केजरीवाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया और आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का इस्तेमाल असली मतदाताओं के नाम हटाने और फर्जी नाम जोड़ने के लिए किया जा रहा है।

चार दिवसीय दौरे पर गोवा पहुंचे केजरीवाल ने कहा कि इस मुद्दे ने राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को एकजुट किया है और अब हाल के वर्षों में चुनाव जिस तरीके से कराए गए, उस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

‘आप’ नेता का यह बयान ऐसे समय आया, जब मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में काफी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों ने संसद मार्ग से चुनाव निर्वाचन के मुख्यालय तक मार्च निकाला। रास्ते में रोके जाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर गए।

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कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। यह मांग ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर को लेकर जारी विवाद के बीच की जा रही है। खबर के अनुसार, निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों और आदेशों को लेकर पिछले 10 महीने में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई थी।

केजरीवाल ने कहा, “अगले तीन दिन में अलग-अलग लोगों और हमारे कार्यकर्ताओं के साथ मेरी कई बैठकें हैं। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है।”

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में हुए उन चुनावों के नतीजों पर सवाल उठ रहे हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भाजपा को जीत मिली।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, “यह सामने आ रहा है कि चुनाव केवल एसआईआर के जरिए जीते गए, जिसमें असली मतदाताओं के नाम हटाए गए और फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए।”

उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह गलत है, यह लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने लोकतंत्र का मजाक बना दिया है।”

केजरीवाल ने बाद में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर पूरा देश एकजुट है।

‘आप’ नेता ने कहा, “मैं देश में वोट चोरी के खिलाफ जारी राष्ट्रीय आंदोलन का समर्थन करता हूं। ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए।

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चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री मान के कैंप कार्यालय पर सीबीआई ने मारा छापा

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी के परिसरों सहित कई स्थानों पर तलाशी ली।

यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के एक दिन बाद हुई। सूत्रों के अनुसार सीबीआई की कार्रवाई सेक्टर-दो स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय, मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन के संगरूर जिले के घराघों गांव स्थित आवास तथा मोहाली के फेज-11 में उनके एक करीबी रिश्तेदार के परिसर में की गयी। तलाशी के दौरान सीआरपीएफ के जवान भी तैनात रहे।

मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजे गए पत्रों में लगाए गए कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। इनमें सरकारी तबादलों और नियुक्तियों में कथित लेन-देन, अनुकूल नीतिगत फैसलों और निविदाओं से जुड़े कथित मामलों तथा सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच और हथियार लाइसेंस से संबंधित आरोप शामिल हैं। उच्च न्यायालय ने पांच अक्टूबर को सीबीआई को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने तथा दो महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। इस बीच पंजाब सरकार ने उच्च न्यायलय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सीबीआई कार्रवाई को राजनीतिक बताया और आरोप लगाया कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल कर उनकी तथा पंजाब सरकार की छवि खराब करने का प्रयास कर रही है।

आप नेताओं सर्वश्री अरविंद केजरीवाल, हरभजन सिंह ईटीओ और हरदीप सिंह मुंडियां ने भी कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बताया। आम आदमी पार्टी के संयोजक श्री केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि चुनाव से दो महीने पहले पंजाब के मुख्यमंत्री के कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी भाजपा की हताशा का नतीजा है। 

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केंद्र में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से उसने हमेशा पंजाबियों पर दबाव बनाने की कोशिश की है, चाहे वह किसान आंदोलन का मुद्दा हो, पंजाब के पानी का मामला हो या पंजाब विश्वविद्यालय का मुद्दा। अब वह पंजाब के निर्वाचित मुख्यमंत्री पर भी दबाव बना रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब में चुनाव लड़कर जीत नहीं सकती, इसलिए वह ईडी-सीबीआई के जरिए चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन पंजाबियों ने अपना मन बना लिया है और आगामी चुनाव में वे सीबीआई की इस छापेमारी का जवाब श्री मान को 100 से अधिक सीटों पर जिताकर और उन्हें फिर मुख्यमंत्री बनाकर देंगे।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि भाजपा ने पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, “मेरे कैंप कार्यालय में सीबीआई की छापेमारी की गई है। अब पंजाब में ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग किया जाएगा, ताकि पंजाब सरकार और मुझे बदनाम किया जा सके। लोगों से मिल रहे प्यार को देखकर भाजपा घबराई हुई है।” कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने सोशल मीडिया एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “भाजपा ने पंजाब में लोगों के बीच जाने के बजाय केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के साथ चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। श्री मान के कैंप कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी इसका प्रमाण है।

