यूरिया के मामले में 100% आत्मनिर्भर बनेगा भारत! 8-9 नए प्लांट और 10 मिलियन टन कैपिसिटी का ये है पूरा प्लान

भारत को खेती-किसानी और फर्टिलाइजर (उर्वरक) के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने आज एक बड़ा फैसला लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 (NIPU-2026) को मंजूरी दे दी गई है। इस नई नीति के तहत देश में 8 से 9 नए यूरिया प्लांट स्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है। इससे भारत की आयातित (इंपोर्टेड) यूरिया पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस नई निवेश नीति से देश में सालाना लगभग 1 करोड़ मीट्रिक टन (10 मिलियन टन) नई यूरिया उत्पादन क्षमता जुड़ेगी।

यूरिया का मौजूदा गणित: मांग, उत्पादन और 25% का गैप

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश में यूरिया की जरूरत और उत्पादन के मौजूदा आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि नई नीति की जरूर क्यों पड़ी। अभी भारत में यूरिया की कुल मांग 40 मिलियन टन है। इसके मुकाबले घरेलू उत्पादन क्षमता लगभग 30 मिलियन टन (वर्तमान घरेलू उत्पादन क्षमता करीब 26.9 मिलियन टन) है। मांग और आपूर्ति के बीच इस 10 मिलियन टन के अंतर (सप्लाई गैप) को पूरा करने के लिए भारत को हर साल भारी मात्रा में यूरिया का आयात करना पड़ता है। यह गैप कुल मांग का लगभग 25 प्रतिशत है। देश में यूरिया की आवश्यकता में हर साल 5 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में यह नई नीति देश की संपूर्ण यूरिया आवश्यकता को स्थानीय स्तर पर पूरा करने में मदद करेगी।

प्राकृतिक गैस आधारित होंगे 8-9 नए प्लांट, प्रस्ताव तैयार

सरकार के अनुसार नई निवेश नीति के तहत जिन 8-9 नए यूरिया प्लांटों की स्थापना की जाएगी वे प्राकृतिक गैस आधारित होंगे। इस परियोजना के लिए सरकार और निजी क्षेत्र दोनों की तरफ से प्रस्ताव मिल चुके हैं। इससे पहले लागू की गई न्यू इन्वेस्टमेंट पॉलिसी (NIP)-2012 के तहत पिछले एक दशक में देश में छह नए यूरिया प्लांट शुरू किए गए थे। इनमें से चार प्लांट सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के संयुक्त उद्यम के माध्यम से और दो प्लांट निजी फर्मों द्वारा स्थापित किए गए थे। इससे यूरिया के आयात पर निर्भरता काफी कम हुई थी। अब NIPU-2026 इसी नीति का एक विस्तारित रूप है।

नीति के 3 मजबूत स्तंभ

कंपनियों और निवेशकों को आकर्षित करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए इस नई नीति को तीन मुख्य स्तंभों पर तैयार किया गया है:

लागत संरचना का संशोधन (पारदर्शिता): सब्सिडी की गणना को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए इसमें निश्चित लागत और परिवर्तनीय लागत को पूरी तरह से अलग-अलग कर दिया गया है।

12-16% रिटर्न की गारंटी: यूरिया प्लांट लगाने वाली कंपनियों के लिए इक्विटी पर 12 से 16 प्रतिशत का सुनिश्चित रिटर्न तय किया गया है।

विदेशी मुद्रा जोखिम से सुरक्षा: विदेशी मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करने के लिए व्यवस्था की गई है। इसके तहत चार साल के बाद तत्कालीन विनिमय दरों के आधार पर निश्चित लागतों को रुपये में परिवर्तित कर दिया जाएगा।

₹250 करोड़ की बड़ी बचत: सरकार के मुताबिक नीति में किए गए इन सुधारात्मक बदलावों से प्रत्येक यूरिया प्लांट के लिए 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय कीमतों से सुरक्षित रहेंगे भारतीय किसान

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकार की व्यापक उर्वरक रणनीति को रेखांकित करते हुए भरोसा दिलाया कि वैश्विक स्तर पर फर्टिलाइजर की कीमतों में आने वाले उछाल और उतार-चढ़ाव से भारतीय किसानों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। सरकार द्वारा लगातार दी जा रही सब्सिडी सहायता के माध्यम से किसानों पर वैश्विक कीमतों के बढ़ने का कोई असर नहीं पड़ने दिया गया है और आगे भी उन्हें यह सुरक्षा मिलती रहेगी।

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तीसरा बच्चा होने पर चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य, नियम पर Supreme Court ने क्या कहा, क्यों बताया गैर जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत और अन्य स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए लागू 'दो बच्चों की शर्त' (Two-Child Norm) की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि जिस नीति को कभी बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के लिए बनाया गया था, वह आज के बदले जनसांख्यिकीय हालात में शायद अपना उद्देश्य पूरा कर चुकी है। ऐसे में इस नियम को जारी रखने का औचित्य दोबारा परखा जाना चाहिए।

