बालाघाट में बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को सरकार देगी 2-2 लाख की सहायता, बोले CM, प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस

बालाघाट में बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को सरकार देगी 2-2 लाख की सहायता, बोले CM, प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य  सेवाओं पर फोकस

भोपाल। बालाघाट में गंभीर बामीरियों से मृत बच्चों के परिजनों को सरकार 2-2 लाख की सहायता राशि देगी। शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट में पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम को विस्तार से जाना। जन-विश्वास अभियान के तहत बालाघाट पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार बालाघाट की तस्वीर को बदलने के लिए बड़े बजट पर काम कर रही है। यहां पूर्व नक्सल-युक्त 100 गांवों का विकास किया जाएगा। इसके लिए 225 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  ने गंभीर बीमारी में जान गंवाने वाले परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से कहा कि हम समस्या के मूल कारणों तक पहुंचकर उसके स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं। ताकि, भविष्य में ऐसी बीमारियों की रोकथाम सुनिश्चित की जा सके। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके दर्द और कष्ट को मैंने महसूस किया है और अपनी ओर से 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बालाघाट जिले के 100 ऐसे ग्राम, जो कभी नक्सल प्रभावित थे, उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 225 करोड़ की राशि से आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जाएगा। इन ग्रामों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। इस पहल से इन क्षेत्रों में विकास को गति मिलेगी, ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी और नक्सल प्रभावित रहे ग्रामों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।

 

सृजित काया जाएगा रोजगार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा पशुपालन आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। बकरी पालन, मुर्गी पालन और दुग्ध उत्पादन के साथ होम स्टे और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीण स्वावलंबन के संकल्प को साकार किया जाएगा। बालाघाट और लांजी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता चेरापूंजी को भी मात देने की क्षमता रखती है। यहां की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं और सरल जनजीवन क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विशिष्ट बनाते हैं। प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ते हुए यहां इको टूरिज्म और ट्राइबल टूरिज्म के विकास की असीम संभावनाएं हैं।

 

बैगा आश्रमों को दिया जाएगा बढ़ावा

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने लंबी लड़ाई के बाद बालाघाट समेत मध्यप्रदेश को नक्सलमुक्त किया है। अब हम स्थानीय लोगों को विश्वास में लेकर क्षेत्र के विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आइए, हम सब मिलकर बालाघाट को विकास की दृष्टि से नम्बर वन जिला बनाने के लिए अग्रसर हो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में नक्सलमुक्त बालाघाट बनाने के बाद अब हम सुरक्षित बालाघाट एवं समृद्ध बालाघाट बनने के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि बैगा समाज के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। बैगा परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के साथ बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए बैगा आश्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। समाज के समग्र विकास के लिए बैगा विकास प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जिसके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल सहित मूलभूत सुविधाओं और अधोसंरचना के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा।

ओरछा में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक मेंं युवा वोटर्स को पार्टी से जोड़ने और मिशन 2028 की बनेगी रणनीति

ओरछा में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक मेंं युवा वोटर्स को पार्टी से जोड़ने और मिशन 2028 की बनेगी रणनीति

भोपाल। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक 30 और 31 अगस्त को ओरछा में होगी। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव,प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में चुन गए प्रदेश भाजपा के नेता सहित पार्टी के जिला अध्य़क्ष सहित 300 से अधिक नेता शामिल होंगे।

भगवान रामराजा की नगरी ओरछा दो दिवसीय बैठक में मिशन 2028 और 2029 को लेकर पार्टी की आगामी रणनीति पर मंथन होगा। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम को संगठन स्तर तक पहुंचाने के साथ-साथ सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने पर भी चर्चा होगी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम की इस पहली बैठक में प्रदेश में अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रस्ताव पास हो सकता है।

युवाओं को पार्टी से जोड़ने का तैयार होगा रोडमैप-इसके  साथ युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए रोडमैप का खाका भी कार्यसमिति की बैठक में तैयार होगा। भाजपा का फोकस युवा मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर भी रहेगा। मिशन 2028-29 को ध्यान में रखते हुए युवा वोटर्स तक पहुंच बढ़ाने और उन्हें संगठन से जोड़ने की रणनीति पर चर्चा होगी।

