Nirmal Purja: कौन थे निर्मल पुर्जा…जिनकी PoK में हुई मौत! 6 महीने में दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह कर रचा था इतिहास

नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा, जिन्हें लोग ‘निम्सदाई’ के नाम से भी जानते थे, की पाकिस्तान में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन (बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरना) की चपेट में आने से मौत हो गई। इसकी जानकारी उनकी एडवेंचर कंपनी और अन्य लोगों ने इंस्टाग्राम पर साझा की।

शुक्रवार को ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन होने के बाद निर्मल पुर्जा और पांच अन्य पर्वतारोही लापता हो गए थे। इसके बाद लगातार उनकी तलाश की जा रही थी। इस दुखद हादसे से कुछ घंटे पहले निर्मल पुर्जा ने भारत के पत्रकार विष्णु सोम को एक वॉयस मैसेज भी भेजा था। माना जा रहा है कि यह उनका आखिरी संदेश था।

कंपनी ने पोस्ट कर दी जानकारी 

निर्मल पुर्जा की एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपेड ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट जारी कर उनकी मौत की पुष्टि की। कंपनी ने कहा कि ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन के बाद निर्मल पुर्जा का निधन हो गया। साथ ही अभियान में शामिल अन्य सदस्य भी इस हादसे में जीवित नहीं बच सके। कंपनी ने अपने संदेश में कहा कि यह सभी के लिए बेहद दुखद क्षण है। उन्होंने केवल निर्मल पुर्जा ही नहीं, बल्कि इस हादसे में जान गंवाने वाले उनके साथी पर्वतारोहियों और गाइड पुर बहादुर गुरुंग और निमा शेरपा को भी श्रद्धांजलि दी।कंपनी ने कहा कि उनकी संवेदनाएं सभी मृतकों के परिवार, दोस्तों और करीबियों के साथ हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस कठिन समय में परिवारों की निजता का सम्मान किया जाए।

ब्रॉड पीक में हुई मौत

ब्रॉड पीक काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है। यह पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान और चीन के शिनजियांग क्षेत्र की सीमा के पास स्थित है। यह चोटी के2 पर्वत के बेहद करीब है। रिपोर्ट के अनुसार, हिमस्खलन ब्रॉड पीक के सामान्य वेस्ट रिज मार्ग पर हुआ। उस समय पर्वतारोही करीब 21,600 से 21,850 फीट की ऊंचाई पर मौजूद थे, जहां अचानक बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया।

निर्मल पुर्जा की एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपेड ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि दुनिया ने पर्वतारोहण के सबसे महान पर्वतारोहियों में से एक को खो दिया है। कंपनी के अनुसार, निर्मल पुर्जा अपने साहस, विनम्र स्वभाव और मजबूत इरादों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने अपने काम और उपलब्धियों से दुनिया भर के लाखों लोगों को बड़े सपने देखने और खुद पर भरोसा रखने की प्रेरणा दी। कंपनी ने कहा कि निर्मल पुर्जा का मानना था कि इंसान अपनी सोच से कहीं ज्यादा बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। यही सोच उन्होंने अपने जीवन और अभियानों के जरिए लोगों तक पहुंचाई और अनगिनत लोगों को अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए प्रेरित किया।

पोस्ट में यह भी कहा गया कि एलीट एक्सपेड, निम्सदाई फाउंडेशन, स्काईडाइव निम्सदाई और निम्सदाई स्टोर जैसी संस्थाओं को आगे बढ़ाने में उनकी दूरदृष्टि, नेतृत्व और मजबूत संकल्प की सबसे बड़ी भूमिका रही। कंपनी ने कहा कि निर्मल पुर्जा की विरासत हमेशा उन लोगों के जरिए जीवित रहेगी, जिनकी जिंदगी उन्होंने बदली और जिन्हें अपने सपनों को पूरा करने का हौसला दिया।

रचा था ये इतिहास

निर्मल पुर्जा पहले ब्रिटेन की ब्रिगेड ऑफ गोरखा और रॉयल मरीन की स्पेशल बोट सर्विस (एसबीएस) में भी सेवाएं दे चुके थे। सेना से अलग होने के बाद उन्होंने पूरी तरह पर्वतारोहण को अपना करियर बनाया और दुनिया भर में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए। साल 2019 में उन्होंने अपने ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ अभियान के तहत केवल 6 महीने और 6 दिन में 8,000 मीटर से ऊंची दुनिया की सभी 14 चोटियों पर चढ़ाई पूरी कर इतिहास रच दिया। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके बाद साल 2021 में निर्मल पुर्जा उन 10 नेपाली पर्वतारोहियों की टीम का हिस्सा भी रहे, जिसने पहली बार सर्दियों के मौसम में दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी के2 पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।

Sawan Shivratri 2026: सावन में कब मनाई जाएगी शिवरात्रि? जानिए सही तारीख, पूजा और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

