कल का मौसम 5 जुलाई: राजस्थान से MP तक आंधी-तूफान, IMD ने इन 20+ राज्यों में जारी किया भारी बारिश का अलर्ट

देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon 2026) अपनी पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार, बठिंडा से होकर गुजर रही है। अगले 4 दिनों के भीतर मानसून के उत्तरी अरब सागर, गुजरात, राजस्थान के कुछ और हिस्सों तथा पंजाब व हरियाणा के बाकी बचे इलाकों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं। इस सक्रिय मानसूनी सिस्टम के प्रभाव से मौसम विभाग ने 5 जुलाई को देश के 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से अत्यंत भारी बारिश, आकाशीय बिजली गिरने और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है।

इन 4 राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट

मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 5 जुलाई को देश के चार राज्यों में बादलों का रौद्र रूप देखने को मिलेगा। यहां छिटपुट स्थानों पर मूसलाधार से लेकर अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है-

  • गुजरात
  • कोंकण और गोवा
  • मध्य महाराष्ट्र
  • ओडिशा

मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत इन राज्यों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी

आईएमडी के मुताबिक, 5 जुलाई को कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है:

  • मध्य प्रदेश
  • पूर्वी राजस्थान
  • छत्तीसगढ़
  • विदर्भ
  • उत्तराखंड
  • गंगीय पश्चिम बंगाल
  • तटीय कर्नाटक
  • दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक

इन 10 राज्यों/क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट

देश के कई अन्य हिस्सों में भी 5 जुलाई को भारी बारिश का दौर देखने को मिलेगा:

उत्तर प्रदेश और बिहार से सटे राज्य झारखंड में भारी बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में भी भारी बारिश का अलर्ट है। केरल और माहे, तेलंगाना और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश होगी। महाराष्ट्र के मराठावाड़ा क्षेत्र में भारी बारिश का अलर्ट है। असम और मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश का अनुमान है।

दिल्ली-पंजाब से राजस्थान और एमपी तक आंधी-तूफान और बिजली का कहर

मौसम विभाग ने देश के बड़े हिस्से में बारिश के साथ-साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है।

उत्तर-पश्चिम भारत: हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, तथा जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में गरज-चमक के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने और बिजली गिरने की आशंका है। उत्तराखंड में भी बिजली गिरने की चेतावनी है।

मध्य और पूर्वी भारत: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के मध्य महाराष्ट्र व मराठावाड़ा क्षेत्र, झारखंड, और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और बिजली कड़कने का अलर्ट है। बिहार और विदर्भ में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

दक्षिण भारत और अन्य क्षेत्र: तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में भी 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट है। इसके अलावा गुजरात क्षेत्र में भी बिजली गिरने की संभावना है।

कर्नाटक, केरल और रायलसीमा में तेज सतही हवाएं

बारिश और आंधी के अलावा, आईएमडी ने कर्नाटक, केरल व माहे और रायलसीमा में अलग-अलग स्थानों पर बेहद मजबूत सतही हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है।

उत्तर-पूर्व और यूपी में भारी उमस, अरुणाचल में गर्म दिन का अलर्ट

मौसम के इस उतार-चढ़ाव के बीच कुछ राज्यों को भारी उमस और गर्मी का सामना करना पड़ेगा। असम व मेघालय, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर मौसम काफी गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में मौसम विभाग ने कुछ जगहों पर गर्म दिन रहने की आशंका जताई है।

समंदर में जाने वाले मछुआरों के लिए चेतावनी

अरब सागर: सोमालिया तट, ओमान तट, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों, उत्तरी अरब सागर के कुछ हिस्सों और मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों में 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी। यही स्थिति महाराष्ट्र और गोवा के तटों पर भी रहेगी। इसके अलावा गुजरात, कोंकण व गोवा, कर्नाटक, केरल के तटों और लक्षद्वीप क्षेत्र व उससे सटे पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्वी अरब सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से मौसम खराब रहेगा।

बंगाल की खाड़ी: मध्य बंगाल की खाड़ी के हिस्सों में 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी। वहीं गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा के तटों, आंध्र प्रदेश, उत्तरी व मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे दक्षिणी बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों तथा अंडमान सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी मौसम रहने का अनुमान है। मछुआरों को इन इलाकों में न जाने की सलाह दी गई है।