पार्टी नेताओं का मानना है कि युवा मतदाताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचने के लिए सोशल मीडिया सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका देने के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने की रणनीति तैयार की जाएगी।
 
दरअसल भाजपा देश में बदले सियासी हालात में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया को और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों और पार्टी की विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। पार्टी की रणनीति में खासतौर पर रील्स और शॉर्ट वीडियो के जरिए नेरेटिव सेट करने पर जोर रहेगा। इसके लिए कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया के नए और प्रभावी तरीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है।
 
संगठन विस्तार और मिशन-2028 की रणनीति पर मंथन- कार्यसमिति की बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक और मजबूत करने, आगामी चुनावों की तैयारियों तथा सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। नेताओं को जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। बैठक में पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों की रूपरेखा भी तय की जाएगी। इसके साथ ही सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है।

नक्सल प्रभावित रहे ग्राम बोंदारी में विकास की नई सुबह, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ग्रामीणों से किया संवाद

नक्सल प्रभावित रहे ग्राम बोंदारी में विकास की नई सुबह, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ग्रामीणों से किया संवाद

बालाघाट। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज बालाघाट जिले के पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे ग्राम बोंदारी पहुंचकर ग्रामवासियों से संवाद किया और क्षेत्र के विकास तथा ग्रामीणों की आवश्यकताओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से चर्चा के दौरान पशुपालन को बढ़ावा देने, आवास सुविधा, पोषण आहार के उपयोग की आदत विकसित करने के लिए जन-जागरूकता अभियान, वन विभाग के सहयोग, चिकित्सा एवं शिक्षा सुविधाओं तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इन सुविधाओं को क्षेत्र में बेहतर ढंग से स्थापित करने और शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

 

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार को प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने तथा युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
 

मुख्यमंत्री ने बालाघाट जिले के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से 225 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की। इन कार्यों के माध्यम से क्षेत्र में सामाजिक एवं मूलभूत अधोसंरचना को मजबूत किया जाएगा। सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों सहित रोजगार और आजीविका के अवसरों का विस्तार किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे ग्रामों में विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाए। स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं के आधार पर पशुपालन, कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, वन आधारित आजीविका तथा अन्य रोजगारपरक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए।

 

उन्होंने कहा कि बालाघाट अब नक्सल से विकास की ओर आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के साथ सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिले तथा प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

बहनों ने मुख्यमंत्री को बांधी राखी- वहीं रक्षाबंधन के पावन अवसर पर बालाघाट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बहनों के प्रति स्नेह और आत्मीयता का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला। बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की कलाई पर राखी बांधकर अपना स्नेह और आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने भी बहनों के इस आत्मीय स्नेह को भावपूर्वक स्वीकार करते हुए उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बहनों से आत्मीय संवाद किया और कहा कि बहनों का स्नेह और आशीर्वाद उनके लिए सदैव प्रेरणा और ऊर्जा का स्रोत है। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का भी पर्व है।

नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे पैदा हुए मानवीय संकट को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। खरगे ने केंद्र सरकार से नेपाल को तत्काल मानवीय और आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए तेजी से कदम उठाने की मांग की है। ALSO READ: नेपाल में जलप्रलय से भारी तबाही, 626 लोगों की मौत; 2400 से ज्यादा लापता, 320 भारतीयों से संपर्क टूटा

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में बाढ़ से हुए बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आपदा में 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता हैं। बड़ी संख्या में लोग भोजन, दवाइयों, आश्रय और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।

 

नेपाल में फंसे भारतीयों को लेकर जताई चिंता

खरगे ने कहा कि बाढ़ के कारण नेपाल के कई हिस्सों में भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग भी फंसे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से संबंधित अधिकारियों को बचाव और निकासी अभियान तेज करने के निर्देश देने का आग्रह किया, ताकि प्रभावित भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लाया जा सके।

 

खरगे ने विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से इन लोगों का पता लगाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास करने की अपील की। ALSO READ: नेपाल की त्रासदी में विदिशा की स्वाति बागरेचा लापता, 26 अगस्त से परिवार से संपर्क टूटा

 

नेपाल को तत्काल राहत सहायता देने की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बाढ़ प्रभावित लोगों तक पर्याप्त राहत और मानवीय सहायता पहुंचाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत को नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।

