कल का मौसम : अगले 12 घंटों में बदलेगा इन 22 राज्यों का मिजाज! IMD ने जारी किया भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

Weather conditions in these 22 states set to change over next 12 hours, IMD issues alert for heavy rain   and thunderstorms

देशभर में मॉनसून एक बार फिर से बेहद आक्रामक रूप ले चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज दोपहर ताजा बुलेटिन जारी करते हुए अगले 12 से 24 घंटों के भीतर देश के 22 राज्यों में मूसलाधार बारिश का ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है। अगर आप भी कल यानी 16 जुलाई को किसी जरूरी काम या यात्रा के लिए घर से बाहर निकलने वाले हैं, तो पहले अपने शहर और राज्य के मौसम का हाल जरूर जान लें।

 

बंगाल की खाड़ी में एक्टिव हुआ नया सिस्टम

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में एक नया कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure Area) सक्रिय हो गया है। सैटेलाइट तस्वीरों से साफ दिख रहा है कि समंदर से भारत के मैदानी इलाकों की तरफ बादलों का एक विशाल 'व्हाइट जोन' तेजी से बढ़ रहा है।

 

इस सिस्टम के कारण मॉनसून की ट्रफ लाइन (Monsoon Trough) अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसक गई है, जिससे मध्य, उत्तर और पश्चिमी भारत में भारी नमी वाली हवाएं टकरा रही हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 12 घंटों के भीतर इन हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है।

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किन 22 राज्यों में है भारी बारिश की चेतावनी?

IMD द्वारा जारी आधिकारिक चेतावनी के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान भारत के तीन बड़े हिस्सों में मौसम का सबसे उग्र रूप देखने को मिल सकता है :

 

1. उत्तर और मध्य भारत (North & Central India)

दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश : दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद सहित पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में कल सुबह से ही रुक-रुक कर तेज बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

 

मध्य प्रदेश और राजस्थान : एमपी के पूर्वी हिस्सों (जैसे जबलपुर, रीवा) और राजस्थान के दक्षिणी जिलों (जैसे उदयपुर, कोटा) में भारी से अत्यंत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। यहाँ कुछ इलाकों में 120mm तक बारिश दर्ज की जा सकती है।

 

पंजाब और हरियाणा : इन राज्यों के तराई वाले इलाकों में तेज हवाओं के साथ मध्यम बारिश की उम्मीद है।

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2. पश्चिमी और तटीय क्षेत्र (West & Coastal Regions)

महाराष्ट्र और मुंबई : कोंकण और मुंबई के तटीय इलाकों में समुद्र में ऊंची लहरें उठने और निचले इलाकों में जलजमाव (Waterlogging) की आशंका जताई गई है। मछुआरों को अगले दो दिनों तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

 

गुजरात और गोवा : गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में मानसून की सक्रियता बढ़ने से भारी बारिश का दौर शुरू होने वाला है।

 

3. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत (East & Northeast India)

ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार : नए मौसमी सिस्टम का सबसे पहला असर ओडिशा और बंगाल के तटीय जिलों पर दिखेगा। यहां आज रात से ही मूसलाधार बारिश शुरू होने का अनुमान है।

 

असम और मेघालय : पूर्वोत्तर के इन राज्यों में पहाड़ी इलाकों पर भूस्खलन (Landslide) की चेतावनी जारी की गई है।

 

IMD की एडवायज़री : भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए मौसम विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें, बिजली के खंभों के पास खड़े न हों और यात्रा पर निकलने से पहले स्थानीय ट्रैफिक व वेदर अपडेट्स की जांच अवश्य कर लें।

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आपके शहर में कल कैसा रहेगा तापमान?