मान सरकार को बदनाम करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन पंजाब के लोग सच्चाई से वाकिफ हैं। चाहे कितना भी दबाव बनाया जाए, लोगों का भरोसा नहीं तोड़ा जा सकता।” कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा, “पंजाब में चुनाव से पहले ही भाजपा की घबराहट साफ दिखाई देने लगी है। मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी कथित राजनीतिक बदले की ओर इशारा करती है। अब ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का कथित दुरुपयोग करके मान सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन पंजाब के लोग सच्चाई और राजनीतिक चालों में अंतर करना जानते हैं। लोगों का समर्थन देखकर भाजपा घबराई हुई है।

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कांग्रेस को अकेला छोड़ रहे हैं सहयोगी

दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर देश के अलग अलग हिस्सो में खूब प्रदर्शन और आंदोलन हुए। दिल्ली से लेकर मुंबई तक हजारों लोग सड़कों पर उतरे। महात्मा गांधी की तस्वीर वाली टीशर्ट पहन कर और तिरंगा हाथ में लेकर लोगों ने प्रदर्शन किया। लेकिन गांधी की विरासत का दावा करने वाली कांग्रेस इससे नदारद रही। कांग्रेस ने अपनी कार्य समिति की बैठक में और उसके अगले दिन विपक्षी गठबंधन की बैठक में यह तय जरूर किया कि दो अक्टूबर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन होगा, जो आठ अक्टूबर तक चलेगा। लेकिन कांग्रेस ने दो अक्टूबर के लिए कोई निश्चित योजना नहीं बनाई। कांग्रेस ने तय कराया कि छह अक्टूबर को दिल्ली में निर्वाचन सदन का घेराव किया जाएगा। हो सकता है कि छह अक्टूबर को भी भीड़ जुटे और कांग्रेस व दूसरी विपक्षी पार्टियां अपने संसाधनों से आंदोलन को सफल बनाने का प्रयास करें। लेकिन दो अक्टूबर का विरोध प्रदर्शन ज्यादा व्यस्थित और स्वंयस्फूर्त दिख रहा था। कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों ने दो अक्टूबर के आंदोलन को कामयाब बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता जरूर सक्रियता दिखा रहे थे लेकिन मूल रूप से आंदोलन लेफ्ट का था। लेफ्ट की तीनों पार्टियों सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई माले के छात्र संगठनों ने आंदोलन की प्लानिंग की थी। एक दिन पहले एक अक्टूबर को जंतर मंतर पर जाकर नेहा बोरा ने वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाला। उसके बाद लेफ्ट के छात्र संघों एआईएसएफ, एसएफआई और आईसा ने लोग जुटाए। यह अलग बात है कि आम आदमी पार्टी के सौरव भारद्वाज, संजीव झा आदि सुबह ही जंतर मंतर पहुंच गए और क्रेडिट लेने का प्रयास किया। हो सकता है कि आप के लोग भी जंतर मंतर के आसपास या कनॉट प्लेस में जुटे हों लेकिन मूल रूप से लेफ्ट औऱ सिविल सोसायटी का आंदोलन था। कांग्रेस के छात्र संघ एनएसयूआई के छात्र भी इसमें शामिल थे लेकिन किसी ने उनको क्रेडिट नहीं दिया। इसे सीपीएम महासचिव एमए बेबी की अरविंद केजरीवाल से हुई मुलाकात से भी जोड़ कर देख सकते हैं। आप और लेफ्ट इस समय ज्यादा बॉन्डिंग दिखा रहे हैं।