वैभव सूर्यवंशी बने सबसे कम उम्र में टीम इंडिया के लिए खेलने वाले खिलाड़ी

वैभव सूर्यवंशी के लिए आखिरकार वह घड़ी आ गई जिसका भारतीय फैंस 25 जून से इंतजार कर रहे थे। वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में भारत के लिए खेलने वाले क्रिकेटर बन गए हैं। मैनचेस्टर में होने वाले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच से पहले तिलक वर्मा ने उनको भारतीय कैप दी।भारतीय विकेटकीपर संजू सैमसन को उनकी जगह खाली करनी पड़ी है।इससे पहले वैभव सूर्यवंशी आयरलैंड की दो टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज में टीम में शामिल थे लेकिन उनको अंतिम ग्यारह में मौका नहीं मिला था।

महज 15 वर्ष और 99 दिन की उम्र में वैभव सूर्यवंशी राष्ट्रीय टीम में जगह पाने वाले सबसे युवा क्रिकेटर बन गए हैं। उन्होंने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का वर्षों पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।हालांकि सचिन तेंदलुकर के जमाने में टी-20 अंतरराष्ट्रीय प्रारुप नदारद था।यही नहीं वैभव सूर्यवंशी ने महिला क्रिकेटर शेफाली वर्मा से पहले इस प्रारुप में युवा एंट्री ली है। शेफाली वर्मा ने जब 2019 में डेब्यू टी-20 खेला था तो वह 15 साल 239 दिनों की थी। वहीं सचिन तेंदुलकर ने जब अपना पहला टेस्ट खेला तो वह 16 साल 205 दिनों के थे।

इस युवा बल्लेबाज ने 2026 आईपीएल सत्र में 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम किया। इस दौरान उन्होंने एक शतक और पांच अर्धशतक जड़े तथा 237.30 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी कर क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा।इसके अलावा सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट (224) के कारण उन्हें सुपर स्ट्राइकर, टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने के कारण उभरते हुए खिलाड़ी का अवार्ड भी दिया गया।

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल सबसे कम गेंदों में 1000 रन पूरे किए। उन्होंने 440 गेंदें खेलीं, जो सबसे तेज हैं।आईपीएल 2026 में सूर्यवंशी ने कुल 135 बाउंड्री लगाईं, जिसमें रिकॉर्ड 72 छक्के शामिल हैं, जो किसी भी टी 20 टूर्नामेंट में किसी भी बल्लेबाज़ द्वारा लगाए गए सबसे ज़्यादा छक्के हैं।

Vaibhav Sooryavanshi Debut: वैभव सूर्यवंशी ने तोड़ा सचिन का रिकॉर्ड, 15 साल की उम्र में किया डेब्यू

Vaibhav Sooryavanshi Debut: भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जाने वाले दूसरे टी20 मुकाबले में युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी डेब्यू करने जा रहे हैं।  इस उपलब्धि के साथ वैभव सबसे कम उम्र में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने 15 साल और 99 दिन की उम्र में डेब्यू कर सचिन तेंदुलकर के सबसे युवा भारतीय डेब्यू का पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।

भारत की प्लेइंग 11: वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेट कीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, हर्षित राणा, अक्षर पटेल, रवि बिश्नोई, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती

इंग्लैंड की प्लेइंग 11: फिलिप सॉल्ट, जोस बटलर (विकेट कीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, लियाम डॉसन, आदिल राशिद, जोफ्रा आर्चर, जोश टंग

‘कोच नहीं सेलेक्टर्स लें विराट-रोहित पर फैसला…’ वर्ल्ड कप 2027 को लेकर कपिल देव का बड़ा बयान

भारतीय टीम 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों में जुट गई है। भारत का वनडे में अगला मुकाबला भारत और इंग्लैंड के बीच 14 जुलाई से खेला जाएगा। वहीं 2027 वनडे विश्व कप में रोहित शर्मा और विराट कोहली के खेलने को लेकर पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने बड़ा बयान दिया है। पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने कहा कि, 2027 वनडे विश्व कप के लिए विराट कोहली और रोहित शर्मा के चयन का फैसला पूरी तरह सेलेक्टर्स को करना चाहिए। उनके मुताबिक, टीम में किस खिलाड़ी को जगह मिलेगी, इसका अंतिम अधिकार सेलेक्टर्स के पास होना चाहिए।

2027 वनडे विश्व कप तक विराट कोहली और रोहित शर्मा की उम्र काफी बढ़ जाएगी। ऐसे में लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या दोनों उस टूर्नामेंट में खेलेंगे। वहीं दोनों ही खिलाड़ी अभी भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनके सामने अपनी फिटनेस और फॉर्म बनाए रखने की चुनौती होगी।

