दिल्ली-बिहार समेत 15 राज्यों में भारी बारिश, 4 दिन का अलर्ट

दिल्ली-बिहार समेत 15 राज्यों में भारी बारिश, 4 दिन का अलर्ट

IMD rain alert in 15 states

Weathet Update : मध्य भारत के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ से लेकर मैदान तक मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है। नदियां उफान पर है। मौसम विभाग ने दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड समेत 12 से ज्यादा राज्यों में अगले 4 दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।  

 

इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज भारत के 15 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, असम और केरल शामिल हैं। 

 

कहां कैसा है मौसम?

उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन के चलते 150 से ज्यादा सड़कों पर यातायात बाधित रहा। इस वजह से चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। 

 

मध्य प्रदेश के सतना में भारी बारिश के बीच मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। भारी बारिश के बाद झारखंड के रांची में नदियां, डैम और झरने ओवरफ्लो हो गए। 

 

हरियाणा के अंबाला, रोहतक, फरीदाबाद, पलवल, कुरुक्षेत्र, कैथल व जींद के कई इलाकों में बुधवार को तेज बारिश हुई। यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज के पास लापता हुए 2 कमांडो में से एक कमांडों का शव देर शाम बरामद कर लिया है। दूसरे की तलाश जारी है। 

 

बिहार और नेपाल में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण राज्य की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ब्रज क्षेत्र को मुख्यमंत्री योगी देंगे 1051 करोड़ रुपये की 229 योजनाओं की सौगात

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ब्रज क्षेत्र को मुख्यमंत्री योगी देंगे 1051 करोड़ रुपये की 229 योजनाओं की सौगात

 

 

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ब्रज क्षेत्र को विकास की नई सौगात देने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री 3 सितंबर को दो दिवसीय प्रवास पर मथुरा आ रहे हैं, जहां वे ब्रजवासियों को करीब 1051 करोड़ रुपये की 229 विकास परियोजनाओं का बड़ा उपहार देंगे। इस भव्य समारोह के दौरान 540 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 62 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा, जिससे शहर के बुनियादी ढांचे और पर्यटन को नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही 437 करोड़ रुपये की लागत वाली 167 नई योजनाओं का शिलान्यास करेंगे। समारोह में मुख्यमंत्री पीएम आवास (शहरी) और सीएम आवास (ग्रामीण) योजना के लाभार्थियों को 72 करोड़ से अधिक की सहायता राशि का वितरण करेंगे। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को ट्रैक्टर की चाबी, चेक और प्रमाण पत्र भी सौंपेंगे।

 

श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का करेंगे लोकार्पण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दो दिवसीय मथुरा प्रवास विकास और धर्म के अद्भुत संगम का साक्षी बनेगा। तय कार्यक्रम के अनुसार 3 सितंबर को दोपहर में सीएम योगी का राजकीय हेलीकॉप्टर वृंदावन स्थित पवनहंस हेलीपैड पर उतरेगा। वहां से वे गीता शोध संस्थान पहुंचेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री नवनिर्मित और अत्याधुनिक 'श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह' का भव्य लोकार्पण करेंगे। जहां एक हजार लोगों के बैठने की उत्कृष्ट व्यवस्था है।

 

संतों से मिलेंगे और बच्चों को कराएंगे अन्नप्राशन संस्कार

इस कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी प्रो-पुअर प्रदर्शनी का अवलोकन, वृक्षारोपण, संतों से मुलाकात करेंगे और बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराएंगे। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र व चेक वितरित कर जनसभा को संबोधित करेंगे।  इसके बाद मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के कार्यों की प्रगति जानने के लिए अहम समीक्षा बैठक करेंगे।

 

'कान्हा भक्ति स्तम्भ मार्ग' का भ्रमण और अवलोकन

समीक्षा बैठक के पश्चात मुख्यमंत्री वृंदावन के होटल विवान्ता में 'आज तक' न्यूज चैनल के 'पंचायत आज तक' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। इसके बाद वे वृंदावन में विकसित किए गए भव्य 'कान्हा भक्ति स्तम्भ मार्ग' का भ्रमण और अवलोकन करेंगे। इन कार्यक्रमों के बाद शाम को वे पं. दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा पहुंचेंगे और परिसर स्थित अशोका अतिथि गृह में रात्रि विश्राम करेंगे।

 

जन्मभूमि में दर्शन और गो पूजन करेंगे सीएम योगी

अगले दिन शुक्रवार 4 सितंबर को सुबह सीएम योगी श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर पहुंचेंगे। यहां वे सबसे पहले गो पूजन करेंगे और उसके बाद मुख्य मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन व विशेष पूजन अर्चना करेंगे। इसके पश्चात मुख्यमंत्री प्रस्थान कर जाएंगे।

मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

climate change

प्रभाकर मणि तिवारी

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने पर्यावरणविदों और मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया के मुंबई, कोलकाता और ढाका समेत निचले इलाको में बसे कई शहरों में 1.40 करोड़ लोगों पर निकट भविष्य में विस्थापन का खतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2024 में समुद्री जलस्तर में रिकार्ड छह मिलीमीटर की वृद्धि ने इस खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है। ALSO READ: हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

 

क्या-क्या कहा गया है यूएन की रिपोर्ट में?

संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव अमीना मोहम्मद ने 55वीं पैसिफिक आइलैंड्स फोरम लीडर्स मीटिंग में सोमवार को यह रिपोर्ट जारी की। संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव नवीद हनीफ ने भी न्यूयार्क में पत्रकारों को विस्तार से इसकी जानकारी दी।

 

रिपोर्ट में विस्थापन के खतरे की समयसीमा के बारे में तो कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि इसके मुताबिक, दुनिया भर के करीब 77 करोड़ लोग इस खतरे की चपेट में आ सकते हैं। इसमें कहा गया है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर आगे चल कर खाद्य सुरक्षा, पूर्वजों की जमीन और हमारी पहचान के लिए भी खतरा बन सकता है। ऐसे में सरकारों को इस मुद्दे को अपनी योजना प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के लिए एक बहुत ही व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा।

 

रिपोर्ट में हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने से बाढ़ और सूखे के बढ़ने की चेतावनी भी दी गई है। इसमें कहा गया है कि ग्लेशियरों की तादाद ज्यादा होने के कारण दक्षिण एशिया दुनिया का 'तीसरा ध्रुव' बन गया है।

 

अब तक मिले संकेतों से अनुमान लगाए जा रहे हैं कि अगले 15-20 वर्षों में दक्षिण एशिया में ग्लेशियरों के पिघलने के कारण बाढ़ की समस्या गंभीर हो सकती है। उसके बाद पैदा होने वाली सूखे की स्थिति के कारण खेती और खाद्य सुरक्षा पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे बदलाव हिमालयी नदी प्रणाली और खेती पर निर्भर समुदायों को के लिए बड़ा खतरा बनेंगे।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया तेज होती है और पानी गर्म होता है। इसका असर कई स्तरों पर नजर आता है। समुद्र का जलस्तर बढ़ने से शहरी बुनियादी ढांचे, जल प्रणालियों, परिवहन, ऊर्जा ग्रिड, इमारतों और भूजल संसाधनों को पहले ही नुकसान पहुंच रहा है। इसके दूरगामी नतीजे सामने आ रहे हैं।

 

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने का सबसे ज्यादा असर कम ऊंचाई वाले द्वीपीय देशों पर होगा। हालांकि यह उन तक ही सीमित नहीं रहेगा।समुद्र का बढ़ता जलस्तर विकसित और विकासशील, दोनों वर्ग के देशों को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका के न्यूयार्क और मियामी के अलावा ग्वांझू जैसे ज्यादा आय वाले शहरों में तटवर्ती इलाके के बुनियादी ढांचे पर भी खतरे की आशंका है। ALSO READ: भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

 

एशिया के किन शहरों पर खतरा ज्यादा?

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में खासकर भारतीय शहरों कोलकाता और मुंबई के अलावा बांग्लादेश की राजधानी ढाका पर समुद्री जलस्तर में वृद्धि से पैदा होने वाले खतरे गंभीर हैं।  दूसरे इलाकों की तुलना में यहां खतरा ज्यादा होने की क्या वजह है?

 

पर्यावरणविदों का कहना है कि इन शहरों में समुद्री जमीन पर तेजी से बुनियादी ढांचे के साथ ही इंसानी बस्तियां बसाई जा रही हैं। लगातार बढ़ती आबादी के कारण जमीन की कमी हो रही है। ऐसे में टाउन प्लानरों के सामने समुद्री जमीन हासिल करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।

 

उनके मुताबिक, सबसे ज्यादा खतरा इन शहरों के उन तटीय इलाकों में हैं जहां बीते 15-20 साल में समुद्री जमीन पर बड़े पैमाने पर बस्तियां बसाई गई हैं।

 

कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में सामुद्रिक विज्ञान संस्थान के प्रमुख डा। सुगत हाजरा डीडब्ल्यू से कहते हैं, “समुद्री जमीन पर बुनियादी ढांचा और इंसानी बस्तियां बसाने की योजना बनाते समय पर्यावरणया भविष्य में पैदा होने खतरों की अनदेखी की जा रही है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्री जलस्तर में वृद्धि से पैदा होने वाले खतरे को ध्यान में रखते हुए इससे निपटने के लिए दीर्घकालीन रणनीति बनाने और उस पर अमल करने की जरूरत है।”

 

हाजरा कहते हैं, “बंगाल के सुंदरबन इलाके में बसे द्वीपों पर बीते कई सालों से ग्लोबल वार्मिंग के कारण होने वाले बदलाव का असर नजर आ रहा है। बंगाल की खाड़ी के बढ़ते जलस्तर के कारण इलाके के कई द्वीप पानी में डूब चुके हैं और कई डूबने की कगार पर हैं। उन इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों पर विस्थापन की तलवार लटक रही है।” ALSO READ: शहरों को ठंडा रखने वाले पेड़ों को भी अब चाहिए सहारा

 