ऐसे ही मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने आंदोलन का ऐलान किया तो उद्धव ठाकरे की पार्टी उसमें शामिल हो गई। शिवाजी पार्क में सीजेपी ने उद्धव की पार्टी की मदद से अच्छी भीड़ जुटा ली। सुबह दिल्ली में आंदोलन शुरू हुआ तो शाम चार बजे से मुंबई में सीजेपी ने प्रदर्शन किया। उसमें शामिल होने के लिए आदित्य़ ठाकरे कुछ फिल्मी कलाकारों के साथ पहुंचे तो बाद में उद्धव ठाकरे भी पहुंचे। बड़ी संख्या में फिल्मी कलाकार भी आंदोलन का हिस्सा बने। ध्यान रहे 30 सितंबर की बैठक में उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस को नसीहत दी थी कि वह एकला चलो का रवैया छोड़े लेकिन दो अक्टूबर को खुद ही कांग्रेस से अलग सीजेपी के आंदोलन में शामिल हो गए। उनका अपना आंदोलन चार अक्टूबर को होना है, जिसकी घोषणा उन्होंने कांग्रेस के साथ मिल कर नहीं की है, बल्कि मनसे के नेता और अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ मिल कर की है। यह आंदोलन भी विपक्ष की बैठक में तय हुए प्रदर्शन से अलग है। कांग्रेस ने विपक्ष की बैठक में बनी सहमति के आधार पर कई राज्यों में प्रदर्शन किए लेकिन हर जगह वह अकेले ही दिखी। पटना में महागठबंधन के नाम पर प्रदर्शन हुआ, जिसमें कांग्रेस के सारे बड़े नेता शामिल हुए पर राजद के प्रमुख तेजस्वी यादव नदारद रहे।

पहल लेने से हिचके

विपक्षी दल “वोट चोरी” के सवाल पर पहल अपने हाथ में लेने से हिचक गए हैं। इसके बदले उन्होंने खुद को प्रतिरोध जताने और न्यायपालिका की पनाह में जाने के पारंपरिक तौर-तरीकों तक सीमित रखा है।

पहले कांग्रेस कार्य समिति और फिर इंडिया गठबंधन की बैठक में जो तय हुआ, उसका सार है कि विपक्षी दल “वोट चोरी” के सवाल पर पहल अपने हाथ में लेने से हिचक गए हैं। इसके बदले उन्होंने खुद को प्रतिरोध जताने और न्यायपालिका की पनाह में जाने के पारंपरिक तौर-तरीकों तक सीमित रखा है। इस सवाल पर उनमें कितनी उलझन या अनमनापन है, वह कांग्रेस कार्य समिति के मांग-पत्र से जाहिर हुआ। उसमें पहली मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की रखी गई तथा चौथी एवं आखिरी मांग प्रधानमंत्री के इस्तीफे की! अगर किसी मुद्दे पर किसी पार्टी को प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगने की जरूरत महसूस होती है, तो स्पष्टतः यह उसकी सर्वोपरि मांग होगी। इसीलिए प्रमुख विपक्षी दल ने जिस रूप में अपनी मांगें रखीं, उससे रस्म-अदायगी का बोध ज्यादा हुआ। उधर इंडिया गठबंधन ने प्रतिरोध मार्च, निर्वाचन आयोग तक सांसदों का जुलूस, और एक नवंबर को दिल्ली में विशाल रैली के आयोजन के पहले चार अन्य रैलियां करने का एलान किया है। इसके अलावा चुनाव प्रक्रिया को स्वच्छ बनाने के लिए हस्तक्षेप करने की गुजारिश करते हुए उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देने का भी निर्णय लिया है। लेकिन इनमें कोई ऐसा कदम नहीं है, जिसे विपक्ष ने पहले ना आजमाया हो।

यह उम्मीद रखने का शायद ही कोई आधार है कि इस बार उसके कार्यक्रमों को पहले से ज्यादा जन समर्थन मिलेगा। अधिक संभावना यही है कि उसका सारा विरोध औपचारिकता के दायरे में बंधा रह जाएगा। दरअसल, विपक्षी दल यह संदेश देने में भी नाकाम हैं कि “वोट चोरी” के मुद्दे वे सभी समान धरातल पर हैं। अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव ने ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाने से असहमति जताई है। उनकी दलील है कि मोदी सरकार को सत्ता से हटा दिया जाए, तो सभी संस्थाएं स्वतः ठीक हो जाएंगी। लेकिन यह एक ठोस मुद्दे को अति तरल या हवाई बना देना है, जिससे किसी जन आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार नहीं होती। मोदी सरकार को हटाने की बात चुनावी गणित और समीकरणों के दायरे में चली जाती है, जिसका मौजूदा विवाद के सिलसिले में उल्लेख अतार्किक है।

पंजाब में बाहरी और भीतरी का विवाद

पंजाब में आम आदमी पार्टी ने मनीष सिसोदिया को लेकर उठे विवाद को भले दूसरा रंग देने का प्रयास किया हो और इसे अपनी पार्टी की महिला नेता गायत्री बिश्नोई के मान सम्मान का मामला बनाया हो लेकिन यह तय है कि पंजाब में बाहरी और भीतरी का विवाद बढ़ गया है। सिसोदिया और बिश्नोई के मामले को छोड़ दें तब भी कांग्रेस के विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने यह मुद्दा बना दिया है कि आम आदमी पार्टी के दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के नेताओं ने पंजाब में डेरा डाला है और उनको सरकारी बंगलों में रखा जा रहा है। सुखपाल खैरा की इस बात को अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने भी उठाया है।

