‘वोट चोरी देशद्रोह है…’, चुनाव आयोग और भाजपा पर भड़के राहुल गांधी,कहा- बख्शे नहीं जाओगे

'वोट चोरी देशद्रोह है...', चुनाव आयोग और भाजपा पर भड़के राहुल गांधी,कहा- बख्शे नहीं जाओगे

rahul gandhi attacks BJP and EC on SIR

मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मचे घमासान और मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की सियासत गरमा गई है। इस खुलासे के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग, भाजपा और आरएसएस पर करारा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर ‘वोट चोरी’ को देश की जनता के खिलाफ अपराध और ‘देशद्रोह’ करार दिया है। ALSO READ: चुनाव आयोग में आंतरिक कलह? दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्तियां, विपक्ष ने उठाए सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि वोट चोरी भारतीय जनता के खिलाफ अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे आयोजित करने वाले भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का कृत्य किया है। न्याय जरूर मिलेगा।

10 माह में 14 बार आपत्ति

गौरतलब है कि इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर  पर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई।

 

सफाई में क्या बोला चुनाव आयोग?

इस मामले पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि ECI में मतभेदों के बावजूद सर्वसम्मति से फैसले लिए जाते हैं। कई मीडिया खबरों में मामले की सीधी जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि किसी भी चुनाव आयुक्त ने कोई असहमति नहीं जताई। उन्होंने केवल कुछ टिप्पणियां की थीं जिन पर आयोग ने विचार किया। ECI द्वारा लिए गए सभी फैसलों पर तीनों अधिकारियों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के हस्ताक्षर हैं।

चुनाव आयोग में आंतरिक कलह? दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्तियां, विपक्ष ने उठाए सवाल

चुनाव आयोग में आंतरिक कलह? दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्तियां, विपक्ष ने उठाए सवाल

Gyanesh Kumar

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) में फैसले लेने का अधिकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं। ECI के नियमों के मुताबिक, अगर तीन में से दो चुनाव आयुक्त किसी मामले पर सहमत होते हैं, तो बहुमत का फैसला ही मान्य होता है। बहरहाल SIR पर इंडियन एक्सप्रेस की खबर पर बवाल मच गया। विपक्ष ने भी इस मामले में चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट से भी मामले को संज्ञान देने की सलाह दी। ALSO READ: 2,700 की कैंसर दवा 27,000 में! सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह मरीजों से ‘दिनदहाड़े डकैती’ है, अधिकारियों की चुप्पी पर उठाए सवाल

 

चुनाव आयुक्तों के बीच सहमति पर सवाल

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग के अंदर दो चुनाव आयुक्तों की जानकारी के बिना उन मामलों पर फैसले लिए गए, जिन पर उन दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।

 

रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 में भारतीय चुनाव आयोग ने बिहार से SIR की शुरुआत की। इसके बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हुए। इसी प्रक्रिया के दौरान नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन, पुराने वोटर्स के नाम और अपीलों से जुड़े कई सवाल सामने आए। आयोग के भीतर भी इसी दौरान असहमति दर्ज होने लगी। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। एक ही दिन में अधिकतम चार बार आपत्ति दर्ज की गई। ये आपत्तियां उन फैसलों और निर्देशों को लेकर थीं, जो उनके मुताबिक, उनकी सहमति के बिना जारी किए गए।

 

विपक्ष ने उठाए सवाल

कांग्रेस ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, मोदी के चहेते ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। इस बारे में खुद दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है। शिकायत में साफ कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्त – सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी नहीं दी जाती। उनसे सलाह नहीं ली जाती। उनसे बिना पूछे या बताए हुए फैसले लिए जा रहे हैं। ये 14 शिकायतें मुख्य तौर से – SIR, फॉर्म 6 में बदलाव, नए वोटर का रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाना और जोड़ना, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील, वोटर लिस्ट की सुरक्षा और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर है।

 

पार्टी ने कहा कि इन शिकायतों से साफ होता है कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में सिर्फ ज्ञानेश कुमार की चल रही है। ज्ञानेश अपने बॉस मोदी की तरह तानाशाही कर रहे हैं और मोदी को खुश करने के लिए ‘वोट चोरी’ का काम कर रहे हैं। हम पहले भी कहते आए हैं – मोदी ने चुनाव आयोग पर कब्जा कर रखा है। ज्ञानेश कुमार मोदी के हाथ की कठपुतली है। इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट से ये बात साबित होती है। मोदी और ज्ञानेश ने मिलकर देश के लोकतंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है। लेकिन ये बात याद रखना – वक्त आने पर सबका हिसाब होगा, जवाबदेही तय होगी। इस अपराध की सजा जरूर मिलेगी।

सपा नेता अखिलेश यादव ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज़ कराई है। इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और ख़तरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले!

