अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद

ayodhya ram mandir trust meeting

Ram Mandir online donation: ​अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के हालिया मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राम भक्तों के लिए ऑनलाइन दान करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और हाई-टेक बना दिया गया है।

 

​ऑनलाइन दान करने वाले श्रद्धालुओं को अब दान की पुष्टि के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ट्रस्ट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के 'डोनेशन सेक्शन' को अपडेट कर यह नई सुविधा शुरू की है। ​दान प्रक्रिया पूरी होते ही रसीद तुरंत स्क्रीन पर आ जाएगी, जिसे डाउनलोड करके सुरक्षित रखा जा सकता है। रसीद पाने के लिए श्रद्धालु को नाम, दान का उद्देश्य, पैन (PAN) नंबर, तिथि, दान राशि, पूरा पता, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। किसी भी सहायता या पूछताछ के लिए ट्रस्ट ने अपनी वेबसाइट पर हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी भी जारी कर दिए हैं। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में 5 बड़े फैसले, संतों को बड़ी जिम्मेदारी

ऑफलाइन दान के लिए भी सख्त नियम लागू

​चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद कई श्रद्धालुओं ने रसीद में देरी की शिकायत की थी। इसी को देखते हुए अब मंदिर परिसर में ऑफलाइन (नकद) दान करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को भी मौके पर ही अनिवार्य रूप से रसीद देने की व्यवस्था लागू कर दी गई है। नई डिजिटल व्यवस्था से श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा और भविष्य में दान के रिकॉर्ड का सत्यापन बेहद आसान रहेगा। ALSO READ: अयोध्या आहत है… रामलला के घर 'लूट' ने आस्था को घायल किया, सरयू किनारे गूंज रहा एक ही सवाल— 'अब न्याय कब?'

रोज आ रहा है 8 से 10 लाख रुपये का चढ़ावा

​चढ़ावा चोरी की घटना के बाद शुरुआत में दान की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर हुई थी, लेकिन राम भक्तों की अटूट आस्था को कोई रोक नहीं सका। श्रद्धालुओं का भरोसा एक बार फिर पूरी तरह लौट आया है। ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों को मिलाकर राम लला के चरणों में प्रतिदिन 8 से 10 लाख रुपए का चढ़ावा आ रहा है। मंदिर परिसर में रखे दान पात्रों में भक्त दिल खोलकर चढ़ावा अर्पित कर रहे हैं, वहीं ऑनलाइन दान में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- बापू का शांति का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक

sonam wangchuk on rajghat

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ सीधे दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शांति के रास्ते हर हल मुमकिन है। बापू का रास्ता आज भी प्रासंगिक है। ALSO READ: बिहार छात्र आंदोलन पर AK-47 से फायरिंग करने वाला सिपाही सस्पेंड, भाजपा सांसद संबित पात्रा घिरे

 

वांगचुक ने कहा कि 26 दिन के अनशन और इस आंदोलन के अंत पर मैं सबसे पहले बापू को याद करने के लिए राजघाट आना चाहता था। मैं देश को बताना चाहता था कि उनका बताया गया रास्ता आज भी उतना ही उपयुक्त है जितना 100 साल पहले था।

उन्होंने कहा कि मेरी समझ है कि ये तरीके जनता के दिल तक संदेश पहुंचाते हैं। इस बार मुझे यह तसल्ली हुई कि यह देश के स्तर पर प्रासंगिक है। मैं लोगों से कहता हूं कि वे बापू द्वारा शांति के मार्ग पर चलकर ही अपनी बात रखें। मैं सभी नागरिकों को बधाई देता हूं। ALSO READ: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

 

वीडियो संदेश में क्या बोले सोनम वांगचुक

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सेहत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं। वह धीरे-धीरे भोजन कर रहे हैं और उनके शरीर में ताकत लौट रही है। उन्होंने अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ को भी धन्यवाद दिया।

वांगचुक ने लद्दाख के आंदोलन को मिले व्यापक समर्थन के लिए जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सभी के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने लोगों की एकजुटता और अपनी आवाज उठाने की सराहना की। वांगचुक ने अपने संदेश में आंदोलन की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह जीत उन सभी की है जिन्होंने इस मुहिम में साथ दिया।

 

