मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से की भेंट, ग्लोबल इन्वेस्टर्स सम्मिट 2027 के लिए किया आमंत्रित

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से की भेंट, ग्लोबल इन्वेस्टर्स सम्मिट 2027 के लिए किया आमंत्रित

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर मध्यप्रदेश में जारी विकास कार्यों, जनकल्याणकारी पहलों, उपलब्धियों, निवेश और प्रदेश की प्रगति से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी प्रधानमंत्री को दी।

 

इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अगले साल भोपाल में आयोजित होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रित किया। उन्होंने प्रदेश में निवेश के लिए तैयार किए जा रहे अनुकूल वातावरण, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने प्रदेश में प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के संबंध में भी प्रधानमंत्री को अवगत कराया। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 सितंबर से प्रदेश में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत प्रदेशभर में आयोजित की जा रही विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रधानमंत्री मोदी को दी। उन्होंने अभियान के माध्यम से जनभागीदारी, सेवा और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न आयोजनों के बारे में अवगत कराया ।

अयोध्या में बृजभूषण ने कहा- मैं नहीं लड़ूंगा चुनाव, अखिलेश से रिश्ते पर भी बोल

अयोध्या में बृजभूषण ने कहा- मैं नहीं लड़ूंगा चुनाव, अखिलेश से रिश्ते पर भी बोल

Brijbhushan sharan singh

Brij Bhushan Sharan Singh Ayodhya: पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या मीडिया से बातचीत में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से अपने रिश्तों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया कि अखिलेश यादव से उनके संबंध पूरी तरह व्यक्तिगत हैं और राजनीति से परे हैं। सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव से हमारे व्यक्तिगत स्तर पर बेहतरीन संबंध हैं। हम खुलकर उनकी तारीफ करते हैं और वे भी कभी हमारी बुराई नहीं करते।

 

​दिल्ली से अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचने पर समर्थकों ने बृजभूषण सिंह का जोरदार स्वागत किया। मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने की अटकलों पर विराम लगा दिया और स्पष्ट किया कि वे आगामी चुनावों में हिस्सा नहीं लेंगे। वहीं, जब उनसे राज्यसभा जाने को लेकर सवाल पूछा गया, तो वे पूरी तरह मौन रहे और कोई टिप्पणी नहीं की।

 

​हाल के दिनों में अखिलेश यादव की तारीफों और समाजवादी पार्टी में शामिल होने की कयासबाजियों के बीच पूर्व सांसद का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे अपनी मौजूदा स्थिति से संतुष्ट हैं और चुनावी मैदान में उतरने का फिलहाल कोई इरादा नहीं रखते।

बालाघाट में बच्चों की मौत पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, पीड़ित परिवारों से जमीन पर बैठकर की बात

बालाघाट में बच्चों की मौत पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, पीड़ित परिवारों से जमीन पर बैठकर की बात

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को बालाघाट में हुई बच्चों की मौत के मामले में पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। राहुल गांधी ने परिवारजनों के साथ जमीन पर बैठकर बातचीत की और स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, मुआवजा, मनरेगा तथा वन अधिकार कानून से जुड़े मुद्दों के साथ जमीनी स्थिति की जानकारी ली। 

 

परिवारों से बातचीत के बाद मीडिया से चर्चा में राहुल गांधी ने कहा कि क्षेत्र में बीमारी और कुपोषण के कारण कई बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में सरकार की ओर से स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है।

मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा बहुत बच्चे मरे हैं। मुआवजा तक नहीं मिला है। आधे लोगों को मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। उन्होंने सरकार से वन अधिकार कानून के तहत पात्र लोगों को जमीन के पट्टे देने और मनरेगा को प्रभावी ढंग से संचालित करने की मांग की।

 

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों की जमीन, वन अधिकार और पट्टे से जुड़े मामले हैं तथा अस्पताल और स्कूल जैसी सुविधाओं की जरूरत है। राहुल गांधी ने सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो योजनाओं के तहत पात्रता है तो उसे दोनों योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।

 

राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए प्रदेश में पूरा गर्वेमेंट फैलियर होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष और कांग्रेस पार्टी की ओर से वे इन मुद्दों को उठाएंगे।

 

राहुल गांधी ने कहा वह लोकसभा में पूरा मुद्दा उठाएंगे। उन्होंने काह कि  सिर्फ इनका ही नहीं, सारे के सारे आदिवासियों के साथ जो किया जा रहा है, मैं इसका मुद्दा उठाऊंगा।