बारिश और ठंडी हवाओं के चलने से उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में उमसभरी गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी। दिल्ली-NCR में अधिकतम तापमान गिरकर 31°C और न्यूनतम तापमान 25°C के आसपास रहने का अनुमान है। वहीं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री सेल्सियस नीचे जा सकता है, जिससे मौसम खुशनुमा बना रहेगा।

 

मौसम की पल-पल की लाइव रिपोर्ट और अपने जिले के सटीक पूर्वानुमान के लिए हमारे साथ बने रहें।

हार से तिलमिलाई इंग्लैंड ने इस पेस ऑलराउंडर को जोड़ा ODI टीम में

पहले एकदिवसीय मैच में भारत से 6 विकेट की एकतरफा हार से इंग्लैंड तिलमिला गई है। ऐसे में इंग्लैंड ने सैम करन गस एटकिंसन के बाद एक और तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर को जगह दी है। T-20I सीरीज और एकदिवसीय सीरीज में आदिल रशीद ने महंगी गेंदबाजी की है। पहले एकदिवसीय मैच में भी स्पिन का हवाला देते हुए भी कप्तान ब्रूक ने उनसे सिर्फ 5 ओवर ही करवाए। ऐसे में माना जा रहा है कि यह तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर कल होने वाले  एकदिवसीय मैच में उनकी जगह खेलेगा।

तेज़ गेंदबाज़ ब्राइडन कार्स को भारत के खिलाफ़ वनडे सीरीज़ के बाकी मैचों के लिए इंग्लैंड की टीम में शामिल किया गया है। 30 साल के कार्स कलाई और कोहनी की चोट के कारण बाहर चल रहे थे, लेकिन हाल ही में डरहम के लिए तीन टी 20 ब्लास्ट मैचों में खेलकर उन्होंने वापसी की। इससे पहले, नेट्स में ट्रेनिंग के दौरान दाहिने हाथ में चोट लगने के कारण कार्स IPL नहीं खेल पाए थे। उनकी चोट के बारे में कोई खास जानकारी नहीं दी गई थी।

कार्स ने इंग्लैंड के लिए आखिरी बार सिडनी में न्यू ईयर एशेज़ टेस्ट के दौरान खेला था। इंग्लैंड के लिए उनका आखिरी वनडे नवंबर 2025 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ था। उन्होंने अब तक 30 वनडे मैच खेले हैं और 40.44 की औसत से 34 विकेट लिए हैं।सीरीज़ के बाकी दो मैच कार्डिफ़ (16 जुलाई) और लॉर्ड्स (19 जुलाई) में खेले जाएंगे।

इंग्लैंड टीम: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ़्रा आर्चर, गस एटकिंसन, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, ब्राइडन कार्स, जेम्स कोल्स, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, साकिब महमूद, आदिल राशिद, जो रूट, जोश टोंग।

उफनती नदी में फंसी Mahindra Thar, युवक ने जान जोखिम में डालकर बचाई 4 लोगों की जिंदगी, देखें पूरा वीडियो

दार्जिलिंग से सामने आई एक घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। यह सिर्फ एक रेस्क्यू की कहानी नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में दिखाई गई बहादुरी और इंसानियत की मिसाल भी है। कुछ ही पलों में हालात इतने बदल गए कि एक सामान्य सफर जानलेवा बन गया। तभी स्थानीय लोगों ने बिना देर किए मदद का हाथ बढ़ाया और एक युवक ने अपनी जान की परवाह किए बिना ऐसा साहस दिखाया, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। घटना का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे मानवता, सूझबूझ और हिम्मत का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

मानसून के दौरान नदियों और पहाड़ी इलाकों में बढ़ते जोखिम के बीच यह घटना एक अहम संदेश भी देती है कि मौसम की चेतावनियों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है, जबकि समय पर की गई मदद कई जिंदगियां बचा सकती है।

पिकनिक का प्लान, लेकिन बीच नदी में फंस गई Thar

मंगलवार शाम दार्जिलिंग के लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट दुधिया (Dudhia) में दो युवक और दो युवतियां अपनी महिंद्रा थार से बालासन नदी पार करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान पहाड़ों में हुई तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और SUV बीच धारा में फंस गई।

बढ़ते पानी के बीच छत पर चढ़कर बचाई जान

जब वाहन आगे नहीं बढ़ सका, तो चारों युवक-युवतियां अपनी जान बचाने के लिए Thar की छत पर चढ़ गए। चारों ओर तेज बहाव और लगातार बढ़ते जलस्तर ने स्थिति को बेहद खतरनाक बना दिया।