गायत्री बिश्नोई ने भी यह स्वीकार किया कि वे पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह के बंगले में अपने माता, पिता के साथ रह रही थीं। इलाज के लिए ही सही लेकिन मंत्री के बंगले में किसी दूसरे राज्य के नेता के रहने का विवाद तो बन ही गया। ध्यान रहे खैरा पहले आम आदमी पार्टी में ही रहे हैं। वे 2017 में नेता विपक्ष भी थे। वे उस समय की बातें भी बता रहे हैं। उनका दावा है कि केजरीवाल ने तब भी उनका बंगला कब्जा करने का प्रयास किया था। आम आदमी पार्टी के नेता इस बात का जवाब नहीं दे पा रहे हैं कि पंजाब की राजनीति में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, जरनैल सिंह जैसे नेताओं को इतना महत्व क्यों मिल रहा है। उन्होंने बंगलों के नंबर देकर दावा किया है कि दीपक चौहान, कमला बंसल, अनुराग कुंडू, जरनैल सिंह, सत्येंद्र जैन, आदिल अहमद खान आदि इन बंगलों में रह रहे हैं। गायत्री बिश्नोई विवाद के बाद कहा जा रहा है कि अब बंगले खाली हो रहे हैं। लेकिन विवाद तो चुनाव तक चलेगा।

विपक्ष की बैठक आज

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में हुई गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों को लेकर हुए खुलासे के बाद विपक्षी पार्टियों की एक अहम बैठक बुधवार को होगी। विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों के नेताओं की यह बैठक दिल्ली में होगी। हालांकि बैठक से पहले विपक्ष का बिखराव भी साफ दिख गया है। कई पार्टियों के नेता इसमें नहीं शामिल हो रहे हैं।

पिछली बैठक की ही तरह इस बार भी डीएमके और आम आदमी पार्टी इस बैठक में नहीं शामिल होंगे। गौरतलब है कि इस बैठक के समन्वय का काम कांग्रेस पार्टी देख रही है और बताया जा रहा है कि उसने आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को न्योता नहीं दिया। बहरहाल, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी बैठक में नहीं शामिल होंगे। यह भी कहा जा रहा है कि उनके चाचा रामगोपाल यादव भी बैठक से दूर रहेंगे और पार्टी की ओर से कोई अन्य नेता शामिल होगा। उद्धव ठाकरे भी बैठक के लिए दिल्ली नहीं आ रहे हैं। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल होंगे।

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की पिछले तीन साल में यह आठवीं बैठक है। जून 2024 में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद यह तीसरी बैठक है। लोकसभा के चुनाव नतीजों के तुरंत बाद एक बैठक हुई थी। उसके दो साल बाद आठ जून 2026 को बैठक हुई थी। उसमें एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर चर्चा हुई। उसमें तय हुआ था कि दो महीन बाद अगस्त में हैदराबाद में बैठक होगी। लेकिन वह बैठक नहीं हुई। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजी रिपोर्ट के बाद ममता बनर्जी ने विपक्ष की बैठक बुलाने की पहल की।

बहरहाल, बैठक से एक दिन पहले मंगलवार को बताया गया कि अखिलेश यादव 30 सितंबर को लखनऊ में किसानों के सम्मेलन में शामिल होंगे। कहा जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से इस बारे में बात भी की है। हालांकि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि अखिलेश राज्यसभा चुनाव के नामांकन से जुड़ी व्यस्तता के कारण नहीं आएंगे।

बैठक में कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल होंगे। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी भी इसमें शामिल होंगे। राजद के तेजस्वी यादव, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सीपीएम के महासचिव एमए बेबी बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार की पार्टी के भी बैठक में शामिल होने की खबर है। गौरतलब है कि पिछले दिनों एमए बेबी ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। लेकिन उन्होंने केजरीवाल को बैठक का न्योता नहीं दिया क्योंकि यह काम कांग्रेस को करना है।

