Ram Mandir Chanda Chori Update: राम मंदिर दान घोटाले में बड़ा खुलासा! वॉशरूम में मिले ₹40,000 कैश से खुली करोड़ों की चोरी की परतें

Ram Mandir Chanda Chori Update: अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित हेराफेरी का मामला उस समय सामने आया, जब मंदिर परिसर के एक शौचालय में 40 हजार रुपये कैश छिपे मिले। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ की रिपोर्ट के अनुसार, एक सुरक्षा गार्ड की सतर्कता से हुई इस बरामदगी ने ऐसे संगठित गिरोह का खुलासा किया, जो पिछले कई महीनों से दान की रकम में कथित तौर पर सेंध लगा रहा था।

शौचालय में कैश मिलने के बाद मंदिर प्रशासन ने दान गिनने वाले रूम की सीसीटीवी फुटेज खंगाली। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि दान की गिनती में लगे कुछ कर्मचारी नोटों को अपने कपड़ों और शरीर में छिपा रहे थे। इसके बाद पूरे दान प्रबंधन तंत्र की जांच शुरू की गई।

ऐसे की जाती थी दान की रकम की चोरी

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी दान की गिनती के दौरान कैश निकालकर पहले उसे मंदिर परिसर के शौचालयों में छिपा देते थे। बाद में सुरक्षा कर्मियों और अन्य कर्मचारियों की नजर से बचते हुए उस रकम को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बाहर ले जाया जाता था। पुलिस का मानना है कि इसी तरीके से लंबे समय तक चोरी को अंजाम दिया जाता रहा।

SIT जांच में बड़ा खुलासा

शुरुआती जांच में मंदिर ट्रस्ट ने लगभग 80 लाख रुपये की बरामदगी दर्ज की। मामला तूल पकड़ने के बाद जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंप दी गई। अब तक दान की गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में नकदी, आभूषण और कथित तौर पर चोरी के पैसों से खरीदी गई एक गाड़ी भी बरामद की है। इसके अलावा आरोपियों और उनके परिजनों से जुड़े करीब 50 बैंक खातों की जांच कर धन के लेन-देन का पता लगाया जा रहा है।

कई महीनों से चल रही थी कथित हेराफेरी

जांच अधिकारियों का मानना है कि दान की रकम में यह कथित चोरी कई महीनों से जारी थी। हालांकि, मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आने वाले दान और रिकॉर्ड की सीमाओं के कारण यह तय कर पाना मुश्किल है कि कुल कितनी राशि का गबन हुआ। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अहम खुलासा तब हुआ जब एक सिक्योरिटी गार्ड को मंदिर परिसर के अंदर एक वॉशरूम में छिपे हुए ₹40,000 मिले। इस खोज से तुरंत शक पैदा हुआ, जिसके बाद मंदिर प्रशासन ने डोनेशन गिनने वाली जगह के CCTV फुटेज की जांच की। उन्हें जो मिला, वह छिपे हुए कैश के एक बंडल से कहीं ज़्यादा गंभीर मामला था।

दान व्यवस्था में मिलीं खामियां, ट्रस्ट ने बदली पूरी सिस्टम

SIT की जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपियों में से एक के पास दान पेटियों की चाबियों तक अनधिकृत पहुंच थी। इससे मंदिर की आंतरिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं। यह भी जांच की जा रही है कि क्या अन्य कर्मचारी या अधिकारी इस कथित गड़बड़ी से अनजान थे या उन्होंने इसे नजरअंदाज किया।

मामले के सामने आने के बाद ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने दान संग्रह और गिनती की पूरी व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं। अब दान की गिनती के दौरान सुरक्षा बढ़ा दी गई है, सीसीटीवी निगरानी को मजबूत किया गया है, सख्त मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं और नकदी प्रबंधन प्रणाली में बदलाव कर मानवीय हस्तक्षेप को कम करने की कोशिश की गई है। इन सुधारों का उद्देश्य लाखों श्रद्धालुओं का भरोसा दोबारा कायम करना है।

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3500 रुपये के इन्वेस्टमेंट से खड़ा कर लिया 1.5 करोड़ का मिलेट बिजनेस! नासिक के इंजीनियर तुषार ने किया कमाल

Business idea: जीवन में कभी-कभी बड़ी कठिनाइयों के दौरान ही बड़े अवसर क्रिएट करने का मौका मिलता है। ऐसा ही कुछ हुआ नासिक के एक मैकेनिकल इंजीनियरिंग ग्रैजुएट के साथ। भारत समेत पूरी दुनिया जब कोरोना की महामारी से जूझ रही थी तो उसी समय इस इंजीनियर ने एक शानदार बिजनेस की शुरुआत के लिए कदम बढ़ा दिया। ये कहानी है तुषार तलवारे की जिन्होंने कोरोना लॉकडाउन के दौरान महज 3500 रुपये के शुरुआती निवेश से अपने घर से मिलेट (बाजरा/मोटा अनाज) बेचने का एक छोटा सा प्रयोग शुरू किया था।

