CM Yogi News: मुख्यमंत्री से बेझिझक सवाल पूछने लगीं बेटियां, योगी बोले- यही तो 2017 के बाद आया बदलाव है

CM Yogi News: मुख्यमंत्री से बेझिझक सवाल पूछने लगीं बेटियां, योगी बोले- यही तो 2017 के बाद आया बदलाव है

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उत्तर प्रदेश की बेटियों को मंच मिला तो उनकी भावनाएं शब्दों में उतर आईं। प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के सामने बेटियां आत्मिक भाव से अपने हृदय के उद्गार व्यक्त करती रहीं, जिसे मुख्यमंत्री ने भी मुस्कुराते हुए बड़े ही उत्साह से सुना। उन्होंने बेटियों से संवाद किया, उन्हें सफल जीवन का 'आशीष' दिया और हर कदम पर सरकार के साथ होने का विश्वास भी दिलाया। 

 

रक्षाबंधन पर स्कूली छात्राओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तिलक लगाकर राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने बच्चियों को उपहार स्वरूप चॉकलेट और ओडीओपी बैग भेंट किए। एक छात्रा के आग्रह पर मुख्यमंत्री ने उसकी पॉकेट डायरी पर संदेश भी लिखा। छात्राओं से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यहां जो दृश्य देखने को मिला है, यही उत्तर प्रदेश में आए परिवर्तन को दिखा रहा है। 

 

उन्होंने कहा कि 2017 से पहले बेटियां इस तरह सुरक्षित और उन्मुक्त वातावरण में मुख्यमंत्री से न तो मिल सकती थीं और न ही सीधे संवाद कर सकती थीं। आज बड़ी संख्या में बेटियां मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर बिना किसी भय के सवाल और बातचीत कर अनुभव साझा कर रही हैं। आज न असुरक्षा का भय है और न ही किसी प्रोटोकॉल का डर है।

 

2017 से पहले स्कूल भेजने में अभिभावकों को होती थी चिंता

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले बड़ा संकट यह था कि बेटियां स्कूल तक नहीं जा पाती थीं। कई अभिभावक बेटियों की पढ़ाई बंद कर देते थे या उन्हें घर से दूर दूसरे प्रदेशों के हॉस्टल में रखने को मजबूर होते थे। जिस समय बेटी को अपने माता-पिता का सबसे अधिक संरक्षण मिलना चाहिए, उस समय उसका दूर रहना मजबूरी बन जाता था। आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं और बेटियां सुरक्षित वातावरण में शिक्षा हासिल कर रही हैं।

 

जन्म से लेकर स्नातक तक बेटियों के लिए योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी स्नातक तक की पढ़ाई के लिए योजनाबद्ध तरीके से व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से बेटियों को सहायता दी जा रही है। शादी योग्य होने पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के जरिए मदद उपलब्ध कराई जा रही है। स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाली बेटियों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है। मेधावी छात्राओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए स्नातक स्तर की 50 हजार मेधावी बेटियों को स्कूटी प्रदान करने की योजना भी आगे बढ़ाई जा रही है। 

 

यूपी पुलिस में महिला कर्मियों की संख्या 10 हजार से बढ़कर 45 हजार हुई

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बेटी किसी से कम नहीं है।  2017 से पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या महज करीब 10 हजार थी। आज यह संख्या बढ़कर 45 हजार हो चुकी है और जल्द ही यह आंकड़ा 50 हजार तक पहुंचने वाला है। इसका परिणाम है कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

 

यूपी अब 'बीमारू' नहीं, देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का सीधा संबंध प्रदेश के विकास से है। आज उत्तर प्रदेश की बेटियां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़कर प्रदेश और देश को आगे ले जाने में योगदान दे रही हैं। यह बदलाव केवल योजनाओं का परिणाम नहीं, बल्कि बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर है। कभी बीमारू राज्य के रूप में पहचाना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज तेजी से आगे बढ़ रहा है और भारतीय अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है। बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा, सम्मान और स्वावलंबन इसी परिवर्तन की महत्वपूर्ण तस्वीर है।

 

75 जनपदों की छात्राओं ने दी रक्षाबंधन की बधाई

इस दौरान 75 जनपदों की छात्राओं की वीडियो क्लिप भी प्रदर्शित की गई। इसमें छात्राओं ने अपना परिचय देते हुए मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की बधाई दी और उन्हें राखी भेजने की बात कही। इस दौरान कई छात्राओं ने अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री के सामने अपनी आकांक्षाएं और सवाल भी रखे। कक्षा आठ की शैल कुमारी ने कहा कि उनके स्कूल में कंप्यूटर लैब की सुविधा है और वह कंप्यूटर चलाना भी सीख चुकी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि सरकार की ओर से विद्यार्थियों को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

 

टीवी पर देखते थे सीएम सर को, आज सामने हैं

पायनियर मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज की कक्षा आठ की छात्रा समृद्धि वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री जी से आमने-सामने मिलना मेरे लिए गोल्डेन अपॉर्च्युनिटी रहा। बचपन से सीएम सर को टीवी पर देखती थी। उनसे आमने-सामने मिलने की इच्छा रक्षाबंधन पर पूरी हो गई। श्री गुरु नानक गर्ल्स इंटर कॉलेज की कक्षा सात की छात्रा आयशा बानो ने सीएम से कहा कि आपसे मिलकर और आपका आशीर्वाद पाकर बेहद खुशी हुई। आपका आशीर्वाद हमेशा बच्चों पर बना रहे।

 

मुझे भी आपके जैसा नेता बनना है

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मलिहाबाद की कक्षा नौ की छात्रा वैष्णवी पाल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात को जीवन का बेहद खास अवसर बताया। उसने कहा कि टीवी पर मुख्यमंत्री को देखकर मेरे मन में भी उनकी तरह नेता बनने की इच्छा पैदा हुई। मुख्यमंत्री से मिलने की जानकारी मिलने के बाद वह इस दिन का इंतजार कर रही थी। वैष्णवी ने बताया कि वह हॉकी खिलाड़ी है और राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुई है। कस्तूरबा गांधी विद्यालय में मिली सुविधाओं और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उसे आगे बढ़ने का अवसर दिया।

 

इसी विद्यालय की छात्रा दिव्या ने बताया कि पहले उसका स्कूल कक्षा आठ तक था, लेकिन अब कक्षा नौ से 12वीं तक की पढ़ाई की सुविधा मिलने से वह बेहद खुश है। वह फुटबॉल खेलती है और राज्य स्तर तक प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है। कक्षा सात की छात्रा अंजावती सिंह ने भी मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए बताया कि वह हॉकी और कराटे खिलाड़ी है। हॉकी में उनका राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन हुआ है, जबकि कराटे में उसने राज्य स्तर पर कांस्य पदक हासिल किया है।

 