मोदी की डिग्री सार्वजनिक नहीं होगी

अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री सार्वजनिक करने की बार बार मांग करने की वजह से उनके ऊपर लगाए गए 25 हजार रुपए के जुर्माने को भी बरकरार रखा है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद कम से कम अभी तुरंत प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री सार्वजनिक नहीं होगी। केजरीवाल पर लगाए गए इस आरोप को हाई कोर्ट ने स्वीकार किया है कि उन्होंने विश्वविद्यालय की छवि खराब करने का काम किया।

असल में अरविंद केजरीवाल ने 2016 में केंद्रीय सूचना आयोग को चिट्ठी लिखकर मांग की थी कि पीएम नरेंद्र मोदी की डिग्री सार्वजनिक की जानी चाहिए। अप्रैल 2016 में सीआईसी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और गुजरात यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया था कि पीएम मोदी की डिग्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएं। लेकिन, सीआईसी के फैसले के खिलाफ यूनिवर्सिटी गुजरात हाई कोर्ट पहुंच गई थी। हाई कोर्ट ने सीआईसी के आदेश को रद्द कर दिया था।

इस फैसले के खिलाफ केजरीवाल ने हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। लेकिन हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने 31 मार्च, 2023 को अपना फैसला बरकरार रखते हुए उन पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद केजरीवाल ने हाई कोर्ट की डबल बेंच में याचिका लगाई थी, जिसका फैसला मंगलवार, 29 सितंबर को आया। केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने दलील रखी थी तो यूनिवर्सिटी की ओर से भारत सरकार के नंबर दो कानून अधिकारी यानी सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए थे।

Video: दिल्ली पुलिसकर्मी की AAP कार्यकर्ताओं ने सरेआम कर दी पिटाई, केजरीवाल के दौरे के दौरान सादे कपड़ों में था हेड कांस्टेबल

Video: राजधानी के तिलक नगर इलाके में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दौरे के दौरान एक पुलिसकर्मी के साथ कथित तौर पर मारपीट और धक्का-मुक्की करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस का एक हेड कॉन्स्टेबल सादे कपड़ों में मोबाइल फोन से केजरीवाल के दौरे की रिकॉर्डिंग कर रहा था। इसी दौरान कुछ आम आदमी पार्टी (AAP) कार्यकर्ताओं ने उसे घेर लिया। इस दौरान उसके साथ कथित तौर पर हाथापाई और मारपीट की।

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मी को भीड़ के बीच घिरा हुआ देखा जा सकता है। वीडियो में लोग उसे धक्का देते और उसके साथ बहस करते नजर आ रहे हैं। पुलिसकर्मी ने जींस और शर्ट पहन रखी थी। इससे एक दिन पहले ही दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा और AAP से जुड़े एक युवक के बीच हुई झड़प ने इलाके में राजनीतिक और पुलिस विवाद खड़ा कर दिया था।

फ्लाईओवर के नीचे घेरकर जाने नहीं दिया

बताया गया है कि AAP कार्यकर्ताओं की भीड़ पुलिसकर्मी को घेरते हुए फ्लाईओवर के नीचे तक ले गई। आरोप है कि भीड़ ने कथित तौर पर उसे वहां से निकलने नहीं दिया। स्थिति बिगड़ने पर वर्दी में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर अपने साथी को भीड़ से बाहर निकालने की कोशिश की।

पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल की मेडिकल जांच कराई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे किसी तरह की चोट लगी है या नहीं। पुलिसकर्मी के साथ ड्यूटी के दौरान कथित मारपीट को लेकर FIR दर्ज करने पर भी विचार किया जा रहा है।

तिलक नगर में सड़क की क्वालिटी पर केजरीवाल ने उठाए सवाल

यह घटना पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर में सोमवार (28 सितंबर) को अरविंद केजरीवाल के दौरे के दौरान हुई। केजरीवाल के साथ AAP सांसद संजय सिंह, स्थानीय विधायक जरनैल सिंह और पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे। केजरीवाल ने इलाके में हाल ही में बनी सड़क की क्वालिटी को लेकर दिल्ली की BJP सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सड़क निर्माण के कुछ ही दिनों बाद उसकी हालत खराब हो गई है।

केजरीवाल ने कहा कि सड़क को हाथ से ही उखाड़ा जा सकता है। उन्होंने दिल्ली में इस तरह का निर्माण पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पिछली AAP सरकार के दौरान इस तरह के सड़क निर्माण पर पांच साल की गारंटी होती थी।

