भारी बारिश से जम्मू-कश्मीर में हालात बिगड़े, रोकी गई अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा

जम्मू-कश्मीर में मौसम तेजी से खराब हो रहा है। बीते 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश की वजह से यहां बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। राजौरी, अनंतनाग, उधमपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश की स्थिति बनी है। वहीं कई इलाकों में शनिवार को हुई भारी बारिश के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अमरनाथ यात्रा और श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को कुछ समय के लिए रोक दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

वहीं, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित इलाकों में लोगों की जान बचाना है। उन्होंने बताया कि वह रविवार सुबह से ही हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, खासकर राजौरी शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में, जहां भारी बारिश से स्थिति गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि वह स्थानीय विधायकों के लगातार संपर्क में हैं और प्रशासन पूरी तरह से राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार हर प्रभावित परिवार की हरसंभव मदद करेगी। जिन लोगों के घरों और संपत्ति को भारी बारिश या अचानक आई बाढ़ से नुकसान हुआ है, उन्हें भी हर जरूरी सहायता दी जाएगी।

महिला लापता, घरों और दुकानों को भारी नुकसान

जम्मू-कश्मीर के राजौरी ज़िले में तेज़ बारिश के बाद अचानक बाढ़ जैसे हालात बन गए। इस हादसे में एक महिला लापता हो गई है, जबकि कई घरों, गाड़ियों और दुकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। शनिवार रात शुरू हुई मूसलाधार बारिश से रिहायशी और निचले इलाकों में पानी भर गया। तेज़ बहाव की वजह से कई मकानों और अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। बचाव दल लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और लापता महिला की तलाश में जुटे हुए हैं।

रोकी गई अमरनाथ यात्रा

खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 19 जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहलगाम और बालटाल, दोनों मार्गों से यात्रा पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। कश्मीर के कमिश्नर अंशुल गर्ग ने बताया कि 19 जुलाई से बालटाल और नुनवान/चंदनवाड़ी बेस कैंप से किसी भी श्रद्धालु को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह फैसला इन दोनों बेस कैंपों में मौजूद सभी श्रद्धालुओं पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में खराब मौसम की संभावना को देखते हुए यात्रा मार्गों की सुरक्षा का दोबारा आकलन किया जा रहा है। मौसम में सुधार और रास्तों को सुरक्षित पाए जाने के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू करने का फैसला लिया जाएगा। अंशुल गर्ग ने कहा कि प्रशासन लगातार मौसम और यात्रा मार्गों पर नजर बनाए हुए है। जैसे ही हालात सामान्य होंगे और सुरक्षा सुनिश्चित हो जाएगी, अमरनाथ यात्रा फिर से शुरू करने की जानकारी श्रद्धालुओं को दी जाएगी।

वैष्णो देवी यात्रा भी रोकी गई

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल चल रही अमरनाथ यात्रा के दौरान अब तक 3.7 लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र अमरनाथ गुफा पहुंचकर बाबा बर्फानी के दर्शन और पूजा-अर्चना कर चुके हैं। वहीं, खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी यात्रा भी फिलहाल कुछ समय के लिए रोक दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि मौसम की स्थिति सामान्य होने और यात्रा मार्ग सुरक्षित पाए जाने के बाद ही दोनों यात्राएं दोबारा शुरू करने का फैसला लिया जाएगा। यात्रियों से अपील की गई है कि वे प्रशासन की ओर से जारी ताजा जानकारी और निर्देशों का पालन करें।

बाबा अमरनाथ और वैष्णोदेवी यात्रा पर लगा ब्रेक, अगले आदेश तक रहेगी रोक, जानिए क्‍यों लिया यह फैसला?

pilgrimages to Baba Amarnath and Vaishno Devi have been suspended

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा प्रदेश में आज यानी 19 जुलाई से 25 जुलाई तक जबरदस्‍त खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए पहलगाम और बालटाल दोनों रास्तों से अमरनाथ यात्रा को कुछ दिनों के लिए रोक दिया जाएगा। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए वैष्णो देवी यात्रा को भी कुछ समय के लिए रोक दिया है।


कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग ने कहा कि यह फैसला तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और भलाई को ध्यान में रखते हुए एहतियात के तौर पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में खराब मौसम की चेतावनी और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा व भलाई को देखते हुए आज से पहलगाम और बालटाल दोनों रास्तों से अमरनाथ यात्रा रोक दी जाएगी।

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इसके अनुसार, आज से बालटाल और नुनवान/चंदनवाड़ी बेस कैंप से तीर्थयात्रियों को आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों ने कहा कि रास्ते की सुरक्षा और मौसम की स्थिति का जायजा लेने के बाद यात्रा फिर से शुरू करने के बारे में जानकारी दी जाएगी। जानकारी के लिए अब तक, चल रही अमरनाथ यात्रा के दौरान 4 लाख के करब तीर्थयात्रियों ने पवित्र गुफा के दर्शन किए हैं।

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माता वैष्णोदेवी यात्रा भी रोकी

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए वैष्णो देवी यात्रा को कुछ समय के लिए रोक दिया है। श्राइन बोर्ड के अनुसार, यह फैसला तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और भलाई को ध्यान में रखते हुए एहतियात के तौर पर लिया गया है। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे धैर्य रखें और श्राइन बोर्ड के आधिकारिक संचार माध्यमों से दी जाने वाली जानकारी का पालन करें। 

खराब मौसम की मार, अमरनाथ के बाद अब वैष्णो देवी यात्रा भी रोकी गई…यहां जान लें लेटेस्ट अपडेट

मौसम विभाग (आईएमडी) की खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए 19 जुलाई से अमरनाथ यात्रा और माता वैष्णो देवी यात्रा को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। अमरनाथ यात्रा को पहलगाम और बालटाल, दोनों मार्गों से अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने यह फैसला श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एहतियात के तौर पर लिया है।

कश्मीर के मंडल आयुक्त अंशुल गर्ग ने बताया कि 19 जुलाई से बालटाल और नुनवान-चंदनवाड़ी बेस कैंप से किसी भी श्रद्धालु को आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। यह आदेश उन सभी यात्रियों पर लागू होगा, जो इन बेस कैंपों में मौजूद हैं। मौसम सामान्य होने तक उन्हें आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक खराब मौसम की संभावना को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। प्रशासन ने कहा कि यात्रा मार्ग की सुरक्षा का पूरा आकलन करने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।

कश्मीर के मंडल आयुक्त अंशुल गर्ग ने कहा कि यात्रा मार्ग की सुरक्षा और मौसम की स्थिति का पूरी तरह आकलन करने के बाद ही अमरनाथ यात्रा दोबारा शुरू करने का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यात्रा कब शुरू होगी, इसका निर्णय मौके के हालात और मौसम को लेकर जारी होने वाली अगली आधिकारिक सलाह के आधार पर किया जाएगा।

इस साल बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

यात्रा पर अस्थायी रोक ऐसे समय लगाई गई है, जब इस साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा में शामिल हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 3.7 लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में अमरनाथ यात्रा में आमतौर पर 3 लाख से कुछ अधिक श्रद्धालु शामिल होते रहे हैं। वहीं, 2024 में यह संख्या 5 लाख के पार पहुंच गई थी, जो हाल के वर्षों में सबसे अधिक मानी गई।

वैष्णो देवी यात्रा भी अस्थायी रूप से रोकी गई

खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए माता वैष्णो देवी यात्रा भी कुछ समय के लिए रोक दी गई है। जम्मू प्रशासन ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है, क्योंकि इलाके में मौसम खराब रहने की आशंका है। प्रशासन ने अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा पर जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं से फिलहाल अपनी यात्रा टालने की अपील की है। साथ ही कहा है कि वे केवल सरकारी और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। अधिकारियों के अनुसार, मौसम सामान्य होने और यात्रा मार्ग की सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही दोनों यात्राएं दोबारा शुरू करने का फैसला लिया जाएगा।