सोशल मीडिया के दौर में चुनौतियों पर सवाल

द संस्कृति स्कूल लखनऊ की छात्राओं ने भी मुख्यमंत्री से संवाद किया। एक छात्रा ने शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। कक्षा आठ की श्रेयशी सिंह ने मुख्यमंत्री से सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच विद्यार्थियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर सवाल किया। उसने पूछा कि सोशल मीडिया के दौर में जब कुछ खराब चीजें भी सामने आती हैं, तो विद्यार्थी उनसे दूर रहकर अपना ध्यान पढ़ाई और लक्ष्य पर कैसे केंद्रित रख सकते हैं।

 

स्मार्ट फोन से दूरी और अच्छी पुस्तकों की आदत

छात्रा के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले अच्छी सोच विकसित करनी होगी और अपने लक्ष्य के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। आज के दौर में तकनीक महत्वपूर्ण है, लेकिन उसकी भी सीमा और आवश्यकता है। तकनीक का इस्तेमाल आवश्यकता के अनुरूप होना चाहिए। स्मार्टफोन आज की पीढ़ी का बहुत अधिक समय खर्च कर रहा है। अगर किसी मशीन या तकनीक पर हमारी निर्भरता इतनी बढ़ जाए कि वह हमारी सोचने-समझने की क्षमता और रचनात्मकता को कमजोर करने लगे, तो उससे दूरी बनाना जरूरी है।

 

मुख्यमंत्री ने उदाहरण दिया कि एक समय लोग बिना कैलकुलेटर के गिनती और पहाड़े याद रखते थे तथा गणित के सवालों का तत्काल जवाब दे देते थे। कैलकुलेटर पर निर्भरता बढ़ने के साथ लोगों की याददाश्त पर भी इसका असर पड़ा। स्मार्टफोन डिजिटल लाइब्रेरी, अच्छे शैक्षिक कंटेंट और ऑनलाइन शिक्षा के लिए उपयोगी माध्यम हो सकता है। पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन इसमें उपलब्ध हर सामग्री हमारे हित में हो, यह जरूरी नहीं है। अनावश्यक कंटेंट से दूरी बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने अत्यधिक स्मार्टफोन इस्तेमाल के दुष्परिणामों के प्रति भी आगाह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक स्मार्टफोन देखने से आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है और सोचने-समझने की क्षमता भी कमजोर हो सकती है। जो बच्चे चार से छह घंटे स्मार्टफोन पर बिताते हैं, उन्हें धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करने का प्रयास करना चाहिए।

 

सोशल मीडिया पर अच्छे-बुरे दोनों कंटेंट

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अच्छे और बुरे, दोनों कंटेंट मौजूद हैं। इसलिए केवल आवश्यकता, पाठ्यक्रम व प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी सामग्री ही देखनी चाहिए। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के इस्तेमाल की भी सीमा निर्धारित होनी चाहिए। सीएम योगी ने प्रदेश के बच्चों से स्मार्टफोन पर अनावश्यक समय खर्च करने के बजाय अच्छी और प्रेरणादायी पुस्तकें पढ़ने की आदत विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम के अलावा भी अच्छी किताबें पढ़ना और लिखने की आदत डालना आपके व्यक्तित्व और ज्ञान के विकास में लाभदायक होगा।

 

“मैं स्वयं मुश्किल से आधा घंटा स्मार्टफोन इस्तेमाल करता हूं”

मुख्यमंत्री ने छात्रा से अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं बहुत कम बमुश्किल आधा घंटा स्मार्टफोन का उपयोग करता हूं और वह भी राज्य से जुड़े किसी महत्वपूर्ण विषय या मुद्दे के लिए। अन्यथा स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करता। मुझे मालूम है कि स्मार्टफोन मेरा अधिक समय खराब कर सकता है और इससे प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर काम करने के लिए जरूरी समय प्रभावित हो सकता है। सीएम ने छात्राओं से कहा कि आपको भी स्मार्टफोन से दूरी बनानी चाहिए। 

 

छात्रा ने पूछा, कैसे संभालते हैं सर्वाधिक आबादी वाला प्रदेश

संवाद के दौरान संस्कृति विद्यालय की छात्रा श्रेजा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि देश में सबसे अधिक आबादी वाले उत्तर प्रदेश को वह कैसे संभालते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 25 करोड़ से अधिक आबादी रहती है, लेकिन यह आबादी चुनौती नहीं बल्कि प्रदेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। जो लोग आबादी को चुनौती मानते थे, उन्होंने यूपी को बीमारू बना दिया था। हमारी सरकार ने इसी आबादी को डेमोग्राफिक डिविडेंड से जोड़ते हुए युवाओं की स्किलिंग, रोजगार और प्रदेश के विकास से जोड़ने का काम किया।

 

25 करोड़ लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ा यूपी

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्केल के अनुरूप स्किलिंग के लिए प्लेटफॉर्म तैयार किए गए और स्किलिंग को रोजगार से जोड़ने का प्रयास हुआ है। रोजगार को प्रदेश के विकास और विकास को मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा गया। जब इतनी बड़ी आबादी एक साथ आगे बढ़ती है और एक साथ सोचती है तो उसके परिणाम भी सामने आते हैं। आज यूपी बीमारू प्रदेश नहीं है, बल्कि देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। नौ वर्ष पहले प्रदेश की गिनती देश के पिछड़े राज्यों में होती थी, लेकिन आज सबसे प्रगतिशील राज्यों में यूपी की गिनती होती है। 25 करोड़ लोगों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को शुद्ध नीयत और स्पष्ट नीति के साथ आगे बढ़ाने का परिणाम प्रदेश के सामने है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि जीवन में नीयत शुद्ध और लक्ष्य स्पष्ट हो तो परिणाम जरूर प्राप्त होता है।

 

अटल आवासीय विद्यालयों में निर्माण श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा

अटल आवासीय विद्यालय की कक्षा छह की छात्रा अग्रिमा ने मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके साथ अपने ग्रुप की फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने खुशी से फोटो खिंचवाने के लिए सहमति दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से प्रदेश सरकार ने निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए इन विद्यालयों की शुरुआत की है। निर्माण श्रमिकों के माता-पिता काम के सिलसिले में अलग-अलग स्थानों पर जाते रहते हैं, जिसके कारण उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 18 अटल आवासीय विद्यालय शुरू किए गए हैं। इन विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिल रही हैं तथा यहां पढ़ने वाले बच्चे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

टीवी पर देखा, आज आमने-सामने मिलने की खुशी

कार्यक्रम में एनएस पब्लिक स्कूल की छात्रा सौम्या ने मुख्यमंत्री से मिलकर खुशी जताई। सौम्या ने कहा कि वह मुख्यमंत्री को अब तक टीवी पर देखती थी, लेकिन आज उनसे वास्तविक रूप से मिलकर उसे बहुत अच्छा लग रहा है। कक्षा तीन की छात्रा याशिका सोनकर ने भी मुख्यमंत्री से संवाद किया। छात्रा ने अपना परिचय देते हुए बताया कि मैंने आपको कई बार टीवी पर देखा है और आज मैं आपसे आमने-सामने बात कर रही हूं। याशिका ने भी मुख्यमंत्री से अपने ग्रुप के साथ फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई और 'जय हिंद-जय भारत' नारे के साथ अपनी बात पूरी की।

