SIP Step-Up Magic: हर साल ₹1,000 की मामूली बढ़ोतरी से बनेगा ₹1.18 करोड़ का एक्स्ट्रा फंड! जानिए स्टेप-अप SIP का ये गणित

Step-Up SIP Returns Calculation: म्यूचुअल फंड में निवेश की शुरुआत तो बहुत से लोग करते हैं, लेकिन सालों-साल अपनी SIP की रकम को बढ़ाना भूल जाते हैं। अगर आप अपनी मासिक एसआईपी में हर साल सिर्फ ₹1,000 का स्टेप-अप करते हैं, तो 25 वर्षों में आपके पास फिक्स्ड एसआईपी के मुकाबले ₹1.18 करोड़ का अतिरिक्त फंड तैयार हो सकता है।

व्हाइटओक कैपिटल के एक ताजा विश्लेषण में यह सामने आया है कि कैसे आमदनी बढ़ने के साथ निवेश में की गई छोटी-सी सालाना बढ़ोतरी लंबी अवधि में आपकी वेल्थ को कई गुना बढ़ा सकती है।

फिक्स्ड SIP बनाम स्टेप-अप SIP: जानिए आंकड़ों का खेल

अगर आप हर महीने ₹10,000 की फिक्स्ड एसआईपी करते हैं और उसमें कभी बदलाव नहीं करते, तो 25 साल बाद आपका फंड और रिटर्न इस प्रकार होगा:

फिक्स्ड ₹10,000 SIP: 25 साल में आपकी जेब से कुल ₹30 लाख का निवेश होगा, जो बढ़कर लगभग ₹2.30 करोड़ हो जाएगा।

₹1,000 टॉप-अप SIP: अगर आप ₹10,000 से शुरुआत कर हर साल ₹1,000 बढ़ाते हैं, तो कुल निवेश ₹66 लाख होगा, लेकिन आपका फाइनल फंड बढ़कर ₹3.49 करोड़ पहुंच जाएगा।

नेट फायदा: मात्र ₹1,000 की सालाना बढ़ोतरी से आपको ₹1.18 करोड़ का अतिरिक्त रिटर्न मिलेगा।

कैसे काम करता है ₹1,000 सालाना टॉप-अप?

इस फॉर्मूले में आपको एक बार में कोई बड़ा निवेश नहीं करना होता, बल्कि अपनी बढ़ती सैलरी के साथ इसे थोड़ा-थोड़ा बढ़ाना होता है:

  • पहले साल: ₹10,000 हर महीने
  • दूसरे साल: ₹11,000 हर महीने
  • तीसरे साल: ₹12,000 हर महीने
  • 25वें साल तक: आपकी मासिक SIP ₹34,000 हो जाएगी।

शुरुआत में कम, लेकिन आखिरी सालों में दिखता है कंपाउंडिंग का असली जादू

स्टेप-अप एसआईपी का असली फायदा समय बीतने के साथ तेजी से सामने आता है. आइए देखें कि फिक्स्ड और टॉप-अप SIP का अंतर सालों के साथ कैसे चौड़ा होता जाता है:

  • 5 साल बाद: दोनों के बीच अंतर केवल ₹1.25 लाख होता है।
  • 10 साल बाद: अतिरिक्त वेल्थ बढ़कर ₹7.38 लाख हो जाती है।
  • 15 साल बाद: फायदा बढ़कर ₹22.59 लाख पहुंच जाता है।
  • 20 साल बाद: अंतर ₹53.47 लाख तक पहुंच जाता है।
  • 25 साल बाद: यह अंतर ₹1 करोड़ का आंकड़ा पार करते हुए ₹1.18 करोड़ हो जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि निवेशक ने 25 साल में कुल एक्स्ट्रा ₹36 लाख ही जमा किए, लेकिन उसे फाइनल वेल्थ में ₹1.18 करोड़ का फायदा मिला। यानी अतिरिक्त मिले ₹1.18 करोड़ में से ₹82.48 लाख सिर्फ और सिर्फ चक्रवृद्धि ब्याज से आए हैं।

टॉप-अप SIP का XIRR थोड़ा कम क्यों दिखता है?