Sawan Shivratri 2026: सावन का महीना शुरू हो चुका है। भगवान शिव को समर्पित इस माह में कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें से एक है शिवरात्रि का पर्व। यूं तो शिवरात्रि हिंदू कैलेंडर के हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है, लेकिन सावन के महीने में आने वाले शिवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु कांवड़ में जल भरकर लाते हैं और अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

सावन शिवरात्रि, भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व मानी जाती है। यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत और शिव पूजन करते हैं। इस दिन पूजा, व्रत और रुद्राभिषेक का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से कई ग्रह दोष भी शांत होते हैं। आइए जानें इस साल सावन शिवरात्रि कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

सावन शिवरात्रि 2026 की तिथि व शुभ मुहूर्त

शिवरात्रि का पर्व सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 11 अगस्त 2026, सुबह 04:54 बजे से हो रहा है। सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि का समापन 12 अगस्त 2026, रात 01:52 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।

निशिता काल पूजा मुहूर्त : 11 अगस्त की रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक

जलाभिषेक का समय : 11 अगस्त सुबह 04:54 बजे से लेकर 12 अगस्त रात 01:52 बजे तक

चार प्रहर की पूजा का समय

रात्रि में भगवान शिव की चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है:

प्रथम प्रहर : शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक

द्वितीय प्रहर : रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक

तृतीय प्रहर : रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक (12 अगस्त)

चतुर्थ प्रहर : सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक (12 अगस्त)

सावन 2026 शिवरात्रि पूजा सामग्री

जल, कच्चा दूध, दही, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, सफेद फूल, फल और भस्म।

सावन 2026 शिवरात्रि पूजा विधि

  • प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • शिवलिंग का जल और पंचामृत से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा और फल-फूल चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जाप करें।
  • शिव आरती करें व प्रसाद वितरित करें।
  • शिवलिंग पर तुलसी पत्र, केतकी का फूल, सिंदूर या हल्दी अर्पित न करें।

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भगवा पहन ‘चोरी’ का ड्रामा पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश पर बनारस में FIR दर्ज

Congress Ayodhya Drama

FIR against Rahul and Pappu Yadav: संसद परिसर में किया गया एक 'प्रतीकात्मक ड्रामा' अब सियासी और कानूनी गले की फांस बनता नजर आ रहा है। अयोध्या राम मंदिर के 'चढ़ावा चोरी' के विरोध में भगवा वस्त्र पहनकर दानपात्र के साथ प्रदर्शन करना निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा सांसद अवधेश प्रसाद को भारी पड़ गया है। धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में धर्मनगरी वाराणसी के कोतवाली थाने में संतों की शिकायत पर इन तीनों दिग्गज नेताओं के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पूरा विवाद संसद भवन परिसर में हुए एक अनोखे विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि सांसद पप्पू यादव भगवा वेश धारण कर हाथ में एक सांकेतिक 'दानपात्र' लेकर बैठे थे। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उस दानपात्र में कुछ पैसे डाले, जिसके तुरंत बाद पप्पू यादव दानपात्र लेकर भागते हुए दिखाई दिए। इस पूरे ड्रामे के जरिए विपक्षी नेताओं का मकसद अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाना था, लेकिन विरोध जताने का यह अंदाज अब एक नए विवाद की वजह बन गया है।  ALSO READ: अयोध्या की आड़ में देश की अस्मिता और आस्था पर हो रहा प्रहार : योगी आदित्यनाथ

संतों का गुस्सा और दर्ज हुई FIR

भगवा कपड़ों में 'चोरी' का सीन फिल्माने पर हिंदू संगठनों और साधु-संतों का गुस्सा भड़क उठा है। बनारस के संतों का कहना है कि पवित्र भगवा वस्त्रों को चोरी जैसे कृत्य से जोड़कर पूरे हिंदू समाज और सनातन धर्म का अपमान किया गया है। संतों की इसी नाराजगी के बाद वाराणसी के कोतवाली पुलिस स्टेशन में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

बीजेपी और VHP आक्रामक

इस घटना के बाद से भाजपा (BJP) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के पूर्व प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने हमला बोलते हुए पूछा कि क्या विपक्षी नेता किसी अन्य धर्म के प्रतीकात्मक कपड़ों में चोरी का ऐसा कोई नाटक करने की हिम्मत कर सकते थे? वीएचपी नेता आलोक कुमार ने भी इस पर कड़ा एतराज जताया है। दूसरी ओर, लखनऊ में विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर अखिलेश यादव और पप्पू यादव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके पुतले भी फूंके। ALSO READ: अयोध्या में आस्था बरकरार, रामलला दरबार में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

इस ड्रामे के सियासी मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद परिसर में किया गया यह विरोध प्रदर्शन 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन पर ही भारी पड़ सकता है। इसे भाजपा और हिंदू संगठन 'हिंदुत्व और सनातन के अपमान' के तौर पर भुनाने में जुट गए हैं। ऐसे में रक्षात्मक मुद्रा में आई कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के लिए इस विवाद से पार पाना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से मची तबाही, किश्तवाड़ में फ्लैश फ्लड, 3 जिलों के स्कूल बंद

