यूरिया के मामले में 100% आत्मनिर्भर बनेगा भारत! 8-9 नए प्लांट और 10 मिलियन टन कैपिसिटी का ये है पूरा प्लान

भारत को खेती-किसानी और फर्टिलाइजर (उर्वरक) के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने आज एक बड़ा फैसला लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 (NIPU-2026) को मंजूरी दे दी गई है। इस नई नीति के तहत देश में 8 से 9 नए यूरिया प्लांट स्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है। इससे भारत की आयातित (इंपोर्टेड) यूरिया पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस नई निवेश नीति से देश में सालाना लगभग 1 करोड़ मीट्रिक टन (10 मिलियन टन) नई यूरिया उत्पादन क्षमता जुड़ेगी।

यूरिया का मौजूदा गणित: मांग, उत्पादन और 25% का गैप

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश में यूरिया की जरूरत और उत्पादन के मौजूदा आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि नई नीति की जरूर क्यों पड़ी। अभी भारत में यूरिया की कुल मांग 40 मिलियन टन है। इसके मुकाबले घरेलू उत्पादन क्षमता लगभग 30 मिलियन टन (वर्तमान घरेलू उत्पादन क्षमता करीब 26.9 मिलियन टन) है। मांग और आपूर्ति के बीच इस 10 मिलियन टन के अंतर (सप्लाई गैप) को पूरा करने के लिए भारत को हर साल भारी मात्रा में यूरिया का आयात करना पड़ता है। यह गैप कुल मांग का लगभग 25 प्रतिशत है। देश में यूरिया की आवश्यकता में हर साल 5 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में यह नई नीति देश की संपूर्ण यूरिया आवश्यकता को स्थानीय स्तर पर पूरा करने में मदद करेगी।

प्राकृतिक गैस आधारित होंगे 8-9 नए प्लांट, प्रस्ताव तैयार

सरकार के अनुसार नई निवेश नीति के तहत जिन 8-9 नए यूरिया प्लांटों की स्थापना की जाएगी वे प्राकृतिक गैस आधारित होंगे। इस परियोजना के लिए सरकार और निजी क्षेत्र दोनों की तरफ से प्रस्ताव मिल चुके हैं। इससे पहले लागू की गई न्यू इन्वेस्टमेंट पॉलिसी (NIP)-2012 के तहत पिछले एक दशक में देश में छह नए यूरिया प्लांट शुरू किए गए थे। इनमें से चार प्लांट सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के संयुक्त उद्यम के माध्यम से और दो प्लांट निजी फर्मों द्वारा स्थापित किए गए थे। इससे यूरिया के आयात पर निर्भरता काफी कम हुई थी। अब NIPU-2026 इसी नीति का एक विस्तारित रूप है।

नीति के 3 मजबूत स्तंभ

कंपनियों और निवेशकों को आकर्षित करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए इस नई नीति को तीन मुख्य स्तंभों पर तैयार किया गया है:

लागत संरचना का संशोधन (पारदर्शिता): सब्सिडी की गणना को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए इसमें निश्चित लागत और परिवर्तनीय लागत को पूरी तरह से अलग-अलग कर दिया गया है।

12-16% रिटर्न की गारंटी: यूरिया प्लांट लगाने वाली कंपनियों के लिए इक्विटी पर 12 से 16 प्रतिशत का सुनिश्चित रिटर्न तय किया गया है।

विदेशी मुद्रा जोखिम से सुरक्षा: विदेशी मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करने के लिए व्यवस्था की गई है। इसके तहत चार साल के बाद तत्कालीन विनिमय दरों के आधार पर निश्चित लागतों को रुपये में परिवर्तित कर दिया जाएगा।

₹250 करोड़ की बड़ी बचत: सरकार के मुताबिक नीति में किए गए इन सुधारात्मक बदलावों से प्रत्येक यूरिया प्लांट के लिए 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय कीमतों से सुरक्षित रहेंगे भारतीय किसान

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकार की व्यापक उर्वरक रणनीति को रेखांकित करते हुए भरोसा दिलाया कि वैश्विक स्तर पर फर्टिलाइजर की कीमतों में आने वाले उछाल और उतार-चढ़ाव से भारतीय किसानों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। सरकार द्वारा लगातार दी जा रही सब्सिडी सहायता के माध्यम से किसानों पर वैश्विक कीमतों के बढ़ने का कोई असर नहीं पड़ने दिया गया है और आगे भी उन्हें यह सुरक्षा मिलती रहेगी।

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कैबिनेट के 7 बड़े फैसले: यूरिया के लिए नई पॉलिसी से लेकर सेमीकंडक्टर तक 2.19 लाख करोड़ खर्च का ये है पूरा प्लान

Cabinet approves Rs 2.19 lakh cr projects: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार 15 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट की एक बेहद अहम बैठक हुई। इसमें देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि क्षेत्र को रफ्तार देने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए। कैबिनेट ने एक साथ 7 बड़े फैसलों को मंजूरी दी है। इनके तहत कुल 2 लाख 19 हजार 353 करोड़ रुपये की परियोजनाओं और पॉलिसियों को हरी झंडी दिखाई गई है। कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन फैसलों की विस्तृत जानकारी दी।

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक इन फैसलों में सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (Semicon 2.0), मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और भारत को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 जैसे बड़े नीतिगत कदम शामिल हैं।

फैसला 1 और 2: वाराणसी के लिए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि आज के पहले दो बड़े फैसले वाराणसी (काशी) में बुनियादी ढांचे के विकास के एक नए दृष्टिकोण से जुड़े हुए हैं। शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है:-

वरुणा नदी के किनारे एलिवेटेड कॉरिडोर: कैबिनेट ने वरुणा नदी के किनारे 10998 करोड़ रुपये की लागत से एक 6/4-लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी है।

गंगा नदी के किनारे एलिवेटेड कॉरिडोर: इसके साथ ही गंगा नदी के किनारे 14,448 करोड़ रुपये की लागत से एक 6-लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर के विकास को भी हरी झंडी दी गई है।

फैसला 3 और 4: सेमीकंडक्टर 2.0 और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को महा-बूस्ट

देश को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने के लिए सरकार ने इस कैबिनेट बैठक में दो सबसे बड़े वित्तीय आवंटन किए हैं:-

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 1 लाख 27 हजार 500 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ ‘सेमीकंडक्टर 2.0’ को मंजूरी दी है। सरकार का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS): मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ा दूसरा बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए 62500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

फैसला 5: यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए नई नीति

कृषि क्षेत्र और किसानों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026’ को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य भारत को यूरिया उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह एक नीतिगत मंजूरी है, इसलिए कैबिनेट के फैसलों की वित्तीय तालिका में इसके लिए अलग से कोई विशिष्ट वित्तीय आवंटन दर्ज नहीं किया गया है।

फैसला 6 और 7: रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट

लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कैबिनेट ने रेल नेटवर्क के विस्तार से जुड़ी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। कैबिनेट ने 2542 करोड़ रुपये की लागत से पारादीप-हरिदासपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण काम को मंजूरी दी है। इसके अलावा डांगोआपोसी और राजखरसवां के बीच चौथी रेलवे लाइन के निर्माण को भी मंजूरी मिल गई है। इसमें 1365 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के इन फैसलों को समेटते हुए कहा कि आज लिए गए ये 7 बड़े फैसले देश के बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने के साथ-साथ भारत को मैन्युफैक्चरिंग और कृषि के मोर्चे पर आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।