देहरादून में स्वाइन फ्लू और कोरोना का बढ़ता कहर, H1N1 के 105 मामले, 5 मरीजों की मौत

देहरादून में स्वाइन फ्लू और कोरोना का बढ़ता कहर, H1N1 के 105 मामले, 5 मरीजों की मौत

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्वाइन फ्लू (Influenza H1N1) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जिले में सोमवार को 24 नए स्वाइन फ्लू के मामले सामने आए। इसके साथ ही कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 105 हो गई है। अब तक इस संक्रमण से 5 मरीजों की मौत हो चुकी है।

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खबरों के मुताबिक स्वाइन फ्लू के साथ-साथ कोरोनावायरस (Covid-19) के नए मामले भी सामने आ रहे हैं। रविवार को एम्स ऋषिकेश में 1 और श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में 2 नए कोविड मामले दर्ज किए गए। देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में सामने आए कुल 105 मामलों में 71 मरीज देहरादून जिले के, जबकि 34 मरीज दूसरे राज्यों और जिलों से हैं।

 

देहरादून में 36 एक्टिव केस

 

सीएमओ के मुताबिक, सोमवार को सामने आए 24 नए मामलों में 16 देहरादून और 8 अन्य राज्यों व जिलों से हैं। फिलहाल जिले में 36 एक्टिव केस हैं।

 

इनमें से 22 मरीज श्री महंत इंदिरेश अस्पताल, 7 मरीज एम्स ऋषिकेश, 4 मरीज हिमालयन अस्पताल, 1 मरीज कैलाश अस्पताल, 1 मरीज राजकीय दून मेडिकल कॉलेज (GDMC) अस्पताल और 1 मरीज ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती है।

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3-4 दिन से बुखार तो तुरंत कराएं जांच

 

डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को तीन से चार दिनों तक लगातार बुखार रहता है और इसके साथ सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी होती है, तो उसे तुरंत स्वाइन फ्लू की जांच करानी चाहिए।

 

उन्होंने लोगों से संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है।

 

कोरोना के मामलों पर भी नजर

 

देहरादून में स्वाइन फ्लू के साथ कोरोना संक्रमण के मामलों को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। विभाग की ओर से स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति पर नजर बनाए रखी जा रही है।

कागजों में भगाए बंदर! राजस्थान संपर्क पोर्टल पर समस्या का ‘फर्जी समाधान’

कागजों में भगाए बंदर! राजस्थान संपर्क पोर्टल पर समस्या का 'फर्जी समाधान'

राजस्थान सरकार का 'संपर्क पोर्टल', जिसका मकसद जनता की समस्याओं का पारदर्शी और त्वरित समाधान करना है, चौमूं में प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो गया है। चौमू की कई कालोनियों में बंदरों का आतंक है। इसी संदर्भ में एक नागरिक ने जब पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, तो उसे धरातल पर हल करने के बजाय अधिकारियों ने फर्जीवाड़ा कर कागजों में ही 'निस्तारित' दिखा दिया। हद तो तब हो गई जब समाधान पत्र पर ऐसे अधिकारी के नाम का लेटर अपलोड कर दिया गया, जो काफी समय पहले ही तबादला हो चुका है। 

 

दरअसल, चौमूं नगर परिषद क्षेत्र के अशोक विहार कॉलोनी निवासी रमेश कुमार रावत ने 25 अगस्त को बंदरों के बढ़ते आतंक से राहत पाने के लिए राजस्थान संपर्क पोर्टल पर परिवाद दर्ज कराया था। लेकिन समस्या दूर होना तो दूर, पोर्टल के कार्यशैली ने प्रशासनिक ढिलाई की पोल खोल कर रख दी। ALSO READ: चोमू शहर में बंदरों का आतंक! लोगों में दहशत, एक साल से फाइल में दबा ज्ञापन, राहत का इंतजार

