7100mAh बैटरी के साथ Motorola का 5G स्मार्टफोन लॉन्च, मिलेगा 50MP OIS कैमरा, जानें कीमत

क्या आप स्मार्टफोन लेने की सोच रहे हैं? अगर हां, तो Motorola ने आज भारत में अपना नया हैंडसेट Motorola Edge 70 Max लॉन्च किया है, जो कि कंपनी की बढ़ती Edge 70 लाइनअप का हिस्सा है। इस फोन में आपको बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट वाला AMOLED डिस्प्ले और दमदार कैमरा मिलेगा। इसके अलावा, यह स्मार्टफोन कंपनी प्रीमियम सेगमेंट में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए ड्यूरेबिलिटी, AI-पावर्ड फीचर्स और फास्ट चार्जिंग पर भी दांव लगा रही है। अब चलिए Motorola Edge 70 Max के स्पेसिफिकेशन्स, कीमत, लॉन्च ऑफर्स और उपलब्धता के बारे में डिटेल में जानते हैं।

Motorola Edge 70 Max: स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

Motorola Edge 70 Max में 6.8-इंच का Quad HD+ AMOLED डिस्प्ले है, जिसमें 144Hz रिफ्रेश रेट, HDR10+ सपोर्ट और Corning Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन मिलता है। इस फोन में एल्युमीनियम फ्रेम, IP68/IP69 वॉटर और डस्ट रेजिस्टेंस के साथ-साथ MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी भी दी गई है।

इस हैंडसेट में Qualcomm का Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट दिया गया है, साथ ही इसमें 12GB तक LPDDR5X RAM और 256GB UFS 4.1 स्टोरेज मिलती है। कंपनी ने इस स्मार्टफोन में 5500mm का वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम भी दिया है, जिसमें लिक्विड मेटल थर्मल जेल का इस्तेमाल किया गया है, ताकि भारी कामों के दौरान भी परफॉर्मेंस बनी रहे। इसके अलावा, इस डिवाइस में 7100mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी है, जो 90W वायर्ड चार्जिंग, 25W Qi2 मैग्नेटिक वायरलेस चार्जिंग और 5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

कैमरे की बात करें तो, इस फोन में OIS के साथ 50MP का Sony LYTIA 710 प्राइमरी कैमरा, 8MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा (जो मैक्रो शूटर का भी काम करता है) और 4K वीडियो रिकॉर्ड करने में सक्षम 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। यह फोन Hello UX के साथ Android 16 पर चलता है, और Motorola ने तीन साल के Android OS अपडेट और पांच साल के सिक्योरिटी पैच देने का वादा किया है।

Motorola Edge 70 Max की कीमत, सेल डेट और लॉन्च ऑफर्स

Motorola Edge 70 Max के 8GB RAM + 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की शुरुआती कीमत ₹54,999 है। वहीं, 12GB + 256GB मॉडल की कीमत ₹59,999 है। लॉन्च ऑफर्स के तहत, कंपनी चुनिंदा बैंकों के क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर ₹5,000 का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट दे रही है, जिससे इसकी असल खरीद कीमत कम हो जाती है।

बता दें कि यह स्मार्टफोन भारत में 20 जुलाई से Flipkart और Motorola के ऑफिशियल ऑनलाइन स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इच्छुक ग्राहक Motorola Edge 70 Max को Pantone से प्रेरित तीन कलर ऑप्शन में से चुन सकते हैं- Pantone Aqua Grey, Pantone Dark Shadow और Pantone Ice Melt।

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कुवैत ने अपना पहला 15 साल का गोल्डन वीजा भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को सौंपा! जानिए लुलु ग्रुप के चेयरमैन की पूरी कहानी

MA Yusuff Ali news: खाड़ी देशों में अपने बिजनेस का लोहा मनवाने वाले भारतीय मूल के दिग्गज कारोबारी और लुलु ग्रुप के चेयरमैन एमए यूसुफ अली के नाम एक और बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। कुवैत सरकार ने अपने नए लॉन्च किए गए 15 साल के गोल्डन रेजिडेंसी (गोल्डन वीजा) का पहला रिसीपिंट भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को चुना है। यह सम्मान कुवैत द्वारा निवेशकों, बिजनेस लीडर्स और वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए लॉन्ग-टर्म वीजा कार्यक्रम के औपचारिक रोलआउट के क्रम में किया गया है।

हमारे सहयोगी ‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत सिटी में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान कुवैत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और आंतरिक मंत्री शेख फहद यूसुफ सऊद अल-सबा ने लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के चेयरमैन और एमडी यूसुफ अली को यह सम्मान सौंपा।

कौन हैं एमए यूसुफ अली?