Sawan 2026 Mangla Gauri Vrat: इस साल सावन में कब-कब किया जाएगा मंगला गौरी व्रत? तरीख सहित जानें पूजा विधि और उद्यापन के नियम

Sawan 2026 Mangla Gauri Vrat: सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। पूरी दुनिया में शिव भक्त बेसब्री से इस माह के शुरू होने का इंतजार करते हैं। हिंदू कैलेंडर के इस पांचवें महीने में भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालु पूजा और उपवास करते हैं। सावन के महीने में सोमवार के अलावा मंगलवार का भी विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में सावन के महीने में आने वाले सभी मंगलवार माता पार्वती के स्वरूप मां मंगला गौरी को समर्पित होते हैं। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख और पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इसे करती हैं। इस व्रत में व्रती को एक समय ही अन्न, बिना नमक या फलाहार ग्रहण करना चाहिए।

सावन 2026 मंगला गौरी व्रत की तारीखें

इस साल सावन मास में मंगला गौरी व्रत की तिथियां, पूजा विधि और उद्यापन नियम नीचे दिए गए हैं :

मंगला गौरी व्रत 2026 की तिथियां

साल 2026 में सावन के महीने में कुल 4 मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे :

पहला मंगला गौरी व्रत : 04 अगस्त 2026 सावन का प्रथम मंगलवार

दूसरा मंगला गौरी व्रत : 11 अगस्त 2026 सावन का द्वितीय मंगलवार

तीसरा मंगला गौरी व्रत : 18 अगस्त 2026 सावन का तृतीय मंगलवार

चौथा मंगला गौरी व्रत : 25 अगस्त 2026 सावन का चतुर्थ (अंतिम) मंगलवार

मंगला गौरी व्रत 2026 पूजा विधि

प्रातः काल की तैयारी : व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।

चौकी की स्थापना : पूजा घर में एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर माता पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

पूजा सामग्री : माता रानी को रोली, चंदन, अक्षत, फल, फूल और माला अर्पित करें। मंगला गौरी व्रत में मां गौरी को 16 श्रंगार की वस्तुएं और 16 माला, 16 लड्डू या नैवेद्य अर्पित करने का विधान है।

दीपक प्रज्वलित करना : आटे से बना एक चौमुखी दीपक जलाएं, जिसमें 16 तार की बत्तियां या सूत हो।

कथा व आरती : मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें या श्रवण करें। इसके बाद पार्वती चालीसा का पाठ करें और अंत में मां गौरी और भगवान शिव की आरती करके प्रसाद वितरित करें।

मंगला गौरी व्रत उद्यापन विधि

शास्त्रों के अनुसार, महिलाएं मंगला गौरी व्रत शादी के शुरुआती 5 वर्ष या फिर 16 मंगलवार तक रखती हैं और सावन के आखिरी मंगलवार को इसका उद्यापन करती हैं:

  • उद्यापन के दिन भी सुबह सामान्य व्रतों की तरह ही मां मंगला गौरी की पूरी श्रद्धा से पूजा करें। इस दिन पूरे परिवार के साथ हवन-यज्ञ किया जाता है।
  • उद्यापन के मुख्य नियम के तहत 16 सुहागन महिलाओं को आदरपूर्वक घर पर आमंत्रित किया जाता है।
  • इन सभी महिलाओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराया जाता है और उन्हें सुहाग की सामग्री भेंट किया जाता है।
  • अंत में सुहागिन महिलाओं और घर के बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

Bhadli Navami 2026 Date: कब है भड़ली नवमी और क्यों मनाई जाती है? इस दिन बिना अच्छा मुहूर्त देखे कर सकते हैं कोई भी शुभ कार्य

Bhadli Navami 2026 Date: कब है भड़ली नवमी और क्यों मनाई जाती है? इस दिन बिना अच्छा मुहूर्त देखे कर सकते हैं कोई भी शुभ कार्य

Bhadli Navami 2026 Date: भड़ली नवमी को भड़रिया नवमी या कंदर्प नवमी भी कहते हैं। यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस दिन का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन को अक्षय तृतीया और देवउठनी एकादशी के समान ही ‘अबूझ मुहूर्त’ माना गया है। इसका मतलब यह है कि इस पूरे दिन ग्रह और नक्षत्र की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग या ज्योतिषी से अलग से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती।

कब मनाई जाएगी भड़ली नवमी 2026?