नेपाल बाढ़ हादसा : फंसे हुए गुजरातियों की मदद के लिए गुजरात सरकार सक्रिय, प्रवक्ता मंत्री जीतू वाघानी ने दी बड़ी जानकारी

नेपाल बाढ़ हादसा : फंसे हुए गुजरातियों की मदद के लिए गुजरात सरकार सक्रिय, प्रवक्ता मंत्री जीतू वाघानी ने दी बड़ी जानकारी

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नेपाल में फंसे गुजरात के नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए गुजरात सरकार पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। राज्य सरकार के प्रवक्ता मंत्री जीतू वाघानी ने बताया कि राज्य सरकार लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में है। इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सीधी बातचीत की है, ताकि राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा सकें। 

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सहायता के लिए हेल्पलाइन और डेटा कलेक्शन

 

फंसे हुए नागरिकों की सहायता के लिए राज्य सरकार ने आपातकालीन संपर्क (हेल्पलाइन) नंबर जारी किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री से स्थिति पर चर्चा की है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) द्वारा फंसे हुए गुजरातियों का पूरा विवरण जुटाया जा रहा है। जिन लोगों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है, उनकी जानकारी भी साझा की गई है और जिला स्तर पर भी आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। 

 

नेपाल में बाढ़ से भारी नुकसान

 

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कारण जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और यातायात तथा संचार ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के 35 बड़े पुल और 45 झूला पुल बह गए हैं। बुनियादी ढांचे को पहुंचे इस नुकसान के कारण कई क्षेत्रों के बीच संपर्क टूट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाई आ रही है। 

 

सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ बड़ा खुलासा

 

नेपाल सरकार द्वारा प्लेनेट लैब्स और लैंडसैट की सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि रसुवागढ़ी सीमा से लगभग 18 किलोमीटर ऊपर लेंडी नदी का प्रवाह बाधित हो गया है। नदी में आए इस अवरोध के कारण तटीय क्षेत्र में लगभग 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक बड़ी अस्थायी (कृत्रिम) झील बन गई है।

 

अचानक बाढ़ (फ़्लैश फ़्लड) का खतरा और प्रशासन की चेतावनी

 

नेपाल सरकार ने इस स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है कि यदि यह प्राकृतिक झील का बांध टूटता है, तो निचले इलाकों में अचानक भीषण बाढ़ (फ़्लैश फ़्लड) आ सकती है। इस खतरे को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले सभी नागरिकों तथा संबंधित अधिकारियों को अत्यधिक सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं।

Rajgarh Bus Accident : राजगढ़ में बड़ा स्लीपर बस हादसा, 4 यात्रियों की मौत, ब्रिज पर तिरछी हुई बस, नीचे गिरे यात्री

Rajgarh Bus Accident : राजगढ़ में बड़ा स्लीपर बस हादसा, 4 यात्रियों की मौत, ब्रिज पर तिरछी हुई बस, नीचे गिरे यात्री

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मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में रक्षाबंधन के दिन बड़ा सड़क हादसा हो गया। एबी रोड पर ब्यावरा के भोपाल बायपास के पास एक स्लीपर कोच बस घुमावदार ब्रिज पर हादसे का शिकार हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में 4 यात्रियों की मौत की सूचना है, जबकि कई यात्री घायल हुए हैं।

 

बताया जा रहा है कि करीब 90 डिग्री के घुमावदार ब्रिज पर स्लीपर बस अचानक तिरछी हो गई और सड़क पर रगड़ाते हुए आगे बढ़ती चली गई। बस के ऊपरी हिस्से में सो रहे यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला। इस दौरान कई यात्री बस के शीशे टूटने के बाद नीचे जा गिरे।

 

सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने देखा हादसा

 

हादसा सुबह करीब 7:35 बजे हुआ। उस समय आसपास के लोग मॉर्निंग वॉक के लिए निकले हुए थे। प्रत्यक्षदर्शी एडवोकेट अंकुर राजन के मुताबिक, उन्होंने अपनी आंखों के सामने बस से तीन यात्रियों को ऊपरी बर्थ से शीशा टूटने के बाद नीचे गिरते देखा।

 

हादसा देखते ही स्थानीय लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि सूचना देने के बाद भी एंबुलेंस को पहुंचने में करीब 30 मिनट लग गए। स्थानीय लोगों ने इस दौरान घायलों की मदद की।

 

बस से नीचे गिरते गए यात्री

 

घुमावदार ब्रिज पर बस के तिरछे होकर रगड़ाने के कारण ऊपर की बर्थ पर सो रहे यात्रियों में अफरातफरी मच गई। कई यात्री बस के अंदर से नीचे गिर गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। महिला और बच्चे भी बदहवास नजर आए।

 

पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने में मदद की। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने उनका इलाज शुरू किया।

 

त्योहार पर घर लौट रहे थे यात्री

 

बताया जा रहा है कि बस में सवार यात्री रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के लिए अपने-अपने घर जा रहे थे। त्योहार के दिन हुए इस दर्दनाक हादसे ने यात्रियों और उनके परिजनों को झकझोर दिया। हादसे की सूचना मिलने के बाद कुछ परिजन अस्पताल भी पहुंच गए हैं। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। हादसा किस वजह से हुआ और बस में कितने यात्री सवार थे, इसकी विस्तृत जानकारी जांच के बाद सामने आएगी।

यूपी में ‘आधी आबादी’ पर दांव, क्या डिंपल यादव बन सकती हैं सपा का CM चेहरा?

यूपी में 'आधी आबादी' पर दांव, क्या डिंपल यादव बन सकती हैं सपा का CM चेहरा?

Dimple Yadav: उत्तर प्रदेश में आगामी ‍विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक बिसात पर समाजवादी पार्टी (सपा) 'आधी आबादी' यानी महिलाओं को साधने में पूरी ताकत से जुट गई है। रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं के लिए 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' जैसी बड़ी घोषणाओं के केंद्र में मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव नजर आईं।

 

इस बीच, जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव से डिंपल यादव को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने को लेकर सवाल किया गया, तो उनके गोल-मोल जवाब और रहस्यमयी मुस्कान ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। इस समय यूपी में योगी आदित्य के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार है। योगी भी राज्य में तीसरी बार सरकार बनाने की जी-तोड़ प्रयास कर रहे हैं। 

 

दरअसल, हाल के दिनों में डिंपल यादव के राजनीतिक कद और शैली में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। संसद के मानसून सत्र से लेकर दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन तक, डिंपल बेहद मुखर होकर पार्टी की बात रख रही हैं। 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' के तहत महिलाओं को सालाना 40,000 रुपए देने के बड़े चुनावी वादे का ऐलान भी अखिलेश ने डिंपल यादव के हाथों ही कराया। इससे यह साफ संदेश जाता है कि सपा अब महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर डिंपल को 'फ्रंटफुट' पर रखकर आगे बढ़ाना चाहती है।

अखिलेश की रहस्यमयी मुस्कान!