गौरतलब है कि सीजेपी के आंदोलन की सबसे अहम कड़ी सोनम वांगचुक का अनशन ही था। सोनम वांगचुक की 26 दिनों की भूख हड़ताल ने बड़ी संख्या में युवाओं को जंतर मंतर की ओर आने के लिए प्रेरित किया। वांगचुक आ अनशन समाप्त होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

योगी सरकार की बड़ी सौगात, 48.79 करोड़ से काशी की तर्ज पर संवरेगा लोधेश्वर महादेव धाम

  •  
  • बाराबंकी का लोधेश्वर महादेव बनेगा हाईटेक तीर्थ, श्रद्धालुओं को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
  • अगले वर्ष अक्टूबर तक पूरा होगा मेगा प्रोजेक्ट, बनेंगे कवर्ड कॉरिडोर, कमांड सेंटर और मेडिकल सुविधा केंद्र
  • सीएम योगी की पहल से लोधेश्वर धाम में पर्यटन विकास को मिली नई उड़ान

 

बाराबंकी, 26 जुलाई। जिले के प्राचीन लोधेश्वर महादेव मंदिर को शीघ्र ही काशी जैसा भव्य स्वरूप मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत लगभग 48.79 करोड़ रुपये की समेकित पर्यटन विकास परियोजना के तहत मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र को और अधिक सुगम बनाएगी, बल्कि पर्यटकों व श्रद्धालुओं के लिए हाईटेक विजिटर फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स भी तैयार करेगी। इसके साथ ही यहां कवर्ड कारीडोर भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री ने गत 20 जुलाई को इस परियोजना का शिलान्यास किया है।

 

लोधेश्वर महादेव धाम बाराबंकी का महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है। यहां आधुनिक सुविधाओं के विस्तार से श्रद्धालुओं को आरामदायक प्रवास, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और बेहतर व्यवस्था मिलेगी। प्रवेश द्वार, कवर्ड कॉरिडोर, क्लॉक रूम, मेडिकल सेंटर और कमांड सेंटर जैसी सुविधाएं परिसर को हाईटेक विजिटर फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स का रूप देंगी। लैंडस्केपिंग व दुकानों की व्यवस्था से पर्यटन अनुभव और समृद्ध होगा। कुल 12980 वर्गमीटर क्षेत्र में यह विकास कार्य हो रहा है। इसका निर्माण कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस कर रही है।

 

पुरुषों व महिलाओं के लिए होंगे 26-26 टॉयलेट
 

परियोजना के अंतर्गत 5 प्रवेश द्वार, 2734 वर्गमीटर।का लैंडस्केप एरिया, 3.25 मीटर चौड़ा व 652 रनिंग मीटर लंबा परकोटा कवर्ड कॉरिडोर, 412 वर्गमीटर का क्लॉक रूम, पुरुषों व महिलाओं के लिए 26-26 तथा दिव्यांगजनों के लिए 4 टॉयलेट, पेयजल व्यवस्था, सिक्योरिटी स्टाफ हॉल, 9 दुकानें, सीसीटीवी सिस्टम, कंट्रोल रूम एवं कमांड सेंटर, पेंट्री तथा मेडिकल सेंटर जैसी सुविधाओं का निर्माण शामिल है। इन सुविधाओं से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी और परिसर आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा।

 

अगले वर्ष अक्टूबर माह तक हो जाएगा तैयार
 

सीएंडडीएस के परियोजना प्रबंधक देवव्रत पवार ने बताया कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अप्रैल 2026 से निर्माण कार्य तेज गति से शुरू हो गया है। वर्तमान में मुख्य भवन का फाउंडेशन और पाइलिंग का कार्य चल रहा है। हम समयबद्ध तरीके से सभी सुविधाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अगले वर्ष अक्टूबर माह तक इसके निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

 

स्थानीय अर्थव्यवस्था को होगा फायदा: डीएम
 

जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप बाराबंकी के प्राचीन धार्मिक स्थल लोधेश्वर महादेव मंदिर को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। भूमि संबंधी बाधाओं के बावजूद अब कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है। यह परियोजना आस्था और पर्यटन का सुंदर संगम बनाएगी। जिला प्रशासन इस महत्वपूर्ण विकास कार्य की नियमित निगरानी कर रहा है ताकि निर्धारित समय में पूर्ण गुणवत्ता के साथ काम पूरा हो सके। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा और अधिक से अधिक पर्यटक यहां आकर्षित होंगे।