 

अमित शाह को दिया सुझाव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में तत्काल और व्यापक मानवीय एवं आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि नेपाल सरकार के साथ समन्वय करते हुए जरूरत के अनुसार राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें भी तैनात की जाएं, ताकि बचाव, निकासी और राहत कार्यों में मदद मिल सके।

 

खरगे ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार नेपाल के इस मानवीय संकट को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल आवश्यक कदम उठाएगी।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के वाल्मीकि आश्रम में की छड़ी पूजा, प्रदेशवासियों के लिए मांगी सुख-समृद्धि

सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के वाल्मीकि आश्रम में की छड़ी पूजा, प्रदेशवासियों के लिए मांगी सुख-समृद्धि

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को उज्जैन स्थित वाल्मीकि धाम आश्रम पहुंचे। उन्होंने भुजरिया पर्व के अवसर पर यहां विधि-विधान से छड़ी पूजन भी किया। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की और शुभकामनाएं दीं। 

 

इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य की बात है कि आज भुजरिया पर्व के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित बाबा महाकाल की नगरी से भगवान जाहरवीर गोगादेव जी महाराज के ध्वज-चिह्न की शोभायात्रा निकलेगी। उज्जैन की पावन धरती से पूरे देश में सामाजिक समरसता और एकता का संदेश जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज हम अपने गौरवशाली अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को पुनः जीवंत कर रहे हैं। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है और इसके साथ ही आध्यात्मिक चेतना का भी विस्तार हो रहा है। भुजरिया पर्व हमारी लोक परंपराओं, आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। मेरी ओर से समस्त प्रदेशवासियों को भुजरिया पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए, यही कामना है।

क्यों खास है उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर? दक्षिण की ओर झुका है 56 सेमी ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग

क्यों खास है उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर? दक्षिण की ओर झुका है 56 सेमी ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग

kashi vishwanth mandir

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी आने वाले श्रद्धालुओं से ऐतिहासिक काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने की अपील की। परशुराम द्वारा स्थापित इस प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास, महत्व और खासियतों के बारे में जानें।

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, जनपद उत्तरकाशी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव की आराधना का पावन एवं प्रमुख केंद्र है। यहां श्रद्धालु महादेव की पूजा-अर्चना कर आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति करते हैं। आप भी उत्तरकाशी आगमन पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
 

क्या है मान्यता?

उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। यह उत्तराखंड के सबसे प्राचीन और पवित्र शिव मंदिरों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। वर्ष 1857 में टिहरी रियासत के राजा सुदर्शन शाह की पत्नी, महारानी खनेती ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।

 

उत्तरकाशी को भगवान शिव का कलियुग का दूसरा निवास माना जाता है और इसी कारण यहां भी काशी विश्वनाथ मंदिर मौजूद है। ऐसा कहते हैं कि जब काशी पानी में डूब जाएगी तब भगवान काशी विश्वनाथ को उत्तरकाशी के इस मंदिर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

 

क्या है मंदिर की विशेषता?

गर्भ गृह में स्थापित शिवलिंग लगभग 56 सेंटीमीटर ऊंचा और स्वयंभू माना जाता है। यह शिवलिंग दक्षिण दिशा की ओर थोड़ा सा झुका हुआ है। मंदिर के सामने शक्ति मंदिर में एक विशाल त्रिशूल है। कहा जाता है कि इसका संबंध पौराणिक काल और देवताओं द्वारा अस्त्र-शस्त्र के प्रयोग से है।

नेपाल आपदा: लापता गुजरातियों की संख्या बढ़कर 25 हुई, सरकार ने जारी की नई सूची और हेल्पलाइन नंबर

नेपाल आपदा: लापता गुजरातियों की संख्या बढ़कर 25 हुई, सरकार ने जारी की नई सूची और हेल्पलाइन नंबर

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नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बीच गुजरात के लापता लोगों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। राज्य सरकार ने नेपाल में लापता हुए नागरिकों की नई सूची जारी की है। इस सूची में अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट सहित राज्य के विभिन्न जिलों के लोग शामिल हैं। वहीं, 2 और एनआरआई (NRI) के भी संपर्क से बाहर होने की खबर है। ALSO READ: नेपाल बाढ़ हादसा : फंसे हुए गुजरातियों की मदद के लिए गुजरात सरकार सक्रिय, प्रवक्ता मंत्री जीतू वाघानी ने दी बड़ी जानकारी