आज उनका यह स्टार्टअप फूडोनिक नाम के एक बड़े ब्रांड में बदल चुका है। इसका सालाना रेवेन्यू 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह कंपनी आज पूरे भारत में मिलेट खाखरा, आटा, पास्ता, नूडल्स और कई तरह के हेल्दी स्नैक्स बेच रही है।

कॉलेज के रूममेट और IIT बॉम्बे के सेमिनार से मिला आइडिया

तुषार की इस एंटरप्रेन्योरशिप जर्नी की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही। 30Stades के साथ एक इंटरव्यू में तुषार ने बताया कि जब वह नवी मुंबई में पढ़ाई कर रहे थे तब उनके एक कॉलेज रूममेट ने उन्हें उनकी फिटनेस और वेलनेस के प्रति रुचि को देखते हुए हेल्दी फूड सेक्टर में करियर तलाशने की सलाह दी थी।

तुषार की यह रुचि तब एक ठोस बिजनेस आइडिया में बदल गई जब उन्होंने पवई स्थित IIT बॉम्बे में प्रसिद्ध मिलेट रिसर्चर डॉ खादर वली के एक सेमिनार में हिस्सा लिया। इस सेशन से उन्हें मिलेट्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू का पता चला और उन्होंने महसूस किया कि उस समय बाजार में मिलेट-आधारित प्रोडक्ट्स बहुत ही कम उपलब्ध थे।

इस सेक्टर को बेहतर ढंग से समझने के लिए तुषार ने कई दूसरे सेमिनार्स में हिस्सा लिया और मिलेट की खेती, इसके स्वास्थ्य लाभ व सप्लाई चेन को समझने के लिए ऑनलाइन कोर्सेज भी पूरे किए।

₹3500 का पहला ऑर्डर और लॉकडाउन में डिलीवरी की चुनौती

बड़ा निवेश करने के बजाय तुषार ने पहले इस आइडिया को छोटे स्तर पर टेस्ट करने का फैसला किया। साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान नासिक में अपने घर पर रहते हुए तुषार ने मात्र 3500 रुपये निवेश किए। उन्होंने डॉ खादर वली के नेटवर्क के जरिए तमिलनाडु के एक किसान से 5 अलग-अलग किस्मों के 5-5 किलो मिलेट्स खरीदे।

परिवार, दोस्तों और शुरुआती ग्राहकों से मिले सकारात्मक फीडबैक से उत्साहित होकर उन्होंने अपने अगले ऑर्डर को बढ़ाकर हर किस्म का 20-20 किलो कर दिया। लॉकडाउन के कारण जब लॉजिस्टिक्स सेवाएं पूरी तरह प्रभावित थीं तब तुषार ने ऑर्डर हासिल करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप्स और लोगों की सिफारिशों का सहारा लिया। उस समय सिर्फ इंडिया पोस्ट की सेवाएं चालू थीं, इसलिए वे घर पर ही अपने हाथों से एक-एक किलो के पाउच पैक करते थे और डाक के जरिए पूरे देश में ग्राहकों को भेजते थे।

किफायती कीमत की वो रणनीति जो कर गई काम

मार्केट रिसर्च के दौरान तुषार ने देखा कि कई विक्रेता 5 किलो मिलेट्स के लिए करीब 1200 रुपये तक चार्ज कर रहे थे। चूंकि उनकी खरीद लागत काफी कम थी, इसलिए उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स की कीमत को किफायती रखने का फैसला किया। तुषार बताते हैं कि उतनी ही मात्रा के लिए उनकी खरीद लागत सिर्फ 400 रुपये के आसपास थी।

इसलिए उन्हें अपने पैक्स की कीमत पोस्टल चार्ज और प्रॉफिट मार्जिन मिलाकर 700 रुपये रखी। इससे ग्राहकों को काफी किफायती दाम में हेल्दी फूड मिलने लगा और तुषार को भी एक बेहतर मार्जिन मिला। यह प्राइसिंग स्ट्रेटजी पूरी तरह सफल रही और देश के अलग अलग हिस्सों से ताबड़तोड़ ऑर्डर आने शुरू हो गए।

₹1.5 लाख से ₹1.5 करोड़ तक का सफर

जैसे-जैसे मांग बढ़ी तुषार ने नासिक में ही 2000 रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया और अपने काम को वहां शिफ्ट कर दिया। रेडी-टू-ईट मिलेट प्रोडक्ट्स की मांग को देखते हुए उन्होंने कांट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के साथ पार्टनरशिप की और आटा, पास्ता व नूडल्स जैसे प्रोडक्ट तैयार करवाने लगे जबकि उनका खुद का ध्यान ब्रांडिंग, सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन पर रहा।