स्थानीय युवक बना फरिश्ता

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद ग्रामीण मदद के लिए जुट गए। इसी बीच एक स्थानीय युवक बिना अपनी जान की परवाह किए उफनती नदी में कूद पड़ा। तेज बहाव से जूझते हुए वह SUV तक पहुंचा और एक-एक कर सभी को सुरक्षित किनारे तक ले आया।

रेस्क्यू के दौरान बढ़ गई थी मुश्किल

बचाव अभियान के दौरान एक युवती तेज बहाव में कुछ दूर तक बह गई, लेकिन स्थानीय लोगों की सतर्कता और युवक की बहादुरी से उसे भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ।

वीडियो हुआ वायरल, लोगों ने बहादुर युवक को किया सलाम

पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग स्थानीय युवक की बहादुरी और निस्वार्थ मदद की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि उसकी सूझबूझ और साहस ने चार परिवारों को बड़ी त्रासदी से बचा लिया।

मौसम विभाग ने पहले ही जारी की थी चेतावनी

इस घटना के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पश्चिम बंगाल के कई इलाकों, खासकर दार्जिलिंग के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विभाग ने नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने और भूस्खलन की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

पहले भी खतरनाक साबित हो चुकी है बालासन नदी

यह पहली बार नहीं है जब मानसून में बालासन नदी ने खतरा पैदा किया हो। पिछले महीने भी नदी का जलस्तर बढ़ने से दुधिया का अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे सिलिगुड़ी और मिरिक के बीच संपर्क प्रभावित हुआ था। यह पुल भी पुराने लोहे के पुल के बह जाने के बाद बनाया गया था।

CLAT 2027 Registration: कर लें तैयारी जल्द जारी होगा क्लैट 2027 का नोटिफिकेशन, जानें प्रक्रिया, जरूरी योग्यता और परीक्षा का पैटर्न

CLAT 2027 Registration: कानून के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए क्लैट परीक्षा क्वालिफाई करना जरूरी होता है। इसके स्कोर के आधार पर उन्हें देशभर के लॉ कॉलेज और यूनिवर्सिटी में स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। इस परीक्षा के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन कंसोर्टियम नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (CNLU) जारी करता है। पिछले साल क्लैट परीक्षा दिसंबर में हुई थी, लेकिन इसके लिए पंजीकरण 01 अगस्त 2025 से शुरू हुए थे। इसलिए पिछले ट्रेंड के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि सीएनएलयू जल्द ही शैक्षिक सत्र 2027-28 के लिए क्लैट का नोटिफिकेशन जारी कर सकता है। इस प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने के इच्छुक परीक्षार्थी आधिकारिक वेबसाइट consortiumofnlus.ac.in पर टेस्ट के लिए रजिस्टर कर सकेंगे।

क्लैट 2027: नोटिफिकेशन कब आएगा?

पिछले साल के ट्रेंड्स को देखते हुए, कैंडिडेट उम्मीद कर सकते हैं कि क्लैट 2027 का नोटिफिकेशन 20 जुलाई, 2026 के आसपास जारी होगा। आवेदन पोर्टल अगस्त में खुल सकता है और अक्टूबर, 2026 तक खुला रहेगा।

क्लैट 2027 के लिए जरूरी योग्यता

क्लैट के जरिए लॉ यूजी प्रोग्राम में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों को 10+2 या इसके बराबर की परीक्षा कम से कम 45% अंकों के साथ पास करना जरूरी है। वहीं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PwD) उम्मीदवारों को इस परीक्षा में शामिल होने के लिए 12वीं कक्षा में 40% अंक होना अनिवार्य है। जबकि, लॉ पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश के इच्छुक उम्मीदवारों का 50% अंक के साथ एलएलबी डिग्री होना अनिवार्य है। SC/ST/PwD वालों को 45% अंक या इसके बराबर ग्रेड लाना होगा।

क्लैट 2027 आवेदन प्रक्रिया

  • क्लैट 2027 के लिए अप्लाई करने के लिए, ऑफिशियल वेबसाइट consortiumofnlus.ac.in पर जाएं।
  • होमपेज पर, “CLAT 2027” लिंक पर क्लिक करें।
  • अपना मोबाइल नंबर और पासवर्ड डालें और संबंधित प्रोग्राम के लिए अप्लाई करें।
  • जरूरी डॉक्यूमेंट्स, डिटेल्स सबमिट करें और आप क्लैट 2027 परीक्षा के लिए सफलतापूर्वक रजिस्टर करें।