वैदिक पंचांग के अनुसार तिथियों का समय कुछ इस प्रकार रहेगा:

नवमी तिथि प्रारंभ : 22 जुलाई 2026 को सुबह 05:16 बजे से

नवमी तिथि समाप्त : 23 जुलाई 2026 को सुबह 07:03 बजे तक

उदयातिथि के नियमों के अनुसार नवमी तिथि का सूर्योदय 22 जुलाई को हो रहा है, इसलिए मुख्य रूप से भड़ली नवमी का त्योहार और पूजा इसी दिन संपन्न की जाएगी।

भड़ली नवमी 2026 धार्मिक महत्तव

भड़ली नवमी के ठीक दो दिन बाद ‘देवशयनी एकादशी’ आती है, जिससे चातुर्मास की शुरुआत होती है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते क्योंकि इस दौरान उनका प्रत्यक्ष आशीर्वाद नहीं मिल पाता। इसलिए, भड़ली नवमी को विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए सीजन का आखिरी दिन मानकर धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा, इसके बाद भगवान विष्णु अगले चार महीनों के लिए विश्राम अवस्था में चले जाते हैं, इसलिए श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। लोग व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाते हैं और आने वाले चार महीनों के लिए भगवान का संरक्षण व आशीर्वाद मांगते हैं। यह दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन भी होता है। इस वजह से तांत्रिक और आध्यात्मिक साधना करने वाले लोगों के लिए मां दुर्गा (शक्ति) की पूजा करने और हवन अनुष्ठान संपन्न करने के लिहाज से यह बेहद पवित्र तिथि मानी जाती है।

इस दिन से करना माना जाता है शुभ

  • गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन होने के कारण इस दिन कन्या पूजन करना और गरीबों को दान देना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • यदि किसी के विवाह में रुकावटें आ रही हों, तो भड़ली नवमी के अबूझ मुहूर्त का लाभ उठाकर विवाह संपन्न कराया जाता है।
  • नया वाहन खरीदना, सोने-चांदी की खरीदारी करना या नए घर में प्रवेश करने के लिए भी लोग इस दिन को चुनते हैं।

Devshayani Ekadashi 2026: 3 बड़े योगों में किया जाएगा देवशयनी एकादशी का व्रत, जानें सही तारीख, मुहूर्त और पारण का समय

Aashadh Gupt Navratri 2026: बस 3 उपायों से प्रसन्न होंगी मां काली, मां बगलामुखी और मां मातंगी तक, 23 जुलाई तक चलेगा गुप्त नवरात्रि पर्व

Aashadh Gupt Navratri 2026: चैत्र माह से शुरू होने वाले हिंदू वर्ष में गुप्त नवरात्रि का पर्व 4 बार आता है। चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ माह में नवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इनमें से चैत्र और आश्विन माह के नवरात्रि पर्व गृहस्थ श्रद्धालु बहुत धूमधाम से मनाते हैं, लेकिन आषाढ़ और माघ माह में गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ ही 10 महाविद्याओं की भी उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह गुप्त नवरात्रि का पर्व मुख्य रूप से तंत्र साधना और सिद्धयां प्राप्त करने का असवर होता है। हालांकि, गृहस्थ श्रद्धालु अपनी क्षमता और श्रद्धानुसार पूजा और उपाय करते हैं।

इस समय आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि चल रही है। इसकी शुरुआत 15 जुलाई 2026 से हुई थी और समापन 23 जुलाई को होगा। इस अवधि में भक्त शक्ति की उपासना करते हैं, नौ दिनों का उपवास करते हैं और मां दुर्गा का ध्यान करते हैं। इस पर्व में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसलिए गुप्त नवरात्रि का पर्व तंत्र साधकों और शक्ति के साधकों के लिए बहुत अहम स्थान रखता है। आइए जानें क्या उपाय करने से मां काली, मां बगलामुखी और मातंगी माता को प्रसन्न कर सकते हैं?

