Rohit-Virat: अब कब टीम इंडिया की जर्सी में दिखेंगे रोहित-विराट, फैंस को करना होगा लंबा इंतजार

भारत और इंग्लैंड के बीच 3 मैचों की वनडे सीरीज खत्म हो गई है। भारत के लिए इंग्लैंड दौरा उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। टी20 सीरीज में व्हाइटवॉश के बाद भारतीय टीम इंग्लैंड से 2-1 से वनडे सीरीज भी हार गई। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में फैंस के लिए ये सबसे अच्छी बात रही कि सीरीज के आखिरी मुकाबले में रोहित शर्मा और विराट कोहली शानदार फॉर्म में नजर आए। वहीं इस सीरीज के खत्म होने के बाद से फैंस की नजर इस बात पर है कि रोहित और विराट अगली बार भारतीय टीम की जर्सी में कब मैदान पर उतरेंगे। आइए जानते हैं अब कब भारतीय जर्सी में मैदान पर उतरेंगे रोहित और कोहली।

रोहित-विराट के लिए होगा लंभा इंतजार

टी20 ओर टेस्ट से रिटायमेंट लेने के बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली अब सिर्फ वनडे क्रिकेट में ही खेलते हैं। ऐसे में दोनों दिग्गजों की अगली वापसी सीधे भारत की अगली वनडे सीरीज में होगी। इससे पहले भारतीय टीम को जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज, श्रीलंका दौरे पर टेस्ट मुकाबले और फिर एशियाई खेलों में हिस्सा लेना है। इसलिए क्रिकेट प्रेमियों को रोहित और विराट को दोबारा भारतीय जर्सी में देखने के लिए करीब दो महीने का इंतजार करना पड़ सकता है।

वेस्टइंडीज के साथ होगी अगली सीरीज

भारत की अगली वनडे सीरीज अब सितंबर के आखिर में खेली जाएगी। ऐसे में रोहित शर्मा और विराट कोहली को फिर से एक साथ मैदान पर देखने के लिए फैंस को कुछ समय और इंतजार करना होगा। वनडे और टी20 मुकाबलों के लिए भारतीय टीम अपने घर में वेस्टइंडीज की मेजबानी करेगी। दोनों टीमों के बीच 27 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएंगी। इसके बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज भी होगी। घरेलू सीरीज खत्म होने के बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड दौरे पर रवाना होगी।

भारत-वेस्टइंडीज वनडे सीरीज का पूरा शेड्यूल

  • पहला वनडे: 27 सितंबर 2026, तिरुवनंतपुरम
  • दूसरा वनडे: 30 सितंबर 2026, गुवाहाटी
  • तीसरा वनडे: 3 अक्टूबर 2026, न्यू चंडीगढ़

समुद्री हमले में 4 भारतीयों की मौत, यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट पर जहाज पर हुआ मिसाइल अटैक

यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से निकलते समय एक जहाज पर हुए हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। इस हमले में एक भारतीय की हालत गंभीर है। विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी देते हुए बताया कि घटना 19 जुलाई की शाम की है। जिस जहाज पर हमला हुआ है, उसका नाम ‘एमवी गोल्डन लियो’ है। हमले के वक्त इस जहाज पर 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक भी शामिल थे।

ओडेसा जहाज पर हमला, 4 भारतीयों की मौत

19 जुलाई 2026 की शाम यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना होते समय एमवी गोल्डन लियो नाम के मालवाहक जहाज पर हमला हुआ। उस समय जहाज पर कुल 17 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें 5 भारतीय नागरिक भी शामिल थे।विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, इस हमले में 4 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई, जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

भारत सरकार ने दी ये जानकारी

विदेश मंत्रालय ने बताया कि यूक्रेन में मौजूद भारतीय दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित भारतीयों को हर संभव मदद दी जा रही है। सरकार ने इस हादसे में जान गंवाने वाले भारतीयों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। साथ ही घायल भारतीय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। भारत ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना, निर्दोष चालक दल के सदस्यों की जान खतरे में डालना और समुद्री आवाजाही व व्यापार में बाधा पहुंचाना पूरी तरह अस्वीकार्य और निंदनीय है।

खबर अपडेट हो रही है…

यूक्रेन में शिप पर हमला, 4 भारतीयों की मौत:भारत ने कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना निंदनीय; यूक्रेन बोला- रूसी मिसाइलों से हमला हुआ

यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से रवाना हुए कार्गो जहाज ‘MV गोल्डन लियो’ पर रविवार को हुए हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। भारत सरकार ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह निंदनीय है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास लगातार यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है। उधर, यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, गोल्डन लियो जहाज ओडेसा से मक्का लेकर रवाना हुआ था। पोर्ट से निकलने के कुछ देर बाद उस पर तीन रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यूक्रेन की नौसेना ने कहा कि हमले के बाद जहाज में आग लग गई। रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्र में जहाज से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी बाद में पहचान हुई। हमले के बाद की 3 तस्वीरें… जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, 19 जुलाई की शाम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर हमला हुआ। उस समय जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर थे, जिनमें पांच भारतीय शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीयों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायल भारतीय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है। कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिक क्रू को निशाना बनाना या समुद्री व्यापार और नेविगेशन की आजादी में बाधा डालना निंदनीय है और इससे बचा जाना चाहिए। वहीं, यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण के मुताबिक घटना के बाद पूरी रात सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हमले में नौ क्रू मेंबर और एक समुद्री पायलट की मौत हुई, जबकि 17 में से आठ क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया। ब्लैक सी में बढ़ता तनाव, कारोबार पर असर यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब रूस और यूक्रेन के बीच ब्लैक सी और सी ऑफ एजोव में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे कारोबारी जहाजों और अनाज के निर्यात पर खतरा बढ़ गया है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद ब्लैक सी दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में शामिल हो गया। कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौतों से अनाज का निर्यात फिर शुरू हुआ था, लेकिन हाल के महीनों में बढ़े हमलों से यह व्यवस्था फिर प्रभावित हुई है। यूक्रेन लगातार रूस के ऊर्जा ढांचे और तेल टैंकरों को निशाना बना रहा है। वहीं रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, ईंधन भंडारण केंद्रों और कार्गो जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया है कि उसकी सेना ने ओडेसा बंदरगाह पर ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया। वैश्विक अनाज कारोबार पर भी असर यूक्रेन दुनिया के कुल गेहूं निर्यात का करीब 6% और मक्का निर्यात का लगभग 11% हिस्सा देता है। लेकिन लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण ब्लैक सी के जरिए होने वाला यूक्रेन का अनाज निर्यात करीब एक-तिहाई तक प्रभावित हुआ है। दूसरी तरफ यूक्रेनी हमलों का असर रूस के अनाज कारोबार पर भी पड़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों के कारण रूस को सी ऑफ एजोव के रास्ते होने वाली जहाजों की आवाजाही सीमित करनी पड़ी है। इसी रास्ते से रूस के करीब एक-चौथाई अनाज का निर्यात होता है। —————– ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन के हमले से रूस में भी होर्मुज जैसा संकट:एजोव सागर में जहाजों की आवाजाही रुकी, 9 दिन में 116 जहाजों पर हमले हुए यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बाद रूस को बड़ा झटका लगा है। इस सप्ताह हमलों की वजह से रूस को एजोव सागर के अहम समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इससे दुनिया के दूसरे देशों के साथ रूस का व्यापार प्रभावित होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…

यूक्रेन में शिप पर हमला, 4 भारतीयों की मौत:भारत ने कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना गलत; यूक्रेन बोला- रूसी मिसाइलों से हमला हुआ

यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से रवाना हुए कार्गो जहाज ‘MV गोल्डन लियो’ पर रविवार को हुए हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। भारत सरकार ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास लगातार यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है। उधर, यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक गोल्डन लियो जहाज ओडेसा से मक्का लेकर रवाना हुआ था। पोर्ट से निकलने के कुछ देर बाद उस पर तीन रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यूक्रेन की नौसेना ने कहा कि हमले के बाद जहाज में आग लग गई। रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्र में जहाज से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी बाद में पहचान हुई। हमले के बाद की 3 तस्वीरें… जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, 19 जुलाई की शाम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर हमला हुआ। उस समय जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर थे, जिनमें पांच भारतीय शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीयों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायल भारतीय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है। कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिक क्रू को निशाना बनाना या समुद्री व्यापार और नेविगेशन की आजादी में बाधा डालना निंदनीय है और इससे बचा जाना चाहिए। वहीं, यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण के मुताबिक घटना के बाद पूरी रात सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हमले में नौ क्रू मेंबर और एक समुद्री पायलट की मौत हुई, जबकि 17 में से आठ क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया। ब्लैक सी में बढ़ता तनाव, कारोबार पर असर यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब रूस और यूक्रेन के बीच ब्लैक सी और सी ऑफ एजोव में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे कारोबारी जहाजों और अनाज के निर्यात पर खतरा बढ़ गया है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद ब्लैक सी दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में शामिल हो गया। कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौतों से अनाज का निर्यात फिर शुरू हुआ था, लेकिन हाल के महीनों में बढ़े हमलों से यह व्यवस्था फिर प्रभावित हुई है। यूक्रेन लगातार रूस के ऊर्जा ढांचे और तेल टैंकरों को निशाना बना रहा है। वहीं रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, ईंधन भंडारण केंद्रों और कार्गो जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया है कि उसकी सेना ने ओडेसा बंदरगाह पर ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया। वैश्विक अनाज कारोबार पर भी असर यूक्रेन दुनिया के कुल गेहूं निर्यात का करीब 6% और मक्का निर्यात का लगभग 11% हिस्सा देता है। लेकिन लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण ब्लैक सी के जरिए होने वाला यूक्रेन का अनाज निर्यात करीब एक-तिहाई तक प्रभावित हुआ है। दूसरी तरफ यूक्रेनी हमलों का असर रूस के अनाज कारोबार पर भी पड़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों के कारण रूस को सी ऑफ एजोव के रास्ते होने वाली जहाजों की आवाजाही सीमित करनी पड़ी है। इसी रास्ते से रूस के करीब एक-चौथाई अनाज का निर्यात होता है। —————– ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन के हमले से रूस में भी होर्मुज जैसा संकट:एजोव सागर में जहाजों की आवाजाही रुकी, 9 दिन में 116 जहाजों पर हमले हुए यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बाद रूस को बड़ा झटका लगा है। इस सप्ताह हमलों की वजह से रूस को एजोव सागर के अहम समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इससे दुनिया के दूसरे देशों के साथ रूस का व्यापार प्रभावित होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…

Q1 Results: टाटा ग्रुप की कंपनी का मुनाफा 32% बढ़ा, शेयरों पर रहेगी नजर

Q1 Results: टाटा ग्रुप की एग्री-इनपुट कंपनी Rallis India ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का प्रदर्शन इस बार उम्मीद से बेहतर रहा। मुनाफा और रेवेन्यू, दोनों में बढ़ोतरी हुई है।

कंपनी का शुद्ध मुनाफा 31.6% बढ़कर ₹125 करोड़ हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹95 करोड़ था।

रेवेन्यू और EBITDA दोनों बढ़े

जून तिमाही में Rallis India का रेवेन्यू 6.8% बढ़कर ₹1,022 करोड़ रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह कम था। वहीं, EBITDA 23.3% बढ़कर ₹185 करोड़ पहुंच गया।

कंपनी का EBITDA मार्जिन 15.7% से बढ़कर 18.1% हो गया। इसका मतलब है कि कंपनी पहले के मुकाबले ज्यादा मुनाफे के साथ कारोबार कर रही है। बेहतर प्राइसिंग, लागत पर नियंत्रण और प्रोडक्ट मिक्स में सुधार से मार्जिन मजबूत हुआ।

Crop Care बिजनेस ने दिखाई मजबूती

Rallis India के Crop Care कारोबार का रेवेन्यू 7% बढ़कर ₹697 करोड़ पहुंच गया। इस कारोबार में रिटेल यानी B2C बिजनेस 19% बढ़ा। हालांकि, B2B कारोबार में 19% की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद कुल कारोबार बढ़त में रहा।

तिमाही के दौरान कंपनी ने फसल सुरक्षा से जुड़े Balwan, Prodim Ultra और Kengen नाम के तीन नए प्रोडक्ट लॉन्च किए। कंपनी ने फील्ड प्रोग्राम्स पर भी जोर दिया। साथ ही इन्वेंट्री मैनेजमेंट में सुधार किया। इसका फायदा कारोबार पर साफ दिखाई दिया।

Seeds कारोबार में भी अच्छी ग्रोथ

Rallis India का Seeds कारोबार भी मजबूत रहा। इस सेगमेंट का रेवेन्यू 6% बढ़कर ₹325 करोड़ पहुंच गया। प्री-सीजन डिमांड और सही समय पर प्रोडक्ट प्लेसमेंट का फायदा कंपनी को मिला।

तिमाही के दौरान कंपनी ने कपास, धान और बाजरा कैटेगरी में 9 नए प्रोडक्ट लॉन्च किए। इनमें उत्तर भारत के लिए दो नए कॉटन हाइब्रिड भी शामिल हैं। इसके अलावा Dhaanya ब्रांड के तहत हर्बीसाइड-टॉलरेंट डायरेक्ट-सीडेड राइस भी बाजार में उतारा गया।

कंपनी ने क्या कहा?