पत्रकारों द्वारा जब डिंपल यादव को राज्य में पार्टी का सीएम चेहरा बनाए जाने पर सीधा सवाल पूछा गया, तो अखिलेश यादव ने सीधे न तो इसका समर्थन किया और न ही सवाल का खंडन किया। वे केवल मुस्करा कर रह गए। इससे इन अटकलों को बल मिला है। दरअसल, भाजपा की की महिला केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं की काट के लिए सपा एक मजबूत और सर्वमान्य महिला चेहरे की तलाश में है, जिसमें डिंपल यादव पूरी तरह फिट बैठती हैं। इसके साथ ही डिंपल की सौम्य और सादगी से भरी छवि महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। अखिलेश ने डिंपल को आगे करके यह संकेत दिया है कि पार्टी का नेतृत्व एक नया और व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने के लिए तैयार है।

कौन हैं डिंपल यादव?

डिंपल यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख महिला चेहरा और समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता हैं। वह वर्तमान में मैनपुरी लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद हैं। डिंपल यादव, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की बहू तथा सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी हैं। उनका जन्म 15 जनवरी 1978 को पुणे (महाराष्ट्र) में एक सैन्य परिवार में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे, जिसके कारण उनकी शुरुआती पढ़ाई अलग-अलग स्थानों पर हुई। उन्होंने अपनी इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल, लखनऊ से पास की। वे लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं। 

 

डिंपल यादव पहली बार 2012 में कन्नौज लोकसभा सीट से निर्विरोध सांसद चुनी गई थीं। इसके बाद 2014 में भी वह कन्नौज से सांसद रहीं। 2022 में मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उन्होंने मैनपुरी से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। डिंपल यादव अपनी सादगी, सौम्यता और महिलाओं व युवाओं के मुद्दों को मुखरता से उठाने के लिए जानी जाती हैं। हाल के समय में वे पार्टी के भीतर नीतिगत फैसलों और अभियानों में बेहद सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

CM योगी का सख्त निर्देश- विकास परियोजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं, एक्सप्रेसवे से डिजिटल लाइब्रेरी तक काम समय पर पूरा करें

CM योगी का सख्त निर्देश- विकास परियोजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं, एक्सप्रेसवे से डिजिटल लाइब्रेरी तक काम समय पर पूरा करें

Yogi adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की बैठक में प्रदेश में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल परियोजनाओं की घोषणा और स्वीकृति तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक परियोजना को तय समय में जमीन पर उतारना और उसका वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचाना है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि अधिग्रहण, निविदा, विभागीय समन्वय अथवा अन्य स्तर पर लंबित कार्यों का तत्काल समाधान किया जाए और जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं है, उनकी नियमित समीक्षा कर जवाबदेही तय की जाए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में बेहतर कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। एक्सप्रेसवे को केवल परिवहन परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 6 अगस्त को निविदा प्रकाशित हो चुकी है और सितंबर में इसका चयन किया जाना है। फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक 1,339.04 हेक्टेयर भूमि में 1,222.25 हेक्टेयर, यानी 91.28 प्रतिशत भूमि प्राप्त हो चुकी है। आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 80.43 प्रतिशत, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 84.82 प्रतिशत और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 79.27 प्रतिशत भूमि प्राप्त हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने और परियोजनाओं को निर्धारित समय में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। 

 

मेरठ-हरिद्वार, विंध्य और विंध्य पूर्वांचल स्पर एक्सप्रेसवे की प्लानिंग के संबंध में बैठक में बताया गया कि सत्यापन का कार्य पूरा हो चुका है और अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को भूमि संबंधी कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि इन महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो।
 

ग्रेटर नोएडा के मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाए, जिससे उत्तर प्रदेश देश और दुनिया की सप्लाई चेन का मजबूत केंद्र बन सके। उन्नाव के एक्वा बिजनेस प्रोजेक्ट की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए। कानपुर के बिनगवां में 40 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पनकी पावर प्लांट को उपचारित जल उपलब्ध कराने की परियोजना का कार्य पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी परियोजनाओं में संबंधित विभागों के इंजीनियरों की क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और अनुरक्षण में गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। 

 

स्वास्थ्य संस्थानों, अस्पतालों और होटल-गेस्ट हाउस में अग्नि सुरक्षा की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने फायर एनओसी से संबंधित प्रभावी डिजिटल डेटाबेस तैयार करने तथा एनओसी की वैधता समाप्त होने से पहले नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए। 
 

लखनऊ में सीवर लाइन और मैनहोल के भीतर से गुजर रहे विद्युत एवं ओएफसी केबलों की स्थिति की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे में सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाए। जहां भी केबल सीवर लाइन अथवा मैनहोल से गुजर रहे हैं, उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार शिफ्ट किया जाए और कार्य में तेजी लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यों में स्थानीय निकाय से एनओसी जरूर प्राप्त कर लें। 

 

विद्युत व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां लाइन लॉस अत्यधिक हैं, वहां वास्तविक कारणों की पहचान कर ठोस कार्रवाई की जाए। बिजली चोरी, बिलिंग और वसूली की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए तथा अत्यधिक लाइन लॉस वाले क्षेत्रों में डिस्कॉम के जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए।
 

ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्हें ग्रामीण विद्यार्थियों और युवाओं के लिए अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल ज्ञान के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि डिजिटल लाइब्रेरियों से जुड़े सभी आवश्यक कार्य 30 सितंबर तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। 

 

जीरो पावर्टी अभियान की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चिन्हित सभी परिवारों को आवास की सुविधा मिलनी चाहिए। जिन पात्र परिवारों का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में नहीं है, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा पात्र परिवारों को राशन, आयुष्मान कार्ड, शौचालय, आवास और अन्य संबंधित योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए तथा परिवार के कम से कम एक सदस्य को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने का प्रयास हो। बैठक में बताया गया कि 12.50 लाख चिन्हित परिवारों में नौ लाख परिवार आवास के लिए पात्र पाए गए हैं। इनमें 4.50 लाख लोगों का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची में है, जबकि करीब पांच लाख परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना से लाभान्वित किया जाना है। 6.67 लाख परिवारों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। बीओसीडब्ल्यू में पंजीकृत परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाने की कार्रवाई आगे बढ़ी है। 

 

श्रमिकों के लिए संचालित लेबर अड्डों की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लेबर अड्डों का सर्वे कर वहां पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, स्नान, चिकित्सा और भोजन जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। श्रमिकों के लेबर कार्ड और आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। प्रत्येक नगर निगम क्षेत्र में मेडिकल मोबाइल यूनिट, मोबाइल कैंटीन और आवश्यकतानुसार अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। चंदौली में निर्मित फिश मार्केट के संचालन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तैयार परिसंपत्तियों का तत्काल और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। 

 

गोरखपुर में निर्माणाधीन 30 हजार क्षमता वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने के साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि निर्माण कार्य दिसंबर 2025 में शुरू हुआ है और इसे दिसंबर 2027 तक पूरा किया जाना है। इसी तरह मेरठ के मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विभिन्न नीतियों के तहत देय वित्तीय प्रोत्साहनों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों को नीति के अनुरूप स्वीकृत वित्तीय प्रोत्साहन समय पर जारी किए जाएं। 

 

राजस्व विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत और पैमाइश से जुड़े मामलों का निस्तारण आम नागरिक के अधिकार और संपत्ति से सीधे जुड़ा विषय है। उन्होंने मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से प्रयागराज में निरस्त किए गए विरासत संबंधी आवेदनों की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि निरस्तीकरण की पूरी कार्रवाई मेरिट के आधार पर ही हुई हो और पात्र व्यक्ति किसी भी स्थिति में अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो। बैठक में बताया गया कि निर्विवाद विरासत के मामलों में सर्वाधिक 13,386 आवेदन प्रयागराज में निरस्त किए गए हैं। पैमाइश से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने और प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व अधिकारियों की नियमित समीक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि भूमि संबंधी विवाद अनावश्यक रूप से लंबित न रहें।

इंसानियत शर्मसार! नेपाल बाढ़ त्रासदी में दिखी हैवानियत, लाशों से गहने नोच रहे हैं नराधम

इंसानियत शर्मसार! नेपाल बाढ़ त्रासदी में दिखी हैवानियत, लाशों से गहने नोच रहे हैं नराधम

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नेपाल में हालिया विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। 350 से ज्यादा लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने के बीच सोशल मीडिया पर सामने आई कुछ तस्वीरों और दावों ने इस त्रासदी को और भी विचलित करने वाला बना दिया है। इनमें दावा किया जा रहा है कि बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों से गहने निकाले जा रहे हैं।

 लोग बहते शवों से गहने नोचते दिखाई दे रहे हैं।

एक्स पर वायरल एक पोस्ट में दावा किया गया है कि महिलाओं के शवों से आभूषण निकाले जा रहे हैं और यह किसी एक व्यक्ति की चोरी नहीं, बल्कि कथित तौर पर कई लोगों की मौजूदगी में की जा रही सामूहिक लूट है। हालांकि, वायरल तस्वीर की तारीख, स्थान की कोई जानकारी नहीं है।  शवों से आभूषण लूटने की घटना प्राकृतिक आपदा के बीच मानवीय संवेदनाओं के लिए बेहद गंभीर और शर्मनाक स्थिति है। आपदा में अपने परिजनों को खो चुके परिवारों के लिए मृतकों की गरिमा और सम्मान बनाए रखना समाज की बुनियादी जिम्मेदारी है।

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बाढ़ ने मचाई भारी तबाही

नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों को अपनी चपेट में लिया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ, चट्टानों और मलबे के खिसकने से अचानक आए तेज बहाव ने सड़कों, घरों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।  इस प्राकृतिक आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं और राहत एवं बचाव अभियान जारी है। कई प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना भी चुनौती बना हुआ है।

यूपी की आबादी चुनौती नहीं, बड़ी संभावना : CM योगी

यूपी की आबादी चुनौती नहीं, बड़ी संभावना : CM योगी

CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया की सबसे प्रतिभाशाली, ऊर्जावान युवा वर्कफोर्स यूपी में है। इन्हें प्लेटफॉर्म उलब्ध कराना सरकार का काम है। राजदूत, उच्चायुक्त समेत विदेशी प्रतिनिधिमंडल मुझसे पूछते हैं कि उत्तर प्रदेश की आबादी 25 करोड़ से अधिक है, इसलिए आपके सामने बड़ी चुनौती है। मैं उनसे कहता हूं कि जितनी बड़ी चुनौती, उतनी ही बड़ी संभावना है। यूपी की जिस आबादी को लोग चुनौती कहते हैं, हम उसे डेमोग्रॉफिक डेविडेंड मानते हैं। इनके स्केल को स्किलिंग से जोड़कर इसका उपयोग डेमोग्रॉफिक डेविडेंड के रूप में कर पाते हैं।

 

मुख्यमंत्री गुरुवार को लोकभवन में स्टार्टअप नीति के अंतर्गत 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपए से अधिक और 9 इनक्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि का वितरण करने के उपरांत युवा उद्यमियों व उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 पुस्तिका का विमोचन तथा उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन पोर्टल का शुभारंभ भी किया। इस दौरान लघु फिल्म के माध्यम से यूपी के स्टार्टअप इकोसिस्टम से अवगत कराया गया।

2014 से पहले देश में 500 स्टार्टअप्स, अब ढाई लाख से अधिक 

सीएम योगी ने 2014 से पहले और इसके बाद भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम की चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत में व्यापक बदलाव दिख रहा है। 2014 के पहले देश में मात्र 500 स्टार्टअप्स थे, अब इनकी संख्या ढाई लाख से ऊपर है। स्टार्टअप इकोसिस्टम अब भारत के युवाओं के सपनों की उड़ान को गति दे रहा है। 2017 से पहले यही स्थिति उत्तर प्रदेश की भी थी। उस समय यहां कुल 120 स्टार्टअप थे, लेकिन डबल इंजन सरकार के प्रोत्साहन व सकारात्मक वातावरण के कारण आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक हो गई। इसमें 8 यूनिकॉर्न हैं। यूपी की स्टार्टअप पॉलिसी के अंतर्गत आज 107 स्टार्टअप व 9 इन्क्यूबेटर्स को प्रोत्साहन प्राप्त हो रहा है। यूपी स्टार्टअप नीति के तहत 12 नए इन्क्यूबेटर्स को भी मान्यता प्रदान कर रहे हैं।

2017 से रोजगार, इन्क्यूबेटर्स, शिक्षा, इनोवेशन की चर्चा एक सपना 

सीएम ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ के कई स्टार्टअप्स का मैंने दौरा किया था। अपने कार्यों की बदौलत उन्होंने यूपी की पहचान और धारणा को बदलने में बड़ी भूमिका का निर्वहन किया। सीएम ने 2017 से पहले यूपी के प्रति नकारात्मक धारणा का जिक्र करते हुए यहां की अव्यवस्था को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाहर जाने पर सांसद के रूप में मैंने भी महसूस किया कि लोग शक की निगाहों से देखते थे। धारणा यह थी कि जहां सड़कों में गड्ढे और बिजली के अभाव में अंधेरा दिखने लगे, समझो यूपी आ गया। उत्सव से पहले उपद्रव होता था। स्कूल-कॉलेज, बाजार महीनों बंद रहते थे। आमजन कर्फ्यू के साये में जीने को विवश था। उस समय 5 वर्ष में 700 से अधिक दंगे हुए। उन परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश के अंदर रोजगार, इन्क्यूबेटर्स, शिक्षा, इनोवेशन की चर्चा करना एक सपना ही था। 

सरकार की उदासीनता से प्रदेश हो गया था ‘बीमारू’

सीएम ने कहा शिक्षा, रोजगार, स्टैंडअप, स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर्स आदि के बारे में इकोसिस्टम तब तैयार होता है, जब धारणा के साथ ही आमजन की मानसिकता भी उसके अनुरूप दिखाई दे। हम अनुकूल वातावरण बनाने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें। सरकार सकारात्मक मानसिकता की हो और उसका आमजन से जुड़ाव हो, लेकिन 2017 के पहले न पॉलिसी थी और न ही सरकार की इच्छाशक्ति। लोग अजीब वातावरण में जीने को मजबूर थे, इसका परिणाम था कि अनंत संभावनाओं वाला उत्तर प्रदेश ‘बीमारू’ हो गया। 

आधे स्टार्टअप का संचालन कर रही ‘आधी आबादी’ 

सीएम ने कहा कि आधे स्टार्टअप का संचालन ‘आधी आबादी’ कर रही है। सरकार ने आईआईटी कानपुर, बीएचयू, ट्रिपल आईटी, एकेटीयू, आईआईएम से आए हर प्रस्ताव को प्रोत्साहित करने के लिए फंड व सहयोग उपलब्ध कराया। स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करने के लिए 2019 में सरकार ने सिडबी के साथ फंड ऑफ फंड्स की व्यवस्था की थी। हालांकि बीच में कुछ गतिरोध आया था, लेकिन बाद में परिवर्तन कर इसे तेजी से बढ़ाया भी गया। 

इनोवेशन व रिसर्च के लिए सभी विश्वविद्यालयों को दिया फंड

सीएम ने नए स्टार्टअप के लिए नया प्रोत्साहन देने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नई पॉलिसी के तहत हमने हाल में इसे अच्छे ढंग से बढ़ाया है। सीएम ने उच्च शिक्षण संस्थानों का आह्वान किया कि केवल परंपरागत पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें, बल्कि विश्वविद्यालयों-इंस्टीट्यूट में इनोवेशन को आरएंडडी के लिए बेहतरीन माहौल दें। सरकार ने इनोवेशन व रिसर्च की एक्टिविटी को प्रोत्साहित करने के लिए सभी विश्वविद्यालयों को अलग से फंड दिया है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की छवि को और बेहतर करना है।

‘नया यूपी’ पीछे हटने वाला नहीं

सीएम ने कहा कि हम लोगों ने 2017 व 2018-19 में जो प्रयास किए, उसके सकारात्मक परिणाम अब दिख रहे हैं। 2017 के पहले का ‘बीमारू यूपी’ बॉटम-3 से देश की टॉप-3 इकॉनमी में शामिल हुआ है। 9 वर्ष में उप्र की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, महिला वर्कफोर्स की भागीदारी व बड़े उद्योगों की संख्या तीन गुनी हुई। ‘नया यूपी’ पीछे हटने वाला नहीं, बल्कि सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में खुद को साबित कर रहा है। 

सरकार हर कदम पर रहेगी साथ 

सीएम ने कहा कि आईआईटी कानपुर मेडटेक व ड्रोन टेक्नोलॉजी के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाना चाहती थी, आईआईटी बीएचयू यूपीएग्रीज के साथ काम करना और एसजीपीआईजी भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करना चाहता था। सरकार ने इन सभी से कहा कि इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन आदि क्षेत्रों में जहां भी आवश्यकता पड़ेगी, सरकार हर सहयोग के लिए खड़ी है। हम एक दर्जन से अधिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का संचालन/निर्माण कर रहे हैं। 

स्टार्टअप इकोसिस्टम में आबादी के अनुसार दर्ज हो यूपी की उपस्थिति 

सीएम ने उम्मीद जताई कि स्टार्टअप इकोसिस्टम में आबादी के अनुसार यूपी की उपस्थिति दर्ज होती दिखाई दे। भारत में आबादी के अनुरूप यूपी का हिस्सा 1/6 है, जबकि स्टार्टअप की तुलना में यह हिस्सा 1/10 है, यानी भारत के कुल स्टार्टअप का 20 प्रतिशत हिस्सा यूपी में होना चाहिए। इसके लिए तैयारी करनी होगी। डीपटेक के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने वालों समेत सभी स्टार्टअप्स का सीएम ने आह्वान किया कि वे इकोसिस्टम को गति प्रदान करने और युवाओं के सपनों को उड़ान देने के लिए आगे आएं। 

यूपी जितनी संभावनाएं देश व दुनिया में कहीं नहीं 

सीएम ने कहा कि यूपी में लैंड, सुरक्षा की दिक्कत नहीं है। पॉलिसी पैरालिसिस से उबर चुके हैं। यूपी में समर्पित पॉलिसी है। हर क्षेत्र में यहां जितनी संभावनाएं हैं, उतनी देश व दुनिया में कहीं नहीं प्राप्त होंगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि आवश्यकता पड़ने पर सिडबी के साथ किए गए फंड ऑफ फंड्स की राशि बढ़ाई जाएगी। लीज पर लैंड, प्लग एंड प्ले मॉडल पर स्पेस उपलब्ध कराने में सरकार मदद करेगी, लेकिन आपको स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ाने के लिए गति देनी होगी।

हर कदम को प्रोत्साहित करेगी यूपी सरकार

सीएम ने आशा जताई कि डबल इंजन सरकार के साथ मिलकर आप सभी यूपी को बेहतरीन प्लेटफॉर्म दिलाने में सहयोग करेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि युवाओं के हित में यूपी सरकार आपके हर कदम को प्रोत्साहित करेगी और यूपी में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ाने में हरसंभव मदद करेगी। इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा, अवस्थापना व औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव आलोक कुमार, एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय आदि मौजूद रहे।

Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, सुभाष चंद्रा के NCLT मामले पर उठाए सवाल, बोले- देश में 2 सिस्टम

Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, सुभाष चंद्रा के NCLT मामले पर उठाए सवाल, बोले- देश में 2 सिस्टम

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि देश में आम लोगों और चुनिंदा अरबपतियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। राहुल गांधी ने किसानों, नौकरीपेशा लोगों और गरीब छात्रों की आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए सरकार पर चुनिंदा उद्योगपतियों के प्रति अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि कोई किसान 50 हजार रुपये नहीं चुका पाता है तो उसकी जमीन नीलाम कर दी जाती है। वहीं, कोई वेतनभोगी व्यक्ति एक भी ईएमआई चूक जाए तो बैंक उसके घर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि गरीब छात्रों के लिए शिक्षा ऋण हासिल करना भी मुश्किल है।

 

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत चुनिंदा ‘दोस्तों’ के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति की तरह है और वे जितना चाहें पैसा निकाल सकते हैं तथा अपनी सुविधा के अनुसार उसे वापस कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना दी हैं—एक मुट्ठीभर अरबपतियों के लिए और दूसरी बाकी सभी लोगों के लिए।

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सुभाष चंद्रा के मामले में NCLT का बड़ा फैसला

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राहुल गांधी के बयान के बीच मीडिया कारोबारी और जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़ा व्यक्तिगत दिवाला मामला भी चर्चा में है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत कर्ज दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ के भुगतान वाली पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि स्वीकृत दावों की तुलना में कर्जदाताओं को करीब 0.03 प्रतिशत की वसूली होगी।

 

हालांकि, इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये दावे सुभाष चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज नहीं थे। चंद्रा के अनुसार, उन्होंने विभिन्न कंपनियों के कर्ज के लिए पर्सनल गारंटर के तौर पर गारंटी दी थी। उनके मुताबिक, जिन संस्थाओं के कर्ज की उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, वे करीब ₹45,000 करोड़ की बकाया राशि में से लगभग ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं।

 

80.81 प्रतिशत वोट से पास हुआ था प्लान

NCLT के सामने पेश की गई पुनर्भुगतान योजना को नवंबर 2024 में हुई लेनदारों की बैठक में 80.814 प्रतिशत वोटिंग शेयर का समर्थन मिला था। यह IBC के तहत जरूरी तीन-चौथाई सीमा से अधिक था। कुछ प्रमुख कर्जदाताओं ने योजना का विरोध किया था, जिनमें LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank शामिल थे।

 

मामले में मूल दो सदस्यीय NCLT पीठ के बीच मतभेद के बाद तीसरे सदस्य के रूप में Nilesh Sharma को शामिल किया गया। उन्होंने योजना को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया। NCLT ने कहा कि विरोध करने वाले कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम वोटिंग शेयर था और व्यक्तिगत संपत्ति के मूल्यांकन को देखते हुए योजना को खारिज करने पर बेहतर वसूली की संभावना नहीं दिखती थी।

22 हजार करोड़ के दावे पर सिर्फ 6.5 करोड़ का भुगतान

NCLT के फैसले के अनुसार, स्वीकृत योजना में ₹22,006.57 करोड़ के दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ का भुगतान होगा। इस आधार पर कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत का ‘हेयरकट’ स्वीकार करना पड़ेगा। आसान भाषा में कहें तो प्रत्येक ₹100 के दावे पर करीब तीन पैसे की वसूली होगी।

 

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि योजना मंजूर होने के बाद वह IBC की धारा 115 के तहत सभी संबंधित कर्जदाताओं पर बाध्यकारी होगी, चाहे उन्होंने योजना के पक्ष में मतदान किया हो या विरोध में।

 

राहुल गांधी के बयान से फिर गरम हुई बहस

सुभाष चंद्रा मामले में NCLT के फैसले और राहुल गांधी के बयान के बाद बैंक कर्ज, कॉरपोरेट देनदारी, व्यक्तिगत गारंटी और दिवाला समाधान प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। हालांकि, सुभाष चंद्रा का मामला एक व्यक्तिगत गारंटर की दिवाला समाधान प्रक्रिया से जुड़ा है और इसे सीधे तौर पर उनके द्वारा स्वयं लिए गए ₹22,006 करोड़ के कर्ज के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

हर बच्चे तक शिक्षा की डिजिटल पहुंच, योगी सरकार ने यूट्यूब पर भी लगाई कक्षा

हर बच्चे तक शिक्षा की डिजिटल पहुंच, योगी सरकार ने यूट्यूब पर भी लगाई कक्षा

Yogi Govt YouTube Classes: शिक्षा को विद्यालय की चारदीवारी से आगे हर बच्चे तक पहुंचाना योगी सरकार की डिजिटल शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश के लिए पीएम ई-विद्या के पांच डीटीएच चैनलों को यूट्यूब पर भी उपलब्ध कराया गया है। इससे बाल वाटिका से कक्षा 12 तक के विद्यार्थी अपनी कक्षा के अनुरूप शैक्षिक सामग्री घर बैठे देख सकते हैं और आवश्यकता के अनुसार पाठों को दोहरा सकते हैं।

 

इस व्यवस्था से पीएम ई-विद्या की डिजिटल शैक्षिक सामग्री विद्यार्थियों के लिए अधिक सहज और सुलभ हुई है। डीटीएच और यूट्यूब दोनों माध्यमों के जरिए सीखने के अवसरों का विस्तार करते हुए योगी सरकार की डिजिटल शिक्षा पहल को घर-घर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

एससीईआरटी यूपी की डिजिटल पहल से बढ़ी पहुंच

उत्तर प्रदेश में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी यूपी) की डिजिटल शैक्षिक व्यवस्था के अंतर्गत पीएम ई-विद्या के चैनलों के माध्यम से विद्यार्थियों तक कक्षा-वार शैक्षिक सामग्री पहुंचाई जा रही है। डीटीएच के साथ यूट्यूब पर उपलब्धता से विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार इन शैक्षिक संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं।

हर कक्षा के लिए अलग चैनल

चैनल 173 पर बाल वाटिका से कक्षा 2, चैनल 174 पर कक्षा 3 से 5, चैनल 175 पर कक्षा 6 से 8, चैनल 176 पर कक्षा 9 से 10 और चैनल 177 पर कक्षा 11 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक सामग्री उपलब्ध है। कक्षावार व्यवस्था से विद्यार्थियों को अपनी कक्षा से संबंधित सामग्री तक आसानी से पहुंच मिलती है।

डीटीएच के साथ यूट्यूब की सुविधा

पीएम ई-विद्या के इन चैनलों की सामग्री अब यूट्यूब पर भी उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अतिरिक्त डिजिटल माध्यम मिला है। विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार शैक्षिक वीडियो देख सकते हैं, पढ़ाए गए विषयों को दोहरा सकते हैं और अपनी सीख को मजबूत कर सकते हैं। चैनलों को निशुल्क सब्सक्राइब करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

 

यूपी के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह हमारी सरकार ने तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। पीएम ई-विद्या के कक्षा-वार चैनलों को यूट्यूब पर उपलब्ध कराने से विद्यार्थियों को घर बैठे सीखने और अपनी पढ़ाई दोहराने का सहज अवसर मिला है।

 

संयुक्त निदेशक, SCERT डॉ. पवन सचान के मुताबिक एससीईआरटी यूपी के पीएम ई-विद्या चैनलों को यूट्यूब से जोड़ने से डिजिटल शैक्षिक सामग्री की पहुंच और व्यापक हुई है।  विद्यार्थी अपनी कक्षा के अनुसार संबंधित चैनल से जुड़कर सरलता से शैक्षिक सामग्री का लाभ उठा सकते हैं।

कक्षा के अनुसार YouTube चैनल

  • बाल वाटिका–कक्षा 2 : SCERT UP PM eVIDYA Channel 173
  • कक्षा 3–5 : SCERT UP PM eVIDYA Channel 174
  • कक्षा 6–8 : SCERT UP PM eVIDYA Channel 175
  • कक्षा 9–10 : SCERT UP PM eVIDYA Channel 176
  • कक्षा 11–12 : SCERT UP PM eVIDYA Channel 177

TVS iQube MillionR Edition लॉन्च, 145 किमी रेंज और Type-C चार्जिंग समेत मिलेंगे ये फीचर्स, हासिल किया 10 लाख यूनिट का आंकड़ा, कीमत जानेंगे तो हो जाएंगे हैरान

TVS iQube MillionR Edition लॉन्च, 145 किमी रेंज और Type-C चार्जिंग समेत मिलेंगे ये फीचर्स, हासिल किया 10 लाख यूनिट का आंकड़ा, कीमत जानेंगे तो हो जाएंगे हैरान

TVS Motor Company ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए TVS iQube MillionR Edition लॉन्च किया है। यह खास एडिशन iQube के 10 लाख यूनिट प्रोडक्शन का आंकड़ा पार करने की उपलब्धि के मौके पर पेश किया गया है। इस स्पेशल एडिशन की प्रभावी एक्स-शोरूम कीमत कर्नाटक में ₹1,40,138 बताई गई है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में सब्सिडी, टैक्स और अन्य शुल्क के कारण कीमत में बदलाव हो सकता है।

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145 किमी की रेंज और 82 किमी/घंटा टॉप स्पीड

TVS iQube MillionR Edition मौजूदा 3.5 kWh iQube वेरिएंट पर आधारित है। इसका मतलब है कि इसके मैकेनिकल सेटअप और परफॉर्मेंस में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। कंपनी ने इसमें मुख्य रूप से नया डिजाइन, अतिरिक्त स्टोरेज और कुछ उपयोगी फीचर्स जोड़े हैं। इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में 3.5 kWh बैटरी दी गई है, जो 145 किमी IDC रेंज देने का दावा करती है। इसकी टॉप स्पीड 82 किमी/घंटा है।

 

Aurora Green कलर में आया स्पेशल एडिशन

 

MillionR Edition को खास Aurora Green Dual-Tone कलर में पेश किया गया है। इसमें स्पेशल ग्राफिक्स और MillionR ब्रांडिंग दी गई है, जिससे इसे रेगुलर iQube से अलग पहचान मिलती है। इसके अलावा सीट अपहोल्स्ट्री को भी ज्यादा प्रीमियम लुक दिया गया है।

 

बढ़ा स्टोरेज, मिला Type-C चार्जिंग पोर्ट

 

TVS ने इस स्पेशल एडिशन में रोजमर्रा के इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए कई उपयोगी बदलाव किए हैं। इसमें नया फ्रंट यूटिलिटी कंपार्टमेंट दिया गया है। साथ ही स्मार्टफोन और दूसरे डिवाइस चार्ज करने के लिए USB Type-C चार्जिंग पोर्ट भी मिलता है।

 

इन बदलावों के बाद स्कूटर का कुल स्टोरेज 32 लीटर से बढ़कर 35.5 लीटर हो गया है।

 

  • TVS iQube MillionR Edition के प्रमुख स्पेसिफिकेशन
  • फीचर TVS iQube MillionR Edition
  • बैटरी क्षमता 3.5 kWh
  • IDC रेंज 145 किमी
  • टॉप स्पीड 82 किमी/घंटा
  • डिस्प्ले 12.7 सेमी TFT
  • 0-80% चार्जिंग करीब 4.5 घंटे
  • कुल स्टोरेज 35.5 लीटर
  • कलर Aurora Green Dual Tone

 

कंपनी के अनुसार, iQube MillionR Edition में 12.7 सेमी TFT इंस्ट्रूमेंट डिस्प्ले दिया गया है। इसकी 145 किमी IDC रेंज और 82 किमी/घंटा की टॉप स्पीड रेगुलर 3.5 kWh iQube के समान है। यानी यह मॉडल परफॉर्मेंस अपग्रेड के बजाय डिजाइन और सुविधा से जुड़े बदलावों पर ज्यादा केंद्रित है।

 

118 से ज्यादा कनेक्टेड फीचर्स

 

3.5 kWh iQube प्लेटफॉर्म में 118 से ज्यादा कनेक्टेड फीचर्स मिलते हैं। इनमें टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन, Distance-to-Empty जानकारी और रिमोट चार्ज स्टेटस मॉनिटरिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा Q-Park Assist भी मिलता है, जो कम स्पीड पर स्कूटर को पार्क करने या रिवर्स करने में मदद करता है।

 

TVS iQube ने हासिल किया 10 लाख यूनिट का आंकड़ा

 

MillionR Edition TVS की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के मौके पर लॉन्च किया गया है। 25 जून 2026 को TVS Motor ने घोषणा की थी कि कंपनी के होसुर प्लांट से 10 लाखवां iQube रोलआउट हुआ। यह उपलब्धि भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बढ़ती लोकप्रियता और TVS के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कारोबार के विस्तार को दर्शाती है।

 

जुलाई में iQube की बिक्री में 158% की बढ़ोतरी

 

TVS iQube की बिक्री में भी हाल के महीनों में जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। जुलाई 2026 में iQube की 59,386 यूनिट्स बिकीं, जबकि जुलाई 2025 में यह आंकड़ा 23,029 यूनिट था। इस तरह सालाना आधार पर बिक्री में करीब 158 फीसदी की वृद्धि हुई। जून 2026 में iQube की 47,331 यूनिट्स बिकी थीं। ऐसे में जुलाई की बिक्री में महीने-दर-महीने भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

 

कई बैटरी विकल्पों में उपलब्ध है iQube

 

TVS अब iQube को अलग-अलग बैटरी क्षमता और रेंज के साथ पेश कर रही है। पोर्टफोलियो में एंट्री-लेवल 2.3 kWh iQube शामिल है, जिसकी IDC रेंज 114 किमी तक है। वहीं, बड़े 5.3 kWh iQube ST की IDC रेंज 212 किमी तक बताई गई है। इन दोनों के बीच 3.5 kWh iQube MillionR Edition आता है, जो 145 किमी की दावा की गई रेंज और 82 किमी/घंटा की टॉप स्पीड के साथ पेश किया गया है।