कपिल देव ने क्या कहा

हाल के दिनों में ऐसी चर्चाएं भी सामने आई हैं कि गौतम गंभीर की अगुवाई वाला टीम मैनेजमेंट शायद विराट कोहली और रोहित शर्मा को 2027 वनडे विश्व कप की टीम में नहीं देखना चाहता। इस पर कपिल देव ने इंडिया टुडे से कहा, “देखिए, सबसे अहम भूमिका टीम मैनेजमेंट की नहीं, बल्कि चयन समिति की होती है। पांचों चयनकर्ता अगर किसी खिलाड़ी को टीम के लिए योग्य मानते हैं, तो वही फैसला सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए। इसके बाद ही कप्तान और टीम मैनेजमेंट की राय ली जानी चाहिए। अगर चयनकर्ता अपना काम सही तरीके से कर रहे हैं, तो वही प्रक्रिया सही है।”

रोहित को लेकर क्या कहा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीम मैनेजमेंट वनडे में बाएं और दाएं हाथ के बल्लेबाजों की ओपनिंग जोड़ी को प्राथमिकता देना चाहता है। इसी वजह से रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। कपिल देव ने ये साफ नहीं किया कि वह 2027 वनडे विश्व कप में विराट कोहली और रोहित शर्मा को खेलते देखना चाहते हैं या नहीं। कपिल देव ने कहा, “मुझे नहीं पता कि चयनकर्ताओं की सोच क्या है। कई बार लोग कहते हैं कि 25 साल का खिलाड़ी कैसे संन्यास ले सकता है, लेकिन ऐसा होता है। वहीं अगर कोई खिलाड़ी 39 या 40 साल की उम्र में भी पूरी तरह फिट है, उसमें काबिलियत है और वह अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो उसे खेलने से क्यों रोका जाए?”

उन्होंने आगे कहा, “उम्र को नहीं, बल्कि प्रदर्शन को महत्व देना चाहिए। हां, उम्र बढ़ने के साथ एक मुश्किल ये होती है कि अगर अनुभवी खिलाड़ी खराब दौर से गुजरता है तो लोग तुरंत कहने लगते हैं कि उसका समय खत्म हो गया। जबकि यही स्थिति किसी युवा खिलाड़ी के साथ हो, तो लोग उसे वापसी का मौका देने की बात करते हैं।”

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

4th Bronchopulmonary World Congress 2026

इंदौर, 04 जुलाई 2026। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शनिवार से चौथी ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 की मुख्य कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई। इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से आए पल्मोनोलॉजिस्ट, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, थोरासिक सर्जन, मेडिकल रिसर्चर और युवा चिकित्सक शामिल हुए। पहले दिन विशेषज्ञों ने फेफड़ों की बीमारियों के आधुनिक उपचार, नई रिसर्च और उन्नत तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए। इस कॉन्फ्रेंस में 700 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराया है।

 

पहले दिन पल्मोनरी मेडिसिन, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर, स्लीप मेडिसिन, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, थोरासिक सर्जरी और रेस्पिरेटरी रिसर्च जैसे विषयों पर वैज्ञानिक सत्र (साइंटिफिक सेशंस) आयोजित किए गए। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों के निदान व उपचार में हो रहे नए बदलावों, आधुनिक तकनीकों और क्लिनिकल अनुभवों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया। कॉन्फ्रेंस का औपचारिक उद्घाटन पहले दिन शाम 07 बजे इंडेक्स ग्रुप के चेयरमैन श्री सुरेश सिंह भदोरिया, डॉ. राजेंद्र प्रसाद एवं डॉ. अतुल सी. मेहता द्वारा किया गया।

 

कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न राज्यों से आए श्वसन रोग विभाग के 100 से अधिक पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों ने अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। वहीं, 30 से अधिक टीमों ने पोस्ट ग्रेजुएट क्विज़ प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी एकेडमिक और क्लिनिकल जानकारी का प्रदर्शन किया। रिसर्च पेपर और पोस्टर प्रेजेंटेशन, क्लिनिकल केस डिस्कशन तथा वैज्ञानिक संवाद के ज़रिए युवा चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीखने और अपने शोध प्रस्तुत करने का बेहतरीन अवसर मिला।

 

कॉन्फ्रेंस में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव एवं अन्य देशों की अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी, पद्मश्री से सम्मानित विशेषज्ञों और देश के वरिष्ठ चिकित्सकों ने विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों को संबोधित किया। इस दौरान अमेरिका (यूएस) में चिकित्सा के क्षेत्र में अपना लोहा मनवा चुके डॉ. अतुल सी. मेहता को 'लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया। विशेषज्ञों ने फेफड़ों की बीमारियों के इलाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों, इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं और मरीज-केंद्रित उपचार पद्धतियों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की।

 

कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी प्रो. डॉ. रवि डोसी ने कहा कि “बदलती जीवनशैली, बढ़ता वायु प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और एलर्जी फेफड़ों की बीमारियों के प्रमुख कारण बन रहे हैं। यही वजह है कि अस्थमा, सीओपीडी, फेफड़ों के संक्रमण और लंग कैंसर जैसी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। समय पर जांच, शुरुआती पहचान और आधुनिक उपचार से इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। अगर लक्षणों की पहचान कर समय पर इलाज शुरू हो जाए, तो कैंसर जैसी घातक बीमारियों को भी हराना संभव है। धूम्रपान से दूरी, स्वच्छ वातावरण, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, टीकाकरण और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है।”

 

डॉ. डोसी ने आगे बताया कि “कॉन्फ्रेंस के पहले दिन के वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों की उत्साहजनक भागीदारी रही। विभिन्न विषयों पर हुए गहन विचार-विमर्श से चिकित्सकों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों और आधुनिक उपचार पद्धतियों को समझने का अवसर मिला। कोविड के बाद उत्पन्न होने वाली श्वसन संबंधी जटिलताओं, टीबी के बाद फेफड़ों पर पड़ने वाले प्रभावों तथा पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और वैज्ञानिक उपचार आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वहीं, ब्रोंकोस्कोपी एवं नेविगेशन तकनीकों में हो रहे नवाचार फेफड़ों की बीमारियों के सटीक निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।”

 

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों की बेहतर देखभाल को एक नई दिशा देते हैं। कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन भी वैज्ञानिक सत्र, क्लिनिकल केस डिस्कशन, विशेषज्ञ व्याख्यान और रिसर्च प्रेजेंटेशन जारी रहेंगे, जिनमें देश-विदेश के विशेषज्ञ फेफड़ों की बीमारियों के उपचार से जुड़े नवीनतम शोध और अनुभव साझा करेंगे।

World Bank Update: कंगाली से उबरकर श्रीलंका बना अपर-मिडिल इनकम देश, वर्ल्ड बैंक ने भारत को किस कैटिगरी में रखा?

वर्ल्ड बैंक ने श्रीलंका को एक बार फिर अपर मिडिल इनकम वाले देशों की कैटेगरी में शामिल कर दिया है। यह 2022 में आए गंभीर आर्थिक संकट से उबरने की दिशा में श्रीलंका के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। वहीं, वियतनाम और फिलीपींस को भी बेहतर आय वर्ग में जगह मिली है, जो उनकी लगातार मजबूत होती अर्थव्यवस्था को दिखाता है।

भारत की नहीं बदली कटैगरी

दूसरी ओर, भारत अब भी लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की कैटेगरी में बना हुआ है। भारत को यह दर्जा साल 2007 में मिला था और अभी तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, यह वर्गीकरण केवल देश की कुल अर्थव्यवस्था पर नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय और लोगों के बीच आय के डिस्ट्रीब्यूशन पर भी आधारित होता है। वर्ल्ड बैंक ने अपनी नई रिपोर्ट में श्रीलंका की वापसी को आर्थिक सुधार की बड़ी सफलता बताया है।

श्रीलंका ने तीन साल में की अच्छी वापसी 

वर्ल्ड बैंक ने कहा कि 2022 के गंभीर आर्थिक संकट के बाद श्रीलंका ने सिर्फ तीन साल में अच्छी वापसी की है। साल 2025 में देश की अर्थव्यवस्था में 5 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई। इसके पीछे उद्योगों में सुधार, पर्यटन क्षेत्र की तेज़ रफ्तार और वित्तीय सेवाओं का बेहतर प्रदर्शन मुख्य वजह रहे। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, श्रीलंका का दोबारा अपर मिडिल इनकम वाले देशों की कटैगरी में पहुंचना उसकी आर्थिक मजबूती का संकेत है। हालांकि, यह तय सीमा को बहुत कम अंतर से पार कर सका है।

श्रीलंका पहली बार साल 2019 में ऊपरी-मध्यम आय वाले देशों की सूची में शामिल हुआ था। लेकिन इसके बाद आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ गई और देश गंभीर वित्तीय संकट में फंस गया। हालात इतने बिगड़ गए कि 2022 में श्रीलंका अपने सरकारी कर्ज का भुगतान भी नहीं कर सका। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सहयोग से कई आर्थिक सुधार किए गए। सरकार ने खर्च पर नियंत्रण रखा, कर्ज का दोबारा प्रबंधन किया, पर्यटन को बढ़ावा दिया और विदेशों में रहने वाले श्रीलंकाई लोगों से आने वाली रकम भी बढ़ी। इन कदमों की मदद से देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे फिर से पटरी पर लौटने लगी।

वियतनाम और फिलीपींस ने भी लगातार कई सालों तक मजबूत आर्थिक विकास के दम पर वर्ल्ड बैंक की अपर मिडिल इनकम वाले देशों की श्रेणी में जगह बना ली है। वियतनाम का निर्यात आधारित मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र लगातार विदेशी निवेश को आकर्षित कर रहा है। वहीं, फिलीपींस में भी कई क्षेत्रों में तेज आर्थिक विकास देखने को मिला है। इन दोनों देशों के शामिल होने के बाद अब दक्षिण-पूर्व एशिया की पांचों प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं—सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और फिलीपींस—या तो अपर मिडिल इनकम वाले देशों की कटैगरी में हैं या उससे भी ऊपर के आय वर्ग में पहुंच चुकी हैं।

भारत का दर्जा क्यों नहीं बदला?