 

राहुल गांधी ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि कांग्रेस आदिवासी समुदाय को वनवासी नहीं बल्कि आदिवासी कहती है और उनके अनुसार उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा जमीन पर अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर इन परिवारों की मदद की जाएगी।

 

 

इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखाई दे रही यूपी की ताकत : मुख्यमंत्री योगी

इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखाई दे रही यूपी की ताकत : मुख्यमंत्री योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में उत्तर प्रदेश की ताकत दिखाई दे रही है। यहां उत्तर प्रदेश में निर्मित तमाम उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें गोरखपुर के टेराकोट उत्पाद भी शामिल हैं। रविवार को वहां 1.5 लाख से अधिक लोग आए, सोमवार को भी भारी भीड़ उमड़ी है। इस ट्रेड शो में 90 देशों के खरीदार पहुंचे हैं, जो यूपी की सामर्थ्य दिखाता है। शो में शिल्पकारों के उत्पादों की बिक्री और उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

 

सीएम योगी सोमवार को गोरखपुर में एक मीडिया समूह द्वारा आयोजित बाल मेला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले भी उत्तर प्रदेश के पास सामर्थ्य था, लेकिन नेतृत्व के पास इच्छाशक्ति नहीं थी। इसके परिणामस्वरूप यूपी बीमारू और बदनाम प्रदेश बनकर रह गया था। इसे देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता था। किंतु, बीते साढ़े नौ सालों में सम-विषम परिस्थितियों में नेतृत्व के जूझने और अनथक प्रयास का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज बीमारू की छवि से उबरकर देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है।

चुनौतियों से जूझकर किए हर क्षेत्र में रिफॉर्म

मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में कई चुनैतियां थीं। बाहर के लोग यूपी का नाम सुनकर चौंकते थे। पहचान का संकट ऐसा था कि युवाओं के लिए राज्य, देश या विदेश में नौकरी नहीं थी। कर्फ्यू-दंगे प्रदेश की नियति बन गए थे। पुलिस में दो लाख पद खाली थे तो कानून व्यवस्था कैसे ठीक रहती। सरकार में आने के बाद हमने हर क्षेत्र में रिफॉर्म किए। युवाओं के हित में सरकार ने न केवल भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया, बल्कि प्रशिक्षण और इससे जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी आगे बढ़ाया। साढ़े नौ सालों में प्रदेश सरकार ने शुचिता व पारदर्शिता के साथ 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। इसमें अकेले यूपी पुलिस में 2 लाख 30 हजार नौकरियां दी गईं। 

कर्फ्यू-दंगे से मुक्त होकर तेजी से बढ़ी अर्थव्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय में भी तीन गुना वृद्धि हुई है। कभी बीमारू के तमगे वाला प्रदेश अब देश की टॉप-थ्री इकॉनमी में है। कर्फ्यू-दंगे से मुक्त होने के बाद यूपी तेज प्रगति की वजह से देश की अर्थव्यवस्था और प्रगति का ग्रोथ इंजन कहला रहा है। यूपी वही है, लेकिन प्रयास से परिणाम की यात्रा में बदलाव हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा। 2017  से पहले राज्य में सिर्फ 130 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 24 हजार से अधिक हो चुकी है। 

कविता सुनाकर बोले सीएम- प्रयास से ही मिलेगी मंजिल

समारोह में विद्यार्थियों को शिक्षक व अभिभावक की तरह समझाते हुए सीएम योगी ने कहा कि किसी प्रतियोगिता में पदक जीतने से पहले सबसे महत्वपूर्ण प्रतिभाग करना है। उन्होंने महान कवि सोहनलाल द्विवेदी की कविता, ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’ सुनाते हुए कहा कि सबसे जरूरी है प्रयास करना, क्योंकि प्रयास ही मंजिल तक पहुंचाएगा। मुख्यमंत्री ने बच्चों को प्रेरित करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का भी उदाहरण दिया। कहा कि डॉ. कलाम फाइटर पायलट बनना चाहते थे, लेकिन फेल होने पर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। परिवार में कम साधन होने के बावजूद वह भारत के मिसाइल मैन बने। राष्ट्रपति बनने के पहले उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न मिला। सीएम ने विद्यार्थियों को सीख दी कि वे अपने हौसलों को कभी कमजोर न होने दें। जो ठान लेता है, वही करके भी दिखाता है। इसलिए जीवन में कभी हिम्मत नहीं हारना है। 

