Gift Nifty Indictor: बाजार पर हावी हो सकते है मंदड़िए, गिफ्ट निफ्टी 200 अंक नीचे, जानें आज निफ्टी-बैंक निफ्टी के लिए कौन से लेवल होंगे अहम

Gift Nifty Indictor: भारतीय बाजार आज 24, जुलाई को एक और कमजोर सेशन के लिए तैयार हैं। गिफ्ट निफ्टी पर ग्लोबल इक्विटी में बिकवाली और तेल की कीमतों में तेज गिरावट का असर देखने को मिल रहा है। निफ्टी 50 की परफॉर्मेंस का शुरुआती इंडिकेटर,  गिफ्ट निफ्टी  सुबह 8 बजे 23,656.50 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज 23,873.60 से 205 पॉइंट्स नीचे है।

बता दें कि गुरुवार को, बेंचमार्क में लगातार चौथे सेशन में गिरावट जारी रही, जो 6 जून के बाद से उनकी सबसे लंबी गिरावट का सिलसिला था, क्योंकि ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतों ने सेंटिमेंट पर असर डाला। निफ्टी 50 126.65 पॉइंट्स या 0.53% गिरकर 23,869.60 पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 363.66 पॉइंट्स या 0.47% गिरकर 76,391.39 पर आ गया।

शुक्रवार को एशियाई मार्केट भी नीचे ट्रेड कर रहे थे, पिछले सेशन से हो रही गिरावट जारी रही क्योंकि तेल की ज़्यादा कीमतों और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में बिकवाली के एक और दौर ने महंगाई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलने वाले इन्वेस्टमेंट के आउटलुक को लेकर चिंता बढ़ा दी। जापान का निक्केई 225 2.46 परसेंट गिरा, साउथ कोरिया का कोस्पी 3.04 परसेंट गिरा, ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 0.57 परसेंट गिरा और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.01 परसेंट फिसला।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तेल की कीमतों में तेज़ी आने से गुरुवार को U.S. इक्विटीज़ तेज़ी से नीचे बंद हुईं, जबकि इन्वेस्टर्स दुनिया की दो सबसे बड़ी कंपनियों की तिमाही कमाई का अंदाज़ा लगा रहे थे। अल्फाबेट के नतीजों ने बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खर्च को लेकर चिंता बढ़ा दी।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 506.93 पॉइंट्स या 0.97 परसेंट गिरकर 51,711.65 पर आ गया। S&P 500 1.21 परसेंट गिरकर 7,408.30 पर आ गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 2.15 परसेंट गिरकर 25,137.69 पर आ गया। टेक्नोलॉजी-हैवी इंडेक्स पर अल्फाबेट में 7 परसेंट और टेस्ला में 14 परसेंट की गिरावट का असर पड़ा, जो उनकी अर्निंग्स रिपोर्ट के बाद आई।

रेड सी में टैंकरों पर हूथी हमलों के बाद मिडिल ईस्ट संघर्ष में एक नया मोर्चा खुलने के बाद ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा था, जबकि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले बढ़ाने की धमकी दी थी। ग्लोबल बेंचमार्क गुरुवार को दो महीने में पहली बार $100 के निशान से ऊपर चढ़ गया और इस हफ्ते इसमें लगभग 14 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $92 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था।

ट्रंप ने रेड सी में जहाजों पर और हमले होने पर ईरान और हूथी दोनों के लिए “बड़ी मिलिट्री सज़ा” की चेतावनी दी और एक्सियोस को बताया कि वह ईरान पर “बड़े हमले” पर विचार कर रहे हैं।

तेल बाज़ार रूस के ब्लैक सी कोस्ट पर कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम टर्मिनल पर हुए हमलों से भी जूझ रहा है, जो कज़ाकिस्तान का ज़्यादातर क्रूड एक्सपोर्ट करता है। मिडिल ईस्ट में महीनों से चल रहे संघर्ष के कारण ग्लोबल इन्वेंटरी कम हो गई है, जिससे सप्लाई कम होने और बड़े पैमाने पर आर्थिक झटके का खतरा बढ़ गया है।

इस महीने तेल की कीमतों में तेज़ी आई है क्योंकि फ़ारस की खाड़ी में US और ईरान के बीच दुश्मनी बढ़ गई है, जिससे होर्मुज़ स्ट्रेट से ट्रैफ़िक में रुकावट आई है और क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस के फ्लो पर असर पड़ा है। रेड सी में ईरान-समर्थित हूथी मिलिटेंट्स द्वारा सऊदी अरब के टैंकरों पर पहले हमलों ने पूरे इलाके में सप्लाई में बड़े पैमाने पर रुकावटों को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।