भारत अभी भी वर्ल्ड बैंक की लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की कटैगरी में है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देश की अर्थव्यवस्था कमजोर है। दरअसल, वर्ल्ड बैंकदेशों को उनकी प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI Per Capita) के आधार पर अलग-अलग कटैगरी में रखता है। यानी यह देखा जाता है कि देश के हर व्यक्ति की एवरेज इनकम कितनी है, न कि केवल देश की कुल अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है। भारत की आबादी बहुत ज्यादा है, इसलिए आय का औसत बढ़ाने के लिए देश की कुल कमाई में भी काफी बड़ी बढ़ोतरी की जरूरत होती है।

वर्ल्ड बैंकके नए नियमों के अनुसार, जिन देशों की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) 1,136 डॉलर से 4,495 डॉलर के बीच होती है, उन्हें लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं, जिन देशों की प्रति व्यक्ति आय 4,496 डॉलर से 13,935 डॉलर के बीच होती है, वे ऊपरी-मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में आते हैं। भारत की प्रति व्यक्ति GNI फिलहाल करीब 2,500 से 2,700 डॉलर के बीच है। यही वजह है कि दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के बावजूद भारत अभी भी लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की श्रेणी में बना हुआ है।

वर्ल्ड बैंक ने देशों का इनकम कटैगरी तय करने के लिए GDP नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय (GNI) को आधार मानता है। GDP से पता चलता है कि किसी देश में एक साल के दौरान कितना उत्पादन और सेवाएं हुई हैं, जबकि GNI यह बताती है कि उस देश के लोगों और कंपनियों ने कुल कितनी आय कमाई, चाहे वह देश के भीतर से हो या विदेश से। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में केवल GDP बढ़ने से हर व्यक्ति की औसत आय तेजी से नहीं बढ़ती। इसकी वजह यह है कि देश की कुल आय बहुत बड़ी आबादी में बंट जाती है। इसलिए अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ने के बावजूद प्रति व्यक्ति आय बढ़ने में ज्यादा समय लगता है।

Maruti Victoris खरीदने का शानदार मौका! 2 लाख रुपये तक की छूट के साथ जानें पूरी डिटेल

अगर आप नई मिड-साइज SUV खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। मारुति सुजुकी विक्टोरिस पर इस महीने शानदार डिस्काउंट मिल रहा है। मारुति सुजुकी की विक्टोरिस ने लॉन्च के कुछ ही महीनों में भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना ली है। ये मिड-साइज SUV ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है। इसी के साथ बिक्री के मामले में भी कई बड़ी गाड़ियों को कड़ी टक्कर दे रही है। अगर आप नई SUV खरीदने की सोच रहे हैं, तो ये मॉडल आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। आइए जानते हैं इस पर मिलने वाले ऑफर्स, कीमत और फीचर्स की पूरी जानकारी।

जुलाई महीने में मारुति सुजुकी विक्टोरिस पर ग्राहकों को शानदार ऑफर मिल रहे हैं। डीलर सूत्रों के अनुसार, इस SUV के कुछ वेरिएंट्स, खासकर CNG मॉडल पर, कुल 2 लाख रुपये तक का फायदा उठाया जा सकता है। इस ऑफर में एक्सचेंज बोनस भी शामिल है।

कितनी हुई होलसेल

1 जुलाई को आयोजित मारुति सुजुकी की मासिक सेल्स मीडिया ब्रीफिंग में कंपनी के मार्केटिंग और सेल्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पार्थो बनर्जी ने बताया कि, जून महीने में विक्टोरिस की करीब 10,000 यूनिट्स की होलसेल हुई। वहीं, इसकी रिटेल बिक्री 13,000 यूनिट्स से अधिक रही। उन्होंने ये भी कहा कि विक्टोरिस की कुल बिक्री में CNG वेरिएंट की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है, जबकि पूरे मारुति सुजुकी पोर्टफोलियो में CNG मॉडल की हिस्सेदारी करीब 42 प्रतिशत है। मारुति सुजुकी विक्टोरिस को ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से कई इंजन और ट्रांसमिशन विकल्पों के साथ पेश करती है।