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जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ महाराष्ट्र की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव इंगले की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इंगले को तीसरा बच्चा होने के आधार पर महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 14(1)(j-1) के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

 

'देश बदल गया है, नीति पर फिर से विचार जरूरी'

सुनवाई के दौरान जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने वर्ष 2003 के जावेद बनाम हरियाणा राज्य फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इस नीति पर पुनर्विचार की जरूरत है। उन्होंने टिप्पणी की कि देश की जनसंख्या और प्रजनन दर (Fertility Rate) में बड़ा बदलाव आ चुका है, इसलिए पुराने आधार पर बनी नीति को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता। पीठ ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता रुक्मिणी बोबडे को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) के रूप में सहायता देने के लिए कहा है।

घटती फर्टिलिटी रेट का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत का कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) अब करीब 1.7 रह गया है। वहीं, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह दर कई स्कैंडिनेवियाई देशों से भी कम है। अदालत ने कहा कि जब कई राज्य अब घटती जन्म दर की चुनौती का सामना कर रहे हैं, तब केवल आबादी नियंत्रण के नाम पर दो-बच्चे की शर्त लागू रखना तर्कसंगत नहीं दिखता।

'विरोधी इसे हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं'

सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में तीन बच्चों वाला परिवार असामान्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि इस नियम का इस्तेमाल कई बार चुनावी प्रतिद्वंद्वी विरोधियों को अयोग्य ठहराने के हथियार के रूप में करते हैं। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि इस नीति का प्रभाव अब समाप्त हो चुका है और इसे वापस लेने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले की काकोडा ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गईं मंगला भीमराव इंगले के खिलाफ शिकायत की गई थी कि उनका तीसरा बच्चा है। इसके आधार पर अतिरिक्त कलेक्टर ने अक्टूबर 2024 में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया।
 

बाद में अतिरिक्त आयुक्त ने उनकी अपील खारिज कर दी और अगस्त 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने माना कि जन्म प्रमाण पत्र एक सार्वजनिक दस्तावेज है और याचिकाकर्ता उसे गलत साबित नहीं कर सकीं। अब सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि बदलते सामाजिक और जनसांख्यिकीय हालात में दो-बच्चे की शर्त को जारी रखना संवैधानिक रूप से उचित है या नहीं।

कैबिनेट के 7 बड़े फैसले: यूरिया के लिए नई पॉलिसी से लेकर सेमीकंडक्टर तक 2.19 लाख करोड़ खर्च का ये है पूरा प्लान

Cabinet approves Rs 2.19 lakh cr projects: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार 15 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट की एक बेहद अहम बैठक हुई। इसमें देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि क्षेत्र को रफ्तार देने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए। कैबिनेट ने एक साथ 7 बड़े फैसलों को मंजूरी दी है। इनके तहत कुल 2 लाख 19 हजार 353 करोड़ रुपये की परियोजनाओं और पॉलिसियों को हरी झंडी दिखाई गई है। कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन फैसलों की विस्तृत जानकारी दी।

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक इन फैसलों में सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (Semicon 2.0), मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और भारत को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 जैसे बड़े नीतिगत कदम शामिल हैं।

फैसला 1 और 2: वाराणसी के लिए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि आज के पहले दो बड़े फैसले वाराणसी (काशी) में बुनियादी ढांचे के विकास के एक नए दृष्टिकोण से जुड़े हुए हैं। शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है:-

वरुणा नदी के किनारे एलिवेटेड कॉरिडोर: कैबिनेट ने वरुणा नदी के किनारे 10998 करोड़ रुपये की लागत से एक 6/4-लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी है।

गंगा नदी के किनारे एलिवेटेड कॉरिडोर: इसके साथ ही गंगा नदी के किनारे 14,448 करोड़ रुपये की लागत से एक 6-लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर के विकास को भी हरी झंडी दी गई है।

फैसला 3 और 4: सेमीकंडक्टर 2.0 और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को महा-बूस्ट

देश को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने के लिए सरकार ने इस कैबिनेट बैठक में दो सबसे बड़े वित्तीय आवंटन किए हैं:-

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 1 लाख 27 हजार 500 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ ‘सेमीकंडक्टर 2.0’ को मंजूरी दी है। सरकार का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS): मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ा दूसरा बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए 62500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

फैसला 5: यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए नई नीति

कृषि क्षेत्र और किसानों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026’ को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य भारत को यूरिया उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह एक नीतिगत मंजूरी है, इसलिए कैबिनेट के फैसलों की वित्तीय तालिका में इसके लिए अलग से कोई विशिष्ट वित्तीय आवंटन दर्ज नहीं किया गया है।