चुनाव आयोग ने मतेभदों के आरोपों पर दी सफाई

इस मामले पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि ECI में मतभेदों के बावजूद सर्वसम्मति से फैसले लिए जाते हैं। कई मीडिया खबरों में मामले की सीधी जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि किसी भी चुनाव आयुक्त ने कोई असहमति नहीं जताई। उन्होंने केवल कुछ टिप्पणियां की थीं जिन पर आयोग ने विचार किया। ECI द्वारा लिए गए सभी फैसलों पर तीनों अधिकारियों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के हस्ताक्षर हैं।

आजमगढ़ में महामृत्युंजय जाप के दौरान पत्नी-बेटे और 2 पंडितों को गोलियों से भूना, एनकाउंटर में ढेर

आजमगढ़ में महामृत्युंजय जाप के दौरान पत्नी-बेटे और 2 पंडितों को गोलियों से भूना, एनकाउंटर में ढेर

crime news

Azamgarh Encounter: उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में पुलिस ने बुधवार को 4 हत्याओं के आरोपी अरविंद को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया। अरविंद पर महामृत्युंजय जाप के दौरान उसकी पत्नी, बच्चे और 2 पंडितों समेत 4 लोगों की हत्या का आरोप है। ALSO READ: खुद को पुलिस बताकर किया था कांड: कालकाजी मंदिर के पास किशोरी से गैंगरेप, मुठभेड़ के बाद आरोपी गिरफ्तार

 

मीडिया खबरों के अनुसार, अरविंद की मां ने बताया कि अरविंद के लिए ही उसकी पत्नी बबीता तीन पुरोहितों के साथ मिलकर पिछले तीन दिनों से घर में महामृत्युंजय का जाप करवा रही थी। अरविंद ने पुरोहितों से उनका आधार कार्ड मांगा। इससे नाराज होकर अरविंद ने पहले बबीता की हत्या की। फिर भाग रहे तीन पंडितों में से 2 को गोली मार दी। एक पंडित किसी तरह जान बचाकर भाग निकला।

8 साल पहले हुई थी भाई की हत्या

वहीं पड़ोसियों का कहना है कि 8 साल पहले अरविंद के भाई की हत्या हुई थी, जिसके बाद से उन लोगों के घर में कुछ ठीक नहीं चल रहा था। उन लोगों को लग रहा था कि भाई का भूत उन लोगों को परेशान कर रहा है। ALSO READ: जमुई में नाबालिग लड़की से बदसलूकी, पुलिस का बड़ा एक्शन, 3 आरोपी गिरफ्तार, जानें क्या है पूरा मामला

 

मामले पर क्या बोली पुलिस?

आजमगढ़ SSP अनिल कुमार ने बताया कि थाना अहरौला के ग्राम शंभूपुर में एक आरोपी अरविंद द्वारा एक कार्यक्रम में अपनी पत्नी एवं अन्य 2 व्यक्तियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो आरोपी ने अपने बच्चों को कमरे में बंद कर लिया। पुलिस ने आरोपी से आत्मसमर्पण कराने का प्रयास किया। इस पर आरोपी ने पुलिस व परिजनों को गोली मारने की धमकी दी गई। इस दौरान आरोपी ने अपने एक बच्चे को गोली मार दी।

 

उन्होंने कहा कि आरोपी ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने उसे चेतावनी दी और हवाई फायरिंग करने के बाद भी जब उसने फायरिंग जारी रखी तो पुलिस द्वारा आत्मरक्षा और बच्चों की सुरक्षा के लिए जवाबी फायरिंग की गई, जिसमें आरोपी घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर आरोपी अरविंद और उसके बेटे, दोनों को मृत घोषित कर दिया गया।

विधानसभा चुनाव से पहले गांधीनगर में संग्राम: अमित शाह के गढ़ में त्रिकोणीय मुकाबले की तैयारियां तेज

विधानसभा चुनाव से पहले गांधीनगर में संग्राम: अमित शाह के गढ़ में त्रिकोणीय मुकाबले की तैयारियां तेज

amit shah

Gandhinagar Municipal Election 2026: गुजरात विधानसभा चुनाव में अभी 14 महीने का समय बाकी है, लेकिन राज्य की राजधानी गांधीनगर में नगर निगम चुनाव की घोषणा होते ही सियासी पारा चढ़ गया है। 2021 का गांधीनगर नगर निगम चुनाव काफी हाई-वोल्टेज रहा था। आम आदमी पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सी.आर. पाटिल की मजबूत घेराबंदी के कारण आप केवल 1 सीट ही जीत सकी थी। वहीं कांग्रेस को 2 सीटों से संतोष करना पड़ा था। गांधीनगर नगर निगम में पहली बार भाजपा ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल कर मेयर पद पर कब्जा जमाया था। ALSO READ: सूरत में मालिक ने बकाया 10000 वेतन नहीं दिया तो कर्मचारी ने पेट्रोल से फूंक दिया 24 करोड़ का सामान

 