जादवपुर विश्वविद्यालय में ही जलवायु परिवर्तनकार्यक्रम की प्रमुख जयश्री राय डीडब्ल्यू से कहती हैं, “संयुक्त राष्ट्र पहले से इस खतरे की चेतावनी देता रहा है। अफसोस की बात यह है कि सरकार ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया है। शायद इस खतरे से बचने की दिशा में ठोस पहल करने से पहले हम सिक्किम, धराली और नेपाल जैसी किसी आपदा का इंतजार कर रहे हैं।”

 

कोलकाता में मौसम विज्ञानी डा. प्रणवेश कुंडू डीडब्ल्यू से कहते हैं, “संयुक्त राष्ट्र समेत तमाम एजेंसियां समय-समय पर इस खतरे से आगाह करती रही हैं। लेकिन अखबारों में सुर्खियां बनने के बाद लोग इसे भूल जाते हैं।” वो बताते हैं, “वर्ष 2019 में अमेरिका स्थित शोध समूह क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट ने जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान की गंभीर तस्वीर पेश की थी। उसमें में कहा गया था कि वर्ष 2050 तक भारत में बाढ़ और समुद्र का जलस्तर बढ़ने की वजह से 3।60 करोड़ लोग प्रभावित होंगे।”

 

कुंडू ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में सूरत, मुंबई, कोलकाता, केरल, ओडीशा और चेन्नई जैसी तटवर्ती इलाकों पर भी भारी खतरा मंडराने की चेतावनी दी गई थी। लेकिन उसका गंभीरता से संज्ञान तक नहीं लिया गया। अब ताजा रिपोर्ट में भी वही चेतावनी दोहराई गई है।

अमेरिका का ईरान पर मिसाइल और ड्रोन हमला, 12 लोगों की मौत, तेहरान ने अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले का किया दावा

अमेरिका का ईरान पर मिसाइल और ड्रोन हमला, 12 लोगों की मौत,  तेहरान ने अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले का किया दावा

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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका ने मंगलवार रात ईरान के सिरिक, खुज़ेस्तान, क़ेश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में 12 लोगों की मौत और 68 लोग घायल हुए हैं। ईरान का दावा है कि सिरिक में एक शादी समारोह के दौरान मिसाइल गिरी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक चार साल का बच्चा भी शामिल बताया गया है।

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खुज़ेस्तान में भी हमले का दावा

 

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, खुज़ेस्तान प्रांत में हुए एक अन्य हमले में 7 लोगों की मौत और 8 लोग घायल हुए हैं। हालांकि, अमेरिका ने इन आरोपों के बीच कहा है कि उसकी सेना ने केवल ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

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ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का किया दावा

 

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका है।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भी हुआ था अमेरिकी हमला

 

यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका ने 30 अगस्त को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास लारक द्वीप पर मौजूद दो ईरानी रॉकेट लॉन्चरों पर हवाई हमला किया था। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी वैश्विक चिंता बढ़ सकती है।

‘श्रीकृष्ण पर्व’ में घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल से गूंजेगा मध्यप्रदेश, जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्‍ण लोक का मुख्‍यमंत्री करेंगे भूमि पूजन

‘श्रीकृष्ण पर्व’ में घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल से गूंजेगा मध्यप्रदेश, जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्‍ण लोक का मुख्‍यमंत्री करेंगे भूमि पूजन

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन-जन का पर्व बनाने के उद्देश्य से संस्‍कृति विभाग के श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास द्वारा 4 सितंबर को ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का राज्‍य स्‍तरीय व्यापक आयोजन किया जा रहा है। ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की संकल्पना के साथ प्रदेश के सभी 55 जिलों में 111 स्थानों पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि राज्‍य के 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जाएगी, जबकि भव्य जन्मोत्सव में 1500 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करेंगे। इस प्रदेशव्यापी पर्व का विशेष आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर भी होगा। यहाँ श्रीकृष्ण की विविध कलाओं और परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे। जन्‍मोत्सव में मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जो श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज की उत्सव परंपरा की झलक प्रस्तुत करेगा।

मुख्यमंत्री निवास पर होने वाले आयोजन में 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी बच्‍चों को माखन मिश्री, लड्डू गोपाल की मूर्ति, श्रीकृष्‍ण की बाल लीलाओं पर केन्द्रित पुस्‍तक भेंट करेंगे। कार्यक्रम उपरांत जानापाव में मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव द्वारा परशुराम श्रीकृष्‍ण लोक का भूमि-पूजन किया जायेगा।  

 

राज्य मंत्री लोधी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण आस्था और भक्ति के साथ भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के महान प्रतीक हैं। मध्यप्रदेश की धरती का भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और परंपराओं से गहरा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहा है। श्रीकृष्ण के जीवन से हमें मित्रता, करुणा, धैर्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इसी गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का व्यापक आयोजन किया जा रहा है। 

 

राज्य मंत्री लोधी ने बताया कि श्रीकृष्ण पर्व के लिए चयनित 111 स्थलों में अनेक ऐसे पावन और ऐतिहासिक स्थल सम्मिलित हैं, जिनकी परंपराएँ सीधे तौर पर द्वापर युग और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-प्रसंगों से जुड़ी हुई हैं। इनमें सांदीपनी आश्रम-उज्जैन, नारायणा धाम-उज्जैन, अमझेरा-धार, जानापाव-महू एवं जामगढ़-रायसेन जैसे स्थल प्रमुख हैं। इसके साथ ही आयोजन स्थलों में अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक केंद्र भी शामिल हैं, जिनका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्‍व होने के साथ-साथ गौरवशाली ऐतिहासिक अतीत भी है।