क्लैट 2027 परीक्षा पैटर्न

क्लैट यूजी परीक्षा पैटर्न

क्लैट यूजी परीक्षा में उम्मीदवारों की कॉम्प्रिहेंशन और रीजनिंग स्किल्स के साथ-साथ करंट अफेयर्स की जानकारी भी जाची जाती है। क्लैट यूजी दो घंटे की होगी, जिसमें 120 बहुविकल्पीय सवाल होंगे, हर सवाल एक नंबर का होगा। गलत जवाबों के लिए 0.25 नंबर काटे जाएंगे। इसमें इन विषयों से सवाल शामिल होंगे :

  • इंग्लिश लैंग्वेज
  • करंट अफेयर्स, जिसमें जनरल नॉलेज भी शामिल है
  • लीगल रीजनिंग
  • लॉजिकल रीजनिंग
  • क्वांटिटेटिव टेक्नीक्स

क्लैट पीजी परीक्षा पैटर्न

पोस्टग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए क्लैट परीक्षा में अंडरग्रेजुएट जैसा ही पैटर्न होता है, लेकिन इसमें बहुविकल्पीय सवालों के बजाय ऑब्जेक्टिव-टाइप सवाल होते हैं। इसमें सिर्फ एक सेक्शन होगा, जिसमें अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के जरूरी विषयों और कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ, ज्यूरिस्प्रूडेंस, एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ, कॉन्ट्रैक्ट लॉ, टॉर्ट्स, फैमिली लॉ, क्रिमिनल लॉ, प्रॉपर्टी लॉ, कंपनी लॉ, पब्लिक इंटरनेशनल लॉ, टैक्स लॉ, एनवायर्नमेंटल लॉ, और लेबर और इंडस्ट्रियल लॉ से सवाल होंगे।

CBSE’s 3-language policy: अंतरिम राहत से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सर्वोच्च अदालत ने पूछा, क्या अंग्रेजी को भारतीय भाषा मान लिया गया है?

भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका:रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई की तैयारी; संसद में बिल पेश, 5 देश निशाने पर

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी सीनेट में एक बिल पेश किया गया है, जिसमें भारत, चीन समेत पांच देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। इनके अलावा हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान शामिल हैं। बिल के मुताबिक, इन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकेगा। साथ ही रूस की ऊर्जा, वित्तीय और रक्षा व्यवस्था पर भी नए प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। इससे पहले बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए टैरिफ लगाएगा, क्योंकि वह रूस से तेल खरीदकर उसकी कमाई बढ़ा रहा है। इस कदम का मकसद रूस के तेल कारोबार पर आर्थिक दबाव बनाना और उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर करना है। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, ओलिगार्क्स, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। रूस पर सख्ती वाले बिल को दोनों दलों का समर्थन सीनेट में पेश रूस-विरोधी टैरिफ बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिला है। इसे अमेरिकी राजनीति में ‘बाइपार्टिसन बिल’ कहा जाता है, यानी ऐसा प्रस्ताव जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सहमत हों। आमतौर पर अमेरिका में कई बड़े विधेयक राजनीतिक मतभेदों की वजह से अटक जाते हैं। लेकिन जब दोनों दल किसी बिल के साथ खड़े होते हैं, तो उसके कांग्रेस से पारित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, बिल को कानून बनने के लिए अभी सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) दोनों से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर ही यह कानून बनेगा। बिल को दिवंगत सांसद लिंडसे ग्राहम ने पेश किया था इस बिल को सबसे पहले रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अप्रैल 2025 में पेश किया था। अब तक 26 सीनेटर इस बिल को अपना समर्थन दे चुके हैं और आगे समर्थन बढ़ने की उम्मीद है। 11 जुलाई को लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया था। निधन से एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेन दौरे के दौरान कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बिल को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। ट्रम्प ने भी व्हाइट हाउस में कहा, “यह लिंडसे के सम्मान में है। यह उनका सबसे बड़ा मुद्दा था और इसके कानून बनने की अच्छी संभावना है।” कैपिटल हिल में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के सीनेटर एक साथ नजर आए। उन्होंने इस बिल को ग्राहम के लिए श्रद्धांजलि बताया।

CBSE’s 3-language policy: अंतरिम राहत से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सर्वोच्च अदालत ने पूछा, क्या अंग्रेजी को भारतीय भाषा मान लिया गया है?