जम्मू-कश्मीर के चेनाब घाटी क्षेत्र में शनिवार तड़के हुई तेज बारिश और चत्रू इलाके में बादल फटने से हालात बिगड़ गए। अचानक आई बाढ़ के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने किश्तवाड़, डोडा और रामबन जिलों के सभी स्कूल बंद कर दिए। अधिकारियों के अनुसार, रात करीब 2:30 बजे चत्रू इलाके में बादल फटा। इसके बाद तेज पानी के साथ कीचड़, पत्थर और मलबा बाजार में आ गया, जिससे मुख्य बाजार का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बाढ़ की वजह से किश्तवाड़-चत्रू-सिंथन राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद हो गया, जिससे लोगों की आवाजाही रुक गई।

फिलहाल किसी के घायल होने या मौत की सूचना नहीं है। हालांकि, बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। कई घरों और दुकानों में पानी भर गया, जबकि नाले के किनारे खड़ी कम से कम दो गाड़ियां तेज बहाव में बह गईं।

बाढ़ से आकलन का किया जा रहा है नुकसान 

अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन प्रभावित इलाकों का सर्वे कर रहा है, ताकि नुकसान का सही पता लगाया जा सके। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिन दुकानदारों और कारोबारियों को इस आपदा में नुकसान हुआ है, उन्हें सरकार के राहत नियमों के तहत मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने जिला प्रशासन से बात कर हालात की जानकारी ली और जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। जितेंद्र सिंह ने पिछले साल चसोती में बादल फटने की घटना का भी जिक्र किया, जिसमें 63 लोगों की जान चली गई थी। इनमें ज्यादातर श्रद्धालु थे। उन्होंने कहा कि उस हादसे के बाद आपदा से निपटने की तैयारियों को और मजबूत किया गया है। अब किश्तवाड़ और मचैल में समय से पहले चेतावनी देने वाले सिस्टम लगाए गए हैं। इसके अलावा, पैडर इलाके में एक ऑटोमैटिक मौसम केंद्र भी स्थापित किया गया है, ताकि खराब मौसम की सटीक जानकारी समय पर मिल सके और राहत-बचाव कार्य तेजी से किए जा सकें।

 बंद हैं सभी स्कूल 

एहतियात के तौर पर प्रशासन ने किश्तवाड़ जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूल पूरे दिन बंद रखने का फैसला किया। भारी बारिश, फिसलन भरी सड़कें, भूस्खलन और पहाड़ों से पत्थर गिरने के खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया। वहीं, पड़ोसी डोडा और रामबन जिलों में भी स्कूल बंद रहे और छात्रों की पढ़ाई के लिए ऑनलाइन कक्षाएं चलाने के निर्देश दिए गए। लगातार हो रही बारिश और बादल फटने की घटना से पूरे चेनाब घाटी क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई जगह संपत्ति को नुकसान पहुंचा, जबकि सड़कें बंद होने से यातायात भी ठप हो गया। हालांकि, राहत की बात यह है कि प्रशासन के अनुसार इस घटना में किसी की जान नहीं गई है।

चढ़ावा चोरी के बाद बदली राम मंदिर की पूरी व्यवस्था, कैश गिनती, सुरक्षा व पास के लिए सख्त दिशानिर्देश

ayodhya ram mandir trust meeting

Ayodhya Ram Mandir security: ​अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर हमेशा ही विश्व में सुर्खियों में रहा है—चाहे वह राम मंदिर आंदोलन हो, भव्य मंदिर का निर्माण हो, या फिर सम्पूर्ण विश्व को साक्षी बनाने वाला राम लला का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव। ​हाल ही में राम लला के चरणों में अर्पित चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, चढ़ावा व गिनती की निगरानी, संपूर्ण सुरक्षा और VIP/VVIP दर्शन पास से जुड़े नियमों को पूरी तरह बदल दिया है और बेहद सख्त दिशानिर्देश लागू किए हैं।

​चढ़ावा और गिनती की 360-डिग्री निगरानी

​पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया को अब हाई-टेक निगरानी के दायरे में लाया गया है। दानपात्र खोलने से लेकर चढ़ावा गिनने तक की हर पल की रिकॉर्डिंग 360-डिग्री कैमरों और पेशेवर वीडियोग्राफरों (SLR और 360 डिग्री कैमरों से लैस) द्वारा की जाएगी। दानपात्र से जुड़ी पुरानी टीम को बदल दिया गया है। निगरानी के लिए 8 सदस्यीय विशेष टीम बनाई गई है, जिसमें ​2 बैंक कर्मी (भारतीय स्टेट बैंक), ​2 ट्रस्ट प्रतिनिधि, ​2 SIS सुरक्षा कर्मी, ​2 पेशेवर वीडियोग्राफर शामिल हैं। 