500 खिलाड़ियों के लिए सीधी भर्ती अगले सप्ताह से

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को खेल क्षेत्र में भी बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा, तकनीक, स्टार्टअप के साथ ही खेलों को भी बढ़ावा दे रही है। ओलंपिक, एशियाड, कामनवेल्थ गेम्स में पदक विजेता को खूब नकद पुरस्कार देने साथ ही उन्हें सीधे सरकारी नौकरी दी जा रही है। अब तक 550 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई है। अगले सप्ताह 500 और खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी की सीधी भर्ती शुरू होगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सभी उपस्थितजन को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, यातायात नियमों के पालन और नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा शर्मा कौशिक, दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओपी सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

राष्ट्रधर्म, शिक्षा और लोक कल्याण को आजीवन समर्पित रहे महंत दिग्विजयनाथ

राष्ट्रधर्म, शिक्षा और लोक कल्याण को आजीवन समर्पित रहे महंत दिग्विजयनाथ

राष्ट्रीयता, कृतज्ञता, सांस्कृतिक स्वाभिमान और गुरु-परंपरा के प्रति अटूट निष्ठा की संवाहक गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पितरों (पूर्वजों) की स्मृति में अध्यात्म और राष्ट्रचेतना के स्वर गूंज रहे हैं। अवसर है युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का।

 

गोरक्षपीठ में 23 सितंबर से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा एवं 24 सितंबर से समसामयिक विषयों पर सम्मेलन जारी है। इसी क्रम में आश्विन कृष्ण तृतीया (मंगलवार, 29 सितंबर) को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं पुण्यतिथि पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में विशाल श्रद्धांजलि सभा गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में आयोजित होगी, जिसमें देशभर के अनेकानेक संतजन उपस्थित रहेंगे।

 

आजीवन और स्मृतिशेष होकर भी अपने विचारों, संकल्पों और कार्यों से भावी पीढ़ी का मार्गदर्शन करने वाले, 1935 से 1969 तक नाथपंथ की विश्वविख्यात गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर रहे महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज को इतिहास ‘युगपुरुष’ के रूप में स्मरण करता है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज न केवल गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी रहे, बल्कि उनका पूरा जीवन राष्ट्र, धर्म, अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा व समाजसेवा के जरिये लोक कल्याण को समर्पित रहा। तरुणाई से ही वह देश की आजादी की लड़ाई में जोरदार भागीदारी निभाते रहे तो देश के स्वतंत्र होने के बाद सामाजिक एकता और उत्थान के लिए। इसके लिए शैक्षिक जागरण पर उनका सर्वाधिक जोर रहा।

मेवाड़ में जन्मे थे महंत दिग्विजयनाथ 

महंत दिग्विजयनाथ का जन्म वर्ष 1894 में वैशाख पूर्णिमा के दिन चित्तौड़, मेवाड़ ठिकाना ककरहवां (राजस्थान) में हुआ था। उनके बचपन का नाम नान्हू सिंह था। पांच वर्ष की उम्र में 1899 में इनका आगमन गोरखपुर की गोरक्षपीठ में हुआ। अपनी जन्मभूमि मेवाड़ की माटी का प्रभाव था कि बचपन से ही उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वाभिमान से समझौता न करने की प्रवृत्ति कूट-कूटकर भरी हुई थी। उनकी शिक्षा गोरखपुर में ही हुई और उन्हें खेलों से भी गहरा लगाव था। 15 अगस्त 1933 को गोरखनाथ मंदिर में उनकी योग दीक्षा हुई और 15 अगस्त 1935 को वह गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर बने। वह अपने जीवन के तरुणकाल से ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेते रहे। देश को स्वतंत्र देखने का उनका जुनून था कि उन्होंने 1920 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन के समर्थन में स्कूल छोड़ दिया। ब्रिटिश हुकूमत की तरफ से उन पर लगातार आरोप लगते थे कि वह क्रांतिकारियों को संरक्षण और सहयोग देते हैं। 1922 के चौरीचौरा के घटनाक्रम में भी उनका नाम आया लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता के सामने ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा और उन्हें रिहा कर दिया गया।

