Apollo Hospitals Share Price: इस साल 25% चढ़ा है शेयर, क्या अभी खरीदें, बेचें या होल्ड करें?

Apollo Hospitals Share Price: अपोलो हॉस्पिटल्स का प्रदर्शन जून तिमाही में अच्छा रहा। इस दौरान कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 21 फीसदी बढ़कर 7,044 करोड़ रुपये रहा। एबिड्टा 28 फीसदी बढ़कर 1,092 करोड़ रुपये हो गया। एबिड्टा मार्जिन भी बढ़कर 15.5 फीसदी हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 14.6 फीसदी था।

कंसॉलिडेटेड टैक्स बाद प्रॉफिट 581 करोड़ रुपये

जून तिमाही में Apollo Hospitals का कंसॉलिडेटेड टैक्स बाद प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 34 फीसदी बढ़कर 581 करोड़ रुपये रहा। करीब सभी बिजनेसेज में अच्छी ग्रोथ दिखी। इनमें हेल्थकेयर सर्विसेज, अपोलो हेल्थको और AHLL शामिल हैं। सभी बिजनेसेज की रेवेन्यू ग्रोथ डबल डिजिट में रही।

एवरेज रेवेन्यू प्रति पेशेंट में 8 फीसदी इजाफा 

हॉस्पिटल बिजनेस का रेवेन्यू जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 22 फीसदी बढ़कर 3,567 करोड़ रुपये रहा। इसमें वॉल्यूम ग्रोथ में 11 फीसदी, प्राइसिंग में 4 फीसदी और केस और पेयर मिक्स में 3 फीसदी ग्रोथ का हाथ है। इनपेशेंट वॉल्यूम 13 फीसदी बढ़ा। ऑक्युपेंस 70 फीसदी बनी रही। एवरेज रेवेन्यू प्रति पेशेंट (ARPP) साल दर साल आधार पर 8 फीसदी बढ़ा।

मैनेजमेंट को रेवेन्यू ग्रोथ 20 फीसदी रहने का भरोसा 

मैनेजमेंट को हॉस्पिटल बिजनेस की रेवेन्यू ग्रोथ FY27 में करीब 20 फीसदी रहने का भरोसा है। बेंगलुरु में 180 बेड के हॉस्पिटल्स में सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। गुरुग्राम के हॉस्पिटल में इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में ऑपरेशन शुरू हो जाने की उम्मीद है। कंपनी ने FY31 तक बेड की संख्या बढ़कर 14,100 करने का प्लान बनाया है।

बेड की टैरिफ लिमिट तय होने से रेवेन्यू पर पड़ सकता है असर 

अपोलो हॉस्पिटल्स की ग्रोथ आगे स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद है। इसमें स्ट्रॉन्ग ऑक्युपेंसी, बढ़ती क्लिनिकल जटिलता, कपैसिटी विस्तार पर फोकस और डिजिटल बिजनेसेज में मुनाफा बनाने की बढ़ती क्षमता का हाथ होगा। हालांकि, हाल में संसदीय समिति ने हॉस्पिटल्स में बेड के टैरिफ की लिमिट तय करने की सलाह दी है। इसका असर अपोलो जैसे हॉस्पिटल्स के रेवेन्यू पर पड़ सकता है।

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14 अगस्द को 3 फीसदी ज्यादा चढ़कर बंद हुआ शेयर 

यह शेयर इस साल अब तक 25 फीसदी चढ़ चुका है। FY28 के अनुमानित EV/EBITDA के 24 गुना पर शेयरों में ट्रेडिंग हो रही है। इस पर हमने रेटिंग ओवरवेट से इक्वल-वेट कर दी है। Apollo Hospitals का शेयर 14 अगस्त को 3.71 फीसदी चढ़कर 8,919 रुपये पर बंद हुआ। इनवेस्टर्स इस शेयर में थोड़ा मुनाफावसूली कर सकते हैं।

Vodafone Idea share Price: 3 दिन में 11% चढ़ा वोडाफोन आइडिया का शेयर, क्या आपको खरीदना चाहिए?