​चरणबद्ध तरीके से खाली होंगे दानपात्र

परिसर में स्थित लगभग 40 दानपात्रों को अब एक साथ खाली करने के बजाय अलग-अलग दिनों में खाली किया जाएगा। सीलबंद बक्सों को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों द्वारा विधिवत सील व हैंडल किया जाएगा। कोष प्रबंधन समिति के सदस्य जगदीश आफले ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच किसी भी प्रकार का कोई गतिरोध नहीं है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद

​दर्शन पास के लिए नई व्यवस्था

​पूर्व महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र एवं गोपाल राव की ID बंद होने के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ट्रस्ट ने अपने तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की ID को दर्शन पास जारी करने के लिए अधिकृत किया है। ​वर्तमान में अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की देखरेख में श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के प्रबंध किए जा रहे हैं।

​प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव

मंदिर के इतिहास में पहली बार सचिव पद पर जगदीश आफले को नियुक्त किया गया है (जिसकी आधिकारिक घोषणा 2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में होगी)। आफले को SBI में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Signatory) भी बनाया गया है। दूसरी ओर, ​मंदिर के आधिकारिक प्रवक्ता के लिए चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। ​CEO पद के लिए 5200 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी स्क्रीनिंग और लिस्टिंग सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली कमेटी कर रही है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में 5 बड़े फैसले, संतों को बड़ी जिम्मेदारी

​त्रि-स्तरीय (Three-Layer) अत्याधुनिक सुरक्षा चक्र

​श्रीराम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली लागू की गई है। CRPF (केंद्रीय सुरक्षा बल), PAC (प्रांतीय सशस्त्र बल) और SSF (विशेष सुरक्षा बल) के सैकड़ों जवानों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही AI-आधारित अत्याधुनिक CCTV कैमरे और स्मार्ट निगरानी प्रणाली लागू की गई है। परिसर की सुरक्षा के लिए 4 किलोमीटर लंबी परिधि दीवार (Boundary Wall) और उच्च क्षमता वाले वॉच टावर स्थापित किए गए हैं।

First Sawan Somwar 2026 Shubh Yog: 04 शुभ योगों में 03 अगस्त को होगा सावन के पहले सोमवार का व्रत, जानें जलाभिषेक और शिव पूजन का शुभ मुहूर्त

First Sawan Somwar 2026 Shubh Yog: यूं तो हर सप्ताह सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। लेकिन सावन के महीने में आने वाले सोवमार का विशेष स्थान है। शिव भक्तों के लिए यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन वे अपने आराध्य के लिए खास पूजा, उपवास और अनुष्ठान करते हैं। साल 2026 में सावन के महीने में 4 सोमवार का सौभाग्य बन रहा है। सावन के सोमवार व्रत करने वाले श्रद्धालु इस व्रत का उद्यापन चौथे और अंतिम सोमवार को करते हैं।

सावन के पहले सोमवार पर बने रहे हैं 4 शुभ योग

इस साल पहले सावन सोमवार पर 4 शुभ योग बन रहे हैं, जो लोगों के लिए शुभ फलदायी हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन का पहला सोमवार श्रावण कृष्ण पंचमी तिथि को है। उस दिन हंसराज योग, सुकर्मा योग, धृति योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेंगे।

हंसराज योग : पंच महापुरुष योगों में से एक होता है। इस समय गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं, जिसकी वजह से हंसराज योग बना है।

सर्वार्थ सिद्धि योग : पहले सावन सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग मध्यरात्रि 00:01 बजे से लेकर सुबह 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इस योग में पूजा, जप, तप, दान आदि का पुण्य फल प्राप्त होता है।

सुकर्मा योग : इस दिन सुकर्मा योग प्रात:काल से लेकर रात 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। सुकर्मा योग के स्वामी देव इंद्र और ग्रह मंगल हैं। यह शुभता प्रदान करने वाला मंगलकारी योग है।

धृति योग : पहले सावन सोमवार पर धृति योग रात में 9:13 बजे से पूर्ण रात्रि तक है। इसमें नया बिजनेस, भूमि पूजन, मकान की नींव डालना, नई वस्तु की खरीदारी करना अच्छा रहता है।

चोर पंचक में सावन के पहले सोमवार का व्रत

पहले सावन सोमवार को पूरे दिन चोर पंचक रहेगा। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10:00 पी एम तक है, उसके बाद रेवती नक्षत्र है।

पहला सावन सोमवार 2026 जलाभिषेक मुहूर्त

सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक के साथ ही शिव जी की पूजा की जाएगी।

ब्रह्म मुहूर्त: 04:19 ए एम से 05:01 ए एम

अभिजीत मुहूर्त: 12:00 पी एम से 12:54 पी एम

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 05:44 ए एम से 07:24 ए एम

शुभ-उत्तम मुहूर्त: 09:05 ए एम से 10:46 ए एम

चर-सामान्य मुहूर्त: 02:08 पी एम से 03:49 पी एम

लाभ-उन्नति मुहूर्त: 03:49 पी एम से 05:30 पी एम

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 05:30 पी एम से 07:11 पी एम

Sawan 2026 Rudrabhishek Date: सावन में कराना चाहते हैं रुद्राभिषेक, इन तिथियों पर महादेव के अनुष्ठान का मिलेगा शुभ परिणाम