कंपनी ने भी फिर रफ्तार पकड़ी। साल 2020 में 1.5 लाख का टर्नओवर, साल 2021 में 12 लाख के टर्नओवर में बदल गया। साल 2023 में उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में मिलेट चिवड़ा, फ्लेक्स और दूसरे स्नैक्स शामिल किए।

कारोबार के विस्तार के साथ तुषार को केंद्र सरकार की PMFME योजना (PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises Scheme) के तहत 10 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। इस मदद से उन्होंने 15 अलग-अलग वैरायटी के मिलेट खाखरा बनाने के लिए अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की।

हीरो हैं ये 8 महिलाएं: बिना किसी केमिकल के तैयार होता है खाखरा

फैक्ट्री स्थापित करना तो केवल शुरुआत थी, मिलेट खाखरा को बड़े पैमाने पर बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। शुरुआत में आटा मशीनों से चिपक जाता था और सही खाखरा नहीं बन पाता था। फूड कंसल्टेंट्स ने इसमें बाइंडर्स और एडिटिव्स मिलाने की सलाह दी लेकिन तुषार इसे 100% नेचुरल रखना चाहते थे।

महीनों की कड़ी मेहनत और 2000 किलो से अधिक मिलेट आटा इस्तेमाल करने के बाद उनकी टीम ने परफेक्ट रेसिपी तैयार की। ये खाखरे बिना किसी प्रिजर्वेटिव, एडिटिव्स या सिंथेटिक बाइंडर्स के बनाए जाते हैं और स्वाद को बरकरार रखने के लिए कंपनी अपने खुद के मसालों का मिश्रण तैयार करती है।

वर्तमान में नासिक स्थित Fudonik की इस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को 8 महिलाएं संभाल रही हैं। बाजार में खाखरा लॉन्च करने से पहले कंपनी ने 6 महीने तक ग्राहकों का फीडबैक लिया और लैबोरेटरी टेस्ट भी पूरे किए।

भविष्य की योजनाएं

आज यह कंपनी इन-हाउस खाखरा और चिवड़ा बनाती है जिसके पास 2500 से अधिक रिटेल ग्राहक हैं और यह अपने B2B बिजनेस का भी तेजी से विस्तार कर रही है। अपनी आगे की योजनाओं को लेकर तुषार बताते हैं कि वे अगले साल मिलेट कुकीज भी लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं।

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Disclaimer: यह रिपोर्ट पूरी तरह से थर्ड पार्टी मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट पर आधारित है। मनीकंट्रोल ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही वह इनका समर्थन करता है।

TRAI का Data Service से जुड़ा नया अलर्ट, कीपैड फोन यूजर्स को भेजे नए मैसेज में क्या है

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की ओर से देशभर के कई कीपैड (Feature Phone) मोबाइल यूजर्स को एक नया संदेश भेजा गया है। इस संदेश में बताया गया है कि अब ग्राहक 1925 नंबर पर कॉल करके या SMS भेजकर अपनी मोबाइल डेटा सेवा (Data Services) को सक्रिय (Activate) या बंद (Deactivate) कर सकते हैं।

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TRAI द्वारा भेजे गए संदेश में लिखा है:

“Dear customer, you can now call on 1925 or SMS or to 1925, if you wish to activate or deactivate your data services.”

 

क्या है नई सुविधा?

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नई व्यवस्था के तहत यदि किसी ग्राहक को अपने मोबाइल नंबर पर इंटरनेट सेवा चालू करनी है, तो वह 

1925 पर कॉल कर सकता है, या START लिखकर 1925 पर SMS भेज सकता है। वहीं, यदि ग्राहक डेटा सेवा बंद करना चाहता है, तो 1925 पर कॉल कर सकता है, या STOP लिखकर 1925 पर SMS भेज सकता है।

 

किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?

यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जा रही है जो कीपैड (Feature Phone) का इस्तेमाल करते हैं। मोबाइल डेटा का उपयोग नहीं करना चाहते। बच्चों या बुजुर्गों के फोन में इंटरनेट बंद रखना चाहते हैं।

अनचाहे डेटा उपयोग और अतिरिक्त खर्च से बचना चाहते हैं।

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क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

 

पिछले कुछ समय से मोबाइल डेटा के अनजाने में चालू हो जाने, डेटा बैलेंस कटने और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती रही है। ऐसे में एक आसान कॉल या SMS के जरिए डेटा सेवा को नियंत्रित करने की सुविधा उपभोक्ताओं को अधिक नियंत्रण देती है। इसके अलावा, जिन उपभोक्ताओं को केवल कॉल और SMS की आवश्यकता होती है, वे इंटरनेट सेवा बंद रखकर अनावश्यक डेटा उपयोग से बच सकते हैं।

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क्या स्मार्टफोन यूजर्स भी कर सकते हैं इस्तेमाल?