एमए यूसुफ अली खाड़ी क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली भारतीय मूल के व्यवसायियों में से एक हैं। यूसुफ अली रिटेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘लुलु ग्रुप इंटरनेशनल’ के संस्थापक हैं। केरल में जन्मे यूसुफ अली ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर लुलु को मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिटेल चेन में से एक बना दिया है। लुलु ग्रुप का बिजनेस आज खाड़ी देशों, एशिया और उससे आगे कई देशों में फैला हुआ है।

यह ग्रुप मुख्य रूप से हाइपरमार्केट्स, सुपरमार्केट्स, शॉपिंग मॉल्स और लॉजिस्टिक्स के कारोबार चलाता है। यूसुफ अली का यह बिजनेस नेटवर्क दुनिया भर में हजारों लोगों को रोजगार देता है। रिटेल के अलावा खाड़ी क्षेत्र के हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट क्षेत्रों में भी उनका भारी निवेश है।

कुवैत ने एमए यूसुफ अली को ही क्यों चुना?

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक, यह ऐतिहासिक फैसला देश की अर्थव्यवस्था में यूसुफ अली के लंबे समय से चले आ रहे योगदान को ध्यान में रखकर लिया गया है। लुलु ग्रुप ने कुवैत के रिटेल सेक्टर में अपनी एक बेहद मजबूत उपस्थिति स्थापित की है। इसके साथ ही इस ग्रुप ने कुवैत में फूड सप्लाई चेन को मजबूत करने, कंज्यूमर मार्केट का विस्तार करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

क्या है कुवैत का नया गोल्डन रेजिडेंसी प्रोग्राम?

यह गोल्डन रेजिडेंसी कार्यक्रम कुवैत की अर्थव्यवस्था को सिर्फ तेल पर निर्भर न रखकर उसका डाइवर्सिफाई करने की कोशिश से जुड़ा एक इनिशिएटिव है। इसके जरिए देश में बड़े निवेश और कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करने की योजना है। पारंपरिक निवास परमिट अक्सर एंप्लॉयर स्पॉन्सरशिप से जुड़े होते हैं और उन्हें बार-बार रिन्यू कराना पड़ता है। इनके उलट कुवैत का यह नया कार्यक्रम निवेशकों को लंबे समय की स्थिरता और अधिक फ्लेक्सिबिलिटी देता है।

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक इस पहल को इंटीरियर मिनिस्ट्री, कुवैत प्रत्यक्ष निवेश संवर्धन प्राधिकरण और नागरिक सूचना के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण (PACI) के बीच आपसी समन्वय के जरिए तैयार किया गया है।

इस गोल्डन वीजा की खासियतें जान लीजिए

कुवैत का यह नया वीजा कार्यक्रम प्रमुख रूप से बड़े निवेशकों, उद्यमियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अत्यधिक कुशल पेशेवरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

15 साल का परमिट: इसके तहत योग्य लोगों को 15 साल का रिन्यूएबल (नवीकरणीय) रेजिडेंसी परमिट दिया जाता है।

लॉन्ग-टर्म स्थिरता: बार-बार वीजा रिन्यू कराने की झंझटों से मुक्ति मिलती है।

एंप्लॉयर पर निर्भरता नहीं: यह वीजा एंप्लॉयर स्पॉन्सर्ड वीजा पर निर्भरता को काफी कम करता है।

परिवार को भी लाभ: इस योजना के तहत मिलने वाले रेजिडेंसी के लाभ मुख्य लाभार्थी के साथ-साथ उसके करीबी परिवार के सदस्यों को भी मिल सकते हैं।

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Direct vs Regular: एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम, फिर भी एक को मिला ₹50 लाख ज्यादा रिटर्न! समझें एक्सपेंस रेशियो का असली खेल

Direct vs Regular Mutual Funds Comparison: म्युचुअल फंड में निवेश करने वाले हर निवेशक के सामने दो विकल्प होते हैं- डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान। हाल ही में ऑनलाइन ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म ग्रो द्वारा रेगुलर म्यूचुअल फंड सेगमेंट में ‘MF Prime’ सर्विस लॉन्च करने के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है। यह नई सर्विस उन निवेशकों के लिए है जो अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने और सही फंड चुनने के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह चाहते हैं।

वहीं, जेरोधा के को-फाउंडर नितिन कामथ का कहना है कि खुद से निवेश करने वाले निवेशकों के लिए डायरेक्ट प्लान एक ‘नो-ब्रेनर’ यानी सबसे आसान और समझदारी भरा विकल्प है, क्योंकि इसमें डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन नहीं देना पड़ता। उन्होंने बताया कि उनके प्लेटफॉर्म ‘कॉइन’ पर निवेशकों ने कमीशन न देकर अब तक हजारों करोड़ रुपये बचाए हैं। आइए समझते हैं कि डायरेक्ट और रेगुलर फंड्स में क्या अंतर है और कैसे डायरेक्ट प्लान आपके पोर्टफोलियो में ₹50 लाख तक एक्स्ट्रा जोड़ सकता है।

डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है?

