजन की नॉकिंग कम होती है, गाड़ी की रफ्तार बेहतर होती है और ड्राइविंग का अनुभव भी अच्छा रहता है।

माइलेज को लेकर सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल से बहुत ज्यादा माइलेज घटने की बातें सही नहीं हैं। मंत्रालय के मुताबिक, किसी भी गाड़ी का माइलेज सिर्फ ईंधन पर नहीं, बल्कि चलाने के तरीके, टायर में सही हवा, समय पर सर्विस और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि रेसिंग कारों में लंबे समय से इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इससे गाड़ी का प्रदर्शन बेहतर होता है और इंजन की नॉकिंग कम होती है। उन्होंने माना कि माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसके बारे में पहले से ही साफ जानकारी दी गई है।

  • क्या E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या वारंटी खत्म हो जाएगी?

केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या कंपनी की वारंटी खत्म नहीं होती। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, बीमा कंपनियों और वाहन बनाने वाली कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि अगर वाहन कंपनी के तय मानकों के अनुसार ई20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त है, तो इस ईंधन के इस्तेमाल से बीमा या वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) का भी हवाला दिया है। सियाम के अनुसार, ई20 पेट्रोल के अनुकूल वाहनों पर कंपनी की वारंटी पहले की तरह लागू रहेगी और ग्राहकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

  • क्या इथेनॉल बनाने में बहुत ज़्यादा पानी का इस्तेमाल होता है?

सरकार का कहना है कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा सही नहीं है। सरकार के मुताबिक, धान की खेती में इस्तेमाल होने वाले पूरे पानी को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना गलत है, क्योंकि धान और गेहूं की खेती सबसे पहले देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है। जब जरूरत से ज्यादा चावल बच जाता है, तभी उसका इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जाता है।

सरकार का यही कहना गन्ने के मामले में भी है। उसके अनुसार, पहले देश में चीनी की जरूरत पूरी की जाती है और उसके बाद ही अतिरिक्त गन्ने या उससे बने कच्चे माल का उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए किया जाता है।

सरकार ने यह भी बताया कि अब इथेनॉल बनाने में मक्के को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि मक्का उगाने में धान के मुकाबले काफी कम पानी लगता है। फिलहाल इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में मक्के की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।

सरकार के अनुसार, इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया के दौरान एक लीटर इथेनॉल तैयार करने में आमतौर पर केवल 3 से 5 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा कई आधुनिक कारखानों में पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक अपनाई जाती है, जिससे पानी की खपत और भी कम हो जाती है।

  • EBP प्रोग्राम से क्या फायदे हुए हैं?

सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना से देश को आर्थिक और पर्यावरण दोनों स्तर पर बड़े फायदे हुए हैं। सरकार के मुताबिक, साल 2014-15 के बाद इस योजना की वजह से 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई गई है। साथ ही किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन कम हुआ है और 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल की जगह इथेनॉल का इस्तेमाल किया गया है। इससे पेट्रोलियम पर देश की निर्भरता घटाने में भी मदद मिली है।

सरकार ने यह भी बताया कि इथेनॉल उत्पादन की सालाना क्षमता 2013-14 में करीब 38 करोड़ लीटर थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और वाहन कंपनियों से चर्चा के बाद संबंधित विशेषज्ञ संस्था की मंजूरी मिल जाएगी।

एक्स ओरेकल बेंगलुरु के एम्प्लोयी को ऐसे मिला MBA डिग्री का फायदा, 25 हजार से सीधा 1 लाख हुई सैलरी

ओरेकल के पूर्व कर्मचारी प्रदीप कन्नन अपने करियर को कॉर्पोरेट भूमिका से एंटरप्रेन्योरशिप की ओर ले जाने का श्रेय अपने MBA को देते हैं। उनका कहना है कि इस डिग्री ने उन्हें ज़रूरी बिजनेस समझ और एक मजबूत आधार दिया, साथ ही उनकी सैलरी को भी ₹25,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख प्रति माह कर दिया। आजकल मुफ्त में सीखने के कई आधुनिक साधन मौजूद होने के बावजूद, कन्नन इस बात पर ज़ोर देते हैं कि MBA का उनकी ज़िंदगी की दिशा और एंटरप्रेन्योरशिप के सफ़र पर एक खास असर रहा है।