 

मान्यता: महाभारत काल में पांडवों ने यहां किया था महायज्ञ
 

बाराबंकी जिले की रामनगर तहसील के महादेवा गांव में घाघरा नदी के तट पर स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर अत्यंत प्राचीन एवं पवित्र शिव मंदिर है। यहां का शिवलिंग भारत के 52 दुर्लभ शिवलिंगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां महायज्ञ किया था, जिसका प्रमाण आज भी मौजूद पांडव-कूप है। इस मंदिर का नाम लोधरम नामक ब्राह्मण से जुड़ा है, जिन्होंने स्वप्न में भगवान शिव के आदेश पर शिवलिंग की खोज की। यह मंदिर लोधी राजपूतों का कुलदेवता भी है। चारों युगों में इसकी पूजा का उल्लेख मिलता है। हर वर्ष महाशिवरात्रि पर लाखों भक्त यहां आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। पौराणिक महत्व, श्रद्धा और चमत्कारों के कारण लोधेश्वर महादेव आस्था का प्रमुख केंद्र है।
 

Ram Mandir Darshan Rules: सावन और कांवड़ यात्रा पर राम मंदिर में बदलेंगे दर्शन के नियम! पास सिस्टम ऐसे करेगा काम

Ram Mandir: अयोध्या में सावन झूला मेला और कांवड़ यात्रा के दौरान भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए राम मंदिर की सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलावों की तैयारी की जा रही है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक प्रशासनिक सूत्रों ने बताया है कि 8 से 11 अगस्त और 23 से 28 अगस्त के बीच आम श्रद्धालुओं के लिए बिना पास के मंदिर परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित किया जा सकता है। अगर भीड़ बहुत अधिक बढ़ जाती है तो परकोटा स्थित सभी छह उप-मंदिरों में दर्शन अस्थायी रूप से रोके जा सकते हैं। रामलला के दर्शन की समय अवधि बढ़ाने का विकल्प भी खुला रखा गया है।

श्रद्धालुओं की अनुमानित संख्या और कांवड़ यात्रा

प्रशासन का अनुमान है कि सावन महोत्सव के दौरान 10 लाख से 15 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंच सकते हैं। इसके अलावा अगस्त के दौरान सामान्य दिनों में भी रोजाना दो से तीन लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक सावन के दूसरे सोमवार यानी 10 अगस्त को कांवड़िया श्रद्धालुओं की सबसे भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।

पास व्यवस्था और ऑनलाइन प्रक्रिया

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सिर्फ पास धारकों को ही सप्त मंडपम और कुबेर नवरत्न टीला में प्रवेश की अनुमति होगी। अभी लागू सामान्य दर्शन व्यवस्था के तहत दो-दो घंटे के अलग-अलग स्लॉट में 1500 पास जारी किए जाते हैं। ये पास श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बनाए जाते हैं।

सुरक्षा इंतजाम और प्रमुख स्थलों की निगरानी

अयोध्या के क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने बताया कि त्योहार के दौरान सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। पूरे क्षेत्र में पब्लिक एड्रेस सिस्टम, अतिरिक्त लाइटिंग, श्रद्धालु सुविधा केंद्र, खोया-पाया केंद्र, अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी और जल पुलिस की तैनाती की जाएगी। सरयू घाटों और नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी व कनक भवन जैसे प्रमुख मंदिरों की सुरक्षा भी मजबूत की जाएगी।

रूट डायवर्जन और दर्शन प्रबंधन

राम मंदिर के पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा) विजय शंकर मिश्रा ने बताया कि फिलहाल व्यवस्थाएं बदली नहीं गई हैं लेकिन भीड़ के अनुसार रूट डायवर्जन और दूसरे प्रतिबंध लागू किए जाएंगे। डीआईजी अयोध्या रेंज सोमेन बर्मा की अध्यक्षता में सुरक्षा समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं और अंतिम सुरक्षा रोडमैप को श्री राम जन्मभूमि सुरक्षा समन्वय समिति की बैठक में मंजूरी दी जाएगी। जिला प्रशासन के मुताबिक राम मंदिर में रोजाना लगभग दो लाख श्रद्धालुओं को दर्शन कराने की क्षमता है। अधिक भीड़ होने पर श्रद्धालुओं को नियंत्रित मार्गों के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से दर्शन कराए जाएंगे।