 

TRAI के संदेश में यह सुविधा सामान्य रूप से ग्राहकों के लिए बताई गई है। हालांकि, इसका सबसे अधिक लाभ फीचर फोन या कीपैड मोबाइल उपयोगकर्ताओं को होगा, जहां डेटा सेटिंग्स को बदलना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है। यदि आपके टेलीकॉम ऑपरेटर ने यह सुविधा लागू की है, तो आप भी 1925 नंबर के माध्यम से इसका उपयोग कर सकते हैं।

TTD : राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच तिरुपति में दान का नया रिकॉर्ड, 1 दिन में आए 96.98 करोड़ रुपए, आखिर क्यों उमड़े लाखों श्रद्धालु

अभी अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान (चढ़ावे और चंदे) में हेराफेरी का मामले में गिरफ्तारी और जांच का मामला गर्माया हुआ है। इस बीच तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को नई डोनर (दाता) नीति लागू होने से ठीक एक दिन पहले रिकॉर्ड 96.98 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ। मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने नए नियम लागू होने से पहले विभिन्न ट्रस्टों में दान दिया, जिसके चलते एक ही दिन में दान का नया रिकॉर्ड बन गया।

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TTD के अनुसार, मंगलवार को कुल 2,460 श्रद्धालुओं ने दान किया। इनमें 2,354 लोगों ने ऑनलाइन और 106 लोगों ने ऑफलाइन योगदान दिया।

किसने कितना किया दान?

TTD के आंकड़ों के अनुसार-

 

  • 1,212 श्रद्धालुओं ने 1 लाख से 10 लाख रुपये के बीच दान दिया।
  • 1,246 श्रद्धालुओं ने 10 लाख से 25 लाख रुपये तक का योगदान किया।
  • वहीं दो श्रद्धालुओं ने 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक का दान दिया।
  • क्यों बढ़ा दान का आंकड़ा?

 

TTD बोर्ड ने हाल ही में नई डोनर पॉलिसी को मंजूरी दी है। इसके तहत भविष्य में दान देने वाले श्रद्धालुओं को मिलने वाली कुछ विशेष सुविधाओं (Donor Privileges) में बदलाव किया गया है। यह नई नीति मंगलवार आधी रात से लागू हो गई। TTD का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की सुविधा बेहतर बनाना और दानदाताओं के प्रबंधन में पारदर्शिता एवं समानता सुनिश्चित करना है।

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पुराने दानदाताओं पर नहीं पड़ेगा असर

TTD के अध्यक्ष बी.आर. नायडू ने स्पष्ट किया कि नई नीति केवल भविष्य में किए जाने वाले दान पर लागू होगी। पहले से पंजीकृत दानदाताओं और संस्थानों को पहले की तरह सभी सुविधाएं मिलती रहेंगी। उन्होंने बताया कि 26 जून तक TTD के विभिन्न ट्रस्टों और योजनाओं में 1,97,888 पंजीकृत दानदाता थे। लगभग 1.50 लाख दानदाताओं ने 1 लाख रुपए का योगदान दिया है।

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22,000 से अधिक दानदाताओं ने 10 लाख रुपए या उससे अधिक दान किया है। पिछले चार महीनों में 10 लाख रुपये दान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 3,000 की बढ़ोतरी हुई है। आम श्रद्धालुओं को मिलेगा फायदा TTD  के मुताबिक  संशोधित डोनर पॉलिसी के तहत कुछ विशेष सुविधाओं में कटौती की गई है, ताकि आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की उपलब्धता बढ़ाई जा सके और मंदिर व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाया जा सके।

Jagannath Rath Yatra: पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगदड़ जैसे हालात, 200 श्रद्धालु अस्पताल पहुंचे, एक की मौत की भी खबर

Jagannath Rath Yatra in Puri: ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान गुरुवार (16 जुलाई) को भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में करीब 200 श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें इलाज के लिए पुरी मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भारी भीड़ की वजह से करीब 200 श्रद्धालुओं को सांस लेने में दिक्कत हुई। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, अब उनका इलाज पुरी मेडिकल अस्पताल में चल रहा है।

Odisha TV की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘बड़ा डंडा’ पर रथ खिंचते हुए देखने का इंतजार कर रहे एक श्रद्धालु की दम घुटने से मौत हो गई। जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की आशंका है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रथ खींचने के दौरान बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। भीड़ के दबाव और उमस के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु अस्वस्थ हो गए, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह घटना ‘पहांडी’ रस्म के दौरान बाहरी सुरक्षा घेरे से करीब 500 मीटर की दूरी पर हुई। भारी भीड़ के कारण अफरातफरी मच गई, जिसमें 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग श्रद्धालु शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया और स्थिति को संभालने के लिए बचाव दलों को तैनात किया गया।

एक श्रद्धालु की मौत होने की भी खबर

सूत्रों ने बताया कि इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दम घुटने से एक श्रद्धालु की मौत होने की भी खबर है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। एंबुलेंस की मदद से प्रभावित श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा में हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार भी रथ खींचने के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, जिसके चलते भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भगदड़ जैसी स्थिति किन कारणों से पैदा हुई।