फैसला 6 और 7: रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट

लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कैबिनेट ने रेल नेटवर्क के विस्तार से जुड़ी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। कैबिनेट ने 2542 करोड़ रुपये की लागत से पारादीप-हरिदासपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण काम को मंजूरी दी है। इसके अलावा डांगोआपोसी और राजखरसवां के बीच चौथी रेलवे लाइन के निर्माण को भी मंजूरी मिल गई है। इसमें 1365 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के इन फैसलों को समेटते हुए कहा कि आज लिए गए ये 7 बड़े फैसले देश के बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने के साथ-साथ भारत को मैन्युफैक्चरिंग और कृषि के मोर्चे पर आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।

विराट कोहली का एक और रोहित शर्मा का एक और Failure, क्या होगा आगे?

कल इंग्लैंड के खिलाफ भारत को जीत मिली लेकिन विराट कोहली और रोहित शर्मा ने अपने विकेट पहले दस ओवर में फेंक दिए। रोहित शर्मा को 21 गेंदों में 11 रन पर सैम करन ने अपना शिकार बनाया और विराट कोहली को जोफ्रा आर्चर ने 5 रनों पर पगबाधा कर दिया। इन दोनों की बल्लेबाजी के बाद लोगों में चर्चा शुरु हो गई है कि विश्वकप तक इनमें से कौन अपनी जगह बचा पाएगा।

रोहित ने कप्तानी गंवाने के बाद अपने आक्रामक रवैए पर अंकुश लगाया लेकिन उन्हें अभी तक इससे खास फायदा नहीं हुआ है।रोहित ने पिछले साल अक्टूबर से 13 वनडे मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने एक शतक और चार अर्धशतकों की मदद से 46.91 के औसत से 563 रन बनाए हैं।यह कोई मामूली रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन भारतीय ड्रेसिंग रूम के मौजूदा हालात ने रोहित के लिए लगभग हर मैच में अच्छा प्रदर्शन करना अनिवार्य बना दिया है।

अभी यह सोचना कल्पना से परे होगा कि रोहित अगले कुछ मैचों में असफल रहने पर 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। लेकिन जिस तरह से हाल में टीम प्रबंधन ने सूर्यकुमार यादव और संजू सैमसन को खराब प्रदर्शन के कारण टीम से बाहर किया, वह 39 वर्षीय रोहित के लिए चेतावनी हो सकती है।

रोहित अब इस स्थिति में है कि वह किसी भी चीज को भाग्य के सहारे नहीं छोड़ सकते हैं क्योंकि भारत के शीर्ष क्रम में इशान किशन के रूप में विकल्प मौजूद है।अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच को छोड़ दे तो इस साल रोहित का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है।पहले मैच में वह 16 रन बनाकर रनआउट हो गए और दूसरे मैच में वह 39 गेंदों में 48 रन बनाकर बोल्ड हो गए।इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में रोहित शर्मा फ्लॉप रहे और टीम को शुरुआत में बड़ा स्कोर नहीं दे सके। रोहित शर्मा 3 मैचों में 20 की औसत से 61 रन बना पाए। पूरी सीरीज में उन्होंने 9 चौके और 2 छक्के लगाए।पहले मैच में उन्होंने 29 गेंदो पर 26 रन, दूसरे मैच में उन्होंने 38 गेंदो में 24 रन और तीसरे मैच में 13 गेंदो में 11 रन बनाए।

रोहित के विपरीत एक अन्य सीनियर खिलाड़ी विराट कोहली फिटनेस और आंकड़ों दोनों के मामले में बेहतर स्थिति में हैं। कोहली ने पिछले साल अक्टूबर से 10 मैचों में 77.62 के औसत से 621 रन बनाए हैं, जिसमें तीन शतक और इतने ही अर्धशतक शामिल हैं। वह भी रोहित की तरह पहले मैच में नहीं चल पाए लेकिन टीम में उनके स्थान पर किसी तरह का खतरा नजर नहीं आ रहा है।

कुछ ऐसा ही ऑस्ट्रेलिया में हुआ था और रोहित अगले 2 मैच में अर्धशतक जमाकर मैन ऑफ द सीरीज का खिताब पाए थे। इंग्लैंड की परिस्थितियों से विराट कोहली भली भांति परिचित है क्योंकि अब वह इस देश में ही रहते हैं। ऐसे में फैंस का मानना है कि कोहली अगले 2 मैच में बड़ी पारी खेलकर मैन ऑफ द सीरीज का अवार्ड पाएंगे।

भारत के इन 3 शहरों ने मारी बाजी, 2026 की वर्ल्ड बेस्ट सिटीज लिस्ट में छाया इनका जलवा!

