विजय के ‘पीएम दांव’ पर सियासत गर्माई : DMK और कांग्रेस का तंज, क्या 2029 में विजय बनेंगे प्रधानमंत्री?

विजय के 'पीएम दांव' पर सियासत गर्माई : DMK और कांग्रेस का तंज, क्या 2029 में विजय बनेंगे प्रधानमंत्री?

CM Vijay Thalapathy

TVK Vijay Prime Minister Demand: तमिलनाडु की राजनीति में हाल में हुए बड़े बदलाव के बाद अब एक नया सियासी भूचाल खड़ा हो गया है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) ने राज्य विधानसभा चुनाव में इतिहास रचते हुए 108 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की और अकेले दम पर 35% वोट शेयर हासिल किया। लगभग 60 सालों से चले आ रहे डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के बारी-बारी के शासन को खत्म कर विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन चुके हैं।

 

35% वोट शेयर का यह आंकड़ा तमिलनाडु के पूर्व लोकप्रिय मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन (MGR) को मिले वोट शेयर से भी 2 प्रतिशत अधिक है। बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़कर इतना बड़ा जनादेश हासिल करने का दावा करते हुए टीवीके समर्थक अब एक कदम आगे बढ़ गए हैं और विजय को 'भारत का अगला प्रधानमंत्री' प्रोजेक्ट करने लगे हैं। ALSO READ: परिसीमन पर तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय करने की मांग

विधानसभा में उठा 'दक्षिण का पीएम' का मुद्दा

हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा के सत्र के दौरान टीवीके के वरिष्ठ नेता और मंत्री आधव अर्जुन (Aadhav Arjuna) ने यह कहकर नया विवाद छेड़ दिया कि 'दक्षिण भारत के किसी तमिल नेता को देश का अगला प्रधानमंत्री बनना चाहिए'।

 

इसके बाद से पूरे तमिलनाडु में टीवीके कार्यकर्ताओं और विजय के प्रशंसकों ने जगह-जगह पोस्टर्स और होर्डिंग्स लगा दिए हैं, जिनमें विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस बहस से जुड़े रील्स और वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहे हैं।

कांग्रेस भड़की : 'दिल्ली में राहुल गांधी ही पीएम चेहरा'

टीवीके के इस नए दांव ने उनकी सहयोगी कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व को असहज और नाराज कर दिया है।

 

कांग्रेस नेताओं का रुख : तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि भले ही विजय तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक चेहरा हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर और दिल्ली की राजनीति में राहुल गांधी ही विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के एकमात्र उम्मीदवार हैं।

 

कांग्रेस का कहना है कि 2029 के आम चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, इसलिए टीवीके कार्यकर्ताओं का विजय को पीएम पद का दावेदार बताना जल्दबाजी और अनुचित है। विजय के मंत्रिमंडल में शामिल 2 विधायकों ने भी इसका खुला विरोध किया है और मंत्री पद से इस्तीफे की धमकी भी दी है। 

 

दूसरी ओर, राज्य के अन्य विपक्षी दलों ने विजय को प्रधानमंत्री बनाने की बात को 'एक बड़ा मज़ाक' करार देते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि ऐसा होने की कोई व्यावहारिक संभावना नहीं है। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन का तीखा तंज

इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच डीएमके के मुख्य प्रवक्ता और कम्यूनिकेशन टीम के अध्यक्ष टीकेएस एलंगोवन (TKS Elangovan) ने टीवीके और विजय पर जोरदार कटाक्ष किया है।

 

“टीवीके को तमिलनाडु में स्पष्ट बहुमत (118 सीटें) खुद नहीं मिला था। विजय केवल कांग्रेस और वीसीके (VCK) जैसी पार्टियों के समर्थन के बल पर सरकार चला रहे हैं। जब राज्य में ही उनकी सरकार दूसरों के बैसाखियों पर टिकी है, तो वे पूरे देश के प्रधानमंत्री कैसे बन सकते हैं?”

 

उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा- “एक दौर था जब हमने मांग की थी कि तमिलनाडु को एक अलग देश बनाया जाए। अगर तमिलनाडु कभी एक अलग देश बनता है, तो शायद विजय वहां के प्रधानमंत्री जरूर बन सकते हैं!”

2029 के लिए क्या हैं सियासी मायने?