निफ्टी- बैंक निफ्टी के लिए क्या होगा आज आउटलुक 

आज बैंक निफ्टी के आउटलुक पर बात करते हुए एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि  बैंक निफ्टी के नेगेटिव बायस के साथ ट्रेड करने की उम्मीद है, जिससे हाल के सेशन में देखी गई लगातार कमजोरी और बढ़ेगी। इंडेक्स अपने मुख्य रेजिस्टेंस लेवल से नीचे बना हुआ है और अपने 200-दिन के EMA (56,495) से थोड़ा ऊपर बना हुआ है, जिससे पता चलता है कि बेयर्स शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पर मजबूती से कंट्रोल में हैं। टेक्निकल नजरिए से, 56,800–56,900 ज़ोन तुरंत रेजिस्टेंस है, इसके बाद 57,200–57,300 ज़ोन और ऊपर है।

नीचे की तरफ, 56,400–56,300 ज़ोन तुरंत सपोर्ट बना हुआ है, जो पिछले सेशन में मजबूत बना हुआ था। इस लेवल से नीचे एक बड़ा ब्रेक सेलिंग प्रेशर बढ़ सकता है और इंडेक्स 56,000–55,800 सपोर्ट ज़ोन की ओर खिंच सकता है। कुल मिलाकर, शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक बेयरिश बना हुआ है, इंडेक्स के शॉर्ट-टर्म टेक्निकल स्ट्रक्चर में काफ़ी सुधार लाने और मोमेंटम को बुल्स के पक्ष में करने के लिए 57,000 मार्क से ऊपर लगातार मूव जरूरी होगा।

पीएल कैपिटल के हेड एडवाइजरी विक्रम कासट ने कहा, “तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर चढ़ने और जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने के कारण बाज़ार फिर से साफ़ तौर पर रिस्क-ऑफ मोड में आ गए हैं। मज़बूत कॉर्पोरेट फंडामेंटल्स पर सख्त फाइनेंशियल हालात और बढ़ते रिस्क से बचने की प्रवृत्ति का असर पड़ सकता है। निफ्टी के लिए, 23,600 एक मुख्य सपोर्ट लेवल बना हुआ है, जबकि 24,000 तुरंत रेजिस्टेंस है।”

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ईरान पर सबसे बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका:ट्रम्प बोले- फैसला लेना बाकी; ईरान ने कहा- इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर सबसे बड़ा हमला करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “तैयारी पूरी है, अब सिर्फ फैसला लेना बाकी है।” ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान ने अभी तक पर्याप्त दर्द नहीं झेला है। ट्रम्प के बयान के बाद ईरान ने भी तुरंत जवाब दिया। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर अमेरिका ने हमले जारी रखे तो उसे इसकी “और भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म करने का रास्ता बातचीत है, नए हमले नहीं। इधर, ब्रिटेन ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ने पर उसकी सेना देश की सुरक्षा के लिए तैयार है। इससे पहले ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया तो उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. सऊदी के दो जहाजों पर हमला: यमन के हूती विद्रोहियों ने रेड सी में सऊदी अरब के दो तेल टैंकर एन्सेलिया और लैला पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। संगठन का कहना है कि दोनों जहाजों में आग लग गई। 2. हूती विद्रोहियों के डर से 10 जहाजों ने रास्ता बदला: बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पार करने की कोशिश कर रहे कम से कम 10 जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। अब ये जहाज अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा सफर तय कर रहे हैं। 3. ब्रिटेन ने अमेरिका को सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की मंजूरी दी: ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान के खिलाफ अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य अड्डों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया और ग्लॉस्टरशायर का फेयरफोर्ड एयरबेस अमेरिकी विमानों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहेंगे। 4. भारत की अब तक 26,000 उड़ानें रद्द: अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण 20 जुलाई तक भारतीय एयरलाइंस को करीब 26 हजार अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इसके अलावा कई उड़ानों का रास्ता बदला गया और उनमें देरी भी हुई। 5. ट्रम्प का 95 अरब डॉलर का रक्षा बजट पास: ट्रम्प को ईरान युद्ध के बीच बड़ी राजनीतिक जीत मिली है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 95 अरब डॉलर का रक्षा बजट प्रस्ताव 216-214 वोटों से मंजूर कर दिया।अब इसे मंजूरी के लिए सीनेट में जाएगा। इससे ईरान युद्ध और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों के लिए अतिरिक्त फंड मिलेगा। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Oil Price: $100 के पार पहुंचा कच्चा तेल, हूती हमले और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से चिंता बढ़ी

Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को जोरदार उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 7% चढ़कर 100.71 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। यह करीब दो महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 6% बढ़कर 92.01 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

तेल की कीमतों में यह तेजी यमन के हूती विद्रोहियों के दावे के बाद आई। हूतियों ने कहा कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है। इससे दुनिया में तेल सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

मिडिल ईस्ट पहले से ही तनाव में है। ऊपर से होर्मुज स्ट्रेट में तेल की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है। अब लाल सागर में भी हमले शुरू हो गए हैं। ऐसे में बाजार को डर है कि दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई और कम हो सकती है।

मैटाडोर इकोनॉमिक्स के चीफ इकोनॉमिस्ट टिम स्नाइडर का कहना है कि सऊदी टैंकरों पर हमला तेल बाजार के लिए बड़ा झटका है। इससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा और कीमतें ऊपर रह सकती हैं।

हूतियों ने क्या दावा किया?

हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में सऊदी तेल ले जा रहे दो टैंकरों को निशाना बनाया। उनका कहना है कि वे सऊदी अरब के तेल निर्यात पर समुद्री नाकेबंदी लागू करेंगे।

बाद में सऊदी समाचार एजेंसी ने भी पुष्टि की कि दो टैंकरों में से एक पर हमला हुआ और उसमें आग लग गई।

गोल्डमैन सैक्स की बड़ी चेतावनी

गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में मौजूदा संकट 2027 तक जारी रहता है, तो इस साल की चौथी तिमाही में ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है। अगले साल इसका औसत भी करीब 100 डॉलर रह सकता है।

अगर बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट और स्वेज नहर में भी लंबे समय तक रुकावट बनी रही, तो तेल और महंगा हो सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट में क्या हो रहा है?

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का दावा है कि ओमान के पास एक तेल टैंकर में विस्फोट के बाद आग लग गई। दो दूसरे टैंकर वापस लौट गए।

ईरान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट उसके नियंत्रण में है। जब तक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक उसकी मंजूरी के बिना कोई टैंकर वहां से नहीं गुजर सकेगा।

सप्लाई पर कितना असर?

यूबीएस के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले गैर-ईरानी टैंकरों की संख्या तेजी से घटी है। वहीं, अमेरिकी नाकेबंदी के चलते ईरान का तेल निर्यात भी लगभग शून्य पर पहुंच गया है।

पिछले सात दिनों में खाड़ी क्षेत्र से तेल लोडिंग घटकर 25 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। इससे पहले 30 दिनों का औसत 60 लाख बैरल प्रतिदिन था।

अमेरिका भी लगातार कर रहा हमला

अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने लगातार 12वीं रात ईरान के ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में किसी जहाज को निशाना बनाया, तो अमेरिका उसके अहम ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा।

(रॉयटर्स से इनपुट के साथ)

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

वर्ल्ड अपडेट्स:UNSC में सिंधु जल संधि पर भारत का पाकिस्तान को जवाब: कहा- सीमा पार आतंकवाद से सहयोग का आधार खत्म

भारत ने UNSC में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद ने दोनों देशों के बीच सहयोग का आधार खत्म कर दिया है। भारत ने स्पष्ट किया कि आपसी विश्वास और सद्भावना के बिना सिंधु जल संधि के तहत सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। प्राकृतिक संसाधन शासन पर UNSC की हाई-लेवल ओपन डिबेट में पाकिस्तान के बयान का जवाब देते हुए राजदूत हरीश पारवतननेनी ने कहा कि पाकिस्तान ने इस मंच का इस्तेमाल “झूठा नैरेटिव” फैलाने के लिए किया। उन्होंने कहा कि भारत का सिंधु जल संधि पर रुख स्पष्ट और लगातार एक जैसा रहा है। सीमा पार आतंकवाद को राज्य की नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने के बीच आपसी विश्वास और सद्भावना के आधार पर सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। भारत ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा। राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान इस संवैधानिक और कानूनी वास्तविकता को जानबूझकर नजरअंदाज करता है। भारत ने यह भी कहा कि वह मानवीय आधार पर पाकिस्तान को बाढ़ की चेतावनी देता रहेगा और अपने हिस्से के जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए जलविद्युत परियोजनाओं को तेज करेगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन: ऐसा करने वाला पहला EU देश फ्रांस की संसद ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसके साथ ही फ्रांस ऐसा कानून बनाने वाला EU का पहला देश बन गया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बिल का समर्थन किया है और इसे सितंबर से लागू करने की तैयारी है। कानून लागू कराने की जिम्मेदारी डिजिटल रेगुलेटर Arcom की होगी। हालांकि, बच्चों की उम्र की जांच कैसे होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फ्रांस के बाद ब्रिटेन, स्पेन, ग्रीस और डेनमार्क भी सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम उम्र तय करने की तैयारी में हैं। फ्रांस के कई माता-पिता ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ किशोरों को एजुकेशनल कंटेंट और दोस्तों से संपर्क प्रभावित होने की चिंता है। शिक्षा मंत्री और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कहा है कि सिर्फ बैन काफी नहीं होगा, बच्चों को डिजिटल दुनिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है। चीन का ताइवान स्ट्रेट में 2 दिन का लाइव-फायर ड्रिल: फुजियान के पास समुद्री इलाके में सैन्य अभ्यास
चीन ने गुरुवार से ताइवान स्ट्रेट के कुछ हिस्सों में 2 दिन का लाइव-फायर सैन्य अभ्यास शुरू किया। यह ड्रिल दक्षिण-पूर्वी प्रांत फुजियान के तट के पास हो रही है। समुद्री अधिकारियों के नोटिस के मुताबिक, अभ्यास दोनों दिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक डोंगशान द्वीप के आसपास होगा। यह इलाका गुआंगदोंग प्रांत की सीमा के पास है। यह ड्रिल अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत के एक दिन बाद शुरू हुई है। दोनों नेताओं के बीच ताइवान समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान की सरकार चीन के इस दावे को खारिज करती है। इससे पहले दिसंबर में चीन ने ताइवान को चारों ओर से घेरकर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास किया था। यह अभ्यास अमेरिका की ओर से ताइवान के लिए 11.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हथियार पैकेज की घोषणा के बाद हुआ था। उस समय चीन की ईस्टर्न थिएटर कमांड ने 10 घंटे के लाइव-फायर अभ्यास के दौरान ताइवान के उत्तर और दक्षिण में समुद्री इलाकों में रॉकेट दागे थे। अफ्रीका में बढ़ती गर्मी से ‘रेगिस्तान के जहाज’ भी बेहाल: हीट स्ट्रेस, पानी की कमी और बीमारियों से बढ़ रही मौतें
अफ्रीका में बढ़ते तापमान का असर अब रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंटों पर भी पड़ रहा है। उत्तर-पूर्वी इथियोपिया के अफार क्षेत्र में ऊंट पालक अली उमेर के मुताबिक, तेज गर्मी से ऊंटों के पैरों में छाले पड़ रहे हैं, आंखों से पानी आ रहा है और गर्म रेत से उनकी चमड़ी और बाल प्रभावित हो रहे हैं। पिछले एक महीने में उन्होंने गर्मी के कारण ऊंट के 8 बच्चों को खो दिया। वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी से ऊंटों में हीट स्ट्रेस, थकान, डिहाइड्रेशन और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। पानी और वनस्पति की कमी के साथ छाया का घटता क्षेत्र भी स्थिति को गंभीर बना रहा है। पड़ोसी देश सोमालिया में सूखे के कारण ऊंटों की मौत का संकट गंभीर है। जून में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, करीब 46% ऊंट पालने वाले परिवारों में सूखे से ऊंटों की मौत हुई। उत्तरी सोमालिया के सूल क्षेत्र में यह दर करीब 73% तक पहुंच गई। उत्तर-पूर्वी केन्या में भी पशु चिकित्सकों ने ऊंटों में अत्यधिक गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की है। एक पशु चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में क्षेत्र में गर्मी के कारण ऊंटों की मौत 15% से ज्यादा बढ़ी है। गर्मी के तनाव से ऊंटों में दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंट सामान्य तौर पर करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी को शरीर के तापमान में बदलाव, कम पसीना और पानी की कम खपत जैसे तरीकों से सहन कर सकते हैं। लेकिन सहारा के कई हिस्सों में गर्मियों का तापमान अब अक्सर 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहा है।

