आम आदमी को थप्पड़ मार कर फंसे प्रवेश वर्मा

नई दिल्ली। दिल्ली की भाजपा सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रवेश वर्मा एक आम आदमी को थप्पड़ मारने के विवाद में फंस गए हैं। आम आदमी पार्टी ने थप्पड़ मारने का वीडियो शेयर करते हुए उनके ऊपर आरोप लगाया है कि एक व्यक्ति खराब सड़क निर्माण का वीडियो बना रहा था तो उसे रोकने के लिए मंत्री ने थप्पड़ मार दिया। दूसरी ओर मंत्री प्रवेश वर्मा का कहना है कि उस व्यक्ति ने उनके परिवार के लिए अपशब्द कहे थे।

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने रविवार को वीडिया साझा करते हुए आरोप लगाया कि तिलक नगर में सड़क बनाने में हुए भ्रष्टाचार को लेकर कुछ लोग उनसे सवाल कर रहे थे। इस बीच उन्होंने वहां खड़े एक युवक को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद उनके गार्ड और मौजूद साथियों ने युवक को दूर हटाया। पीड़ित युवक का आरोप है कि पुलिस के सामने उसे पीटा गया। जान से मारने की धमकी दी गई। उसने पुलिस को शिकायत दी है और कहा है कि मंत्री को लिखित में माफी मांगनी होगी।

थप्पड़ विवाद के बाद प्रवेश वर्मा करीब तीन मिनट का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने घटना पर सफाई दी है। उन्होंने इसमें कहा है कि आम आदमी पार्टी के नेता जरनैल सिंह रात में बनी सड़क सुबह उखाड़ रहे हैं। उन्होंने कमीशन मांगा था, नहीं मिलने पर विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि तिलक नगर की घटना का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें प्रवेश वर्मा और विधायक जरनैल सिंह के बीच बहस होती दिख रही है। बाद में जनरैल सिंह उनके पीछे पीछे गाड़ी तक पहुंच गए। वहीं प्रवेश वीडियो बना रहे युवक को थप्पड़ मार देते हैं।

विपक्ष क्या साझा आंदोलन करेगा?

विपक्षी पार्टियों को एक के बाद एक ऐसे मुद्दे मिल रहे हैं, जिन पर वह साझा आंदोलन करे तो सरकार के खिलाफ नाराजगी को दिशा दे सकता है। ताजा मामला चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर हुए खुलासे का है। अंग्रेजी के अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक खोजी रिपोर्ट में बताया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर आयोग में एक राय नहीं है और इसे लेकर 10 महीने के अंदर दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त से 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई। नाम जोड़ने वाले फॉर्म छह में किए गए बदलाव को तो दो आयुक्तों ने अवैध और अनधिकृत तक बताया। ऐसे ही ईआरओ को चुनाव आयोग का सेंट्रल डाटा बेस इस्तेमाल करने से रोकने और नाम काटने व जोड़ने के उनके मूल अधिकार को ही कमतर करने का आरोप लगाया। यह बहुत बड़ा मुद्दा है और अभी तक विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जो आरोप लगाती थीं, इस रिपोर्ट से एक तरह से उनकी पुष्टि हुई है।

फिर भी ऐसा नहीं लग रहा है कि विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर इसके खिलाफ आंदोलन करेंगी। जंतर मंतर का प्रदर्शन हो या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला हो सभी पार्टियां अपनी राजनीति अलग कर रही हैं। राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम कर रहे हैं तो अखिलेश यादव अपने राज्य के चुनाव में लगे हैं। ममता बनर्जी अपने राज्य में फंसी हैं तो तेजस्वी यादव को किसी बात से मतलब नहीं है। झारखंड में हेमंत सोरेन सत्ता में हैं तो उनकी चिंताएं अलग हैं। एमके स्टालिन गठबंधन से अलग हो गए हैं तो शरद पवार की पोजिशन स्पष्ट नहीं है कि वे इंडिया ब्लॉक में हैं या तटस्थ हैं और एनडीए में जाने की तैयारी कर रहे हैं। रही बात उद्धव ठाकरे की तो उनके पास बहुत ताकत नहीं बची है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल के पास ताकत है और नैरेटिव बनाने की क्षमता भी है लेकिन उनको पंजाब में कांग्रेस से चुनाव लड़ना है और गोवा में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की राजनीति करनी है।