तमिलनाडु में सत्ता में आते ही टीवीके द्वारा राष्ट्रीय राजनीति में अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर करना इस बात का संकेत है कि पार्टी खुद को सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रखना चाहती। हालांकि, कांग्रेस के साथ उभरते मतभेद और डीएमके का हमला यह दर्शाता है कि विजय के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाना और क्षेत्रीय सहयोगियों को साधे रखना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

भारत चांद पर पहुंच गया लेकिन जाति व्यवस्था अभी भी जारी है: बॉम्बे हाईकोर्ट

भारत चांद पर पहुंच गया लेकिन जाति व्यवस्था अभी भी जारी है: बॉम्बे हाईकोर्ट

bombay High court News

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि 21वीं सदी में हम चांद के दूसरे छोर तक पहुंचने का बखान करते हैं लेकिन कठोर हकीकत यह है कि हमारे देश में अभी भी जाति व्यवस्था की सामाजिक बुराई जारी है, जिसकी वजह से हमारे कुछ नागरिकों को मानवीय गरिमा से नीचे के काम करने पर मजबूर होना पड़ता है। ALSO READ: मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

 

कानूनी खबरों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुशा देशपांडे की डिविजनल बेंच ने ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग’ से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। हाथ से मैला ढोने या साफ करने को मैनुअल स्कैवेंजिग कहा जाता है। हाथों से सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई भी इसके दायरे में आती है। 

 

बेंच ने कहा, “मैनुअल स्कैवेंजिग एक ऐसी प्रथा है, जो आज भी हमारे देश में जारी है और जो एक विशेष वर्ग को पीढ़ियों से यह अमानवीय काम करने के लिए मजबूर कर रही है।” कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों और ऐसी प्रथाओं को प्रतिबंधित करने वाले कानूनों के बावजूद यह प्रथा अभी भी जारी है। ALSO READ: भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

 

कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार के उस नियम को चुनौती दी गई थी जिसमें कहा गया था कि अगर निजी सोसाइटी या ठेकेदार, मैनुअल स्कैवेंजिग के लिए किसी को काम पर रखते हैं तो दुर्घटना होने की स्थिति में मुआवजा देने की जिम्मेदारी भी उन्ही की होगी। कोर्ट ने कहा कि कानून नियोक्ता के आधार पर सफाई कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं करता है।

उत्तराखंड: सीएम धामी ने 9.91 लाख से अधिक पेंशनर्स के खातों में ट्रांसफर किए 147 करोड़, 5,605 नए लाभार्थी भी जुड़े

उत्तराखंड: सीएम धामी ने 9.91 लाख से अधिक पेंशनर्स के खातों में ट्रांसफर किए 147 करोड़, 5,605 नए लाभार्थी भी जुड़े

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कैंप कार्यालय से समाज कल्याण विभाग की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत अगस्त माह की पेंशन राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई है। इस बार डीबीटी (DBT) के माध्यम से राज्य के 9,91,914 लाभार्थियों के खातों में 147.05 करोड़ रुपए से अधिक की राशि भेजी गई है। इसके साथ ही, सरकार ने विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत 5,605 नए लाभार्थियों की पेंशन को भी स्वीकृति प्रदान की है। ALSO READ: द्वाराहाट का मां दूनागिरी मंदिर: 8,000 फीट की ऊंचाई पर विराजमान शक्तिपीठ

 

कमजोर और वंचित वर्गों को सामाजिक सुरक्षा देना संकल्प

इस अवसर पर सीएम धामी ने कहा कि समाज के कमजोर, जरूरतमंद और वंचित वर्गों को एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शासन का निरंतर यह प्रयास है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी अड़चन के पारदर्शी, सरल और समयबद्ध तरीके से पहुंचे। ALSO READ: खटीमा में सीएम धामी ने उठाया चाय का लुत्फ, राहुल गांधी पर साधा निशाना

अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेंशन योजनाओं के संचालन के दौरान यदि लाभार्थियों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़े, तो उसका प्राथमिकता और पूरी संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रशासनिक प्रक्रिया के चलते कोई भी पात्र व्यक्ति अपने अधिकार से वंचित न रहने पाए।

स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो पर बवाल, निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर CJP ने घेरा थाना

स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो पर बवाल, निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर CJP ने घेरा थाना

swatantra bhardwaj and nishu azad

जंतर-मंतर पर निशु आजाद के पिता पर हुए हमले के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर आरोपियों की गिरफ्तारी और हत्या की धारा लगाने की मांग की है। ALSO READ: 'डरो मत, मैं साथ हूं': पिता पर हमले के बाद निशु आजाद के समर्थन में आए राहुल गांधी

 

CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हमारी साथी निशु के पिता संजय के साथ मारपीट हुई, उनका सिर फोड़ा गया। खुलेआम ये घटना हुई। लगातार हमारी टीम सौरव और हमारी पूरी टीम दिल्ली पुलिस से मांग करती रही कि इन गुंडों को आप गिरफ्तार करें, इन पर हत्या के प्रयास का चार्ज लगाएं लेकिन दिल्ली पुलिस सोती रही। 
 