भारत के तीन खूबसूरत शहरों ने दुनिया के सबसे पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन में अपनी जगह बनाई है। ‘ट्रैवल + लेज़र’ के ‘वर्ल्ड्स बेस्ट अवार्ड्स 2026’ में उदयपुर, जयपुर और मुंबई को दुनिया के टॉप 25 शहरों में शामिल किया गया है। यह रैंकिंग दुनियाभर के 6.61 लाख से ज्यादा रीडर्स के वोट और उनके ट्रेवल एक्सपीरियंस के बेस पर तैयार की गई है, आइए जानते हैं आखिर ये तीनों भारतीय शहर दुनिया के बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन की लिस्ट में क्यों शामिल हुए और यहां घूमने की क्या खास वजह है:

दुनिया की टॉप 25 लिस्ट में तीन भारतीय शहर

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‘ट्रैवल + लेजर’ के ‘वर्ल्ड्स बेस्ट अवार्ड्स 2026’ में भारत के उदयपुर, जयपुर और मुंबई ने दुनिया के टॉप 25 शहरों में जगह बनाई। यह लिस्ट लाख से भी ज्यादा लोगों के ग्लोबल रीडर सर्वे के बेस पर तैयार की गई है, जिसमें शहरों को उनके टूरिस्ट एक्सपीरियंस, संस्कृति और मेहमाननवाजी के लिए आंका गया।

उदयपुर बना सबसे ऊंची रैंक वाला भारतीय शहर

शीश महल के बारे में जानकारी – Swan Tours – Blogs

उदयपुर दुनिया में 12वें और एशिया में 8वें स्थान पर रहा। इसे ‘झीलों का शहर’ कहा जाता है। यहां की पिछोला झील, सिटी पैलेस, फतेह सागर झील, हेरिटेज होटल और राजस्थानी संस्कृति पर्यटकों को बेहद पसंद आती है।

अगर आप शाही माहौल, शांत झीलों में बोट राइड और खूबसूरत सूर्यास्त का आनंद लेना चाहते हैं, तो उदयपुर जरूर जाएं। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है।

जयपुर ने भी बनाई खास पहचान

जयपुर में आपका स्वागत है: भारत का गुलाबी शहर » अगोडा: कम खर्च में दुनिया देखें

जयपुर ने दुनिया में 16वीं और एशिया में 10वीं रैंक हासिल की। ‘पिंक सिटी’ अपने ऐतिहासिक किलों, हवेलियों, महलों और रंग-बिरंगे बाजारों के लिए मशहूर है।

यहां आमेर किला, हवा महल, सिटी पैलेस और लोकल मार्केट घूमने लायक हैं। हिस्ट्री, आर्किटेक्टर, शॉपिंग और राजस्थानी खाने का मजा लेना चाहते हैं, तो जयपुर एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है।

मुंबई की संस्कृति और लाइफस्टाइल को मिली पहचान

मुंबई महाराष्ट्र के गेटवे ऑफ इंडिया का इतिहास तथा महत्वपूर्ण जानकारी | SamanyaGyan

मुंबई दुनिया में 21वें और एशिया में 12वें स्थान पर रही। यह शहर मॉडर्न लाइफस्टाइल और ट्रेडिशन का शानदार ब्लेंड है। यहां गेटवे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव, जुहू चौपाटी, बॉलीवुड, स्ट्रीट फूड और नाइटलाइफ टूरिस्ट को अट्रैक्ट करते हैं।

अगर आप समुद्र किनारे घूमना, अलग-अलग तरह का खाना चखना और शहर की तेज रफ्तार जिंदगी का एक्सपीरियंस लेना चाहते हैं, तो मुंबई जरूर जाएं। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी है।

दुनिया के टॉप 5 शहर कौन-से हैं?

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इस साल की ग्लोबल रैंकिंग में सैन मिगुएल डी एलेंडे (मेक्सिको) पहले स्थान पर रहा। इसके बाद क्योटो (जापान), चियांग माई (थाईलैंड), होई आन (वियतनाम) और ओआक्साका (मेक्सिको) ने टॉप 5 में जगह बनाई।

भारत के तीन शहरों का इस लिस्ट में शामिल होना देश के टूरिस्म के लिए बड़ा अचीवमेंट माना जा रहा है।

इंग्लैंड के खिलाफ श्रेयस करेंगे ODI कप्तानी का डेब्यू, किशन होंगे ओपनर

बर्मिंघम में पहला एकदिवसीय मैच जीतने वाली भारतीय टीम को एक मैच बाद ही एकदिवसीय सीरीज में अपना कप्तान बदलना पड़ सकता है। कल 80 रनों की नाबाद पारी खेलने वाले शुभमन गिल को हैमस्ट्रिंग में चोट लगी है। अमूमन यह चोट ठीक होने में समय मांगती है और  भारत को कल ब्रिस्टल में इंग्लैंड के खिलाफ खेलना है।

