भोपाल में आवासीय इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी पर सीलिंग की कार्रवाई, 10 नंबर व्यापारी संघ ने जताया विरोध, निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

भोपाल में आवासीय इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी पर सीलिंग की कार्रवाई, 10 नंबर व्यापारी संघ ने जताया विरोध, निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आखिरकार भोपाल नगर निगम ने शहर के आवासीय क्षेत्रों में नियमों के विपरीत संचालित हो रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ सीलिंग की  कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को निगम की टीम ने अरेरा कॉलोनी के ई-3 क्षेत्र सहित सर्वधर्म बी सेक्टर और रचना नगर में पहुंचकर होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान रचना नगर स्थित एक होटल को बंद कराने के साथ जूंबा डांस हाउस को सील किया गया। निगम के अफसर करीब 17 व्यावसायिक संस्थानों की सूची लेकर निकली और एक के बाद एक सीलिंग की कार्रवाई की। 

 

नगर निगम की टीम अरेरा कॉलोनी ई-3 पहुंची और यहां आवासीय क्षेत्र में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों की जांच की। निगम अधिकारियों के अनुसार नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद निगम की टीम सर्वधर्म बी सेक्टर भी पहुंची, जहां कमर्शियल गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की गई। निगम की कार्रवाई से क्षेत्र के व्यापारियों में हड़कंप की स्थिति रही।

 

नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद अब व्यापारी संघ ने कार्रवाई के तरीके को लेकर सवाल खड़े किए हैं। शहर से सबसे पॉश इलाके में जब नगर निगम के दल ने छोटे व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरु की तो दुकानदारों ने हंगामा शुरु कर दिया। दुकानदारों का आऱोप है कि नगर निगम केवल छोटे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, बड़े प्रतिष्ठानों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। 

 

निगम की कार्रवाई शुरू होते ही व्यापारी संगठनों ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। व्यापारियों का आरोप है कि निगम की कार्रवाई मुख्य रूप से छोटे दुकानदारों और छोटे व्यवसायियों तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि आवासीय क्षेत्रों में बड़े स्तर पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों और प्रभावशाली लोगों के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

 

10 नंबर मार्केट व्यापारी संघ के अध्यक्ष आनंस सोनी ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के मास्टर प्लान नहीं लाने का खामियाजा आज व्यापारी भुगत रहे है। उन्होंने कहा कि सीलिंग की कार्रवाई से भोपाल का 90 प्रतिशत व्यापार बंद हो जाएगा। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द मास्टर प्लान लागू करने की मांग की। वहीं व्यापारियों को तत्काल राहत देने  के लिए मिक्स लैंड यूज व्यवस्था को लागू करने की मांग की। 

 

इसके साथ ही व्यापरियों ने कहा कि यदि आवासीय क्षेत्रों में कमर्शियल गतिविधियां नियम विरुद्ध हैं तो कार्रवाई सभी पर समान रूप से होनी चाहिए। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि छोटे दुकानदारों को सील कर देने से पहले निगम को पूरे क्षेत्र का सर्वे कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन-किन भवनों में नियमों का उल्लंघन कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

व्यापारियों का यह भी आरोप है कि कार्रवाई में समानता नहीं दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि कई बड़े और रसूखदार लोगों के प्रतिष्ठान भी आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कार्रवाई के दौरन निगम के अमले से जब 10 नंबर इलाके में संचालित शराब दुकान और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई न करने को लेकर सवाल उठाया गया तो अधिकारी बिना कुछ जवाब दिए वहां से निकल गए।

 

 

1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

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अगस्त का आज आखिरी दिन है। सितंबर की शुरुआत के साथ ही आम लोगों के जीवन, खर्च और बचत से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। बैंकिंग, गैस सिलेंडर, टैक्स, यात्रा और क्रेडिट कार्ड जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के ये बदलाव आपकी जेब पर सीधा असर डाल सकते हैं। इनमें से कुछ बदलावों के कारण आपको अधिक पैसे चुकाने पड़ सकते हैं, तो वहीं कुछ नियमों से आपको बड़ी राहत मिलने की संभावना है। किसी भी परेशानी या अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए, नए नियमों के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

 