उन्होंने कहा कि अब देश की राजधानी में हालात ऐसे हो गए हैं कि गुंडे ये खुलेआम कबूल कर रहे हैं कि उन्होंने संजय का सिर फोड़ा, पूरी कोशिश थी उन्हें जान से मारने की। खुद कबूल कर रहे हैं कि उस पर हत्या के प्रयास का केस बनता था लेकिन दिल्ली पुलिस ने कपिल मिश्रा और भाजपा के गुंडों की शय पर उस व्यक्ति के साथ कुछ नहीं किया।

रांका ने कहा कि आज देश के लिए, हमारे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक दिन है जहां पर खुलेआम गुंडागर्दी करने वाले लोग दावा करते हैं कि उन्होंने किसी को जान से मारने का प्रयास किया लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। हमारी पूरी टीम निशु और उनके पिता, संजय के साथ पहले दिन से खड़ी रही है। हम दिल्ली पुलिस से मांग करेंगे कि इन गुंडों को, जिन्होंने खुद की पहचान बताई है, उन्हें गिरफ्तार किया जाए, उन पर हत्या के प्रयास की धाराएं लगाई जाएं, जितनी भी संगीन धाराएं उन पर लगती हैं, लगाई जाएं।

 

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर हुए हमले का मामला फिर से सुर्खियों में है। 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई हाथापाई में गाजियाबाद के रहने वाले संजय कुमार के सिर में चोट लग गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल पॉडकास्ट क्लिप में स्वतंत्र भारद्वाज ने यह दावा किया कि उसने ही निशु के पिता संजय कुमार का सिर फोड़ा था और राजनीतिक रसूख के चलते वह बिना किसी बड़ी कानूनी कार्रवाई के बच निकला।

स्वतंत्र भारद्वाज ने दी सफाई

जंतर-मंतर पर CJP के विरोध-प्रदर्शन के दौरान CJP कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर एक पॉडकास्ट के दौरान किए दावे पर कार्यकर्ता स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि लोग जिसे हमला कह रहे हैं, वह असल में आत्मरक्षा था। अगर मैंने आत्मरक्षा में ऐसा नहीं किया होता, तो भीड़ मुझे पीट-पीटकर मार सकती थी या मेरी हत्या हो सकती थी। मेरे पास वीडियो सबूत हैं। मुझे 10-15 लोगों ने घेर लिया था। जब मैंने आत्मरक्षा में कदम उठाया, तो उनके सिर पर चोट लग गई।

स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया कि राहुल गांधी और अन्य लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा पॉडकास्ट क्लिप नकली है। जो लोग कह रहे हैं कि मुझे कपिल मिश्रा के प्रभाव के कारण छोड़ा गया, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि कपिल मिश्रा और चिराग पासवान मेरे भाइयों की तरह हैं। लोगों को समझना चाहिए कि क्या बात व्यंग्य में कही गई थी।

दीपोत्सव से सजेगी रामनगरी, 5 से 8 नवंबर तक होंगे भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन

दीपोत्सव से सजेगी रामनगरी, 5 से 8 नवंबर तक होंगे भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन

 

योगी सरकार में अपनी विशेष पहचान बना चुका अयोध्या का 10वां दीपोत्सव इस बार और भव्य होगा। दीपोत्सव और कार्तिंक पूर्णिमा मेला को भव्य, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में दोनों आयोजनों की विभागवार तैयारियों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

 

पांच से आठ नवंबर तक होंगे दीपोत्सव के प्रमुख आयोजन

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पांच नवंबर को गोवत्स द्वादशी, छह नवंबर को धनत्रयोदशी, सात नवंबर को मास शिवरात्रि, नरक चतुर्दशी, छोटी दीपावली एवं हनुमान जयंती और आठ नवंबर को दीपावली के अवसर पर रामनगरी में विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम होंगे। दीपोत्सव के दौरान साकेत महाविद्यालय से शोभायात्रा और झांकियां निकाली जाएंगी। इसके लिए ट्रॉली-ट्रक, मंच समेत अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी। रामकथा पार्क के निकट हेलीपैड की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
 