क्या एक डिग्री आपके करियर की दिशा पूरी तरह बदल सकती है? ऐसे समय में जब AI, YouTube और पॉडकास्ट की वजह से बिज़नेस से जुड़ी जानकारी पहले से कहीं ज़्यादा आसानी से मिल रही है, कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या MBA में निवेश करना अब भी फ़ायदेमंद है।

Oracle बेंगलुरु के पूर्व कर्मचारी प्रदीप कन्नन के लिए, इसका जवाब उनके अपने अनुभव से मिलता है। X पर शेयर की गई एक पोस्ट में, उन्होंने बताया कि कैसे MBA ने न सिर्फ उनकी महीने की सैलरी 25,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी, बल्कि उन्हें कॉर्पोरेट जिंदगी छोड़कर एंटरप्रेन्योर बनने का आत्मविश्वास और बिजनेस की समझ भी दी।

उन्होंने लिखा, “अगर मैंने MBA नहीं किया होता, तो मैं एंटरप्रेन्योर नहीं बन पाता। जब मैंने 2010 में MBA शुरू किया था, तब मुझे बिजनेस की कोई समझ नहीं थी। मैं दक्षिण भारत के एक टियर-3 शहर से आया था।”

कन्नन ने बताया कि MBA से उन्हें पहली बार असल में समझ आया कि बिजनेस कैसे काम करते हैं। बिजनेस स्कूल में जाने से पहले, उन्हें एंटरप्रेन्योरशिप या बिजनेस मैनेजमेंट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उन्होंने आगे कहा, “MBA मेरे लिए यह समझने का पहला मौका था कि बिजनेस असल में कैसे काम करते हैं। इसने मुझे एक ऐसा आधार दिया जो मैं कहीं और नहीं बना सकता था। मेरी सैलरी ₹25,000 प्रति माह से बढ़कर ₹1 लाख प्रति माह हो गई।”

हालांकि सैलरी में चार गुना बढ़ोतरी एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन कन्नन का कहना है कि असली बदलाव उनकी सोच में आया। उन्होंने 2010 के सीखने के माहौल की तुलना आज उपलब्ध मौकों से भी की।

उन्होंने आगे कहा, “आज, 2026 में, आप लगभग सब कुछ ऑनलाइन सीख सकते हैं। AI आपको स्ट्रेटेजी सिखा सकता है। YouTube आपको फाइनेंस सिखा सकता है। पॉडकास्ट आपको मार्केटिंग सिखा सकते हैं। लेकिन 2010 में, ऐसी दुनिया नहीं थी। कई लोगों के लिए, MBA बस एक और डिग्री थी। मेरे लिए, इसने मेरी जिंदगी की दिशा बदल दी।”

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, कन्नन ने कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करना जारी रखा और फिर 2019 में एक अलग रास्ता चुनने का फैसला किया। उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और ‘द फालूदा शॉप’ (The Falooda Shop) शुरू किया, जो पारंपरिक भारतीय ड्रिंक्स से प्रेरित एक डेज़र्ट ब्रांड है।

जो एक छोटा सा बिज़नेस शुरू हुआ था, वह अब लगभग ₹9 करोड़ की वैल्यू वाले बिज़नेस में बदल गया है। यह ब्रांड अब भारत और दुबई में 18 से ज्यादा आउटलेट चलाता है, जहां कई तरह के फालूदा, मिल्कशेक और डेजर्ट मिलते हैं।

कल का मौसम 4 जुलाई: राजस्थान-MP से यूपी-बिहार, बंगाल तक मौसम का रौद्र रूप, IMD ने इन 25 से ज्यादा जगहों पर भारी बारिश का अलर्ट दिया

देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने पूरे शबाब पर आ चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून की उत्तरी सीमा इस समय जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार और बठिंडा से होकर गुजर रही है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी ओडिशा व पश्चिम बंगाल के तटों पर एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इसके साथ ही समुद्र तल पर दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तट तक ऑफ-शोर ट्रफ और मध्य क्षोभमंडल में पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। इन मजबूत मौसमी प्रणालियों के असर की वजह से मौसम विभाग ने 4 जुलाई को देश के 25 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से अत्यंत भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज अंधड़ का ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है।