इन दोनों प्लान्स में सबसे बड़ा और मुख्य अंतर एक्सपेंस रेशियो यानी फंड मैनेजमेंट के खर्च का होता है:

डायरेक्ट प्लान: इसमें निवेशक सीधे एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) यानी म्यूचुअल फंड हाउस से यूनिट्स खरीदता है। इसमें बीच में कोई ब्रोकर, एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर नहीं होता, इसलिए कोई कमीशन नहीं कटता। नतीजा यह होता है कि इसका एक्सपेंस रेशियो काफी कम होता है।

रेगुलर प्लान: इसमें निवेशक किसी डिस्ट्रीब्यूटर, ब्रोकर या फाइनेंशियल एडवाइजर के माध्यम से निवेश करता है। फंड हाउस इन मध्यस्थों को कमीशन देता है, जिसे एक्सपेंस रेशियो में जोड़ दिया जाता है। इसलिए, रेगुलर प्लान का खर्च डायरेक्ट प्लान से थोड़ा ज्यादा होता है।

रिटर्न पर असर: अगर दो अलग-अलग निवेशक एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम में एक जितनी रकम और एक जितनी अवधि के लिए निवेश करते हैं, तो डायरेक्ट प्लान वाले निवेशक को कम लागत के कारण रेगुलर प्लान की तुलना में थोड़ा अधिक रिटर्न मिलेगा।

डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है?

लॉन्ग टर्म में कैसे जुड़ सकते हैं ₹50 लाख एक्स्ट्रा?

दिखने में डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के एक्सपेंस रेशियो में महज 0.50% से 1% तक का ही अंतर नजर आता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर ब्याज के कारण यह मामूली अंतर एक विशाल रकम में बदल जाता है।

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मान लीजिए कि आप 30 साल के लिए एक बड़ी रकम निवेश करते हैं। रेगुलर प्लान में जहां आपका डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन कटता रहेगा, वहीं डायरेक्ट प्लान में वह बचा हुआ 1% कमीशन हर साल आपके पोर्टफोलियो में दोबारा निवेश होता रहेगा। 30 साल की लंबी अवधि में यही बची हुई रकम कंपाउंड होकर आपके कुल फंड में ₹30 लाख से ₹50 लाख तक का अतिरिक्त मुनाफा जोड़ सकती है।

क्या कम खर्च का मतलब हमेशा बेहतर रिटर्न है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ कम एक्सपेंस रेशियो देखकर डायरेक्ट प्लान चुन लेना ही समझदारी नहीं है, क्योंकि निवेश में सबसे बड़ा रोल इन्वेस्टर बिहेवियर का होता है।

म्युचुअल फंड रिसर्च फर्म फंड्सइंडिया के रिसर्च सीनियर मैनेजर जीरल मेहता के मुताबिक, ‘आंकड़े बताते हैं कि कई बार फंड्स जितना रिटर्न कमा कर देते हैं, आम निवेशकों को उतना रिटर्न नहीं मिल पाता। इसकी वजह यह है कि निवेशक बाजार में गिरावट आने पर डरकर अपने पैसे निकाल लेते हैं या फिर बाजार के बहुत ऊंचे होने पर निवेश करते हैं।’

इसे ‘बिहेवियर गैप’ कहा जाता है। यह गैप डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के खर्चों के अंतर से कहीं ज्यादा बड़ा होता है। एक डायरेक्ट प्लान का निवेशक अगर 30 साल के सफर में सिर्फ दो बार भी गलत समय पर बाजार से बाहर निकलता है, तो वह डायरेक्ट प्लान से मिलने वाले सारे कॉस्ट-बेनिफिट को पूरी तरह बर्बाद कर देता है।

फाइनेंशियल एडवाइजर की भूमिका और सही चुनाव

यहीं पर एक रेगुलर प्लान और फाइनेंशियल एडवाइजर की भूमिका अहम हो जाती है:

रेगुलर प्लान किसके लिए सही है? – ऐसे निवेशक जिन्हें मार्केट की गहरी समझ नहीं है, जो उतार-उढ़ाव देखकर घबरा जाते हैं और जिन्हें समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा और रीबैलेंसिंग के लिए किसी गाइड की जरूरत होती है, उनके लिए रेगुलर प्लान बेहतर है। यहां थोड़ा ज्यादा एक्सपेंस रेशियो देना अंततः फायदेमंद साबित होता है क्योंकि एडवाइजर आपको गलत फैसले लेने से रोकता है।

डायरेक्ट प्लान किसके लिए सही है? – अगर आप एक ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (DIY) इन्वेस्टर हैं, जो खुद रिसर्च कर सकते हैं, बाजार की गिरावट में शांत रह सकते हैं और बिना किसी बाहरी मदद के अनुशासित रहकर निवेश जारी रख सकते हैं, तो डायरेक्ट प्लान आपके लिए सबसे ज्यादा कॉस्ट-इफेक्टिव और मुनाफेमंद साबित होगा।