रामकथा पार्क से राम की पैड़ी तक दिखेगी दीपोत्सव की छटा

रामकथा पार्क में श्रीराम-सीता स्वरूप की वंदना, प्रदर्शनी, लोकार्पण कार्यक्रम, रामलीला एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। सरयू आरती स्थल पर मंच, सजावट, पुष्प एवं अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी। राम की पैड़ी समेत प्रमुख स्थलों को दीपोत्सव की थीम पर सजाया जाएगा। स्वर्ग द्वार की पुताई, राम की पैड़ी की विशेष सफाई, धार्मिक स्थलों पर दीप सज्जा, फूलों की चेन, गमले, घाटों की रैलिंग और लाइटिंग की मरम्मत समेत विभिन्न कार्य कराए जाएंगे।

 

श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष जोर

देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए परिवहन, विश्राम स्थल, चिकित्सा, पेयजल, शौचालय, सफाई और प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। भीड़ प्रबंधन के लिए फ्लोटिंग जोन, बैरियर, सीसीटीवी और यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा। मीडिया सेंटर और प्रेस पास की व्यवस्था भी की जाएगी।
 

18 नवंबर को चौदहकोसी, 20 को पंचकोसी परिक्रमा

परिक्रमा एवं कार्तिक पूर्णिमा मेले के लिए भी तैयारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 18 नवंबर 2026 को चौदहकोसी परिक्रमा एवं अक्षय नवमी होगी। परिक्रमा 17/18 नवंबर की रात 1:10 बजे से शुरू होकर 18/19 नवंबर की रात 2:55 बजे तक चलेगी। 20 नवंबर को पंचकोसी परिक्रमा एवं एकादशी होगी। यह 20 नवंबर की रात 3:01 बजे से शुरू होकर 21 नवंबर की रात 2:37 बजे तक चलेगी।‌24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा स्नान एवं गुरु नानक जयंती का आयोजन होगा। स्नान का निर्धारित समय 23 नवंबर की रात 10:48 बजे से 24 नवंबर की रात 8:52 बजे तक रहेगा।

 

अतिरिक्त बसें और विशेष ट्रेनें चलाने की तैयारी

श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त बसों, अस्थायी बस स्टैंड और विशेष ट्रेनों की व्यवस्था के लिए कार्रवाई की जाएगी। रेलवे स्टेशन पर सफाई, पेयजल, प्रकाश और बैरियर की व्यवस्था बेहतर की जाएगी। पार्किंग स्थलों का चयन कर यातायात और भीड़ नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी। पुलिस विभाग पर्याप्त बल के साथ जल पुलिस, मोटर बोट, अग्निशमन दल और ट्रैफिक व्यवस्था संभालेगा। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने कहा कि दीपोत्सव और परिक्रमा-कार्तिक पूर्णिमा मेला अयोध्या की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े प्रमुख आयोजन हैं। श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुगम वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित कार्य समय से पूरा करने के निर्देश दिए।

राजस्व वादों के निस्तारण में लापरवाही पर योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई, 4 तहसीलदार और 1 नायब तहसीलदार निलंबित

राजस्व वादों के निस्तारण में लापरवाही पर योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई, 4 तहसीलदार और 1 नायब तहसीलदार निलंबित

 

योगी सरकार ने प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण में लापरवाही और हीलाहवाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया है। सीएम योगी के निर्देश पर राजस्व परिषद ने  इन पांचों को निलंबित करने के साथ अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। समीक्षा के दौरान सीएम ने अधिकारियों को राजस्व वादों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिये थे। उन्होंने कहा था कि वादों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसी के बाद राजस्व परिषद ने बड़ी कार्रवाई की है।

 

तहसीलदार पवन कुमार, अतुल हर्ष, हरेराम यादव, आनन्द ओझा और नायब तहसीलदार विवेक कुमार पर गिरी गाज

राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की न्यायालयवार और अधिकारीवार गहन समीक्षा की गई। समीक्षा में कई अधिकारियों के स्तर पर लंबित मामलों के निस्तारण की गति संतोषजनक नहीं मिली। शासन की प्राथमिकता के बावजूद मामलों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही सामने आने के बाद परिषद ने चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया है, जिसमें तहसीलदार पवन कुमार सिंह, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार, पट्टी, जनपद प्रतापगढ़ और वर्तमान में तहसीलदार प्रयागराज, तहसीलदार अतुल हर्ष, तहसील बलिया, तहसीलदार हरेराम यादव तत्कालीन नायब तहसीलदार, तहसील धनघटा और वर्तमान में तहसीलदार गोण्डा, तहसीलदार आनन्द ओझा, तहसील खलीलाबाद, संतकबीर नगर तथा नायब तहसीलदार विवेक कुमार सिंह, तहसील सरोजनीनगर, लखनऊ आदि शामिल हैं।

 