यह भी पढ़ें: जिन्हें मिला देश की परीक्षाओं में हो रहे लीक को सुधारने का जिम्मा उन नंदन नीलेकणि के पास कितना पैसा? जानिए इनकी नेटवर्थ

पुण्यतिथि विशेष: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन परिचय और महत्वपूर्ण कार्य

A photograph of Dr. A.P.J. Abdul Kalam, a source of inspiration for millions of Indians

APJ Abdul Kalam Memorial Day: प्रतिवर्ष 27 जुलाई भारत के सबसे प्रिय वैज्ञानिक, शिक्षक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि मनाई जाती है। साल 2015 में इसी दिन वे भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) शिलांग में छात्रों को संबोधित करते समय ह्रदयघात होने से अचानक गिर पड़े और उनका निधन हो गया। वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपनी सादगी, दूरदर्शिता और राष्ट्रनिष्ठा से करोड़ों युवाओं के दिलों में सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा जगाई। 

 

उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है और उनके विचारों को याद किया जाता है, जो आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

 

संक्षेप में जीवन परिचय

पूरा नाम- अवुल पकीर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम

जन्म- 15 अक्टूबर 1931, रामेश्वरम (तमिलनाडु)

शिक्षा- सेंट जोसेफ्स कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिक विज्ञान तथा मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग।

निधन- 27 जुलाई 2015, शिलांग (मेघालय)

प्रसिद्ध पहचान- 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' एवं 'जनता के राष्ट्रपति' के रूप में।

सर्वोच्च सम्मान- भारत रत्न (1997)।

 

डॉ. कलाम का बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उनके पिता एक नाविक थे। अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए कलाम साहब बचपन में अखबार तक बेचते थे। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वे रक्षा अनुसंधान और अंतरिक्ष क्षेत्र में समर्पित हो गए।

 

महत्वपूर्ण कार्य और योगदान

1. अंतरिक्ष और उपग्रह प्रक्षेपण (ISRO)

SLV-III का सफल परीक्षण: इसरो में प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते हुए कलाम साहब के नेतृत्व में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-III) बना, जिसने 1980 में रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया।

 

2. 'मिसाइल मैन' और आईजीएमडीपी (DRDO)

डीआरडीओ (DRDO), जिसका पूरा नाम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) है, इसमें रहते हुए डॉ. कलाम ने इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) की नींव रखी। इसी कार्यक्रम के तहत भारत को अग्नि और पृथ्वी जैसी स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइलें मिलीं, जिससे भारत रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना।

 

3. पोखरण-2 परमाणु परीक्षण (1998)

1998 में पोखरण में हुए दूसरे परमाणु परीक्षण में डॉ. कलाम ने मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार (Scientific Advisor) की भूमिका निभाई। उनके कुशल नेतृत्व में भारत ने खुद को एक परमाणु-संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

 

4. भारत के 11वें राष्ट्रपति (2002–2007)

2002 में वे भारत के 11वें राष्ट्रपति चुने गए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम जनता और विशेष रूप से बच्चों के लिए खोल दिए, जिसके कारण उन्हें 'पीपुल्स प्रेसिडेंट' (जनता का राष्ट्रपति) कहा गया।

 

5. स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान (कलाम-राजू स्टेंट)

उन्होंने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सोमा राजू के साथ मिलकर एक किफायती कोरोनरी स्टेंट विकसित किया, जिसे 'कलाम-राजू स्टेंट' के नाम से जाना जाता है। इसने भारत में हृदय रोगियों के इलाज को बेहद सस्ता बनाया।

 

उनकी प्रमुख पुस्तकें

* उनकी आत्मकथा- विंग्स ऑफ फायर (Wings of Fire)

* इंडिया 2020 (India 2020)

* इग्नाटेड माइंड्स (Ignited Minds)

 