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उफनती नदी में फंसी Mahindra Thar, युवक ने जान जोखिम में डालकर बचाई 4 लोगों की जिंदगी, देखें पूरा वीडियो

दार्जिलिंग से सामने आई एक घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। यह सिर्फ एक रेस्क्यू की कहानी नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में दिखाई गई बहादुरी और इंसानियत की मिसाल भी है। कुछ ही पलों में हालात इतने बदल गए कि एक सामान्य सफर जानलेवा बन गया। तभी स्थानीय लोगों ने बिना देर किए मदद का हाथ बढ़ाया और एक युवक ने अपनी जान की परवाह किए बिना ऐसा साहस दिखाया, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। घटना का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे मानवता, सूझबूझ और हिम्मत का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

मानसून के दौरान नदियों और पहाड़ी इलाकों में बढ़ते जोखिम के बीच यह घटना एक अहम संदेश भी देती है कि मौसम की चेतावनियों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है, जबकि समय पर की गई मदद कई जिंदगियां बचा सकती है।

पिकनिक का प्लान, लेकिन बीच नदी में फंस गई Thar

मंगलवार शाम दार्जिलिंग के लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट दुधिया (Dudhia) में दो युवक और दो युवतियां अपनी महिंद्रा थार से बालासन नदी पार करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान पहाड़ों में हुई तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और SUV बीच धारा में फंस गई।

बढ़ते पानी के बीच छत पर चढ़कर बचाई जान

जब वाहन आगे नहीं बढ़ सका, तो चारों युवक-युवतियां अपनी जान बचाने के लिए Thar की छत पर चढ़ गए। चारों ओर तेज बहाव और लगातार बढ़ते जलस्तर ने स्थिति को बेहद खतरनाक बना दिया।

स्थानीय युवक बना फरिश्ता

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद ग्रामीण मदद के लिए जुट गए। इसी बीच एक स्थानीय युवक बिना अपनी जान की परवाह किए उफनती नदी में कूद पड़ा। तेज बहाव से जूझते हुए वह SUV तक पहुंचा और एक-एक कर सभी को सुरक्षित किनारे तक ले आया।

रेस्क्यू के दौरान बढ़ गई थी मुश्किल

बचाव अभियान के दौरान एक युवती तेज बहाव में कुछ दूर तक बह गई, लेकिन स्थानीय लोगों की सतर्कता और युवक की बहादुरी से उसे भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ।

वीडियो हुआ वायरल, लोगों ने बहादुर युवक को किया सलाम

पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग स्थानीय युवक की बहादुरी और निस्वार्थ मदद की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि उसकी सूझबूझ और साहस ने चार परिवारों को बड़ी त्रासदी से बचा लिया।

मौसम विभाग ने पहले ही जारी की थी चेतावनी

इस घटना के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पश्चिम बंगाल के कई इलाकों, खासकर दार्जिलिंग के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विभाग ने नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने और भूस्खलन की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

पहले भी खतरनाक साबित हो चुकी है बालासन नदी

यह पहली बार नहीं है जब मानसून में बालासन नदी ने खतरा पैदा किया हो। पिछले महीने भी नदी का जलस्तर बढ़ने से दुधिया का अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे सिलिगुड़ी और मिरिक के बीच संपर्क प्रभावित हुआ था। यह पुल भी पुराने लोहे के पुल के बह जाने के बाद बनाया गया था।

Nuvoco Vistas share Price :  Q1 नतीजों के बाद आई तेजी में 8 महीने के हाई पर पहुंचा शेयर, जानिए ब्रोकरेज ने क्या कहा

Nuvoco Vistas Share Price : बुधवार को नुवोको विस्टास (Nuvoco Vistas Corp) के शेयरों में 17% तक की बढ़त देखने को मिली है। NSE पर आज यह शेयर 398 रुपये प्रति शेयर के आठ महीने से ज्यादा के हाई लेवल पर जाता दिखा है। कंपनी ने जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। इसके बाद र ब्रोकरेज फर्मों ने कंपनी की कमाई का अनुमान बढ़ा दिया है।

जून तिमाही के नतीजे घोषित होने के बाद,पिछले दो ट्रेडिंग सेशन में इस स्टॉक में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़त हुई है। नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म इस स्टॉक को लेकर पॉजिटिव हो गए हैं। कंपनी के मैनेजमेंट ने नतीजों के बाद हुई कॉन्फ्रेंस कॉल में एनालिस्ट्स को बताया कि वित्त वर्ष 2027 की बाकी अवधि में सीमेंट की बिक्री में 7-8 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है।

नुवोको विस्टास के मैनेजिंग डायरेक्टर जयकुमार कृष्णस्वामी ने कहा कि कंपनी ने साल की मजबूत शुरुआत की है। जियोपॉलिटिकल तनाव जैसी बड़ी चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने बेहतर कारोबारी प्रदर्शन किया है। कंपनी ने EBITDA और PAT दोनों में सालाना आधार पर मजबूत ग्रोथ हासिल की है।

भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए कृष्णस्वामी ने कहा कि कंपनी समझदारी से खरीद करने,लागत कम करने और सप्लाई चेन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने पर फोकस करना जारी रखेगी,साथ ही बदलती भू-राजनीतिक स्थितियों पर भी नजर रखेगी।

नोमुरा की राय

नोमुरा का कहना है कि कंपनी के कॉस्ट मैनेजमेंट में और सुधार होने की उम्मीद है। ब्रोकरेज ने FY27 के लिए कंपनी का EBITDA अनुमान 5 प्रतिशत बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया है। हालांकि,ब्रोकरेज का अनुमान है कि बिजली की लागत बढ़ने के कारण सितंबर तिमाही में EBITDA घटकर 890 रुपये प्रति टन रह सकता है। उसे उम्मीद है कि इस तिमाही में सीमेंट की बिक्री सालाना आधार पर लगभग 5 प्रतिशत बढ़कर 4.5 मिलियन टन हो जाएगी,जबकि कीमतों में पिछली तिमाही के मुकाबले 3 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। नोमुरा ने स्टॉक पर अपनी’बाय’रेटिंग बनाए रखी है और इसका टारगेट प्राइस भी 400 रुपये पर ही बरकरार रखा है।

HSBC की राय

HSBC ने भी नुवोको विस्टास पर अपनी’Buy’रेटिंग बनाए रखी है और टारगेट प्राइस को बढ़ाकर ₹475 कर दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी ने जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे हासिल किए, जिसकी वजह ज्यादा रियलाइज़ेशन रहा। ब्रोकरेज का कहना है कि सितंबर तिमाही में मौसमी तौर पर कम मांग के बावजूद, FY27 की दूसरी छमाही में मांग,कीमत और लागत की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है। उसने FY27-FY29 के लिए EPS अनुमान को भी 6-11 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है।

जेफरीज की राय

जेफरीज ने भी 430 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ स्टॉक पर अपनी’बाय’रेटिंग बनाए रखी है। इसके पीछे बेहतर प्राइसिंग और पेटकोक का कम इस्तेमाल व बेहतर खरीद के ज़रिए लागत को असरदार ढंग से मैनेज करने जैसे कारण बताए गए हैं।

ब्रोकरेज का कहना है कि मुश्किल ऑपरेटिंग माहौल के बावजूद कंपनी का कामकाज मज़बूत रहा है,हालांकि सितंबर तिमाही में कुछ मौसमी सुस्ती और ज्यादा लागत का असर देखने को मिल सकता है। ब्रोकरेज ने कहा कि खरीदी गई वदराज एसेट की शुरुआत और उसके कामकाज को बढ़ाना एक अहम बात होगी जिस पर नजर रखनी होगी।

कंपनी को प्रदर्शन पर एक नजर

निरमा ग्रुप की बिल्डिंग मटीरियल बनाने वाली कंपनी,नुवोको विस्टास कॉर्प ने सोमवार को जून तिमाही के नतीजे पेश किए थे। इस अवधि में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 19.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 159.63 करोड़ रुपये पर रहा। कंपनी ने पिछले फाइनेंशियल ईयर की इसी तिमाही में 133.16 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया था।

जून तिमाही में कंपनी की कामकाजी आय 8.9 प्रतिशत बढ़कर 3,128.71 करोड़ रुपये पर रही, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 2,872.70 करोड़ रुपये रही थी। इस तिमाही के दौरान सीमेंट की कुल बिक्री सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर 53 लाख टन हो गई।

 

Market Insight : पश्चिम एशिया संकट से नर्वस नहीं बाजार, न्यू एज,स्मॉल और मिडकैप शेयरों में है दम-समीर अरोड़ा

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Union Bank of India Q1 results: मुनाफा 30% बढ़कर ₹5,332.30 करोड़ पर पहुंचा, नतीजों के बाद शेयर 3% चढ़ा

Union Bank of India Q1 results: पब्लिक सेक्टर बैंक (PSB) यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया ने बुधवार, 15 जुलाई को बताया कि चालू फ़ाइनेंशियल ईयर (Q1FY27) की अप्रैल-जून तिमाही में उसका स्टैन्डर्डलोन प्रॉफ़िट साल-दर-साल (YoY) 29.6% बढ़कर ₹5,332.30 करोड़ हो गया। पिछले फ़ाइनेंशियल ईयर की इसी तिमाही में लेंडर का प्रॉफ़िट ₹4,115.53 करोड़ था।

यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया Q1FY27 की खास बातें

1. जून तिमाही में बैंक की कुल इनकम साल- दर- साल आधार पर 1.3% बढ़कर ₹31,806.20 करोड़ हो गई। Q1FY26 में, इसकी कुल इनकम ₹31,405.03 करोड़ थी।

2. यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया का ऑपरेटिंग खर्च पिछले साल की इसी तिमाही के ₹6,689.67 करोड़ से 0.80%सालना आधार पर घटकर ₹6,637.66 करोड़ हो गया।

इस तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट पिछले फ़ाइनेंशियल ईयर की जून तिमाही के ₹6,908.66 करोड़ से लगभग 16% सालना बढ़कर ₹8,002.58 करोड़ हो गया।

3. टैक्स के अलावा इसके प्रोविज़न और कंटिंजेंसीज़, Q1FY27 में घटकर ₹979.42 करोड़ हो गए, जो पिछले फ़ाइनेंशियल ईयर की इसी तिमाही में ₹1,664.51 करोड़ और Q4FY26 में ₹1,054.98 करोड़ थे।

4. तिमाही के दौरान ग्रॉस एडवांस में सालाना आधार पर 12.50% की बढ़ोतरी हुई, जबकि टोटल डिपॉज़िट में साल- दर साल आधार पर 3.50% की बढ़ोतरी हुई, जून तिमाही के आखिर तक टोटल डिपॉज़िट बेस ₹12,83,366 करोड़ था। बैंक ने कहा कि 30 जून 2026 तक उसका टोटल बिज़नेस ₹23,79,697 करोड़ था।

5. इस साल 30 जून तक ग्रॉस NPA (%) सालाना आधार पर 87 bps घटकर 2.65% और नेट NPA (%) सालाना आधार पर 15 bps घटकर 0.47% हो गया।

6. Q1FY27 के दौरान बैंक का रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) और रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) क्रमशः 1.36% और 17.23% रहा।

7. सालाना आधार पर नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 10.15% और तिमाही आधार पर 6.71% बढ़कर ₹10,037 करोड़ हो गई, जबकि नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) YoY में 4 bps और QoQ में 16 bps बढ़कर 2.80% हो गया।

स्टॉक का परफॉर्मेंस

बुधवार को BSE पर दोपहर 1 बजे के आसपास यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शेयर 3% बढ़कर ₹175 पर ट्रेड कर रहे थे।

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CLAT 2027 Registration: कर लें तैयारी जल्द जारी होगा क्लैट 2027 का नोटिफिकेशन, जानें प्रक्रिया, जरूरी योग्यता और परीक्षा का पैटर्न

CLAT 2027 Registration: कानून के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए क्लैट परीक्षा क्वालिफाई करना जरूरी होता है। इसके स्कोर के आधार पर उन्हें देशभर के लॉ कॉलेज और यूनिवर्सिटी में स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। इस परीक्षा के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन कंसोर्टियम नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (CNLU) जारी करता है। पिछले साल क्लैट परीक्षा दिसंबर में हुई थी, लेकिन इसके लिए पंजीकरण 01 अगस्त 2025 से शुरू हुए थे। इसलिए पिछले ट्रेंड के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि सीएनएलयू जल्द ही शैक्षिक सत्र 2027-28 के लिए क्लैट का नोटिफिकेशन जारी कर सकता है। इस प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने के इच्छुक परीक्षार्थी आधिकारिक वेबसाइट consortiumofnlus.ac.in पर टेस्ट के लिए रजिस्टर कर सकेंगे।

क्लैट 2027: नोटिफिकेशन कब आएगा?

पिछले साल के ट्रेंड्स को देखते हुए, कैंडिडेट उम्मीद कर सकते हैं कि क्लैट 2027 का नोटिफिकेशन 20 जुलाई, 2026 के आसपास जारी होगा। आवेदन पोर्टल अगस्त में खुल सकता है और अक्टूबर, 2026 तक खुला रहेगा।

क्लैट 2027 के लिए जरूरी योग्यता

क्लैट के जरिए लॉ यूजी प्रोग्राम में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों को 10+2 या इसके बराबर की परीक्षा कम से कम 45% अंकों के साथ पास करना जरूरी है। वहीं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PwD) उम्मीदवारों को इस परीक्षा में शामिल होने के लिए 12वीं कक्षा में 40% अंक होना अनिवार्य है। जबकि, लॉ पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश के इच्छुक उम्मीदवारों का 50% अंक के साथ एलएलबी डिग्री होना अनिवार्य है। SC/ST/PwD वालों को 45% अंक या इसके बराबर ग्रेड लाना होगा।

क्लैट 2027 आवेदन प्रक्रिया

  • क्लैट 2027 के लिए अप्लाई करने के लिए, ऑफिशियल वेबसाइट consortiumofnlus.ac.in पर जाएं।
  • होमपेज पर, “CLAT 2027” लिंक पर क्लिक करें।
  • अपना मोबाइल नंबर और पासवर्ड डालें और संबंधित प्रोग्राम के लिए अप्लाई करें।
  • जरूरी डॉक्यूमेंट्स, डिटेल्स सबमिट करें और आप क्लैट 2027 परीक्षा के लिए सफलतापूर्वक रजिस्टर करें।