‘पहंडी’ अनुष्ठान संपन्न

ओडिशा के पुरी में नौ दिनों तक चलने वाली वार्षिक रथ यात्रा की शुरुआत लागातार बारिश और लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में ‘पहंडी’ की रस्म के साथ हुई। ‘पहंडी’ की रस्म में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के विग्रहों को 12वीं सदी के पुरी मंदिर से रथों तक ले जाया जाता है।

घंटियों, शंख और झांझ की ध्वनि के बीच, चक्रराज सुदर्शन को सबसे पहले मुख्य मंदिर से बाहर लाया गया और देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर विराजमान किया गया। पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि श्री सुदर्शन भगवान विष्णु का अस्त्र है, जिनकी पूजा पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में की जाती है।

उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई भगवान बलभद्र के विग्रह को भी उनके ‘तालध्वज’ रथ पर स्थापित किया गया। सेवादारों द्वारा ‘शून्य पहंडी’ (रथ तक ले जाते समय देवी सुभद्रा के विग्रह का मुख आकाश की ओर होता है) शैली में भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र की बहन देवी सुभद्रा के विग्रह को उनके रथ तक ले लाया गया।

अंत में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के विग्रह को मंदिर से बाहर लाया गया, तो ‘बड़ा डंडा’ (रथमार्ग) पर भक्तों की भावनाएं उमड़ पड़ीं। उन्होंने अपने हाथ उठाकर और ‘जय जगन्नाथ’ का जयघोष कर महाप्रभु के रथ पर विराजमान होने का जश्न मनाया। ओडिसी नर्तकों, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों ने ‘कालिया ठाकुर’ के सामने प्रस्तुति दी।

‘पहंडी’ अनुष्ठान में तीनों देव विग्रहों को एक औपचारिक जुलूस के साथ उनके संबंधित रथों तक लाया जाता है। ये रथ मंदिर के ‘सिंह द्वार’ के सामने खड़े किए जाते हैं, ताकि उन्हें श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जा सके। इस 12वीं सदी के मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर स्थित श्री गुंडिचा मंदिर को इन देवी-देवताओं का जन्मस्थान माना जाता है।

बारिश के बीच भारी भीड़

पुरी में हो रही भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। वे ‘बड़ा डंडा’ पर नृत्य करते और रथ यात्रा का जश्न मनाते हुए देखे गए। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक अधिकारी के अनुसार, पुरी में पिछले 48 घंटों में 233 मिमी बारिश हुई है। समुद्र के किनारे बसे इस शहर में दिन के दौरान हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

इससे पहले दिन में, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तैयारियों का जायजा लिया और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा पर ज़ोर दिया। बारिश की वजह से जल-जमाव एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा, इसलिए उन्होंने पुरी जिला प्रशासन, नगरपालिका अधिकारियों और संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने और पानी निकालने के लिए तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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रथयात्रा विशेष : जब नरेन्द्र मोदी ने बदल दिया था अहमदाबाद रथयात्रा का इतिहास, आज भी निभाते हैं यह नियम

Narendra Modi Ahmedabad Rathyatra: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूं ही सबसे अलग नहीं हैं। 12 साल से अधिक समय तक वे गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पीएम मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद भी भगवान जगन्नाथ के लिए शुरू की गई परंपरा को निभा रहे हैं। उन्होंने 149वीं रथयात्रा से पहले ही भगवान जगन्नाथ को विशेष प्रसाद भिजवा दिया था।

 

मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बनने के बावजूद, नरेंद्र मोदी भगवान जगन्नाथ से अटूट रूप से जुड़े हुए हैं। अपने अत्यंत व्यस्त कार्यक्रम के बीच भी पीएम मोदी हर साल की तरह इस साल भी भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथयात्रा से पहले दिल्ली से विशेष प्रसाद भेजना नहीं भूले हैं। इस विशेष प्रसाद में मौसम के अनुसार मूंग, जामुन, आम और सूखे खजूर सहित अन्य फलों को शामिल किया गया है, जिसे एक आकर्षक बॉक्स में पैक करके जमालपुर जगन्नाथ मंदिर भेजा गया है।

मुख्यमंत्री के रूप में शुरू की गई परंपरा आज भी बरकरार

पीएम मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने रथयात्रा के एक दिन पहले मंदिर में विशेष नैवेद्य भेजने की यह सुंदर परंपरा शुरू की थी। देश के प्रधानमंत्री बनने और दिल्ली शिफ्ट होने के बाद भी इस नियम में कभी कोई बाधा नहीं आई है। 12 साल और 7 महीने तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अहमदाबाद की इस रथयात्रा को एक नई भव्यता प्रदान की थी।

सबसे अधिक बार 'पहिंद विधि' करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