अक्सर निवेशक यह देखकर हैरान हो जाते हैं कि टॉप-अप SIP का XIRR (13.34%) फिक्स्ड SIP (13.81%) से थोड़ा कम दिखता है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि रिटर्न कम मिल रहा है। टॉप-अप एसआईपी में आपकी बड़ी रकम निवेश के आखिरी सालों में जमा होती है, जिससे उस अतिरिक्त रकम को कंपाउंड होने के लिए समय कम मिलता है। लेकिन क्योंकि आपका कुल निवेश किया गया मूलधन काफी बड़ा होता है, इसलिए अंत में मिलने वाला फंड काफी बड़ा हो जाता है।

इन्वेस्टर्स के लिए टेक-अवे

जैसे-जैसे हमारी आमदनी और महंगाई बढ़ती है, हमारे खर्चे तो बढ़ जाते हैं लेकिन हम SIP बढ़ाना भूल जाते हैं। ‘स्टेप-अप एसआईपी’ आपके निवेश को आपकी इनकम के साथ ऑटोमेटिकली सिंक कर देता है। अगर आप भी अपनी संपत्ति तेजी से बनाना चाहते हैं, तो आज ही अपनी चालू SIP में सालाना स्टेप-अप का विकल्प जरूर चुनें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

8th Pay Commission: 7वें वेतन आयोग जैसा फिटमेंट फैक्टर 2.57 रहा, तो कितनी बढ़ेगी आपकी सैलरी? देखिए लेवल 1, 4, 6 और 10 का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Salary Calculation: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सुगबुगाहट तेज है। नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी में कितना उछाल आएगा, यह पूरी तरह से फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करता है।

अगर सरकार 8वें वेतन आयोग में भी 7वें वेतन आयोग की तरह 2.57 का फिटमेंट फैक्टर बरकरार रखती है, तो अलग-अलग पे-लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और कुल टेक-होम सैलरी में कितना अंतर आएगा, आइए समझते हैं इसका आसान गणित।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर और कैसे बढ़ती है बेसिक सैलरी?

फिटमेंट फैक्टर एक कॉमन मल्टीप्लायर होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

7वें वेतन आयोग का फॉर्मूला: 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गई थी।

2.57 फिटमेंट फैक्टर का गणित: अगर 8वें वेतन आयोग में भी 2.57 का ही फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो 7वें वेतन आयोग की बेसिक पे को सीधे 2.57 से मल्टीप्लाई कर नया बेसिक पे तय किया जाएगा।

लेवल 1 से लेवल 10 तक का सैलरी कैलकुलेशन (2.57 फिटमेंट फैक्टर पर)

1. लेवल 1 (ग्रुप D/एमटीएस कर्मचारी)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹18,000

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹18,000 × 2.57): ₹46,260

सैलरी में बढ़ोतरी: बेसिक पे में सीधे ₹28,260 प्रति महीने की बढ़ोतरी होगी। महंगाई भत्ता यानी DA घटने के बाद नए बेसिक पर री-कैल्कुलेट होगा।

2. लेवल 4 (लोअर डिविजन क्लर्क / LDC)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹25,500

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹25,500 × 2.57): ₹65,535

सैलरी में बढ़ोतरी: बेसिक सैलरी में लगभग ₹40,035 प्रति महीने की सीधी वृद्धि देखने को मिलेगी।

3. लेवल 6 (असिस्टेंट / सीनियर क्लर्क / सब-इंस्पेक्टर)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹35,400

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹35,400 × 2.57): ₹90,978

सैलरी में बढ़ोतरी: इस लेवल के कर्मचारियों की बेसिक पे में ₹55,578 प्रति महीने का बड़ा उछाल आएगा।

4. लेवल 10 (ग्रुप A / क्लास 1 अधिकारी)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹56,100

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹56,100 × 2.57): ₹1,44,177

सैलरी में बढ़ोतरी: ग्रुप-ए अधिकारियों की बेसिक पे में सीधे ₹88,077 प्रति महीने की बंपर बढ़ोतरी होगी।

लेवल 1 से लेवल 10 तक का सैलरी कैलकुलेशन (2.57 फिटमेंट फैक्टर पर)

भत्तों पर क्या पड़ेगा असर?

जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तो केवल बेसिक सैलरी ही नहीं बदलती, बल्कि अन्य भत्तों का ढांचा भी पुनर्गठित होता है:

हाउस रेंट अलाउंस (HRA): नए बेसिक पे के आधार पर X, Y और Z श्रेणी के शहरों के हिसाब से HRA दोबारा तय किया जाएगा।

महंगाई भत्ता (DA): नया वेतन आयोग लागू होते ही मौजूदा DA शून्य (0%) कर दिया जाता है और नई बेसिक सैलरी पर फ्रेश तरीके से डीए की गणना शुरू होती है।

पेंशनभोगियों को फायदा: 2.57 के फिटमेंट फैक्टर का सीधा लाभ 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन रिवीजन में भी मिलेगा।

कर्मचारी यूनियनें इस बार 2.86 से 3.25 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं, लेकिन अगर सरकार पिछले आयोग के 2.57 के फॉर्मूले को भी अपनाती है, तब भी कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में जबरदस्त इजाफा होगा।

SBI Clek Vacancy 2026: 1538 बैकलॉग क्लर्क पदों पर भर्ती के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, जानें आवेदन करने की लास्ट डेट