ऐसे में बहुत मुमकिन है कि एकदिवसीय टीम के उपकप्तान श्रेयस अय्यर को गुरुवार को कप्तानी सौंपी जाए। टीम में सिर्फ एक नहीं दो बदलाव हो सकते हैं। शुभमन गिल अगर कल फिट नहीं होते हैं तो रोहित शर्मा के साथ ईशान किशन को बल्लेबाजी के लिए आना पड़ेगा क्योंकि यशस्वी जायसवाल इस दौरे पर टीम के लिए चयनित नहीं है।

ईशान किशन का टी-20 फॉर्म इंग्लैंड में खास नहीं रहा लेकिन भारत में उन्होंने एकदिवसीय मैचों में बड़े शतक लगाए थे। लेकिन फैंस को ज्यादा चिंता इस बात की होनी चाहिए कि श्रेयस अय्यर कप्तानी करेंगे और शायद टॉस भी जीत जाएंगे क्योंकि वह अब तक एक भी टॉस नहीं हारे हैं।

इसके अलावा भारतीय टीम में एक और चोट की खबर है।बराड़ के भी पैर में चोट की अपुष्ट खबरें मीडिया में आ रही है।सोफिया गार्डन्स की पिच में अक्सर अच्छी उछाल और गति होती है, जिससे तेज गेंदबाजों को मौका मिलता है। ऐसे में भारत गुरनूर बराड़ की जगह बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह को टीम में शामिल कर सकता है।

बराड़ ने पहले मैच में बेन डकेट और जैकब बेथेल के विकेट लिए लेकिन उन्होंने नौ ओवर में 61 रन लुटा दिए। इसलिए अगर टीम प्रबंधन अनुभव को तवज्जो देता है तो अर्शदीप को अंतिम एकादश में जगह मिल सकती है।

सही जवाब पता थे फिर भी IIT एग्जाम में लिखे गलत उत्तर, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

भारत में IIT में दाखिला पाना लाखों छात्रों का सपना होता है, लेकिन एक युवक ने इस दौड़ से हटकर ऐसा फैसला लिया जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। जब बाकी छात्र IIT में पहुंचने के लिए पूरी मेहनत कर रहे थे, तब ऋषभ खनेजा ने जानबूझकर अपनी परीक्षा में गलत जवाब लिखे। हैरानी की बात यह थी कि उन्हें सही उत्तर पता थे। उनका यह कदम असफलता नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की दिशा खुद चुनने का प्रयास था।

परिवार और समाज की तय उम्मीदों से अलग रास्ता चुनना आसान नहीं था, लेकिन ऋषभ ने वही किया जो उन्हें सही लगा। आज उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि सफलता का मतलब सिर्फ बड़ी डिग्री या नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि अपने उद्देश्य और खुशी को पहचानना भी है।

IIT की रेस में शामिल था

ऋषभ खनेजा ने Humans of Bombay के साथ अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने जानबूझकर IIT प्रवेश परीक्षा में असफल होने का फैसला किया था। उनका कहना है कि यह कदम किसी डर या कमजोरी की वजह से नहीं था, बल्कि इसलिए था क्योंकि वह ऐसी जिंदगी नहीं जीना चाहते थे जो उन्हें अपनी नहीं लगती थी।

उन्होंने बताया कि परीक्षा हॉल में बैठकर वह जानते थे कि सही जवाब क्या हैं, फिर भी उन्होंने कुछ सवालों के गलत उत्तर चुने।

परिवार ने देखा था एक तय रास्ता

ऋषभ परिवार के बड़े बेटे थे और उनके लिए भविष्य का रास्ता पहले से तय माना जाता था। विज्ञान से पढ़ाई, इंजीनियरिंग, MBA और फिर कॉर्पोरेट नौकरी यह वही सफर था जिसे समाज सफलता की पहचान मानता है।

हर पारिवारिक समारोह में IIT और बड़ी नौकरी पाने वाले लोगों की कहानियां सुनाई जाती थीं। लेकिन ऋषभ के मन में एक सवाल था क्या यही रास्ता वास्तव में उन्हें खुश रखेगा?

दूसरों की सफलता देखकर उठे सवाल

ऋषभ ने महसूस किया कि जिन लोगों ने समाज के हिसाब से बड़ी उपलब्धियां हासिल की थीं, उनमें से कई लोग अंदर से खुश नहीं दिखते थे। इसी बात ने उन्हें अपनी जिंदगी और फैसलों पर सोचने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने इंजीनियरिंग की जगह मुंबई के Mithibai College से Arts की पढ़ाई करने का फैसला किया। उस समय कई लोगों को लगा कि उन्होंने अपना करियर खराब कर लिया है।