CBSE’s 3-language policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों में 6ठी कक्षा से 3 भाषा नीति लागू करने का फैसला किया है। बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की गई है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि यह दोबारा देखने लायक है कि क्या इंग्लिश को देसी भाषा माना जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि यह हिंदी और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के संवैधानिक मकसद को आगे बढ़ाने वाला कदम लगता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत तीन-भाषा पॉलिसी को लागू करने को चुनौती देने वाली पिटीशन के एक बैच पर सुनवाई कर रही थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने नहीं दी अंतरिम राहत

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि डिटेल में सुनवाई के बिना ऐसी राहत पर विचार नहीं किया जा सकता। अब इस मामले की सुनवाई 22 जुलाई को होगी। साथ ही कोर्ट ने केंद्र और सीबीएसई को अपने जवाब फाइल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणि में कहा कि देसी भाषाओं के नाम और क्या इंग्लिश को उनमें से एक माना जा सकता है? इस सवाल पर फिर से सोचने की जरूरत हो सकती है।

पिटीशनर्स ने प्रैक्टिकल चुनौतियों को उठाया

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया कि छात्रों को 22 भाषाओं में से चुनाव करने की सुविधा के बावजूद तीन-भाषा पॉलिसी को लागू करने से गंभीर प्रैक्टिकल चुनौतियां आएंगी। उन्होंने कहा कि स्कूलों को इतनी सारी भाषाओं के लिए काबिल टीचर नियुक्त करने और जरूरी आधारभूत संरचना तैयार करने में मुश्किल होगी। उन्होंने यह भी बताया कि एनसीईआरटी ने 1 जुलाई तक सभी 22 भाषाओं के लिए शिक्षा सामग्री अपलोड करने का वादा किया था, लेकिन अभी सिर्फ तीन भाषाओं के लिए टेक्स्टबुक्स उपलब्ध हैं। पिटीशनर्स ने तर्क दिया कि यह निर्देश तब दिया है जब सीबीएसई ने मौजूदा शैक्षिक सत्र से कक्षा 9 के लिए तीन-भाषा फॉर्मूला जरूरी करने वाला अपना पिछला सर्कुलर वापस ले लिया है।

केंद्र ने दिया नेशनल एजुकेशन पॉलिसी का हवाला

केंद्र और सीबीएसई की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि सरकार और शिक्षा बोर्ड 10 दिनों के अंदर अपने विस्तृत जवाब दाखिल करेंगे। योजना का बचाव करते हुए, केंद्र ने कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 भारतीय मूल्यों पर आधारित एक शिक्षा व्यवस्था की कल्पना करती है। इसका मकसद देश को एक बराबर और जीवंत नॉलेज सोसाइटी में बदलना है।

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Bank Holiday: कल से अगले 2 दिन तक बैंकों पर लगेगा ताला! घर से निकलने से पहले देख लें ये छुट्टियों की लिस्ट

Bank Holiday Alert: अगर आपको अगले दो दिनों में बैंक शाखा जाकर कोई जरूरी काम निपटाना है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। कल और परसों यानी 16 और 17 जुलाई 2026 को देश के कुछ राज्यों में बैंकों में कामकाज नहीं होगा।

हालांकि, आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह छुट्टियां पूरे देश में नहीं हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार, ये छुट्टियां केवल चुनिंदा राज्यों में ही लागू रहेंगी। आइए जानते हैं कि इन दो दिनों में किन राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं और इसकी वजह क्या है।

16 जुलाई, गुरुवार को कहां बंद रहेंगे बैंक?