विदेश यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत

1 सितंबर से भारत से अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। इमिग्रेशन काउंटर पर अब यात्रियों के बोर्डिंग पास पर भौतिक (फिजिकल) मुहर नहीं लगाई जाएगी। इमिग्रेशन ब्यूरो ने प्रक्रिया को सुगम और तेज बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस नए नियम के अनुसार, यात्री अपने मोबाइल फोन पर इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर आसानी से अपनी इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और अस्पष्ट मुहरों जैसी पुरानी तकनीकी समस्याएं हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी।

 

LPG सिलेंडर

31 अगस्त को एलपीजी कनेक्शन के लिए ई-केवाईसी या बायोमेट्रिक सत्यापन आखिरी दिन है। ई-केवाईसी की प्रक्रिया 1 सितंबर को बंद हो जाएगी। यदि आपने इस अवधि में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की, तो आप घरेलू सब्सिडीयुक्त सिलेंडर प्राप्त करने से वंचित हो सकते हैं। इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी प्रमुख तेल कंपनियां ग्राहकों को इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की सलाह देते हुए लगातार संदेश भेज रही हैं। 1 सितंबर से एलपीजी या पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव हो सकता है। 

 

बैंकिंग नियमों में बड़े बदलाव

बैंकों में बड़ी सावधि जमा (एफडी) करने वालों के लिए भी नियमों में पारदर्शिता लाई जा रही है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकों को 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बड़ी जमा राशि पर दिए जाने वाले ब्याज दर रोजाना सुबह 10:10 बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बैंक की अलग-अलग शाखाएं एक ही दिन जमा की गई एक ही राशि पर अलग-अलग ब्याज दरें नहीं दे सकेंगी। हालांकि, इस नियम का आम नागरिकों की छोटी एफडी पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा। ध्यान दें कि एफडी पारदर्शिता के ये नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। 1 सितंबर से एटीएम से जुड़े चार्जेस में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में ज्यादा ट्रांजैक्शन करने पर बैंक आपसे मोटी फीस वसूल सकता है।

 

ईटीएफ पर नए नियम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (SEBI) ने ईटीएफ (ETF) कारोबार को लेकर 1 सितंबर से नए नियम लागू करने का फैसला किया है। नए नियमों के हिसाब से ईटीएफ की कीमत की सीमा तय के लिए पिछले कारोबारी दिन के आखिरी 30 मिनट की ट्रेडिंग वॉल्यूम की औसत कीमत को आधार बनाया जाएगा। इससे ईटीएफ की कीमत बाजार की ताजा स्थिति के आसपास बनी रहेगी।

 

विदेश यात्रा से जुड़ा बड़ा बदलाव

1 सितंबर 2026 से विदेश यात्रा से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने वाला है। भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर अब बोर्डिंग पास पर स्टैम्प लगवाने की जरूरत नहीं होगी. यात्री मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर इमिग्रेशन प्रोसेस पूरा कर सकेंगे। इस नए नियम से हवाई यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

पश्चिमी यूपी में ‘पीडीए’ की नई बिसात, जाट बनाम जाटव-गुर्जर की सियासी गोलबंदी

पश्चिमी यूपी में ‘पीडीए’ की नई बिसात, जाट बनाम जाटव-गुर्जर की सियासी गोलबंदी

Akhilesh Yadav

मेरठ की घटना को अखिलेश यादव का राजनीतिक मंच बनाना महज पुलिस कार्रवाई का सवाल नहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बदलते जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश है। जाटों के बीच ‘चवन्नी’ विवाद से पैदा हुई नाराजगी के बीच सपा अब जाटव और गुर्जर समुदाय को अपने पीडीए प्लस के पाले में खड़ा करने की कवायद में लगी है। ALSO READ: शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेर

 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से सिर्फ चुनावी आंकड़ों का खेल नहीं रही, बल्कि जातीय अस्मिता, सामाजिक वर्चस्व और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन साधने की कवायद रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यही पुराना मैदान एक बार फिर नए किरदारों और नए समीकरणों के साथ अपनी बिसात बिछाता नजर आ रहा है। जाट, मुस्लिम, दलित, गुर्जर और सवर्ण मतदाताओं के बीच बनते-बिगड़ते रिश्ते यह तय करेंगे कि पश्चिमी यूपी में 2027 की अगली पटकथा कौन लिखेगा।

 