 

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक गुजरात के कुल 25 लोगों के लापता होने की सूचना मिली है। इस स्थिति के कारण उनके परिजनों में भारी चिंता का माहौल है। रिश्तेदार लगातार राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय के प्रशासन से अपने स्वजनों की ताज़ा जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। 

 

विदेशी नागरिकता वाले गुजराती भी लापता

लापता लोगों में केवल स्थानीय गुजराती ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे एनआरआई (NRI) गुजराती भी शामिल हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, लापता 25 लोगों में से कुछ नागरिक न्यूजीलैंड, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से नेपाल की यात्रा पर आए थे और बाढ़ के बाद उनका संपर्क टूट गया है। 

 

राज्य सरकार और प्रशासन की लगातार निगरानी

राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नज़र रख रही है और विभिन्न माध्यमों से जानकारी जुटाकर सूची अपडेट कर रही है। मौजूदा 25 लोगों की सूची के बाद जैसे-जैसे संपर्क स्थापित होगा, इन आंकड़ों में बदलाव होने की संभावना है। लापता लोगों के संबंध में कोई भी नई जानकारी मिलते ही तुरंत उनके परिजनों को सूचित किया जाएगा। 

 

हेल्पलाइन नंबर 

 079-23251900 

 9978405304 

 1070 

 

जिलेवार लापता गुजरातियों का विवरण

 

सरकार द्वारा जारी विवरण के अनुसार, अहमदाबाद के 5, आनंद के 4, सूरत के 4, खेड़ा के 4, गांधीनगर के 4, अमरेली के 2, राजकोट के 1 और वलसाड के 1 नागरिक शामिल हैं। इनमें से कई लोगों के पास अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता भी है। 

 

नेपाल में बाढ़ का कहर और भारी तबाही

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण भारी तबाही हुई है। प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। रास्ते बंद होने के कारण राहत और बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। 

 

150 से अधिक गुजरातियों के प्रभावित होने की खबर

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने बताया कि वायरल हो रहे भयानक वीडियो में लोग, मकान और वाहन तिनके की तरह बहते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस आपदा में जान-माल के वास्तविक नुकसान का सही आंकड़ा सामने आने में अभी लंबा समय लग सकता है। नेपाल के रसुवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आई इस आपदा में अब तक 392 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 290 भारतीयों सहित 1,400 से अधिक लोग लापता हैं। देशभर से और विशेष रूप से गुजरात से बड़ी संख्या में पर्यटक वहां गए थे, जिनमें से प्राथमिक जानकारी के अनुसार 150 से अधिक गुजरातियों के भी इस हादसे में प्रभावित होने की रिपोर्ट मिल रही है। 

 

भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 315 भारतीय नागरिक अभी भी संपर्क से बाहर हैं। भारत सरकार नेपाली प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है और भारतीयों की तलाश तथा उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के काम में जुटी हुई है।

नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

farakka barrage

मनीष कुमार, पटना

नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से हुई तबाही के बाद बिहार भी सहम सा गया है। बिहार सरकार ने पश्चिम बंगाल से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने की मांग की है। ALSO READ: टैक्सियों को लेकर क्यों लड़ते रहते हैं भारत के दो राज्य

 

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से कई जिलों में गंगा नदी में जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने की मांग की है। 23 अगस्त को हुई इस बातचीत के 24 घंटे के अंदर बैराज के सभी फाटक खोल दिए गए, जिससे बिहार में नदियों का जलस्तर तेजी से कम हुआ। अब बिहार इस समझौते के नवीकरण की जगह नया समझौता चाहता है, जिसमें बिहार के बाढ़ प्रबंधन और अन्य मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए।

 

फरक्का बैराज का निर्माण 1975 में मुख्य रूप से कोलकाता बंदरगाह और भागीरथी-हुगली जलमार्ग में नौ परिवहन के लिए गहराई बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। सोच यह थी कि हुगली नदी में पर्याप्त पानी पहुंचा कर कोलकाता बंदरगाह में गाद (सिल्ट) कम किया जाए। कालांतर में यह परियोजना बिहार, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गई। ALSO READ: जर्मन और विदेशी कामगारों की कमाई में इतनी बड़ी खाई क्यों?