Omkareshwar Darshan 2026 : ओंकारेश्वर में सावन में बदल गई दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालु जान लें मंदिर का नया वन-वे रूट

omkarshwar tirth

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए जिला प्रशासन ने दर्शन और आवागमन की व्यवस्था में बदलाव किया है। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर क्षेत्र में एकांगी मार्ग यानी वन-वे सिस्टम लागू किया गया है। अगर आप सावन में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जा रहे हैं, तो मंदिर पहुंचने से पहले नई व्यवस्था और मार्ग की जानकारी जरूर जान लें। 

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omkarshwar map

सामान्य श्रद्धालु

पुराने बस स्टैंड से रूट

निर्वाणी अखाड़ा जूता-चप्पल स्टैंड → जेपी चौक → पुराना पुल → रैम्प → गर्भगृह → झूला पुल → स्काईब्रिज → निर्वाणी अखाड़ा।

न्यू बस स्टैंड (दांडी तिराहा) की ओर से रूट

गजानन आश्रम → ब्रह्मपुरी जूता-चप्पल स्टैंड → स्काईब्रिज → जेपी चौक → पुराना पुल → रैम्प → गर्भगृह → झूला पुल → ब्रह्मपुरी जूता-चप्पल स्टैंड -> गजानन आश्रम -> प्रसादालय पार्किंग।

प्रोटोकॉल एवं शीघ्र दर्शन श्रद्धालु

प्रोटोकॉल एवं शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्वाणी अखाड़ा एवं ब्रह्मपुरी पार्किंग में रिस्टबैंड काउंटर स्थापित किए गए हैं, जहां जूता-चप्पल स्टैंड की भी व्यवस्था है।

पुराने बस स्टैंड से रूट 

निर्वाणी अखाड़ा सेंटर → स्काईब्रिज → झूला पुल → गर्भगृह → झूला पुल → स्काईब्रिज → निर्वाणी अखाड़ा।

न्यू बस स्टैंड से रूट

प्रसादालय पार्किंग  -> गजानन आश्रम → ब्रह्मपुरी पार्किंग सेंटर → झूला पुल → गर्भगृह → झूला पुल → ब्रह्मपुरी पार्किंग सेंटर।

जिला प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्ग व्यवस्था का पालन करते हुए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।

क्या है ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर, भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह स्थान न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ के ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी एक ऐसी अलौकिक मान्यता भी है, जो भक्तों को विस्मित कर देती है। कहा जाता है कि इस पावन धाम में हर रात स्वयं भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती शयन के लिए आते हैं, और सोने से पहले वे चौपड़ का खेल भी खेलते हैं। यह मान्यता सदियों से चली आ रही है और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है।

 

रात्रि शयन और चौपड़ की दिव्य लीला

ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी सबसे अद्भुत और रहस्यमयी मान्यता यह है कि भगवान शिव तीनों लोकों का भ्रमण करके प्रतिदिन रात को इसी मंदिर में शयन करने आते हैं। उनके साथ माता पार्वती भी होती हैं। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि रात्रि के समय मंदिर के पट बंद होने के बाद, भोलेनाथ और माता पार्वती यहाँ चौसर (चौपड़) का खेल खेलते हैं।

 

इस मान्यता के चलते, मंदिर में प्रतिदिन रात्रि में पंडित के अलावा किसी को शामिल होने की अनुमति नहीं है। शयन आरती के बाद, गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग के सामने चौपड़-पांसे की बिसात सजाई जाती है। सुबह जब मंदिर के पट खुलते हैं, तो कई बार चौसर और उसके पासे कुछ इस तरह से बिखरे मिलते हैं, जैसे रात्रि के समय उन्हें किसी ने खेला हो। यह दृश्य भक्तों के विश्वास को और भी पुख्ता करता है। यह एक ऐसा रहस्य है जिसे विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया है, और यह सिर्फ़ श्रद्धा और आस्था का विषय है।

 

ओंकारेश्वर और ममलेश्वर: एक ही ज्योति का दो रूप

ओंकारेश्वर द्वीप नर्मदा नदी के मध्य में 'ॐ' के आकार में स्थित है, और यहीं पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान है। नर्मदा के दक्षिणी तट पर ममलेश्वर मंदिर स्थित है, जिसे प्राचीन काल में अमरेश्वर के नाम से जाना जाता था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने अपने ओंकारेश्वर नामक लिंग के दो भाग किए थे, जिनमें से एक ओंकारेश्वर और दूसरा ममलेश्वर कहलाया। दोनों शिवलिंगों का स्थान भले ही अलग हो, लेकिन उनकी सत्ता और स्वरूप एक ही माना जाता है। शिवपुराण में इन दोनों ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है।

 