गुजरात की परंपरा के अनुसार, रथयात्रा में सोने की झाड़ू से रथ का मार्ग साफ करने की 'पहिंद विधि' राज्य के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा की जाती है। नरेंद्र मोदी के नाम गुजरात में सबसे अधिक 13 बार यह पवित्र पहिंद विधि करने का अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। वे न केवल यह विधि करते थे, बल्कि जमालपुर के 400 वर्ष पुराने मंदिर के प्रांगण से खुद रथ खींचकर यात्रा का प्रस्थान भी करवाते थे।

हिंसा के साये से मुक्ति और हाई-टेक सुरक्षा

वर्ष 2001 से पहले अहमदाबाद की रथयात्रा पर अक्सर सांप्रदायिक तनाव या हिंसा का ग्रहण लग जाता था। लेकिन नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने कड़े प्रशासनिक नियंत्रण में इस यात्रा को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और सुरक्षित बना दिया। यात्रा के मार्ग पर जीपीएस ट्रैकिंग, सीसीटीवी कैमरे और हाई-टेक कंट्रोल रूम जैसी आधुनिक तकनीक पेश करने वाले वे पहले नेता थे, जिसके कारण लाखों श्रद्धालु बिना किसी डर के इस उत्सव में शामिल हो सके।

अहमदाबाद की रथयात्रा को दिलाई वैश्विक पहचान

पीएम मोदी ने ओडिशा की जगन्नाथ पुरी रथयात्रा की तरह ही अहमदाबाद की रथयात्रा को भी देश की दूसरी सबसे बड़ी और भव्य रथयात्रा के रूप में वैश्विक पटल पर पहचान दिलाई है। उनके ही शासनकाल के दौरान देश भर से आने वाले हजारों साधु-संतों और अखाड़ों के लिए विशेष सरकारी समन्वय और बेहतर नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था शुरू की गई थी। इस वर्ष भी सुरक्षा के लिए 30,000 से अधिक पुलिस जवान तैनात हैं और मुख्यमंत्री व डीजीपी खुद इसका निरीक्षण कर रहे हैं।

रथयात्रा के पावन पर्व पर पीएम मोदी का विशेष संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शुभ अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इस यात्रा को भारत की सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक गौरवशाली प्रतीक बताया है। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों को प्रेरित करती है और यह विनम्रता, सामूहिक भागीदारी व सेवा भाव का प्रतीक है। इसके साथ ही उन्होंने महाप्रभु जगन्नाथ से सभी के अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि के लिए प्रार्थना की है।

Devshayani Ekadashi Vrat 2026: देवशयनी एकादशी व्रत 24 या 25 जुलाई 2026 कब किया जाएगा? जानें तारीख, पूजा विधि और मुहूर्त

Devshayani Ekadashi Vrat 2026: देवशनी एकादशी का व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के आनुसार, इस दिन से सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चाह माह की योगनिद्र में पाताल लोक चले जाते हैं और चतुर्मास आरंभ हो जाता है। इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश आदि शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। श्री हरि सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी तक योग निद्रा में लीन रहते हैं। इस दौरान सृष्टि का कामकाज भगवान शिव के पास रहता है।

हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष स्थान है। इसे साल की कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी तिथियों में से एक माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन को बड़ी श्रद्धा और विधि-विधान से मनाते हैं। आइए जानें इस साल देव शयनी एकादशी तिथि का व्रत किस दिन किया जाएगा।

कब है हरिशयनी एकादशी?

साल 2026 में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी या हरिशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026, शनिवार को किया जाएगा। चूंकि उदयातिथि 25 जुलाई को मिल रही है, इसलिए वैष्णव और सामान्य श्रद्धालु दोनों ही इस दिन व्रत रखेंगे। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होगी और अगले 4 महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे।

देवशयनी एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है :

एकादशी तिथि प्रारंभ : 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार व्रत की तारीख : 25 जुलाई 2026 (शनिवार)

अभिजीत मुहूर्त (पूजा के लिए श्रेष्ठ): दोपहर 12:19 PM से 01:11 PM तक

व्रत पारण का समय : 26 जुलाई 2026 (रविवार) को सुबह 05:39 AM से 08:22 AM के बीच।

देवशयनी एकादशी 2026 पूजा विधि

देवशयनी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु योग निद्रा में जाते हैं। इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है :

सुबह की तैयारी : एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।

व्रत का संकल्प : मंदिर के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थापना : भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।

सामग्री अर्पित करें : भगवान को पीले फूल, पीला चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

तुलसी दल : भगवान विष्णु को तुलसी दल अत्यंत प्रिय हैं, उन्हें भोग में तुलसी जरूर शामिल करें। लेकिन ध्यान रखें, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते, इसलिए इन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

मंत्र और कथा : भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें और देवशयनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।