Rallis India के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला ने कहा कि कंपनी ने मजबूत रणनीति और बेहतर परिचालन की बदौलत अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि मुनाफे में सुधार के साथ-साथ नए प्रोडक्ट्स पर भी लगातार निवेश किया जा रहा है।

उनके मुताबिक, कंपनी आगे भी भारतीय किसानों के लिए नए और बेहतर कृषि समाधान विकसित करने पर फोकस बनाए रखेगी। साथ ही सभी कारोबारों में अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगी।

नतीजों से पहले सोमवार को Rallis India का शेयर 2.6% की बढ़त के साथ ₹240 पर बंद हुआ।

Bitcoin Price Today: बिटकॉइन एक साल में 45% क्रैश हुआ, एक्सपर्ट्स बोले – अभी दूर रहने में ही भलाई

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Fact Check: क्या CJP प्रोटेस्ट के दौरान सड़कों पर हथियार लेकर उतरी सेना, जानें वायरल दावे की सच्चाई

भारतीय सेना ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे दावों में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी वीडियो, फोटो या संदेश पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत की जांच करें।

‘कैमरे के सामने कोई नहीं लड़ता’, रोहित-गंभीर के रिश्ते को लेकर अश्विन ने बताई ड्रेसिंग रूम के अंदर की बात!

भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडी सीरीज खत्म हो गई है। इंग्लैंड ने इस सीरीज को 2-1 से अपने नाम किया है। वहीं तीसरे और आखिरी मुकाबले से पहले लॉर्ड्स की बालकनी में गौतम गंभीर और रोहित शर्मा हंसते हुए बातचीत करते नजर आए थे। वहीं अब इस पर पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन पर बड़ा बयान दिया है। अश्विन के मुताबिक, मैदान पर रोहित शर्मा और गौतम गंभीर के हंसते-बात करते दिखने से ये नहीं माना जा सकता कि दोनों के बीच सब कुछ पूरी तरह नॉर्मल है।

उन्होंने कहा कि, भारतीय क्रिकेट टीम जैसे प्रोफेशनल माहौल में खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ अच्छी तरह जानते हैं कि कैमरे हर समय उन पर नजर रखते हैं। ऐसे में वे सार्वजनिक तौर पर अपने व्यवहार को कंट्रोल में रखते हैं। इसलिए असली भावनाएं मुश्किल से ही बाहर आ पाती हैं।

अश्विन ने क्या कहा

पिछले कुछ समय से रोहित शर्मा और मुख्य कोच गौतम गंभीर के रिश्तों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दोनों के बीच मतभेद और टीम में फैसलों को लेकर अलग-अलग राय होने की बातें सामने आई हैं। इसी बीच लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान रोहित शर्मा और गौतम गंभीर को कई मौकों पर साथ हंसते और बातचीत करते देखा गया, जिसके बाद लोगों ने कयास लगाने शुरू कर दिए कि दोनों के बीच सब कुछ ठीक हो गया है। वहीं रविचंद्रन अश्विन के मुताबिक, किसी खिलाड़ी और कोच को साथ मुस्कुराते देखकर उनके रिश्तों के बारे में कोई पक्का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

टकराव से बचते हैं

अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “हर कोई प्रोफेशनल है। हर किसी को पता होता है कि कैमरे उनकी तरफ लगे हैं। कैमरे के सामने कोई बच्चों की तरह लड़ाई नहीं करता। सच तो यह है कि प्रोफेशनल माहौल में लोग इस तरह झगड़ते भी नहीं हैं। अगर दो लोगों के बीच सब कुछ ठीक नहीं भी हो, तो वे बस कम बात करते हैं, लेकिन टकराव से बचते हैं। आखिर बेवजह विवाद क्यों किया जाए?” उन्होंने आगे कहा, “अगर आप अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, तो आपको कौन रोक सकता है? विराट कोहली ने प्रदर्शन किया, रोहित शर्मा ने भी प्रदर्शन किया और अपना काम किया। इसके बाद किसी के पास कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचता।”