निधन: 27 जुलाई 2015 को IIM शिलांग में छात्रों को संबोधित करते समय उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने अंतिम सांस ली। वे अंतिम क्षण तक वह काम करते रहे जो उन्हें सबसे प्रिय था, 'शिक्षा देना और छात्रों से संवाद करना'। 

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

Top News 27 July: संसद में पेपर लीक संशोधन बिल, सोनम वांगचुक होंगे डिस्चार्ज, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

top news 27 july Photo : AI Generated

Top News 27 July : संसद में आज पेश होगा पेपर लीक संशोधन बिल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में एक्शन में पुलिस। सोनम वांगचुक को आज अस्पताल से छुट्टी मिलेगी। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया। मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दिलाया पहला गोल्ड। 27 जुलाई की बड़ी खबरें :
 

संसद में पेपर लीक संशोधन बिल

मोदी सरकार आज दोपहर 12 बजे संसद में पेपर लीक संशोधन बिल पेश करेगी। कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन खत्म होने के बाद संसद में सोमवार से विपक्ष युवाओं पर लाठीचार्ज के सवाल पर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाएगा। विपक्ष आज राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को भी सदन में उठा सकता है।

 

सोनम वांगचुक को मिलेगी अस्पताल से छुट्टी

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आज मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। वह लद्दाख रवाना होने से पहले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए राजघाट जाएंगे। नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक ने किया था 26 दिन का अनशन। 

 

पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में एक्शन में पुलिस

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और उससे जुड़ी हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक, भड़काऊ पोस्ट और वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किए गए ऐसे कंटेंट की पहचान कर संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं और उन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं। 

 

कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

असम, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है गुजरात में भारी बारिश के कारण भारी तबाही हुई। सेना राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। मौसम विभाग ने अगले 2-3 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

 

मीराबाई चानू ने भारत को दिलाया पहला गोल्ड

राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारत ने ग्लास्को में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। मीराबाई चानू ने भारत को दिलाया पहला गोल्ड, भारोत्तोलक राजा मुथुपांडी और ऋषिकांता सिंह ने जीता रजत पदक। भारत के जादूमणि सिंह ने पाकिस्तान के मुक्केबाज सुमामा रेहमान को पुरुष 55 किग्रा के राउंड ऑफ 16 में हराया। 

जंतर-मंतर के बाद अब पंजाब में पेपर लीक पर हल्ला बोलेगी सीजेपी! अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बात

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने रविवार को पंजाब में कथित पेपर लीक मामले को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि संगठन इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी अगली योजनाओं की घोषणा करने के लिए थोड़ा समय चाहिए। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में दिपके ने कहा, “हमारा विरोध प्रदर्शन अभी कल ही खत्म हुआ है। कृपया हमें थोड़ा समय दीजिए, इसके बाद हम आगे की योजना साझा करेंगे।”

36 दिनों से चल रहा थी आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस साल की शुरुआत में संगठन की स्थापना की थी। यह कदम उस समय उठाया गया, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद दिपके ने युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए इस संगठन की शुरुआत की। 6 जून को अभिजीत दिपके अमेरिका से भारत लौटे और नीट पेपर लीक मामले के विरोध में जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया। इस दौरान संगठन ने उन 20 छात्रों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कथित तौर पर नीट पेपर लीक मामले से जुड़ी परिस्थितियों के बाद आत्महत्या कर ली थी। बाद में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े। उन्होंने घोषणा की कि जब तक प्रमुख मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रहेंगे। वांगचुक के शामिल होने के बाद आंदोलन को और अधिक समर्थन और गति मिली।

 

दिल्ली के जंतर-मंतर में हो रहा था प्रदर्शन

शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर 36 दिनों से चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया। यह फैसला केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लिया गया। मंत्री का इस्तीफा संगठन की प्रमुख मांगों में शामिल था, जिसे लेकर सीजेपी लगातार आंदोलन कर रही थी। कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना अभिजीत दिपके ने इस साल की शुरुआत में की थी। संगठन की शुरुआत उस समय हुई, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इसके बाद दिपके ने युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए इस मंच का गठन किया।आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने का ऐलान किया, जिसके बाद इस आंदोलन को देशभर में और अधिक समर्थन मिलने लगा।

 