इस स्थान पर ध्यान और पूजा करने से मन को शांति और आध्यात्मिक बल मिलता है। यह माना जाता है कि ओंकारेश्वर में नर्मदा स्नान और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बिना सभी तीर्थ यात्राएं अधूरी मानी जाती हैं। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत आस्था का प्रतीक है, जहाँ लाखों भक्त दूर-दूर से इस चमत्कारिक ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आते हैं, यह विश्वास लेकर कि यहाँ आने से उनके सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हर-हर महादेव का उद्घोष, कंधों पर आस्था लिए बढ़ चले शिवभक्त

Kanwar Yatra UP 2026

Kanwar Yatra UP 2026: सावन का पहला दिन, न कोई थकान, न कोई चिंता, बस एक ही धुन, एक ही गूंज ‘बम-बम भोले!’। कंधे पर कांवड़, होठों पर जयकारा और मन में एक अटूट विश्वास कि शिव कल्याण करेंगे। सुबह की पहली किरण के साथ ही शिवालयों में घंटियों की गूंज शुरू हो गई और भक्तों की कतारें मंदिरों के बाहर लंबी होती चली गईं।

उत्तर प्रदेश के कांवड़ मार्ग श्रद्धा-आस्था से प्रकाशमान हो चले हैं। उत्तराखंड की ओर से आनेवाले कांवड़िये यूपी सीमा पर अपने सत्कार से अभिभूत हैं। काशी, अयोध्या और प्रयागराज में भी शिवभक्त लंबी यात्रा की तैयारी में जुटे हैं। सबका भरोसा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर है जो हर साल ही उनके लिए हर इंतजाम करती आई है। सरकार ने इस बार भी सेवा और सुरक्षा दोनों के इंतजाम कर रखे हैं। 

कंधे का बोझ नहीं, आस्था का प्रसाद है कांवड़

कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, यह त्याग, संयम और समर्पण की एक जीती-जागती मिसाल है। यह तपस्या भगवान शिव के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। रास्ते भर लगे सेवा शिविरों में जैसे ही उनका डेरा पहुंचता है, अनजान हाथ उन्हें पानी का गिलास थमाते हैं। जाति, धर्म और भेद की कोई दीवार नहीं, बस एक ही भाव शेष है, सेवा का भाव। हरिद्वार से 131 लीटर गंगाजल लेकर बागपत की ओर बढ़ रहे कांवड़िया अभिषेक त्यागी की आंखों में गजब की चमक थी। उन्होंने कहा, ‘योगी सरकार ने इस बार कांवड़ यात्रा के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं की हैं। पूरे मार्ग पर सुरक्षा, सफाई, चिकित्सा और सेवा शिविरों की उत्कृष्ट व्यवस्था है। पुलिस की मुस्तैदी से श्रद्धालु निश्चिंत होकर यात्रा कर रहे हैं। इससे हमारी आस्था की यात्रा और अधिक सुगम व सुरक्षित बनी है।‘

नन्हे कदमों में अटूट श्रद्धा

इस यात्रा की सबसे मार्मिक तस्वीरें तब सामने आती हैं जब उम्र की सीमाएं भी आस्था के आगे बौनी पड़ जाती हैं। हरियाणा के कैथल निवासी महज 11 वर्ष के एक बालक ने हरिद्वार से 31 लीटर गंगाजल उठाया और अपने गंतव्य की ओर चल पड़ा। सहारनपुर के गागलहेड़ी क्षेत्र में जब यह नन्हा शिवभक्त पहुंचा, तो उसका उत्साह देखकर स्थानीय थाना प्रभारी और पुलिसकर्मी स्वयं भी उसके साथ काफी दूरी तक चलते हुए उसका हौसला बढ़ाते नजर आए। यह दृश्य ऐसा लगता है जैसे योगी सरकार इस बालक का नमन कर रही हो। कांवड़ यात्रा पूरे समाज का साझा आस्था का उत्सव बन चुकी है, जिसमें प्रशासन भी भक्ति के रंग में रंग गया है।

सेवा शिविरों में बहती स्नेह की धारा

मार्ग में जगह-जगह लगे सेवा शिविर इस यात्रा की आत्मा हैं। मेरठ के पूठखास गांव में शुरू हुए एक ऐसे ही शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया, जहां कांवड़ियों के लिए भोजन, जल और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है। ऐसे सैकड़ों शिविर पूरे मार्ग पर सजे हैं, जहां स्वयंसेवक बिना किसी स्वार्थ के दिन-रात सेवा में जुटे हैं। यही निःस्वार्थ सेवा भाव इस यात्रा को केवल एक धार्मिक परंपरा से आगे बढ़ाकर मानवता के एक महान उत्सव में बदला है।