गुजरात राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा गांधीनगर नगर निगम की घोषणा होते ही राज्य की राजनीति में भारी हलचल शुरू हो गई है। इस चुनाव में मतदान 11 अक्टूबर को होगा और परिणाम 13 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। 2021 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी, जिसे देखते हुए भाजपा अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहती है। दूसरी ओर, विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे इस चुनाव में विपक्षी दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी अपना दमखम दिखाने के लिए मैदान में उतर चुके हैं। 

 

पिछले चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला और भाजपा का दबदबा

 

वर्ष 2021 का गांधीनगर नगर निगम चुनाव बेहद दिलचस्प रहा था। उस समय आम आदमी पार्टी ने पूरी ताकत लगाई थी, लेकिन सी.आर. पाटिल की रणनीति के आगे आप केवल 1 सीट जीत पाई। इसके साथ ही कांग्रेस को केवल 2 सीटों पर ही जीत मिली। भाजपा ने पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करते हुए मेयर पद पर कब्जा जमाया था। ALSO READ: सोमनाथ मंदिर, खानपुर कमलम और CM को उड़ाने की धमकी, गुजरात में हड़कंप

 

अमित शाह के क्षेत्र में साख की लड़ाई

 

गांधीनगर नगर निगम का बड़ा हिस्सा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आता है, इसलिए इस चुनाव के नतीजों को बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा, कांग्रेस और आप के बीच त्रिकोणीय जंग होने की उम्मीद है। विपक्षी दल अगर अपनी सीटें बढ़ाने में सफल रहते हैं तो उनका मनोबल बढ़ेगा, जबकि भाजपा एक भी सीट गंवाए बिना विपक्ष पर मानसिक बढ़त हासिल करने की रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। 

 

गांधीनगर नगर निगम का इतिहास और शुरुआती चुनाव

अहमदाबाद और मेहसाणा जिलों के हिस्सों को अलग करके 1964 में गांधीनगर जिले का गठन किया गया था। इसके बाद गुजरात हाईकोर्ट के आदेश पर 16 मार्च 2010 को गांधीनगर नगर निगम का गठन हुआ। वर्ष 2011 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2016 के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा और दोनों को 16-16 सीटें मिलीं, लेकिन भाजपा ने दलबदल के सहारे अपनी सत्ता बना ली। 

 

विजयी इतिहास और आगामी चुनाव पर नजर

गांधीनगर नगर निगम के तीसरे चुनाव में भाजपा ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करते हुए कुल 44 में से 41 सीटों पर कब्जा जमाकर इतिहास रचा था। अब राज्य निर्वाचन आयोग ने चौथे चुनाव की घोषणा कर दी है। 11 अक्टूबर को होने वाले मतदान और 13 अक्टूबर को आने वाले नतीजों से तय होगा कि भाजपा अपना गढ़ बचा पाती है या विपक्षी दल कोई नया उलटफेर करने में कामयाब होते हैं।

No UPI Day: 2000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज के खिलाफ सड़कों पर उतरे व्यापारी, स्कैनरों पर डाले काले कपड़े

No UPI Day: 2000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज के खिलाफ सड़कों पर उतरे व्यापारी, स्कैनरों पर डाले काले कपड़े

No UPI Day

No UPI Day : डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के बाद अब इस पर लगने वाले संभावित शुल्कों को लेकर व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। मध्य प्रदेश में आज (बुधवार) व्यापारी संगठन ‘नो UPI डे’ मना रहे हैं। यह विरोध मुख्य रूप से 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या अन्य शुल्कों को थोपे जाने के खिलाफ किया जा रहा है। ALSO READ: UPI चार्ज के विरोध में व्यापारी इंदौर में शुरू करेंगे डिजिटल अभियान, 125 संगठन हुए एकजुट, 10 लाख लोगों तक पहुंचने का टारगेट

 

राज्यभर के बाजारों में व्यापारी अपने यूपीआई पेमेंट स्कैनर को काले कपड़े से ढककर अपना विरोध जता रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि थोक किराना और अन्य बाजारों में 90 फीसदी से ज्यादा ट्रांजैक्शन 2,000 रुपए से ऊपर के होते हैं। सरकार और बैंकिंग प्रणाली ने पहले ग्राहकों और व्यापारियों को कैशलेस बिजनेस की आदत डाली और अब इस तरह के शुल्क वसूले जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।

 

अनुमान के मुताबिक, सिर्फ MDR शुल्क के रूप में भोपाल के कारोबारियों पर 663.152 करोड़ रुपये और इंदौर के कारोबारियों पर करीब 2,265 करोड़ रुपये के भुगतान पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिससे व्यापारी काफी आक्रोशित हैं। ALSO READ: MP के पेट्रोल पंपों पर 2 हजार से ज्यादा के पेमेंट UPI से नहीं, नए नियमों के बाद पंप डीलर्स का फैसला

 