एक क्लासरूम ने बदल दी सोच

बाद में ऋषभ Teach For India से जुड़े और मुंबई के मानखुर्द इलाके में बच्चों को पढ़ाने लगे। यही अनुभव उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ बना। उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ काम करते हुए उन्हें एहसास हुआ कि असली संतुष्टि सिर्फ बड़े पद या ऑफिस की सफलता में नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने में भी मिल सकती है।

कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ी, चुना अपना रास्ता

ऋषभ ने कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में भी काम किया। अच्छी सैलरी और अच्छे माहौल के बावजूद उन्हें महसूस हुआ कि कुछ कमी रह गई है। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर तीन महीने की बाइक यात्रा की। इस सफर ने उन्हें खुद को बेहतर समझने का मौका दिया।

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आज रचनात्मक दुनिया में बना रहे पहचान

अब ऋषभ हिमाचल प्रदेश के बीड़ में रहते हैं और लेखक, फोटोग्राफर व कलाकार के रूप में काम कर रहे हैं। साथ ही वह लोगों को अपनी रचनात्मकता से दोबारा जुड़ने में मदद करते हैं।

सफलता और मंजूरी में से चुनना सबसे मुश्किल

ऋषभ का कहना है कि उनके और उनके माता-पिता के सपने अलग नहीं थे। माता-पिता भी सिर्फ उनकी खुशी चाहते थे, लेकिन उन्हें अपनी खुशी तक पहुंचने का रास्ता खुद तलाशना था। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सफलता का मतलब हमेशा वही रास्ता चुनना नहीं होता जिसे दुनिया सही मानती है, बल्कि वह रास्ता चुनना होता है जो व्यक्ति को अंदर से संतुष्ट करे।

‘आपने देश की अंतरात्मा जगा दी, अब अनशन खत्म कीजिए’— शशि थरूर की सोनम वांगचुक से भावुक अपील

shashi tharoor appeals to sonam wangchuk

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने 18 दिन से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्होंने देश की अंतरात्मा जगा दी। ALSO READ: सोनम वांगचुक के अनशन पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस; कल तक मांगा जवाब

थरूर ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के नाम एक खुला पत्र लिखते हुए कहा कि मैं आज आपको एक राजनेता या सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में संबोधित कर रहा हूं जो भारतीय युवाओं की वर्तमान पीढ़ी के साथ हो रहे अन्याय से बेहद आहत है।

 

मैं आज आपको एक राजनेता या सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में संबोधित कर रहा हूं जो भारतीय युवाओं की वर्तमान पीढ़ी के साथ हो रहे अन्याय से बेहद आहत है।

 

उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए एक व्यक्तिगत मामला है। मेरा जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। मेरे पिता समाचार पत्र में एक वेतनभोगी कर्मचारी थे और मेरी मां एक गृहणी थीं, जिन्हें एक ही आय में तीन बच्चों को पढ़ाना-लिखाना था। हमारे जैसे परिवार के लिए, 'योग्यता' (मेरिट) कोई नारा नहीं थी। स्कॉलरशिप, निष्पक्ष परीक्षाएं, ईमानदारी से आने वाले परिणाम — यही एकमात्र जरिया थे जिससे एक वेतन पर तीन बच्चों के सपनों को पूरा किया जा सकता था।

थरूर ने कहा कि मैंने मुंबई और कोलकाता में स्कूल की पढ़ाई की, यहाँ दिल्ली में कॉलेज की पढ़ाई की, यूनिवर्सिटी टॉप की और आईआईएम (IIM) में दाखिला पाया — लेकिन इसके बजाय मैंने स्कॉलरशिप पर अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रति अपने जुनून को आगे बढ़ाने का फैसला किया। मुझे कुछ भी विरासत में नहीं मिला था; सब कुछ कड़ी मेहनत और हां, परीक्षाओं के बल पर कमाया गया था। इसलिए मैं जानता हूं कि एक निष्पक्ष और योग्यता-आधारित व्यवस्था ही निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के युवाओं के लिए आगे बढ़ने की एकमात्र सीढ़ी है। ALSO READ: 18 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की हालत गंभीर, 8.5 किलो वजन घटा; अनशन खत्म कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंचा मामला

 

पत्र में उन्होंने कहा कि जब वह सीढ़ी टूट जाती है (पेपर लीक होते हैं, परीक्षाएं रद्द होती हैं, भरोसा टूटता है) तो अमीर और ताकतवर लोगों के बच्चों को नुकसान नहीं होता। उनके पास दूसरी सीढ़ियाँ होती हैं। धोखा आपके सपनों और आपके परिवारों के बलिदानों के साथ (और दुखद रूप से, कुछ घरों में युवाओं की कीमती जानों के साथ) होता है।

 

कांग्रेस सांसद ने कहा कि जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए युवाओं और पूरे भारत में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करने वाले साथियों: यह देश आपकी आवाज सुन रहा है। आपका गुस्सा कोई अनुशासनहीनता नहीं है — यह उस पीढ़ी की पीड़ा है जिसने सब कुछ सही किया और फिर भी जिसे धोखा मिला। आप अकेले नहीं हैं।