 

श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेश की धरती भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों को अपने भीतर समेटे हुए है। भगवान श्रीकृष्‍ण के जीवन के विभिन्‍न पहलुओं एवं लीलाओं के लोकव्‍यापीकरण, सनातन संस्‍कृति के विस्‍तार के साथ ही उनके द्वारा बताए जीवन मूल्‍यों यथा धैर्य, मित्रता, करुणा, दया इत्‍यादि जनमानस तक प्रेषित करने के उद्देश्‍य से माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशानुरूप श्रीकृष्‍ण पर्व के माध्‍यम से सांस्‍कृतिक परिदृश्‍य में दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्‍होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से न केवल इन स्थलों की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को व्यापक पहचान मिल रही है, बल्कि नई पीढ़ी भी मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत और गौरवपूर्ण इतिहास से परिचित हो रही है। यह पहल आस्था के उत्सव के साथ-साथ विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्स्मरण और प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रही है। इस वर्ष श्रीकृष्ण पर्व के आयोजन स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होने वाली स्‍थानीय गतिविधियों का विस्‍तार करने के लिए सांस्कृतिक महत्‍व के स्थलों को चिन्हित कर वहाँ आयोजन किए जा रहे हैं। 

 

कृष्णमय होगा मध्यप्रदेश, 1500 से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ-‘श्रीकृष्ण पर्व’ के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं, गुरु-शिष्य परंपरा, मित्रता, भक्ति और लोक संस्कृति पर केंद्रित विविध सांस्कृतिक आयोजन होंगे। नारायणा धाम, सांदीपनि आश्रम, महिदपुर, पन्ना, अमझेरा और जानापाव सहित प्रदेश के अनेक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर नृत्य-नाटिका, रासलीला, भजन, लोकगायन और अन्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन आयोजनों में प्रदेश के 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार और विभिन्न सांस्कृतिक दल सहभागिता करेंगे। 

 

नारायणा धाम में पांच दिवसीय आयोजन-उज्जैन के नारायणा धाम मंदिर प्रांगण में 2 से 6 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन होगा। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की स्मृति से जुड़े इस स्थल पर पहले दिन गुरु सांदीपनि आश्रम से जुड़े प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसमें श्रीकृष्ण और सुदामा के आश्रम के लिए लकड़ियां चुनने तथा सुदामा द्वारा गुरु माता के दिए चने छिपाकर खाने के प्रसंग को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ भरतनाट्यम, भजन गायन और ‘रासलीला : श्रीकृष्ण की दान लीला’ का मंचन होगा। दूसरे दिन कथक में ‘कृष्णम’ नाटिका, भजन गायन तथा ‘श्रीकृष्ण की माखन चोरी’ रासलीला होगी। तीसरे दिन ओडिसी शैली में कृष्ण आधारित नृत्य-नाटिका, भजन गायन और ‘श्रीकृष्ण जन्म एवं बाल लीला’ प्रस्तुत की जाएगी। चौथे दिन श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग पर नृत्य-नाट्य और भजन गायन होगा। पांचवें दिन गीता उपदेश पर आधारित नृत्य-नाटिका तथा भजन गायन होगा। सभी पांचों दिनों रासलीला का मंचन भी किया जाएगा। 

 

सांदीपनि आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा की झलक-उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 2 से 4 सितंबर तक शाम 4 बजे से तीन दिवसीय आयोजन होगा। इसमें ‘कर्षति इति कृष्ण’, भजन गायन और बघेली लोकगायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने तथा 64 कलाओं और 14 विद्याओं के ज्ञान अर्जित करने की पौराणिक परंपरा पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। 

 

महिदपुर में राधा-कृष्ण प्रेम और लोकसंगीत-महिदपुर के रामलीला चौक में 2 से 4 सितंबर तक शाम 7 बजे से कार्यक्रम होंगे। पहले दिन राधा-कृष्ण प्रेम प्रसंग पर नृत्य प्रस्तुति और भक्ति गायन होगा। दूसरे दिन बुंदेली गायन तथा भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भजन गायन के साथ श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़ी महिदपुर की परंपरा पर केंद्रित श्रीकृष्ण जन्म आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। 

 

पन्ना और अमझेरा में साकार होंगे कृष्ण के विविध प्रसंग-पन्ना के श्री बलदेवजी मंदिर परिसर में 2 सितंबर को बलदेव-श्रीकृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। श्री जुगल किशोर मंदिर में 3 और 4 सितंबर को दो दिवसीय आयोजन में श्रीकृष्ण नृत्य-नाटिका, भक्ति गायन तथा प्रणामी परंपरा पर केंद्रित भरतनाट्यम प्रस्तुति होगी। धार जिले के अमझेरा में 3 और 4 सितंबर को श्रीकृष्ण लीला तथा रुक्मिणी वरण एवं विवाह प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी। साथ ही भजन गायन भी होगा। अमझेरा को श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी वरण से जुड़े प्राचीन स्थल के रूप में आयोजन की विषयवस्तु में विशेष स्थान दिया गया है। 