जानकार सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के कुछ नेता चाहते हैं कि विपक्षी पार्टियों के साथ बात हो और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर आई रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाए। मुश्किल यह है कि साझा आंदोलन का चेहरा कौन होगा? पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में जैसे राहुल गांधी अभियान चला रहे हैं उसी आधार पर कांग्रेस चाहेगी कि इस आंदोलन का चेहरा भी राहुल हों। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के नेता चाहते हैं कि केजरीवाल आंदोलन का नेतृत्व करें। आप और ममता बनर्जी की पार्टी ने इस मामले में सबसे दो टूक स्टैंड लिया है। दोनों ने हाल के सभी चुनावों को रद्द करने और एसआईआऱ को भी रद्द करने की मांग की है। अगर कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां इन दो मांगों को लेकर एकजुट होती हैं और देशव्यापी आंदोलन शुरू होता है तो उसका बड़ा असर होगा। एसआईआर के बाद मसौदा सूची में 13 करोड़ लोगों के नाम कटे हैं। हालांकि बाद में कुछ लोगों के नाम जुड़े लेकिन फिर भी करोड़ों लोगों के नाम कटे हैं। सो, एसआईआर को रद्द करना एक बड़े आंदोलन का मुद्दा हो सकता है। लेकिन मुश्किल यह है कि जून में बैठक के बाद ‘इंडिया’ ब्लॉक की फिर दोबारा बैठक नहीं हुई है। कौन बैठक की पहल करे, कौन एजेंडा तय करे, खर्च कौन जुटाए और कौन नेतृत्व करे ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं के पास नहीं है। इसलिए ऐसा लग रहा है कि सब अपनी अपनी लड़ाई लड़ेंगे और संसद सत्र का इंतजार करेंगे कि उसमें इस मुद्दे को उठा कर जवाब मांगेंगे। सिर्फ संसद में विरोध प्रदर्शन करने की राजनीति से विपक्ष को कोई लाभ नहीं हो रहा है।

दिल्ली में मात्र नोटिस जबकि बंगाल में सीधे नाम कटे!

राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के पहले चरण के बाद मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित हो गई है। दिल्ली में 33 फीसदी के करीब लोगों के नाम काट दिए गए हैं। सोचें, पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में दिल्ली में 1.45 करोड़ मतदाता थे लेकिन अब जो मसौदा सूची प्रकाशित हुई है उसमें सिर्फ 97 लाख मतदाता हैं। करीब 47 लाख नाम काट दिए गए हैं। इनके अलावा बड़ी संख्या में नोटिस भेजा जा रहा है। अलग अलग कारणों से लाखों लोगों से जवाब तलब किया गया है। इसकी खूब चर्चा हो रही है कि चुनाव आयुक्त एसएस संधु और उनके परिजनों को नोटिस चला गया तो भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी और उनके बेटी को नोटिस चला गय, दिल्ली के उप राज्यपाल तरणजीत सिंह संधु और विदेश मंत्री एस जयशंकर को नोटिस गया, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी नोटिस भेजा गया। यह सूची लंबी है।

लोग चटखारे लेकर इन खबरों को पढ़ रहे हैं। ज्यादातर लोग इस बात से खुश हैं कि बड़े बड़े लोगों को भी जवाब देना होगा। एसआईआर में नोटिस जारी होने की प्रक्रिया का विरोध करने वाले कांग्रेस के इकोसिस्टम के लोग भी खुश हैं और कह रहे हैं कि चुनाव आयोग भस्मासुर हो गया है। यह भी कहा जा रहा है कि सिस्टम में जो गड़बड़ी की गई उसका खामियाजा अब बड़े लोग भी भुगत रहे हैं। लेकिन असल में भी क्या ऐसा ही है? ऐसा लग रहा है कि यह पश्चिम बंगाल में लाखों लोगों को नोटिस भेजने और नाम, पता या उम्र में गड़बड़ी के आधार पर लाखों लोगों के नाम काट देने के फैसले का औचित्य स्थापित करने के लिए जान बूझकर किया जा रहा है। ध्यान रहे जिन गड़बड़ियों पर दिल्ली में नोटिस भेजा जा रहा है वैसी गड़बड़ियों पर बंगाल में नाम काट दिए गए। यह उसी प्रक्रिया की मेनस्ट्रीमिंग करने का प्रयास है। इसके जरिए दिखाया जा रहा है कि बंगाल में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है, बल्कि वह सामान्य प्रक्रिया है।