 

बिहार में बाढ़ की वजह बना फरक्का बैराज

भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को 30 साल के लिए यह जल संधि की गई थी, जिसे फरक्का बैराज संधि कहा जाता है। इसका उद्देश्य दोनों देश के बीच पानी का बंटवारा करना था। पानी की उपलब्धता के अनुसार दोनों के हिस्से तय होते हैं। यह बैराज बंगाल में गंगा नदी पर बनाया गया है, लेकिन इसके कारण गंगा नदी के प्रवाह की गति पीछे की तरफ धीमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप नदी अपने साथ जो गाद लाती है, वह बैराज के पीछे बिहार में गंगा नदी की तलहटी में जमा हो जाती है।

 

बैराज के कारण गंगा व उसकी सहायक नदियांइस सिल्ट के कारण उथली होती जा रही हैं। मानसून में जब पानी बढ़ता है तो यही उथलापन, बाढ़ का कारण बन जाता है। इससे बिहार को दो तरफा नुकसान हो रहा है। शुष्क मौसम में पानी की कमी तथा मानसून में बाढ़। बिहार का कहना है कि इस बराज को या तो पूरी तरह हटा दिया जाए या फिर ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे गाद का बहाव सुचारू रूप से हो सके। ताकि, बिहार को बाढ़ की समस्या न झेलनी पड़े।

 

गंडक का जलस्तर तीन मीटर तक हो सकता है ऊंचा

इस बीच, बिहार सरकार ने नेपाल में फ्लैश फ्लड की आपदा और गंडक नदी में अचानक जल प्रवाह तेज होने की संभावना को देखते हुए बांधों तथा तटबंधों की 24 घंटे निगरानी का आदेश दिया है। सीमावर्ती छह जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नेपाल की त्रिशूली नदी का भारी सैलाब गंडक की ओर बढ़ रहा है। इससे नारायणी नदी में भी पानी बढ़ गया है। यही नारायणी नदी बिहार में गंडक नदी कहलाती है।

 

गंडक नदी के जलस्तर में एक से तीन मीटर तक की भारी वृद्धि की आशंका है। जल संसाधन विभाग के अनुसार बुधवार की रात आठ बजे के बाद फ्लैश फ्लड का पानी आना शुरू हुआ और 12 बजे तक जल प्रवाह डेढ़ लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। राहत की बात हालांकि यह रही कि 12.30 बजे यह घटकर 1.42 लाख और एक बजे 1.29 लाख तथा दो 1.04 लाख क्यूसेक रह गया। सुरक्षा के लिहाज से पश्चिम चंपारण जिला स्थित वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। ALSO READ: असम में क्यों हो रहा है इतना निवेश?

 

बिहार के बड़े क्षेत्र में पानी के फैलाव की आशंका

नेपाल से आने वाली ज्यादातर नदियों का बहाव बिहार की ओर ही है। वहीं बिहार में नदियां पहले से ही गाद से भरी हैं, इसलिए इस बार बड़ी आबादी को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ सकती है। गंगा मुक्ति आंदोलन के संस्थापक ए प्रकाश का कहना है कि हर साल मानसून में नेपाल में होने वाली बारिश का खामियाजा बिहार के 20 जिलों को भुगतना पड़ता है। लेकिन, इसे रोका नहीं जा सकता है, बल्कि इसका प्रभाव कम किया जा सकता है।

 

नदी विशेषज्ञ दिनेश मिश्र कहते हैं, ‘‘नदियों को रोकने की कवायद बेकार है। उन्हें अपनी रौ में बहने देना चाहिए। हमें बांध बनाकर या तटबंधों को ऊंचा कर उन्हें रोकना चाहते हैं। इससे बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं होगा। नदी की तलहटी में गाद जमा हो रही है। जब तक गाद प्रबंधन नहीं होगा तब तक समस्या ज्यों की त्यों ही रहेगी।''

 