 

और चुपचाप देख रहे करोड़ों युवा भारतीयों से मैं कहना चाहता हूं: आपकी पीढ़ी कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसे सिर्फ 'मैनेज' किया जाए। आप भारत के भविष्य का जवाब हैं। उम्मीद मत खोइए। यह सीढ़ी फिर से बनाई जाएगी — आपके द्वारा, और आपके साथ खड़े हर भारतीय द्वारा।

 

उन्होंने सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि आपने देश की अंतरात्मा को जगा दिया है; अनशन का मकसद भी यही होता है। आने वाले लंबे रास्ते के लिए भारत को आपकी आवाज की जरूरत है।

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि सोमवार से संसद का सत्र फिर से शुरू हो रहा है, ऐसे में हमारे पास हमारे लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच पर छात्रों के मुद्दों को उठाने का अवसर होगा। इस समस्या का समाधान वहीं होना चाहिए, न कि आमरण अनशन के जरिए। कृपया मेरी प्रार्थना स्वीकार करें।

 

थरूर ने सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि आप आगे बढ़ें और उस संवाद की शुरुआत करें जो हमारा लोकतंत्र अपने युवा नागरिकों का कर्जदार है। यह कमजोरी नहीं है; यह एक कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता है।

7100mAh बैटरी के साथ Motorola का 5G स्मार्टफोन लॉन्च, मिलेगा 50MP OIS कैमरा, जानें कीमत

क्या आप स्मार्टफोन लेने की सोच रहे हैं? अगर हां, तो Motorola ने आज भारत में अपना नया हैंडसेट Motorola Edge 70 Max लॉन्च किया है, जो कि कंपनी की बढ़ती Edge 70 लाइनअप का हिस्सा है। इस फोन में आपको बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट वाला AMOLED डिस्प्ले और दमदार कैमरा मिलेगा। इसके अलावा, यह स्मार्टफोन कंपनी प्रीमियम सेगमेंट में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए ड्यूरेबिलिटी, AI-पावर्ड फीचर्स और फास्ट चार्जिंग पर भी दांव लगा रही है। अब चलिए Motorola Edge 70 Max के स्पेसिफिकेशन्स, कीमत, लॉन्च ऑफर्स और उपलब्धता के बारे में डिटेल में जानते हैं।

Motorola Edge 70 Max: स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

Motorola Edge 70 Max में 6.8-इंच का Quad HD+ AMOLED डिस्प्ले है, जिसमें 144Hz रिफ्रेश रेट, HDR10+ सपोर्ट और Corning Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन मिलता है। इस फोन में एल्युमीनियम फ्रेम, IP68/IP69 वॉटर और डस्ट रेजिस्टेंस के साथ-साथ MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी भी दी गई है।

इस हैंडसेट में Qualcomm का Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट दिया गया है, साथ ही इसमें 12GB तक LPDDR5X RAM और 256GB UFS 4.1 स्टोरेज मिलती है। कंपनी ने इस स्मार्टफोन में 5500mm का वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम भी दिया है, जिसमें लिक्विड मेटल थर्मल जेल का इस्तेमाल किया गया है, ताकि भारी कामों के दौरान भी परफॉर्मेंस बनी रहे। इसके अलावा, इस डिवाइस में 7100mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी है, जो 90W वायर्ड चार्जिंग, 25W Qi2 मैग्नेटिक वायरलेस चार्जिंग और 5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

कैमरे की बात करें तो, इस फोन में OIS के साथ 50MP का Sony LYTIA 710 प्राइमरी कैमरा, 8MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा (जो मैक्रो शूटर का भी काम करता है) और 4K वीडियो रिकॉर्ड करने में सक्षम 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। यह फोन Hello UX के साथ Android 16 पर चलता है, और Motorola ने तीन साल के Android OS अपडेट और पांच साल के सिक्योरिटी पैच देने का वादा किया है।

Motorola Edge 70 Max की कीमत, सेल डेट और लॉन्च ऑफर्स

Motorola Edge 70 Max के 8GB RAM + 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की शुरुआती कीमत ₹54,999 है। वहीं, 12GB + 256GB मॉडल की कीमत ₹59,999 है। लॉन्च ऑफर्स के तहत, कंपनी चुनिंदा बैंकों के क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर ₹5,000 का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट दे रही है, जिससे इसकी असल खरीद कीमत कम हो जाती है।

बता दें कि यह स्मार्टफोन भारत में 20 जुलाई से Flipkart और Motorola के ऑफिशियल ऑनलाइन स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इच्छुक ग्राहक Motorola Edge 70 Max को Pantone से प्रेरित तीन कलर ऑप्शन में से चुन सकते हैं- Pantone Aqua Grey, Pantone Dark Shadow और Pantone Ice Melt।