लगातार जारी रहेगी कार्रवाई, बर्दाश्त नहीं की जाएगी शिथिलता

राजस्व परिषद सचिव ने बताया कि पांचों अधिकारियों के निलंबन के साथ ही नियमानुसार अनुशासनिक कार्यवाही भी संस्थित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संबंधित प्रकरणों में जिम्मेदारी तय की जाएगी और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित होगी। यह कार्रवाई कोई एकबारगी कदम नहीं है। लंबित राजस्व वादों के निस्तारण की निगरानी लगातार जारी रहेगी। अधिकारियों के कामकाज की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी और जहां भी निर्धारित समय सीमा के भीतर मामलों के निस्तारण में लापरवाही या उदासीनता सामने आएगी, वहां नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। परिषद ने साफ किया है कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी, ताकि प्रदेश के किसानों एवं आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी एवं सुलभ न्याय उपलब्ध हो सके।
 

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ी कार्रवाई, बांदा में एसटीएफ ने एक साथ सबको दबोचा

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ी कार्रवाई, बांदा में एसटीएफ ने एक साथ सबको दबोचा

 

 

योगी सरकार उत्तर प्रदेश में अवैध कोडीन कफ सिरप कारोबार और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में यूपी एसटीएफ ने अंतरराज्यीय स्तर पर अवैध कोडीन कफ सिरप की तस्करी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बांदा जिले में चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ की टीम ने इनके कब्जे से करीब तीन करोड़ रुपये कीमत की 30 हजार शीशियां अवैध कोडीन कफ सिरप बरामद की हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बांदा निवासी धीरेन्द्र कुमार, अतर्रा निवासी प्रवीण कुमार उर्फ लकी और रोहित पांडेय, हापुड़ निवासी शेखर सिंह के रूप में हुई है।

 

बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर घेराबंदी कर पकड़ा गिरोह

एसटीएफ को सूचना मिली थी कि अंतरराज्यीय गिरोह दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ से अवैध कोडीन कफ सिरप की खेप लाकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में सप्लाई कर रहा है। इस पर गुरुवार को एसटीएफ फील्ड इकाई प्रयागराज की टीम बांदा में मौजूद थी। 

 

इसी दौरान सूचना मिली कि कुछ लोग डीसीएम में अवैध कोडीन कफ सिरप लेकर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के रास्ते बिसंडा बाईपास से अतर्रा, बांदा की ओर जाने वाले हैं। टीम ने बिसंडा-अतर्रा मार्ग पर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के उत्तरी गोल चौराहे के पास डीसीएम के आगे चल रही लाल रंग की टाटा नेक्सॉन कार और डीसीएम को रोककर तलाशी ली। तलाशी में दोनों वाहनों से भारी मात्रा में अवैध कोडीन कफ सिरप की शीशियां बरामद हुई और मौके से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

 

मेडिकल स्टोर के बजाय नशे के कारोबार में सप्लाई

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका एक सक्रिय गिरोह है, जो नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली अवैध कोडीन कफ सिरप की तस्करी करता है। गिरोह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में इसकी सप्लाई करता था।

 

वाहन चालक को मिलता था इनाम

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य दिल्ली के द्वारका स्थित एक फार्मा प्रतिष्ठान से सिरप लेकर आते थे फिर बांदा, अतर्रा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में मेडिकल स्टोर के बजाय नशे के कारोबार में इसकी सप्लाई करते थे। गिरोह सिरप की रैपर बदलकर उसे महंगे दामों पर बेचता था। इससे होने वाले फायदे को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। वाहन चालक को खेप सुरक्षित पहुंचाने के बदले अलग से 25 हजार रुपये इनाम दिए जाते थे। 

 

फर्जी जीएसटी बिल से तैयार किए जा रहे थे कागजात

एसटीएफ की पूछताछ में गिरोह के कारोबार का एक और अहम पहलू सामने आया। आरोपियों के अनुसार कोडीन कफ सिरप की सप्लाई और बिक्री से संबंधित जीएसटी इनवॉइस और बिलों में फर्जीवाड़ा कर उन्हें हमीरपुर स्थित एक मेडिकल एजेंसी के नाम से तैयार किया जाता था। दस्तावेजों में ऐसी फर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसे वाणिज्य कर विभाग द्वारा निष्प्रयोज्य/बोगस फर्म घोषित किया जा चुका है। इन कागजात की आड़ में कोडीन सिरप का अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा था।

 

बॉक्स

80 लाख की हेरोइन बरामद, तस्कर गिरफ्तार

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) वाराणसी यूनिट ने सोनभद्र के करमा थाना क्षेत्र से मादक पदार्थ तस्कर हिमांशु गौतम को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से करीब 80 लाख रुपये कीमत की हेरोइन बरामद की गई। आरोपी ने बताया कि वह छोटी पुड़िया बनाकर हेरोइन की सप्लाई करने का काम करता आ रहा है। पुलिस मामले की अन्य पहलुओं पर जांच कर रही है।