SBI Clek Vacancy 2026: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने क्लेरिकल कैडर में 1,538 जूनियर एसोसिएट्स (कस्टमर सपोर्ट और सेल्स) की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह भर्ती अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए रिजर्व बैकलॉग वैकेंसी के लिए एक स्पेशल ड्राइव के तौर पर की जा रही है। पंजीकरण प्रक्रिया 7 अगस्त, 2026 से शुरू हो गई है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 27 अगस्त, 2026 तक अपने एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं। उम्मीदवार सिर्फ एक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश (UT) में भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं।

एसबीआई क्लर्क बैकलॉग पद कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं। एसबीआई ने 207 एससी, 1,219 एसटी और 112 ओबीसी पद अधिसूचित किए हैं, जिससे कुल पदों की संख्या 1,538 हो गई है। भर्ती के जरिए चयनित उम्मीदवारों को उसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में पोस्ट किया जाएगा जिसके लिए उन्होंने आवेदन किया था।

एसबीआई क्लर्क भर्ती 2026: कौन अप्लाई कर सकता है?

1 अप्रैल, 2026 को कैंडिडेट्स की उम्र 20 से 28 साल के बीच होनी चाहिए। उनका जन्म 2 अप्रैल, 1998 और 1 अप्रैल, 2006 के बीच हुआ होना चाहिए, दोनों तारीखें शामिल हैं।

कैंडिडेट्स के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी सब्जेक्ट में ग्रेजुएशन की डिग्री या सेंट्रल गवर्नमेंट द्वारा मान्यता प्राप्त बराबर की क्वालिफिकेशन होनी चाहिए। जो लोग ग्रेजुएशन के आखिरी साल या सेमेस्टर में हैं, वे भी प्रोविजनल तौर पर अप्लाई कर सकते हैं, बशर्ते वे 31 दिसंबर, 2026 तक अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर लें।

कैंडिडेट्स को अपने चुने हुए राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की बताई गई लोकल भाषा को पढ़ना, लिखना, बोलना और समझना भी आना चाहिए।

एसबीआई क्लर्क भर्ती 2026: चयन प्रक्रिया

एसबीआई क्लर्क भर्ती 2026 के तहत उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों में होगा।

  • प्रीलिमिनरी एग्जाम
  • मेन एग्जाम
  • लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट (LLPT), जहां लागू हो

प्रीलिमिनरी एग्जाम 100 मार्क्स का होगा और एक घंटे का होगा। इसमें तीन सेक्शन होंगे:

इंग्लिश लैंग्वेज : 30 सवाल

न्यूमेरिकल एबिलिटी : 35 सवाल

रीजनिंग एबिलिटी : 35 सवाल

हर सेक्शन के लिए 20 मिनट का अलग-अलग टाइम होगा। हर गलत जवाब के लिए कैंडिडेट्स को एक सवाल के लिए दिए गए मार्क्स का एक-चौथाई हिस्सा काट लिया जाएगा।

मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स 200 मार्क्स के 190 सवालों के पेपर में शामिल होंगे। एग्ज़ाम का कुल समय 2 घंटे 40 मिनट होगा।

मुख्य परीक्षा में जनरल/फाइनेंशियल अवेयरनेस, जनरल इंग्लिश, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, और रीज़निंग एबिलिटी और कंप्यूटर एप्टीट्यूड शामिल होंगे। हर गलत जवाब के लिए एक सवाल के लिए दिए गए मार्क्स का एक-चौथाई हिस्सा काट लिया जाएगा।

प्राथमिक परीक्षा में मिले अंक मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़े जाएंगे। फाइनल मेरिट लिस्ट मुख्य परीक्षा में मिले मार्क्स के आधार पर तैयार की जाएगी, जो जहां भी लागू हो, ज़रूरी लोकल लैंग्वेज टेस्ट के अधीन होगी।

लोकल लैंग्वेज टेस्ट

जिन कैंडिडेट्स ने क्लास 10 या क्लास 12 में बताई गई लोकल लैंग्वेज पढ़ी है और संबंधित मार्कशीट या सर्टिफिकेट दिखा सकते हैं, उन्हें लैंग्वेज टेस्ट नहीं देना होगा।

दूसरे प्रोविजनली चुने गए कैंडिडेट्स को बैंक जॉइन करने से पहले लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट पास करना होगा। जो कैंडिडेट्स टेस्ट में फेल हो जाएंगे, उन्हें अपॉइंटमेंट नहीं दिया जाएगा।

SBI क्लर्क भर्ती 2026 के लिए अप्लाई कैसे करें

कैंडिडेट्स SBI करियर पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। एप्लीकेशन प्रोसेस में रजिस्ट्रेशन, पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल्स भरना, जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करना और लागू फीस देना शामिल है।

एप्लीकेंट्स को एक वैलिड ईमेल ID और मोबाइल नंबर की ज़रूरत होगी जो रिक्रूटमेंट प्रोसेस पूरा होने तक एक्टिव रहना चाहिए।

कैंडिडेट्स को एप्लीकेशन शुरू करने से पहले अपनी फोटो, सिग्नेचर, बाएं अंगूठे का निशान और हाथ से लिखा हुआ डिक्लेरेशन की स्कैन्ड कॉपी भी तैयार रखनी चाहिए।

फॉर्म जमा करने और पेमेंट पूरा करने के बाद, कैंडिडेट को सिस्टम से मिले एप्लीकेशन फॉर्म और ई-रसीद को भविष्य के लिए डाउनलोड करके सेव कर लेना चाहिए।

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Gold Outlook: सोने में अगली तेजी में Gen Z का होगा बड़ा हाथ, जानिए WGC की रिपोर्ट क्या कहती है

Gold Outlook: गोल्ड के साथ रिश्ता बदल रहा है। इसमें जेनजी का बड़ा हाथ है। इस बारे में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की नई रिपोर्ट में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इंडिया में गोल्ड में अगली बड़ी तेजी में सिर्फ ज्वेलरी की खरीदारी नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी, डिजिटल फाइनेंस और न्यू-एज इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स का हाथ होगा।

गोल्ड में निवेश के तरीके में आ रहा है बदलाव

WGC की स्वर्णिम उड़ान 20247 में कई दिलचस्प बातें बताई गई हैं। यह रिपोर्ट तब आई है, जब सोने की कीमतों में पिछले कुछ सालों में बड़ी तेजी से लोगों की खरीदारी की आदत में बदलाव आ रहा है। हालांकि, अब भी भारत में लोग ज्वेलरी पर काफी पैसे खर्च कर रहे हैं।

भारत में लोगों के पास 31000 टन सोना

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लोगों के पास 31,000 टन सोना है। इसकी कीमत करीब 315 लाख करोड़ रुपये (3.4 ट्रिलियन डॉलर) है। इसमें से ज्यादातर सोना घरों में बेकार पड़ा है। इस वजह से भारत में यह सबसे ज्यादा अंडरयूटिलाइज्ड एसेट है। हालांकि, इसके पीछे सोने को लेकर लोगों की पारंपरिक सोच है।

Gen Z गोल्ड को अलग नजरिए से देख रहे

WGC के मुताबिक, 1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाले लोग सोने को सिर्फ विरासत में मिले एसेट के रूप में नहीं देखते हैं। उनका जोर सोने की लिक्विडिटी और डिजिटल एक्सेस जैसी चीजों पर भी है। यही वजह है कि सिर्फ फिजिकल ज्वेलरी के बजाय वे डिजिटल गोल्ड और टेक्नोलॉजी आधारित इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

ज्वेलर्स युवा खरीदारों को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि युवा इनवेस्टर्स गोल्ड में निवेश करने से पहले ऑनलाइन रिसर्च करते हैं। इस वजह से ज्वेलर्स इन नए कस्टमर्स को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 2035 तक जेनजी की कंज्यूमर स्पेंडिंग करीब 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इसका असर भविष्य में इंडिया के गोल्ड मार्केट पर दिखेगा।

फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बना रहा गोल्ड

डब्ल्यूजीसी के मुताबिक, इंडिया में गोल्ड की डिमांड अब सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित रहने वाली नहीं है। गोल्ड अब फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बन रहा है। इसमें गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम, रिसाइक्लिंग नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स, डिजिटल गोल्ड और बुलियन बैंकिंग का बड़ा हाथ हो सकता है। इस इंटिग्रेशन से घरों में पड़ा सोना भी इकोनॉमी का हिस्सा बन सकता है।

iQOO Z11 आ रहा है धमाल मचाने! 9020mAh बैटरी, 144Hz AMOLED और 90W चार्जिंग से होगा लैस

iQOO Z11 को भारत में लॉन्च होने में सिर्फ 12 दिन बचे हैं और ऐसे में ब्रांड ने पहले ही इस डिवाइस की कुछ खास खूबियां बता दी हैं। टीजर के मुताबिक, यह फोन दो कलर ऑप्शन में आएगा और इसमें MediaTek Dimensity प्रोसेसर होगा। इसके पिछले हिस्से में डुअल रियर कैमरा सेटअप के साथ रिंग फ्लैश भी देखने को मिलेगा। वहीं, बैक पैनल के निचले हिस्से पर iQOO की ब्रांडिंग दी गई है। अब आइए जानकारियों के आधार पर जानते हैं कि iQOO Z11 में क्या-क्या फीचर्स मिल सकते हैं।

भारत में iQOO Z11 की कीमत और लॉन्च डेट

यह कन्फर्म हो चुका है कि iQOO Z11 भारतीय बाजार में 20 अगस्त, 2026 को लॉन्च होगा। हालांकि, अभी तक फोन की कीमत के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन अनुमान है कि इसकी कीमत 35,000 रुपये से 40,000 रुपये के बीच होगी। यह भी कन्फर्म हो गया है कि यह फोन दो कलर ऑप्शन Celestial Blue और Aurora Green में उपलब्ध होगा।

iQOO Z11 के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

ब्रांड ने कन्फर्म किया है कि iQOO Z11 में MediaTek Dimensity 7500 प्रोसेसर होगा। इसके साथ ही इस फोन में 12GB RAM और 256GB इंटरनल स्टोरेज भी देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, फोन में शायद 6.83-इंच का AMOLED डिस्प्ले मिलेगा, जिसमें 144Hz रिफ्रेश रेट और 5000 निट्स की पीक ब्राइटनेस मिलेगी।

अटकलें हैं कि यह फोन Android 16 पर चल सकता है और इसके ऊपर कंपनी का OriginOS 6.0 इंटरफेस देखने को मिल सकता है। पावर के लिए फोन में 9,020mAh की बड़ी बैटरी दिए जाने की उम्मीद है, जो 90W वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 7.5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करेगा।

कैमरा सेटअप की बात करें तो, iQOO Z11 में डुअल रियर कैमरा सेटअप हो सकता है, जिसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) वाला 50MP का प्राइमरी शूटर और एक सेकेंडरी सेंसर शामिल होगा। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉल करने के लिए, फोन में 32MP का फ्रंट कैमरा मिलेगा।

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UPI : क्या यूपीआई से पेमेंट करना अब महंगा हो जाएगा? जानें अपने हर सवाल का जवाब

यूपीआई पेमेंट से जुड़ी कई खबरें आपने देखी होगी। इसकी वजह इससे जुड़े नियमों में कुछ बदलाव है। इन खबरों को देख पेमेंट के लिए रोजाना यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोग चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि यूपीआई से पेमेंट करना अब महंगा हो जाएगा। क्या सच में ऐसा होने जा रहा है? आइए इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए पेमेंट की सुविधा पूरी तरह से फ्री रहेगी। पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने 7 अगस्त को यह साफ कर दिया था। उसने कहा था कि यूपीआई कंज्यूमर्स के लिए फ्री बना बना रहेगा। साथ ही छोटे दुकानदारों को भी यूपीआई से से पेमेंट लेने पर कोई फीस नहीं चुकानी होगी।

अब सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले यूपीआई पेमेंट प्लेटफॉर्म PhonePe के सीईओ समीर निगम ने भी यह बात साफ कर दी है। उन्होंने इस बारे में सोशल मीडिया ऐप X पर एक पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि यूपीआई पेमेंट्स कंज्यूमर्स के लिए फ्री बना रहेगा। दरअसल, लोकसभा में नया टैक्स अमेंडमेंट बिल पारित होने के बाद इस बारे में कनफ्यूजन बढ़ा है।

कुछ खास यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का प्रस्ताव है। इससे कंज्यूमर्स के बीच कनफ्यूजन बढ़ा है। कई कंज्यूमर्स को लगता है कि उब यूपीआई से पेमेंट करने पर उन्हें फीस चुकानी होगी। हालांकि, पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस बारे में स्थिति स्पष्ट की है। उसने कहा है कि अगर कहीं मर्चेंट सर्विस चार्ज लगता है तो यह मर्चेंट्स और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच का अरेंजमेंट है। इसका मतलब यह नहीं है कि कंज्यूमर्स को डिजिटल पेमेंट के लिए कोई चार्ज देना होगा।

PCI ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई चार्ज लगने वाला होगा तो उसका पेमेंट कमर्शियल अरेंजमेंट के तहत मर्चेंट को करना होगा। यह चार्ज कंज्यूमर्स यानी यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले आम आदमी से नहीं लिया जाएगा। दरअसल, टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के तहत इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के कुछ खास तरीकों पर एमडीआर लगाने का अधिकार सरकार को मिल गया है।

इस बिल के तहत 2,000 रुपये के कुछ खास बिजनेस-डायरेक्टेड यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर 0.25 से 0.4 फीसदी चार्ज लगाने का प्रस्ताव है। लेकिन, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होने वाला पेमेंट इस लेवी के दायरे में नहीं आएगा। इसका मतलब है कि प्रस्तावित फ्रेमवर्क कुछ ट्रांजेक्शंस के लिए मर्चेंट या बिजनेसेज के लिए है।