इन सेक्टरों पर पड़ेगा सबसे बुरा असर

व्यापारी संगठनों का मानना है कि इस नए शुल्क का सबसे भारी नुकसान उन व्यवसायों को उठाना पड़ेगा जिनमें मुनाफा या मार्जिन पहले से ही बहुत कम होता है। इनमें मुख्य रूप से किराना, पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, अनाज और मोबाइल व्यापार शामिल हैं। कारोबारियों के मुताबिक, यदि ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत तक का शुल्क कटता है, तो उनका सारा मुनाफा इसी में खत्म हो जाएगा। ALSO READ: इतने विरोध के बाद भी सरकार UPI Charge पर क्यों अड़ी है? समझिए 2000 से ऊपर MDR फीस का गणित

 

पेट्रोल पंपों पर भी गूंजेगा विरोध

इस विरोध प्रदर्शन की आंच आने वाले दिनों में और तेज होने वाली है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो आगामी 16 अक्टूबर से मध्य प्रदेश के सभी 4,700 पेट्रोल पंपों पर भी 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान का कड़ा विरोध किया जाएगा। इस आर्थिक बोझ को लेकर व्यापारियों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है।

वेबदुनिया के 27 साल: इंटरनेट से AI तक भारतीय भाषाओं की नई उड़ान

वेबदुनिया के 27 साल: इंटरनेट से AI तक भारतीय भाषाओं की नई उड़ान

27 years of webdunia hindi

कुछ यात्राएँ केवल वर्षों में नहीं मापी जातीं। वे इस बात से पहचानी जाती हैं कि उन्होंने अपने समय में क्या बदला।

1999 में मध्य प्रदेश से शुरू हुई वेबदुनिया की यात्रा आज 27 वर्ष पूरी कर रही है। यह केवल एक डिजिटल पोर्टल की वर्षगांठ नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं की उस डिजिटल यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो इंटरनेट के शुरुआती दौर में शुरू हुई थी।

 

उस समय इंटरनेट पर अंग्रेजी का दबदबा था। भारतीय भाषाओं के लिए डिजिटल दुनिया में जगह बनाना एक चुनौती थी। वेबदुनिया ने हिंदी को इंटरनेट पर एक स्वतंत्र पहचान देने का प्रयास किया और आगे चलकर हिंदी के साथ सात अन्य भारतीय भाषाओं में भी अपनी उपस्थिति बनाई।

 

आज करोड़ों पाठकों तक पहुँचना इस बात का प्रमाण है कि भारत की डिजिटल कहानी केवल अंग्रेजी में नहीं लिखी जा सकती। लेकिन अब कहानी का अगला अध्याय शुरू हो चुका है।

 

AI Revolution.

 

अब सवाल इंटरनेट का नहीं, AI का है

 

पहली डिजिटल क्रांति का बड़ा सवाल था—क्या भारतीय भाषाएँ इंटरनेट पर अपनी जगह बना पाएंगी? आज सवाल है—क्या भारतीय भाषाएँ AI की दुनिया को भी आकार देंगी?

AI जिस तेजी से हमारे सूचना प्राप्त करने, ज्ञान हासिल करने और संवाद करने के तरीके को बदल रहा है, उसमें भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल तकनीक तक पहुँच नहीं है। चुनौती यह भी है कि AI भारत की भाषाओं, संस्कृति, संदर्भ और विविधता को कितनी गहराई से समझता है।

 

भारत में करोड़ों लोग अपनी मातृभाषा में सोचते और संवाद करते हैं। इसलिए भारत में AI की वास्तविक पहुँच तभी व्यापक होगी, जब वह केवल भारतीय भाषाओं को translate न करे, बल्कि उन्हें समझे। यहीं भारतीय भाषा मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

 

Content से Context तक

 

पिछले 27 वर्षों में भारतीय भाषा मीडिया ने डिजिटल कंटेंट का एक विशाल संसार तैयार किया है—समाचार, विचार, संस्कृति, इतिहास, मनोरंजन, खेल और समाज से जुड़ी जानकारी। AI के युग में यही कंटेंट एक नई भूमिका निभा सकता है।

 

अब चुनौती केवल यह नहीं कि हम कितना कंटेंट बनाते हैं। चुनौती यह है कि वह विश्वसनीय, संदर्भपूर्ण, संरचित और AI-ready हो। क्योंकि आने वाला पाठक शायद हमेशा वेबसाइट पर जाकर जानकारी न खोजे। वह AI से पूछेगा—

 

“मुझे बताइए…”

 

और उस उत्तर की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करेगी कि AI ने किस ज्ञान से सीखा है और उस ज्ञान का संदर्भ कितना विश्वसनीय है। इस बदलाव को समझना मीडिया के लिए आवश्यक है।

 

बदलाव शाश्वत है, मूल्य स्थायी

 

27 वर्षों में हमने इंटरनेट को बदलते देखा। वेबसाइट से मोबाइल, सोशल मीडिया से वीडियो और अब AI तक—तकनीक लगातार बदल रही है। आगे भी बदलाव रुकने वाला नहीं है। बदलाव शाश्वत है, लेकिन मूल्य स्थायी।