एक ही दिन में बिना कार्रवाई कागजी समाधान

शिकायत दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर ही पोर्टल पर दावा कर दिया गया कि समस्या का निवारण कर राहत प्रदान कर दी गई है। इसके प्रमाण के तौर पर पोर्टल पर दिलीप कुमार शर्मा (आयुक्त) के नाम से एक पत्र भी अपलोड कर दिया गया। मजेदार बात यह है कि दिलीप कुमार शर्मा लंबे समय से चौमूं नगर परिषद के आयुक्त हैं ही नहीं। वर्तमान में इस पद पर रामकिशोर मेहता कार्यरत हैं। इससे पहले ममता नागर महज एक दिन के लिए नियुक्त हुई थीं और फिर तबादला होने पर चली गई थीं। ऐसे में पदमुक्त अधिकारी के नाम का लेटर अपलोड होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

असंतोष जताया तो उपनिदेशक को भेजा मामला

पोर्टल की ओर से जब परिवादी रमेश रावत के पास कॉल और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए फीडबैक लिया गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से असंतुष्टि जताते हुए कहा कि बंदरों का आतंक ज्यों का त्यों बना हुआ है। शिकायतकर्ता की आपत्ति के बाद, 26 अगस्त को पोर्टल के डेटा एंट्री ऑपरेटर (सिटीजन कांटेक्ट सेंटर) ने मामला वापस नगर परिषद आयुक्त को भेजा। इसके बावजूद तय समय सीमा में कार्रवाई न होने पर 29 अगस्त को परिवाद को उच्च स्तर पर उपनिदेशक (जयपुर, स्वायत्त शासन) को प्रेषित कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री की मंशा पर फिर रहा पानी

परिवादी रमेश कुमार रावत का कहना है कि राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जहां एक ओर संपर्क पोर्टल के जरिए आमजन से सीधा संवाद कर राहत पहुंचाना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी बिना धरातल पर काम किए फर्जी निवारण पत्र अपलोड कर रहे हैं। इस तरह की गलतियां न केवल मुख्यमंत्री की मंशा पर पानी फेर रही हैं, बल्कि सरकारी पोर्टल की विश्वसनीयता और जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ भी हैं।

 

स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि ऐसे गलत दस्तावेज अपलोड करने वाले दोषी कर्मचारियों और लापरवाह अधिकारियों पर उच्चाधिकारी तुरंत सख्त कार्रवाई करें, ताकि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके।

रामलला से धोखा! चेन्नई की महिला ने 4 करोड़ का दिया था चेक, खाते में सिर्फ 3 रुपए

रामलला से धोखा! चेन्नई की महिला ने 4 करोड़ का दिया था चेक, खाते में सिर्फ 3 रुपए

Ayodhya Ram Mandir fraud: तमिलनाडु के चेन्नई की एक महिला श्रद्धालु ने हाल ही में अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 4 करोड़ रुपए का चेक सौंपा था। महिला की इच्छा थी कि इस राशि का उपयोग विशेष रूप से मंदिर परिसर में तैनात कर्मचारियों की सुविधाओं पर ही किया जाए। इसके लिए उन्होंने ट्रस्ट से एक लिखित आश्वासन की भी मांग की थी। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया था। इसके अलावा महिला ने राम मंदिर के लिए 10 हजार रुपए का अलग से भी दान दिया था।

​खाते में राशि न होने से चेक बाउंस

जब ट्रस्ट ने 4 करोड़ रुपए का यह चेक बैंक में जमा कराया, तो बैंक जांच में महिला के खाते में केवल 3 रुपए ही जमा पाए गए। पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। अब नियमानुसार बैंक महिला को नोटिस भेजकर इतनी बड़ी रकम का फर्जी/अनादरित चेक जारी करने पर जवाब तलब करेगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

 

​क्या है पूरा मामला?

  • चेन्नई की महिला श्रद्धालु ने राम मंदिर कर्मियों के लिए 4 करोड़ रुपए का चेक दिया था। 
  • ​क्लियरिंग के दौरान उसके खाते में महज 3 रुपए की राशि पाई गई।
  • महिला ने राशि को केवल कर्मचारी कल्याण में खर्च करने का लिखित आश्वासन मांगा था।
  • बैंक नोटिस की तैयारी में है, वहीं ट्रस्ट भी बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है।