गौतम गंभीर और विराट कोहली के रिश्तों को लेकर भी समय-समय पर कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं। लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रमों और मैचों के दौरान दोनों कई बार नॉर्मल अंदाज में साथ नजर आए हैं। इसी बीच रोहित टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और अब वह सिर्फ वनडे क्रिकेट में बतौर खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं।

Harsh Goenka ने शेयर किया Yamal और उनके छोटे भाई का Video, बोले- यही था फाइनल के बाद का सबसे पसंदीदा सीन

कमजोर मानसून का असर: खरीफ बुवाई पिछले साल से 6% पीछे, दालों-तिलहन की खेती पर पड़ा ये इंपैक्ट

Weak Monsoon Impact: देश के कई प्रमुख फसल उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की भारी कमी और बारिश में देरी का सीधा असर इस साल खरीफ फसलों की बुवाई पर देखने को मिल रहा है। मनी कंट्रोल के ईशान गेरा की रिपोर्ट के मुताबिक 17 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में 6 प्रतिशत पीछे चल रहा है। किसानों ने इस अवधि तक 65.82 मिलियन हेक्टेयर में बुवाई की है जबकि 2025 की इसी अवधि के दौरान यह आंकड़ा 70.05 मिलियन हेक्टेयर था। बारिश की इस लगातार बनी हुई कमी से सबसे ज्यादा मार दालों, मोटे अनाज, तिलहन और कपास की खेती पर पड़ी है। आइए जानते हैं कि मानसून की सुस्ती ने किस फसल की बुवाई को कितना प्रभावित किया है और देश में पानी के जलाशयों का क्या हाल है.

दालों की बुवाई में आई सबसे बड़ी गिरावट (15.1% की कमी)

खरीफ फसलों में दालों की खेती सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। दालों का कुल रकबा पिछले साल के 81.52 लाख हेक्टेयर से 15.1 प्रतिशत घटकर अब 69.23 लाख हेक्टेयर रह गया है। अरहर की बुवाई में करीब 18 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर 2.48 मिलियन हेक्टेयर पर आ गई है। मूंग का रकबा 11 प्रतिशत घटकर 2.398 मिलियन हेक्टेयर रहा। उड़द की बुवाई में लगभग 6 प्रतिशत की कमी आई है और यह 1.351 मिलियन हेक्टेयर दर्ज की गई।

क्यों चिंताजनक है यह गिरावट?

दालों की बुवाई में यह कमी बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत घरेलू उत्पादन और खपत के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए पहले से ही आयात पर निर्भर रहता है।

धान, मोटे अनाज, तिलहन और कपास का क्या है हाल?

राहत की बात यह है कि धान की बुवाई पर मानसून की कमी का असर अपेक्षाकृत कम पड़ा है। यह 16.64 मिलियन हेक्टेयर पर पहुंच चुकी है जो पिछले साल की इसी अवधि के 16.78 मिलियन हेक्टेयर की तुलना में सिर्फ 0.8 प्रतिशत कम है। मोटे अनाज के रकबे में 11.2 प्रतिशत की तेज गिरावट आई है। यह पिछले साल के 13.41 मिलियन हेक्टेयर से गिरकर 11.9 मिलियन हेक्टेयर पर आ गया है। इसमें बाजरा की बुवाई में 18.5 प्रतिशत और मक्का की बुवाई में 5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। तिलहन का रकबा 5.5 प्रतिशत घटकर 14.71 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। कपास की बुवाई में भी 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

मानसून में 24% की कमी, इन राज्यों में गंभीर सूखा

1 जून से 19 जुलाई के बीच भारत में 253.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य स्तर से 24 प्रतिशत कम है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का यह घाटा अलग अलग है-

  • पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत: सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश
  • दक्षिण प्रायद्वीप: 27 प्रतिशत की कमी
  • उत्तर-पश्चिम भारत: 23 प्रतिशत की कमी
  • मध्य भारत: 14 प्रतिशत की कमी