नेपाल की आपदा ने नए सिरे से बढ़ाई भारत की चिंता

नेपाल की आपदा ने नए सिरे से बढ़ाई भारत की चिंता

threat after nepal disaster in india

प्रभाकर मणि तिवारी

भारत में खासकर पूर्वी हिमालय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बनने वाली पनबिजली परियोजनाएं, इनके तहत बनने वाले बांध और सुरंगों से पैदा होने वाले खतरे अक्सर सुर्खियां बटोरते रहे हैं। लेकिन अब नेपाल के भयावह हादसे में बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। उनको आशंका है कि जम्मू-कश्मीर के अलावा उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में कभी भी नेपाल जैसे हादसे का खतरा मंडरा रहा है। ALSO READ: जलवायु न्याय की मांग कर रहा है आपदा प्रभावित नेपाल

 

हाल के वर्षों में इन राज्यों में भूस्खलन और सुरंग धंसने की अलग-अलग घटनाओं में कई लोग मारे जा चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद पहाड़ों की कटाई करके ऐसी परियोजनाएं बनाने का काम जारी है। इनमें खासकर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की स्थिति सबसे चिंताजनक है।

 

अरुणाचल का संकट

चीन सरकार अरुणाचल प्रदेश से सटे इलाके में एक विशालकाय बांध बना रही है। बीते साल इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। करीब डेढ़ सौ अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाली इस परियोजना के वर्ष 2033 तक पूरा होने का लक्ष्य है। विशेषज्ञ इसे वाटर बम बताते हैं। लेकिन भूवैज्ञानिकों की असली चिंता इस परियोजना का आकार नहीं बल्कि इसकी लोकेशन है। यह मेडॉग परियोजना उस फॉल्ट जोन के पास स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं। इसकी वजह से यह इलाका भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील है। बीते साल भी तिब्बत के शिगात्से इलाके में रिक्टर स्केल पर 7.1 की तीव्रता वाले एक भूकंप के कारण वहां 120  से ज्यादा लोगों की मौत के अलावा कुछ बांधों को नुकसान पहुंचने की खबरें आई थी।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी परियोजना के तहत बनने वाले बांध को भूकंपरोधी तकनीक से बनाने के बावजूद किसी बड़े भूकंप की स्थिति में जमीन धंसने और चट्टानों के टूटने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे बांध पर तो खास असर नहीं होगा। लेकिन नदी के निचले हिस्से में स्थित भारतीय इलाकों को नेपाल जैसी आपदा झेलनी पड़ सकती है। इससे नदी का बहाव बदल सकता है। इससे पहले भी ऐसी कुछ घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2000 में तिब्बत में एक बांध टूटने से पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बाढ़ आ गई थी। इससे पहले वर्ष 2017 में अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी का पानी अचानक काला पड़ गया था। तब इसके लिए तिब्बत में खनन गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया गया था। यही सियांग नदी असम में प्रवेश करने के बाद ब्रह्मपुत्र कहलाती है।

 

विशेषज्ञों ने चेताया है कि चीनी परियोजना के तहत बनने वाला विशालकाय बांध पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने पर तबाही ला सकता है। ALSO READ: मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

 

भारत की जवाबी रणनीति

इसके असर की काट के लिए भारत सरकार ने भी राज्य के अपर सियांग में 11 हजार मेगावाट क्षमता वाली एक बहुउद्देशीय परियोजना बनाने का फैसला किया है। लेकिन स्थानीय लोग और संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के सामने विस्थापन का खतरा पैदा हो जाएगा। अरुणाचल प्रदेश में आधा दर्जन पनबिजली परियोजनाएं चल रही हैं जबकि करीब तीन दर्जन छोटी-बड़ी परियोजनाओं का काम चल रहा है। इनमें दिबांग, अपर सियांग, लोअर सुबनसिरी और इटालीन जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। राज्य सरकार ने 2025-35 को 'पनबिजली का दशक' घोषित किया है।

 

भूवैज्ञानिकों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में हिमालय की संरचना भी उस नेपाल-तिब्बत सीमा जैसी है जो हाल में प्राकृतिक हादसे का शिकार हुआ है। खासकर इटालीन परियोजना तो भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील इलाके में है। वहां ग्लेशियल झीलों के फटने का खतरा भी बना हुआ है।

 

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने देश भर में ऐसे 195 ग्लेशियल झीलों की पहचान की है जिनके फटने से बाढ़ आने का खतरा है। किसी ग्लेशियर के पिघलने से बनी झील को रोकने वाली बर्फ, चट्टान या मलबे जैसी प्राकृतिक दीवार के अचानक टूटने के बाद आने वाली बाढ़ को 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' या 'ग्लोफ' कहा जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें से 32 झीलें अकेले अरुणाचल में ही हैं।

 

क्या है विशेषज्ञों का आकलन?