​इससे पहले भी बाउंस हुए हैं चेक

2020 के निधि समर्पण अभियान के दौरान भी लगभग 100 करोड़ रुपए के चेक बाउंस हुए थे, जिनमें से अधिकांश की बाद में रिकवरी कर ली गई थी। गौरतलब है कि रामलला मंदिर को हर महीने नकद, चेक और ऑनलाइन माध्यमों से करीब 3 से 4 करोड़ रुपये का दान प्राप्त होता है, जिसमें से लगभग 1 से 1.5 करोड़ रुपए सिर्फ चेक के जरिए आते हैं। 4 करोड़ रुपए के इस चेक बाउंस मामले के बाद अब ट्रस्ट और बैंक प्रशासन बड़ी रकम वाले चेक स्वीकार करने और उनकी क्लियरिंग प्रक्रिया में विशेष सतर्कता बरतने की तैयारी कर रहे हैं।

यूपी की ऐतिहासिक छलांग, जेम पर 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की खरीद

यूपी की ऐतिहासिक छलांग, जेम पर 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की खरीद

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Yogi Adityanath government: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक खरीद व्यवस्था में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) पर वर्ष 2017 में इसकी स्थापना से अब तक ₹1 लाख करोड़ (₹1 ट्रिलियन) से अधिक की खरीद दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है। देश के सभी राज्यों द्वारा जेम के माध्यम से की गई कुल खरीद में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक है। यह उपलब्धि प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस, ट्रांसपेरेंसी, एफिशियंसी और इन्क्लूसिव पब्लिक प्रोक्योरमेंट को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से यूपी का सम्मान

उत्तर प्रदेश की इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जेम के 10वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश को सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए तीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश को मिले पुरस्कारों में- जेम ओवरऑल एक्सीलेंस अवार्ड, हाईएस्ट जेम प्रोक्योरमेंट वैल्यू और बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड शामिल हैं। इन पुरस्कारों को उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव शशिभूषण लाल सुशील ने प्राप्त किया।

योगी सरकार के सुशासन मॉडल की बड़ी उपलब्धि

उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि केवल सरकारी खरीद के आंकड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे योगी सरकार के गुड गवर्नेंस और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल की महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है। जेम के व्यापक उपयोग से सरकारी विभागों की खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी, सरल और जवाबदेह बनाने में मदद मिली है। सरकारी खरीद में डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल से पारंपरिक प्रक्रियाओं में होने वाली जटिलताओं को कम करने, अधिक विक्रेताओं को प्रतिस्पर्धा का अवसर देने और सरकारी संस्थानों को बेहतर कीमत पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।

₹1 लाख करोड़ की खरीद ‘वैल्यू फॉर मनी’

जेम पर ₹1 लाख करोड़ से अधिक की खरीद यह दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों ने डिजिटल खरीद व्यवस्था को बड़े पैमाने पर अपनाया है। इसके माध्यम से खरीद प्रक्रिया में ट्रांसपेरेंसी, कम्पीटीशन, एफिशियंसी और ‘वैल्यू फॉर मनी’ को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। योगी सरकार की नीति के अनुरूप सरकारी खरीद को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के साथ-साथ छोटे और स्थानीय कारोबारियों को भी सरकारी बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

एमएसएमई, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को मिले अवसर

जेम के माध्यम से उत्तर प्रदेश ने सरकारी खरीद को केवल बड़े कारोबारियों तक सीमित रखने के बजाय एमएसएमई, महिला उद्यमियों, एससी/एसटी वर्ग द्वारा संचालित उद्यमों और स्टार्टअप्स के लिए भी अवसरों का विस्तार किया है। इस व्यवस्था से छोटे उद्यमों को देशभर के सरकारी खरीदारों तक पहुंच बनाने का डिजिटल मंच मिला है। इससे प्रदेश के स्थानीय उद्यमियों के लिए सरकारी बाजार का दायरा बढ़ा है और उन्हें राज्य के बाहर भी अपने उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराने का अवसर मिला है।

क्षमता निर्माण पर भी जोर

उत्तर प्रदेश की सफलता में ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य में समय-समय पर अधिकारियों, विभागों और अन्य हितधारकों के लिए व्यापक प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, ताकि जेम की सुविधाओं और प्रक्रियाओं का अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सके। इसी दिशा में किए गए प्रयासों को ‘बेस्ट आउटरीच इनिशिएटिव फॉर कैपेसिटी बिल्डिंग’ राष्ट्रीय पुरस्कार के माध्यम से मान्यता मिली है। उत्तर प्रदेश सरकार और जेम के बीच लगातार बेहतर होते समन्वय ने प्रदेश में सार्वजनिक खरीद सुधारों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीद प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, समावेशी और परिणाम आधारित बनाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।