Asian Markets Today: एशिया बाजार में उछाल, सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में तेजी से कोस्पी 4% उछला

Asian Markets Today: एशियाई बाजारों में अच्छी बढ़त देखने को मिल रही है । निक्केई 1 फीसदी तो कोस्पी में 4% का उछाल आया। वहीं अमेरिकी INDICES में ऊपरी स्तरों से दबाव दिखा। नैस्डैक में करीब आधे परसेंट की गिरावट रही। डाओ जोंस और S&P फ्लैट बंद हुए ।

सुबह 8.10 बजे के आसपास निक्केई करीब 0.42 फीसदी की बढ़त के साथ 66,395.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.51 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 0.14 फीसदी गिरकर 44,794.10 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 1.20 फीसदी की बढ़त के साथ 25,192.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 1.62 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट फ्लैट कारोबार कर रहा।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुआ, क्योंकि इन्वेस्टर्स ज़रूरी अर्निंग्स रिपोर्ट्स का इंतज़ार कर रहे थे, जबकि मिडिल ईस्ट में हाल की दुश्मनी ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी थी।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 6.06 पॉइंट्स या 0.01% गिरकर 52,218.58 पर आ गया, जबकि S&P 500 10.24 पॉइंट्स या 0.14% गिरकर 7,498.96 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 146.30 पॉइंट्स या 0.57% गिरकर 25,690.90 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के स्टॉक प्राइस में 2.30% की बढ़ोतरी हुई, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.86% गिरे, अल्फाबेट के शेयर 1.24% गिरे, मेटा प्लेटफॉर्म्स 2.58% गिरा, एप्पल के स्टॉक प्राइस में 0.56% की कमी आई, सुपर माइक्रो कंप्यूटर के स्टॉक प्राइस में 19.84% की बढ़ोतरी हुई, डेल टेक्नोलॉजीज के शेयर प्राइस में 9.3% की बढ़ोतरी हुई, टेस्ला के स्टॉक प्राइस में 1.30% की गिरावट आई और स्पेसएक्स के शेयर प्राइस में 6.70% की गिरावट आई।

US-ईरान युद्ध

US मिलिट्री ने ईरान की मिलिट्री सरकार और इंफ्रास्ट्रक्चर साइट्स को निशाना बनाकर एक और रात हमले किए, जबकि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान युद्ध खत्म करने के लिए एक डील करना चाहता है, लेकिन उन्हें लगता है कि इस्लामिक रिपब्लिक अभी इसके लिए ‘तैयार’ नहीं है। इस बीच, ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को ब्लॉक करना और उन्हें टारगेट करना जारी रखे हुए है।

टेस्ला Q1 अर्निंग्स

टेस्ला इंक. ऑटो सेल्स के अच्छे क्वार्टर के बावजूद वॉल स्ट्रीट के प्रॉफिट एस्टीमेट से चूक गई। एलन मस्क की इलेक्ट्रिक गाड़ी बनाने वाली कंपनी ने दूसरी तिमाही में $1.1 बिलियन का प्रॉफिट बताया, जो पिछले साल के लेवल से लगभग 5% कम है। यह एनालिस्ट के 53 सेंट प्रति शेयर के एस्टीमेट की तुलना में 33 सेंट प्रति शेयर रहा। कंपनी का रेवेन्यू YoY 26% बढ़कर $28.2 बिलियन हो गया।

टेस्ला ने दो साल से ज़्यादा समय में अपने पहले नेगेटिव फ्री कैश फ्लो की भी रिपोर्ट दी, जिसमें $1.09 बिलियन खर्च हुए।

क्रूड ऑयल प्राइसेस

क्रूड ऑयल प्राइसेस छह हफ़्तों से ज़्यादा समय में अपने सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गए। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.58% बढ़कर $95.56 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड बुधवार को लगभग 3% बढ़ने के बाद 1.30% बढ़कर $87.96 प्रति बैरल हो गया।

आज का सोने का रेट

गिरावट में खरीदारी के कारण सोने की कीमतों में बढ़त बनी रही। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.1% बढ़कर $4,133.82 प्रति औंस हो गई, जबकि चांदी की कीमतें $59.75 प्रति औंस पर स्थिर रहीं।

डॉलर

सेफ-हेवन डिमांड के कारण डॉलर काफी हद तक स्थिर रहा, जबकि येन 40 साल के निचले स्तर के पास रहा। डॉलर इंडेक्स, जो येन और यूरो सहित कई करेंसी के मुकाबले ग्रीनबैक को मापता है, 101.11 पर फ्लैट रहा। यूरो 0.02% बढ़कर $1.1412 पर था। ब्रिटिश स्टर्लिंग का आखिरी ट्रेड $1.3373 पर हुआ।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

US-Iran war: 6 हफ्ते के हाई पर कच्चा तेल, $95 पार निकला भाव, एक्सपर्ट से जानें क्या है नियर-टर्म आउटलुक

US-Iran war: कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार 23 जुलाई को 1.5 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया। भाव 95 डॉलर के पार निकलकर 6 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया है। तेल में यह तेजी अमेरिका के ईरान पर नए हमले किए जाने और यमन के हूथी विद्रोहियों के लाल सागर में तेल टैंकरों को निशाना बनाने के बाद देखा गया है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $1.93, यानी 2% बढ़कर $96 प्रति बैरल हो गया, जो 8 जून के बाद का सबसे ऊंचा लेवल है। पिछले सेशन में बेंचमार्क $94.07 पर बंद हुआ था, जो $3 से ज़्यादा और छह हफ़्ते के सबसे ऊंचे लेवल से थोड़ा नीचे था।

इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $1.44, या 1.7% बढ़कर $88.27 प्रति बैरल हो गया, जिससे बुधवार की लगभग 3% की तेज़ी और बढ़ गई।

अमेरिका की सेना ने कहा कि उसने ईरान पर लगातार 12वीं रात हमला किया। यह तब हुआ जब US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कसम खाई थी कि जब भी तेहरान होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ पर हमला करेगा, तो वे ईरानी पुल या पावर प्लांट को निशाना बनाएंगे, जिससे लड़ाई और बढ़ गई।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में एक माइन वाले रास्ते से गुज़रने की कोशिश करते समय एक तेल टैंकर में धमाका होने के बाद आग लग गई। उन्होंने यह भी कहा कि दो और टैंकरों को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। गार्ड्स ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट उनके कंट्रोल में है और जब तक इस इलाके में US मिलिट्री ऑपरेशन जारी रहेंगे, यह “पूरी तरह से बंद” है, उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के साथ कोऑर्डिनेशन के बिना किसी भी जहाज़ को अंदर आने या बाहर निकलने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

यह लड़ाई होर्मुज स्ट्रेट से भी आगे बढ़ गई है, ईरान के सपोर्ट वाले हूतियों ने बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के ज़रिए सऊदी तेल ले जाने वाले जहाज़ों को निशाना बनाने की धमकी दी है और सऊदी अरब की नेवल नाकाबंदी की घोषणा की है।

हूतियों ने कहा कि उन्होंने दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमले किए हैं, जबकि समुद्री सुरक्षा रिपोर्टों से पता चला है कि ग्रुप द्वारा पहचाने गए जहाजों में से एक, सऊदी झंडे वाला टैंकर एनसेलिया, लाल सागर में टकरा गया था।

ग्रुप ने यह भी दावा किया कि उसने जहाजों को सऊदी पोर्ट्स पर जाने से रोकने की चेतावनी देने के बाद लगभग 10 जहाजों को अपना रास्ता बदलने पर मजबूर किया था। हालांकि, रॉयटर्स इस दावे को अलग से वेरिफ़ाई नहीं कर सका।

लाल सागर में हूथी ब्लॉकेड और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की चेतावनी कि होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी रास्ते में माइनिंग की गई है, ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

इस बीच, एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, पिछले हफ़्ते अमेरिका में कच्चे तेल का स्टॉक 2 मिलियन बैरल बढ़ गया। यह बढ़ोतरी तब हुई जब रिफाइनरी एक्टिविटी धीमी हो गई, कच्चे तेल का एक्सपोर्ट कम हो गया और इंपोर्ट बढ़ गया, जो रॉयटर्स पोल में एनालिस्ट्स की 1.1 मिलियन बैरल की कमी की उम्मीदों के उलट था।

आगे कहां तक जाएगी कीमतें

कोटक सिक्योरिटीज की AVP कमोडिटी रिसर्च, कायनात चैनवाला के अनुसार, बैकवर्डेशन भी गहरा गया है, जिसमें प्रॉम्प्ट-टू-सेकंड-महीने का स्प्रेड $3 तक बढ़ गया है, जो दिखाता है कि शॉर्ट-टर्म अवेलेबिलिटी की चिंताएं लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स से ज़्यादा हैं।

चैनवाला ने कहा, “होर्मुज, रेड सी और ब्लैक सी सभी एक साथ रुकावट के सिग्नल दे रहे हैं, फिजिकल सप्लाई में अभी तक कोई खास कमी नहीं आई है, लेकिन रिस्क प्रीमियम तेज़ी से बढ़ रहा है। इन चोकपॉइंट्स पर कोई भी नई बढ़ोतरी आने वाले सेशन में $100 ब्रेंट का रास्ता बना सकती है।”

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US ऑयल $85 के निशान से ऊपर पॉजिटिव बायस के साथ ट्रेड कर रहा है, जिसे चल रहे जियोपॉलिटिकल टेंशन का सपोर्ट है।

पोनमुडी ने कहा, “तुरंत रेजिस्टेंस $86.5–$87 पर है, उसके बाद $88–$88.5 ज़ोन है। नीचे की तरफ, तुरंत सपोर्ट $84.5–$84 पर दिख रहा है, और इस लेवल से नीचे जाने पर कीमतें $82 के निशान तक जा सकती हैं। कुल मिलाकर, शॉर्ट-टर्म आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है, और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स से अगला डायरेक्शनल मूव तय होने की संभावना है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

अमेरिका का ईरान के 4 प्रांतों पर हमला:ट्रम्प बोले- वह बुरी तरह पिट रहा; हूती विद्रोहियों का सऊदी के 2 तेल टैंकरों पर अटैक

अमेरिका ने लगातार 12वीं रात ईरान पर हमला किया। इस बार खुजेस्तान, बुशेहर, होर्मोजगान और इलाम प्रांतों में कई जगह मिसाइल और हवाई हमले हुए। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक इलाकों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान बुरी तरह पिट रहा है। दूसरी तरफ, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकर एन्सेलिया और लैला को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया है। सऊदी ने दोनों जहाजों पर हमले की पुष्टि की है।ब्रिटेन की UKMTO ने भी सऊदी तट के पास एक जहाज पर हमले की जानकारी दी है। हूती विद्रोहियों के इस कदम से बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में तनाव पैदा हो गया है और वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

‘जहाज पर हमला किया तो पुल या पावर प्लांट उड़ा देंगे’, ईरान को ट्रंप की कड़ी चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को धमकी दी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका हर बार ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट को निशाना बनाएगा। इसमें राजधानी तेहरान में मौजूद ठिकाने भी शामिल हो सकते हैं।

ट्रंप ने यह धमकी अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट के जरिए दी। इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है, जो पहले से ही संघर्ष विराम टूटने और हाल ही में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा हुआ था। बता दें कि ट्रंप को बुधवार को ही इन सैनिकों के शव मिलने वाले थे।

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा था, “अब से, जब भी ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला करेगा, तो अमेरिका उसके एक पुल या पावर प्लांट पर बम गिराकर उसे नष्ट कर देगा।”

ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि इन लक्ष्यों में “तेहरान शहर के पास या उसके अंदर मौजूद ठिकाने” भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी ईरान के बिजली संयंत्रों, पानी की सुविधाओं और दूसरे बुनियादी ढांचों पर हमला करने की धमकी दे चुके हैं। जानकारों ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।

इससे पहले बुधवार को, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर “गंभीर” नहीं है, साथ ही उन्होंने दोहराया कि वॉशिंगटन मध्य पूर्व में “कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध” है।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार 11वीं रात ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित और खुला करने की कोशिश कर रहा है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और युद्ध के दौरान ईरान के लिए दबाव बनाने का एक बड़ा साधन बन गया है।

CENTCOM ने बताया कि उसने मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, ड्रोन स्टोर करने की जगहों और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए।

फिलीपींस में आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए, रुबियो ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक मुख्य विवाद यह है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैफिक को नियंत्रित करने का “अधिकार मांगता है”, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसे यह अधिकार नहीं है।

रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर हम मध्य पूर्व में एक ऐसी मिसाल कायम करते हैं, जहां कोई राष्ट्र किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण करने, शुल्क वसूलने और भुगतान न करने पर आपके जहाजों को उड़ाने का फैसला कर सकता है, तो हमने एक बहुत ही खतरनाक मिसाल कायम कर दी है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में, इस क्षेत्र सहित, दोहराई जाएगी।”

रुबियो ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन की ओर इशारा करते हुए कहा कि “दुनिया के सभी क्षेत्रों में से, यह वह क्षेत्र है जहां मुझे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व के बारे में सिखाने की आवश्यकता नहीं है।”

बाद में दिन में दिए गए अलग-अलग बयानों में, रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत करने को तैयार है।

उन्होंने कहा, “अमेरिका कूटनीतिक समझौते तक पहुंचना चाहता है। अगर ईरान के साथ ऐसा कोई समझौता संभव हो, जिसमें वह कहे कि हम अब आतंकवाद को समर्थन नहीं देंगे और परमाणु हथियार या उसे बनाने के लिए जरूरी चीजों को आगे नहीं बढ़ाएंगे, तो अमेरिका इसके लिए तैयार है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि “फिलहाल वे डील करने को लेकर गंभीर नहीं लगते।” उन्होंने आगे कहा कि तेहरान ने पिछले महीने हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में कुछ वादे किए थे, “और दो हफ्ते के अंदर ही उन्हें तोड़ दिया।”

अमेरिकी नौसेना ने पहले भी साउथ चाइना सी में विवादित द्वीपों के आस-पास “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” (आजादी से आवाजाही) ऑपरेशन चलाए हैं। इन द्वीपों पर चीन के साथ-साथ कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के भी दावे हैं, जबकि चीन अपनी “नाइन-डैश लाइन” के जरिए लगभग पूरे समुद्र पर अपना अधिकार बताता है।

यह सब ‘परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ के 2016 के उस फैसले के बावजूद हो रहा है, जिसमें कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चीन के दावों का कोई आधार नहीं है। हालांकि, चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है।

तेल की कीमतों में उछाल

बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) 3.7% बढ़कर 94.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) में 3.5% की तेजी आई और यह 87.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

बता दें कि अमेरिका और ईरान ने 17 जून को एक अंतरिम समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सैन्य अभियानों को रोकने, होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों सहित एक स्थायी समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय करने की बात कही गई थी। लेकिन इस दस्तावेज में होर्मुज के भविष्य के प्रबंधन का मुद्दा अनसुलझा ही रह गया।

ईरान ने इस बात का मतलब यह भी निकाला कि होर्मुज (स्ट्रेट) से गुजरने वाले ट्रैफिक को मैनेज करने में तेहरान की भूमिका है और शुरुआती 60 दिनों के बाद समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क भी लिया जा सकता है, लेकिन अमेरिका का कहना था कि यह जलमार्ग बिना किसी अनिवार्य ईरानी शुल्क या प्रतिबंध के खुला रहना चाहिए।

ईरान और ओमान – जिनकी सीमाएं भी होर्मुज जलडमरूमध्य से लगती हैं – ने 23 जून को एक संयुक्त बयान में कहा कि “होर्मुज से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं में जलडमरूमध्य के दोनों तटीय देशों की संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।”

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क्या फिर महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल? हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद पलटे भारत आ रहे 2 तेल टैंकर, लाल सागर में भी बढ़ा संकट!

Houthi Warning Saudi Arabia Red Sea: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग के बीच लाल सागर से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Militia) द्वारा सऊदी अरब को दी गई ‘आंख के बदले आंख’ की खुली चेतावनी के बाद भारत और चीन आ रहे तीन बड़े कच्चे तेल के टैंकरों को अपना रास्ता बदलकर यू-टर्न लेना पड़ा है।

पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ब्लॉक के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित है। ऐसे में लाल सागर के इस अहम समुद्री मार्ग पर नया संकट गहराने से दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें फिर भड़क सकती हैं। जानिए लाल सागर में क्या हुआ और इसका क्या असर हो सकता है।

किन तेल टैंकरों ने लिया यू-टर्न?

रॉयटर्स के शिपिंग डेटा के मुताबिक, जिन तीन तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदला है, उनमें से दो सीधे भारत आ रहे थे:

Rodos (रोडोस): लगभग 7 लाख बैरल सऊदी कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा यह टैंकर मंगलवार को लाल सागर में यू-टर्न लेकर स्वेज नहर की तरफ मुड़ गया।

Amazon (अमेजन): भारत की ओर आ रहा यह स्वेजमैक्स टैंकर भी हुथियों की धमकी के बाद वापस स्वेज की ओर लौट गया।

Xin Long Yang (सिन लोंग यांग): चीन जा रहे इस बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) ने सऊदी अरब के यानबू पोर्ट से 20 लाख बैरल कच्चा तेल लोड किया था, लेकिन इसने भी आगे बढ़ने के बजाय स्वेज का रास्ता चुन लिया।

हूती विद्रोहियों की ‘आंख के बदले आंख’ वाली चेतावनी क्या है?