पूरे विपक्ष का ज्ञानेश पर हमला

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऊपर विपक्ष ने जोरदार हमला बोला है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट सामने आने के बाद राहुल गांधी सहित सभी विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप दोहराए। राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर वोट चोरी को संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि समय आने पर किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। अखिलेश यादव से लेकर अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे सबने ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाया। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग की।

असल में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्ञानेश कुमार अपने संवैधानिक दायरे से बाहर निकल कर फैसले करते हैं और दो अन्य चुनाव आयुक्तों को फैसलों में शामिल नहीं करते हैं। दोनों आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार इसकी शिकायत की है। दोनों आयुक्तों ने ‘अवैध और अनधिकृत’ काम करने का आरोप भी मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाया है। इस रिपोर्ट को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने एक वीडियो में कहा है, ‘मैं इलेक्शन कमीशन और इलेक्शन ऑफिसर्स को साफ कह रहा हूं कि आप जो कर रहे हो गलत कर रहे हो। ये राजद्रोह है, देश के खिलाफ है। टाइम आएगा। हम आपको पकड़ेंगे। बचने वाले नहीं हो’। कांग्रेस के सांसद और सुप्रीम कोर्ट के जाने माने वकील अभिषेक सिंघवी ने इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि इस खुलासे के बाद ज्ञानेश कुमार को पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने महाभियोग की भी मांग की।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की जांच की मांग करते हुए कहा है, ‘सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है’।

आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने अखबार की रिपोर्ट को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने का अधिकार सिर्फ ईआरओ को है, फिर दिल्ली में बैठे लोग पूरे देश की वोटर लिस्ट कैसे बदल रहे हैं’? महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए कहा, ‘महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बैलट पेपर का उपयोग करके फिर से चुनाव होने चाहिए’।

Delhi SIR: विदेश मंत्री जयशंकर को मिला SIR का नोट‍िस, लिस्ट में इन बड़े नेताओं के भी नाम

Delhi SIR: देशभर में इस समय स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR पर काम चल रह है। वहीं राजधानी दिल्ली में एसआईआर को लेकर जारी नोटिस में देश के बड़े-बड़े नाम सामने आए हैं। इस सूची में कई बड़े राजनीतिक नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। इलेक्शन कमिश्नर एस.एस. संधू, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत कई बड़े नाम SIR के तहत जारी नोटिस की सूची में शामिल हैं। एसआईआर के जरिए वोटर लिस्ट की जांच की जा रही है और उसमें जरूरी सुधार किए जा रहे हैं।

इन लोगों को जारी हुआ नोटिस

न्यूज18 इंडिया के मुताबिक इस लिस्ट में कई बड़े नेताओं के नाम शामिल है। इस सूची में कांग्रेस नेता और वरिष्ठ सांसद कपिल सिब्बल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और विदेश सचिव विक्रम मिसरी के नाम भी शामिल हैं। सूची के अनुसार, चुनावी रिकॉर्ड में एस.एस. संधू के नाम की स्पेलिंग में गलती होने के कारण उन्हें नोटिस जारी किया गया है। नोटिस की सूची में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी शामिल हैं।

क्यों भेजा गया नोटिस

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी के.एस. जयशंकर का नाम भी मतदाता सूची की जांच के दौरान जारी नोटिस की सूची में शामिल है। वहीं, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और विदेश सचिव विक्रम मिसरी को नोटिस इसलिए जारी किया गया है, क्योंकि उनके नाम पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के रिकॉर्ड से मेल नहीं पाए। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी का नाम भी इस सूची में है। सत्ता और राजनीति से जुड़े कई जाने-माने लोगों को पिछले एसआईआर के रिकॉर्ड से नाम नहीं मिलने या रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी पाए जाने के कारण नोटिस भेजे गए हैं।