यूपी में बाढ़ प्रभावितों के लिए योगी सरकार का राहत अभियान युद्ध स्तर पर जारी

यूपी में बाढ़ प्रभावितों के लिए योगी सरकार का राहत अभियान युद्ध स्तर पर जारी

उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ ही उनके लिए भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सुविधाएं और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था लगातार की जा रही है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक रविवार तक प्रदेश के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। अब तक प्रदेश में कोई जनहानि नहीं व पशुहानि नहीं होने पाई है। योगी सरकार की निगरानी में राहत कार्य प्रभावित क्षेत्रों में लगातार जारी हैं। 

 

वर्तमान में बाढ़ से करीब 1.70 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। ऐसे में सरकार का पूरा जोर प्रभावित आबादी को तत्काल राहत सहायता उपलब्ध कराने और लोगों को सुरक्षित रखने पर है। इसके लिए प्रभावित इलाकों में अब तक कुल 1,633 बाढ़ चौकियां स्थापित की जा चुकी हैं। इन चौकियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर राहत एवं बचाव गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।

बाढ़ पीड़ितों तक भोजन पहुंचाने के लिए व्यापक इंतजाम

बाढ़ जैसी आपदा में सबसे बड़ी जरूरत प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाने की है। योगी सरकार ने इस मोर्चे पर भी व्यापक इंतजाम किए हैं। रविवार की स्थिति के मुताबिक 2,024 बाढ़ राहत खाद्यान्न पैकेट और 10,784 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। अब तक कुल 55,572 खाद्यान्न पैकेट और 3.02 लाख लंच पैकेट प्रभावित लोगों तक पहुंचाए जा चुके हैं।

 

इससे राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों को भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है। प्रशासन द्वारा जरूरत के अनुसार राहत सामग्री का वितरण लगातार किया जा रहा है, ताकि बाढ़ के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के बावजूद लोगों को भोजन के लिए परेशान न होना पड़े।

स्वास्थ्य सेवाओं को भी रखा गया सक्रिय

राहत कार्यों के साथ सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्राथमिकता दी है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में 200 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। इसके अलावा स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 5,432 क्लोरीन टैबलेट तथा 5,441 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ के दौरान दूषित पानी और संक्रमण से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मेडिकल टीमों की तैनाती और क्लोरीन टैबलेट तथा ओआरएस के वितरण से प्रभावित आबादी को तत्काल स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

525 नाव-मोटरबोट से राहत-बचाव अभियान

बाढ़ के कारण जिन क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ है, वहां राहत एवं बचाव कार्य के लिए 525 नाव एवं मोटरबोट लगाए गए हैं। इनके माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक पहुंच बनाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

254 बाढ़ शरणालय स्थापित

प्रशासन ने बाढ़ प्रभावितों के लिए 254 बाढ़ शरणालय स्थापित किए हैं। इनमें से 46 शरणालय वर्तमान में संचालित हैं। संचालित शरणालयों में 1,151 लोग रह रहे हैं, जबकि अब तक लगभग इतनी ही संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।

बाढ़ से प्रभावित जिले

30 अगस्त की स्थिति के अनुसार प्रदेश के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, हरदोई, कासगंज, कन्नौज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर और वाराणसी शामिल हैं। इन सभी जिलों में प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में लगातार जुटी हैं।

पशुओं के लिए भी राहत इंतजाम

योगी सरकार के राहत अभियान में प्रभावित पशुओं को भी शामिल किया गया है। वर्तमान में प्रभावित 20,556 पशुओं के लिए 425.89 क्विंटल भूसा वितरित किया गया है। इससे बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ उनके पशुधन की जरूरतों का भी ध्यान रखा जा रहा है।

क्षतिग्रस्त मकानों के लिए भी सहायता

बाढ़ प्रभावित विभिन्न जिलों में अब तक 12 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें से 11 मामलों में क्षतिग्रस्त मकानों के सापेक्ष सहायता वितरित की जा चुकी है। वहीं राहत आंकड़ों में बाढ़ से अब तक जनहानि और पशुहानि शून्य दर्ज की गई है।