श्रीराम मंदिर आंदोलन में नींव के पत्थर हैं ब्रह्मलीन महंतश्री

अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण को लेकर हुए आंदोलनों में गोरक्षपीठ की महती भूमिका को सभी जानते हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज इस आंदोलन में नींव के पत्थर हैं। 1934 से 1949 तक उन्होंने लगातार अभियान चलाकर आंदोलन को न केवल नई ऊंचाई दी, बल्कि 1949 में वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के नेतृत्वकर्ता भी रहे। 22-23 दिसंबर 1949 को अयोध्या में भगवान रामलला की मूर्ति प्रकट होने के नौ दिन पहले महंत दिग्विजयनाथ जी के नेतृत्व में अखंड रामायण पाठ का आयोजन शुरू हो गया था।

 

रामलला के प्रकट होने के समय महंत जी स्वयं वहां उपस्थित थे। पांच सौ वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम अपनी जन्मभूमि स्थित मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। प्रभु रामलला के मंदिर निर्माण के लिए चले आंदोलन को उनके बाद उनके शिष्य महंत अवेद्यनाथ जी ने निर्णायक बनाया। एक सुखद संयोग यह भी है कि न्यायालय के निर्णय के बाद मंदिर निर्माण की जब शुभ घड़ी आई तब राज्य की सत्ता का नेतृत्व भी गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। ऐसे में जब भी अयोध्या के श्रीराम मंदिर का जिक्र होगा तो वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी स्वत: सबको स्मरण होंगे। 

शिक्षा की जलाई ज्योति से प्रकाशित हो रहा पूर्वांचल

महंत दिग्विजयनाथ जी ने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए शिक्षा की जो ज्योति जलाई, उससे आज पूरा पूर्वांचल प्रकाशित हो रहा है। शिक्षा क्रांति के लिए उन्होंने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। एक किराए के मकान में परिषद के अंतर्गत महाराणा प्रताप क्षत्रिय स्कूल शुरू हुआ। 1935 में इसे जूनियर हाईस्कूल की मान्यता मिली और 1936 में हाईस्कूल की भी पढाई शुरू हुई। नाम ‘महाराणा प्रताप हाई स्कूल’ हो गया। इसी बीच महंत दिग्विजयनाथ जी के प्रयास से गोरखपुर के सिविल लाइंस में पांच एकड भूमि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को प्राप्त हो गयी और महाराणा प्रताप हाईस्कूल का केंद्र सिविल लाइंस हो गया तथा देश के आजाद होते समय यह विद्यालय महाराणा प्रताप इंटरमीडिएट कालेज के रुप में प्रतिष्ठित हुआ। 1949-50 में इसी परिसर में महाराणा प्रताप डिग्री कालेज की स्थापना महंतश्री के नेतृत्व में हुई।

 

शिक्षा को लेकर उनकी सोच दूरदर्शी और निजी हित से परे थी। यही वजह थी कि उन्होंने 1958 में अपनी दो संस्थाओं महाराणा प्रताप डिग्री कालेज व महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय को गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु दान में दिया। बाद में परिषद की तरफ से उनकी स्मृति में महंत दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना की गई। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा वर्तमान में चार दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थाएं गोरखपुर क्षेत्र में संचालित हो रही हैं। इनमें प्राथमिक शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा तक के प्रकल्प सम्मिलित हैं।

राजनीति को भी लोक कल्याण का ध्येय माना

महंत दिग्विजयनाथ जी ने राजनीति में भी गोरक्षपीठ की लोक कल्याण की परंपरा को ही ध्येय बनाया। 1937 में हिंदू महासभा में शामिल होकर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की विधिवत शुरुआत की। महंत जी ने 1944 में हिंदू महासभा के प्रांतीय अधिवेशन का ऐतिहासिक आयोजन गोरखपुर में कराया। महासभा के राजनीतिज्ञ होने के कारण 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के मिथ्यारोप में उन्हें बंदी बना लिया गया, लेकिन सरकार को उन्हें 1949 में दस माह बाद ससम्मान बरी करना पड़ा। राष्ट्रहित में उन्होंने 1956 में पृथक पंजाबी राज्य के लिए मास्टर तारा सिंह के आमरण अनशन को सूझबूझ से समाप्त कराया।

 