इसमें पेट्रोल, CNG और हाइब्रिड वेरिएंट उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि CNG मॉडल में टैंक को गाड़ी के नीचे लगाया गया है, जिससे बूट में सामान रखने के लिए पहले की तरह पर्याप्त जगह मिलती है।

कार का खासियत

मारुति सुजुकी साल 2010 से भारत में CNG कारें बेच रही है। वहीं, विक्टोरिस कंपनी की पहली ऐसी कार है, जिसमें अंडरबॉडी CNG टैंक दिया गया है। इस मॉडल को साल 2025 में लॉन्च किया गया था। वहीं माइलेज की बात करें तो, मारुति सुजुकी विक्टोरिस का पेट्रोल मैनुअल वेरिएंट 21.18 kmpl, पेट्रोल ऑटोमैटिक वेरिएंट 21.06 kmpl, CNG मैनुअल वेरिएंट 27.02 km/kg और हाइब्रिड e-CVT वेरिएंट 28.65 kmpl तक का माइलेज देने का दावा करता है। वहीं, इस SUV की एक्स-शोरूम कीमत 10.50 लाख रुपये से 19.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच है, जबकि इसके CNG वेरिएंट की कीमत 11.50 लाख रुपये से 14.72 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक है।

Top 10 Selling Cars in June: टॉप 10 कारों में Tata दबदबा, Punch और Nexon SUV लिस्ट में सबसे ऊपर, Maruti के 6 मॉडल भी शामिल

Top 10 Selling Cars in June:  जून,2026 में भारत के कार मार्केट में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV) सबसे ज्यादा बढ़त हासिल करने वाली कंपनी रही। इस दौरान कंपनी की Punch SUV और Nexon SUV ने देश की टॉप 10 बिकने वाली कारों की सूची में पहला और दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं, इस मजबूत प्रदर्शन के साथ कंपनी की घरेलू बिक्री में साल-दर-साल (y-o-y) 69% की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इसके अलावा, Maruti Suzuki ने भी मार्केट में पकड़ बनाए रखते हुए लिस्ट में 6 मॉडल शामिल किए। जबकि Hyundai Motor India की Creta SUV प्रोडक्शन में कुछ समय की रुकावट के कारण लिस्ट से बाहर हो गई।

बता दें कि Tata Motors ने जून में घरेलू पैसेंजर व्हीकल (PV) की 63,083 यूनिट्स (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स या EVs सहित) बेचीं, जो पिछले साल इसी महीने में 37,237 यूनिट्स थीं। कंपनी ने कहा कि Punch और Tiago के नए वर्जन्स को ‘बहुत जबरदस्त’ रिस्पॉन्स मिला है और सभी तरह के पावरट्रेन में बुकिंग तेजी से बढ़ी है, जबकि इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री इस महीने रिकॉर्ड 14,800 यूनिट्स तक पहुंच गई।

पहले Punch SUV की बात करें तो, यह जून में भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली पैसेंजर व्हीकल बनी, जिसकी 21,006 यूनिट्स की बिक्री हुई। दूसरे नंबर पर Nexon रही, जिसकी 18,335 यूनिट्स बिकीं। तीसरे स्थान पर Maruti Suzuki की Dzire रही, जिसने 17,899 यूनिट्स की बिक्री के साथ देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली सेडान का दर्जा बनाए रखा।

चौथे स्थान पर 16,952 यूनिट्स के साथ ‘Wagon R’ हैचबैक रही, जबकि ‘Ertiga’ MPV ने 16,111 यूनिट्स बेचकर टॉप पांच में जगह बनाई। Maruti Suzuki की ‘Swift’ हैचबैक 15,215 यूनिट्स के साथ छठे स्थान पर रही, और उसके बाद Mahindra ‘Scorpio’ SUV 14,097 यूनिट्स के साथ सातवें स्थान पर रही।

Maruti Suzuki की ‘Fronx’ SUV 13,135 यूनिट्स की बिक्री के साथ 8वें स्थान पर रही, जो ‘Baleno’ हैचबैक (12,488 यूनिट्स) से आगे रही। इसके अलावा, Hyundai की ‘Venue’ SUV 10,776 यूनिट्स की बिक्री के साथ टॉप 10 की लिस्ट में शामिल रही।

हालांकि टाटा मोटर्स ने टॉप 2 स्थान हासिल किए, लेकिन मारुति सुजुकी इस रैंकिंग में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व करने वाली कंपनी रही, जिसके 6 मॉडल-Dzire, WagonR, Ertiga, Swift, Fronx और Baleno-टॉप 10 में शामिल रहे। इन मॉडल्स की कुल बिक्री 91,780 यूनिट रही, जो जून में टॉप 10 कारों की कुल बिक्री का 57% से ज्यादा है। इससे हैचबैक, सेडान, MPV और SUV सेगमेंट में कंपनी की मजबूत मौजूदगी का पता चलता है।