भाई ने बताई बहन की तकलीफ तो CM योगी ने तुरंत लोहिया अस्पताल में कराया भर्ती

भाई ने बताई बहन की तकलीफ तो CM योगी ने तुरंत लोहिया अस्पताल में कराया भर्ती

Yogi Janta Darshan Program: ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अति मानवीय रूप देख अन्य आगंतुक अपनी पीड़ा भूल गए। सीएम योगी का यह रूप देख किसी की भावनाएं आंसुओं के जरिए निकल पड़ीं तो किसी ने अपनी कुर्सी से ही हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के प्रति आभार जताया। दरअसल अयोध्या से आए एक भाई-बहन जनता दर्शन में पहुंचे। भाई ने मुख्यमंत्री से बताया कि उनकी बहन गंभीर रूप से बीमार हैं। वह बहन को लेकर लखनऊ आए हैं, उन्हें जल्द से जल्द इलाज की आवश्यकता है। इस पर मुख्यमंत्री ने पीड़िता को तत्काल लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज भी शुरू हो गया है। 

मुख्यमंत्री आवास से तत्काल अस्पताल भेजी गईं पीड़िता

अयोध्या से आए श्याम सोनकर ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी बहन बबिता कुछ दिनों से अयोध्या में भर्ती थीं, डॉक्टरों ने उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया है। परिवार अत्यंत गरीब है, इसलिए इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने अपने आवास से तत्काल पीड़िता को एंबुलेंस से डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान गोमती नगर भिजवाया। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलने के बाद डॉक्टरों की देख-रेख में मरीज का इलाज प्रारंभ हो गया। मुख्यमंत्री ने पीड़िता के परिजनों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। 

भाई की आंखों में आए आंसू, फोन करके दिया धन्यवाद

बहन बबिता के एडमिट होते ही उनके भाई श्याम ने चैन की सांस ली। डॉक्टरों को उन्होंने पूरी बीमारी आदि के बारे में विस्तृत रूप से बताया। इलाज की प्रक्रिया प्रारंभ होते ही श्याम की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने फोन करके मुख्यमंत्री आवास को इसकी जानकारी भी दी और धन्यवाद भी ज्ञापित किया। 

धन की कमी के कारण नहीं रुकेगा किसी का इलाज

‘जनता दर्शन’ में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे। सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण कराकर शासन में उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि धन की कमी के कारण किसी का इलाज नहीं रुकेगा। 

चॉकलेट पाकर खिलखिला उठी मासूम

‘जनता दर्शन’ में एक मासूम अपनी मां के साथ आई थी। सीएम ने उनकी मां की समस्या सुनी, फिर बच्ची से मुखातिब हुए और दुलारा-पुचकारा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने चॉकलेट मंगाई और उसके सामने रैपर खोलना शुरू कर दिया। सीएम के हाथ में चॉकलेट देखकर बच्ची खिलखिला उठी। बाबा और बच्ची के संवाद को देख अपना दर्द भूल सभी पीड़ित व अनय लोग मुस्कुरा उठे। सभी ने बच्चों के प्रति मुख्यमंत्री योगी के वात्सल्य की खूब प्रशंसा की।

CJP Protest Marc h: 5 सितंबर के दिल्ली मार्च पर SC ने क्यों नहीं लगाई रोक? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

CJP Protest Marc h: 5 सितंबर के दिल्ली मार्च पर SC ने क्यों नहीं लगाई रोक? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

Supreme Court Jantar Mantar Protest

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को Cockroach Janata Party (CJP) की ओर से 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर तत्काल प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद है कि सभी पक्ष शांतिपूर्ण और कानून के मुताबिक व्यवहार करेंगे तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की होगी।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि पुलिस द्वारा NEET प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित High Powered Enquiry Committee के समक्ष भी अपनी याचिका प्रस्तुत करें। पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए कहा कि इसे लंबित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया जाए और 10 सितंबर को सुनवाई की जाए।

 

कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी एजेंसियों की

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करने की उम्मीद है। वहीं, कानून लागू कराने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे तय करें कि क्या कानूनी है और क्या प्रतिबंधित है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों से अपेक्षा है कि वे कानून का सम्मान करें, अपने आचरण में संयम रखें और देश के कानून का पालन करें।