वह 1961 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष (हिंदू राष्ट्रपति के रूप में) निर्वाचित हुए। धर्म व सामाजिक एकता के क्षेत्र में भी उनका योगदान अतुलनीय है। 1939 में अखिल भारतीय अवधूत भेष बारहपंथ योगी महासभा की स्थापना कर पूरे देश के संत समाज को लोक कल्याण व राष्ट्रहित में एकजुट करने के लिए भी उन्हें याद किया जाता है। 1960 में हरिद्वार में अखिल भारतीय षडदर्शन सभा सम्मेलन की अध्यक्षता, 1961 में दिल्ली में अखिल भारतीय हिंदू सम्मेलन का आयोजन व 1965 में दिल्ली में अखिल विश्व हिंदू सम्मेलन का आयोजन भी उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल है। 1967 में गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए महंतजी 1969 में ब्रह्मलीन हुए, लेकिन उनके व्यक्तित्व व कृतित्व की अमरता अहर्निश बनी हुई है। इन महातपस्वी के आदर्श, शिक्षा संस्थान और राष्ट्रीय दृष्टि आज भी समाज को गति और दिशा प्रदान कर रहे हैं।

 

सीएम योगी ने पीड़ित परिवारों का साझा किया दुख, मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सौंपी आर्थिक सहायता

सीएम योगी ने पीड़ित परिवारों का साझा किया दुख, मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सौंपी आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलग-अलग कारणों से अपने प्रियजन को खोने वाले दो परिवारों से बुधवार को मुलाकात की। सांत्वना देकर उनका दुख साझा किया और आर्थिक सहायता का संबल प्रदान किया। उन्होंने दोनों परिवारों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता का चेक सौंपा। 

 

बुधवार को गोरखपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के बैठक कक्ष में पिपराइच विधानसभा क्षेत्र के दो परिवारों से मिले। इनमें से एक परिवार के सदस्य, औरंगाबाद गांव के आदित्य प्रजापति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। जबकि दूसरे परिवार में मुन्नी देवी के पति का कैंसर से निधन हो गया था। सीएम योगी ने दोनों परिवारों को ढांढस बंधाया और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई।

वैष्णो देवी में 550 करोड़ के ‘नकली चांदी’ चढ़ावे की जांच जारी, 10 अक्टूबर को अगली सुनवाई

वैष्णो देवी में 550 करोड़ के ‘नकली चांदी’ चढ़ावे की जांच जारी, 10 अक्टूबर को अगली सुनवाई

Vaishno Devi Temple fake silver Scam

माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित ‘नकली चांदी’ के आरोप ने अब 550 करोड़ रुपये के चढ़ावे की पारदर्शिता और उसके रखरखाव की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 20 टन चांदी बताए जा रहे इस चढ़ावे की जांच में पुलिस को 116 पन्नों के सरकारी रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, लेकिन मामले की तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है। ALSO READ: भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा

श्राइन बोर्ड के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बयान अब भी दर्ज होना बाकी हैं। अदालत ने जांच पूरी करने के लिए पुलिस को और समय देते हुए अगली सुनवाई 10 अक्टूबर तय की है।

 

मामले की ताजा स्थिति यह है कि पुलिस ने अदालत को बताया है कि उसे चढ़ावे के संग्रह, छंटाई, भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण से जुड़े 116 पन्नों के सरकारी रिकॉर्ड, पर्याप्त सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिल चुके हैं। इनकी जांच और आपसी मिलान किया जा रहा है। हालांकि, श्राइन बोर्ड के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बयान अभी दर्ज नहीं किए गए हैं, जिन्हें पुलिस ने व्यापक जांच के लिए जरूरी बताया है।

 

पुलिस के अनुसार श्राइन के पुजारियों, बोर्ड अधिकारियों, भवन में तैनात सीआरपीएफ कर्मियों, जम्मू कश्मीर पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े बयान और कुछ अहम रिकॉर्ड अभी जांच के दायरे में हैं। गौरतलब है कि शिकायत को चार महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज किए जाने की पुष्टि अदालत में दाखिल स्थिति रिपोर्ट में नहीं है। ALSO READ: आजमगढ़ में महामृत्युंजय जाप के दौरान पत्नी-बेटे और 2 पंडितों को गोलियों से भूना, एनकाउंटर में ढेर

 