गुप्त नवरात्रि में करें ये 3 आसान उपाय

घर की पूर्व दिशा में मां मातंगी की तस्वीर रखें : मां मातंगी की तस्वीर में अक्सर उनके हाथ में तोता दिखाया जाता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान उनकी तस्वीर घर की पूर्व दिशा में लगाने से व्यक्ति की छिपी हुई प्रतिभा निखरती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और आध्यात्मिक व व्यक्तिगत विकास में मदद मिलती है।

मां बगलामुखी को हल्दी अर्पित करें : मां बगलामुखी को रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। उनकी पूजा से नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। मां बगलामुखी को हल्दी बेहद प्रिय मानी जाती है। उन्हें हल्दी अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और बुरी नजर या विरोधियों से सुरक्षा मिलने की मान्यता है।

मां काली को नारियल अर्पित करें : मां काली परिवर्तन और नई शुरुआत की देवी मानी जाती हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान मां काली को नारियल चढ़ाने से मन की उलझनें दूर होती हैं, नकारात्मक विचार कम होते हैं और मानसिक शक्ति बढ़ती है। माना जाता है कि वे जीवन की बाधाओं को दूर करने में भी मदद करती हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

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Badrinath temple donation case: बद्रीनाथ दान घोटाला मामले में पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान गिरफ्तार, CCTV फुटेज में जेब में कैश रखते दिखने का दावा

Badrinath temple donation case: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के दान में कथित गड़बड़ी के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मंदिर के पूर्व अधिकारी राजेंद्र चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। एसआईटी ने करीब चार घंटे तक पूछताछ करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, अब उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन की जांच के बीच हुई है।

जांच एजेंसियां मंदिर प्रशासन से जुड़े कई लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। राजेंद्र चौहान इस मामले के प्रमुख संदिग्धों में शामिल हैं। जांच के दौरान जुटाए गए CCTV फुटेज के आधार पर एसआईटी ने चौहान से पूछताछ की। जांचकर्ताओं का दावा है कि 22 जून, 25 जून और 29 जून की रिकॉर्डिंग में चौहान कथित तौर पर कैश के बंडल उठाकर अपनी जेब में रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी फुटेज के आधार पर उनसे विस्तृत पूछताछ की गई और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

CCTV फुटेज से खुलासा

पुलिस ने बताया कि 25 जून और 29 जून के सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान कुछ और लोगों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गई हैं। इन फुटेज के आधार पर एसआईटी ने अतिरिक्त संदिग्धों की पहचान की है और जल्द ही उनसे भी पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित दुरुपयोग से जुड़े इस मामले की जांच अभी जारी है।

एसआईटी सभी उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है ताकि पूरे मामले में शामिल सभी लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके। फिलहाल, जांच एजेंसी ने किसी अन्य आरोपी के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई की घोषणा नहीं की है, लेकिन नए साक्ष्यों के सामने आने के बाद आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।

SIT ने सौंपी रिपोर्ट

बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की पड़ताल के लिए श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से गठित जांच दल ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। बीकेटीसी के मुख्य कार्य अधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि चार-सदस्यीय दल ने 18 पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है।

मंदिर समिति के सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में चढ़ावे की चोरी को रोकने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें गणना के दौरान ड्रेस कोड लागू करना, मंदिर परिसर तथा गणना केंद्र के अछूते स्थानों को चिन्हित कर वहां नये सीसीटीवी कैमरे लगाना, निगरानी व्यवस्था को बेहतर एवं जवाबदेह बनाना और श्रद्धालुओं को गणना कार्य से जोड़ने की निश्चित प्रक्रिया तय करना शामिल है।