 

5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की तैयारी

CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च का आह्वान किया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चलाए गए 36 दिन के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया। CJP के मुताबिक प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाना है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि उसे इस तरह के किसी जुलूस के आयोजन के लिए अभी तक कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।

 

याचिका में सुरक्षा-संवेदनशील इलाकों में मार्च पर रोक की मांग

सेवानिवृत्त दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के इलाकों जैसे सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील संवैधानिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जुटान, मार्च या संगठित प्रदर्शन की अनुमति तभी दी जाए, जब आयोजकों ने आवश्यक अनुमति हासिल कर ली हो। याचिका में लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित किसी भी बड़े प्रदर्शन को नियंत्रित करने, टालने या उसके स्वरूप में बदलाव करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने यह व्यवस्था 12-13 सितंबर को प्रस्तावित BRICS Summit के समाप्त होने तक लागू रखने की मांग की है।

 

इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि कोई भी मार्च या जुलूस निर्धारित और अधिकृत सीमा से आगे न बढ़े तथा संबंधित क्षेत्र में लागू कानूनी अनुमति और नियामक व्यवस्था का पालन किया जाए।

 

Teachers' Day पर होगा प्रस्तावित मार्च

CJP का प्रस्तावित मार्च Teachers' Day यानी 5 सितंबर को आयोजित किया जाना है। खबर के मुताबिक इसमें उन छात्रों के परिवारों के शामिल होने की बात कही गई है, जिन्होंने इस साल NEET परीक्षा रद्द होने और उसके बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने के घटनाक्रम के बाद कथित तौर पर आत्महत्या की थी। इसके अलावा जुलाई के आंदोलन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का सामना करने वाले छात्रों के परिवारों के भी मार्च में शामिल होने की बात कही गई है।

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ओरछा को पर्यटन के अद्भुत केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ओरछा का राम राजा मंदिर हमारे गौरवशाली अतीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपदा है। यहां के मंदिर एवं महल तत्कालीन समृद्ध स्थापत्य के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जो हमें हमारी प्राचीन धरोहर और संस्कृति से जोड़े रखते हैं। ये तत्कालीन उन्नत तकनीक और स्थापत्य के भी अद्भुत उदाहरण हैं, पहले एअर कंडीशनर नहीं होते थे, लेकिन यहां के भवन वातानुकूलित बने है, जो गर्मी में ठंडे और ठंड में गर्मी का एहसास कराते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज ओरछा स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केन्द्र श्री रामराजा लोक में जारी निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के बाद मीडिया से चर्चा में यह विचार-व्यक्त किए।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्माणाधीन रामराजा लोक परिसर में विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करते हुए प्रतिष्ठान संचालकों से संवाद किया तथा उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुझार सिंह महल में चल रहे निर्माण तथा जीर्णोद्धार कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने जहांगीर महल का भ्रमण कर यहां की ऐतिहासिक एवं समृद्ध स्थापत्य कला का अवलोकन भी किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को निरीक्षण के दौरान आर्किटेक्ट द्वारा मंदिर परिसर स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक ‘सावन-भादो’ स्तंभों के संरक्षण एवं उनके स्थापत्य महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया कि रामराजा लोक की संरचना एवं विकास कार्यों को आकार देते समय मंदिर परिसर की प्राचीन धरोहरों, विशेषकर ‘सावन-भादो’ स्तंभों के मूल स्वरूप एवं ऐतिहासिक महत्व का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बुंदेलखंड की विशिष्ट स्थापत्य कला के प्रतीक इन प्राचीन स्तंभों की संरचना एवं निर्माण शैली अपने समय की उन्नत तकनीक को दर्शाती है। नए निर्माण कार्यों के दौरान इन प्राचीन संरचनाओं को किसी प्रकार की क्षति नही पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखते हुए उनके आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित, सुंदर एवं श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे गौरवशाली बुन्देला राजाओं का ओरछा बुंदेलखंड की राजधानी के रूप पहचाना जाता था। यहां के प्राचीन महल और भवन, हमारी समृद्ध विरासत हैं, उसे जीवंत करने के लिए सरकार काम कर रही है। तत्कालीन समय में निर्माण कार्यों में जिस प्रकार की सामग्री लगाई जाती थी, उसी सामग्री से भवनों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह है कि हमारे गौरवशाली अतीत के प्रतीक ये भवन उसी स्वरूप में दिखें जिस स्वरूप में वह वर्षों पहले थे। इसके लिए हमारे अधिकारियों के नेतृत्व और मार्गदर्शन में कुशल कारीगर काम कर रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्री महाकाल महालोक के निर्माण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, उज्जैन की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों जैसे ओरछा, चित्रकूट, दतिया, नलखेड़ा, पशुपतिनाथ मंदसौर आदि का भी समग्र विकास किया जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में, लम्बी अवधि चित्रकूट में व्यतीत की। भगवान श्रीकृष्ण की जहां शिक्षा भी हुई, उज्जैन के सांदीपनि आश्रम सहित भगवान श्रीकृष्ण की जहां-जहां लीलाएं हुईं, उन सब स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। हमारी गौरवशाली विरासत को धार्मिक सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप आने वाली पीढ़ियों से जोड़ने और उन्हें इस अतीत से परिचित कराने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित हैं, इन्हें संरक्षित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। ओरछा में भव्य श्री रामराजा लोक का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थस्थल बनेगा।