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कुवैत ने अपना पहला 15 साल का गोल्डन वीजा भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को सौंपा! जानिए लुलु ग्रुप के चेयरमैन की पूरी कहानी

MA Yusuff Ali news: खाड़ी देशों में अपने बिजनेस का लोहा मनवाने वाले भारतीय मूल के दिग्गज कारोबारी और लुलु ग्रुप के चेयरमैन एमए यूसुफ अली के नाम एक और बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। कुवैत सरकार ने अपने नए लॉन्च किए गए 15 साल के गोल्डन रेजिडेंसी (गोल्डन वीजा) का पहला रिसीपिंट भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को चुना है। यह सम्मान कुवैत द्वारा निवेशकों, बिजनेस लीडर्स और वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए लॉन्ग-टर्म वीजा कार्यक्रम के औपचारिक रोलआउट के क्रम में किया गया है।

हमारे सहयोगी ‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत सिटी में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान कुवैत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और आंतरिक मंत्री शेख फहद यूसुफ सऊद अल-सबा ने लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के चेयरमैन और एमडी यूसुफ अली को यह सम्मान सौंपा।

कौन हैं एमए यूसुफ अली?

एमए यूसुफ अली खाड़ी क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली भारतीय मूल के व्यवसायियों में से एक हैं। यूसुफ अली रिटेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘लुलु ग्रुप इंटरनेशनल’ के संस्थापक हैं। केरल में जन्मे यूसुफ अली ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर लुलु को मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिटेल चेन में से एक बना दिया है। लुलु ग्रुप का बिजनेस आज खाड़ी देशों, एशिया और उससे आगे कई देशों में फैला हुआ है।

यह ग्रुप मुख्य रूप से हाइपरमार्केट्स, सुपरमार्केट्स, शॉपिंग मॉल्स और लॉजिस्टिक्स के कारोबार चलाता है। यूसुफ अली का यह बिजनेस नेटवर्क दुनिया भर में हजारों लोगों को रोजगार देता है। रिटेल के अलावा खाड़ी क्षेत्र के हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट क्षेत्रों में भी उनका भारी निवेश है।

कुवैत ने एमए यूसुफ अली को ही क्यों चुना?

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक, यह ऐतिहासिक फैसला देश की अर्थव्यवस्था में यूसुफ अली के लंबे समय से चले आ रहे योगदान को ध्यान में रखकर लिया गया है। लुलु ग्रुप ने कुवैत के रिटेल सेक्टर में अपनी एक बेहद मजबूत उपस्थिति स्थापित की है। इसके साथ ही इस ग्रुप ने कुवैत में फूड सप्लाई चेन को मजबूत करने, कंज्यूमर मार्केट का विस्तार करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

क्या है कुवैत का नया गोल्डन रेजिडेंसी प्रोग्राम?

यह गोल्डन रेजिडेंसी कार्यक्रम कुवैत की अर्थव्यवस्था को सिर्फ तेल पर निर्भर न रखकर उसका डाइवर्सिफाई करने की कोशिश से जुड़ा एक इनिशिएटिव है। इसके जरिए देश में बड़े निवेश और कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करने की योजना है। पारंपरिक निवास परमिट अक्सर एंप्लॉयर स्पॉन्सरशिप से जुड़े होते हैं और उन्हें बार-बार रिन्यू कराना पड़ता है। इनके उलट कुवैत का यह नया कार्यक्रम निवेशकों को लंबे समय की स्थिरता और अधिक फ्लेक्सिबिलिटी देता है।

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक इस पहल को इंटीरियर मिनिस्ट्री, कुवैत प्रत्यक्ष निवेश संवर्धन प्राधिकरण और नागरिक सूचना के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण (PACI) के बीच आपसी समन्वय के जरिए तैयार किया गया है।

इस गोल्डन वीजा की खासियतें जान लीजिए

कुवैत का यह नया वीजा कार्यक्रम प्रमुख रूप से बड़े निवेशकों, उद्यमियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अत्यधिक कुशल पेशेवरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

15 साल का परमिट: इसके तहत योग्य लोगों को 15 साल का रिन्यूएबल (नवीकरणीय) रेजिडेंसी परमिट दिया जाता है।

लॉन्ग-टर्म स्थिरता: बार-बार वीजा रिन्यू कराने की झंझटों से मुक्ति मिलती है।

एंप्लॉयर पर निर्भरता नहीं: यह वीजा एंप्लॉयर स्पॉन्सर्ड वीजा पर निर्भरता को काफी कम करता है।

परिवार को भी लाभ: इस योजना के तहत मिलने वाले रेजिडेंसी के लाभ मुख्य लाभार्थी के साथ-साथ उसके करीबी परिवार के सदस्यों को भी मिल सकते हैं।

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