फरक्का पर तेज हुई राजनीति

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल के बंटवारे को लेकर 30 साल पुराने इस समझौते की अवधि दिसंबर, 2026 में समाप्त हो रही है। अब इसके नवीनीकरण के समय बिहार की सियासत भी गर्म हो गई है। इसे लेकर जेडीयू और आरजेडी, दोनों ने एक दूसरे पर निशाना साधा है। जेडीयू सांसद संजय झा का कहना है कि 1996 में जब केंद्र की संयुक्त मोर्चा सरकार ने बांग्लादेश के साथ यह समझौता किया था, तब लालू प्रसाद यादव केंद्र में काफी प्रभावशाली नेता थे। अगर, उस समय बिहार सरकार ने इस जलसंधि का मजबूती से विरोध किया होता तो राज्य को बीते तीन दशकों से बाढ़ और फिर सूखे की दोहरी मार नहीं झेलनी पड़ती।

 

इस पर पलटवार करते हुए आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने सोशल मीडिया में एक बयान जारी कर नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश ने अपने राजनीतिक जीवन में दूरगामी प्रभाव वाले मुद्दों पर कभी ध्यान नहीं दिया। फरक्का के मुद्दे पर उन्होंने हमेशा चुप्पी साधे रखी। लालू ने संसद में अपने एक पुराने भाषण का वीडियो साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इस संधि को देशहित के खिलाफ बताते हुए कैसे इसे रद्द करने की मांग की थी। क्योंकि इसमें बिहार के भविष्य के खतरे को अनदेखा किया गया था।

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

putin and trump

ख़ुफ़िया एजेंसियां अपने राष्ट्र के दूरगामी हितों के लिए दोस्तों का भी बलिदान कर सकती है। ट्रम्प और पुतिन के दोस्ताना रिश्तों के बारे में दुनिया जानती है। ट्रम्प ईरान युद्द को जीतकर चुनाव जितना चाहते है वहीं पुतिन भी यूक्रेन को लेकर कुछ ऐसे ही मंसूबे पाले हुए है। यदि ईरान में तख्तापलट हो जाये तो ट्रम्प जीत जायेंगे और यदि यूक्रेन से जेलेंसकी की बिदाई हो जाये तो पुतिन जीत जायेंगे। लगता है ट्रम्प और पुतिन मिलकर एक दूसरे की मदद करने का मंसूबा बना चूके है। हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ का मॉस्को पहुंचना और रूसी खुफिया अधिकारियों से बातचीत करना इस बात का संकेत है कि दोनों महाशक्तियों के बीच कुछ खास पक रहा है।  

 

दरअसल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं होती, स्थायी होते हैं राष्ट्रीय हित। यही वजह है कि जो देश सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी दिखाई देते है, उनकी खुफिया एजेंसियां पर्दे के पीछे संवाद के रास्ते खुले रखती है। रैटक्लिफ ने मॉस्को में रूसी खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत की, इसकी रूस की विदेशी खुफिया सेवा एसवीआर के प्रमुख सर्गेई नारीश्किन ने पुष्टि की है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सीआईए प्रमुख की मॉस्को यात्रा का महत्व  बहुत अधिक है। दोनों देशो की खुफियां एजेंसियों के बीच संवाद का इतिहास भी पुराना है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ वैचारिक रूप से एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे, लेकिन नाजी जर्मनी के खिलाफ दोनों एक ही मोर्चे पर खड़े थे। उस दौर में अमेरिकी ओएसएस और सोवियत खुफिया तंत्र के बीच संपर्क स्थापित हुआ। अमेरिकी खुफिया इतिहास से पता चलता है कि ओएसएस प्रमुख विलियम जे.डोनोवन ने 1943 में सोवियत अधिकारियों के साथ खुफिया सहयोग और सूचनाओं के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर बातचीत की थी। कुछ ही वर्षों बाद यही दोनों देश शीत युद्ध में एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन गए। इतिहास का यह अध्याय बताता है कि खुफिया सहयोग विचारधारा या मित्रता पर नहीं, बल्कि तत्कालीन रणनीतिक जरूरतों पर आधारित होता है।

 