पूर्वोत्तर के मशहूर भूवैज्ञानिक डा. प्रमोद चंद्र सरमा डीडब्ल्यू से कहते हैं, “हिमालय प्राकृतिक रूप से एक नाजुक पर्वतीय प्रणाली है।इसका पूर्वी क्षेत्र अभी युवा है। इस इलाके में हमेशा भूकंप, भूस्खलन, हिमस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा बना रहता है। जलवायु परिवर्तन इस खतरे को और बढ़ा रहा है। इसके साथ ही पनबिजली परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर बनने वाले बांधों ने इस जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है।”

 

पर्यावरणविद डीके अपांग डीडब्ल्यू से कहते हैं, “राज्य में प्रस्तावित तमाम बड़ी परियोजनाएं भूकंप के लिहाज बेहद संवेदनशील इलाकों में स्थित हैं। चीनी बांध परियोजना ने प्राकृतिक विपदा के खतरे को काफी बढ़ा दिया है।”

 

सियांग बहुउद्देशीय परियोजना का लंबे समय से विरोध कर रहे सियांग इंडीजीनस फार्म्स फोरम (एसआईएफएफ)  के प्रमुख जेजांग डीडब्ल्यू से कहते हैं, “अपर सियांग इलाका चीनी सीमा से सटा है। इसका निर्माण पूरा होने पर यहां भी नेपाल जैसा हादसा होने का खतरा बढ़ जाएगा।” ALSO READ: हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

 

क्या हैं बचाव के उपाय?

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अर्ली-वार्निंग सिस्टम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि ऐसे हादसे के बारे में समय रहते जानकारी मिल सके। इसके साथ ही इलाके में मौसम और हिमालय की ऊंचाई पर बने ग्लेशियरों और झीलों की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी का तंत्र विकसित करना होगा।

 

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताते हैं, “सरकार अर्ली वार्निंग सिस्टम पर काम कर रही है। पहले चरण में 46 बेहद संवेदनशील बांधों में से 40 में यह प्रणाली लागू की जा चुकी है। चरणबद्ध तरीके से दूसरी परियोजनाओं में भी इसे लागू किया जाएगा।

 

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 में कहा था कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बीते करीब तीन दशकों के दौरान कार्बन का सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाले दो देशों, भारत और चीन के बीच स्थित नेपाल के ग्लेशियरों में जमा बर्फ की मात्रा एक-तिहाई कम हो गई है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि इसे ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है कि भौगोलिक रूप से अस्थिर हिमालयी क्षेत्र में सियांग और उसके जैसे बड़े बांधों का निर्माण उचित है या नहीं?

Top News 4 September: देशभर में जन्माष्टमी की धूम, ISRO का EOS-05 लॉन्च, क्रूड 100 डॉलर के करीब

Top News 4 September: देशभर में जन्माष्टमी की धूम, ISRO का EOS-05 लॉन्च, क्रूड 100 डॉलर के करीब

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Top News 4 September : देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम, इसरों ने अंतरिक्ष में ईओएस-05 उपग्रह प्रक्षेपित किया। इंडियन बास्केट में क्रूड फिर 100 डॉलर के करीब पहुंचा। नेपाल भीषण बाढ़ के बाद भूकंप से थर्राया। अभिजीत दीपके की पीएम मोदी को अनोख चुनौती। 4 सितंबर की बड़ी खबरें :   

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम 

देशभर में जन्माष्‍टमी पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। मथुरा, वृंदावन समेत देशभर के कृष्ण मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़। शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे होने वाले कृष्ण जन्मोत्सव की सभी तैयारियां हो चुकी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दी। ALSO READ: कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

 

इसरो ने अंतरिक्ष में भेजा ईओएस-05 उपग्रह

इसरो ने ईओएस-05 उपग्रह का आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण किया। जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित उपग्रह भारत का पहला अत्याधुनिक भू-तुल्यकालिक इमेजिंग सैटेलाइट है।

 

क्रूड फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब

अमेरिका और ईरान के बीच जंग से तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचती नजर आ रही है। इंडियन बास्केट में आज कच्चे तेल के दाम 99.35 डॉलर प्रति बैरल हो गए। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 91.92 डॉलर प्रति बैरल है। 