विवाद के केंद्र में करीब 20 टन ‘सफेद धातु’ है, जिसे चांदी का चढ़ावा बताया गया। हालांकि, चांदी की वास्तविक शुद्धता और कथित वित्तीय नुकसान से जुड़े दावों को अभी जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। अदालत ने दस्तावेजों, सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत पड़ताल पूरी करने के लिए पुलिस को समय दिया है। अब 10 अक्टूबर की सुनवाई में जांच की प्रगति पर नजर रहेगी।

विश्व के पहले हिन्दी पोर्टल वेबदुनिया के 27 वर्ष पूर्ण, CM मोहन यादव समेत अन्य मंत्रियों ने दी बधाई

विश्व के पहले हिन्दी पोर्टल वेबदुनिया के 27 वर्ष पूर्ण, CM मोहन यादव समेत अन्य मंत्रियों ने दी बधाई

Webdunia Hindi 27 Years

Webdunia Hindi 27 Years: डिजिटल क्रांति के दौर में हिन्दी को उसकी असली पहचान दिलाने वाले ‘वेबदुनिया’ ने आज (23 सितंबर, 2026) को अपनी यात्रा के 27 सुनहरे साल पूर्ण कर लिए हैं। विश्व के पहले हिन्दी न्यूज पोर्टल की इस अनवरत यात्रा पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों और पक्ष-विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बधाई और  शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। अपने बधाई संदेशों में नेताओं ने कहा कि वेबदुनिया केवल एक वेब पोर्टल नहीं, बल्कि पिछले ढाई दशकों से डिजिटल दुनिया में हिन्दी भाषा की अस्मिता, संस्कृति और करोड़ों हिन्दी प्रेमियों की ‘बुलंद आवाज़’ का नाम है।

 

मध्यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में कहा कि हिन्दी सहित 7 अन्य भारतीय भाषाओं में करोड़ों पाठकों की आवाज बनने की यह यात्रा सराहनीय है। आपकी राष्ट्र समर्पित पत्रकारिता निरंतर जारी रहे, यही मंगल कामना है। 

मप्र भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- मध्य प्रदेश से शुरू हुई वेबदुनिया की यात्रा ने हिन्दी समाचारों को डिजिटल माध्यम से देश दुनिया के पाठकों तक पहुंचाया है।

मध्य प्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के मंत्री विश्वास सारंग ने भी वेबदुनिया के स्थापना दिवस पर बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। 

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मप्र, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा OBC मोर्चा एवं भोपाल की पूर्व महापौर  कृष्णा गौर ने लिखा- डिजिटल दौर में हिन्दी पत्रकारिता को सशक्त स्वर देने वाले वेबदुनिया के स्थापना दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री (मध्यप्रदेश शासन) नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने लिखा- 

भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा

भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Abhijit Deepke on CEC Gyanesh Kumar: चुनाव आयोग में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर आए मतभेदों के दावों के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘भारत का दुश्मन’ तक करार दे दिया है। वहीं, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और सपा समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

 

दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों— डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया पर कुल 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें दरकिनार कर फैसले लागू कर दिए गए। इस बीच, रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने सीईसी ज्ञानेश पर सीधा हमला बोला। ALSO READ: क्यों भड़के CJP नेता आशुतोष रांका? कहा- बंद कर देनी चाहिए चुनाव प्रक्रिया

 

सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए दीपके ने लिखा- ज्ञानेश कुमार भारत के दुश्मन हैं। कथित तौर पर 12 करोड़ से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जो 2024 लोकसभा चुनाव के कुल 97 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं का 12.4% है। एनडीए और विपक्ष के बीच महज 2% का अंतर है। ज्ञानेश कुमार चुनाव करा नहीं रहे, बल्कि उसकी पटकथा लिख रहे हैं। उन्होंने एसआईआर (SIR) का नया अर्थ निकालते हुए इसे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिगिंग’ करार दिया। ALSO READ: NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

लोकतंत्र बर्बाद करने वालों में दर्ज होगा नाम

सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने भी सीईसी पर हमला बोलते हुए कहा कि जब देश का इतिहास लिखा जाएगा, तो लोकतंत्र को बर्बाद करने वालों की सूची में ज्ञानेश कुमार का सबसे ऊपर होगा। उन्होंने दीपके की पोस्ट को शेयर करते हुए दोहराया कि ज्ञानेश कुमार को ‘भारत का दुश्मन’ कहने में किसी को संकोच नहीं होना चाहिए।

 