अखिलेश यादव द्वारा ललिता मर्डर केस में न्याय की मांग कर रहें दो नेताओं को सामने लाकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह वहीं नेता है जिन्होंने मेरठ एस एस पी अविनाश पांडे पर उनकी टीम पर बर्बरता से मारपीट का आरोप लगाया है। इस प्रेसवार्ता व्यापक राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। हालांकि पुलिस का अपना पक्ष है और दोनों आरोपियों के आपराधिक मुकदमों का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। पुलिस का कहना है कि दोनों ने पुलिस के खिलाफ तथ्यहीन और भ्रामक आरोप लगाए हैं। लेकिन राजनीति में कई बार घटना से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका बनाया गया नैरेटिव होता है। अखिलेश ने इसी नैरेटिव को जातीय पहचान और पुलिस उत्पीड़न के सवाल से जोड़ने की कोशिश की है।

 

यहां सपा की रणनीति अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती है, जाटव और गुर्जर समाज को यह संदेश देना कि सत्ता और पुलिस व्यवस्था के कथित अन्याय के खिलाफ खड़ा होने के लिए उनके पास एक राजनीतिक मंच मौजूद है। यानी किसी एक घटना को व्यापक सामाजिक असुरक्षा के प्रतीक में बदलना और फिर उसे ‘पीडीए’ की राजनीति से जोड़ देना।

 

पश्चिमी यूपी में यह प्रयोग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां दलित राजनीति का अर्थ केवल दलित वोट नहीं है। जाटव मतदाता लंबे समय से बहुजन राजनीति का महत्वपूर्ण आधार रहा है, जबकि गुर्जर समुदाय भी कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक प्रभाव रखता है। मुस्लिम मतदाताओं के साथ इन समूहों का संभावित मेल सपा के लिए एक ऐसा सामाजिक गठजोड़ बना सकता है, जो जाट-केंद्रित राजनीति के मुकाबले नया संतुलन खड़ा करे।

 

लेकिन सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती जाट राजनीति है। भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं के लिए वर्तमान में फेवीकोल का जोड़ है। जयंत चौधरी इस सामाजिक आधार को अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी मानते हैं। ऐसे में अखिलेश यादव और जयंत के बीच ‘चवन्नी’ विवाद महज दो नेताओं की व्यक्तिगत राजनीतिक तकरार नहीं रह गया है। इसे जाट सम्मान और राजनीतिक प्रतिबिंब से जोड़कर पेश किया जा रहा है। ALSO READ: लखनऊ के विकास में मुख्यमंत्री योगी का सबसे बड़ा सहयोग : राजनाथ सिंह

 

यही वह बिंदु है जहां पश्चिमी यूपी की राजनीति दिलचस्प हो जाती है। सपा अगर जाटों के एक हिस्से को खोने की आशंका महसूस कर रही है, तो उसका विकल्प जाटव, गुर्जर, मुस्लिम और अन्य पिछड़े समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना है। दूसरी तरफ भाजपा-रालोद गठबंधन के लिए चुनौती यह है कि वह जाट आधार को बनाए रखते हुए मुस्लिम, गुर्जर, दलित और गैर-यादव पिछड़े मतदाताओं के बीच भी अपनी ग्राह्यता (उपयुक्तता) बढ़ाए।

 

दरअसल, पश्चिमी यूपी में 2027 का चुनाव केवल भाजपा बनाम सपा या गठबंधन बनाम विपक्ष की लड़ाई नहीं होगा। यह उस पुराने सामाजिक समीकरण के पुनर्गठन का चुनाव भी हो सकता है, जिसने दशकों तक उत्तर प्रदेश की राजनीति को दिशा दी है।

 

कांग्रेस का इतिहास इस बदलाव को समझने की एक महत्वपूर्ण कुंजी है। एक समय मुस्लिम, दलित और ब्राह्मण उसके मजबूत सामाजिक स्तंभ थे। मंडल-कमंडल की राजनीति, बहुजन आंदोलन और क्षेत्रीय दलों के उभार के साथ ये सामाजिक आधार अलग-अलग राजनीतिक खेमों में बंटते चले गए। दलितों का बड़ा हिस्सा बसपा के साथ गया, मुस्लिम मतदाता सपा की तरफ खिसका, ब्राह्मणों और अन्य सवर्णों का बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ जुड़ा और पिछड़े वर्गों की राजनीति भी अलग-अलग क्षेत्रीय दलों में बंट गई। कांग्रेस का क्षरण इसी सामाजिक गठजोड़ के टूटने की कहानी है।