PM मोदी ने गिनाई भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की ताकत, INS महेंद्रगिरि और पिनाका रॉकेट सिस्टम को बताया बड़ी उपलब्धि, Mann Ki Baat में क्या बोले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सशस्त्र सेनाओं के साहस के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में तकनीकी क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नौसेना में शामिल किए गए INS महेंद्रगिरि को भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह आधुनिक युद्धपोत भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है और इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

ALSO READ: CJP आंदोलन के पहले ही दिन धर्मेंद्र प्रधान ने की थी इस्तीफे की पेशकश, BJP के बड़े नेता का दावा

पीएम मोदी ने कहा, “यह आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत का प्रतीक है।” प्रधानमंत्री ने भारत में विकसित पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) का भी उल्लेख किया। यह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एक आधुनिक और सटीक निशाना लगाने वाली आर्टिलरी रॉकेट प्रणाली है। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सामूहिक मेहनत है। पिनाका LRGR-120 की मारक क्षमता 60 किलोमीटर से 120 किलोमीटर तक बताई गई है।

ALSO READ: Pakistan को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चेतावनी, आतंक और धमकियों पर नहीं झुकेगा भारत

'खुशा मिसाइल' परीक्षण को बताया बड़ी उपलब्धि

 

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में खुशा मिसाइल के सफल उड़ान परीक्षण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास भारत को रक्षा क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

 

कारगिल विजय दिवस पर जवानों को किया याद

अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने 1999 के कारगिल युद्ध में देश के लिए लड़ने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस हर भारतीय के लिए गर्व का अवसर है और यह सशस्त्र बलों के अद्भुत साहस की याद दिलाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के वीर जवानों का त्याग और पराक्रम हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।

Pakistan को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चेतावनी, आतंक और धमकियों पर नहीं झुकेगा भारत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अलावा पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा। द्रास में करगिल युद्ध स्मारक पर करगिल विजय दिवस समारोह को संबोधित करते हुए, सिंह ने कहा कि पड़ोसी देश के साथ भविष्य में कोई भी बातचीत केवल पाक कब्‍जे वाले कश्‍मीर के मुद्दे पर होगी, जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे के तहत भारत का एक अभिन्न अंग है।

ALSO READ: CJP आंदोलन के पहले ही दिन धर्मेंद्र प्रधान ने की थी इस्तीफे की पेशकश, BJP के बड़े नेता का दावा

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अपनी राज्य नीति के हिस्से के रूप में आतंकवाद को संस्थागत रूप दिया है और उसके सैन्य प्रतिष्ठान और आतंकवादी संगठनों के बीच कोई अंतर नहीं है। सिंह ने कहा कि भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से आतंकवादियों और उनके समर्थकों को कड़ा जवाब दिया है कि भारत में किसी भी शत्रुतापूर्ण कृत्य का और भी अधिक बल के साथ जवाब देने की क्षमता है।
 

उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता को खतरे में डालने की हर कोशिश का हमारे सशस्त्र बल मुंहतोड़ जवाब देंगे।

1999 के करगिल युद्ध के दौरान अपनी जान गंवाने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए, रक्षा मंत्री ने इस संघर्ष को न केवल एक सैन्य और कूटनीतिक जीत बताया, बल्कि एक ऐसा निर्णायक क्षण भी बताया जिसने दुनिया के सामने भारतीय सैनिकों के साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान को प्रदर्शित किया।
 

उन्होंने कहा कि करगिल युद्ध स्मारक पर अंकित शहीदों के नाम देश के हर क्षेत्र, धर्म और समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भारत की एकता को दर्शाते हैं और देश को बांटने की कोशिश करने वालों को एक कड़ा संदेश देते हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच तुलना करते हुए सिंह ने कहा कि भारत नवाचार, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और अंतरिक्ष अन्वेषण के माध्यम से प्रगति कर रहा है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद, कट्टरपंथ और सीमा पार घुसपैठ को बढ़ावा दे रहा है।
 

उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप, उपग्रह और डिजिटल बुनियादी ढांचा बना रहा है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद और छद्म युद्ध को बढ़ावा दे रहा है, और कहा कि सशस्त्र बल किसी भी शत्रुतापूर्ण मंसूबे का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। करगिल युद्ध के दौरान दी गई कुर्बानियों को याद करते हुए सिंह ने कहा कि कई सैनिक अपनी जवानी के शुरुआती दौर में थे, जिनके कई सपने और अरमान थे, फिर भी उन्होंने खुशी-खुशी देश की सेवा में अपनी जान दे दी। उन्होंने शहीद सैनिकों के परिवारों—जिनमें उनकी माताएं, पत्नियां और बच्चे शामिल थे—द्वारा सहे गए गहरे दुख को भी याद किया।
 

करगिल विजय दिवस के मौके पर, रक्षा मंत्री ने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले सभी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उन्हें भारत माता के समर्पित सपूत बताया, जिनके साहस और बलिदान से आने वाली पीढ़ियां हमेशा प्रेरित होती रहेंगी।

आस्था की विजय: जब पंढरपुर में एक बालक के रक्षक बने स्वयं विट्ठल

Pictured is a view of the Lord Shri Vitthal-Rukmini Temple in Pandharpur, Maharashtra

एक सत्य घटना पर आधारित संस्मरण

 

एक पारिवारिक संस्मरण, जो बताता है कि श्रद्धा का सबसे बड़ा प्रमाण अनुभव होता है, भारत की सांस्कृतिक परंपरा में कुछ पर्व केवल तिथियां नहीं होते, वे लोकजीवन की आत्मा बन जाते हैं। आषाढ़ी एकादशी ऐसा ही एक महापर्व है, जो महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

इस दिन 'पंढरपुर' स्थित भगवान श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। चंद्रभागा नदी में स्नान, हरिनाम, संकीर्तन, वारकरी परंपरा की पदयात्राएं और 'जय जय राम कृष्ण हरी' का अखंड घोष इस तीर्थ को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। सदियों से यह विश्वास जीवित है कि पांडुरंग विट्ठल अपने भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं।

 

ऐसी ही आस्था से जुड़ा एक सत्य संस्मरण मध्य प्रदेश के देवास स्थित 'पवार परिवार' में आज भी श्रद्धापूर्वक सुनाया जाता है। यह घटना लगभग 'एक शताब्दी पूर्व की है, 'किंतु परिवार की स्मृतियों में आज भी उतनी ही जीवंत है, मानो कल की बात हो।

मध्यप्रदेश के मालवा अंचल के देवास निवासी श्रीमती मंजुलाबाई अमृतराव पवार साहेब अपने पांच से सात वर्षीय पुत्र के साथ आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पंढरपुर पहुंची थीं। उस समय न आधुनिक परिवहन था, न यात्रियों के लिए आज जैसी सुविधाएं। फिर भी श्रद्धा के बल पर लोग कठिन यात्राएं करते थे। 

 

पंढरपुर पहुंचकर उन्होंने पहले अपने पुत्र को चंद्रभागा नदी में स्नान कराया और फिर मंदिर की सीढ़ियों पर बैठाकर मराठी में स्नेहपूर्वक कहा- 'बाळा, इथेच बस. मी आंघोळ करून लगेच येते.'- अर्थात् , 'बेटा, यहीं बैठे रहना। मैं स्नान करके अभी आती हूँ।' किन्तु नियति ने उस दिन उनके विश्वास की एक कठिन परीक्षा लेनी थी।

जब मंजुलाबाई साहेब स्नान कर लौटीं, तो उनका पुत्र वहां नहीं था। देखते ही देखते उनका हृदय आशंका से भर उठा। अपार भीड़ में वे व्याकुल होकर अपने पुत्र को खोजने लगीं। दूसरी ओर नन्हा बालक भी अपनी मां को ढूंढ़ते-ढूंढ़ते रोने लगा। मां और पुत्र दोनों एक-दूसरे को पुकार रहे थे, पर लाखों श्रद्धालुओं के शोर में उनकी आवाज़ें कहीं विलीन हो गईं। 

 

इसी बीच एक वृद्ध, संतस्वरूप बाबा उस रोते हुए बालक के पास आए। उन्होंने बड़े स्नेह से उसके आंसू पोंछे और मराठी में पूछा, 'बाळा, का रडतोस?' बालक ने मासूमियत से उत्तर दिया, 'माझी आई दिसत नाही. 'अर्थात्, 'मेरी आई दिखाई नहीं दे रही है।' वृद्ध ने प्रेमपूर्वक उसे प्रसाद के दो लड्डू दिए, उसका भय दूर किया और मंदिर के समीप एक चबूतरे पर बैठाकर कहा, 'इथेच बस. तुझी आई नक्की येईल।' यानी, 'यहीं बैठे रहो, तुम्हारी मां अवश्य आ जाएगी।' 