बता दें कि यह परफॉर्मेंस तब देखने को मिली जब जून में मारुति सुजुकी ने अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में एक हफ्ते के लिए मेंटेनेंस के कारण काम बंद रखा था, जिस दौरान कोई गाड़ी नहीं बनी थी।

रैंकिंग में Hyundai Creta का नाम नहीं

जून की रैंकिंग में एक खास नाम जो गायब था, वह है Hyundai Creta; यह कार देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में हमेशा शामिल रही है। इसके रैंकिंग में शामिल न होने के पिछे एक सप्लायर प्लांट में आग लगने की वजह रही है, जिससे प्रोडक्शन में कुछ समय के लिए रुकावट आई और होलसेल बिक्री पर असर पड़ा। इसी कारण यह SUV टॉप 10 की लिस्ट से बाहर हो गई।

एक और खास नाम जो लिस्ट में नहीं था, वह है Maruti Suzuki Brezza SUV। इस महीने के आखिर में इसके अपडेटेड वर्जन के लॉन्च से पहले इसकी सप्लाई पर असर पड़ा था।

जून की रैंकिंग से भारतीय खरीदारों के बीच SUV की लगातार लोकप्रियता का भी पता चला। टॉप 10 में पांच SUV – पंच, नेक्सॉन, स्कॉर्पियो, फ्रॉन्क्स और वेन्यू – शामिल थीं। वहीं, डिजायर ने SUV के ट्रेंड से अलग अपनी जगह बनाए रखी और भारत की सबसे ज़्यादा बिकने वाली सेडान बनी रही।

जून की रैंकिंग से यह भी साफ हुआ कि भारतीय बाजार में SUV की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है। टॉप 10 में कुल 5 SUV-Punch, Nexon, Scorpio, Fronx और Venue-शामिल रहीं। वहीं Dzire ने SUV ट्रेंड से अलग अपनी जगह बनाए रखी और देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली सेडान बनी रही।

जून में सबसे ज्यादा बिकने वाली टॉप 10 कारें

रैंककार मॉडलबिक्री (यूनिट्स)
1टाटा पंच21,006
2टाटा नेक्सॉन18,335
3मारुति सुजुकी डिजायर17,899
4मारुति सुजुकी वैगनआर16,952
5मारुति सुजुकी अर्टिगा16,111
6मारुति सुजुकी स्विफ्ट15,215
7महिंद्रा स्कॉर्पियो14,097
8मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स13,135
9मारुति सुजुकी बलेनो12,488
10हुंडई वेन्यू10,776

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‘जाने तू… या जाने ना’ के पूरे हुए 18 साल, आमिर खान प्रोडक्शंस ने खास अंदाज में शेयर कीं जय और अदिति की यादें

‘आमिर खान प्रोडक्शंस’ भारतीय सिनेमा के सबसे मशहूर और सफल प्रोडक्शन हाउस में से एक है, जो हर जॉनर की अनगिनत सुपरहिट फिल्में देने के लिए जाना जाता है। सालों से इसकी कई फिल्में कल्ट क्लासिक बन चुकी हैं और आज भी दर्शकों के दिलों पर राज कर रही हैं। इसकी सबसे बड़ी सफलताओं में से एक खूबसूरत रोमांटिक ड्रामा ‘जाने तू… या जाने ना’ है, जिसमें इमरान खान और जेनेलिया डिसूजा ने मुख्य भूमिका निभाई थी। यह फिल्म आज भी फैंस की ऑल-टाइम फेवरेट बनी हुई है।

​इस फिल्म की रिलीज को आज 18 साल पूरे हो चुके हैं। इस खास मौके पर मेकर्स ने फिल्म के कुछ सबसे यादगार और प्यारे विजुअल्स के साथ एक स्पेशल पोस्ट शेयर करके इस माइलस्टोन का जश्न मनाया। पुरानी यादों को ताजा करते इस ट्रिब्यूट ने फैंस को एक बार फिर इस सदाबहार रॉम-कॉम (रोमांटिक-कॉमेडी) के जादू की याद दिला दी, जिसने दर्शकों के साथ-साथ प्रोडक्शन हाउस के लिए भी इस पल को बेहद खास और दिल छू लेने वाला बना दिया।