 

तकनीक बदल सकती है, प्लेटफॉर्म बदल सकते हैं, पाठक के व्यवहार बदल सकते हैं; लेकिन विश्वसनीयता, सत्यता, जिम्मेदारी और पाठक का विश्वास किसी भी दौर में मीडिया की बुनियाद बने रहेंगे।शायद यही किसी भी डिजिटल संस्था की सबसे बड़ी पूंजी है।

 

भारतीय भाषाओं का अगला अवसर

 

AI भारतीय भाषाओं के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन उससे भी बड़ा अवसर। एक किसान अपनी भाषा में AI से खेती के बारे में पूछ सके। एक विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में जटिल विषय समझ सके। कोई नागरिक अपनी भाषा में सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सके। कोई पाठक अपनी भाषा में इतिहास, विज्ञान या समसामयिक घटनाओं को समझ सके।

 

तब AI केवल तकनीक नहीं रहेगा।वह ज्ञान को लोकतांत्रिक बनाने का माध्यम बन जाएगा। लेकिन इसके लिए भारतीय भाषाओं में उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल ज्ञान की आवश्यकता होगी।

 

27 साल बाद फिर एक शुरुआत

 

वेबदुनिया की 27 वर्ष की यात्रा को पीछे मुड़कर देखने पर एक दिलचस्प समानता दिखाई देती है।

 

1999 में चुनौती थी—भारतीय भाषाओं को इंटरनेट तक पहुँचाना।

 

2026 में चुनौती है—भारतीय भाषाओं को AI के केंद्र तक पहुँचाना।

 

तकनीक बदल गई है। माध्यम बदल गया है। उपयोगकर्ता का व्यवहार बदल रहा है। लेकिन एक चीज नहीं बदली—अपनी भाषा में जानकारी पाने की आवश्यकता। इसलिए 27 वर्ष पूरे होना हमारे लिए केवल अतीत का उत्सव नहीं है। यह भविष्य के बारे में सोचने का अवसर है।

 

AI की दुनिया में भारत की सबसे बड़ी ताकत केवल उसकी तकनीकी प्रतिभा नहीं होगी। उसकी असली ताकत उसकी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता भी होगी।

 

और शायद आने वाले वर्षों का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होगा—

 

क्या हम ऐसा AI बना पाएँगे जो भारत की भाषाएँ सिर्फ बोलता नहीं, बल्कि भारत को समझता भी हो?

 

वेबदुनिया की यात्रा इंटरनेट से शुरू हुई थी। अब अगला अध्याय AI के युग में भारतीय भाषाओं की नई कहानी लिखने का है। 27 वर्षों से साथ चल रहे करोड़ों पाठकों, पत्रकारों, रचनाकारों, सहयोगियों और शुभचिंतकों को हृदय से धन्यवाद।

वेबदुनिया के 27 साल: 23 सितंबर 1999 को शुरू हुआ हिंदी इंटरनेट का ऐतिहासिक सफर

वेबदुनिया के 27 साल: 23 सितंबर 1999 को शुरू हुआ हिंदी इंटरनेट का ऐतिहासिक सफर

webdunia  27th anniversary

वेबदुनिया डॉट कॉम केवल एक वेबसाइट या डिजिटल मंच भर नहीं है, बल्कि यह भारत में भाषाई डिजिटल क्रांति का वह अग्रदूत है जिसने वैश्विक पटल पर हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं का परचम लहराया। 23 सितंबर 1999 का दिन हिंदी इंटरनेट के इतिहास में एक मील का पत्थर और स्वर्णिम अध्याय सिद्ध हुआ, जब दुनिया के पहले हिंदी पोर्टल ‘वेबदुनिया’ का आधिकारिक आगाज हुआ। जिस दौर में इंटरनेट का दायरा केवल अंग्रेजी भाषा तक सीमित माना जाता था और भाषाई सीमाओं के कारण बहुसंख्यक भारतवासी सूचना-प्रौद्योगिकी के इस महामार्ग से कटे हुए थे, उस समय वेबदुनिया ने आकर भारतीय भाषाई समाज के लिए डिजिटल युग के नए द्वार खोल दिए।

 

तकनीकी नवाचार और फोंट की समस्या का ऐतिहासिक समाधान

शुरुआती दौर में हिंदी इंटरनेट के समक्ष सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती फोंट की असमानता (Non-compatibility) थी। पाठक या उपयोगकर्ता तक हिंदी सामग्री तब तक नहीं पहुँच पाती थी जब तक उनके कंप्यूटर में संबंधित विशेष फोंट डाउनलोड न हो। वेबदुनिया ने इस बाधा को भांपते हुए ‘डायनैमिक फोंट’ (Dynamic Font) की क्रांतिकारी तकनीक विकसित की। इस नवाचार के माध्यम से पाठकों को बिना किसी अतिरिक्त फोंट को डाउनलोड किए सीधे हिंदी सामग्री पढ़ने की सुविधा मिली। इस एक तकनीकी छलांग ने हिंदी को सीधे वेब पेजों पर ला खड़ा किया और भारतीय भाषाई इंटरनेट के स्वप्न को पूर्ण यथार्थ में बदल दिया।