 

जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्ण प्रसंग-महू के जानापाव में 4 सितंबर को शाम 4 बजे भगवान परशुराम द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किए जाने के प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद भजन गायन होगा। आयोजन स्थल पर भगवान परशुराम और श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। 

 

प्रदेश के अनेक जिलों में कृष्ण भक्ति का रंग-श्रीकृष्ण पर्व के अंतर्गत पाली (उमरिया), शहडोल, मंडला, दमोह, रीवा और खातेगांव सहित अनेक स्थानों पर एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इनमें मथुरा प्रवेश, कृष्ण-सुदामा प्रसंग, गोवर्धन धारण, सुदामा मिलन और कालियानाग मानमर्दन जैसे प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां शामिल हैं। लोकगायन और भजन के साथ विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं को मंच पर साकार किया जाएगा। उज्जैन के गोपाल मंदिर में 4 सितंबर को गीत गोविंद केंद्रित नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। तराना स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में भी लोक एवं भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। आगर-मालवा, रायसेन, गुना, ग्वालियर, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, मुरैना, राजगढ़ और इंदौर सहित अनेक जिलों में भी 4 सितंबर को शाम 7 बजे से कृष्ण केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें नृत्य-नाटिका, भजन और लोकगायन के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को श्रीकृष्ण भक्ति से जोड़ा जाएगा। 

 

1500 से अधिक स्थानीय कलाकार होंगे सहभागी-‘श्रीकृष्ण पर्व’ की सबसे बड़ी विशेषताओं में प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्थानीय कलाकारों की व्यापक भागीदारी है। 1500 से अधिक कलाकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। खरगौन, बड़वानी, खंडवा, राजगढ़, बैतूल, सीहोर, भोपाल, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, नीमच, रायसेन, सागर, सतना, रीवा, सिंगरौली, सीधी, कटनी, छिंदवाड़ा, झाबुआ, धार, देवास, नरसिंहपुर, उमरिया, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी, बुरहानपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ सहित प्रदेश के अनेक जिलों के कलाकार मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रस्तुतियां देंगे। इस सांस्कृतिक श्रृंखला में लोकगायन, भजन, नृत्य-नाटिका और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन एवं दर्शन के विविध आयाम सामने आएंगे। प्रदेश के 82 मंदिरों में प्रस्तावित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ यह आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने और प्रदेश की विविध लोक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को कृष्ण भक्ति से जोड़ने का व्यापक प्रयास बनकर सामने आएगा।

 

 

नौकरी की सिक्योरिटी, भविष्य की भी चिंता… आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को योगी सरकार का ‘सुरक्षा कवच’

नौकरी की सिक्योरिटी, भविष्य की भी चिंता... आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को योगी सरकार का 'सुरक्षा कवच'

Yogi adityanath

UP outsourcing employees outsourcing job security: नौकरी सिर्फ हर महीने मिलने वाली तनख्वाह का नाम नहीं होती। नौकरी के साथ कर्मचारी को अपने भविष्य की चिंता होती है, परिवार की जिम्मेदारी होती है और यह भरोसा भी चाहिए होता है कि उसकी मेहनत का रिकॉर्ड सुरक्षित है, उसका वेतन समय पर मिलेगा और जरूरत पड़ने पर उसके अधिकारों की सुनवाई करने वाली कोई व्यवस्था मौजूद है।

 

आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों के सामने लंबे समय से यही सबसे बड़ी चिंता रही है। वेतन, EPF, ESIC और सेवा संबंधी दूसरी सुविधाओं को लेकर भी असमंजस की स्थिति रहती थी। अब योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को एक संस्थागत और डिजिटल ढांचे से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम यानी UPCOS का शुभारंभ किया। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निस्तारण जैसी व्यवस्थाओं को एक व्यवस्थित ढांचे में लाने की शुरुआत हुई है।

एक कर्मचारी, एक डिजिटल व्यवस्था

UPCOS के जरिए सरकारी विभाग, आउटसोर्सिंग एजेंसियां और कर्मचारी एक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ेंगे। मैनपावर की जरूरत का आकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान और उसके अनुसार मानव संसाधन की योजना भी बनाई जाएगी।

 

भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी, योग्यता और मेरिट आधारित होगी तथा राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पालन किया जाएगा। SC, ST, OBC, दिव्यांगजन, महिलाओं, EWS, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और पूर्व सैनिकों के लिए नियमों के अनुसार आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। कर्मचारी अपने सर्विस डिटेल, बैंक अकाउंट, उपस्थिति, भुगतान और अन्य जानकारी एक ही जगह देख सकेगा। वह अपनी शिकायत भी दर्ज कर सकेगा, उसकी स्थिति ट्रैक कर सकेगा और समयबद्ध समाधान की व्यवस्था होगी।