दो जुलाई को हेराफेरी का हुआ खुलासा

दो जुलाई को सोशल मीडिया पर मंदिर में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद बीकेटीसी ने इस समिति का गठन किया था, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अध्यक्ष कार्यालय में वैयक्तिक सहायक के तौर पर तैनात प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद पुलिस में नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसकी जांच में साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें गिरफतार कर लिया गया।

मंदिर के चढ़ावे के रिकॉर्ड वाले रजिस्टर में ओवरराइटिंग पाए जाने के बाद इस काम में लगे खजांची संदेश मेहता को भी वहां से हटाकर अन्यत्र तबादला किया जा चुका है। इस बीच, मामले की पड़ताल कर रहा पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) बीकेटीसी के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के साथ ही अन्य लोगों के भी इसमें शामिल होने की आशंका का बारीकी से पता लगा रहा है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि चमोली के पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह की अध्यक्षता में गठित एसआईटी सीसीटीवी कैमरों में दर्ज नौटियाल की पूर्व की संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है। इसके अलावा, आरोपी के साथ ही इस मामले में अन्य लोगों के शामिल होने के पहलू की भी जांच की जा रही है, जिसके लिए पुराने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने सीसीटीवी कैमरों के पूर्व में डिलीट हो चुके रिकॉर्ड को रिकवर करने की दिशा में भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए विशेषज्ञों की मदद लेने का प्रयास किया जा रहा है। उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गढ़वाल के कमिश्नर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की जांच भी जारी है।

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Viral News: एक ओर अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि में कथित अनियमितताओं का मामला सुर्खियों में है। वहीं राजस्थान के मेवाड़ इलाके में स्थित मशहूर श्री सांवलिया सेठ मंदिर अपनी पारदर्शी दान व्यवस्था और सख्त लेखा-जोखा सिस्टम को लेकर चर्चा में है। मेवाड़ क्षेत्र में स्थित भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित इस प्रसिद्ध मंदिर को देशभर के कारोबारी अपना ‘बिजनेस पार्टनर’ मानते हैं। वे अपने कारोबार के मुनाफे का एक हिस्सा यहां अर्पित करते हैं। 13 जुलाई को जब मंदिर की दान पेटियां खोली गईं तो पहले ही दिन 10.11 करोड़ रुपये की नकदी गिनी गई। दान की गिनती की प्रक्रिया छह दिनों तक चलनी है।

हर महीने 30 से 40 करोड़ रुपये का चढ़ावा

मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्री सांवलिया सेठ मंदिर में हर महीने औसतन 30 से 40 करोड़ रुपये का चढ़ावा आता है। इतनी बड़ी राशि के सुरक्षित प्रबंधन के लिए मंदिर में मजबूत सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था लागू है। दान पेटियां, दान कक्ष और प्रशासनिक कार्यालय 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहते हैं। दान वाले रूम में श्रद्धालु जैसे ही दान करते हैं। फिर उन्हें तुरंत आधिकारिक रसीद जारी की जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है।

साल में 11 बार खुलती हैं दान पेटियां

मंदिर की सबसे खास व्यवस्था यह है कि दान पेटियां साल में 11 बार खोली जाती हैं। दान पेटियां खोलने से लेकर कैश की गिनती तक पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है। गिनती के दौरान प्रतिदिन की राशि मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की जाती है। वहीं, कैश गिनने वाले कर्मचारियों की मंदिर में एंट्री और एग्जिट के समय सघन जांच की जाती है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे।

दान की राशि से होते हैं विकास कार्य

मंदिर बोर्ड के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव के अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए हर रुपये का विस्तृत हिसाब रखा जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में आने वाला चढ़ावा केवल मंदिर के खजाने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण और विकास कार्यों में भी खर्च किया जाता है। फिलहाल मंदिर प्रशासन करीब 100 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इनमें मंदिर परिसर का विस्तार और सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं तथा आसपास के 16 गांवों में विकास कार्य शामिल हैं।