सीमा द्वारों से गुजरते ही होती है अलौकिक अनुभूति

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बने भव्य सीमा द्वार, जिन्हें विशेष रूप से सजाया गया है। यहां मुख्यमंत्री य़ोगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कांवड़ियों का सत्कार हो रहा है। जैसे ही शिवभक्त इन द्वारों से गुजरते हैं, उनके मन में एक अलौकिक अनुभूति जागृत होती है, मानो पूरा उत्तर प्रदेश ही उनकी अगवानी कर रहा हो। यह क्षण हर कांवड़िए के लिए यात्रा की थकान को भुला देने वाला होता है, जहां आस्था अपने चरम पर पहुंच जाती है।

हर कदम में गूंजता एक ही भाव ‘शिवोहम्’

पंचक काल के चलते भले ही अभी कांवड़ियों की संख्या सीमित हो, लेकिन जो भी भक्त निकल पड़े हैं, उनके कदमों में कोई शिथिलता नहीं। वे जानते हैं कि उनकी यह यात्रा केवल गंगाजल ढोने की नहीं, बल्कि स्वयं को शिव तत्व से जोड़ने की है। हर हर महादेव के जयघोष के बीच, धूल भरे रास्तों पर नंगे पांव चलते ये शिवभक्त असल में यह संदेश देते हैं कि सच्ची भक्ति में न मौसम की परवाह होती है, न राह की कठिनाई की, बस मन में एक ही भाव होता है, समर्पण का, ‘शिवोहम्’ का। उन्हें किसी बात की चिंता नहीं। जानते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी सुरक्षा सेवा के हर इंतजाम कर रखे हैं।

सावन व्रत में बनाएं ये 5 आसान सात्विक रेसिपीज, बिना प्याज-लहसुन मिलेगा भरपूर स्वाद

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, पूजा-पाठ और सात्विक लाइफस्टाइल अपनाने का समय माना जाता है। इस दौरान कई श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं और प्याज, लहसुन, मांसाहार व अंडे जैसी तामसिक चीजों से दूरी बनाए रखते हैं। ऐसे में शरीर को एनर्जी देने वाला हल्का भोजन खाना भी जरूरी होता है। आप भी इस सावन व्रत में बिना प्याज-लहसुन वाली आसान रेसिपीज आपकी व्रत की थाली को स्वादिष्ट और पौष्टिक बना सकती हैं:

1. सिंघाड़े की खीर (Singhara Kheer)

इसे बनाने के लिए दूध को एक भारी तले वाले बर्तन में उबालें। उसमें धीरे-धीरे सिंघाड़े का आटा मिलाते हुए लगातार चलाएं, ताकि गांठें न बनें। 8-10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। अब चीनी या गुड़, इलायची पाउडर और कटे हुए बादाम, काजू व पिस्ता डालकर 2-3 मिनट और पकाएं। सिंघाड़ा फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम और जरूरी मिनरल्स का अच्छा सोर्स माना जाता है। दूध से प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है तथा ड्राई फ्रूट्स हेल्दी फैट, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं। इसे गर्म या ठंडा, दोनों तरह से परोसा जा सकता है।

 

2. जीरा आलू (Jeera Aloo)

इसे बनाने के लिए कड़ाही में घी गर्म करें और उसमें जीरा चटकाएं। फिर बारीक कटी हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड भूनें। अब उबले और कटे हुए आलू डालें। सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाकर 5-7 मिनट तक मीडियम आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। फिर हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिलाएं। जीरा डाइजेशन को बेहतर बनाने और गैस जैसी प्रॉब्लम को कम करता है, जबकि आलू कार्बोहाइड्रेट और पोटैशियम का अच्छा सोर्स है। कम मसालों में बनने वाली यह डिश व्रत में हल्की होती है और शरीर को एनर्जी देती है।

 

 

3. साबूदाना खिचड़ी (Sabudana Khichdi)

इसे बनाने के लिए सबसे पहले साबूदाने का पानी निकाल लें। कड़ाही में घी गर्म करके जीरा चटकाएं और हरी मिर्च डालें। फिर उबले आलू डालकर 2-3 मिनट तक हल्का भूनें। अब साबूदाना, मूंगफली का पाउडर और सेंधा नमक डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए 3-4 मिनट पकाएं। हरा धनिया और थोड़ा-सा नींबू का रस डालकर परोसें। साबूदाना शरीर को तुरंत एनर्जी देता है, जबकि मूंगफली प्रोटीन, हेल्दी फैट और विटामिन ई का अच्छा सोर्स है। नींबू से विटामिन C मिलता है। यह रेसिपी व्रत में लंबे समय तक पेट भरा रखती है।

 

 

4. कुट्टू की पूरी (Kuttu Puri)

इसे बनाने के लिए उबले आलू को मैश करके कुट्टू के आटे में मिलाएं। सेंधा नमक डालें और जरूरत के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर कड़क आटा गूंध लें। आटे को 10 मिनट ढककर रखें, फिर छोटी-छोटी लोइयां बनाकर पूरियां बेलें। गर्म घी या तेल में इन्हें सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लें। कुट्टू का आटा ग्लूटेन-फ्री होता है और इसमें फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम तथा एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे दही, जीरा आलू या व्रत की किसी भी सब्जी के साथ परोसें।