हर महीने 5 तारीख तक वेतन

नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय पर पारिश्रमिक से जुड़ा है। आउटसोर्स कर्मचारियों को हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच पारिश्रमिक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। भुगतान सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में पहुंचाने का प्रावधान है। EPF और ESIC से जुड़े कर्मचारियों के खाते खुलवाना और नियमित रूप से अंशदान जमा कराना भी व्यवस्था का हिस्सा होगा। एजेंसियों को इसका प्रमाण भी निगम को निर्धारित समय में देना होगा। यानी कर्मचारी के वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को अब अधिक स्पष्ट और जवाबदेह ढांचे में लाया जा रहा है।

मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकेगा कर्मचारी

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक नौकरी की असुरक्षा भी रही है। नई व्यवस्था में कर्मचारी को मनमाने ढंग से हटाने पर रोक लगाई गई है। आउटसोर्सिंग एजेंसी किसी कर्मचारी को अपने स्तर से नहीं हटा सकेगी। अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी परिस्थितियों में भी संबंधित विभाग या संस्था और निगम की सहमति के बाद ही कार्रवाई की जा सकेगी।

प्रशिक्षण और मेरिट आधारित चयन

नई व्यवस्था केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों की कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की गई है। सेवायोजन विभाग के पोर्टल के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। योग्यता, दक्षता और तय मानकों के आधार पर पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों के लिए साक्षात्कार नहीं होगा। विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को चयन प्रक्रिया में वरीयता देने का भी प्रावधान है।

मातृत्व अवकाश और वैधानिक सेवा लाभ

नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए केवल वेतन और नौकरी की बात नहीं की गई है। मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था की गई है। EPF, ESIC और बैंकिंग से जुड़ी अनुमन्य सुविधाओं को भी कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी तय की गई है।

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40 लाख तक का दुर्घटना बीमा

UPCOS के साथ सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए एमओयू के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। निर्धारित वेतन श्रेणियों के अनुसार कर्मचारी को लगभग 40 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा मिलेगा। स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी निर्धारित बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके अलावा जलने की स्थिति में प्लास्टिक सर्जरी के लिए 10 लाख तक, आकस्मिक दवाओं के लिए 5 लाख तक और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सुविधा शामिल है।

कर्मचारी के बाद परिवार की भी चिंता

इस व्यवस्था की सबसे अलग बात यह है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा कर्मचारी तक ही सीमित नहीं रखा गया है। किसी बड़ी अनहोनी की स्थिति में उसके परिवार के लिए भी आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है। कर्मचारी के पुत्र की शिक्षा के लिए ₹8 लाख तक और पुत्री की शिक्षा के लिए ₹10 लाख तक सहायता का प्रावधान है। दो पुत्रियों के विवाह के लिए ₹8 से ₹10 लाख तक की सहायता और कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए ₹50 हजार तक की व्यवस्था की गई है।

 

कर्मचारी और उसके परिवार के लिए जीरो बैलेंस बैंक खाते की सुविधा भी उपलब्ध होगी। वेतन खाते के माध्यम से परिवार के अधिकतम चार सदस्यों को विशेष योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था भी की गई है।

बिचौलियों की जगह जवाबदेह व्यवस्था

UPCOS का बड़ा उद्देश्य आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारी, एजेंसी और विभाग के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना भी है। एजेंसियों का चयन और इंपैनलमेंट तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। विभाग, निगम और एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय व्यवस्था के माध्यम से जवाबदेही तय होगी। भर्ती से लेकर पोस्टिंग, उपस्थिति, वेतन, ग्रेच्युटी, बीमा और दूसरी सेवा सुविधाओं का डिजिटल प्रबंधन और निगरानी की जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि कर्मचारी को अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग दफ्तरों और लोगों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 

3.5 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा

योगी सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा। अब इन कर्मचारियों को समय पर वेतन के साथ ही सुरक्षा की गारंटी और भविष्य की सिक्योरिटी भी मिलेगी।

Air Marshal Jeetendra Mishra : अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की हुई सर्वसम्मति से नियुक्ति

Air Marshal Jeetendra Mishra : अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की हुई सर्वसम्मति से नियुक्ति

ayodhya ram mandir trust meeting

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया गया है। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने इसकी घोषणा की। कृष्ण मोहन के मुताबिक, CEO पद के लिए कुल 5,538 आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद अंतिम तीन नामों पर चर्चा की गई और इसके बाद रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सर्वसम्मति बनी।

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ram mandir trust

ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी अहम भूमिका

 

ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने बताया कि जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर चर्चा के दौरान उनके सैन्य अनुभव को भी ध्यान में रखा गया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उस ऑपरेशन के दौरान जितेंद्र मिश्रा कमांडर-इन-चीफ थे। जितेंद्र मिश्रा के अनुभव को देखते हुए उन्हें ट्रस्ट के CEO की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह पहली बार है जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में CEO का पद बनाया गया है।

ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त

 

CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टियों के नामों का भी ऐलान किया गया है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव शामिल हैं।

 

कृष्ण मोहन ने छोड़ा अंतरिम महासचिव का पद

 

ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने अपने पद से हटने की भी घोषणा की। उनके स्थान पर महाराज गोविंददेव गिरि को नया महासचिव बनाया गया है। वहीं, महेश भागचंदका को ट्रस्ट का नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

 