ये नोटिस चल रही मतदाता सूची की जांच प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इन नोटिस में अलग-अलग मामलों में रिकॉर्ड की गड़बड़ी, नाम की स्पेलिंग में गलती या पिछले एसआईआर के रिकॉर्ड से नाम का मेल नहीं होने जैसी वजहों का जिक्र किया गया है।

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दिल्ली SIR : CM रेखा गुप्ता और अरविंद केजरीवाल को नोटिस, मुख्यमंत्री की वोट एंट्री वैलिडेट

दिल्ली SIR : CM रेखा गुप्ता और अरविंद केजरीवाल को नोटिस, मुख्यमंत्री की वोट एंट्री वैलिडेट

Notices issued to Rekha Gupta and Arvind Kejriwal during special intensive revision

दिल्ली में मतदाता सूची के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, मतदाताओं की ओर से जमा कराए गए एन्यूमरेशन फॉर्म में कुछ विसंगतियां मिलने के बाद ये नोटिस जारी किए गए हैं।

 

हालांकि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मतदाता प्रविष्टि को अब वैलिडेट कर दिया गया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, उनका नाम शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में शामिल रहेगा। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है।

 

रेखा गुप्ता को उम्र संबंधी विसंगति पर नोटिस

अधिकारियों के अनुसार रेखा गुप्ता की प्रविष्टि को एन्यूमरेशन फॉर्म में दी गई जानकारी के आधार पर ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाली सूची में शामिल किया गया था। उन्हें उम्र से संबंधित एक विसंगति के कारण नोटिस जारी हुआ था। बाद में उनकी मतदाता प्रविष्टि को वैध कर दिया गया।

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दिल्ली के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और बीजेपी नेता सुधांशु मित्तल समेत कई अन्य प्रमुख मतदाताओं को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

 

अरविंद केजरीवाल और परिवार को क्यों मिला नोटिस?

पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल को ‘लास्ट SIR से अनमैप्ड’ होने के आधार पर नोटिस जारी किया गया है। उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, माता-पिता और बेटे को भी इसी कारण नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने  आई है।

 

केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं। नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सवाल उठाया कि तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के नाम दिल्ली की मतदाता सूची से गायब करने की कैसी प्रक्रिया है?

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यह बयान AAP की ओर से दिया गया राजनीतिक आरोप है; चुनाव अधिकारियों की ओर से SIR के तहत नोटिस को मतदाता रिकॉर्ड के सत्यापन और विसंगतियों से जोड़कर बताया गया है।

 

कपिल सिब्बल और वीरेंद्र सचदेवा को भी नोटिस

राज्यसभा सांसद और नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता कपिल सिब्बल को भी पिछली SIR से उनकी प्रविष्टि के मैप न होने के कारण नोटिस जारी किया गया है।

 

वहीं दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने बताया कि उन्हें नाम से जुड़ी विसंगति के कारण नोटिस मिला है। उन्होंने कहा कि जरूरी दस्तावेजों के माध्यम से इसे ठीक कराया जाएगा। सचदेवा के मुताबिक, उनकी पत्नी और भाई का नाम भी नोटिस पाने वाले मतदाताओं में शामिल है।

 

33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस

दिल्ली में  SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल करीब 33.13 लाख मतदाताओं को उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में सामने आई विसंगतियों को लेकर नोटिस भेजे जाने हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 31.63 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जा चुके हैं।

 

इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है, जिनके रिकॉर्ड पिछली SIR से लिंक या मैप नहीं हो पाए हैं। दिल्ली में पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के रिकॉर्ड वर्ष 2002 से संबंधित हैं।

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नोटिस मिलने पर क्या करना होगा?