 

27 वर्षों की निर्बाध यात्रा और निरंतर विस्तार

वेबदुनिया ने 23 सितंबर 2026 को अपनी अनवरत और सफलतम यात्रा के 27 वर्ष पूरे कर लिए हैं। समय के साथ यह पोर्टल केवल हिंदी तक सीमित न रहकर तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, मलयालम, कन्नड़ और बांग्ला जैसी 8 प्रमुख भारतीय भाषाओं में अपनी सेवाएं देने लगा। भारत के सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों से लेकर दुनिया भर में फैले अप्रवासी भारतीयों (NRIs) तक, वेबदुनिया आज भी प्रामाणिक, विश्वसनीय और तथ्यपरक सामग्री का सबसे विश्वसनीय माध्यम बनी हुई है।

 

सामग्री की विविधता और अनूठे आयाम

वेबदुनिया की लोकप्रियता का एक बड़ा आधार इसकी विषय-वस्तु की विविधता और हर वर्ग के पाठक की रुचि का ध्यान रखना है। यह पोर्टल समाचार और समसामयिक विषयों से आगे बढ़कर विभिन्न विषयों पर समृद्ध सामग्री उपलब्ध कराता है:

 

राजनीति और खेल: चुनावी हलचलों की बारीकियों से लेकर क्रिकेट के रोमांच तक, वेबदुनिया अपने विशेष कवरेज और तीव्र गति से सटीक जानकारी देने के लिए जानी जाती है।

 

धर्म, अध्यात्म और कुंभ कवरेज: आस्था और भारतीय संस्कृति को केंद्र में रखते हुए पोर्टल पर संपूर्ण ‘रामचरितमानस’, ‘श्रीमद्भगवद्गीता’, ‘रामशलाका प्रश्नावली’ और प्रयागराज/हरिद्वार कुंभ का व्यापक और सीधा कवरेज उपलब्ध कराया गया।

 

ज्योतिष और पारंपरिक विद्या: जन्म कुंडली निर्माण, गुण-मिलान (पत्रिका मिलान) से लेकर आधुनिक टैरो कार्ड रीडिंग और दैनिक राशिफल तक, ज्योतिष क्षेत्र में इसकी सामग्री बेहद लोकप्रिय है।

 

जीवनशैली और मनोरंजन: बॉलीवुड, साहित्य, पर्यटन, सेहत, महिला एवं बाल जगत, हास्य-व्यंग्य (चुटकुले) तथा संबंधों से जुड़ी ज्ञानवर्धक सामग्री इसके मुख्य आकर्षणों में से हैं।

 

अप्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए सांस्कृतिक सेतु

वेबदुनिया की सबसे विशिष्ट और विनम्र भूमिका विदेशों में बसे भारतीय समुदाय को अपनी जड़ों से जोड़े रखने की रही है। सात समंदर पार बैठे भारतीयों तक भारतीय कला, धर्म, व्रत-त्योहारों के सटीक मुहूर्त, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को उनकी अपनी भाषा में पहुँचाकर इस पोर्टल ने एक डिजिटल सांस्कृतिक सेतु का कार्य किया है।

 

इंटरनेट पर सत्यता और फैक्ट-चेक का माध्यम

आज के दौर में जहाँ इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भ्रामक व गलत जानकारियों (Misinformation) की भरमार है, वहाँ वेबदुनिया ने विशेष रूप से धर्म, अध्यात्म, ज्योतिष और ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर एक ‘फैक्ट-चेकर’ और प्रामाणिक संदर्भ-कोश की भूमिका निभाई है। करोड़ों पाठकों का भरोसा आज भी इसकी निष्पक्षता और शुद्धता पर कायम है।

 

वेबदुनिया से जुड़े कुछ अन्य ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण तथ्य:

स्थापना का श्रेय: वेबदुनिया की शुरुआत इंदौर (मध्य प्रदेश) स्थित ‘नई दुनिया’ समाचार समूह के दूरदर्शी उद्यमियों और इसके संस्थापक विनय छजलानी जी की अथक मेहनत एवं सपर्मण से हुई थी। 

 

माइक्रोसॉफ्ट और वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी: जब माइक्रोसॉफ्ट और अन्य वैश्विक टेक दिग्गजों ने भारत में अपनी भाषाई सेवाएं शुरू करने का विचार किया, तब वेबदुनिया उनके प्रमुख तकनीकी और कंटेंट पार्टनर्स में से एक बनी। वेबदुनिया ने याहू, गुगल और तमाम वैश्विक कंपनियों के साथ काम करके भारत में इंटरनेट क्रांति और लोकलाइजेशनन को जन्म दिया।

 