 

आज अखिलेश यादव उसी इतिहास को उलटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बदले हुए सामाजिक संदर्भ में। ‘पीडीए’ इसी कोशिश का राजनीतिक नाम है। पश्चिमी यूपी में इसका ‘प्लस’ संस्करण जाटव, गुर्जर, मुस्लिम और अन्य पिछड़े समूहों को जोड़कर तैयार करने की कोशिश है।

 

मगर सवाल यह है कि क्या एक घटना के जरिए जातीय अस्मिता को राजनीतिक गोलबंदी में बदला जा सकता है? और क्या जाटों के बीच पैदा हुई नाराजगी की भरपाई जाटव-गुर्जर-मुस्लिम समीकरण से संभव होगी?
 

2027 की पश्चिमी यूपी की सबसे बड़ी राजनीतिक पहेली

अखिलेश के लिए चुनौती केवल वोट जोड़ने की नहीं, बल्कि अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच ऐसा विश्वास पैदा करने की है कि उनका ‘पीडीए’ केवल चुनावी नारा नहीं, सत्ता में हिस्सेदारी का वास्तविक मॉडल है। जयंत चौधरी के लिए चुनौती जाट अस्मिता को भाजपा गठबंधन की राजनीति से जोड़कर रखना है। भाजपा के लिए चुनौती इन दोनों के बीच बनने वाले किसी भी नए सामाजिक समीकरण को प्रभावी होने से रोकना है।

 

इसलिए मेरठ की घटना के बाद अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस को केवल एक पुलिस विवाद के रूप में देखना पश्चिमी यूपी की मौजूदा राजनीति को छोटा करके देखना होगा। इसके पीछे असली लड़ाई नैरेटिव की है—कौन पीड़ित की आवाज बनेगा, कौन जातीय सम्मान का प्रतिनिधि बनेगा और कौन अलग-अलग सामाजिक समूहों को एक चुनावी गठजोड़ में बदल पाएगा।

 

एक बात और समझना जरूरी है। पश्चिमी उत्तरप्रदेश में जाट मतदाताओं ने बीजेपी से गलबहियां कर ली थीं। मुजफ्फरनगर और बागपत में अजित सिंह और जयंत चौधरी की कालांतर में हुई पराजय इसका स्पष्ट प्रमाण हैं। ऐसे में बीजेपी से हाथ मिलाकर सत्ता सुख भोगना जयंत को हितकर लगा और वे अखिलेश का साथ छोड़कर बीजेपी के कॉर्पोरेट का हिस्सा बन गए। जब से चवन्नी पलटी तब से आरएलडी लगातार कमजोर ही हुई है। आरएलडी के अनेक लॉयल नेता उनका साथ छोड़ चुके हैं। यहां यह भी समझना जरूरी है कि समाजवादी पार्टी का जाटों के बीच जनाधार नगण्य है।

सिर्फ स्थानीय स्तर पर किसी प्रभावशाली नेता को सामने रख सोशल इंजीनियरिंग कर अखिलेश यादव को कुछ प्राप्ति हो सकती है। इसलिए यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अखिलेश के पास खोने के लिए अपना कुछ नहीं है लेकिन कुछ जिलें ऐसे हैं जिन्हें अखिलेश से संभल की तर्ज पर ही कुछ छीना जा सकता है, वरना इंडिया गठबंधन वहां उन्नीस-बीस  नहीं बल्कि 19-25 है।

अगर अखिलेश का दांव चल गया तो पश्चिमी यूपी में 2027 की लड़ाई दिलचस्प होगी! यह इस पर भी निर्भर होगा कि बीजेपी को अब तक अजेय बनाए रखने वाला ओबीसी किस करवट बैठता है! कांग्रेस के साथ होने पर इंडिया गठबंधन कितने प्रतिशत जाटव वोटों को अपने पाले में खींच पाता है! गुर्जरों का रुख क्या रहता है? ओवैसी कितने फीसदी वोट काटकर बीजेपी की राह को सुगम बना पाते हैं या नहीं?