पांच बैंकों में हैं मंदिर के अकाउंट

मंदिर प्रशासन के अनुसार, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मंदिर के मंडफिया स्थित पांच बैंकों में खाते संचालित हैं। सत्संग भवन में दान की गिनती पूरी होने के बाद इन बैंकों के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर राशि का सत्यापन करते हैं, मंदिर बोर्ड को रसीद सौंपते हैं और पूरी रकम संबंधित बैंक खातों में जमा कर दी जाती है।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था श्रद्धालुओं के विश्वास और प्रशासन की जवाबदेही का प्रतीक है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि दान की गई प्रत्येक राशि का सही रिकॉर्ड रखा जाए और उसका उचित उपयोग हो। मंदिर के अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था भक्तों की आस्था और प्रशासन की जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता, दोनों को दिखाती है। इससे यह पक्का होता है कि हर दान का सही तरीके से रिकॉर्ड और मैनेजमेंट किया जाए।

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अब वैष्णो देवी जाना हुआ और आसान! सिर्फ 6 घंटे में दिल्ली से कटरा पहुंच जाएंगे भक्त, जानिए पूरी डिटेल्स

Delhi-Amritsar-Katra Expressway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (17 जुलाई) को दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद राजधानी दिल्ली से माता वैष्णो देवी (कटरा) तक सड़क यात्रा का समय करीब 14 घंटे से घटकर सिर्फ 6 घंटे रह जाएगा। जबकि दिल्ली से अमृतसर की यात्रा 8 घंटे से घटकर लगभग 4 घंटे में पूरी हो सकेगी। यह एक्सप्रेसवे 667 किलोमीटर लंबे दिल्ली-अमृतसर-कटरा कॉरिडोर का हिस्सा है। इसे लगभग 38,905 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, पीएम मोदी हरियाणा के जींद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 157.92 किलोमीटर लंबे चार-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (पैकेज 1 से 5) का लोकार्पण करेंगे। इस हिस्से का निर्माण लगभग 9,680 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इसके बाद प्रधानमंत्री पंजाब के जालंधर में 30.9 किलोमीटर लंबे पैकेज-6 का भी उद्घाटन करेंगे।

तेज यात्रा के साथ हाईवे पर घटेगा दबाव

पूरे कॉरिडोर के चालू होने के बाद दिल्ली से कटरा की यात्रा लगभग 6 घंटे और दिल्ली से अमृतसर की यात्रा करीब 4 घंटे में पूरी हो सकेगी। इससे मौजूदा एनएच-44 (जीटी रोड) पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस एक्सप्रेसवे से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। साथ ही पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। परियोजना से पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, प्रमुख इंटरचेंज के आसपास व्यावसायिक और रियल एस्टेट विकास को भी नई गति मिलेगी। साथ ही इससे उत्तर भारत में भी आर्थिक गतिविधियां और तेज होंगी।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च

पीएम मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की कैटेगरी में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें हैं। यह रेलवे क्षेत्र में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन दो घंटे में तय करेगी। इस दौरान यह 12 स्टेशनों पर रुकेगी।

प्रधानमंत्री ने जींद रेलवे स्टेशन से ट्रेन को रवाना करते समय हाथ हिलाकर अभिवादन किया। इस ट्रेन में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी सवार थे। यह ट्रेन पूरी तरह भारत में डिजाइन, विकसित और एकीकृत की गई है। इसका निर्माण स्वदेशी तकनीक से किया गया है, जो उन्नत रेलवे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

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आसमानी नीले और सफेद रंग की आकर्षक डिजाइन वाली यह ट्रेन ‘हाइड्रोजन फ्यूल सेल’ टेक्नोलॉजी से चलती है। इस तकनीक में हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित किया जाता है। इससे ट्रेन को चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है। भारत की इस हाइड्रोजन ट्रेन में 10 डिब्बे हैं, जिससे यह अब तक विकसित सबसे लंबी हाइड्रोजन चालित यात्री ट्रेनों में शामिल हो गई है।

अमरनाथ यात्रा 2026: क्या इस बार टूट जाएगा अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड?

