अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपना रुख एक बार फिर साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें ईरान पर बिल्कुल भरोसा नहीं है और वे ईरान पर भरोसा करने वाले आखिरी व्यक्ति हैं। उन्होंने फिर दोहराया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अब अमेरिका के नियंत्रण में ह
Crude Oil Price Today: बुधवार को तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता और दो जहाजों पर हमलों के कारण मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट की आशंका बढ़ गई। इंडस्ट्री के डेटा में US में कच्चे तेल के स्टॉक में बढ़ोतरी के संकेत मिलने के बावजूद कीमतों में यह उछाल आया।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 72 सेंट या 0.81% बढ़कर $89.63 प्रति बैरल हो गया, जिससे लगातार छठे दिन इसमें तेज़ी बनी रही, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 71 सेंट या 0.85% बढ़कर $83.91 पर पहुंच गया, समें पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में 11% की बढ़त हुई है।
पिछले सेशन में दोनों बेंचमार्क $1 से ज़्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए थे और 31 जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे क्लोजिंग लेवल पर पहुंच गए थे। सोमवार को कीमतों में लगभग 5% का उछाल आया था, क्योंकि US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीदें कम हो गई थीं।
आज कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी की क्या वजह है?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि US और ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ (Strait of Hormuz) को लेकर किसी तरह के समझौते के करीब हैं। अल जज़ीरा ने कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि इस अहम समुद्री रास्ते को लेकर ईरान और ओमान के बीच अलग-अलग बातचीत में भी काफी प्रगति हुई है।
इस अहम शिपिंग रूट को फिर से खोलने की कोशिशों से जुड़ी घटनाओं का तेल की कीमतों पर गहरा असर पड़ रहा है। फ्यूचर्स की कीमतें बार-बार बदल रही हैं – कभी जल्द समझौते की उम्मीद तो कभी बातचीत की गति धीमी पड़ने की चिंता। क्षेत्रीय तनाव अभी भी बना हुआ है, खासकर तब से जब US नेवी के एक हेलीकॉप्टर ने पनामा के झंडे वाले एक कार्गो जहाज पर दो हेलफायर मिसाइलें दागीं; बताया जा रहा है कि यह जहाज ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था।
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होने वाली शिपिंग एक्टिविटी में भारी गिरावट आई है, हालांकि कुछ कच्चा तेल अभी भी फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से बाहर जा रहा है और कई टैंकर अपने ट्रांसपोंडर बंद करके चल रहे हैं। US के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि US सेना की मदद से इस जलडमरूमध्य (strait) से हर दिन लगभग 9 मिलियन बैरल तेल आ-जा रहा है।
इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 40% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतों में और भी तेज़ी से उछाल आया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण आई रुकावटों का असर डीजल की कीमतों पर भी पड़ा है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की ‘शॉर्ट-टर्म एनर्जी आउटलुक’ रिपोर्ट के अनुसार, US को उम्मीद है कि ईरान के साथ चल रहे टकराव की वजह से 2027 के आखिर तक तेल की सप्लाई में हर दिन औसतन 6,00,000 बैरल की रुकावट आएगी।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि “हालात शांति की ओर बढ़ रहे हैं,” हालांकि उन्होंने इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी। पाकिस्तान इस टकराव को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहा है। उनके ये बयान US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के प्रति सख़्त रुख अपनाने के बाद आए हैं।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
ईरान अमेरिका युद्ध पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी है। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार जुबानी जंग जारी है। ट्रंप लगातार ईरान को धमकी देते रहते हैं कि उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। कुछ दिनों पहले ही ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। तब दुनिया ने ट्रंप के बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज पर अब 100 फीसदी अमेरिका का कंट्रोल रहेगा। वहीं, ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए उसके मुआवजे की मांग को ठुकरा दिया है, साथ ही ये भी ऐलान किया है
Crude Oil Price: कल कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन उछाल आया। मंगलवार, 11 अगस्त को एशिया में शुरुआती कारोबार में भी ये बढ़त बनी रही। ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ कड़ी मांगें रखने के बाद हुआ, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की किसी भी संभावित डील की उम्मीदें धुंधली हो गई।
ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में रात भर में 5% की बढ़ोतरी हुई। WTI आज सुबह $82 प्रति बैरल के स्तर पर बना रहा। ब्रेंट $87 प्रति बैरल से ऊपर बंद होने के बाद $90 प्रति बैरल के निशान की ओर बढ़ा।
ट्रंप ने आगे लिखा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे भविष्य की सभी बातचीत में इन नई मांगों को मजबूती से रखें। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पिछली किसी भी बैठक में मुआवजे का मुद्दा कभी नहीं उठा। हालांकि, ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए $300 बिलियन का फंड उस 14-सूत्रीय MoU (समझौता ज्ञापन) का हिस्सा है, जिस पर ट्रंप ने खुद जून में फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए थे।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि हालांकि ईरान और ओमान इस महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग (chokepoint) के भविष्य के प्रशासन पर द्विपक्षीय बातचीत में लगे हुए हैं, लेकिन जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक यह जलडमरूमध्य फिर से नहीं खुलेगा।
ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में ‘एनर्जी एस्पेक्ट्स’ की फाउंडर और मार्केट इंटेलिजेंस डायरेक्टर अमृता सेन ने बताया कि अभी होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल पांच जहाज गुजर रहे हैं। यह संख्या जून में MoU पर हस्ताक्षर के बाद ट्रैफिक के 14 के दैनिक औसत तक पहुंचने की तुलना में काफी कम है।
TD सिक्योरिटीज में कमोडिटी स्ट्रैटेजी के ग्लोबल हेड बार्ट मेलेक ने कहा, “यह देखते हुए कि जलडमरूमध्य अभी भी बंद है, ग्लोबल इन्वेंट्री में भारी कमी आई है और फ्लो सामान्य स्तर के आसपास भी नहीं है, हम ‘शॉर्ट्स कवर’ (short covering) में आक्रामक तेजी देख सकते हैं।” उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि ब्रेंट मौजूदा स्तर से $10-15 ऊपर ट्रेड करेगा।”
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Colombia Earthquake: सोमवार को आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने कोलंबिया के पश्चिमी हिस्से में भारी तबाही मचाई है। देश का सबसे गरीब विभाग चोको और मशहूर कॉफी एक्सिस इलाके इस भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बता दें कि इस भयानक आपदा से अब तक कम से कम 132 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 570 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
वहीं, भूकंप के तेज झटकों से दर्जनों इमारतें ढह गई हैं और मलबे में अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। फिलहाल, राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
कोलंबिया की जियोलॉजिकल सर्विस के मुताबिक, यह 21वीं सदी में देश में दर्ज किया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप है।
1. कोलंबिया का सबसे गरीब इलाका चोको, एक बड़ी बचाव चुनौती का सामना कर रहा है
भूकंप का केंद्र चोको विभाग के सैन जोस डेल पालमार के पास था। चोको कोलंबिया के सबसे गरीब इलाकों में से एक है, जहां दो-तिहाई से ज्यादा आबादी गरीबी में रहती है। इस इलाके में सड़क संपर्क बेहद सीमित है और कई गांव दूर-दराज के क्षेत्रों में बसे हैं। ऐसे में राहत और बचाव टीमों को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में काफी मुश्किल हो रही है। संचार व्यवस्था प्रभावित होने से रेस्क्यू और राहत अभियान की परेशानी और बढ़ गई है।
2. कॉफी उत्पादन वाले इलाके में भारी तबाही
कोलंबिया के कॉफी उत्पादन वाले इलाके के बीचों-बीच स्थित रिसराल्डा (Risaralda) सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है। यहां के परेरा (Pereira) में सबसे ज्यादा 60 लोगों की मौत हुई है, जबकि डॉस्क्यूब्राडास (Dosquebradas) में भी भारी तबाही हुई है। अधिकारी तबाही के पैमाने का आकलन कर रहे हैं और बचाव टीमें गिरी हुई और क्षतिग्रस्त इमारतों के बीच काम कर रही हैं।
3. 1,500 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त
राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने बताया कि 1,577 रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिनमें से 37 पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। 60 से ज्यादा इमारतें ढह गई हैं, जबकि 18 स्वास्थ्य केंद्र और 52 स्कूल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा, पांच राजधानी शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।
4. बचावकर्मी बचे हुए लोगों की तलाश कर रहे हैं, अस्पतालों को भी नुकसान
भूकंप ने कई शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। कैली में यूनिवर्सिटी अस्पताल का एक हिस्सा ढह गया, जिससे मरीज अंदर फंस गए। अस्पताल के बुनियादी ढांचे का लगभग 30% हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ, जिसमें बच्चों के इलाज (पीडियाट्रिक्स), इंटरनल मेडिसिन और नवजात शिशु इकाई (नियोनेटल यूनिट) वाले हिस्से शामिल हैं। मलबे से कम से कम चार लोगों को बचाया गया, जबकि अन्य मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
5. बचाव दल ने तेज किया रेस्क्यू ऑपरेशन
गिरी हुई इमारतों के मलबे में दबे लोगों को खोजने के लिए प्रभावित इलाकों में पुलिस, फायरफाइटर, सैनिक और वॉलंटियर्स को तैनात किया गया है। कैली में, बचावकर्मियों ने गिरी हुई एक इमारत से दो महिलाओं और दो बच्चों को जिंदा बाहर निकाला है। अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों को ढूंढना और उन्हें बचाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
6. तबाही से जूझ रहे कोलंबिया की मदद के लिए आगे आए कई देश
भूकंप से हुई भारी तबाही के बीच कई देशों ने कोलंबिया की मदद के लिए रेस्क्यू टीम, मेडिकल स्टाफ और जरूरी उपकरण भेजने की पेशकश की है। इक्वाडोर ने 47 बचावकर्मियों, खोजी कुत्तों और ऐसे उपकरणों की पेशकश की है, जो करीब सात दिनों तक बिना बाहरी मदद के काम कर सकते हैं। इसके अलावा, अल साल्वाडोर और मैक्सिको ने भी सहायता की पेशकश की है। जबकि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे कोलंबिया की मदद के लिए तैयार हैं।
बता दें कि यह भूकंप सोमवार को स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 7:34 बजे आया। US जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, इसका केंद्र चोको (Chocó) में सैन होज़े डेल पालमार के पास ज़मीन से 107 किलोमीटर की गहराई में था। बचाव कार्य जारी रहने के साथ ही, अधिकारी पश्चिमी और मध्य कोलंबिया में हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं और साथ ही टूटी हुई सड़कों, ठप पड़े संचार और ज़रूरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं से भी निपट रहे हैं।
Donald Trump Iran News: अमेरिका-ईरान पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। जब से युद्ध की शुरुआत हुई है, पूरी दुनिया में गैस और ईंधन की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। तेल की चढ़ती कीमत ने दुनिया भर में महंगाई बढ़ा दी है और इसका सबसे बड़ा कारण है होर्मुज से जहाजों का नियमित रूप से नहीं
Share Market News: एशियाई बाजारों में रौनक के बीच घरेलू स्टॉक मार्केट में आज बिकवाली का दबाव दिख रहा है। शुरुआती कारोबार में ग्रीन जोन में खुलने के बाद सेंसेक्स और निफ्टी 50 लाल हो गए। डे-हाई से सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24500 के काफी करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर मिला-जुला रुझान है। निफ्टी मिडकैप स्मॉलकैप 100 में फिलहाल हल्की गिरावट है तो निफ्टी मिडकैप 100 में बढ़त दिख रही है।
घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:07 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 61.28 प्वाइंट्स यानी 0.08% की गिरावट के साथ 78,437.89 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 24.60 प्वाइंट्स यानी 0.10% की फिसलन के साथ 24,546.05 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 177.81 प्वाइंट्स उछलकर 78,676.98 तक जाने के बाद 378.06 प्वाइंट्स टूटकर 78,298.92 और निफ्टी भी 50.30 प्वाइंट्स चढ़कर 24,620.95 तक पहुंचने के बाद 109.85 प्वाइंट्स फिसलकर 24,511.10 तक आ गया।
Share Market Fall: इस कारण दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी मांगें रख दीं। इनमें अरबों डॉलर का अमेरिकी भुगतान, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। इससे मार्केट पर दबाव बढ़ा है।