5 राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 4 जुलाई को देश के पांच प्रमुख राज्यों में मानसून का सबसे रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। यहां छिटपुट स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है-

  • गुजरात (गुजरात क्षेत्र, सौराष्ट्र और कच्छ)
  • कोंकण और गोवा
  • मध्य महाराष्ट्र
  • ओडिशा
  • पश्चिमी मध्य प्रदेश

इन राज्यों में होगी बहुत भारी बारिश

आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक 4 जुलाई को कुछ राज्यों में मूसलाधार यानी बहुत भारी बारिश दर्ज की जाएगी:

  • पूर्वी राजस्थान
  • पूर्वी मध्य प्रदेश
  • विदर्भ
  • तेलंगाना
  • तटीय कर्नाटक

उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी-राजस्थान में आंधी और बिजली का अलर्ट

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में कल मौसम का मिजाज काफी बदला हुआ रहेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। 4 से 7 जुलाई के दौरान यहां छिटपुट से लेकर बिखरी हुई बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी राजस्थान में 4 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी जबकि पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके साथ ही पूर्वी राजस्थान में 40-50 किमी प्रति घंटे और पश्चिमी राजस्थान में 4-9 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से धूलभरी हवाएं और अंधड़ चलने की आशंका है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पंजाब-हरियाणा में 4 जुलाई को गरज-चमक के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने का अलर्ट है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 3-5 जुलाई के दौरान छिटपुट से बिखरी हुई बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में 4 जुलाई को छिटपुट बारिश होगी जबकि उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।

मध्य और पूर्वी भारत: मध्य प्रदेश-बिहार में तेज अंधड़ की चेतावनी

मध्य प्रदेश के दोनों हिस्सों (पूर्वी व पश्चिमी) और विदर्भ में 4 जुलाई को भारी से अत्यंत भारी बारिश के साथ ही 30-40 किमी प्रति घंटे (झोंके 50 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तेज आंधी चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। छत्तीसगढ़ में 4 जुलाई को छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। बिहार में 3-9 जुलाई तक छिटपुट बारिश का दौर रहेगा लेकिन 4 जुलाई को राज्य में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली कड़कने का अलर्ट है। झारखंड में 4 जुलाई को मध्यम से तीव्र बिजली गिरने की गतिविधि और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

गंगीय पश्चिम बंगाल में 4 जुलाई को भारी बारिश होगी। इसके साथ ही उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और गंगीय पश्चिम बंगाल में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से अंधड़ चलने की चेतावनी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भारी बारिश के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की हवाएं चलेंगी।

उत्तर-पूर्व भारत: असम-मेघालय सहित सातों राज्यों में भारी वर्षा

उत्तर-पूर्व के राज्यों में मानसूनी हवाएं लगातार नमी ला रही हैं। असम और मेघालय में 4 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। साथ ही 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा इन चारों राज्यों में 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की प्रबल संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में 4 जुलाई को छिटपुट स्थानों पर बिजली गिरने और आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है।

दक्षिण भारत: कर्नाटक में मजबूत सतही हवाएं और मूसलाधार बारिश

तटीय कर्नाटक में बहुत भारी बारिश और आंतरिक कर्नाटक (उत्तरी व दक्षिणी) में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके अलावा पूरे कर्नाटक में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से धूलभरी आंधी चलेगी और तटीय व आंतरिक हिस्सों में तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी है। केरल, माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 4 जुलाई को भारी बारिश होगी। तमिलनाडु में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। तटीय आंध्र प्रदेश में भारी बारिश होगी। रायलसीमा और लक्षद्वीप में 4 जुलाई को तेज सतही हवाएं चलेंगी जबकि तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से अंधड़ चलने का अलर्ट है।

समंदर में जाने वाले मछुआरों के लिए रेड वॉर्निंग

खराब मौसम और तूफानी हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को समंदर में न उतरने की सख्त हिदायत दी है-

अरब सागर: सोमालिया तट, ओमान तट, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर और मध्य व उत्तरी अरब सागर में 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से डरावनी हवाएं चलेंगी। इसके अलावा गुजरात, कोंकण, गोवा, कर्नाटक और केरल के तटों तथा लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी मौसम रहेगा।