16 जुलाई, गुरुवार को देश के दो राज्यों में स्थानीय त्योहारों और विशेष दिवस के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी:

उत्तराखंड: इस दिन उत्तराखंड में हरेला (Harela) पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। इस कारण राज्य के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंक बंद रहेंगे।

मेघालय: मेघालय में यू तिरोत सिंह डे (U Tirot Sing Day) के अवसर पर बैंकों में छुट्टी घोषित की गई है।

अन्य राज्य: इन दो राज्यों को छोड़कर देश के बाकी सभी राज्यों में बैंक सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे और काम सुचारू रूप से चलेगा।

17 जुलाई, शुक्रवार को कहां रहेगी छुट्टी?

17 जुलाई, शुक्रवार को भी एक राज्य में बैंक हॉलिडे रहने वाला है:

मेघालय: यू तिरोत सिंह डे के अवसर पर लगातार दूसरे दिन भी मेघालय में बैंक बंद रहेंगे।

अन्य राज्य: मेघालय को छोड़कर भारत के अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैंक खुले रहेंगे, जिससे आम जनता को कोई परेशानी नहीं होगी।

क्या ऑनलाइन बैंकिंग और एटीएम सेवाओं पर पड़ेगा असर?

बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों की सहूलियत के लिए डिजिटल सेवाएं पूरी तरह चालू रहेंगी। यूपीआई पेमेंट सेवाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी। मोबाइल बैंकिंग और नेट बैंकिंग के जरिए आप आसानी से फंड ट्रांसफर कर सकेंगे। पैसे निकालने या जमा करने के लिए एटीएम (ATM) और डिजिटल डिपॉजिट मशीनें हमेशा की तरह काम करेंगी।

New IRCTC Website: आज लाइव हो रही है आईआरसीटीसी की नई वेबसाइट, 5 गुना तेजी से बुक होंगे तत्काल टिकट! मिलेंगे ये स्मार्ट फीचर्स

New IRCTC Website: भारतीय रेलवे के जरिए सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए आज का दिन बेहद खास है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) आज यानी 15 जुलाई को अपनी नए सिरे से डिजाइन की गई टिकट बुकिंग वेबसाइट को लाइव करने जा रहा है। इस नए और अपग्रेडेड प्लेटफॉर्म से यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग को बेहद तेज, आसान और सुलभ एक्सपीरियंस वाला होने का दावा किया जा रहा है।

भारतीय रेलवे डिजिटल सेवाओं को आधुनिक बनाने के प्रयासों के तहत यह बड़ा अपग्रेड करने जा रहा है। दरअसल पीक आवर्स (खास तौर पर तत्काल बुकिंग के समय) के दौरान वेबसाइट के धीमे होने और टिकट बुकिंग फेल होने को लेकर यात्री लगातार शिकायतें कर रहे थे। दावा किया जा रहा है कि नई वेबसाइट इन सभी समस्याओं को काफी हद तक दूर कर देगी। आइए जानते हैं कि नई वेबसाइट में क्या बदलाव किए गए हैं और यात्रियों को कौन से नए स्मार्ट फीचर्स मिलेंगे।

5 गुना तेज बुकिंग और भारी-भरकम ट्रैफिक संभालने की क्षमता

नई वेबसाइट का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सुधार इसकी ट्रैफिक संभालने की क्षमता में किया गया है। रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक नया प्लेटफॉर्म अब हर मिनट 1.5 लाख से अधिक टिकट बुकिंग प्रोसेस करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। यह मौजूदा सिस्टम की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है। अभी का सिस्टम प्रति मिनट सिर्फ 32000 बुकिंग ही संभाल पाता था।

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) के बैकएंड को भी मजबूत किया गया है। अब यह प्रति मिनट 40 लाख से अधिक पूछताछ को सपोर्ट कर सकता है। पुराना सिस्टम सिर्फ 4 लाख पूछताछ ही संभाल पाता था। टिकट बुकिंग और दूसरी कैपिसिटी में हुई इस बढ़ोतरी के बाद पीक आवर्स में वेबसाइट के धीमे होने, पेमेंट फेल होने और बुकिंग एरर जैसी समस्याओं में भारी कमी आएगी।