एक दिन पहले मंत्री प्रवेश वर्मा का वीडियो हुआ था वायरल

अरविंद केजरीवाल का तिलक नगर दौरा ऐसे समय हुआ, जब इससे एक दिन पहले दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा का एक वीडियो सामने आया था। वायरल वीडियो में उन्हें इलाके में नई बनी सड़क का निरीक्षण करते समय एक व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मारते हुए देखा गया था।

हालांकि, बाद में पुलिस से जुड़ी जानकारी में सामने आया कि थप्पड़ खाने वाला व्यक्ति भी एक मामले में आरोपी है। 22 वर्षीय साहिब सिंह पर इस साल की शुरुआत में दिल्ली नगर निगम (MCD) के एक कर्मचारी के साथ कथित मारपीट के संबंध में पुलिस शिकायत और एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई।

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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सामने आई घटना

तिलक नगर की घटना ने दिल्ली में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी AAP के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ केजरीवाल ने सड़क निर्माण की क्वालिटी पर सवाल उठाए। वहीं, उनके दौरे के दौरान पुलिसकर्मी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अब वीडियो की जांच कर रही है। मामले में पुलिस कार्रवाई कर सकती है। NDTV के मुताबिक, पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। फिलहाल, दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान का इंतजार है।

सीपीएम का अपना एजेंडा है

देश की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी सीपीएम के महासचिव एमए बेबी ने विपक्षी गठबंधन की बैठक बुलाने की पहल की। इस पहल पर ममता बनर्जी ने सबसे पहले जवाब दिया और उन्होंने बेबी से फोन पर बात की। कांग्रेस ने भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और उसके बाद 30 सितंबर की बैठक तय हुई। लेकिन ऐसा लग रहा है कि सीपीएम का अपना भी एजेंडा है। वह कांग्रेस को इसका पूरा श्रेय नहीं लेने देना चाहती है। सीपीएम जन प्रतिरोध के मुद्दों पर खुद को आगे रख रही है। जानकार नेताओं का कहना है कि कांग्रेस में आंदोलन करने की क्षमता खत्म हो गई है। इसलिए सीपीएम को आगे रहना चाहिए।

दूसरा कारण यह है कि केरल में सीपीएम और कांग्रेस के बीच घमासान छिड़ा है। सीपीएम के नेता इस बात से नाराज हैं कि कांग्रेस ने केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी के कहने पर पूर्व मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए हैं। तभी सीपीएम का अपना राजनीतिक दांवपेंच अलग चल रही है। यह एमए बेबी जब दिल्ली पहुंचे तब भी देखने को मिला। उन्होंने आते ही दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से मिले। गौरतलब है कि केजरीवाल अब अपने को ‘इंडिया’ ब्लॉक से अलग मानते हैं। पिछली बैठक में उनकी पार्टी शामिल नहीं हुई थी। ममता बनर्जी और एमए बेबी की भी बात हुई है। ममता चुनाव हारने के बाद से विपक्षी गठबंधन को सक्रिय करने में ज्यादा रूचि दिखा रही हैं लेकिन इससे पहले तो उन्होंने भी ‘इंडिया’ ब्लॉक को छोड़ ही दिया था।

सीजेपी का जेल भरो आंदोलन का ऐलान

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए दो अक्टूबर तक की समय सीमा दी है। सीजेपी ने कहा है कि अगर दो अक्टूबर तक इस्तीफा नहीं होता है या उनको नहीं हटाया जाता है तो मुंबई के शिवाजी पार्क में आंदोलन करेंगे और अगर आंदोलन की अनुमति नहीं मिली तो जेल भरो आंदोलन शुरू होगा। इस बीच आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने सीजेपी को सलाह दी है कि उनको ज्ञानेश कुमार का नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी का इस्तीफा मांगना चाहिए। केजरीवाल ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार ने जो किया वह अपने बॉस यानी प्रधानमंत्री मोदी के लिए किया।

इस बीच खबर है कि मुंबई पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी को दो अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी। इसे लेकर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है, ‘नागरिकों की आवाज दबाने की ऐसी कोशिशें स्वीकार्य नहीं हैं। अगर हमें प्रदर्शन करने के अधिकार से वंचित किया गया, तो सीजेपी गांधी जयंती के दिन मुंबई में जेल भरो आंदोलन शुरू करेगी’। गौरतलब है कि सीजेपी ने 24 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था। हालांकि बाद में इसे बढ़ा कर दो अक्टूबर तक कर दिया गया।