amarnath yatra 2026

आतंकवादी हमले की आशंकाओं, मौसम की चुनौतियों और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई श्री अमरनाथ यात्रा 2026 अब रिकॉर्ड बनाने की ओर तेजी से बढ़ रही है। यात्रा शुरू होने के महज 15 दिनों के भीतर चार लाख से अधिक के आंकड़े को छूने वाली यात्रा में अभी श्रद्धालुओं के कदम थम नहीं रहे हैं। इस साल अभी तक बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके श्रद्धालुओं की संख्‍या पिछले दो दशकों में सबसे तेज गति से यह आंकड़ा पार करने वाला वर्ष बन गया है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो इस बार यात्रा समाप्त होने तक श्रद्धालुओं की कुल संख्या 2022 में बने लगभग 6.35 लाख श्रद्धालुओं के सर्वकालिक रिकार्ड को भी पीछे छोड़ सकती है। ALSO READ: क्या है अमरनाथ हिमलिंग के पिघलने का राज? क्या कहते हैं पर्यावरणविद

 

इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। यात्रा अवधि अपेक्षाकृत लंबी होने के साथ-साथ देशभर से पंजीकरण कराने वालों की संख्या भी काफी अधिक रही है। प्रशासन को सबसे बड़ी चुनौती बिना पंजीकरण और निर्धारित तिथि से पहले पहुंच रहे श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने की पड़ रही है। इसी कारण प्रशासन ने बार-बार अपील की है कि श्रद्धालु केवल अपनी निर्धारित तिथि पर ही यात्रा करें, क्योंकि प्रतिदिन यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की संख्या सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सीमित रखी गई है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद यात्रा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन इसके उलट श्रद्धालुओं का उत्साह पहले से अधिक दिखाई दे रहा है। पहले 15 दिनों में चार लाख के करीब श्रद्धालुओं के दर्शन इस बात का संकेत हैं कि श्रद्धालुओं का विश्वास और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था दोनों मजबूत साबित हुए हैं।

 

2022 में कोविड महामारी के बाद श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व आमद ने 6.35 लाख का नया रिकॉर्ड बनाया था। 2023 और 2024 में भी यात्रा में भारी भीड़ रही, हालांकि 2022 का आंकड़ा नहीं टूट पाया। इस वर्ष शुरुआती रुझान बताते हैं कि यदि प्रतिदिन 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं का औसत बना रहा और मौसम सामान्य रहा तो नया कीर्तिमान बन सकता है। ALSO READ: अमरनाथ यात्रा 2026: क्या बर्फ के शिवलिंग के साथ पार्वती और गणेश भी होते हैं प्रकट?

 

यात्रा की सफलता के पीछे सुरक्षा व्यवस्था भी बड़ी वजह मानी जा रही है। इस बार बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा, ड्रोन निगरानी, आरएफआईडी ट्रैकिंग, हाई-टेक कंट्रोल रूम, सीसीटीवी नेटवर्क और बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं, पोनी एंबुलेंस, हेलीकॉप्टर सहायता तथा आपदा प्रबंधन व्यवस्था को भी पहले से अधिक मजबूत किया गया है।
 

हालांकि चुनौतियां अभी भी कम नहीं हैं। जम्मू में समय से पहले पहुंचने वाले हजारों अपंजीकृत श्रद्धालुओं के कारण आवास, यातायात और पंजीकरण व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। प्रशासन लगातार अपील कर रहा है कि श्रद्धालु केवल वैध पंजीकरण और निर्धारित तिथि के अनुसार ही यात्रा करें, ताकि सभी को सुरक्षित ढंग से दर्शन का अवसर मिल सके।

 

कुल मिलाकर, अमरनाथ यात्रा 2026 केवल आस्था का नहीं बल्कि प्रबंधन, सुरक्षा और जनविश्वास की भी परीक्षा बन गई है। शुरुआती आंकड़े स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि यदि मौसम और सुरक्षा परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस वर्ष बाबा बर्फानी के दरबार में श्रद्धालुओं की संख्या नया इतिहास लिख सकती है।