इस तरह राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में अब महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। CEO के रूप में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को ट्रस्ट के कामकाज को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। 

आउटसोर्स कर्मियों को बड़ी सौगात, नियोक्ता नहीं कर पाएंगे शोषण और अन्याय

आउटसोर्स कर्मियों को बड़ी सौगात, नियोक्ता नहीं कर पाएंगे शोषण और अन्याय

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योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के लगभग लगभग पांच लाख आउटसोर्स कार्मिकों को बड़ी सौगात दी है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के बाद अब नियोक्ता द्वारा न आउटसोर्स कर्मियों का शोषण हो पाएगा और न ही उनके साथ अन्याय हो पाएगा। पहली बार सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित हुआ। इसके साथ ही इससे सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। पांच साल में रिवीजन होगा। साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया में नियोक्ता का मनमानापन भी नहीं चल पाएगा। 

मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी कॉस पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग की। यूपी कॉस पोर्टल से आउटसोर्स निगमकर्मियों को बड़ी सुविधाएं भी मिलेंगी। इसके जरिए ऑनलाइन माध्यम से भर्ती व जॉइनिंग प्रक्रिया की जानकारी मिलेगी। समय पर मानदेय व सरकारी लाभ के साथ ही आउटसोर्स कर्मियों की पूरी जानकारी एक जगह मिलेगी। इससे उपस्थिति की सटीक जानकारी व छुट्टी का प्रबंधन भी सुनिश्चित होगा। यहां शिकायत और समाधान की भी सुविधा होगी। समय पर ईपीएफ अंशदान व ईएसआईसी का लाभ सुनिश्चित होगा। पोर्टल पर विभाग, एजेंसी और आउटसोर्सकर्मियों के लिए एक ही मंच होगा। 

एमओयू का किया गया हस्तांतरण

भारतीय स्टेट बैंक के साथ आउटसोर्स कर्मियों को मिलने वाले लाभ व सामाजिक सुरक्षा के लिए एसबीआई के साथ एमओयू का हस्तांतरण भी किया गया। 

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मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मियों को वितरित किए चेक 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में आउटसोर्स कर्मियों को चेक भी वितरित किए। इस दौरान लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। सीएम के हाथों इन्हें मिला चेक- 

  • रोहित कुमार- फर्राश- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • कसिन खान- रात्रि चौकीदार- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • सरिता-सफाई कर्मी- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • आशु कुमार- फर्राश- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • अरविंद कुमार यादव- वाहन चालक- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • रामकुमार- माली- सचिवालय प्रशासन विभाग
  • जितेंद्र प्रसाद- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ 
  • राजू कन्नौजिया- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
  • हंसराज सिंह- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
  • दिलीप कुमार- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
  • अंजनी कुमार- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ 
  • नरेंद्र तिवारी- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ ।

बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया ‘नो-ईटिंग’ अलर्ट!

बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया 'नो-ईटिंग' अलर्ट!

Bihar no eating fish alert

Bihar no eating fish alert: नेपाल में हाल ही में आई प्रलयंकारी बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद इसका सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्य बिहार पर दिखाई दे रहा है। नेपाल की नदियों से बहकर विशालकाय और असामान्य वजन वाली मछलियां उत्तर बिहार की गंडक (Gandak River) और कोसी नदियों में पहुंच गई हैं।

 

स्थानीय लोग और मछुआरे इन विशाल मछलियों को पकड़ने के लिए नदियों के किनारे जुट रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इन मछलियों को पकड़ने और खाने पर सख्त रोक लगा दी है। ALSO READ: Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

गंडक नदी में अचानक कैसे आईं ये विशाल मछलियां?

नेपाल में मूसलाधार बारिश और ग्लेशियर टूटने के कारण भोटे कोशी, त्रिशूली और गंडकी नदी प्रणालियों में भीषण फ्लैश फ्लड आया।

  • नेपाल के हैचरी और प्राकृतिक जलाशयों से बहाव : नेपाल के ऊपरी इलाकों में स्थित बड़े मत्स्य पालन केंद्रों (Fish Farms/Hatcheries) और प्राकृतिक झीलों के तटबंध बाढ़ में बह गए।
  • तेज बहाव के साथ भारत में प्रवेश : भारी पानी के बहाव और गाद (Sedimentation) के साथ 10 किलो से लेकर 40-50 किलो तक की विशालकाय मछलियां बहकर बिहार के वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण), गोपालगंज और सारण जिलों में गंडक नदी के मैदानी इलाकों में आ गईं।

प्रशासन क्यों कर रहा है इन मछलियों को खाने से मना?