 

 

5. साबूदाना टिक्की (Sabudana Tikki)

इसे बनाने के लिए पहले उबले आलू को अच्छी तरह मैश कर लें। अब इसमें भीगा हुआ साबूदाना, भुनी मूंगफली का पाउडर, बारीक कटी हरी मिर्च, सेंधा नमक और हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिलाएं। तैयार मिक्सचर से छोटी साइज की टिक्कियां बनाएं और तवे पर थोड़ा घी लगाकर मीडियम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेक लें। साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट होता है, जबकि मूंगफली से प्रोटीन और हेल्दी फैट मिलते हैं। आलू में पोटैशियम होता है। इसलिए यह रेसिपी व्रत के मिए परफेक्ट है। इसे दही या व्रत की हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें।

रील बनाने जूते पहनकर ‘रथ’ पर चढ़ा मुस्लिम युवक, कोर्ट ने दी रोजाना मंदिर सफाई की सजा

Ulto rath yatra

Ulto Rath Yatra controversy: सोशल मीडिया पर व्यूज और लाइक्स हासिल करने का भूत किस तरह कानूनी मुसीबत बन सकता है, इसका ताजा उदाहरण पूर्व बर्धमान जिले के कालना से सामने आया है। 'उल्टो रथ यात्रा' के दो दिन बाद, एक मुस्लिम युवक द्वारा जूते पहनकर रथ पर चढ़कर रील (Reel) बनाने और उसे फेसबुक पर अपलोड करने के मामले में अदालत ने एक ऐतिहासिक और सुधारात्मक रुख अपनाया है।

 

धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपी युवक को अदालत ने जमानत तो दे दी, लेकिन इसके साथ ही एक ऐसी शर्त रखी है जो समाज में मिसाल और चर्चा का विषय बन गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना पूर्व बर्धमान जिले के समुद्रगढ़ निवासी बाबूलाल शेख से जुड़ी है। 'उल्टो रथ यात्रा' के समापन के बाद कालना क्षेत्र में खड़े एक धार्मिक रथ की सीढ़ियों पर आरोपी जूते पहनकर चढ़ गया और वहां डांस करते हुए वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल होते ही स्थानीय श्रद्धालुओं और निवासियों में भारी रोष फैल गया। 

  • धार्मिक समिति की शिकायत : 'पश्चिम नसरतपुर हरेकृष्ण नामहट्ट संघ' के सचिव जितेन मोंडल के नेतृत्व में समिति ने नदानघाट पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
  • पुलिस कार्रवाई : एफआईआर के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाबूलाल शेख को गिरफ्तार कर लिया।
  • लागू कानूनी धाराएं : आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य/दुश्मनी फैलाने और जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित गंभीर प्रावधानों में मामला दर्ज किया गया।

कोर्ट का फैसला : सख्त कानूनी धाराओं के बीच सुधारात्मक न्याय

आरोपी बाबूलाल शेख को कालना के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, पश्चाताप व्यक्त करने (कान पकड़कर माफी मांगने) और जांच में सहयोग करने की दलीलें दी गईं। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए आरोपी को सशर्त जमानत दे दी।

कोर्ट द्वारा तय की गई मुख्य शर्तें

  • मंदिर एवं सड़क की रोजाना सफाई : जांच पूरी होने तक आरोपी को रोजाना मंदिर परिसर और उससे सटी मुख्य सड़क की सफाई करनी होगी।
  • रथ की सीढ़ियों की धुलाई : रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी को पुलिस बल की मौजूदगी में रथ की सीढ़ियों को पानी से धोकर साफ करने का आदेश दिया गया।
  • जांच अधिकारी के समक्ष हाजिरी : आरोपी को हफ्ते में कम से कम एक बार जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा और विवेचना में पूर्ण सहयोग करना होगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय दंड प्रक्रिया (और अब BNS प्रक्रिया) में ऐसे कई अवसर आए हैं जहां अदालतों ने केवल जेल भेजने के बजाय 'सुधारात्मक न्याय' (Restorative Justice) का मॉडल अपनाया है। कोर्ट के इस फैसले से समाज में यह संदेश जाता है कि कानून का उद्देश्य केवल सजा देना ही नहीं, बल्कि गलती का अहसास कराना और सामाजिक समरसता को दोबारा कायम करना भी है।

रील संस्कृति पर सबक

सोशल मीडिया के लिए धार्मिक स्थलों की पवित्रता या सांस्कृतिक प्रतीकों का अनादर करने वालों के लिए यह एक सख्त चेतावनी है। सोशल मीडिया की क्षणिक प्रसिद्धि के लिए कानून और धार्मिक आस्था से खिलवाड़ भारी पड़ सकता है। हालांकि, कोर्ट के इस विवेकपूर्ण फैसले ने जहां एक तरफ सख्त संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पश्चाताप कर रहे युवक को समाज में सुधार का अवसर भी प्रदान किया है।