शयन कराना : पूजा के अंत में भगवान विष्णु को एक सुंदर छोटे गद्दे और तकिये वाले बिस्तर पर प्रतीकात्मक रूप से सुलाया जाता है यानी योग निद्रा में भेजा जाता है।

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भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका:रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई की तैयारी; संसद में बिल पेश, 5 देश निशाने पर

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी सीनेट में एक बिल पेश किया गया है, जिसमें भारत, चीन समेत पांच देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। इनके अलावा हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान शामिल हैं। बिल के मुताबिक, इन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकेगा। साथ ही रूस की ऊर्जा, वित्तीय और रक्षा व्यवस्था पर भी नए प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। इससे पहले बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए टैरिफ लगाएगा, क्योंकि वह रूस से तेल खरीदकर उसकी कमाई बढ़ा रहा है। इस कदम का मकसद रूस के तेल कारोबार पर आर्थिक दबाव बनाना और उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर करना है। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, ओलिगार्क्स, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। रूस पर सख्ती वाले बिल को दोनों दलों का समर्थन सीनेट में पेश रूस-विरोधी टैरिफ बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिला है। इसे अमेरिकी राजनीति में ‘बाइपार्टिसन बिल’ कहा जाता है, यानी ऐसा प्रस्ताव जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सहमत हों। आमतौर पर अमेरिका में कई बड़े विधेयक राजनीतिक मतभेदों की वजह से अटक जाते हैं। लेकिन जब दोनों दल किसी बिल के साथ खड़े होते हैं, तो उसके कांग्रेस से पारित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, बिल को कानून बनने के लिए अभी सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) दोनों से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर ही यह कानून बनेगा। बिल को दिवंगत सांसद लिंडसे ग्राहम ने पेश किया था इस बिल को सबसे पहले रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अप्रैल 2025 में पेश किया था। अब तक 26 सीनेटर इस बिल को अपना समर्थन दे चुके हैं और आगे समर्थन बढ़ने की उम्मीद है। 11 जुलाई को लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया था। निधन से एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेन दौरे के दौरान कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बिल को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। ट्रम्प ने भी व्हाइट हाउस में कहा, “यह लिंडसे के सम्मान में है। यह उनका सबसे बड़ा मुद्दा था और इसके कानून बनने की अच्छी संभावना है।” कैपिटल हिल में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के सीनेटर एक साथ नजर आए। उन्होंने इस बिल को ग्राहम के लिए श्रद्धांजलि बताया।

Jagannath Rath Yatra 2026: 16 जुलाई को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और हैदराबाद में भी निकलेगी जगन्नाथ की सवारी, जानें ये शहर कैसे मनाएंगे जगन्नाथ रथयात्रा

Jagannath Rath Yatra 2026: भारत में ओडिश राज्य के पुरी शहर में हर साल भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। इसे देखने के लिए पूरी दुनिया से श्रद्धालु जुटते हैं, तीनों लोकों के नाथ की विशाल शोभायात्रा का आनंद लेते हैं। साल 2026 में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई 2026, गुरुवार से होगी। यह पावन पर्व 24 जुलाई 2026 तक चलेगा, जिस दिन बहुड़ा यात्रा यानी वापसी यात्रा के साथ इसका समापन होगा।

पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा के तर्ज पर देश कई शहरों में भी इसी समय या इसके आसपास भव्य आयोजन किए जाते हैं। हर बार की तरह इस साल भी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और हैदराबाद में जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं और अब इन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस दौरान, रथयात्रा के अलावा श्रद्धालुओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सामुहिक भोज भी आयोजित किए जाते हैं।

दिल्ली का त्यागराज जगन्नाथ मंदिर 59वीं रथयात्रा निकालेगा

दिल्ली में सबसे बड़ी रथयात्रा त्यागराज जगन्नाथ मंदिर की ओर से निकाली जाती है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जगन्नाथ रथयात्रा का 59वां संस्करण 16 जुलाई से 27 जुलाई तक चलेगा। इस त्योहार का मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का खूबसूरती से सजे हुए रथों पर जुलूस होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार देवताओं के लिए तीन अलग-अलग रथों पर शोभायात्रा निकालने की तैयारी है।

इस्कॉन और हौज खास मंदिर में खास जश्न होंगे

ईस्ट ऑफ कैलाश में इस्कॉन मंदिर खास दर्शन, भजन, कीर्तन, आध्यात्मिक प्रवचन और एक रथ यात्रा का आयोजन करेगा। इस बीच, दिल्ली के ओडिया समुदाय द्वारा बनाया गया हौज खास का ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर भी अपनी सालाना रथ यात्रा आयोजित करेगा।

न्यू लिंक रोड से मुंबई में शुरू होगी रथयात्रा

मुंबई में 16 जुलाई को सालाना जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए हजारों की संख्या में भक्तों के इकट्ठा होने की उम्मीद है। यह रथयात्रा अंधेरी वेस्ट में न्यू लिंक रोड से शुरू होगी और इस्कॉन जुहू तक जाएगी।