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, SIR के दावे और आपत्तियों के चरण के दौरान संबंधित मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जा रहा है।

 

नोटिस पाने वाले मतदाताओं को संबंधित विधानसभा क्षेत्र के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के सामने जवाब और जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए 29 अक्टूबर तक का समय दिया गया है।

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SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी का सत्यापन और जरूरी सुधार करना है। दिल्ली CEO कार्यालय ने यह भी कहा है कि प्रमुख मतदाताओं समेत ऐसे नाम जिन्हें पहले चुनावी डेटाबेस में फ्लैग किया गया था, उन्हें ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किया गया है, ताकि दावे-आपत्तियों के चरण में आवश्यक दस्तावेज जुटाए जा सकें।

 

दिल्ली में SIR की प्रक्रिया के संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने पहले भी मतदाताओं को 2002 की पिछली SIR सूची में अपने या रिश्तेदारों के विवरण की जांच करने की जानकारी दी थी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सीएम पर फेंके अंडे, टमाटर

लुधियाना। अब तक सत्तारूढ़ पार्टियों के कार्यकर्ता विरोधी पार्टियों के नेताओं के ऊपर अंडे और टमाटर फेंकते थे। लेकिन पंजाब में उलटा हुआ है। पंजाब में सिर्फ दो विधायकों वाली पार्टी भाजपा के नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ऊपर अंडे और टमाटर फेंके। हैरानी की बात यह है कि अंडे और टमाटर फेंकने वाली भीड़ का नेतृत्व पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने किया, जिनके दादा बेअंत सिंह पंजाब के सीएम रहे हैं। एक दिन पहले उनके ऊपर अंडे फेंके गए थे।

रवनीत सिंह बिट्टू के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने शनिवार को लुधियाना में मुख्यमंत्री भगवंत मान के काफिले पर अंडे, टमाटर फेंके। बिट्टू ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के गेट के पास मुख्यमंत्री के काफिले की ओर शराब की बोतल लहराते हुए कहा कि वे मान को बोतल लौटा रहे हैं। उन्होंने बोतलें फेंकते हुए कहा, ‘भगवंत मान अपनी शराब का आनंद लो और अरविंद केजरीवाल को दिल्ली से पंजाब को लूटने दें’।

प्रदर्शन के दौरान पंजाब पुलिस ने बिट्‌टू को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद बिट्टू के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, ‘लोगों की आवाज को हिरासत और पर्चे से दबाया नहीं जा सकता। आज पंजाब पुलिस ने हमें हिरासत में ले लिया है, लेकिन हमारा हौसला बुलंद है’। गौरतलब है कि एक दिन पहले भाजपा की नशा मुक्त रथ यात्रा शुरू होने से पहले पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्‌टू के काफिले पर हमला हो गया था। उस समय वे अमृतसर से पठानकोट में यात्रा में शामिल होने के लिए जा रहे थे।

Delhi SIR: सीएम रेखा गुप्ता-अरविंद केजरीवाल को SIR का नोटिस,जानें चुनाव आयोग ने क्यों उठाया ये कदम

Delhi SIR: राजधानी दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर शनिवार को एक बड़ी खबर सामने आई है। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के तहत नोटिस पाने वाले वोटर्स में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल का नाम भी लिस्ट में सामने आया। आयोग ने बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ियों की लिस्ट में नाम आने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया गया है। चुनाव आयोग ने दिल्ली में SIR के तहत जमा किए गए उनके एन्यूमरेशन फॉर्म की जानकारी में गड़बड़ियों के लिए नोटिस भेजा है।

इसलिए भेजा गया नोटिस

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने ऐसे मतदाताओं की लिस्ट जारी की है, जिनके रिकॉर्ड में गड़बड़ी या पुराने रिकॉर्ड से मिलान नहीं होने की बात सामने आई है। ये लिस्ट 31 अगस्त को जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के करीब तीन हफ्ते बाद जारी की गई। सीएम रेखा गुप्ता को भेजा गया नोटिस उनके और उनके माता-पिता की दर्ज उम्र में 15 साल से कम का अंतर होने से जुड़ा है। वहीं, अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, माता-पिता और बेटे पुलकित केजरीवाल के रिकॉर्ड पिछली SIR की वोटर लिस्ट से नहीं मिल पाए, इसलिए उन्हें भी नोटिस दिया गया है। इन नोटिस को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में रखा गया है—‘नो मैपिंग’ और ‘लॉजिकल गड़बड़ी’।