कच्चे तेल में उबाल: ईरान की नई शर्तों ने कच्चे तेल में उबाल लाया तो मार्केट को झटका लगा। फिलहाल ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक उछलकर प्रति बैरल $84 के पार पहुंच गया।
India VIX में उछाल: मार्केट की घबराहट मापने वाले इंडिया विक्स की उछाल ने मार्केट पर दबाव बनाया है। फिलहाल यह 4.64% की गिरावट के साथ 12.72 पर है। इसके अधिक होने से अगले 30 दिनों में मार्केट में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका होती है तो कम होने से इसके कम होने के आसार दिखते हैं।
सरकारी बैंक और एफएमसीजी स्टॉक्स डाल रहे दबाव: मार्केट को सरकारी बैंक और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर नीचे लाने की कोशिश कर रहे हैं। इनके निफ्टी इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की गिरावट है।
Share Market Rise: इन बातों से मिल रहा सपोर्ट
IT-Auto खींच रहे ऊपर: मार्केट को आईटी और ऑटो सेक्टर ऊपर खींचने का पूरा जोर लगा रहे हैं। इनके निफ्टी इंडेक्स में फिलहाल करीब आधे फीसदी की बढ़त है।
अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने के आसार फीके: जुलाई की उम्मीद से कमजोर जॉब रिपोर्ट के बाद सितंबर में ब्याज बढ़ने की आशंका कम होने से अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी आई। इससे भारतीय मार्केट को भी सपोर्ट मिला।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी: शुक्रवार 7 अगस्त को विदेशी निवेशकों ने बिकवाली से अधिक खरीदारी की जिससे मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है। लगातार दो दिनों की नेट बिकवाली के बाद शुक्रवार को FIIs (फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स) ने ₹480.24 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की।
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‘ईरानी जमीन पर कदम रखा तो हाथ काट देंगे…’, अमेरिका को तेहरान की खुली चेतावनी
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Ethanol-Petrol Controversy: देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर जारी विवाद के बीच मध्य प्रदेश के रीवा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जनार्दन मिश्रा ने रविवार (9 अगस्त) को इस पॉलिसी के बचाव में विरोधियों पर निशाना साधते हुए एक विवादित टिप्पणी की। रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए ‘नई उड़ान’ सेवाओं के उद्घाटन के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते मिश्रा ने कहा कि भारत में केवल 20 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन होता है। जबकि 80 प्रतिशत तेल विदेश से आयात करना पड़ता है। इस दौरान एथेनॉल-ब्लेंडिंग नीति का बचाव करते हुए बीजेपी सांसद ने विवादित बयान देते हुए कहा कि शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के यहां से आएगा जब देश में शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं…।
वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए बीजेपी सांसद मिश्रा ने कहा कि तेल आपूर्ति के लिए जहाजों को 18,000 किलोमीटर के करीब अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। उन्होंने कहा, “ऐसी परिस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की बात करते हैं तो कुछ लोग विरोध में आंदोलन करने लगते हैं।” उन्होंने आक्रामक अंदाज में बघेली भाषा में कहा, “आंदोलन हो रहा है एथेनॉल नहीं चलेगा, शुद्ध पेट्रोल चलेगा। शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा? शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं देश में तो कहां से आएगा?”
एथेनॉल से चलने वाले वाहनों का समर्थन किया
मिश्रा ने कहा कि भारत में वाहन एथेनॉल-ब्लेंडिंग ईंधन से चल सकते हैं। लेकिन कुछ लोग एथेनॉल के इस्तेमाल का विरोध करते हुए इसे पेट्रोल में नहीं मिलाने की बात कह रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “एथेनॉल नहीं बनेगा तो पेट्रोल कहां से आएगा, डीजल कहां से आएगा?” पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राजील में तो गाडियां 100 प्रतिशत एथेनॉल से चल रहीं। लेकिन इसके बावजूद वहां वाहनों में ऐसी कोई समस्या नहीं है। मिश्रा पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने के सरकार के लक्ष्य का बचाव कर रहे थे।
उन्होंने जनता को याद दिलाया कि ब्राजील दुनिया में सबसे ज्यादा एथेनॉल का उत्पादन करता है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि वहां 100 फीसदी एथेनॉल से गाड़ियां चल रही हैं। अक्सर अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए सुर्खियों में रहने वाले मिश्रा ने कहा कि भारत में भी विशेषज्ञों की राय है कि एथेनॉल से गाड़ियों के इंजन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। लेकिन इसके बावजूद बेवजह विरोध किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया में सबसे कम महंगाई और सबसे अधिक रोजगार कहीं है तो वह भारत में है।
एथेनॉल पर बहस तेज
मिश्रा की ये बातें केंद्र के इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर चल रही बहस के बीच आई हैं। इस बहस में मुख्य रूप से गाड़ियों की कम्पैटिबिलिटी, फ्यूल एफिशिएंसी और ग्राहकों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। सरकार E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। इसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल होता है। यह कदम कच्चे तेल के आयात को कम करने और देश में बने वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की कोशिशों का हिस्सा है।
केंद्र का कहना है कि E20 की टेस्टिंग और फील्ड अनुभव से इंजन में असामान्य टूट-फूट, जंग लगने या गाड़ी की उम्र कम होने का कोई सबूत नहीं मिला है। मिश्रा ने बायोगैस और CNG जैसे वैकल्पिक ईंधन के लिए सरकार की व्यापक कोशिशों का भी समर्थन किया। साथ ही हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों पर भी जोर दिया। फिलहाल, उनका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। विपक्षी पार्टियां भगवा पार्टी पर हमलावर हैं।
पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने पर आंदोलन हो रहा, शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा, शुद्ध पेट्रोल देश में है हीं नहीं – जनार्दन मिश्रा… रीवा सांसद pic.twitter.com/e3xsks0cIJ
— Brajesh Rajput (@drbrajeshrajput) August 9, 2026
H-1B Visa News: अमेरिका में नौकरी गंवाने के बाद तुरंत देश छोड़ना पड़ सकता है। इसकी वजह ये है कि अमेरिकी सरकार वीजा को लेकर 60 दिनों के ग्रेस पीरियड को समाप्त करने पर विचार कर रही है। यह वह समय है, जिसके भीतर नौकरी जाने के बाद अमेरिका में रहकर नई नौकरी खोजने की सहूलियत मिलती है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्ताव DHS (डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी) ने दिया है और फिलहाल व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट (OMB) इस पर विचार कर रहा है। अभी इस पर कोई फैसला नहीं है और प्रस्ताव की पूरी जानकारी सार्वजनिक भी नहीं हुई है। हालांकि अगर यह लागू होती है तो नौकरी जाने के बाद विदेशी एंप्लॉयीज के पास नई नौकरी खोजने या अपने इमिग्रेशन स्टेटस को बनाए रखने के लिए काफी कम समय मिल सकता है।
क्या है 60-दिनों का ग्रेस पीरियड
60-दिनों के ग्रेस पीरियड की सुविधा 2017 में मिलनी शुरू हुई थी ताकि कुछ विदेशी एंप्लॉयीज को अचानक नौकरी चले जाने की स्थिति में थोड़ा समय मिल सके। मौजूदा नियमों के अनुसार एलिजिबल वर्कर्स नौकरी खत्म होने के बाद आम तौर पर लगातार 60 दिनों तक या फिर वीजा पीरियड, जो भी पहले हो, तक अमेरिका में रह सकते हैं। इस दौरान वे नई नौकरी तलाश सकते हैं, नए एंप्लॉयर के साथ नौकरी हासिल कर सकते हैं, अपना इमिग्रेशन स्टेटस बदलने की कोशिश कर सकते हैं और अमेरिका में कानूनी रूप से रहने के लिए दूसरे विकल्प तलाश सकते हैं। ग्रेस पीरियड के इस नियम से अमेरिका में पहले से मौजूद फॉरेन वर्कर्स को नई नौकरी देने में एंप्लॉयर्स को भी सुविधा मिलती है।
भारतीयों पर अधिक असर क्यों?
अभी ग्रेस पीरियड हटाने की बात सिर्फ प्रस्ताव में है लेकिन अगर यह लागू होता है तो भारतीय प्रोफेशनल्स पर इसका गंभीर असर हो सकता है क्योंकि एच-1बी वीजा पर अमेरिका में काम करने वालों में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी है। USCIS (यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज) के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में जितनी एच-1बी याचिका को मंजूरी दी गई थी, उसमें से करीब 71% तो भारत में जन्मे लोगों के थे। अमेरिका में 52 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग हैं। ऐसे में एंप्लॉयमेंट-बेस्ड इमिग्रेशन रूल्स में बदलाव का असर बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है, खासतौर पर टेक्नोलॉजी जैसी इंडस्ट्री में, जहां जॉब स्विचिंग और लेऑफ होते रहते हैं।