अमेरिका और रूस के बीच बाद के वर्षों में भी सीमित खुफिया सहयोग के उदाहरण मिलते है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देशों ने कई बार एक-दूसरे को महत्वपूर्ण सूचनाएं दी है। दिसंबर 2017 में अमेरिका ने रूस को सेंट पीटर्सबर्ग में संभावित आतंकी हमले की जानकारी दी थी। रूसी सुरक्षा एजेंसियों ने इस सूचना के आधार पर कार्रवाई की और हमले की साजिश को विफल किया। इसके बाद राष्ट्रपति पुतिन ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन कर अमेरिकी सहायता के लिए धन्यवाद दिया था। यह घटना बताती है कि गंभीर साझा खतरे के सामने कट्टर प्रतिद्वंद्वी भी खुफिया जानकारी साझा कर सकते हैं।


रैटक्लिफ की वर्तमान मॉस्को यात्रा को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। यूक्रेन युद्ध ने अमेरिका और रूस को आमने-सामने खड़ा कर रखा है, लेकिन युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों ने दोनों के बीच संवाद की आवश्यकता भी पैदा की है। राष्ट्रपति ट्रंप के लिए यूक्रेन युद्ध का अंत उनकी विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि हो सकता है, जबकि पुतिन ऐसी समाप्ति चाहते हैं जिसमें रूस की रणनीतिक और क्षेत्रीय स्थिति कमजोर न हो। दोनों के हित पूरी तरह समान नहीं हैं, लेकिन युद्ध समाप्त करने की आवश्यकता दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक ला सकती है। ऐसे संवेदनशील दौर में खुफिया चैनल औपचारिक कूटनीति से अधिक उपयोगी साबित होते हैं, क्योंकि उनके माध्यम से बिना सार्वजनिक दबाव के संभावित विकल्पों पर बातचीत की जा सकती है।

 

इस पूरे घटनाक्रम में ईरान भी एक महत्वपूर्ण कड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, रूस और ईरान के रणनीतिक संबंध तथा पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते समीकरणों ने मॉस्को और वॉशिंगटन दोनों की चिंताएं बढ़ाई है। यदि अमेरिका ईरान में निर्णायक रणनीतिक सफलता चाहता है, तो उसे रूस की भूमिका और उसके प्रभाव को भी ध्यान में रखना होगा। इसी तरह रूस के लिए भी यूक्रेन के अलावा पश्चिम एशिया में बदलते शक्ति-संतुलन को समझना आवश्यक है। इस मुलाकात में ईरान में तख्तापलट या यूक्रेन में राष्ट्रपति जेलेंस्की की सत्ता से विदाई पर बातचीत की संभावना से इसलिए इंकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इस पर ट्रम्प और पुतिन का राजनीतिक भविष्य टिका हुआ है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति की वास्तविकता है कि बड़ी शक्तियां दूसरे देशों की राजनीतिक परिस्थितियों को अपने हितों के अनुरूप प्रभावित करने के विकल्पों पर विचार करती रहती है। सत्ता परिवर्तन, नेतृत्व परिवर्तन या राजनीतिक दबाव जैसी परिस्थितियां कई बार बड़े भू-राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा बनती है। इसलिए रैटक्लिफ की यात्रा को सामान्य तो नहीं लिया जा सकता। 

 

इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि ट्रंप और पुतिन के बीच सार्वजनिक राजनीति से अलग एक रणनीतिक संवाद की संभावना बनी हुई है। दोनों नेता अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और खुफिया एजेंसियां इसी रणनीतिक सोच का सबसे संवेदनशील हिस्सा होती है। वे मित्रता की रक्षा से अधिक अपने राष्ट्र के हितों की रक्षा करती है। आवश्यकता पड़ने पर प्रतिद्वंद्वी से बातचीत करना और अवसर मिलने पर सहयोगी से दूरी बनाना उनके लिए असामान्य नहीं है। इतिहास बताता है कि खुफिया एजेंसियों के बीच होने वाली बातचीत का वास्तविक महत्व अक्सर उसके तत्काल सार्वजनिक परिणामों से नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में दिखाई देने वाले घटनाक्रमों से समझ में आता है। अमेरिका और रूस भले ही आज भी प्रतिद्वंद्वी हों, लेकिन राष्ट्रीय हित उन्हें एक-दूसरे से बात करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। खुफिया एजेंसियों की यह खामोश कूटनीति आने वाले समय में यूक्रेन और ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक शक्ति-व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

 