विशालकाय मछलियों को देखकर स्थानीय लोगों में इन्हें खाने की होड़ मच गई है, लेकिन प्रशासन और जिला मत्स्य अधिकारियों ने इसे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है। इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक और चिकित्सीय कारण निम्नलिखित हैं:

 

(A) पानी में जहरीले रसायनों और भारी धातुओं का मिश्रण (Heavy Metal Contamination)

नेपाल में आई बाढ़ सिर्फ पानी नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर चट्टानों, खदानों के मलबे और औद्योगिक कचरे को बहाकर लाई है। गंडक नदी में बहकर आ रही मछलियों में आर्सेनिक, सीसा (Lead) और मरकरी (Mercury) जैसे जहरीले तत्वों की मात्रा अत्यधिक होने की आशंका है, जो मानव शरीर के लिए विषैले साबित हो सकते हैं।

 

(B) दूषित और सड़ी हुई मछलियों का खतरा (Bacterial Contamination)

बाढ़ के तीव्र बहाव में दम घुटने (Oxygen Depletion) और पत्थरों से टकराने के कारण कई मछलियां रास्ते में ही मर चुकी थीं या घायल हो गई थीं। पानी में पड़े रहने से इनमें ई-कोलाई (E-coli) और साल्मोनेला (Salmonella) जैसे खतरनाक जीवाणु पनप चुके हैं। ऐसी मछलियों का सेवन करने से:

  • फूड पॉइज़निंग (Food Poisoning)
  • पेट में गंभीर संक्रमण और उल्टी-दस्त
  • लिवर और किडनी को नुकसान पहुँच सकता है।

(C) एलियन/इन्वेंसिव स्पीशीज (Invasive Species) का खतरा

प्रशासन को यह भी अंदेशा है कि नेपाल के हैचरी से बहकर आई कुछ मछलियां 'सकर-माउथ कैटफिश' (Sucker-mouth Catfish) या 'थाई मांगुर' जैसी विदेशी नस्ल की हो सकती हैं, जिनमें प्राकृतिक रूप से विषाक्तता होती है और ये स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई और एडवाइजरी

  • नदी घाटों पर धारा 144 व पुलिस बल : वाल्मीकिनगर बैराज और गंडक नदी के तटीय इलाकों में लोगों को पानी के पास जाने और जाल बिछाने से रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
  • बाजारों में बिक्री पर रोक : स्थानीय बाजारों में नेपाल से बहकर आई संदिग्ध मछलियों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) की टीमें छापेमारी कर रही हैं।
  • सैंपलिंग और लैब जांच: मत्स्य विभाग ने इन मछलियों के सैंपल इकट्ठा करके जांच के लिए लैबोरेटरी भेजे हैं, ताकि पानी और मछली में किसी भी प्रकार के टॉक्सिन (विष) की पुष्टि की जा सके।

नेपाल की बाढ़ से आई ये विशाल मछलियां पहली नजर में भले ही एक अवसर लग रही हों, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि लैब रिपोर्ट आने तक इन मछलियों का सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और नदी से पकड़ी गई संदिग्ध मछलियों को खाने से पूरी तरह परहेज करें।

हथिनी कुंड बैराज पर ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, मोटर बोट बंद होने से यमुना में गिरे स्पेशल फोर्स के जवान

हथिनी कुंड बैराज पर ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, मोटर बोट बंद होने से यमुना में गिरे स्पेशल फोर्स के जवान

Hathini Kund Barrage Accident

हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज में स्पेशल फोर्स के जवानों की ट्रेनिंग के दौरान मंगलवार शाम बड़ा हादसा हो गया। यमुना में अभ्यास के दौरान जवानों को ले जा रही मोटर बोट अचानक बंद हो गई। इसी बीच तेज बहाव के चलते बोट बहने लगी और उसमें सवार 5 जवान नदी के पानी में गिर गए। हादसे के बाद 3 जवान किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि दो जवानों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

 

मीडिया खबरों के अनुसार, स्पेशल फोर्स की ट्रेनिंग 30 अगस्त से चल रही थी और मंगलवार को इसका आखिरी दिन था। शाम करीब 5 बजे यमुना की अपस्ट्रीम में जवानों का अभ्यास कराया जा रहा था। ट्रेनिंग के दौरान जवान हेलिकॉप्टर से एक-एक कर यमुना में मौजूद मोटर बोट पर उतर रहे थे। जवानों के बोट पर पहुंचने के बाद अचानक मोटर बोट स्टार्ट नहीं हुई। इसी दौरान तेज पानी के बहाव ने बोट को अपनी चपेट में ले लिया और वह बहने लगी। बोट पर सवार जवान पानी में गिर गए।

तेज बहाव में तैरकर निकले 3 जवान 

हादसे के बाद तीन जवानों ने पश्चिमी यमुना नहर की ओर तैरकर सुरक्षित निकलने की कोशिश की। उस वक्त नहर में करीब 14,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। तेज बहाव के बीच तीनों जवानों ने करीब 600 मीटर तक तैरकर नहर के खुले गेट से बाहर निकलने में सफलता हासिल की। हालांकि, दो जवानों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। उनके पानी में बह जाने की आशंका को देखते हुए सेना और रेस्क्यू टीम ने तलाशी अभियान तेज कर दिया है।

 

जवानों की तलाश जारी

2 जवानों के लापता होने की सूचना मिलते ही सेना ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। कर्नल योगेंद्र के नेतृत्व में सेना की टीम यमुना और पश्चिमी यमुना नहर के संभावित इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रही है। रेस्क्यू टीम रस्सियों और अन्य जरूरी उपकरणों की मदद से नदी और नहर में लापता जवानों की तलाश कर रही है। फिलहाल अभियान जारी है और सेना की टीम दोनों जवानों को खोजने में जुटी हुई है।