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। आप के दिल्ली प्रदेश संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सभी विपक्षी दलों से चुनाव आयोग के मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा- बाकी सभी मुद्दे बाद में हैं, सबसे पहले सभी विपक्षी दलों को चुनाव आयोग से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को उठाना चाहिए और आयोग को व्यवस्थित करने पर ध्यान देना चाहिए।

फेल छात्रों की खुलेगी किस्मत! गुजरात बोर्ड ने उठाया बड़ा कदम, नवंबर-दिसंबर में होगी विशेष परीक्षा

फेल छात्रों की खुलेगी किस्मत! गुजरात बोर्ड ने उठाया बड़ा कदम, नवंबर-दिसंबर में होगी विशेष परीक्षा

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गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GSEB) ने कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। जो छात्र नियमित रूप से किसी स्कूल में पढ़ाई नहीं करते हैं या बोर्ड परीक्षा में तीन से अधिक विषयों में असफल रहे हैं, उन्हें फिर से परीक्षा देने का विशेष अवसर देने का निर्णय लिया गया है। ऐसे छात्रों के भविष्य को सुधारने के लिए बोर्ड द्वारा पहली बार ‘स्टेट ओपन स्कूल’ की विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी। ALSO READ: गुजरात सरकार की अटल सुशासन पुरस्कार योजना, अधिकारियों को मिलेगा सम्मान

 

नवंबर-दिसंबर में नेशनल ओपन स्कूल की तर्ज पर परीक्षा का आयोजन

बोर्ड द्वारा यह विशेष परीक्षा नवंबर-दिसंबर महीने के दौरान आयोजित की जाएगी। देश में चल रही ‘नेशनल ओपन स्कूल’ (NIOS) व्यवस्था की तर्ज पर ही अब गुजरात राज्य में भी ‘स्टेट ओपन स्कूल’ के तहत छात्रों को परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। इस नई व्यवस्था से राज्य के हजारों छात्र, जो मुख्यधारा की शिक्षा से वंचित रह गए थे, उन्हें आगे बढ़ने का मार्ग मिलेगा।

 

फॉर्म भरने के लिए 6 अक्टूबर तक का समय   

स्टेट ओपन स्कूल की परीक्षा देने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक सभी छात्रों को आगामी 6 अक्टूबर तक अपने नजदीकी स्कूल से फॉर्म भरकर जमा करना होगा। इसके लिए छात्रों को शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित नियमित प्रक्रिया और दिशानिर्देशों के अनुसार आवेदन करना होगा। ALSO READ: भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में Ease of Doing Business पर जोर, Single Window व्यवस्था से निवेश को आसान बनाने की कोशिश

 

गैर-स्कूली और अधिक विषयों में असफल छात्रों को मिलेगा लाभ

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन छात्रों को होगा जो वर्तमान में किसी भी स्कूल में नियमित पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा कक्षा 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 3 से अधिक विषयों में फेल हुए छात्रों को भी इसके माध्यम से दोबारा परीक्षा देने का सुनहरा मौका मिलेगा। इस फैसले से पहले परिणाम में असफल रहे छात्र पढ़ाई छोड़ने के बजाय दोबारा मेहनत कर सकेंगे।
 

 

शैक्षणिक वर्ष को बर्बाद होने से बचाने का सराहनीय प्रयास

गुजरात बोर्ड के इस फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना और असफल होने के कारण उनका एक पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो, यह सुनिश्चित करना है। स्टेट ओपन स्कूल व्यवस्था शुरू होने से नियमित स्कूल में पढ़ाई न कर पाने वाले या पिछली परीक्षा में असफल रहे छात्रों के लिए शिक्षा प्रणाली में एक सक्षम वैकल्पिक मार्ग तैयार हुआ है।

 

स्टेट ओपन स्कूल परीक्षा के लिए पात्र उम्मीदवार   

 

बोर्ड द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार इस विशेष परीक्षा का लाभ मुख्य रूप से चार श्रेणियों के छात्रों को मिलेगा: 

  • कक्षा 10वीं और 12वीं के ओपन स्कूल के छात्र।   
  • वर्तमान में किसी भी स्कूल में नियमित पढ़ाई न करने वाले छात्र।
  • बोर्ड की मुख्य परीक्षा में 3 या उससे अधिक विषयों में असफल (फेल) छात्र।
  • बोर्ड की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समयावधि में पंजीकरण (Registration) कराने वाले सभी छात्र।