राज्यों के स्तर पर बारिश का घाटा

कृषि के लिहाज से महत्वपूर्ण कई राज्यों में बारिश का गंभीर संकट बना हुआ है। बिहार में सामान्य से 44 प्रतिशत कम बारिश हुई है। झारखंड में 41 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। पंजाब में ये कमी 41 प्रतिशत की है। केरल में 34 प्रतिशत कम बारिश हुई है। तेलंगाना में 31 प्रतिशत बारिश कम हुई है। तटीय कर्नाटक में 31 फीसदी कम बारिश देखने को मिली है।

जलाशयों का जलस्तर पिछले साल से 39% नीचे

कम बारिश की वजह से देश के जलाशयों में पानी का भंडारण भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अभी देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का सिर्फ 34.46 प्रतिशत पानी ही बचा है। यह उपलब्ध पानी पिछले साल की इसी अवधि के जलस्तर का सिर्फ 60.84 प्रतिशत ही है। यानी 39 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली है। यह जलस्तर पिछले 10 वर्षों के औसत स्तर से भी 1.8 प्रतिशत नीचे चला गया है।

45 बार Egg Donation भारत का सबसे बड़ा IVF Scam | 45 Egg Donations | One Shocking IVF Scam

मजबूर महिलाओं की बेबसी को धंधा बनाने वाले एक अवैध Egg Donation रैकेट का आखिरकार पर्दाफाश हो गया।
फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे महिलाओं से बार-बार Egg Donation करवाया जाता था। एक महिला से तो 45 बार Eggs Donate करवाए गए।
लेकिन कुछ बहादुर पुलिस अधिकारियों की सतर्कता ने इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया और कई महिलाओं को शोषण से बचा लिया।
इंसाफ तभी ज़िंदा रहता है, जब कोई अन्याय के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत करता है।

Egg Donation Scam, Illegal Egg Donation, IVF Scam, India IVF Scam, Egg Donation Racket, Illegal IVF Racke#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

पाकिस्तानी हैंडल्स फैलाने लगे दिल्ली प्रोटेस्ट को लेकर झूठा प्रॉपेगेंडा, इंडियन आर्मी फैक्ट चेक ने तुरंत खारिज किए ये दावे

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और संसद मार्च को लेकर दिल्ली में लगातार गहमागहमी जारी है। वहींदिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर सोशल मीडिया पर फेक खबरें भी तेजी से फैलाया जा  रही हैं। पाकिस्तान से संचालित कुछ प्रोपेगैंडा सोशल मीडिया हैंडल यह झूठ फैला रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए नई दिल्ली में भारतीय सेना तैनात की गई है। इतना ही नहीं, इन पोस्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि सेना ने प्रदर्शनकारियों पर हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।

फैलाई गई फेक खबरें 

हालांकि, यह दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। सच्चाई यह है कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस और अन्य पैरा मिलिट्री फोर्स, जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान संभाल रहे हैं। इस पूरे मामले में भारतीय सेना की कोई तैनाती नहीं की गई है।फर्जी खबर फैलाने वाले लोग आम प्रदर्शन का वीडियो दिखाकर उसके साथ सेना की तैनाती और हथियारों के इस्तेमाल जैसी झूठी बातें जोड़ रहे हैं। इसका मकसद लोगों में डर और भ्रम फैलाना तथा भारतीय सेना की छवि को नुकसान पहुंचाना है।

जंतर-मंतर से हटाया गया प्रदर्शन स्थल

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया गया है। पुलिस ने मंच खाली करा लिया है और टेंट भी निकाल दिए हैं। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर के बाद कनॉट प्लेस से भी खदेड़ दिया गया है। इससे कुछ घंटे पहले प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर और लाठीचार्ज कर उन्हें रोक दिया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर पर इकट्ठा हो गए। आंदोलन के एक नेता ने कहा कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक वहीं डटे रहेंगे।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

पुलिस ने वह मंच भी हटा दिया, जहां सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल की थी। इसके साथ ही वहां रखे ट्रैम्पोलिन, कालीन, गद्दे और अन्य सामान भी हटा दिए गए। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत के बाद उनकी एक प्रमुख मांग मान ली गई है। हालांकि, उनका कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र और अन्य प्रदर्शनकारी मौजूद हैं।

सीजेपी ने सबसे पहले 6 जून को जंतर-मंतर पर एक दिन का विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद आंदोलन लगातार बढ़ता गया और कई लोगों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिससे यह लंबा धरना बन गया। सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी पार्लियामेंट स्ट्रीट के पास जुटे। उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए संसद की ओर मार्च निकाला। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया।