CM मोहन यादव का चित्रकूट दौरा, दिनभर राहत-बचाव कार्यों की जानकारी लेते रहे, प्रशासन को दिए ये निर्देश

CM मोहन यादव का चित्रकूट दौरा, दिनभर राहत-बचाव कार्यों की जानकारी लेते रहे, प्रशासन को दिए ये निर्देश

Chief Minister Dr Mohan Yadav's visit to Chitrakoot

–  प्रभावित लोगों तक आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई जाए

– 31 अगस्त और 1 सितंबर को सतना के स्कूलों की छुट्टी

– चित्रकूट में अतिवृष्टि से जनता प्रभावित

Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30 अगस्त को सुबह सतना जिले के चित्रकूट में अतिवृष्टि से प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और लोगों से भेंट की। इसके बाद उन्होंने सतना के जिला प्रशासन को आवश्यक कार्यों के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओरछा (जिला निवाड़ी) में हो रही संगठन की बैठक के दौरान भी दिनभर सतना जिला प्रशासन से राहत कार्यों के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनता को राहत पहुंचाने में कोई कमी नहीं रहना चाहिए। सतना कलेक्टर द्वारा जानकारी दी गई कि अतिवृष्टि की स्थिति को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए जिले के सभी विद्यालयों में 31 अगस्त और 1 सितंबर को अवकाश घोषित किया गया है।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार अतिवृष्टि के कारण प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए अधिकारियों को तीन दिन तक चित्रकूट में रहकर आवश्यक सहायता कार्यों को सुनिश्चित करने और क्षेत्र की निरंतर निगरानी के लिए कहा गया है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रभावितों को राजस्व पुस्तक परिपत्र 6/4 के प्रावधानों के अनुसार विभिन्न तरह की हानि के लिए निर्धारित सहायता राशि प्रदान करने का कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश

  • सभी बाढ़ प्रभावित नागरिकों के लिए भोजन, वस्त्र, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित की जाएं।
  • प्रभावित लोगों तक आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई जाए, रेस्यूत  किए गए ग्रामीणों के लिए भी शुद्ध पेयजल और भोजन सुनिश्चित किया जाए।
  • बाढ़ से नुकसान के आकलन का कार्य समय पर हो। 
  • जिला प्रशासन के सभी संबंधित अधिकारी प्रभावित क्षेत्र का निरंतर दौरा एवं वहीं रात्रि विश्राम करें। एसबीआरएफ और एनडीआरएफ का समुचित सहयोग प्राप्त किया जाए। 
  • सभी प्रभावितों को सूखा राशन एवं अन्य आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई जाए।
  • प्रभावित परिवारों को प्रशासन के साथ ही अन्य आवश्यक सामग्री देने वाले स्वैच्छिक सहयोगियों से प्राप्त सामग्री भी उपलब्ध करवाई जाए।
  • स्थानीय निवासियों के साथ ही जो श्रद्धालु इस समय चित्रकूट आए हुए हैं, उन्हें भी आवश्यक सहायता प्रदान की जाए। 

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में मृतकों की संख्या 700 के पार पहुंच गई है। अब हिमालयी देश के सामने एक और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मुर्दाघरों और अस्पतालों में शव रखने की जगह कम पड़ने लगी है। बड़ी संख्या में बरामद शवों को सुरक्षित रखने के लिए अस्पतालों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

 

हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने फैसला किया है कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है और जिन पर कोई दावा करने वाला नहीं है, उन्हें एयरटाइट बैग में दफनाया जाएगा। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं शवों का सरकारी स्तर पर प्रबंधन किया जाएगा, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। दफनाने से पहले उनकी DNA और अन्य जरूरी साक्ष्य सुरक्षित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में उनकी पहचान स्थापित की जा सके।

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दफनाने से पहले लिए जाएंगे DNA सैंपल

 

अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने से पहले अधिकारियों द्वारा उनके DNA सैंपल लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक शव को एक अलग पहचान या रेफरेंस नंबर दिया जाएगा और उस स्थान का टैग भी लगाया जाएगा।

 

अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया से भविष्य में परिवारों को अपने लापता परिजनों के शवों की पहचान करने और उन्हें वापस हासिल करने में मदद मिल सकेगी। शनिवार दोपहर तक 100 से अधिक शवों की DNA प्रोफाइलिंग पूरी की जा चुकी थी।

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1.5 मीटर गहराई में दफनाए जाएंगे शव

 

नेपाल सरकार के अनुसार, अज्ञात शवों को जमीन के करीब 1.5 मीटर नीचे दफनाया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बाद में निकाला जा सके। शवों के बीच करीब 40 सेंटीमीटर का अंतर रखा जाएगा, जिससे DNA मैच होने पर संबंधित शव को आसानी से निकाला जा सके।

 

दफन स्थल पर कंक्रीट प्लेटफॉर्म पर एक साइन बोर्ड भी लगाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि शवों से संबंधित जानकारी सुरक्षित रखी जा सके।

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चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद

 

बाढ़ और भूस्खलन के बाद सबसे ज्यादा शव चितवन जिले में बरामद किए गए हैं। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यहां अब तक 233 शव मिले हैं, लेकिन इनमें से केवल छह की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है।

 

अधिकारी पहचान प्रक्रिया को तेज करने में जुटे हैं। अब तक 135 शवों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं। इसके लिए चितवन के कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, चितवन मेडिकल कॉलेज, भरतपुर अस्पताल और काठमांडू तथा पाल्पा के मेडिकल कॉलेजों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

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शवों को सड़ने से बचाने के लिए बनाए गए कूलिंग सेंटर

 

गर्मी और लंबे समय तक शव रखे जाने के कारण उनके खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने कुछ घरों को कूलिंग सेंटर में बदल दिया है, ताकि शवों को सुरक्षित रखा जा सके और उनकी पहचान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

 

734 लोगों की मौत, 2498 अब भी लापता

 

नेपाल सरकार के मुताबिक रविवार को बाढ़ और आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई। वहीं 2,498 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 4,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

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इस बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचाव दलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने लोगों से एहतियाती कदम उठाने की अपील की है।

नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में करीब 24 गुजराती पर्यटकों के लापता होने की खबर है। इस आपदा का शिकार हुए लोगों की पहचान करने के लिए गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) से 10 सदस्यों की एक विशेष टीम नेपाल के लिए रवाना हो गई है। डॉ. भार्गव पटेल के नेतृत्व में यह टीम नेपाल पहुंचकर पीड़ितों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करेगी। गौरतलब है कि NFSU के इन विशेषज्ञों को अमेरिकी रक्षा विभाग (US Department of Defense) के साथ भी फॉरेंसिक मामलों में काम करने का अनुभव है।

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बाढ़ के कारण 24 गुजराती संपर्क से बाहर, अमरेली के पर्यटक से हुआ संपर्क 

 

नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति में कई गुजराती फंस गए हैं, जिनमें से 24 लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और उनके परिजनों से संपर्क टूट गया है। प्रशासन द्वारा उनकी तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि इस बीच अमरेली के एक पर्यटक से संपर्क हो पाया है। स्थानीय प्रशासन को जानकारी दी गई है कि अमरेली के पर्यटक सुरक्षित हैं और उनकी अपने परिवार से बातचीत हो चुकी है।

 

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान आनंद का दंपत्ति लापता 

 

नेपाल में आए इस प्रलय में गुजरात के आनंद जिले के विमल पटेल और उनकी पत्नी जैमीना पटेल भी लापता हो गए हैं। यह दंपत्ति बीते 16 अगस्त को 'नमस्ते नेपाल टूर एंड ट्रेवल्स' के माध्यम से नेपाल घूमने गया था। इसके बाद वे नेपाल से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे और चीन का वीजा प्राप्त करने की प्रक्रिया में थे। परिजनों के साथ उनका आखिरी बार टेलीफोन पर संपर्क पिछले रविवार को हुआ था, लेकिन उसके बाद से उनका कोई संपर्क नहीं हो सका है।

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खोज और राहत कार्य के प्रयास तेज 

 

लापता सभी गुजराती पर्यटकों का पता लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में रहकर राहत कार्य कर रहे हैं। गांधीनगर से गई विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों और उनके परिजनों की मदद के लिए कार्य शुरू करेगी। सभी लापता लोगों से सुरक्षित संपर्क हो सके, इसके लिए उनके परिजन उम्मीद लगाए बैठे हैं।

धामी सरकार की सख्ती, भड़काऊ बयान मामले में मौलाना मुफ्ती मुजीब गिरफ्तार, CM धामी बोले- उत्तराखंड में नफरत की कोई जगह नहीं

धामी सरकार की सख्ती, भड़काऊ बयान मामले में मौलाना मुफ्ती मुजीब गिरफ्तार, CM धामी बोले- उत्तराखंड में नफरत की कोई जगह नहीं

pushkar singh dhami

उत्तराखंड के रुद्रपुर में ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के दौरान दिए गए एक कथित भड़काऊ बयान को लेकर विवाद बढ़ गया है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी मुफ्ती को गिरफ्तार कर लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले का संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड में कट्टरवादी सोच को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करने की बात कही और कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए।

त्रिशूल चौक के पास जुलूस को संबोधित करते हुए मुस्लिम वक्ता मुफ्ती मुजीब अहमद अजहरी के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। अवैध मदरसों पर धामी सरकार के एक्शन से भड़का मौलाना धमकी दे रहा था। उसने कहा था कि अगर मदरसों को बंद किया तो मुसलमान वो हाल कर देगा जो कभी नहीं हुआ। मौलाना की भड़काऊ तकरीर पर लोग तालियां बजा रहे थे।

बारावफ़ात के मौके पर 26 अगस्त को मुफ़्ती मुजीब ने ये भडकाऊ तकरीर की थी।  सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सामाजिक ताने बाने को बिगाड़ने नहीं दिया जाएगा। ऐसे मौलानाओं के खिलाफ सख़्त एक्शन लिया जाएगा। पुलिस उस मौलाना को गिरफ़्तार कर करके सख़्त कार्रवाई करेगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में नफ़रत की कोई जगह नहीं है। ऐसी तकरीरें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। सीएम धामी ने कहा कि मौलाना भारत के संविधान को नहीं मानते हैं और इसी प्रकार से धमकी देने का काम करते हैं। वो ज़माना चला गया जब लोग धमकी पर आते थे और इनके वोटों के चक्कर में तुष्टिकरण करते थे। इनके कब्जों के सहन करते थे। इनके डेमोग्राफ़िक बदलाव पर कुछ नहीं बोलते थे। अब सरकार बदल गई है। कानून का राज स्थापित हुआ है। संवैधानिक जो हमारी मान्यताएं हैं। संविधान ने जो प्रावधान किया है, उसके अनुरूप काम होता है।

किसानों के लिए बड़ी राहत, गुजरात सरकार ने बढ़ाई कृषि उपकरण खरीद की समय सीमा, अब 15 दिन का और मौका

किसानों के लिए बड़ी राहत, गुजरात सरकार ने बढ़ाई कृषि उपकरण खरीद की समय सीमा, अब 15 दिन का और मौका

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण और किसान कल्याणकारी निर्णय लिया है। वर्ष 2026-27 के लिए 'मुख्यमंत्री यंत्रीकरण योजना' के तहत कृषि उपकरणों और ट्रैक्टर चालित साधनों की खरीद के लिए पात्र किसानों की खरीद समय सीमा 15 दिन बढ़ा दी गई है। कृषि मंत्री श्री जीतूभाई वाघानी ने यह जानकारी दी।

 

किसानों के लिए ₹750 करोड़ का प्रावधान

कृषि मंत्री ने बताया कि चालू वर्ष 2026-27 के लिए 'मुख्यमंत्री यंत्रीकरण योजना' के तहत राज्य सरकार ने किसानों के लिए 750 करोड़ रुपये से अधिक की भारी राशि का प्रावधान किया है। राज्य के सभी किसानों को इस योजना का समान लाभ मिले, इस उद्देश्य से 'आई-खेड़ूत' पोर्टल पर आवेदन आमंत्रित कर पात्र किसानों को निर्धारित समय सीमा में कृषि उपकरणों की खरीद की मंजूरी दी गई थी।

 

मांगों के बाद सरकार ने लिया संवेदनशील फैसला

एक साथ कई किसानों के आवेदन मंजूर होने के कारण उपकरण निर्माता तय समय में आपूर्ति करने में असमर्थ थे। इसे देखते हुए किसानों, विधायकों, सांसदों और अन्य नेताओं की ओर से समय सीमा बढ़ाने की मांग की गई थी। इस व्यावहारिक समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने संवेदनशील रुख अपनाते हुए स्वीकृत पात्र किसानों के लिए खरीद की अवधि 15 दिन और बढ़ा दी है। अब किसान अंतिम तिथि के बाद अगले 15 दिनों के भीतर इन कृषि उपकरणों की खरीद कर सकेंगे।

 

निर्माताओं से अपील और योजना का लाभ लेने का आग्रह

प्रधानमंत्री मोदी के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के आह्वान को स्वीकार करते हुए राज्य के निर्माता उत्कृष्ट कृषि उपकरण बना रहे हैं। कृषि मंत्री ने सभी निर्माताओं से अपील की है कि वे समय पर किसानों को ये साधन उपलब्ध कराएं ताकि वे अपने खेतों में समय पर इनका उपयोग कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने सभी पात्र किसानों से इस कल्याणकारी योजना का अधिकतम लाभ उठाने का अनुरोध किया है।

रीवा-सतना के बाढ़ पीड़ितों को कपड़े-खाना और शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जाए: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

रीवा-सतना के बाढ़ पीड़ितों को कपड़े-खाना और शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जाए: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 अगस्त की रात रीवा पहुंचे। उन्होंने सर्किट हाउस से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सतना और रीवा में बारिश के दौरान जल भराव एवं बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने सतना कलेक्टर को निर्देश दिए कि सभी बाढ़ प्रभावित लोगों और चित्रकूट में रुके हुए श्रद्धालु-रहवासियों के भोजन वस्त्र और शुद्ध पेयजल की  व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सर्वे कराकर आरबीसी 6/4 के तहत राहत राशि भी प्रदान की जाए। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  कहा कि बारिश से कोई जनहानि एवं पशु हानि ना हो। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन जिलों में बारिश का कम असर है वहां से बचाव के उपकरण बाढ़ प्रभावित जिलों में उपयोग में लाए जाएं। एनडीआरएफ की टीम मुस्तैदी से बचाव कार्य संपादित करें। सतना कलेक्टर ने बताया कि छह गांव में रेस्क्यू किया गया है। आज रात बारिश नहीं हुई तो स्थिति ठीक हो जाएगी। सात लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। 

 

नुकसान का हो रहा आंकलन

उन्होंने बताया कि नया गांव डैम डैमेज हुआ है। इससे हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि चित्रकूट में आने वाले श्रद्धालु एवं रहवासियों को सुरक्षित रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्हें भोजन पैकेट दिए जाएं। सदगुरू आश्रम में जो श्रद्धालु रुके हुए हैं उनका नंबर लेकर उनके परिजनों से संपर्क कर श्रद्धालुओं की बातचीत कराई जाए। जैतवारा गांव में सबसे ज्यादा लोग रुके हुए हैं, उनके समुचित भोजन पानी एवं वस्त्र की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने रीवा सतना एवं सतना चित्रकूट  मार्ग के संबंध में जानकारी  ली। कलेक्टर ने बताया कि रीवा में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। बाढ़ प्रभावितों के प्रकरण बनाए गए हैं, जो पशु हानि  हुई है उसकी सहायता राशि दी जाएगी।

मलबे में तब्‍दील हुई पशुपतिनाथ की भूमि नेपाल, कई जिंदगियां लापता, किसी की गोद उजड़ी, किसी की जिंदगी का सहारा

मलबे में तब्‍दील हुई पशुपतिनाथ की भूमि नेपाल, कई जिंदगियां लापता, किसी की गोद उजड़ी, किसी की जिंदगी का सहारा

Nepal

कुदरत के कहर और पहाड़ों से बही गगनचुंबी तबाही ने पशुपतिनाथ की पवित्र भूमि नेपाल को पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है। चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार, पसरा हुआ सन्नाटा और अपनों को ढूंढती बेबस निगाहें हैं। इस भयानक मंजर ने किसी मां की गोद सूनी कर दी, तो किसी मासूम के सिर से पिता का साया छीन लिया। जहां कल तक जिंदगी मुस्कुराती थी, आज वहां सिर्फ मलबे में दबी उम्मीदें और कभी न भरने वाले जख्म बाकी रह गए हैं।

किसी का घर उजड़ गया तो किसी का पूरा परिवार। किसी का मासूम बच्‍चा जल प्रलय में बह गया तो कोई बुजुर्ग मलबे में दबकर अनंत में कहीं खो गया। अब सिर्फ इंतजार बचा है, अपनों के लौटने का इंतजार। जिंदा नहीं तो कम से कम शव ही मिल जाए। शवों को खोजने की होड़ सी मची है। इस त्रासदी के बाद एक ही सवाल बचा है। अब कैसे फिर से वो घर बसेंगे, कैसे परिवार फिर से पूरा होगा। कैसे फिर से जिंदगी आबाद होगी।

लौटने की प्रतीक्षा, जिंदा न होने का भय : नेपाल में आई भीषण तबाही में 600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 2,400 से ज्यादा लोग लापता हैं। सुरक्षा बलों के 11,000 से अधिक जवान राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। इस आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए मुंबई के 61 श्रद्धालुओं का दल भी सीमावर्ती इलाके से लापता है। उनके परिवारों को उनके लौटने का इंतजार और जिंदा नहीं होने का भय सता रहा है।

अस्पतालों के बाहर चिपकी अपनों की तस्वीरें देख देखकर लोग बेहाल हैं। कोई मलबे तो कोई कीचड़ में अपनों के शवों को खोज रहा है। मांएं बेबस हैं, पिता मायूस। बुजुर्ग कुछ समझ नहीं पा रहे हैं और बच्‍चे निढाल हो चुके हैं। तबाही का ऐसा खौफनाक मंजर देखकर हर किसी की रूह कांप गई है।

600 मौतें, 2,400 लापता : शनिवार तक इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की तादाद 600 को पार कर चुकी है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। अब तक 163 विदेशी नागरिकों समेत करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपाली सेना के 5,000 से अधिक जवानों सहित 11,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव कार्य में दिन-रात जुटे हैं। ऊपरी त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे 350 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि कीचड़ में दबे अन्य लोगों की तलाश जारी है।

हाथ में रह गईं सिर्फ अपनों के नामों की सूचियां : नेपाल के जो भी प्रभावित इलाके हैं, वहां सिर्फ लोग अपनों के नामों की सूचियां और उनकी तस्‍वीरें हाथों में लिए नजर आ रहे हैं। अस्पतालों के बाहर हजारों लोगों की कतारें हैं। इस बीच त्रिशूली में सेना का रिलीफ कैंप प्रभावितों का सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है, जहां बुजुर्गों, बच्चों और घायलों का इलाज चल रहा है। इस बीच मौसम विभाग की बारिश की आशंका ने एक बार फिर से लोगों में दहशत जगा दी है।

आखिर कब लौटेंगे 61 श्रद्धालु : नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई इस तबाही के बाद मुंबई के 61 श्रद्धालुओं का एक दल भी लापता है, उनके परिजनों की सांसें अटकी हुई हैं। प्रसिद्ध ट्रैकर डॉ. मिलिंद चितले के नेतृत्व में यह दल कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 23 अगस्त को रवाना हुआ था। 25 अगस्त की शाम को टिमुरे पहुंचने के बाद से इनका परिवारों से संपर्क टूट चुका है। कुछ सदस्यों की आखिरी डिजिटल लोकेशन 26 अगस्त की सुबह बॉर्डर चेकपोस्ट के पास की मिली थी, जिसके बाद से कोई खबर नहीं है।

योगी सरकार का यूपी पर्यटन को मजबूत करने का नया प्लान, अब एक साथ करें काशी, प्रयागराज और अयोध्या के दर्शन

योगी सरकार का यूपी पर्यटन को मजबूत करने का नया प्लान, अब एक साथ करें काशी, प्रयागराज और अयोध्या के दर्शन

​​UP Tourism Spiritual Triangle

​​UP Tourism Spiritual Triangle: उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक एवं पर्यटन विभाग ने 'विजिट माय स्टेट' अभियान के तहत श्रद्धालुओं के लिए 4 रात और 5 दिन का विशेष 'स्पिरिचुअल ट्रायंगल' (Spiritual Triangle) टूर पैकेज लॉन्च किया है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पैकेज प्रदेश के तीन प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों—वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या—को एक धार्मिक पथ से जोड़ता है। आगामी तीज-त्योहारों के मद्देनजर शुरू की गई इस पहल से श्रद्धालुओं की तीर्थयात्रा अधिक सुगम, सुविधाजनक और यादगार बनेगी।

  • पूर्व की स्थिति : तब अयोध्या में हनुमानगढ़ी, कनक भवन और सरयू घाट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को टूर पैकेज का हिस्सा बनाया जाता था, हालांकि तब राम मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हुआ था और दर्शन की व्यवस्था वर्तमान जैसी भव्य नहीं थी। 
  • वर्तमान पैकेज ('स्पिरिचुअल ट्रायंगल') : अब राम मंदिर के निर्माण के बाद पर्यटन विभाग ने इसे नए रूप में 'स्पिरिचुअल ट्रायंगल' (Spiritual Triangle) टूर पैकेज के तौर पर लॉन्च किया है, जिसमें राम मंदिर के वीआईपी दर्शन को मुख्य आकर्षण के रूप में जोड़ा गया है। 

​यात्रा का पूरा शेड्यूल

  • ​पहला दिन (काशी आगमन) : संकट मोचन मंदिर, दुर्गाकुंड मंदिर और अस्सी घाट का भ्रमण। शाम को गंगा में नौका विहार और विश्व प्रसिद्ध भव्य गंगा आरती के दर्शन।
  • ​दूसरा दिन (काशी एवं सारनाथ) : श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में वीआईपी दर्शन, अन्नपूर्णा मंदिर और काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना। इसके बाद सारनाथ में धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप, बोधि वृक्ष, अशोक स्तंभ संग्रहालय और बीएचयू (BHU) का भ्रमण।
  • ​तीसरा दिन (प्रयागराज) : प्रयागराज आगमन पर पवित्र संगम में स्नान, आनंद भवन और लेटे हुए हनुमान जी के दर्शन।
  • ​चौथा दिन (अयोध्या धाम) : अयोध्या पहुंचकर हनुमानगढ़ी, कनक भवन, दशरथ महल और श्री राम जन्मभूमि मंदिर में वीआईपी दर्शन। शाम को सरयू घाट पर भव्य आरती में सहभागिता।
  • ​पांचवां दिन : यात्रा का समापन।

पैकेज की दरें और सुविधाएं

वाहन के अनुसार प्रति व्यक्ति शुल्क:

  • ​सेडान कार : न्यूनतम 4 यात्रियों के समूह के लिए प्रति व्यक्ति शुल्क ₹14,400 है।
  • ​इनोवा क्रिस्टा : न्यूनतम 6 यात्रियों के समूह के लिए प्रति व्यक्ति शुल्क ₹13,000 है।

 

पैकेज में शामिल सुविधाएं:

  • ​वातानुकूलित (AC) वाहन से संपूर्ण यात्रा
  • ​4 रात का एसी आवास (डबल शेयरिंग बेसिस)
  • ​प्रतिदिन का नाश्ता (Breakfast)
  • ​प्रमुख स्थलों पर नौका विहार और गाइड की सुविधा
  • ​काशी विश्वनाथ और राम मंदिर में वीआईपी दर्शन

​(नोट: दोपहर और रात के भोजन का खर्च यात्रियों को स्वयं वहन करना होगा।)

​बुकिंग एवं संपर्क सूत्र

​'स्पिरिचुअल ट्रायंगल' टूर पैकेज की बुकिंग और अन्य विस्तृत जानकारी के लिए यूपीएसटीडीसी (UPSTDC) के निम्नलिखित मोबाइल नंबरों (9149099890 | 7985816467) पर संपर्क कर सकते हैं।

 

आजीविका मिशन की सहायता से सालाना ढाई लाख कमा रहीं मजदूर रहीं सोनभद्र की निर्मला

आजीविका मिशन की सहायता से सालाना ढाई लाख कमा रहीं मजदूर रहीं सोनभद्र की निर्मला

Sonbhadra Nirmala Success Story

Sonbhadra Nirmala Success Story: प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योगी सरकार राज्यव्यापी स्तर पर आजीविका मिशन को मजबूती से लागू कर रही है। इन प्रयासों का ही नतीजा है कि अब आदिवासी और पिछड़े अंचल की महिलाएं उद्यमी बन रही हैं। सोनभद्र जिले के राबर्ट्सगंज ब्लॉक के बिचपई गांव की अनुसूचित जाति की निर्मला इसकी एक जीवंत मिसाल हैं। कभी परिवार का खर्च चलाने के लिए मजदूरी करने वाली निर्मला अब सफल उद्यमी बन चुकी हैं।

 

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने हुनर सीखा और योगी सरकार से मिली आर्थिक मदद ने उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर दिया। रंग-बिरंगी डिजाइनर मोमबत्तियों से शुरू हुआ उनका सफर अब जूस, पॉपकॉर्न, गुलाब का गुलकंद, शर्बत और गाजर के मुरब्बे तक पहुंच चुका है। उनकी सालाना कमाई करीब ढाई लाख रुपये हो गई है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव की 12 से 15 महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ी हैं।

स्वयं सहायता समूह ने खोला नया रास्ता

राबर्ट्सगंज ब्लॉक के बिचपई गांव की निर्मला बीए तक पढ़ी हैं। पति-पत्नी, तीन बेटियों और एक बेटे वाले छह सदस्यीय परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। घर की जिम्मेदारियों के साथ उन्हें मजदूरी करनी पड़ती थी। बच्चों की बेहतर परवरिश और परिवार की आय बढ़ाने की कोशिश में वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। यहीं से उनकी जिंदगी बदलने का रास्ता खुला। मोमबत्ती बनाने का प्रशिक्षण लिया और अपने हुनर को कारोबार में बदलने का निर्णय लिया।

60 हजार की सीड मनी से शुरू हुआ उद्यम

उद्यमिता विकास परियोजना की टीम ने निर्मला के प्रयास को देखते हुए 60 हजार रुपए की सीड मनी (प्रारंभिक सहायता राशि) उपलब्ध कराई। इससे उन्होंने अलग-अलग डिजाइन की मोमबत्तियों के सांचे खरीदे। दीपावली और अन्य त्योहारों पर मोमबत्तियां बनाकर उनकी बिक्री शुरू की। मांग बढ़ने पर इसे नियमित कारोबार बना लिया। खादी ग्रामोद्योग विभाग के सहयोग से पॉपकॉर्न मशीन मिली तो आमदनी का एक और जरिया जुड़ गया। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से दो माह का प्रशिक्षण लेकर उन्होंने गुलाब से गुलकंद, शर्बत और गाजर का मुरब्बा बनाना भी सीख लिया। अब मौसम के अनुसार इनका उत्पादन करती हैं। फूल, पेड़ और दूसरी सजावटी आकृतियों वाली उनकी रंगीन मोमबत्तियां बाजार में अपनी जगह बना रही हैं। उनका अगला लक्ष्य उत्पादों को ऑनलाइन बाजार तक पहुंचाना है।

Sonbhadra Nirmala Success Story

गांव की महिलाओं में भी जाग रहा आत्मविश्वास

निर्मला की सफलता का असर गांव की दूसरी महिलाओं पर भी पड़ा है। उनके उद्यम से प्रेरित होकर गांव की 15 महिलाएं काम से जुड़ने और अपना रोजगार शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ी हैं। पिछड़े और आदिवासी बहुल बिचपई में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिन महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी सीमित थी, वे अब स्वयं सहायता समूहों के जरिए कारोबार की ओर कदम बढ़ा रही हैं। निर्मला बताती हैं कि पहले महिलाएं घर और घूंघट तक सीमित रहती थीं। अब वे बाहर निकलकर काम कर रही हैं। आमदनी बढ़ने से बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाने का रास्ता खुला है। कभी लोगों से बात करने में झिझकने वाली निर्मला अब आत्मविश्वास से अपने कारोबार की बात करती हैं। उनके पति भी उद्यम को आगे बढ़ाने में साथ दे रहे हैं।

पूरे प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बना रहा आजीविका मिशन

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से पूरे प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़कर महिलाएं प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग के सहारे अपने उद्यम खड़े कर रही हैं। निर्मला की कहानी इसी व्यापक बदलाव की एक तस्वीर है, जहां कभी मजदूरी परिवार की मजबूरी थी और आज अपना कारोबार उसकी आर्थिक ताकत बन गया है।

बालाघाट में बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को सरकार देगी 2-2 लाख की सहायता, बोले CM, प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस

बालाघाट में बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को सरकार देगी 2-2 लाख की सहायता, बोले CM, प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य  सेवाओं पर फोकस

भोपाल। बालाघाट में गंभीर बामीरियों से मृत बच्चों के परिजनों को सरकार 2-2 लाख की सहायता राशि देगी। शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट में पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम को विस्तार से जाना। जन-विश्वास अभियान के तहत बालाघाट पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार बालाघाट की तस्वीर को बदलने के लिए बड़े बजट पर काम कर रही है। यहां पूर्व नक्सल-युक्त 100 गांवों का विकास किया जाएगा। इसके लिए 225 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  ने गंभीर बीमारी में जान गंवाने वाले परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से कहा कि हम समस्या के मूल कारणों तक पहुंचकर उसके स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं। ताकि, भविष्य में ऐसी बीमारियों की रोकथाम सुनिश्चित की जा सके। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके दर्द और कष्ट को मैंने महसूस किया है और अपनी ओर से 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बालाघाट जिले के 100 ऐसे ग्राम, जो कभी नक्सल प्रभावित थे, उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 225 करोड़ की राशि से आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जाएगा। इन ग्रामों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। इस पहल से इन क्षेत्रों में विकास को गति मिलेगी, ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी और नक्सल प्रभावित रहे ग्रामों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।

 

सृजित काया जाएगा रोजगार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा पशुपालन आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। बकरी पालन, मुर्गी पालन और दुग्ध उत्पादन के साथ होम स्टे और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीण स्वावलंबन के संकल्प को साकार किया जाएगा। बालाघाट और लांजी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता चेरापूंजी को भी मात देने की क्षमता रखती है। यहां की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं और सरल जनजीवन क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विशिष्ट बनाते हैं। प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ते हुए यहां इको टूरिज्म और ट्राइबल टूरिज्म के विकास की असीम संभावनाएं हैं।

 

बैगा आश्रमों को दिया जाएगा बढ़ावा

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने लंबी लड़ाई के बाद बालाघाट समेत मध्यप्रदेश को नक्सलमुक्त किया है। अब हम स्थानीय लोगों को विश्वास में लेकर क्षेत्र के विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आइए, हम सब मिलकर बालाघाट को विकास की दृष्टि से नम्बर वन जिला बनाने के लिए अग्रसर हो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में नक्सलमुक्त बालाघाट बनाने के बाद अब हम सुरक्षित बालाघाट एवं समृद्ध बालाघाट बनने के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि बैगा समाज के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। बैगा परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के साथ बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए बैगा आश्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। समाज के समग्र विकास के लिए बैगा विकास प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जिसके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल सहित मूलभूत सुविधाओं और अधोसंरचना के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा।