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Yogi Adityanath Kanwar Yatra vision: सनातन धर्म में आस्था रखने वाले यह मानते हैं कि शिव कहीं बाहर नहीं, वे हर उस जीव में विद्यमान हैं जो प्रेम, त्याग और तप से जीवन को साधता है। यही कारण है कि सनातन परंपरा भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं मानती। जो शिव का ध्यान करता है, वह स्वयं शिवमय हो जाता है। सावन में जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर चलते हैं, तो वे केवल जल चढ़ाने नहीं जाते, वे स्वयं उस तप की जीवंत छवि बन जाते हैं जिसे शिव ने कैलाश की एकांत साधना में साकार किया था। उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृष्टि में यही भाव सबसे गहरा है, कांवड़िया केवल एक श्रद्धालु नहीं, चलता-फिरता शिव का प्रतिरूप है और अब जबकि जल्द ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है, उत्तर प्रदेश इन तपस्वियों के स्वागत और उन पर पुष्प वर्षा को तैयार है। 

 

निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए योगी सरकार ने समय रहते ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इसकी देखरेख कर रहे हैं। यह आस्था के प्रति ऐसी सम्वेदना है जिसमें शासन श्रद्धालु के साथ खड़ा दिखाई देता है। सड़कों की मरम्मत, बिजली-पानी की सुचारु व्यवस्था, चिकित्सा शिविरों की तैनाती, इन सबके पीछे यह भाव है कि किसी श्रद्धालु के पांवों में छाले न पड़ें। सरकार जब सड़क को शिव-पथ मानकर संवारती है, तो वह प्रशासन और आस्था के बीच की दीवार गिरा देती है। इसी भाव से सुरक्षा की चिंता भी उपजी है। मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा घेरा, गंगा घाटों पर गोताखोरों और जल पुलिस की तैनाती, ये सब उस भावना का विस्तार हैं जिसमें राज्य स्वयं को श्रद्धालु के सेवक के रूप में पाता है। 

 

इसी सोच ने चिकित्सा और स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्था को व्यवस्थित किया है। एंटी वेनम और एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता, जगह-जगह शिविरों में विश्राम और पेयजल की व्यवस्था, शौचालयों की नियमित सफाई और मार्ग की रोशनी, इन सबका उद्धेश्य यही है कि भक्त किसी कष्ट में न पड़े l मार्ग पर मांस और मदिरा की दुकानें बंद रखने का निर्णय, दुकानों पर संचालक का नाम प्रदर्शित करने की अनिवार्यता, यह सब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, यह पवित्रता के सम्मान का प्रश्न है। शुद्ध आचरण और संयम ही तप की पहली शर्त है और योगी सरकार ने इस दिशा में कदम उठाए हैं तो कहा जा सकता है कि वह भक्तों के संकल्प में भागीदार बन चुकी है।

Kanwar Yatra UP 2026

इसी सहभागिता ने डीजे की ध्वनि को निर्धारित मानकों में बांधा है। भक्ति में उल्लास स्वाभाविक है, पर यह कोलाहल नहीं बनने पाए, इसके लिए स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं। लाखों श्रद्धालुओं की सुगमता को केंद्र में रखते हुए ही यातायात प्रबंधन के तहत वैकल्पिक मार्ग, डायवर्जन प्वाइंट, आरक्षित पार्किंग और आपातकालीन कॉरिडोर बनाए गए हैं। इसी तरह अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर दृष्टि रखने वाली विशेष टीमें, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कठोरता की चेतावनी, यह दिखाती हैं कि सरकार आस्था की इस विराट धारा को किसी भी विघ्न से बचाने के लिए सतर्क है। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड के प्रशासन से समन्वय और कांवड़ संघों से नियमित संवाद यह सुनिश्चित करते हैं कि यह सुरक्षा-चक्र किसी एक राज्य की सीमा में सिमटा न रहे।

 

नौ वर्षों के अनुभव ने योगी सरकार को यह सिखाया है कि आस्था की सेवा निरंतर परिष्कृत होने वाली प्रक्रिया है। हर वर्ष व्यवस्था में नई तकनीक, नए संसाधन और नए अनुभव जुड़ते हैं, ड्रोन निगरानी हो या डिजिटल हेल्पलाइन, ये सब पारंपरिक आस्था को आधुनिक प्रशासनिक कुशलता से जोड़ने के प्रयास हैं। पर इन सबके मूल में वही भाव है जिससे यह लेख शुरू हुआ था, कांवड़िया शिव का प्रतिरूप है, और उसकी सेवा शिव की ही आराधना है। 

 

शिव को औघड़दानी कहा जाता है। वे भक्त की भावना देखते हैं, उसकी हैसियत या साधन-संपन्नता नहीं। राजा हो या रंक, भस्म रमाए वनवासी हो या नगर का साधारण मजदूर, कांवड़ मार्ग पर शिव के लिए सब समान हैं। यही समानता की भावना उस प्रशासनिक निर्देश में झलकती है जिसमें मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश के हर जिले में व्यवस्था का स्तर एक जैसा होना चाहिए, चाहे वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा नगर हो या पूर्वांचल का दूरस्थ कस्बा। जब शासन खुद को इस समभाव में ढालता है, तो वह शिव-तत्व की उसी मूल भावना को आत्मसात करता है जिसमें भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं।

 

कांवड़ यात्रा की तैयारियों में जिस तरह पूर्व अनुभवों से सीख ली गई है, वह किसी योगी की साधना-प्रक्रिया जैसी ही लगती है। प्रशासन ने बीते नौ वर्षों में यात्रा को शनैः-शनैः क्रमबद्ध ढंग से सुगम बनाया है। निरंतर सुधार की प्रक्रिया ही किसी भी बड़े जनआयोजन को सफल बनाती है, और यही प्रक्रिया कांवड़ यात्रा को साल-दर-साल अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाती जा रही है। इस पूरी तैयारी का सबसे अधिक भावनात्मक पक्ष यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे स्वतः आत्मसात कर लिया है। जब कोई मुख्यमंत्री स्वयं अधिकारियों को यह निर्देश देता है कि हर श्रद्धालु की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो वह यह संदेश देता है कि राज्य की संवेदना आस्था के साथ खड़ी है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा की तैयारियां अब सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का रूप ले चुकी हैं। 

 

योगी सरकार के प्रयासों की वजह से ही उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा अब राज्य और समाज के साझा संकल्प का प्रतीक है। जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए उत्तर प्रदेश की सड़कों पर उतरेंगे, तो उनके पीछे एक ऐसा तंत्र सक्रिय रहेगा जो हर कदम पर उनकी सुरक्षा, सुविधा और सम्मान का ध्यान रखेगा, क्योंकि सरकार जानती है कि वह किसी सामान्य यात्री की नहीं, शिव के उस अंश की सेवा कर रही है जो हर कांवड़िए के भीतर बसता है।

यही भाव इस यात्रा को निर्विघ्न बनाने की सबसे बड़ी गारंटी है, और यही भाव उत्तर प्रदेश को हर वर्ष इस दायित्व के लिए और अधिक तैयार करता जा रहा है और इसी भाव की वजह से उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में लोगों को इंतजार है सावन के पहले दिन का। श्रद्धालुओं का मन श्रद्धा-आस्था से सराबोर है। जोश अभी से ही हिलोंरे लेने लगा है कि कब वह वक्त आए कि वे कंधे पर कांवड़ लेकर बम भोले का जयघोष करते हुए हरिद्वार, गोमुख और गंगोत्री की ओर बढ़ चलें। (लेखक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में प्रोफेसर हैं) 

 

 

LIVE: दतिया, बांकीपुर और मांजलपुर उपचुनाव के लिए मतगणना

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Latest News Today Live Updates in Hindi : मध्यप्रदेश की दतिया, बिहार की बांकीपुर और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए मतगणना कुछ ही देर में शुरू होगी। पल पल की जानकारी…

-मध्यप्रदेश की दतिया, बिहार की बांकीपुर और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए मतगणना सुबह 8 बजे शुरू होगी।

-दतिया उपचुनाव में नतीजों से पहले कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती सस्पेंड, भितरघात के आरोपों के बाद कार्रवाई।

सावन के पहले सोमवार पर देशभर के शिव मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु। पूजा-अर्चना और अभिषेक का दौर जारी।

योगी सरकार ने महिला कावड़ियों के लिए किए विशेष प्रबंध, जलाभिषेक करने उमड़ पड़ी नारीशक्ति

Yogi government makes special arrangements for female Kanwariyas

– प्रयागराज में महिला शिवभक्तों के लिए संगम और गंगा के प्रमुख घाटों पर चेंजिंग रूम और महिला सहायता केंद्र बनाए गए

– सुविधा और सुरक्षा के वातावरण में नदियों का पवित्र जल लेकर काशी के लिए प्रस्थान कर रहीं हैं महिला शिवभक्त 

– आपदा सखियों ने भी महिला शिवभक्तों की मदद के लिए घाटों और मार्गों पर संभाला मोर्चा

– महिला शिव भक्तों के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम, महिला पुलिस फोर्स की हुई तैनाती

Uttar Pradesh News : कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की प्राथमिकता है। इसका असर श्रावण मास में चल रही कांवड़ यात्रा पर भी दिख रहा है। कांवड़ यात्रा कर रहे शिवभक्तों में महिला शिवभक्तों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। इन महिला शिव भक्तों की सुरक्षा और सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। 

 

घाटों में महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती

पवित्र श्रावण मास में शिवभक्त कावड़ियों की कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं सकुशल संपन्न कराने के योगी सरकार के निर्देश के क्रम में प्रयागराज में भी यात्रा मार्ग, कांवड शिविरों, भंडारों एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिगत व्यवस्था की गई है।

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संगम नगरी प्रयागराज में कांवड़ लेकर चलने वाली शिवभक्त महिला कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने महिला शिवभक्तों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। प्रयागराज में दशाश्वमेध और संगम घाट से सबसे अधिक महिला कांवड़ियां जल लेकर काशी के लिए निकलती हैं। डीएम प्रयागराज मनीष कुमार वर्मा बताते हैं कि महिला शिव भक्तों के लिए संगम और गंगा नदी के प्रमुख घाटों पर चेंजिंग रूम और महिला सहायता केंद्र बनाए गए हैं।

घाटों पर महिला पुलिस कर्मियों के दस्ते तैनात हैं। आजीविका मिशन की 44 आपदा सखियां भी महिला कांवड़ियों की मदद के लिए मुस्तैद हैं। इसके अलावा प्रयागराज से वाराणसी के बीच बनाए गए कांवड़ पथ में भी प्रमुख स्थानों में जगह-जगह महिला पुलिस एवं वॉलिंटियर्स मुस्तैद हैं। मनकामेश्वर, सोमेश्वर महादेव , ब्रह्मेश्वर महादेव सहित शहर के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में महिला सुरक्षा कर्मी मुस्तैद हैं। 

 

नारी शक्ति ने उठाई कांवड़, निर्भय होकर कर रहीं जलाभिषेक

 भगवान शंकर की आराधना के लिए श्रावण मास में महिलाओं की जितनी लंबी कतारें शिवालयों में लगती थीं, अब उतनी ही उनकी भागीदारी अब कांवड़ यात्रा में भी दिख रही है। छोटे कस्बों और गांवों से बड़ी संख्या में महिला शिवभक्त घरों से निकल कर कांवड़ यात्रा पर जा रही हैं।

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प्रयागराज के दारागंज के दशाश्वमेध घाट में गंगा जी से जल लेकर काशी के लिए कांवड़ यात्रा पर निकली ज्योति कहती हैं कि अब महिलाएं रास्ते में सुरक्षित हैं, किसी तरह का भय नहीं है इसलिए उनके कस्बे भरवारी से कई महिलाएं कांवड़ यात्रा में जा रही हैं। 
 

सदियापुर की मीरा देवी भी परिवार के आठ सदस्यों के साथ प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट से जल लेकर बैजनाथ धाम कांवड़ यात्रा के लिए निकली हैं। मीरा देवी बताती हैं कि उनके साथ उनकी तीन पीढ़ियां इस बार यात्रा में जा रही है। उनके साथ उनकी दो बहुएं, एक बेटी और तीन नातिन भी जा रहीं हैं। इसके अलावा उनका बेटा भी साथ है। मीरा बताती हैं कि अब कांवड़ मार्गों में किसी तरह की असुरक्षा और असुविधा नहीं दिखती।

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योगी जी की सरकार आने के बाद महिला शिवभक्त हर स्थान पर सुरक्षित हैं। कांवड़ मार्ग में जगह -जगह महिला शिवभक्तों के विश्राम शिविर बनाए गए हैं। सामूहिक यात्रा में भोले बाबा का भजन और कीर्तन करते हुए पूरी उत्साह और हर्ष के साथ महिलाएं कांवड़ यात्रा में निकल रही हैं।

Traffic Diversion: सावन का पहला सोमवार कल, कांवड़ यात्रा के चलते दिल्ली समेत यूपी में ट्रैफिक डायवर्जन, CCTV-ड्रोन से होगी निगरानी

हिंदू धर्म के पवित्र त्योहार सावन के महीने की शुरुआत हो गई है। सावन के महीने में सोमवार को भगवान शिव की पूजा होती है। वहीं सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। सावन के पहले सोमवार और कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कांवड़ यात्रा शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई जगह ट्रैफिक ट्रैफिक डायवर्जन किए गए हैं। वहीं लोगों की सुविधा के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं, ताकि कांवड़ियों और आम लोगों की आवाजाही सुचारु बनी रहे।

सावन के पहले सोमवार पर शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की उम्मीद रहती है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भीड़ कम होने के समय मंदिर आने और पुलिस व सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

इन जगहों पर किया गया डायवर्जन

कांवड़ यात्रा और सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कई राज्यों में ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में कुछ रास्तों पर वाहनों का रूट बदला गया है, जबकि कांवड़ियों के लिए कई मार्ग रिजर्व किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से यात्रा से पहले स्थानीय ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी है। वहीं, मेरठ सहित कई जिलों में भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कुछ समय के लिए स्कूल और कॉलेज बंद रखने का फैसला भी लिया गया है।

सीसीटीवी से की जाएगी निगरानी

सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। बड़े शिव मंदिरों और कांवड़ मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और विशेष सुरक्षा टीमों की मदद से लगातार निगरानी की जा रही है। हाल ही में मिली सुरक्षा संबंधी सूचनाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश में प्रशासन और पुलिस को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आगरा में बनेगा भव्य ‘शिव लोक थीम पार्क’, 8.81 करोड़ की लागत से होगा निर्माण; महाकाल लोक की तर्ज पर दिखेंगे भगवान शिव के 19 अवतार

योगी सरकार प्रदेश में बुनियादी ढांचे के साथ- साथ धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को भी तेजी से बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए उज्जैन के 'महाकाल लोक' की तर्ज पर आगरा के ऐतिहासिक बल्केश्वर पार्क को अब एक भव्य 'शिव लोक थीम पार्क' के रूप में विकसित किया जाएगा।

8.81 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 जुलाई 2026 को किया था। शिलान्यास के बाद से इस कार्य में खासी तेजी आई है। आगरा नगर निगम ने 15वें वित्त आयोग के फंड से इस पार्क को विकसित करने का पूरा लेआउट और विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है।

 

शिव के 19 अवतारों और शिव पुराण का सजीव चित्रण

यमुना नदी के किनारे स्थित प्राचीन बल्केश्वर महादेव मंदिर से कुछ ही दूरी पर बनने वाला शिव लोक थीम पार्क आस्था और आधुनिकता का एक अनूठा संगम होगा। इसका विजन भगवान शिव के 19 अवतारों पर आधारित एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गंतव्य बनाना है। कुल 16,000 वर्ग मीटर में फैले बल्केश्वर पार्क के मध्य में भगवान शिव की एक विशाल और आकर्षक प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यहां आने वाले श्रद्धालु शिव पुराण पर आधारित भगवान शिव की लीलाओं का सजीव चित्रण देख सकेंगे। पार्क के प्रवेश पर एक भव्य 'नंदी द्वार' का निर्माण होगा। इसके अलावा शिव स्तुति पर आधारित आकर्षक साउंड एंड लाइट शो और रंग-बिरंगे फव्वारे इस पार्क की दिव्यता में चार चांद लगाएंगे।

 

पर्यटन और आस्था का नया केंद्र बनेगा यह शिव लोक

इस शिव लोक थीम पार्क का हर हिस्सा इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह भक्ति, सौंदर्य और मनोरंजन का अद्भुत अनुभव प्रदान करे। इसके निर्माण से बल्केश्वर मंदिर में दर्शन और परिक्रमा करने आने वाले श्रद्धालुओं को विश्राम के लिए एक सुंदर और शांत वातावरण मिलेगा। साथ ही आगरा आने वाले पर्यटक अब ताजमहल के अलावा इस दिव्य शिव लोक का भी अनुभव कर सकेंगे। यह थीम पार्क ब्रज क्षेत्र के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास में मील का प्रमुख पत्थर साबित होगा।

 

अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शिव लोक थीम पार्क को 15वें वित्त आयोग के फंड से विकसित किया जा रहा है। 8.81 करोड़ रुपये के बजट से पुराने बल्केश्वर पार्क का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया जाएगा। हमारा उद्देश्य इसे एक अत्याधुनिक, सुंदर और शांतिपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।

 

स्थानीय पार्षद मुरारी लाल अग्रवाल ने बताया कि आगरा नगर निगम

 

“मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से बल्केश्वर क्षेत्र को यह बड़ी सौगात मिली है। इस शिव लोक थीम पार्क के निर्माण से न केवल बल्केश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं और परिक्रमार्थियों को विश्राम का एक पवित्र स्थान मिलेगा, बल्कि इससे पूरे ब्रज क्षेत्र के पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। बल्केश्वर वासियों और पूरे आगरा के शिवभक्तों के लिए यह बहुत बड़ी सौगात है। यह थीम पार्क हमारी धार्मिक आस्था को एक नई और भव्य पहचान देगा। 

Kamika Ekadashi 2026 Date: द्विपुष्कर योग में मनाई जाएगी सावन की पहली एकादशी, जानें तारीख, विष्णु पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण का समय

Kamika Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग माना जाता है। हिंदू कैलेंडर हर माह के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। कामिका एकादशी व्रत भी इनमें से एक है। कामिका एकादशी का व्रत सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल कामिका एकादशी व्रत में द्विपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है। माना जाता है कि इस योग में श्रद्धापूर्वक श्रीहरि की पूजा करने से दोगुने पुण्य की प्राप्ति होती है। सावन, चातुर्मास का पहला महीना होने के कारण इसमें भगवान विष्णु की आराधना और तुलसी दल अर्पित करने का विशेष फल प्राप्त होता है।

कामिका एकादशी 2026 तारीख

सावन कृष्ण पक्ष एकादशी की तारीख 8 अगस्त 2026, दोपहर 01:59 बजे से लग रही है। इस तिथि का समापन 9 अगस्त 2026, सुबह 11:04 बजे। उदयातिथि के आधार पर कामिका एकादशी का व्रत रविवार, 9 अगस्त 2026 को किया जाएगा।

कामिका एकादशी 2026 मुहूर्त

कामिका एकादशी के दिन पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 07:27 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात:काल 04:22 बजे से लेकर प्रात:काल 05:04 बजे तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक है। उस दिन शुभ-उत्तम मुहूर्त दोपहर 02:06 बजे से लेकर दोपहर 03:46 बजे तक है।

द्विपुष्कर योग में कामिका एकादशी व्रत

इस साल कामिका एकादशी के दिन द्विपुष्कर योग दिन में 11 बजकर 04 मिनट पर बनेगा और यह दोपहर में 02 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। द्विपुष्कर योग में आप जो भी दान, पुण्य, पूजा, पाठ आदि कर्म करते हैं, उसका दोगुना फल प्राप्त होता है।

इसके अलावा उस दिन हर्षण योग प्रात:काल से लेकर 10 अगस्त को मध्यरात्रि 2:04 बजे तक रहेगा, उसके बाद वज्र योग होगा। व्रत के दिन मृगशिरा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर दोपहर 02 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। उसके बाद से आर्द्रा नक्षत्र है।

कामिका एकादशी व्रत पारण समय

एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है।

पारण की तारीख : सोमवार, 10 अगस्त 2026

पारण का शुभ समय : सुबह 05:47 बजे से सुबह 08:00 बजे तक

Sawan Shivratri 2026: सावन में कब मनाई जाएगी शिवरात्रि? जानिए सही तारीख, पूजा और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

Nirmal Purja: कौन थे निर्मल पुर्जा…जिनकी PoK में हुई मौत! 6 महीने में दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह कर रचा था इतिहास

नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा, जिन्हें लोग ‘निम्सदाई’ के नाम से भी जानते थे, की पाकिस्तान में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन (बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरना) की चपेट में आने से मौत हो गई। इसकी जानकारी उनकी एडवेंचर कंपनी और अन्य लोगों ने इंस्टाग्राम पर साझा की।

शुक्रवार को ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन होने के बाद निर्मल पुर्जा और पांच अन्य पर्वतारोही लापता हो गए थे। इसके बाद लगातार उनकी तलाश की जा रही थी। इस दुखद हादसे से कुछ घंटे पहले निर्मल पुर्जा ने भारत के पत्रकार विष्णु सोम को एक वॉयस मैसेज भी भेजा था। माना जा रहा है कि यह उनका आखिरी संदेश था।

कंपनी ने पोस्ट कर दी जानकारी 

निर्मल पुर्जा की एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपेड ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट जारी कर उनकी मौत की पुष्टि की। कंपनी ने कहा कि ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन के बाद निर्मल पुर्जा का निधन हो गया। साथ ही अभियान में शामिल अन्य सदस्य भी इस हादसे में जीवित नहीं बच सके। कंपनी ने अपने संदेश में कहा कि यह सभी के लिए बेहद दुखद क्षण है। उन्होंने केवल निर्मल पुर्जा ही नहीं, बल्कि इस हादसे में जान गंवाने वाले उनके साथी पर्वतारोहियों और गाइड पुर बहादुर गुरुंग और निमा शेरपा को भी श्रद्धांजलि दी।कंपनी ने कहा कि उनकी संवेदनाएं सभी मृतकों के परिवार, दोस्तों और करीबियों के साथ हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस कठिन समय में परिवारों की निजता का सम्मान किया जाए।

ब्रॉड पीक में हुई मौत

ब्रॉड पीक काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है। यह पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान और चीन के शिनजियांग क्षेत्र की सीमा के पास स्थित है। यह चोटी के2 पर्वत के बेहद करीब है। रिपोर्ट के अनुसार, हिमस्खलन ब्रॉड पीक के सामान्य वेस्ट रिज मार्ग पर हुआ। उस समय पर्वतारोही करीब 21,600 से 21,850 फीट की ऊंचाई पर मौजूद थे, जहां अचानक बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया।

निर्मल पुर्जा की एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपेड ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि दुनिया ने पर्वतारोहण के सबसे महान पर्वतारोहियों में से एक को खो दिया है। कंपनी के अनुसार, निर्मल पुर्जा अपने साहस, विनम्र स्वभाव और मजबूत इरादों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने अपने काम और उपलब्धियों से दुनिया भर के लाखों लोगों को बड़े सपने देखने और खुद पर भरोसा रखने की प्रेरणा दी। कंपनी ने कहा कि निर्मल पुर्जा का मानना था कि इंसान अपनी सोच से कहीं ज्यादा बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। यही सोच उन्होंने अपने जीवन और अभियानों के जरिए लोगों तक पहुंचाई और अनगिनत लोगों को अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए प्रेरित किया।

पोस्ट में यह भी कहा गया कि एलीट एक्सपेड, निम्सदाई फाउंडेशन, स्काईडाइव निम्सदाई और निम्सदाई स्टोर जैसी संस्थाओं को आगे बढ़ाने में उनकी दूरदृष्टि, नेतृत्व और मजबूत संकल्प की सबसे बड़ी भूमिका रही। कंपनी ने कहा कि निर्मल पुर्जा की विरासत हमेशा उन लोगों के जरिए जीवित रहेगी, जिनकी जिंदगी उन्होंने बदली और जिन्हें अपने सपनों को पूरा करने का हौसला दिया।

रचा था ये इतिहास

निर्मल पुर्जा पहले ब्रिटेन की ब्रिगेड ऑफ गोरखा और रॉयल मरीन की स्पेशल बोट सर्विस (एसबीएस) में भी सेवाएं दे चुके थे। सेना से अलग होने के बाद उन्होंने पूरी तरह पर्वतारोहण को अपना करियर बनाया और दुनिया भर में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए। साल 2019 में उन्होंने अपने ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ अभियान के तहत केवल 6 महीने और 6 दिन में 8,000 मीटर से ऊंची दुनिया की सभी 14 चोटियों पर चढ़ाई पूरी कर इतिहास रच दिया। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके बाद साल 2021 में निर्मल पुर्जा उन 10 नेपाली पर्वतारोहियों की टीम का हिस्सा भी रहे, जिसने पहली बार सर्दियों के मौसम में दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी के2 पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।

Sawan Shivratri 2026: सावन में कब मनाई जाएगी शिवरात्रि? जानिए सही तारीख, पूजा और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

Sawan Shivratri 2026: सावन का महीना शुरू हो चुका है। भगवान शिव को समर्पित इस माह में कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें से एक है शिवरात्रि का पर्व। यूं तो शिवरात्रि हिंदू कैलेंडर के हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है, लेकिन सावन के महीने में आने वाले शिवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु कांवड़ में जल भरकर लाते हैं और अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

सावन शिवरात्रि, भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व मानी जाती है। यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत और शिव पूजन करते हैं। इस दिन पूजा, व्रत और रुद्राभिषेक का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से कई ग्रह दोष भी शांत होते हैं। आइए जानें इस साल सावन शिवरात्रि कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

सावन शिवरात्रि 2026 की तिथि व शुभ मुहूर्त

शिवरात्रि का पर्व सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 11 अगस्त 2026, सुबह 04:54 बजे से हो रहा है। सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि का समापन 12 अगस्त 2026, रात 01:52 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।

निशिता काल पूजा मुहूर्त : 11 अगस्त की रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक

जलाभिषेक का समय : 11 अगस्त सुबह 04:54 बजे से लेकर 12 अगस्त रात 01:52 बजे तक

चार प्रहर की पूजा का समय

रात्रि में भगवान शिव की चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है:

प्रथम प्रहर : शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक

द्वितीय प्रहर : रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक

तृतीय प्रहर : रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक (12 अगस्त)

चतुर्थ प्रहर : सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक (12 अगस्त)

सावन 2026 शिवरात्रि पूजा सामग्री

जल, कच्चा दूध, दही, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, सफेद फूल, फल और भस्म।

सावन 2026 शिवरात्रि पूजा विधि

  • प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • शिवलिंग का जल और पंचामृत से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा और फल-फूल चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जाप करें।
  • शिव आरती करें व प्रसाद वितरित करें।
  • शिवलिंग पर तुलसी पत्र, केतकी का फूल, सिंदूर या हल्दी अर्पित न करें।

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भगवा पहन ‘चोरी’ का ड्रामा पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश पर बनारस में FIR दर्ज

Congress Ayodhya Drama

FIR against Rahul and Pappu Yadav: संसद परिसर में किया गया एक 'प्रतीकात्मक ड्रामा' अब सियासी और कानूनी गले की फांस बनता नजर आ रहा है। अयोध्या राम मंदिर के 'चढ़ावा चोरी' के विरोध में भगवा वस्त्र पहनकर दानपात्र के साथ प्रदर्शन करना निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा सांसद अवधेश प्रसाद को भारी पड़ गया है। धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में धर्मनगरी वाराणसी के कोतवाली थाने में संतों की शिकायत पर इन तीनों दिग्गज नेताओं के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पूरा विवाद संसद भवन परिसर में हुए एक अनोखे विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि सांसद पप्पू यादव भगवा वेश धारण कर हाथ में एक सांकेतिक 'दानपात्र' लेकर बैठे थे। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उस दानपात्र में कुछ पैसे डाले, जिसके तुरंत बाद पप्पू यादव दानपात्र लेकर भागते हुए दिखाई दिए। इस पूरे ड्रामे के जरिए विपक्षी नेताओं का मकसद अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाना था, लेकिन विरोध जताने का यह अंदाज अब एक नए विवाद की वजह बन गया है।  ALSO READ: अयोध्या की आड़ में देश की अस्मिता और आस्था पर हो रहा प्रहार : योगी आदित्यनाथ

संतों का गुस्सा और दर्ज हुई FIR

भगवा कपड़ों में 'चोरी' का सीन फिल्माने पर हिंदू संगठनों और साधु-संतों का गुस्सा भड़क उठा है। बनारस के संतों का कहना है कि पवित्र भगवा वस्त्रों को चोरी जैसे कृत्य से जोड़कर पूरे हिंदू समाज और सनातन धर्म का अपमान किया गया है। संतों की इसी नाराजगी के बाद वाराणसी के कोतवाली पुलिस स्टेशन में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

बीजेपी और VHP आक्रामक

इस घटना के बाद से भाजपा (BJP) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के पूर्व प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने हमला बोलते हुए पूछा कि क्या विपक्षी नेता किसी अन्य धर्म के प्रतीकात्मक कपड़ों में चोरी का ऐसा कोई नाटक करने की हिम्मत कर सकते थे? वीएचपी नेता आलोक कुमार ने भी इस पर कड़ा एतराज जताया है। दूसरी ओर, लखनऊ में विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर अखिलेश यादव और पप्पू यादव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके पुतले भी फूंके। ALSO READ: अयोध्या में आस्था बरकरार, रामलला दरबार में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

इस ड्रामे के सियासी मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद परिसर में किया गया यह विरोध प्रदर्शन 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन पर ही भारी पड़ सकता है। इसे भाजपा और हिंदू संगठन 'हिंदुत्व और सनातन के अपमान' के तौर पर भुनाने में जुट गए हैं। ऐसे में रक्षात्मक मुद्रा में आई कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के लिए इस विवाद से पार पाना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से मची तबाही, किश्तवाड़ में फ्लैश फ्लड, 3 जिलों के स्कूल बंद

जम्मू-कश्मीर के चेनाब घाटी क्षेत्र में शनिवार तड़के हुई तेज बारिश और चत्रू इलाके में बादल फटने से हालात बिगड़ गए। अचानक आई बाढ़ के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने किश्तवाड़, डोडा और रामबन जिलों के सभी स्कूल बंद कर दिए। अधिकारियों के अनुसार, रात करीब 2:30 बजे चत्रू इलाके में बादल फटा। इसके बाद तेज पानी के साथ कीचड़, पत्थर और मलबा बाजार में आ गया, जिससे मुख्य बाजार का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बाढ़ की वजह से किश्तवाड़-चत्रू-सिंथन राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद हो गया, जिससे लोगों की आवाजाही रुक गई।

फिलहाल किसी के घायल होने या मौत की सूचना नहीं है। हालांकि, बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। कई घरों और दुकानों में पानी भर गया, जबकि नाले के किनारे खड़ी कम से कम दो गाड़ियां तेज बहाव में बह गईं।

बाढ़ से आकलन का किया जा रहा है नुकसान 

अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन प्रभावित इलाकों का सर्वे कर रहा है, ताकि नुकसान का सही पता लगाया जा सके। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिन दुकानदारों और कारोबारियों को इस आपदा में नुकसान हुआ है, उन्हें सरकार के राहत नियमों के तहत मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने जिला प्रशासन से बात कर हालात की जानकारी ली और जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। जितेंद्र सिंह ने पिछले साल चसोती में बादल फटने की घटना का भी जिक्र किया, जिसमें 63 लोगों की जान चली गई थी। इनमें ज्यादातर श्रद्धालु थे। उन्होंने कहा कि उस हादसे के बाद आपदा से निपटने की तैयारियों को और मजबूत किया गया है। अब किश्तवाड़ और मचैल में समय से पहले चेतावनी देने वाले सिस्टम लगाए गए हैं। इसके अलावा, पैडर इलाके में एक ऑटोमैटिक मौसम केंद्र भी स्थापित किया गया है, ताकि खराब मौसम की सटीक जानकारी समय पर मिल सके और राहत-बचाव कार्य तेजी से किए जा सकें।

 बंद हैं सभी स्कूल 

एहतियात के तौर पर प्रशासन ने किश्तवाड़ जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूल पूरे दिन बंद रखने का फैसला किया। भारी बारिश, फिसलन भरी सड़कें, भूस्खलन और पहाड़ों से पत्थर गिरने के खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया। वहीं, पड़ोसी डोडा और रामबन जिलों में भी स्कूल बंद रहे और छात्रों की पढ़ाई के लिए ऑनलाइन कक्षाएं चलाने के निर्देश दिए गए। लगातार हो रही बारिश और बादल फटने की घटना से पूरे चेनाब घाटी क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई जगह संपत्ति को नुकसान पहुंचा, जबकि सड़कें बंद होने से यातायात भी ठप हो गया। हालांकि, राहत की बात यह है कि प्रशासन के अनुसार इस घटना में किसी की जान नहीं गई है।