इन बड़े नेताओं के नाम भी शामिल

इस लिस्ट में राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल का नाम भी शामिल है। उनकी जानकारी पिछली SIR वोटर लिस्ट से मेल नहीं खाने पर उन्हें नोटिस दिया गया है। दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को भी नोटिस मिला है। उनकी पत्नी और भाई को नाम में अंतर पाए जाने के कारण नोटिस भेजा गया है। चुनाव अधिकारियों के पहले जारी आंकड़ों के मुताबिक, 13,79,785 मतदाताओं को ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में रखा गया है, जबकि 19,33,134 मतदाताओं के रिकॉर्ड में ‘तार्किक अंतर’ पाया गया है। हालांकि इन सभी मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल हैं, लेकिन उन्हें अपने रिकॉर्ड में मिली गड़बड़ियों को दूर करने के लिए सुनवाई में शामिल होने को कहा गया है।

जारी है SIR की प्रक्रिया

31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के मुताबिक, दिल्ली में वोटरों की संख्या घटकर 97,53,577 रह गई है। यह 30 जून को दर्ज 1,45,10,299 वोटरों के मुकाबले 32.8% कम है। वहीं, वोटरों की संख्या में बदलाव के बाद दिल्ली में पोलिंग स्टेशनों की संख्या बढ़कर 14,947 हो गई है, जबकि पहले 13,033 पोलिंग स्टेशन थे। यानी पोलिंग स्टेशनों में करीब 15% की बढ़ोतरी हुई है। चुनाव अधिकारियों ने सभी 70 विधानसभा सीटों के पोलिंग स्टेशनों की जानकारी भी जारी कर दी है।

अलग-अलग पोलिंग स्टेशनों के दस्तावेजों में एसआईआर के दौरान सामने आई कई तरह की गड़बड़ियों का पता चला है। नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सरोजिनी नगर के एक पोलिंग स्टेशन पर 84 वोटरों के नाम जांच के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें 37 वोटरों की जानकारी पिछली एसआईआर मतदाता सूची से नहीं मिल पाई। बाकी मामलों में नाम और अन्य रिकॉर्ड से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं।

गांधीनगर निकाय चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की

आम आदमी पार्टी (आप) ने 11 अक्टूबर को होने वाले गांधीनगर निकाय चुनाव के लिए 23 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची शनिवार को जारी की।

‘आप’ की गुजरात इकाई के महासचिव मनोज सोरठिया ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी ने पिछले निकाय चुनाव में एक सीट जीती थी और उसे 21 प्रतिशत वोट मिले थे।

आगामी चुनाव में कुल 44 सीटों के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और आप के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा।

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सोरठिया ने कहा सत्ता में बैठे लोगों ने गांधीनगर की सुंदरता को बेच दिया है। पिछले चुनाव में गांधीनगर के लोगों ने 21 प्रतिशत वोट दिए और आप के एक उम्मीदवार को निर्वाचित किया। किसी लालच या प्रलोभन में आए बिना आप पार्षद ने पांच साल तक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि आप आम लोगों और शिक्षित वर्ग की पार्टी के रूप में उभरी है और उसने गांधीनगर में युवाओं, डॉक्टरों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को टिकट दिया है।

गांधीनगर नगर निगम और ओखा तथा थरा नगर पालिकाओं के चुनाव 11 अक्टूबर को होंगे। मतगणना 13 अक्टूबर को होगी।

Pic Credit : UNI

इस बार मौका नहीं गवांएगी कांग्रेस!

पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में तो कांग्रेस पार्टी ने मौका गंवा दिया। तभी कॉकरोच जनता पार्टी को इस पर राजनीति करने का मौका मिला और आज शिक्षा के मामले में ऐसा लगता जैसे सीजेपी ने पट्टा लिखा लिया है। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मामले में भी कांग्रेस ने मौका गंवाया। उसका इस्तेमाल आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने किया। उन्होंने दिल्ली में टाउन हॉल कार्यक्रम किया और सरकार के ऊपर नीतिगत परिवर्तन के लिए दबाव बनाया। शिक्षा और ई 20 दोनों के मामले में सरकार झुकी है। राज्यों में शिक्षा को लेकर बड़े फैसले हो रहे हैं और सरकार ने पेट्रोल में 10 फीसदी इथेऩॉल मिश्रण की नीति पर विचार शुरू कर दिया है। पहले सरकार इसके लिए मना कर रही थी लेकिन अब खबर है कि सरकार ई 20 के साथ साथ ई 10 का विकल्प भी पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराएगी। इन दोनों मामलों में कांग्रेस ने राजनीति की लेकिन पीछे रही, सीजेपी और आप आगे रहे।

तभी अब कांग्रेस पार्टी यूपीआई पर शुल्क लगाने के सरकार के फैसले पर राजनीति में पिछड़ना नहीं चाहती है। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने पहले दिन से इस मुद्दे को पकड़ा है और जानकार सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इस पर निर्णायक लड़ाई की तैयारी कर रही है। कांग्रेस के एक जानकार नेता ने कहा कि राहुल गांधी इस लड़ाई का नेतृत्व करेंगे और कांग्रेस इसके रोलबैक तक आंदोलन करेगी। यानी सरकार के ऊपर दबाव बनाया जाएगा कि वह यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला वापस ले। हालांकि सरकार इस मूड में नहीं दिख रही है क्योंकि इसके कई और पहलू है। लेकिन कांग्रेस इसके लिए दिल्ली को केंद्र बना कर पूरे देश में आंदोलन करेगी। कहा जा रहा है कि आंदोलन और प्रदर्शन के जितने भी तरीके होते हैं, सबका इस्तेमाल किया जाएगा। यानी जरुरत पड़ी तो कांग्रेस के नेता भूख हड़ताल पर भी बैठेंगे। हालांकि यह पता नहीं है कि राहुल गांधी भूख हड़ताल करेंगे या कोई दूसरा नेता करेगा।

बहरहाल, कांग्रेस को फीडबैक है कि शहरों से ज्यादा गांवों में इस फैसले का विरोध हो रहा है। कांग्रेस नेता यह भी कह रहे हैं कि भाजपा और केंद्र सरकार इस मामले में लोगों को समझा नहीं पा रहे हैं। रिजर्व बैंक से लेकर नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एपीसीआई की ओर से जो सफाई जारी की गई है उसे लोग समझ नहीं रहे हैं। सरकार की ओर से 42 प्वाइंट का एक स्पष्टीकरण जारी किया गया है वह अंग्रेजी में है और बहुत तकनीकी शब्दावली में है। दूसरी ओर कांग्रेस के साथ साथ कुछ स्वतंत्र जानकार इसके बारे में लोगों को समझा रहे हैं कि अभी सिर्फ दो हजार से ऊपर के लेनदेन पर शुल्क लग रहा है, लेकिन जल्दी ही इससे कम पर भी शुल्क लगने लगेगा। भारत पे नाम से डिजिटल लेनदेन का एप बनाने वाले अशनीर ग्रोवर ने मीडिया और सोशल मीडिया में मोर्चा संभाला है। वे लोगों को इसके हर पहलू के बारे में समझा रहे हैं और बता रहे हैं कि सरकार पहले से इस सेवा से मुनाफा कमा रही है। फिर भी उसने ज्यादा कमाई के लिए टैक्स लगाया है। सरकार के पास ऐसा कोई स्वतंत्र जानकार नहीं है, जो इसके फायदे समझाए। शुल्क लगाने की शुरुआत 15 अक्टूबर से होगी, उस समय नवरात्रि चल रही होगी। नवरात्रि का पांचवां दिन होगा और उसी दिन से लोग खरीदारी शुरू करते हैं। पता नहीं सरकार में किसी ने इस पर विचार किया या नहीं। लेकिन हकीकत यह है कि सरकार बैकफुट पर है और कांग्रेस को उसे घेरने का मौका मिल गया है।