​इस पोस्ट को शेयर करते हुए मेकर्स ने लिखा, “कहानी शुरू हुई थी एक सपने से…18 साल की दोस्ती, प्यार और ‘जाने तू… या जाने ना’ का वो खूबसूरत पागलपन”। इस फिल्म को आमिर खान और मंसूर खान ने मिलकर प्रोड्यूस किया था, जो इस जोड़ी के बीच एक और बेहद यादगार कोलैबोरेशन साबित हुआ।

सालों से आमिर और मंसूर कई बेहतरीन और कामयाब फिल्मों से जुड़े रहे हैं, और उन्होंने ऐसी कहानियां बनाई हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा पर एक अमिट छाप छोड़ी है। ‘जाने तू… या जाने ना’ आज भी उनके अब तक के सबसे शानदार और चर्चित कोलैबोरेशन्स में से एक बनी हुई है।

​’जाने तू… या जाने ना’ में इमरान खान और जेनेलिया डिसूजा के साथ-साथ मंजरी फडनीस, अयाज खान, प्रतीक बब्बर, रत्ना पाठक शाह और नसीरुद्दीन शाह जैसे कई बेहतरीन कलाकारों ने काम किया था। यह फिल्म जय और अदिति के सफर को दिखाती है, जो कॉलेज के बेस्ट फ्रेंड्स हैं और हर किसी के सामने यही दावा करते हैं कि वे सिर्फ दोस्त हैं, भले ही उनके आसपास का हर इंसान यह मानता हो कि वे दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हैं। लेकिन, जैसे ही वे जिंदगी में आगे बढ़ते हैं और नए पार्टनर्स ढूंढते हैं, उन्हें धीरे-धीरे इस बात का अहसास होता है कि वे एक-दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते हैं।

​दोस्ती, प्यार, दिल टूटने के दर्द और भावनाओं से भरी यह दिल छू लेने वाली कहानी आगे चलकर एक कल्ट क्लासिक बन गई। अब्बास टायरवाला के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म का म्यूजिक  ए. आर. रहमान ने तैयार किया था, और इसका हर एक सदाबहार गाना आज भी दर्शकों की प्लेलिस्ट में सबसे ऊपर रहता है।

पेट्रोल में एथेनॉल के बाद अब डीजल में Isobutanol ब्लेंडिंग ट्रायल शुरू, सामने आई ये जानकारी

पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग से E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद अब सरकार डीजल को लेकर भी एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत अब बायोफ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में अगला बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। सरकार डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की योजना बना रही है, ताकि विदेशों से तेल आयात पर देश की निर्भरता कम हो सके।

अब डीजल से Isobutanol Fuel बनाने जा रही सरकार

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इथेनॉल को सीधे डीजल में नहीं मिलाया जा सकता। इसलिए इथेनॉल से आइसोब्यूटेनॉल बनाने पर काम किया जा रहा है, जिसे डीजल के साथ मिलाकर बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका कहना है कि आइसोब्यूटेनॉल भविष्य में डीजल का अच्छा विकल्प बन सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की अनुमति देने की तैयारी कर रही है। यह कदम देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने और प्रदूषण कम करने वाले स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सरकार कर रही तैयारी 

नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार ने 100 प्रतिशत इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल से दो जनरेटर सफलतापूर्वक चलाकर देखे हैं। इससे यह साबित हुआ है कि ऐसे इंजन बनाए जा सकते हैं, जो पूरी तरह इन ईंधनों पर काम करें। आइसोब्यूटेनॉल को नई पीढ़ी का बेहतर बायोफ्यूल माना जा रहा है। इसमें सामान्य बायोफ्यूल की तुलना में अधिक ऊर्जा होती है, यह इंजन के साथ बेहतर तरीके से काम करता है और इससे प्रदूषण भी कम होता है। अधिकारियों का कहना है कि इसके इस्तेमाल से भारत का कच्चे तेल का आयात और घटेगा, साथ ही देश में बनने वाले बायोफ्यूल की मांग भी बढ़ेगी।

 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सरकार के E20 इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का समर्थन किया था। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारियों को भी खारिज किया था।

मंत्रालय ने साफ कहा कि इथेनॉल के इस्तेमाल से पानी की भारी कमी नहीं होती, न ही इससे वाहनों के इंजन खराब होते हैं। साथ ही, इससे गाड़ी की वारंटी या बीमा भी प्रभावित नहीं होता और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की बात भी सही नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, यह योजना वैज्ञानिक शोध, सुरक्षा मानकों और दुनिया के कई देशों के अनुभव के आधार पर तैयार की गई है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पहले, दिसंबर 2025 में ही हासिल कर लिया था। सरकार का कहना है कि इस योजना से देश ने 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इसके अलावा कच्चे तेल का आयात और कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है, वहीं किसानों की आय बढ़ाने में भी इस योजना ने अहम भूमिका निभाई है।