यात्रियों के लिए नए और बेहद स्मार्ट फीचर्स

प्रदर्शन में सुधार के अलावा आईआरसीटीसी की इस नई वेबसाइट में यात्रियों की सुविधा के लिए कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं। अब यात्री टिकट बुकिंग के दौरान अपनी पसंद की सीट चुन सकेंगे। पहले यात्रियों को पूरी तरह से ऑटोमैटिक सीट आवंटन पर निर्भर रहना पड़ता था। इसमें एक फेयर कैलेंडर फीचर जोड़ा गया है। इसकी मदद से यात्री टिकट बुक करने से पहले अलग-अलग तारीखों के किरायों की तुलना कर सकेंगे। यह उन यात्रियों के लिए बेहद फायदेमंद होगा जिनके सफर की तारीखें फ्लेक्सिबल हैं और जो कम किराये में सफर करना चाहते हैं।

बुकिंग इंटरफेस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि अब स्लीपर, एसी 3 टियर और एसी 2 टियर जैसी कई श्रेणियों की सीट उपलब्धता को एक ही स्क्रीन पर देखा जा सकेगा। इसके लिए यात्रियों को बार-बार अलग-अलग टैब बदलने की जरूरत नहीं होगी।

आसान पहुंच और बेहतर यूजर एक्सपीरियंस

नई वेबसाइट कई भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करेगी। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों के लिए अपनी भाषा में टिकट बुक करना आसान हो जाएगा। छात्रों, दिव्यांगजनों और मरीजों के लिए दी जाने वाली कंसेशन बुकिंग सेवाओं को अब एक ही यूनीफाइड सिस्टम में जोड़ दिया गया है।

वेबसाइट के इंटरफेस को काफी सुव्यवस्थित और साफ-सुथरा बनाया गया है। अब टिकट बुक करते समय यात्रियों को गैर-जरूरी पॉप-अप विज्ञापनों, बैनरों और बार-बार आने वाले कैप्चा वेरिफिकेशन से परेशान नहीं होना पड़ेगा। इससे बुकिंग की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी।

रेलवे के बड़े डिजिटल कायाकल्प का हिस्सा

आईआरसीटीसी की इस नई वेबसाइट का लॉन्च होना भारतीय रेलवे में चल रहे एक बड़े डिजिटल बदलाव का हिस्सा है। यात्री सेवाओं में सुधार के साथ-साथ रेलवे ने हाल ही में बुनियादी ढांचे, माल ढुलाई संचालन और प्रोजेक्ट्स को पूरा करने से जुड़े कई बड़े सुधारों का भी ऐलान किया है।

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जम्मू-कश्मीर में क्यों बढ़ रही हैं बादल फटने की घटनाएं? जुलाई में 15 बार फटे बादल, वैज्ञानिकों ने बताई चौंकाने वाली वजह

cloud burst cases increased in Jammu kashmir

लंबे सूखे के बाद इंद्र देवता जम्‍मू कश्‍मीर पर कुछ मेहरबान तो हुए पर बादल फटने की लगातार हो रही घटनाएं अब डराने लगी हैं। यह डर इसलिए है क्‍योंकि जम्मू कश्मीर में इस महीने अब तक कम से कम 15 बार बादल फटने की घटनाएं हुई हैं, जिनकी वजह से कई जिलों में अचानक बाढ़, कीचड़ बहने और जमीन खिसकने (लैंडस्लाइड) की घटनाएं हुई हैं। ALSO READ: अब वैष्‍णो देवी चढ़ावे में घोटाला! 550 करोड़ की चांदी के गबन का आरोप

 

बादल फटने से भारी तबाही

इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जि‍ले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई। 
 

इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।

 

7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।

चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल 

बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।

 

वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं आम होती जा रही हैं क्योंकि गर्म वायुमंडलीय स्थितियों के कारण सीमित क्षेत्र में बरसने से पहले अधिक नमी जमा हो जाती है। लद्दाख के मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सोनम लोटस के बकौल, बादल फटना बहुत ही स्थानीय घटनाएं हैं, लेकिन हिमालयी क्षेत्र में कम समय में भारी बारिश का पैटर्न अधिक बार देखा जा रहा है। ALSO READ: Weather Update : उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश पर लगा ब्रेक, इन राज्‍यों में बढ़ा तापमान, जानें देशभर का मौसम

 

इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन' में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।

 

उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास। 

रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, ​​जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।

 

मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
 

जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।