भोपाल में आवासीय इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी पर सीलिंग की कार्रवाई, 10 नंबर व्यापारी संघ ने जताया विरोध, निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

भोपाल में आवासीय इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी पर सीलिंग की कार्रवाई, 10 नंबर व्यापारी संघ ने जताया विरोध, निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आखिरकार भोपाल नगर निगम ने शहर के आवासीय क्षेत्रों में नियमों के विपरीत संचालित हो रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ सीलिंग की  कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को निगम की टीम ने अरेरा कॉलोनी के ई-3 क्षेत्र सहित सर्वधर्म बी सेक्टर और रचना नगर में पहुंचकर होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान रचना नगर स्थित एक होटल को बंद कराने के साथ जूंबा डांस हाउस को सील किया गया। निगम के अफसर करीब 17 व्यावसायिक संस्थानों की सूची लेकर निकली और एक के बाद एक सीलिंग की कार्रवाई की। 

 

नगर निगम की टीम अरेरा कॉलोनी ई-3 पहुंची और यहां आवासीय क्षेत्र में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों की जांच की। निगम अधिकारियों के अनुसार नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद निगम की टीम सर्वधर्म बी सेक्टर भी पहुंची, जहां कमर्शियल गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की गई। निगम की कार्रवाई से क्षेत्र के व्यापारियों में हड़कंप की स्थिति रही।

 

नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद अब व्यापारी संघ ने कार्रवाई के तरीके को लेकर सवाल खड़े किए हैं। शहर से सबसे पॉश इलाके में जब नगर निगम के दल ने छोटे व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरु की तो दुकानदारों ने हंगामा शुरु कर दिया। दुकानदारों का आऱोप है कि नगर निगम केवल छोटे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, बड़े प्रतिष्ठानों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। 

 

निगम की कार्रवाई शुरू होते ही व्यापारी संगठनों ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। व्यापारियों का आरोप है कि निगम की कार्रवाई मुख्य रूप से छोटे दुकानदारों और छोटे व्यवसायियों तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि आवासीय क्षेत्रों में बड़े स्तर पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों और प्रभावशाली लोगों के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

 

10 नंबर मार्केट व्यापारी संघ के अध्यक्ष आनंस सोनी ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के मास्टर प्लान नहीं लाने का खामियाजा आज व्यापारी भुगत रहे है। उन्होंने कहा कि सीलिंग की कार्रवाई से भोपाल का 90 प्रतिशत व्यापार बंद हो जाएगा। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द मास्टर प्लान लागू करने की मांग की। वहीं व्यापारियों को तत्काल राहत देने  के लिए मिक्स लैंड यूज व्यवस्था को लागू करने की मांग की। 

 

इसके साथ ही व्यापरियों ने कहा कि यदि आवासीय क्षेत्रों में कमर्शियल गतिविधियां नियम विरुद्ध हैं तो कार्रवाई सभी पर समान रूप से होनी चाहिए। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि छोटे दुकानदारों को सील कर देने से पहले निगम को पूरे क्षेत्र का सर्वे कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन-किन भवनों में नियमों का उल्लंघन कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

व्यापारियों का यह भी आरोप है कि कार्रवाई में समानता नहीं दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि कई बड़े और रसूखदार लोगों के प्रतिष्ठान भी आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कार्रवाई के दौरन निगम के अमले से जब 10 नंबर इलाके में संचालित शराब दुकान और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई न करने को लेकर सवाल उठाया गया तो अधिकारी बिना कुछ जवाब दिए वहां से निकल गए।

 

 

1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

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अगस्त का आज आखिरी दिन है। सितंबर की शुरुआत के साथ ही आम लोगों के जीवन, खर्च और बचत से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। बैंकिंग, गैस सिलेंडर, टैक्स, यात्रा और क्रेडिट कार्ड जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के ये बदलाव आपकी जेब पर सीधा असर डाल सकते हैं। इनमें से कुछ बदलावों के कारण आपको अधिक पैसे चुकाने पड़ सकते हैं, तो वहीं कुछ नियमों से आपको बड़ी राहत मिलने की संभावना है। किसी भी परेशानी या अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए, नए नियमों के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

 

विदेश यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत

1 सितंबर से भारत से अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। इमिग्रेशन काउंटर पर अब यात्रियों के बोर्डिंग पास पर भौतिक (फिजिकल) मुहर नहीं लगाई जाएगी। इमिग्रेशन ब्यूरो ने प्रक्रिया को सुगम और तेज बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस नए नियम के अनुसार, यात्री अपने मोबाइल फोन पर इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर आसानी से अपनी इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और अस्पष्ट मुहरों जैसी पुरानी तकनीकी समस्याएं हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी।

 

LPG सिलेंडर

31 अगस्त को एलपीजी कनेक्शन के लिए ई-केवाईसी या बायोमेट्रिक सत्यापन आखिरी दिन है। ई-केवाईसी की प्रक्रिया 1 सितंबर को बंद हो जाएगी। यदि आपने इस अवधि में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की, तो आप घरेलू सब्सिडीयुक्त सिलेंडर प्राप्त करने से वंचित हो सकते हैं। इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी प्रमुख तेल कंपनियां ग्राहकों को इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की सलाह देते हुए लगातार संदेश भेज रही हैं। 1 सितंबर से एलपीजी या पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव हो सकता है। 

 

बैंकिंग नियमों में बड़े बदलाव

बैंकों में बड़ी सावधि जमा (एफडी) करने वालों के लिए भी नियमों में पारदर्शिता लाई जा रही है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकों को 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बड़ी जमा राशि पर दिए जाने वाले ब्याज दर रोजाना सुबह 10:10 बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बैंक की अलग-अलग शाखाएं एक ही दिन जमा की गई एक ही राशि पर अलग-अलग ब्याज दरें नहीं दे सकेंगी। हालांकि, इस नियम का आम नागरिकों की छोटी एफडी पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा। ध्यान दें कि एफडी पारदर्शिता के ये नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। 1 सितंबर से एटीएम से जुड़े चार्जेस में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में ज्यादा ट्रांजैक्शन करने पर बैंक आपसे मोटी फीस वसूल सकता है।

 

ईटीएफ पर नए नियम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (SEBI) ने ईटीएफ (ETF) कारोबार को लेकर 1 सितंबर से नए नियम लागू करने का फैसला किया है। नए नियमों के हिसाब से ईटीएफ की कीमत की सीमा तय के लिए पिछले कारोबारी दिन के आखिरी 30 मिनट की ट्रेडिंग वॉल्यूम की औसत कीमत को आधार बनाया जाएगा। इससे ईटीएफ की कीमत बाजार की ताजा स्थिति के आसपास बनी रहेगी।

 

विदेश यात्रा से जुड़ा बड़ा बदलाव

1 सितंबर 2026 से विदेश यात्रा से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने वाला है। भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर अब बोर्डिंग पास पर स्टैम्प लगवाने की जरूरत नहीं होगी. यात्री मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर इमिग्रेशन प्रोसेस पूरा कर सकेंगे। इस नए नियम से हवाई यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।