PM मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर ओवैसी का तंज, बोले- ‘बाबर के नाम पर गालियां देते थे, उसी देश ने दिया अवार्ड’

PM मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर ओवैसी का तंज, बोले- ‘बाबर के नाम पर गालियां देते थे, उसी देश ने दिया अवार्ड’

owaisi attacks PM Modi on dostlik award

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान में मिले सर्वोच्च नागरिक सम्मान को लेकर भाजपा और आरएसएस पर जोरदार तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी को मुबारकबाद कि जिस बाबर के नाम पर हमें गालियां देते थे, उसी बाबर के देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अवार्ड दिया है। ALSO READ: PM मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, द्विपक्षीय बैठक में हुए कई अहम समझौते

 

ताशकंद में रविवार को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च मित्रता सम्मान 'ओली दाराजाली दोस्तलिक' से सम्मानित किया। इस पर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस को सोचने को कहा है कि जो भाजपा बाबर के नाम पर हमें गाली देती थी, उम्मीद करते हैं कि अब ऐसा नहीं करेगी।

 

पीएम मोदी को विदेश में मिलने वाले सम्मान पर कटाक्ष करते हुए ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं अवार्ड लेकर आते हैं। मुबारकबाद आपको..बाबर के नाम पे इतनी गाली जो देते थे…उसी देश वाले अवार्ड दे रहे हैं आपको। संघ वालों को इस बारे में सोचना पड़ेगा। ALSO READ: अमेरिका से तनाव, चीन-रूस से नजदीकियां, SCO समिट में पीएम मोदी पर क्यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें?

 

दिन में 100 बार 'दोस्तलिक' बोलता है हर भारतीय परिवार

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लटेफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि ओली दराजाली दोस्तलिक' सम्मान प्राप्त कर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा, मैं यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच स्थाई संबंधों को समर्पित करता हूं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित होना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है।

उन्होंने कहा कि भारत के लोग इस सम्मान के नाम में प्रयुक्त शब्द 'दोस्तलिक' से भलीभांति परिचित हैं। भारत में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा, जहां 'दोस्तलिक' शब्द दिन में 100 बार न बोला जाता हो। आज आपने वास्तव में इस शब्द के सार को सामने ला दिया है। 'दोस्तलिक' का अर्थ मित्रता है। यह शब्द अपने आप में भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों के केंद्र में मौजूद भावना को खूबसूरती से व्यक्त करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सम्मान प्राप्त करना उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि 1.4 अरब भारतीयों का सम्मान है।

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

PM Modi Gujarat Visit

विदेश दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दौरे पर रहेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना संसदीय क्षेत्र रहे वडोदरा से पीएम मोदी Gen Z और युवाओं के मुद्दों पर विपक्ष को कड़ा जवाब देंगे। दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद इस कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। NEET पेपर लीक और फिर CJP के नेतृत्व वाले Gen Z विरोध प्रदर्शनों के बाद, पीएम मोदी व्यक्तिगत रूप से किसी विश्वविद्यालय में पहुंचकर छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। 

 

MS यूनिवर्सिटी पवेलियन में आयोजित होगा विशेष कार्यक्रम

पीएम मोदी के मुख्य कार्यक्रम के लिए महाराजा सयाजीराव (MS) यूनिवर्सिटी पवेलियन को अंतिम रूप दिया गया है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष हेमांग जोशी ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। 8 सितंबर को होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में 6,000 से अधिक युवाओं और छात्रों के शामिल होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भी पीएम मोदी ने अपना पहला रोड शो वडोदरा में ही आयोजित किया था। 

 

वडोदरा और पीएम मोदी का खास और अटूट रिश्ता

 

संसदीय करियर में पीएम मोदी को सबसे ज्यादा प्यार और वोट शेयर वडोदरा से ही मिला है। 2014 के चुनाव में उन्हें 8,45,464 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का 72.75% था। 2024 के चुनाव में वडोदरा सीट से बीजेपी के नए प्रत्याशी हेमांग जोशी को कुल 8,73,189 वोट मिले, जो कुल वोट का 72.04% है। पीएम मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले अपनी आखिरी विजय रैली भी वडोदरा में ही निकाली थी। RSS प्रचारक और बीजेपी संगठनकर्ता के रूप में वे यहां लंबा समय बिता चुके हैं। 

 

पीएम मोदी के इस दौरे का विशेष राजनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन से ठीक 10 दिन पहले वडोदरा का दौरा कर रहे हैं। 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन है, जब वे 76 वर्ष के हो जाएंगे। इसके अलावा, 7 अक्टूबर को वे संवैधानिक पद पर अपने 25 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। इन महत्वपूर्ण उपलब्धियों और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों से पहले युवाओं के बीच जाकर संवाद करना बीजेपी की विशेष रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
 

कड़ी सुरक्षा के बीच कार्यक्रम का होगा लाइव प्रसारण

पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय पवेलियन में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। यद्यपि इस कार्यक्रम में सीमित संख्या में छात्र ही भाग लेंगे, लेकिन इस पूरे कार्यक्रम का देशभर में लाइव प्रसारण उपलब्ध रहेगा ताकि पीएम मोदी का संदेश अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच सके। 

नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

nepal flood

विवेक कुमार

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भीषण बाढ़ और ग्लेशियर धंसने की घटना के बाद भारत ने चीन और नेपाल से लगते अपने हिमालयी क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि सीमावर्ती पर्वतीय इलाकों में मौजूद सभी ग्लेशियरों और हिमनदीय झीलों पर विशेष नजर रखी जाएगी। ALSO READ: भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

 

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार 26 अगस्त को तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई विनाशकारी आपदा एक ग्लेशियर के ध्वस्त होने से पैदा हुई थी। इस घटना के बाद मलबे और पानी का विशाल प्रवाह नीचे की ओर आया, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस आपदा में 633 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

 

उत्तराखंड में बढ़ेगी निगरानी

भारत के हिमालयी राज्य उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा कि नेपाल के साथ साझा सीमा और समान भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है।

 

उन्होंने कहा, “चूंकि हमारी सीमा, नेपाल से लगती है और हमारी भौगोलिक स्थिति भी काफी हद तक समान है, इसलिए हमने अपने विभाग को क्षेत्र के सभी ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।”

 

मदन कौशिक ने कहा कि राज्य की टीमों को सतर्क रहने और संभावित खतरों पर लगातार नजर रखने को कहा गया है ताकि किसी भी उभरती हुई स्थिति की समय रहते पहचान की जा सके।

 

उत्तराखंड भारत के सबसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में गिना जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 1,266 हिमनदीय झीलें मौजूद हैं। विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति बेहद संवेदनशील है।

 

वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय के ग्लेशियर, जो लगभग दो अरब लोगों को पानी उपलब्ध कराने वाली प्रमुख प्रणालियों का हिस्सा हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण पहले से कहीं अधिक तेजी से पिघल रहे हैं। इसके चलते पर्वतीय समुदायों के सामने अप्रत्याशित और विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्लेशियरों के पिघलने और स्थायी रूप से जमी बर्फ यानी पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से पर्वत ढलानों की स्थिरता कमजोर हो सकती है, जिससे भूस्खलन का जोखिम बढ़ जाता है। ALSO READ: नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

 

क्यों आई नेपाल में बाढ़

इसी बीच वैज्ञानिक नेपाल-तिब्बत आपदा के संभावित कारणों का अध्ययन कर रहे हैं। एएफपी से बातचीत में कई विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में फिर हो सकती हैं। न्यूजीलैंड के जीएनएस साइंस शोध संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक साइमन कॉक्स ने कहा कि जब पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा गिर जाता है तो उसके आसपास के हिस्से भी अस्थिर हो सकते हैं। उनके अनुसार इससे उसी क्षेत्र में दोबारा ध्वंस की आशंका बनी रहती है।

 

यूएसजीएस का कहना है कि नेपाल तिब्बित सीमा पर ग्लेशियर ध्वंस इतना शक्तिशाली था कि उससे निकली ऊर्जा 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर थी और इसके कारण कई भूस्खलन भी हुए।

 

फ्रांस के राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (सीएनआरएस) के ग्लेशियर विशेषज्ञ एतियां बेर्तिये ने कहा कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी ऐसी घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने कहा कि हिमालय में भूगर्भीय हालात इस तरह की घटनाओं को अधिक व्यापक बना देते हैं।

 