यूनिकोड (Unicode) दौर में सुगम परिवर्तन: डायनैमिक फोंट के दौर से निकलकर जब दुनिया ‘यूनिकोड’ मानक पर आई, तब भी वेबदुनिया ने सबसे पहले इस बदलाव को अपनाकर अपनी संपूर्ण सामग्री को यूनिकोड में स्थानांतरित किया, जिससे यह मोबाइल और आधुनिक सर्च इंजनों पर अधिक सुलभ हो गई।

 

सॉफ्टवेयर व सर्च इंजन विकास: वेबदुनिया ने शुरुआती दौर में हिंदी में सर्च इंजन, हिंदी ईमेल सेवा (‘पत्र’) और हिंदी चैट रूम जैसी सुविधाएं भी विकसित की थीं, जो उस समय के भारतीय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एकदम नया अनुभव थीं।

 

वेबदुनिया डॉट कॉम केवल भारतीय भाषाओं का पहला इंटरनेट पोर्टल ही नहीं है, बल्कि यह भारत के डिजिटल पुनर्जागरण और भाषाई सशक्तिकरण की एक ऐतिहासिक गाथा है। 1999 से शुरू हुई इसकी 27 वर्षों की यह अनवरत यात्रा इस बात का प्रमाण है कि तकनीक जब अपनी संस्कृति, भाषा और जड़ों से जुड़ती है, तो वह कितनी व्यापक और सर्वस्पर्शी बन जाती है। ‘डायनैमिक फोंट’ जैसी क्रांतिकारी शुरुआत से लेकर 8 भारतीय भाषाओं में विस्तार करने और डिजिटल दौर में प्रामाणिक सामग्री के ‘फैक्ट-चेकर’ के रूप में उभरने तक, वेबदुनिया ने हर कदम पर भाषाई इंटरनेट को नई दिशा दी है।

 

सुदूर गाँवों के आम पाठकों से लेकर विदेश में बसे अप्रवासी भारतीयों तक को एक सांस्कृतिक और सूचनात्मक सूत्र में पिरोने का जो कार्य वेबदुनिया ने किया है, वह अविस्मरणीय है। आने वाले समय में भी जब-जब भारत में डिजिटल क्रांति और हिंदी इंटरनेट के इतिहास का मूल्यांकन होगा, वेबदुनिया को भाषाई तकनीक की बुनियाद रखने वाले एक युगांतरकारी पथप्रदर्शक (Pioneer) के रूप में सदैव याद रखा जाएगा।

 

2,700 की कैंसर दवा 27,000 में! सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह मरीजों से ‘दिनदहाड़े डकैती’ है, अधिकारियों की चुप्पी पर उठाए सवाल

2,700 की कैंसर दवा 27,000 में! सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह मरीजों से 'दिनदहाड़े डकैती' है, अधिकारियों की चुप्पी पर उठाए सवाल

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कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कीमतों में भारी अंतर और लूट पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला उदाहरण सामने रखा। ALSO READ: नोटिस मशीन से जारी हुए लगते हैं, दिल्ली में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

 

कोर्ट ने बताया कि एक दवा, जिसका अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 27,000 रुपये प्रिंट किया गया था, वह असल में रिटेलर को महज 2,700 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही थी। यानी रिटेलर को मिलने वाली कीमत से MRP सीधे 10 गुना ज्यादा था। इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘यह मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती है। अगर यह जबरन वसूली नहीं है, तो और क्या है?’

 

दवा के दाम कैसे तय हो रहे ?

सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है, उससे दवा के दाम तय करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते है। MRP और रिटेलर के बीच दस गुना अंतर बताता है कि सप्लाई चेन में दाम के कई स्तर है। यानी कीमत तय करने की व्यवस्था पारदर्शी नहीं है। इस मामले में निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े होते है। ALSO READ: राहुल गांधी ने फोन पर ऐसा क्‍या कहा कि महाराष्‍ट्र के राहुल बोंद्रे ने बदल दिया BJP में जाने का फैसला?

 

अधिकारियों की चुप्पी पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि जिन सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी बाजार में दवाओं की कीमतों और ऐसी अनियमितताओं पर लगाम लगाने की है, वे इस पर पूरी तरह चुप क्यों हैं। कोर्ट ने इसे ‘बेलगाम स्थिति’ करार दिया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत का ध्यान इस बात की ओर भी आकर्षित किया कि रजिस्टर्ड डॉक्टरों द्वारा मरीजों को जेनेरिक दवाएं लिखने से जुड़े मुद्दे पर भी विचार किया जाना जरूरी है।

 

29 सितंबर को फिर सुनवाई

दवा कंपनियों और रिटेलरों द्वारा मनमाने दाम वसूलने के खिलाफ दायर याचिका पर अब 29 सितंबर को अगली सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने देश में दवा की कीमतें तय करने वाली सप्लाई चेन और इसकी निगरानी व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन! ओडिशा-आंध्र प्रदेश समेत 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन! ओडिशा-आंध्र प्रदेश समेत 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