ईरान रूस का रणनीतिक साझेदार है, जबकि यूक्रेन अमेरिका और यूरोप की सुरक्षा-व्यवस्था का अहम मोर्चा। ऐसे में यदि दोनों देशों में सत्ता परिवर्तन होता है और नई सत्ताएं मॉस्को और वॉशिंगटन के अनुकूल बैठती है, तो यह पुतिन और ट्रंप दोनों के लिए असाधारण राजनीतिक जीत होगी। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महाशक्तियां अपने हितों के लिए दूसरे देशों की राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता परिवर्तन को प्रभावित करने से पीछे नहीं रही है। सत्ता परिवर्तन कई बार विचारधारा से नहीं, भू-राजनीतिक जरूरतों से संचालित होते हैं। ट्रंप और पुतिन भी शक्ति की इसी कठोर राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते है।

UP Free Bus Travel: रक्षाबंधन पर योगी सरकार का तोहफा, पहले दिन 9 लाख से ज्यादा लोगों ने किया नि: शुल्क सफर

UP Free Bus Travel: रक्षाबंधन पर योगी सरकार का तोहफा, पहले दिन 9 लाख से ज्यादा लोगों ने किया नि: शुल्क सफर

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रक्षाबंधन पर्व पर योगी सरकार की ओर से महिलाओं और बहनों को दी गई निशुल्क बस यात्रा की सुविधा का पहले दिन बड़ी संख्या में यात्रियों ने लाभ उठाया। 27 अगस्त से शुरू हुई निशुल्क बस यात्रा में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में 6.03 लाख से अधिक महिलाओं ने सफर किया। वहीं, महिलाओं के साथ सफर करने वाले 3.22 लाख से अधिक सहयात्रियों को भी निशुल्क यात्रा का लाभ मिला। इस तरह पहले दिन कुल 9.26 लाख से अधिक यात्रियों ने बिना किराया दिए सफर किया। परिवहन निगम के मुताबिक इस निशुल्क यात्रा की कुल कीमत 9.06 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

 

यूपीएसआरटीसी प्रधान प्रबंधक (संचालन) अनिल कुमार ने कहा कि रक्षाबंधन पर महिलाओं को किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें सुगम व सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराई जा सके, इसके लिए परिवहन निगम के अधिकारी और कर्मचारी भी युद्ध स्तर पर जुटे हुए हैं। सरकार और विभाग प्रमुख की तरफ से मिले निर्देशों के क्रम में यात्रियों की बढ़ी संख्या को देखते हुए जरूरत के अनुसार अतिरिक्त बसों को भी सड़कों पर उतारा गया है। बसों के संचालन, यात्रियों की सुविधा और व्यवस्था पर निगम की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है।

 

इन पांच क्षेत्रों में अब तक सबसे ज्यादा निशुल्क सेवा का लाभ लिया

पहले दिन महिलाओं और उनके साथ सफर करने वाले सहयात्रियों की कुल संख्या के लिहाज से मुरादाबाद क्षेत्र सबसे आगे रहा, जहां 62,586 महिलाओं और 32,203 सहयात्रियों समेत कुल 94,789 यात्रियों ने निशुल्क यात्रा की। इसके बाद हरदोई में 82,920, गोरखपुर में 68,152, लखनऊ में 64,590 और बरेली में 58,309 यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। इन पांच क्षेत्रों में ही कुल करीब 3.69 लाख यात्रियों ने निशुल्क सफर किया।

 

यात्रियों ने की सरकार के कदम की सराहना

रक्षाबंधन पर निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलने से महिलाओं के साथ उनके सहयात्रियों में भी खुशी का माहौल रहा। यात्रियों का कहना है कि त्योहार पर बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर जाने की जरूरत होती है। ऐसे में निशुल्क बस यात्रा से परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है। महिलाओं के साथ सहयात्री भी योगी सरकार की इस पहल की सराहना कर रहे हैं। साथ ही अतिरिक्त बसों के संचालन से भीड़ के बीच घर पहुंचने में सुविधा मिलने की बात यात्रियों ने कही।

 

परिवहन निगम कर रहा निरीक्षण

निशुल्क यात्रा का लाभ पात्र यात्रियों तक पहुंचे और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए परिवहन निगम की टीमें विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण भी करेंगी। इससे बसों में निशुल्क यात्रा की व्यवस्था की निगरानी के साथ यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का भी जायजा लिया जाएगा।