कार्डिफ विश्वविद्यालय के पर्यावरणीय जोखिम विशेषज्ञ ट्रिस्ट्रम हेल्स ने कहा कि पिछले एक दशक में दुनियाभर में ऐसी घटनाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। उन्होंने हिमालय और स्विट्जरलैंड जैसे क्षेत्रों का उदाहरण दिया। ALSO READ: टैक्सियों को लेकर क्यों लड़ते रहते हैं भारत के दो राज्य

 

हालांकि वैज्ञानिकों ने इस विशेष आपदा को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ने में सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। एकीकृत पर्वतीय विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र (आईसीआईएमओडी) ने कहा कि जलवायु परिवर्तन हिमालयी ग्लेशियरों, बर्फ, पर्माफ्रॉस्ट और पर्वतीय ढलानों को प्रभावित कर रहा है, लेकिन यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी कि इस विशेष घटना में उसकी क्या भूमिका रही।

 

विशेषज्ञों के अनुसार इसके लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन और तथाकथित “एट्रिब्यूशन स्टडी” की जरूरत होगी, जिसके बाद ही जलवायु परिवर्तन और इस आपदा के बीच प्रत्यक्ष संबंध के बारे में ठोस निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

दिल्ली में फिर निर्भया जैसा कांड: 47KM तक बस में नाबालिग के साथ होती रही दरिंदगी

दिल्ली में फिर निर्भया जैसा कांड: 47KM तक बस में नाबालिग के साथ होती रही दरिंदगी

crime news

राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जिसने छह साल पुरानी ‘निर्भया’ कांड की खौफनाक यादें ताजा कर दी हैं। 47 किलोमीटर लंबे सफर के दौरान एक चलती हुई बस में ग्यारहवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा के साथ हैवानियत की गई। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों (ड्राइवर और कंडक्टर) को तिमारपुर बस पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया है। ALSO READ: शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेर

 

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली यह छात्रा 4 अगस्त को घर में किसी बात से नाराज होकर बिना बताए निकल गई थी। वह नोएडा में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास जा रही थी। भारी बारिश और रात के अंधेरे के कारण वह अपनी सही जगह पर उतरने के बजाय परी चौक पर उतर गई।

 

 वहां से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस को देखकर उसने रुकने का इशारा किया। बस के कंडक्टर ने उसे आश्वस्त किया कि वह उसे नोएडा सेक्टर-63 उतार देगा। लेकिन बस में चढ़ने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर और ड्राइवर ने अपनी घिनौनी करतूत शुरू कर दी। विरोध करने पर आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और चलती बस में उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी देर रात उसे कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर छोड़कर फरार हो गए।

 

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस चेकिंग पर उठे गंभीर सवाल

 

47 किलोमीटर का लंबा रास्ता: परी चौक से कश्मीरी गेट तक के इस सफर में बस ने लगभग 47 किलोमीटर की दूरी तय की, लेकिन इस बीच उन्हें कहीं भी पुलिस बैरिकेडिंग या चेकिंग का सामना नहीं करना पड़ा।

 

काले पर्दे और सुनियोजित साजिश: बस में गहरे रंग के पर्दे लगे हुए थे, जिसके कारण बाहर से गुजर रहे किसी भी राहगीर को अंदर चल रही इस दरिंदगी का अहसास नहीं हो सका।

 

वर्कशॉप जा रही थी बस: पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी बस खराब होने के बाद उसे सूरजपुर की वर्कशॉप में रिपेयरिंग के लिए ले गए थे और फिर खाली बस को तिमारपुर ला रहे थे, तभी रास्ते में छात्रा उन्हें मिल गई। ALSO READ: राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

 

सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी गिरफ्तार

घायल अवस्था में पीड़िता ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और आपबीती बताई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाल बिछाया और दोनों आरोपियों को तिमारपुर से दबोच लिया। बस की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। साथ ही, परिजनों को तुरंत दिल्ली बुलाकर काउंसलिंग के बाद पीड़िता को सुरक्षित उनके हवाले कर दिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर बसों के नियमों और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीएम डॉ. मोहन यादव ट्रांसफर करेंगे 25-25 हजार रुपये, 1.22 लाख विद्यार्थी खरीदेंगे लैपटॉप

सीएम डॉ. मोहन यादव ट्रांसफर करेंगे 25-25 हजार रुपये, 1.22 लाख विद्यार्थी खरीदेंगे लैपटॉप

भोपाल। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों का आधुनिक तकनीक से जुड़ने का सपना जल्द ही पूरा होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर करेंगे। विद्यार्थियों को यह राशि 1 सितंबर को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदान की जाएगी।

 

प्रदेश सरकार द्वारा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें डिजिटल तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत कक्षा 12वीं की परीक्षा में पहले ही प्रयास में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को लैपटॉप खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

 

प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा का संबल-प्रदेश सरकार द्वारा योजना के अंतर्गत इस वर्ष प्रदेश के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। प्रत्येक विद्यार्थी के खाते में 25 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी। इस प्रकार विद्यार्थियों को कुल 304 करोड़ 98 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की राशि का अंतरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की यह पहल प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लैपटॉप के माध्यम से विद्यार्थी ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री, ई-लर्निंग और अन्य तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर अपनी शिक्षा को और बेहतर बना सकेंगे।

शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेर

शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेर

shamli encounter

Shamli Encounter: उत्तर प्रदेश के शामली में सोमवार तड़के पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में दो बदमाश मारे गए। पुलिस के मुताबिक, दोनों बदमाश अंकित बालियान हत्याकांड में शामिल शूटर थे और उनकी गिरफ्तारी पर 50-50 हजार रुपए का इनाम घोषित था।

 

शामली के कोतवाली क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए एसपी एनपी सिंह ने बताया कि पुलिस को सुबह करीब चार बजे सूचना मिली थी कि अंकित बालियान हत्याकांड में शामिल दो शूटर शामली की ओर आ रहे हैं। सूचना मिलते ही जिले के सभी संबंधित थानों की पुलिस को अलर्ट कर मौके पर भेजा गया।

 

पुलिस के अनुसार, बदमाशों ने पुलिस को चकमा देने की कोशिश की और मन्ना माजरा की ओर भागने लगे। इसी दौरान होटल राजमहल के पास उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों की गोलीबारी में पुलिस की एक गाड़ी को भी गोली लगी, जबकि दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।

 

इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग की, जिसमें दोनों बदमाशों को गोली लगी। पुलिस टीम ने दोनों को घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृत बदमाशों की पहचान सुमित पुत्र धर्मपाल और मोहित के रूप में हुई है। दोनों हरियाणा के सोनीपत जिले के राझड़ा गांव के निवासी बताए गए हैं।

 

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया और जांच शुरू कर दी है। मौके पर एसपी एनपी सिंह समेत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं। पुलिस अब दोनों बदमाशों के आपराधिक रिकॉर्ड और अंकित बालियान हत्याकांड में उनकी भूमिका से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

Complaint filed against Rahul Gandhi in Haldwani Uttarakhand

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। राहुल गांधी के खिलाफ यह एफआईआर अनुसूचित जाति के युवक अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। यह मामला हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद किए गए 'शुद्धिकरण यज्ञ' और उसे लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है। अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है।

खबरों के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। राहुल गांधी के खिलाफ यह एफआईआर अनुसूचित जाति के युवक अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। यह मामला हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद किए गए 'शुद्धिकरण यज्ञ' और उसे लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है।

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अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है। अमित कुमार ने कहा कि वह स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। बयान से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, सम्मान और सुरक्षा प्रभावित हुई है। अमित कुमार ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस बयान से उनके और शुद्धिकरण में शामिल दूसरे लोगों के सम्मान और सामाजिक छवि पर असर पड़ा है।

अमित कुमार के अनुसार, 8 अगस्त को रामलीला मैदान में कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली हुई थी। रैली के बाद मैदान में कूड़ा-कचरा और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिलने का आरोप लगाते हुए 11 अगस्त को उन्होंने अनुसूचित जाति के अन्य सदस्यों के साथ मैदान की सफाई और हवन-शुद्धिकरण किया था।

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दरअसल, राहुल गांधी ने कहा कि शुद्धिकरण एससी/एसटी एक्ट के तहत एक आपराधिक कृत्य है, जिन भी लोगों ने ऐसा किया है उन पर जल्द से जल्द एफआईआर होनी चाहिए। हालांकि इस मामले को लेकर हल्द्वानी पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद श्री राम सेना के सदस्यों ने वहां शुद्धिकरण हवन किया था।