क्लैट 2027 परीक्षा पैटर्न

क्लैट यूजी परीक्षा पैटर्न

क्लैट यूजी परीक्षा में उम्मीदवारों की कॉम्प्रिहेंशन और रीजनिंग स्किल्स के साथ-साथ करंट अफेयर्स की जानकारी भी जाची जाती है। क्लैट यूजी दो घंटे की होगी, जिसमें 120 बहुविकल्पीय सवाल होंगे, हर सवाल एक नंबर का होगा। गलत जवाबों के लिए 0.25 नंबर काटे जाएंगे। इसमें इन विषयों से सवाल शामिल होंगे :

  • इंग्लिश लैंग्वेज
  • करंट अफेयर्स, जिसमें जनरल नॉलेज भी शामिल है
  • लीगल रीजनिंग
  • लॉजिकल रीजनिंग
  • क्वांटिटेटिव टेक्नीक्स

क्लैट पीजी परीक्षा पैटर्न

पोस्टग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए क्लैट परीक्षा में अंडरग्रेजुएट जैसा ही पैटर्न होता है, लेकिन इसमें बहुविकल्पीय सवालों के बजाय ऑब्जेक्टिव-टाइप सवाल होते हैं। इसमें सिर्फ एक सेक्शन होगा, जिसमें अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के जरूरी विषयों और कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ, ज्यूरिस्प्रूडेंस, एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ, कॉन्ट्रैक्ट लॉ, टॉर्ट्स, फैमिली लॉ, क्रिमिनल लॉ, प्रॉपर्टी लॉ, कंपनी लॉ, पब्लिक इंटरनेशनल लॉ, टैक्स लॉ, एनवायर्नमेंटल लॉ, और लेबर और इंडस्ट्रियल लॉ से सवाल होंगे।

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मानसून में बिना धूप के इन हैक्स से घर में ही सुखाएं कपड़े, नहीं आएगी सीलन की बदबू!

मानसून के मौसम में लगातार बारिश और नमी के कारण कपड़े धोना और सुखाना काफी मुश्किल हो जाता है। कई बार कपड़े देर से सूखने के साथ उनमें सीलन की बदबू भी आने लगती है। ऐसे में कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप कपड़ों को जल्दी सुखाने और उन्हें लंबे समय तक फ्रेश रख सकते हैं:

हैंगर का यूज करें

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टी-शर्ट, शर्ट, कुर्ता और ड्रेस जैसे कपड़ों को रस्सी की बजाय हैंगर पर सुखाने से हवा चारों तरफ से लगती है। इससे कपड़े जल्दी सूखते हैं और उनकी फिटिंग भी बनी रहती है। साथ ही बाद में प्रेस करने की जरूरत भी कम पड़ती है।

मोटे और हल्के कपड़े अलग रखें

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जींस, तौलिया और कंबल जैसे कपड़ों में नमी ज्यादा रहती है। इन्हें हल्के कपड़ों के साथ सुखाने पर दोनों के सूखने में ज्यादा समय लगता है। इसलिए बेहतर होगा कि इन्हें अलग-अलग सुखाया जाए।

टॉवल से एक्सेस मॉइस्चर हटाएं

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अगर कपड़े बहुत ज्यादा गीले हैं, तो उन्हें सूखे टॉवल में लपेटकर हल्के हाथों से दबाएं। टॉवल एक्सेस पानी सोख लेता है, जिससे कपड़े तेजी से सूखने लगते हैं। यह तरीका नाजुक और छोटे कपड़ों के लिए भी काफी उपयोगी है।

हवा का बहाव बढ़ाने के लिए पंखा चलाएं

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धूप न होने पर पंखा कपड़े सुखाने में बड़ी मदद करता है। कपड़ों के सामने पंखा चलाने से लगातार हवा मिलती रहती है, जिससे नमी जल्दी उड़ जाती है। इससे कपड़ों में सीलन की गंध भी नहीं आती।

कपड़ों को पास-पास न टांगें

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अगर सभी कपड़े एक साथ सटाकर टांग दिए जाएं, तो एयरफ्लो रुक जाता है। हर कपड़े के बीच थोड़ी दूरी रखने से वे जल्दी सूखते हैं। यह तरीका खासकर मोटे कपड़ों के लिए ज्यादा असरदार है।

कपड़ों को उल्टा करके सुखाएं

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मोटे कपड़ों को अंदर की तरफ से नमी निकालने के लिए उन्हें उल्टा करके सुखाना बेहतर होता है। इससे उनकी इनर लेयर भी अच्छी तरह सूख जाती है। जींस, जैकेट और हुडी के लिए यह तरीका काफी फायदेमंद है।

एक्स्ट्रा स्पिन साइकिल चलाएं

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कपड़े धोने के बाद वॉशिंग मशीन में एक एक्स्ट्रा स्पिन साइकिल चलाने से उनमें बचा हुआ पानी काफी हद तक निकल जाता है। जितनी कम नमी होगी, कपड़े उतनी ही जल्दी सूखेंगे। यह तरीका मॉनसून में बेहद कारगर साबित होता है।

हवादार जगह का चुने

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बारिश के मौसम में कपड़ों को ऐसी जगह सुखाना सबसे बेहतर होता है, जहां एयरफ्लो अच्छा हो। बालकनी, खिड़की के पास या खुले कमरे में कपड़े टांगने से उनमें मौजूद नमी तेजी से कम होती है। इससे कपड़ों में सीलन और बदबू नहीं आती है।

हल्की नमी रहने पर प्रेस करें

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अगर कपड़े लगभग सूख चुके हैं, लेकिन उनमें हल्की नमी बची है, तो उन पर प्रेस की जा सकती है। इससे बची हुई नमी खत्म हो जाती है और कपड़े तुरंत पहनने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह तरीका केवल प्रेस किए जा सकने वाले कपड़ों पर ही अपनाएं।

गीले कपड़ों को मशीन में न छोड़ें

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धुलाई पूरी होने के बाद कपड़ों को लंबे समय तक वॉशिंग मशीन में छोड़ने से उनमें सीलन और फफूंदी की बदबू आने लगती है। इसलिए कपड़े निकलते ही उन्हें सुखाने के लिए टांग दें। पूरी तरह सूखने के बाद ही उन्हें अलमारी में रखें।

घर की नमी कम रखें

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बारिश के मौसम में घर के अंदर नमी बढ़ जाती है, जिससे कपड़े देर से सूखते हैं। ऐसे में एयर कंडीशनर या डीह्यूमिडिफायर का यूज करने से वातावरण सूखा रहता है। इससे कपड़े जल्दी सूखते हैं और उनमें सीलन की गंध भी नहीं आती।

CBSE’s 3-language policy: अंतरिम राहत से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सर्वोच्च अदालत ने पूछा, क्या अंग्रेजी को भारतीय भाषा मान लिया गया है?

CBSE’s 3-language policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों में 6ठी कक्षा से 3 भाषा नीति लागू करने का फैसला किया है। बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की गई है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि यह दोबारा देखने लायक है कि क्या इंग्लिश को देसी भाषा माना जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि यह हिंदी और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के संवैधानिक मकसद को आगे बढ़ाने वाला कदम लगता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत तीन-भाषा पॉलिसी को लागू करने को चुनौती देने वाली पिटीशन के एक बैच पर सुनवाई कर रही थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने नहीं दी अंतरिम राहत

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि डिटेल में सुनवाई के बिना ऐसी राहत पर विचार नहीं किया जा सकता। अब इस मामले की सुनवाई 22 जुलाई को होगी। साथ ही कोर्ट ने केंद्र और सीबीएसई को अपने जवाब फाइल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणि में कहा कि देसी भाषाओं के नाम और क्या इंग्लिश को उनमें से एक माना जा सकता है? इस सवाल पर फिर से सोचने की जरूरत हो सकती है।

पिटीशनर्स ने प्रैक्टिकल चुनौतियों को उठाया

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया कि छात्रों को 22 भाषाओं में से चुनाव करने की सुविधा के बावजूद तीन-भाषा पॉलिसी को लागू करने से गंभीर प्रैक्टिकल चुनौतियां आएंगी। उन्होंने कहा कि स्कूलों को इतनी सारी भाषाओं के लिए काबिल टीचर नियुक्त करने और जरूरी आधारभूत संरचना तैयार करने में मुश्किल होगी। उन्होंने यह भी बताया कि एनसीईआरटी ने 1 जुलाई तक सभी 22 भाषाओं के लिए शिक्षा सामग्री अपलोड करने का वादा किया था, लेकिन अभी सिर्फ तीन भाषाओं के लिए टेक्स्टबुक्स उपलब्ध हैं। पिटीशनर्स ने तर्क दिया कि यह निर्देश तब दिया है जब सीबीएसई ने मौजूदा शैक्षिक सत्र से कक्षा 9 के लिए तीन-भाषा फॉर्मूला जरूरी करने वाला अपना पिछला सर्कुलर वापस ले लिया है।

केंद्र ने दिया नेशनल एजुकेशन पॉलिसी का हवाला

केंद्र और सीबीएसई की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि सरकार और शिक्षा बोर्ड 10 दिनों के अंदर अपने विस्तृत जवाब दाखिल करेंगे। योजना का बचाव करते हुए, केंद्र ने कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 भारतीय मूल्यों पर आधारित एक शिक्षा व्यवस्था की कल्पना करती है। इसका मकसद देश को एक बराबर और जीवंत नॉलेज सोसाइटी में बदलना है।

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