 

नेपाल में भूकंप

नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर आपदा के बाद आई विनाशकारी बाढ़ के बीच गुरुवार को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। भूकंप के बाद फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। ALSO READ: Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

 

अभिजीत दीपके की पीएम मोदी को चुनौती

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी शैक्षणिक योग्यता पर उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अनोखी चुनौती दी है। अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई के रिकॉर्ड पर हाल ही में शुरू हुए विवाद के बाद दीपके ने पीएम मोदी से कहा कि चलिए दोनों अपनी-अपनी डिग्री सार्वजनिक करते हैं। ALSO READ: अमेरिका में पढ़ाई पर घिरे अभिजीत दीपके ने PM मोदी को दी चुनौती, जानिए क्या कहा…

कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

कान्हा की नगरी मथुरा इन दिनों पूरी तरह कृष्ण भक्ति में डूबी हुई है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूर्व से पहले शहर की धड़कनों में भक्ति का उल्लास और गहरा होता जा रहा है। मंदिरों की भव्य सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और गलियों-चौराहों पर गूंजते राधे-कृष्णा के जयकारों के बीच आज श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को कृष्णमय कर दिया।

 

शोभायात्रा में ब्रज की लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को मनोहारी छटा दिखाई दी, मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालु और स्थानीय लोग देर तक कलाकारों की प्रस्तुतियों में रमते रहे। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े तो मानो ब्रज की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत सड़कों पर जीवंत हो उठी।

 

ढोल-मृदंग की थाप, लोक वाद्ययंत्रों की मधुर धुन और कलाकारों के मनमोहक नृत्य ने शोभायात्रा में चार चांद लगा दिए। संगीत की लय बढ़ी तो श्रद्धालुओं के कदम भी थिरकने लगे। कोई हाथ उठाकर जयकारे लगा रहा था तो कोई कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच भक्ति में झूमता नजर आया। पूरे मार्ग पर बार-बार 'राधे-राधे' और 'श्रीकृष्ण' के जयघोष गूंजते रहे।

 

सड़कें बनीं ब्रज संस्कृति का मंच

 

श्रीकृष्ण जन्मस्थान से आगे बढ़ी शोभायात्रा के दौरान ब्रज की समृद्ध लोक परंपराओं की विविध झलक देखने को मिली। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों की प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। लोक संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने न केवल श्रद्धालुओं का मनोरंजन किया, बल्कि ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा।

 

जगह-जगह लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। श्रद्धालु कलाकारों की प्रस्तुतियों को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनता दिखाई दिया। भक्ति और संस्कृति के इस मिलन ने शोभायात्रा को महज धार्मिक आयोजन न रहकर ब्रज की जीवंत विरासत का उत्सव बना दिया।

 

जन्माष्टमी के लिए सज रही कृष्ण की नगरी

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मथुरा-वृंदावन में तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। देश-दुनिया से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। प्रमुख मंदिरों, बाजारों और मार्गों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। रात होते ही रंग-बिरंगी रोशनी से नहाए शहर का दृश्य देखते ही बन रहा है।

 

हर तरफ कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर उत्सुकता है, मंदिरों में विशेष आयोजन की तैयारियां चल रही हैं तो बाजार भी श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सजकर तैयार हैं। कृष्ण भक्ति के गीतों और जयकारों से शहर का माहौल लगातार भक्तिमय होता जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन अलर्ट

 

इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वृंदावन पहुंचने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के आगमन और जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

 

प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि जन्माष्टमी के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और पर्व शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।

 

हर ओर बस कृष्ण भक्ति का रंग

 

मथुरा में जन्माष्टमी का उल्लास अब केवल मंदिरों की चौखट तक सीमित नहीं है। शहर की गलियों से लेकर प्रमुख मार्गों तक हर जगह कृष्ण भक्ति की छटा दिखाई दे रही है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकली श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा ने इस उत्साह को नई ऊंचाई दे दी।

 

ब्रज की लोक संस्कृति से सजे कलाकार, ढोल-मृदंग की थाप पर थिरकते श्रद्धालु और गूंजते जयकारों के बीच ऐसा लगा मानो पूरी मथुरा नगरी स्वयं कान्हा के स्वागत में निकल पड़ी हो। जन्माष्टमी से पहले ही कान्हा की नगरी में उत्सव का रंग गहरा हो चुका है, हर ओर भक्ति है, हर कदम पर उल्लास है और हर जुबां पर बस एक ही नाम है..श्रीकृष्णा, श्रीकृष्णा।