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बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन डीप डिप्रेशन में बदल गया है। इसके चक्रवाती तूफान अर्नब में बदलने और 23 सितंबर की रात उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार कर सकता है। डीप डिप्रेशन की वजह से ओडिसा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत 20 राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ALSO READ: Top News 23 September: बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन, मध्य प्रदेश में नो यूपीआई डे, क्रूड के दाम गिरे

 

ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश

ओडिशा के तटीय और दक्षिणी हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है। भारी बारिश के चलते ओडिशा में ODRAF टीमें तैनात की गई हैं। समुद्र में मछुआरों के जाने पर रोक और पुरी में समुद्र स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया है। राज्य के 7 जिलों में 24 सितंबर तक शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का फैसला किया गया है, जबकि सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें ड्यूटी पर लौटने को कहा गया है। 

 

आईएमडी ने 23 और 24 सितंबर को कोरापुट, गजपति और गंजाम में रेड अलर्ट जारी किया है। यहां 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश होने की संभावना है। 24 और 25 सितंबर के लिए कालाहांडी, नबरंगपुर, कोरापुट और मलकानगिरी में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण ओडिशा में 23 और 24 सितंबर को बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है। 25 और 26 सितंबर को भी कुछ इलाकों में भारी बारिश जारी रह सकती है।

राजस्थान से मानसून की विदाई

उत्तर पश्चिम भारत से दक्षिण पश्चिम मानसून की विदाई शुरू हुई। मौसम विभाग के मुताबिक, राजस्थान के कई हिस्सों से मानसून लौटने लगा है और अगले 3-4 दिनों में राज्य के कुछ और हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। 23 से 25 सितंबर तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। ALSO READ: अभी खत्म नहीं हुआ मानसून! लौट आया बारिश का दौर, 24 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

 

दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR के लिए फिलहाल कोई अलर्ट नहीं जारी किया है। यहां बुधवार को मौसम सामान्य तौर पर सूखा रहने का अनुमान है। आसमान साफ रहने से दिन के तापमान में ज्यादा राहत नहीं मिलेगी और अधिकतम तापमान करीब 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

Top News 23 September: बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन, मध्य प्रदेश में नो यूपीआई डे, क्रूड के दाम गिरे

Top News 23 September: बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन, मध्य प्रदेश में नो यूपीआई डे, क्रूड के दाम गिरे

top news 23 september

Top News 23 September : बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन डीप डिप्रेशन में बदल गया है। उत्तर भारत में मानसून की विदाई शुरू। ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा कि समझौता करो या नर्क में जाओ। मध्य प्रदेश में आज नो यूपीआई डे। 23 सितंबर की बड़ी खबरें : 

 

बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन

बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन डीप डिप्रेशन में बदल गया है और 23 सितंबर की रात उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार कर सकता है। ओडिशा में भारी बारिश के चलते ODRAF टीमें तैनात की गई हैं। समुद्र में मछुआरों के जाने पर रोक और पुरी में समुद्र स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया है। 

 

उत्तर भारत से मानसून की विदाई

उत्तर भारत से मानसून की विदाई शुरू हुई। बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन की वजह से ओडिसा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत 20 राज्यों में बारिश का अलर्ट। 

 

मध्य प्रदेश में आज नो यूपीआई डे

यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क के विरोध में आज मध्य प्रदेश में व्यापारी संगठन ‘नो यूपीआई डे’ मनाएंगे। इस दौरान व्यापारी कुछ समय के लिए यूपीआई भुगतान स्कैनर को काले कपड़े से ढककर सांकेतिक विरोध जताएंगे। व्यापारियों का कहना है कि दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ेगी। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने प्रदेशभर के व्यापारियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।

 

ट्रंप की ईरान को धमकी

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा- मैंने रुकवाए 8 युद्ध। उन्होंने ईरान को खुली धमकी देते हुए कहा कि समझौता करो या नर्क में जाओ। उन्होंने कहा कि हमने ईरान को समझौते का मौका दिया था। हमने ये युद्ध लगभग खत्म कर दिया है। ईरान को बचने का मौका नहीं मिलेगा। ALSO READ: UNGA में डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, यूक्रेन युद्ध पर जल्द कुछ करूंगा, ईरान पर कड़ा रुख

 

घटे क्रूड के दाम

अमेरिका हार्मुज स्ट्रेट से यदि दबाव घटाता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाता है तो ईरान सात दिन में होर्मुज खोल सकता है। ऐसी रिपोर्ट सामने आते ही तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई। हालांकि, ईरानी अधिकारी ने ऐसे दावे को गलत बताया है। ब्रेंट क्रूड घटकर 98.98 डॉलर प्रति बैरल हुआ। WTI क्रूड गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इंडियन बास्केट पर क्रूड के दाम 117.4 डॉलर प्रति बैरल।