बंगाल की खाड़ी: मध्य और उससे सटे दक्षिणी बंगाल की खाड़ी, दक्षिण श्रीलंका और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। वहीं गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तरी और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों, उत्तरी व मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से ऊंची लहरें और तूफानी मौसम रहने का अनुमान है।

RailOne App का बड़ा कमाल, AI बताएगा वेटिंग टिकट कन्फर्म होगी या नहीं

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भारतीय रेलवे का डिजिटल टिकटिंग सिस्टम अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और आधुनिक हो गया है। वर्ष 1986 में शुरू हुई रेलवे आरक्षण प्रणाली में पिछले चार दशकों के दौरान कई छोटे-बड़े बदलाव हुए, लेकिन अब इसे अत्याधुनिक तकनीक के साथ पूरी तरह अपग्रेड कर दिया गया है। नई व्यवस्था से न केवल टिकट बुकिंग आसान हुई है, बल्कि इसकी क्षमता भी कई गुना बढ़ाई गई है।

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88% टिकट अब ऑनलाइन बुक हो रहे

भारतीय रेलवे ने वर्ष 2002 में इंटरनेट आधारित टिकट बुकिंग सेवा शुरू की थी। आज स्थिति यह है कि अधिकांश यात्री टिकट काउंटर की बजाय ऑनलाइन टिकट बुक करना पसंद करते हैं। वर्तमान में देश में कुल टिकट बुकिंग की करीब 88 प्रतिशत मांग ऑनलाइन माध्यमों से पूरी हो रही है।

RailOne App तेजी से बन रहा यात्रियों की पहली पसंद

भारतीय रेलवे का RailOne मोबाइल ऐप यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले साल जुलाई में लॉन्च किए गए इस ऐप को एक साल से भी कम समय में 3.5 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ टिकट बुकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे से जुड़ी लगभग सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। टिकटिंग या अन्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों का समाधान भी इसी ऐप के जरिए किया जा सकता है।

AI बताएगा वेटिंग टिकट कन्फर्म होगी या नहीं

 

RailOne ऐप में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नई सुविधा जोड़ी गई है। टिकट बुक करते समय ऐप यह अनुमान लगाता है कि वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। रेलवे के अनुसार, पहले इस अनुमान की सटीकता करीब 53 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर 94 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया है। यह फीचर इस साल की शुरुआत में शुरू किया गया था और यात्रियों से इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।

एक ही ऐप में मिलती हैं रेलवे की सभी सुविधाएं

RailOne ऐप के जरिए यात्री आरक्षित (Reserved), अनारक्षित (Unreserved) और प्लेटफॉर्म टिकट की बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन और रिफंड जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा ऐप पर लाइव ट्रेन स्टेटस, ट्रेन का टाइम टेबल, प्लेटफॉर्म नंबर, कोच पोजिशन, वेटिंग स्टेटस, Rail Madad के जरिए शिकायत दर्ज करने की सुविधा और यात्रा के दौरान सीट पर खाना ऑर्डर करने जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

रोजाना 9 लाख से ज्यादा टिकट हो रहे बुक

 

रेलवे के अनुसार, देशभर में प्रतिदिन 9.29 लाख से अधिक टिकट RailOne ऐप के जरिए बुक किए जा रहे हैं। इनमें लगभग 7.20 लाख अनारक्षित (Unreserved) और 2.09 लाख आरक्षित (Reserved) टिकट शामिल हैं। अनारक्षित टिकटों में प्लेटफॉर्म टिकट भी शामिल हैं।  अब तक इस ऐप को Google Play Store से 3.16 करोड़ और Apple iOS डिवाइस पर 33.17 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

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यात्रियों को मिल रही 43% तक सब्सिडी

भारतीय रेलवे देश के करोड़ों लोगों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे ने यात्री किराए पर 60,239 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी। इसका मतलब है कि प्रत्येक यात्री को औसतन 43 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है। यानी यदि किसी यात्रा की वास्तविक लागत 100 रुपए है, तो यात्री को उसके लिए औसतन केवल 57 रुपए ही चुकाने पड़ते हैं।