हैदराबाद में 47वीं सालाना इस्कॉन रथयात्रा होगी

इस्कॉन एबिड्स की हैदराबाद ब्रांच 16 जुलाई को 47वीं सालाना श्री जगन्नाथ रथयात्रा आयोजित करेगी। 1979 से हर साल मनाए जाने वाले इस उत्सव में एक लाख से ज्यादा भक्तों के आने की उम्मीद है। रथ यात्रा सुबह 11 बजे एनटीआर स्टेडियम से शुरू होगी और आरटीसीएक्स रोड्स, हिमायत नगर, लिबर्टी, बशीरबाग, एबिड्स, MJ मार्केट और गांधी भवन मेट्रो स्टेशन से होते हुए 8 km का रास्ता तय करेगी, और शाम करीब 6 बजे एग्जीबिशन ग्राउंड पर खत्म होगी।

इस्कॉन बेंगलुरु अपने सभी केंद्रों पर रथ यात्रा निकालेगा

बेंगलुरु में श्रील प्रभुपाद के इस्कॉन ने घोषणा की है कि वह श्री जगन्नाथ मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन (SJTA), पुरी द्वारा तय नौ दिन के त्योहार के दौरान, धार्मिक परंपराओं के अनुसार, अपने सभी सेंटर्स पर जगन्नाथ रथ यात्रा मनाएगा। इस उत्सव में रथयात्रा, भक्ति कार्यक्रम, भजन, कीर्तन और प्रसाद वितरण शामिल होगा।

आस्था और संस्कृति का उत्सव

रथ यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण रीति-रिवाजों में से एक भगवान जगन्नाथ का रथ खींचना है। भक्तों का मानना है कि इस परंपरा में हिस्सा लेने से आशीर्वाद, समृद्धि और आध्यात्मिक पुण्य मिलता है। यह उत्सव “जय जगन्नाथ” के नारों, भक्ति संगीत, ढोल और रथों के साथ नाच-गाने से भरा होता है।

Ashadha Gupt Navratri 2026: आज से शुरू हो रही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त और गृहस्थों के लिए सरल पूजा विधि

Ashadha Gupt Navratri 2026: आज से शुरू हो रही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त और गृहस्थों के लिए सरल पूजा विधि

Ashadha Gupt Navratri 2026: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि हिंदू धर्म में मनाई जाने वाली दो गुप्त नवरात्रियों में से एक है। दूसरी गुप्त नवरात्रि माघ महीने में आती है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मनाई जाती है। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ-साथ 10 महाविद्याओं, मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, और कमला देवी की विशेष आराधना की जाती है।

मान्यता है कि इस दौरान की जाने वाली गुप्त साधनाएं बहुत जल्दी फलदायी होती हैं और साधक को विशेष सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इसमें सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति के लिए पूजा की जाती है। ये 9 दिन साधना, मंत्र जाप, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक सिद्धियों की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026, बुधवार से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 तक मनाई जाएगी।

घटस्थापना मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगी और प्रतिपदा तिथि का समापन 15 जुलाई 2026 को सुबह 08 बजकर 20 मिनट पर होगा। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 03 मिनट से सुबह 08 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। कलश स्थापना के मुहूर्त की कुल अवधि 2 घंटे 17 मिनट है।

कलश स्थापना विधि

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में घटस्थापना के लिए पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और गंगाजल से छिड़काव करें। इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं और मां दुर्गा के दस महाविद्याओं की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मिट्टी या तांबे के कलश में साफ जल भरकर आम के पत्ते और उसके ऊपर नारियल रखें। मां दुर्गा का ध्यान लगाएं। कलश स्थापना के बाद अखंड दीप लगाएं। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में मां दुर्गा की आरती करें और पूजा के दौरान हुई भूलचूक के लिए क्षमा मांगे।

गुप्त नवरात्रि में गृहस्थ श्रद्धालु इस विधि से करें पूजा 

गुप्त नवरात्रि केवल तांत्रिक साधना तक सीमित नहीं है। गृहस्थ श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं। इसके लिए प्रातः स्नान कर घर के ईशान कोण को साफ कर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद एक पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ बो दें। मिट्टी या तांबे के कलश में अक्षत, सुपारी, जल और सिक्का डाल दें। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगा दें और ऊपर नारियल रखकर स्थापित करें। फिर दीपक जलाकर देवी को लाल पुष्प, रोली, अक्षत, चुनरी, फल तथा नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा, अर्गला स्तोत्र, कवच या देवी के बीज मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है। अगर संभव हो तो नौ दिनों तक सात्विक भोजन करें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और क्रोध, असत्य तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

Bhaumvati Amavasya 2026: आज भौमवती अमावस्या पर जरूर सुनें ये पौराणिक कथा, इसके बिना अधूरे हैं आपकी पूजा और व्रत