 

कुछ समय बाद पुत्र की खोज में व्याकुल मंजुलाबाई साहेब की दृष्टि उसी चबूतरे पर बैठे अपने पुत्र पर पड़ी। वे भावविह्वल होकर 'बाळा… बाळा…' पुकारती हुई उसके पास दौड़ीं और उसे अपने हृदय से लगा लिया। उस क्षण शब्द गौण हो गए; मां और पुत्र दोनों की आंखों से बहते आंसू ही उनके मिलन की भाषा बन गए।

बालक ने शांत होने पर पूरी घटना अपनी मां को सुनाई। मंजुलाबाई साहेब ने चारों ओर उस वृद्ध संत को खोजा, पर वे कहीं दिखाई नहीं दिए। उसी क्षण उनके अंतर्मन में यह अनुभूति जागी कि वह कोई सामान्य वृद्ध नहीं थे, बल्कि स्वयं पांडुरंग विट्ठल थे, जिन्होंने भक्त की पुकार सुनकर उसके पुत्र की रक्षा की।

 

यह अनुभूति किसी तर्क का विषय नहीं थी। यह एक मां के विश्वास और उसके अनुभव का सत्य था। वे श्रद्धा से अभिभूत होकर भगवान विट्ठल के दर्शन करने पहुंचीं और कृतज्ञ मन से देवास लौट आईं। समय बीतता गया।

वही बालक आगे चलकर देवास के प्रथम फोटोग्राफर एवं आर्टिस्ट श्री गणपतराव पवार साहेब के रूप में प्रतिष्ठित हुए। उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ तत्कालीन देवास रियासत का भी नाम गौरवान्वित किया। आज उनके चौथी पीढ़ी तक परिवार कला, संस्कृति और सामाजिक योगदान के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।

 

परिवार के सदस्यों के अनुसार, स्व. श्री गणपतराव साहेब जब भी इस घटना का स्मरण करते थे, उनकी आँखें स्वतः भर आती थीं। उन्होंने यह संस्मरण दशकों पूर्व एकादशी के अवसर पर अपनी चौथी पुत्रवधु श्रीमती ज्योति प्रेमराव पवार जी को सुनाया था। उस समय भी वे भावुक हो उठे थे। तभी से यह प्रसंग परिवार की अमूल्य धरोहर के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित है।

ऐसे संस्मरणों को केवल चमत्कार की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। भारतीय समाज में परिवारों के भीतर पीढ़ियों से संजोई गई स्मृतियां हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे यह बताती हैं कि कठिन परिस्थितियों में मनुष्य को संबल देने वाली सबसे बड़ी शक्ति उसका विश्वास होता है। आस्था का अर्थ अंधविश्वास नहीं, बल्कि वह आत्मिक आश्रय है जो विपत्ति के क्षणों में मनुष्य को टूटने नहीं देता।

 

पंढरपुर की परंपरा भी यही कहती है कि भगवान विट्ठल केवल मंदिर के गर्भगृह तक सीमित नहीं हैं। वे अपने भक्त के विश्वास, करुणा और जीवन के अनुभवों में उपस्थित रहते हैं। संभव है कि किसी के लिए यह एक संयोग हो, किसी के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव; किंतु जिन लोगों ने इसे जिया है, उनके लिए यह ईश्वर की कृपा का सजीव प्रमाण है।

आषाढ़ी एकादशी का संदेश भी यही है कि निष्कलुष श्रद्धा मनुष्य को भीतर से दृढ़ बनाती है। जब विश्वास निर्मल हो और भक्ति निष्कपट, तब ईश्वर किसी न किसी रूप में अपने भक्त का हाथ थाम ही लेते हैं। शायद इसी विश्वास ने पंढरपुर को केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के हृदय का आध्यात्मिक आश्रय बना दिया है।

 

जय जय राम कृष्ण हरी।

पांडुरंग विट्ठल महाराज की जय।।