यमन के हुथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है।विद्रोहियों का दावा है कि सऊदी अरब ने यमन पर ‘अन्यायपूर्ण और दमनकारी’ घेराबंदी की है, जिसके जवाब में उन्होंने ‘आंख के बदले आंख’ के सिद्धांत के तहत सऊदी दुश्मन के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी तुरंत लागू कर दी है।

हूती समूह ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को ईमेल भेजकर चेतावनी दी है कि वे सऊदी अरब के किसी भी बंदरगाह से सामान लोड या अनलोड न करें। अगर कोई जहाज ऐसा करता है, तो उसे किसी भी स्थान पर निशाना बनाया जाएगा।

जहाजों ने ट्रांसपोंडर बंद किए, बढ़ी हलचल

हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद लाल सागर और सऊदी अरब के महत्वपूर्ण यानबू पोर्ट के आसपास नौवहन काफी जोखिम भरा हो गया है। मंगलवार से लाल सागर में तैर रहे और यानबू पोर्ट पर लोडिंग कर रहे कई तेल टैंकरों ने अपनी पहचान छिपाने और हुथी हमलों से बचने के लिए अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए हैं।

वैश्विक शिपब्रोकर क्लार्कसन्स (Clarksons) के अनुसार, अगर हूती विद्रोहियों की धमकियों का असर लाल सागर के ट्रैफिक पर पड़ता है, तो कच्चे तेल के जहाजों के रास्तों में बड़ा फेरबदल होगा और यानबू से निकलने वाले तेल को यूरोप की तरफ डायवर्ट करना पड़ सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट और सऊदी अरब से आता है। भारत आ रहे दो टैंकरों (Rodos और Amazon) के रास्ता बदलने से रिफाइनरियों तक क्रूड पहुंचने में देरी हो सकती है। लाल सागर में तनाव बढ़ने से समुद्री जहाजों का बीमा और माल भाड़ा काफी बढ़ सकता है, जिससे भारत के लिए कच्चा तेल आयात करना महंगा हो सकता है।

क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से लगी आग, आपकी जेब पर भी पड़ेगा महंगे क्रूड का असर

क्रूड ऑयल की कीमतों में 22 जुलाई को बड़ी तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 2.76 फीसदी चढ़कर 93.54 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 2.83 फीसदी की तेजी के साथ 86.74 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार और भारत की करेंसी रुपये पर भी पड़ा। निफ्टी में 0.76 फीसदी यानी 186 अंक की गिरावट दिखी, जबकि सेंसेक्स करीब 700 अंक क्रैश कर गया।

क्रूड में उछाल का असर रुपये पर भी पड़ा। डॉलर के मुकाबले यह 11 पैसे गिरकर 96.36 के लेवल पर आ गया। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल की वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती लड़ाई है। अमेरिकी ने लगातार 11वें दिन ईरान पर हमला जारी रखा। ईरान भी जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशान बना रहा है। टेंशन बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऑयल टैंकर्स की आवाजाही बाधित है। इससे क्रूड की कीमतें चढ़ रही हैं।

इस साल फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू हुई थी। उसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया था। एक समय ब्रेट क्रूड का प्राइस 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर के ऐलान से क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। लेकिन, मध्यपूर्व में टेंशन फिर बढ़ने से क्रूड की कीमतें चढ़ने लगी हैं। क्रूड की कीमतों में उछाल भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है।

पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के डेटा के मुताबिक, क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से जून तिमाही में भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा रहा। भारत अपनी जरूरत के 88 फीसदी क्रूड ऑयल का इंपोर्ट करता है। इस वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल से सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ जाता है।

पहले ही क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने पर भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। इससे दिल्ली में पेट्रोल का प्राइस प्रति लीटर 102.12 रुपये और मुंबई में 111.21 रुपये पहुंच गया है। दिल्ली में डीजल की कीमतें भी 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। अगर क्रूड में तेजी जारी रहती है तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां फिर से पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो सकती है। इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा।

महंगे पेट्रोल और डीजल से महंगाई बढ़ने का डर है। मई और जून में रिटेल इनफ्लेशन बढ़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईंधन खासकर डीजल महंगा होने से कई चीजों की कीमतें बढ़ती हैं। इसकी वजह यह है कि डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्टेशन के लिए होता है। ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से फल-सब्जी सहित रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी बढ़ जाती है। पहले से ही प्याज सहित कई चीजों की कीमतों में उछाल दिख रहा है। इससे परिवारों के बजट पर बोझ बढ़ गया है।