मर्चें डिस्काउंट रेट (MDR) एक तरह की फीस है, जो डिजिटल पेमेंट से जुड़ी है। आम तौर पर यह फीस मर्चेंट उन कंपनियों को चुकाता है जो ट्रांजेक्शन की प्रोसेसिंग में शामिल होती हैं। जहां तक यूपीआई की बात है तो अभी तक ज्यादातर ट्रांजेक्शंस बगैर एमडीआर के होते रहे हैं। इसका मतलब है कि इनमें मर्चेंट्स को कोई फीस नहीं चुकानी पड़ी है। इस ईकोसिस्टम पर आने वाले खर्च का बोझ बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और दूसरे पार्टिसिपेंट्स उठाते आ रहे हैं।

SIP अमाउंट हर साल सिर्फ 1000 रुपये बढ़ाने से पैसा अतिरिक्त 1.18 करोड़ रुपये बढ़ जाता है, यहां समझें पूरा कैलकुलेशन

सिर्फ 1000 रुपये के निवेश से क्या हो जाएगा? क्या आप भी ऐसा सोचते हैं? अगर हां तो यह रिपोर्ट आपके लिए है। अगर आप अपने सिप अमाउंट को हर साल 1,000 रुपये बढ़ाते हैं तो बहुत बड़ा फर्क पड़ता है। मंथली सिप को हर साल सिर्फ 1,000 रुपये बढ़ाने से 25 साल में आप अतिरिक्त 1.18 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं।

हर साल सिप अमाउंट को थोड़ा बढ़ाना मुश्किल नहीं 

कई लोग सिप के अमाउंट को बढ़ाते नहीं हैं। कई सालों तक वे सिप के जरिए एक ही अमाउंट का निवेश करते रहते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सिप के अमाउंट को हर साल बढ़ाया जाए तो लंबी अवधि में बहुत बड़ा फर्क दिख सकता है। आपका पैसा अनुमान के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ता है। हर साल सिप अमाउंट को थोड़ा बढ़ाना मुश्किल नहीं है।

सिर्फ 1000 रुपये सिप अमाउंट बढ़ाने से बड़ा फर्क

व्हाइटओक कैपिटल ने एक दिलचस्प एनालिसिस पेश किया है। इसमें बताया गया है कि हर साल सिप अमाउंट सिर्फ 1,000 रुपये बढ़ाने से लंबी अवधि में बहुत बड़ा फंड तैयार होता है। इसमें कंपाउंडिंग के पावर का बड़ा हाथ है। जो इनवेस्टर्स पावर ऑफ कंपाउंडिंग को समझते हैं, उनके लिए इसे समझना आसान होता है।

25 साल में अतिरिक्त 1.18 करोड़ का फंड तैयार

इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। अगर आप हर महीने 10,000 रुपये के सिप से निवेश करते हैं 25 साल में आपका पैसा बढ़कर 2.30 करोड़ रुपये हो जाता है। अगर आप सिप अमाउंट को हर साल 1,000 रुपये बढ़ाते हैं तो 25 साल में आपका पैसा बढ़कर 3.49 करोड़ रुपये हो जाता है। इसका मतलब है कि सिप अमाउंट को सिर्फ 1,000 रुपये बढ़ाने से आपका पैसा अतिरिक्त 1.18 करोड़ रुपये बढ़ जाता है।

ऐसे आसानी से समझें यहां पूरा कैलकुलेशन 

इस उदाहरण में आप मंथली 10,000 रुपये के SIP से निवेश शुरू करते हैं। हर साल आप सिप अमाउंट को 1,000 रुपये बढ़ा देते हैं। इसका मतलब है कि पहले साल आप हर महीने 10,000 रुपये इनवेस्ट करते हैं। दूसरे साल आप हर महीने 11,000 रुपये इनवेस्ट करते हैं। तीसरे साल आप हर महीने 12,000 रुपये इनवेस्ट करते हैं। इस तरह आपका सिप अमाउंट हर साल बढ़ता रहता है। 25वें साल यह बढ़कर 34,000 रुपये हो जाता है।

top up sip calculator

ऐसे तेजी से बढ़ने लगता है आपका पैसा

कुछ साल बाद आपका पैसा तेजी से बढ़ने लगता है। पांच साल बाद दोनों स्ट्रेटेजी यानी फिक्स्ड सिप अमाउंट और बढ़ता सिप अमाउंट से निवेश के बीच का फर्क सिर्फ 1.25 लाख रुपये रहता है। उसके बाद यह फर्क तेजी से बढ़ता है। 10 साल में अतिरिक्त पैसा बढ़कर 7.38 लाख रुपये हो जाता है। 15 साल में यह 22.59 लाख रुपये हो जाता है। 20 साल बाद यह 53.47 लाख रुपये हो जाता है। 25 साल बाद यह फर्क 1.18 करोड़ रुपये हो जाता है।

हर साल सिप अमाउंट बढ़ाने की सलाह दे रहे एक्सपर्ट्स

एक्सपर्ट्स का कहना है कि पहले इनवेस्टर्स को वे सिप से हर महीने अनुशासित तरीके से निवेश करने की सलाह देते थे। वे अब निवेशकों को हर साल सिप अमाउंट बढ़ाने की सलाह देते हैं। नौकरी करने वाले लोगों के लिए हर साल सिप अमाउंट बढ़ाना आसान होता है। दूसरे लोग भी कोशिश करने पर सिप अमाउंट हर साल बढ़ा सकते हैं। हर साल सिप अमाउंट 1,000 रुपये बढ़ाना मुश्किल नहीं है।

Hero MotoCorp to launch its first electric motorcycle in 2027

Hero UBEX and VXZ concept silhouette

Hero MotoCorp has confirmed that its first electric motorcycle will launch in 2027, expanding the company’s EV portfolio beyond its existing Vida scooter range.

  1. Two platforms, UBEX and VXZ, will underpin the range
  2. VXZ developed in collaboration with Zero Motorcycles

Hero MotoCorp electric motorcycle details

UBEX and VXZ are dedicated motorcycle platforms, not derived from the Vida scooter architecture.

The confirmation came from Kausalya Nandakumar, Chief Business Officer of Hero MotoCorp’s Emerging Mobility Business Unit, who told investors: “Not this year. We will be looking at products coming in from next year.” Hero MotoCorp CEO Harshavardhan Chitale added that the company is making steady progress on its electric motorcycle programme and would share more details in the coming months.

The upcoming electric motorcycles will be built on two dedicated platforms first shown as concepts at EICMA 2025. The first, codenamed UBEX, will underpin a street-naked motorcycle. The second, codenamed VXZ, is being developed in collaboration with US-based Zero Motorcycles and is positioned as a high-performance electric motorcycle for adventure-oriented buyers, a project for which design patents were recently filed in India.

Nandakumar confirmed that, despite the learnings carried over from the Vida scooter platform, both the UBEX and VXZ are entirely new motorcycle-specific architectures. “The motorcycle platform now caters to the needs of a motorcycle consumer, and therefore these are new platforms that we are developing with learnings from the scooter platform, but with technology that is suited to what a motorcycle consumer is actually looking for in terms of performance, rideability, gradeability, and range,” she said.

The electric motorcycle programme comes as Hero MotoCorp works to significantly scale its EV scooter business. The company plans to increase monthly Vida production capacity to 45,000 units in FY27, up from 15,000 units at the end of FY26.

Maruti Wagon R CNG real world fuel economy tested, explained

Maruti Wagon R CNG

The Maruti Wagon R CNG remains one of India’s best-selling CNG cars. It is offered in two variants – LXi CNG (Rs 5.94 lakh) and VXi CNG (Rs 6.47 lakh) – and commands a premium of Rs 95,000 over the equivalent petrol versions. We put the Wagon R CNG through our real-world fuel-efficiency tests to see how it performs.

  1. No auto engine stop-start system
  2. Claimed fuel efficiency: 33.47km/kg
  3. Is 95-100kg heavier than the equivalent petrol version

Maruti Suzuki Wagon R CNG mileage explained 

Powering the Wagon R CNG is a 1.0-litre, three-cylinder engine that produces 67.7hp and 91.1Nm in petrol mode, and 56.6hp and 82.1Nm when running on CNG. The CNG variant is available exclusively with a 5-speed manual gearbox. Alongside its petrol fuel tank, the Wagon R gets a 60-litre CNG cylinder mounted in the boot. The added weight of the cylinder and associated hardware makes it about 95-100kg heavier than a comparable petrol model.

In our tests, the Wagon R CNG returned 23.39km/kg in the city and 33.09km/kg on the highway, resulting in an overall average efficiency of 28.24km/kg. Particularly noteworthy is the highway figure, which comes remarkably close to Maruti’s claimed efficiency of 33.47km/kg.

When refilled from empty, the Wagon R’s CNG tank accepted 7.4kg of gas. Under ideal conditions, however, the 60-litre cylinder should be able to hold close to 8kg, depending on factors such as ambient temperature and dispenser pressure. Based on our real-world average efficiency figure of 28.24km/kg, owners can realistically expect a driving range of approximately 210-220km on a full CNG tank.

Autocar India’s fuel-efficiency testing

Since CNG tanks are more difficult to fill consistently due to variables such as ambient temperature and pump pressure, we did not use our standard tankful-to-tankful methodology. Instead, for our real-world tests, we emptied the CNG tank and refilled it with 2kg of CNG. We then drove the vehicle in city conditions until the gas was exhausted. The same process was repeated for the highway run. Throughout both tests, the Wagon R was driven exclusively in CNG mode.

Before our real-world fuel efficiency tests, we maintain tyre pressures based on the manufacturer’s recommendations. These cars are driven in fixed city and highway loops in and around Navi Mumbai, and we maintain certain average speeds. Throughout the tests, there is only one person in each car, and the aircon is set to fan speed 2 with temperature dialed to the lowest position. We operate other electricals, such as the audio system, indicators and wipers, just like a regular user would. Periodic driver swaps further neutralise variations in driver patterns.

Silver Price Today: चांदी फिर हुई महंगी! ₹2.40 लाख के करीब पहुंचा भाव, जानें आपके शहर का रेट

Silver Price Today: अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में चांदी की कीमतों के लगातार ऊपर-नीचे होने से भारत पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। दरअसल, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सुबह तक चांदी का वायदा भाव 0.15% बढ़कर यानी 338 रुपये तेजी के साथ 2,31,804 रुपये प्रति किलो हो गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,31,466 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी 63.80 डॉलर प्रति औंस हो गई।

बुलियन्स के अनुसार, चांदी की कीमत 2,32,620 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। जबकि गुडरिटर्न्स के मुताबिक, चांदी 2,40,000 रुपये प्रति किलो पर है। उधर दिल्ली के सर्राफा बाजार की बात करें, तो यहां पर चांदी की कीमत 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) है। चूंकि शनिवार और रविवार को बाजार बंद है, इसलिए दोनों दिन यही भाव मान्य रहेगा।

अब अगर आप ऐसे में सिल्वर में निवेश करना चाहते हैं, तो आपको अपने शहर के ताजा भाव जानने होंगे:

भारत के शहरों में चांदी के ताजा भाव (10 ग्राम, 100 ग्राम, प्रति किलो)

शहर10 ग्राम चांदी100 ग्राम चांदी1 किलो चांदी
दिल्ली₹2,400₹24,000₹2,40,000
मुंबई₹2,400₹24,000₹2,40,000
कोलकाता₹2,400₹24,000₹2,40,000
चेन्नई₹2,400₹24,000₹2,40,000
पटना₹2,400₹24,000₹2,40,000
लखनऊ₹2,400₹24,000₹2,40,000
मेरठ₹2,400₹24,000₹2,40,000
अयोध्या₹2,400₹24,000₹2,40,000
कानपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
गाजियाबाद₹2,400₹24,000₹2,40,000
नोएडा₹2,400₹24,000₹2,40,000
गुरुग्राम₹2,400₹24,000₹2,40,000
चंडीगढ़₹2,400₹24,000₹2,40,000
जयपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
लुधियाना₹2,400₹24,000₹2,40,000
गुवाहाटी₹2,400₹24,000₹2,40,000
इंदौर₹2,400₹24,000₹2,40,000
अहमदाबाद₹2,400₹24,000₹2,40,000
वडोदरा₹2,400₹24,000₹2,40,000
सूरत₹2,400₹24,000₹2,40,000
पुणे₹2,400₹24,000₹2,40,000
नागपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
नासिक₹2,400₹24,000₹2,40,000
बैंगलोर₹2,400₹24,000₹2,40,000
भुवनेश्वर₹2,400₹24,000₹2,40,000
रायपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
हैदराबाद₹2,400₹24,000₹2,40,000

पिछले दिन कैसा रहा चांदी का भाव?

कमजोर अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते विदेशी बाजारों में चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली, जिसका सकारात्मक असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को पिछले कारोबारी सत्र में जोरदार बढ़त के बाद चांदी की कीमत 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) पर स्थिर रही। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी की कीमत 4 फीसदी से ज्यादा उछलकर 64.17 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

पिछले दिन क्या रहा चांदी का वायदा भाव

वैश्विक बाजारों में मजबूत रुख के बीच घरेलू वायदा बाजार में भी चांदी की कीमतों में शुक्रवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कारोबारियों की ओर से नए सौदे बढ़ाए जाने से चांदी वायदा 2.43 फीसदी उछल गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी की कीमत 5,496 रुपये बढ़कर 2,31,332 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 2.43 फीसदी की बढ़त है।

इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमत मजबूत रही। न्यूयॉर्क में चांदी 3.44 फीसदी की तेजी के साथ 61.66 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

बाजार एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घरेलू बाजार में चांदी की मजबूत मांग और तेजी के संकेतों को देखते हुए कारोबारियों ने नए सौदों की खरीदारी बढ़ाई, जिससे वायदा कीमतों को सपोर्ट मिला।

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