Vodafone Idea share Price: वोडाफोन आइडिया का शेयर तीन दिन में करीब 11 फीसदी चढ़ा है। 14 अगस्त को यह 4.37 फीसदी उछलकर 14.10 रुपये पर पहुंच गया। शेयरों में तेजी की वजह कंपनी के टैरिफ बढ़ाने की चर्चा है। दरअसल, भारती एयरटेल ने हाल में अपनी कई स्कीम के टैरिफ बढ़ाए हैं। इससे यह माना जा रहा है कि वोडाफोन आइडिया भी टैरिफ बढ़ा सकती है।

वोडाफोन आइडिया की सेहत में दिख रहा सुधार

अगर वोडाफोन आइडिया टैरिफ बढ़ाती है तो उसका प्रति यूजर औसत रेवेन्यू (ARPU) बढ़ जाएगा। मास्टर कैपिटल सर्विसेज में एवीपी विष्णु कांत उपाध्याय ने कहा कि वोडाफोन आइडिया के टैरिफ बढ़ाने से उसका रेवेन्यू भी बढ़ेगा। वोडाफोन आइडिया की वित्तीय सेहत में सुधार दिख रहा है। इसका असर उसके शेयरों पर दिखा है। बीते एक साल में यह शेयर 129 फीसदी चढ़ा है।

शेयरों में तेजी जारी रहने का अनुमान 

उपाध्याय ने कहा, “निवेशकों को वोडाफोन आइडिया के शेयर अपने पास बनाए रखना चाहिए। इसकी वजह यह है कि कंपनी की स्थिति अब बदल रही है।” उनका मानना है कि यह शेयर 15 रुपये तक जा सकता है। उसके बाद यह 15.50 रुपये की तरफ बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि निवेशकों को कंपनी के एग्जिक्यूशन, सब्सक्राइबर ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी पर नजर रखनी चाहिए।

टैरिफ बढ़ाने से बढ़ सकता है रेवेन्यू 

IIFL का कहना है कि वोडाफोन आइडिया के लिए दो संभावनाएं दिख रही हैं। पहला, अगर यह टैरिफ बढ़ाती है तो इसका ARPU FY27 में करीब 4 रुपये बढ़ सकता है। दूसरा, अगर यह टैरिफ नहीं बढ़ाती है तो इसके सस्ते प्लान में यूजर्स की दिलचस्पी बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि दोनों ही स्थितियों में वोडाफोन आइडिया को फायदा होगा।

18.70 रुपये तक जा सकता है शेयर 

ब्रोकरेज फर्म एंबिट कैपिटल ने बताया कि वोडाफोन आइडिया का शेयर 18.70 रुपये तक जा सकता है। जून तिमाही में कंपनी के सब्सक्राइबर्स की संख्या 3 लाख बढ़ी है। लंबे समय बाद कंपनी के यूजर्स की संख्या बढ़ी है। एंबिट का कहना है कि कंपनी दिसंबर 2026 तक टैरिफ 15 फीसदी तक बढ़ा सकती है।

कंपनी का तीन साल में 45000 करोड़ निवेश का प्लान

कंपनी पहले ही डबल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ हासिल करने का ऐलान कर चुकी है। इसके लिए वह अगले तीन साल में अपने नेटवर्क में 45,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी के सीईओ अभिजीत किशोर ने कहा था कि प्रमोटर्स से मिलता सहयोग और बैंकों से फंड के लिए चल रही बातचीत से हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है।

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सरकार की हिस्सेदारी बढ़कर 50 फीसदी हुई

वोडाफोन आइडिया देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। पहले नंबर पर रिलायंस जियो है। दूसरे नंबर पर भारती एयरटेल है। तीसरे पर वोडाफोन आइडिया है। रिलायंस जियो शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं है। वोडाफोन में सरकार की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 50 फीसदी हो गई है।

Trading Ideas: बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट, अनुज सिंघल से जाने आज के लिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

Trading Ideas : बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट देखने को मिल रही है। निफ्टी 50 अंक से ज्यादा फिसलकर 24300 के करीब आ गया है। RIL,SBI, M&M और एक्सिस बैंक ने सबसे ज्यादा दबाव बनाया है। बैंक निफ्टी में भी हल्की कमजोरी दिख रही है। मिडकैप में भी हल्की नरमी है। मेटल और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिल रही है। दोनों सेक्टर इंडेक्स करीब फीसदी फिसले हैं। साथ ही कैपिटल मार्केट,केमिकल्स और FMCG पर भी दबाव देखने को मिल रहा है। वहीं कंज्यूमर ड्यूरेबल और कैपिटल गुड्स में हल्की खरीदारी आई है।

जानिए आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल, क्या हो कमाई का रणनीति

CAS और एक्सपायरी

सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि कल सेंसेक्स की एक्सपायरी में भी ऑप्शन भाव में बड़ी गड़बड़ दिखी। 3:15 से 3:30 के बीच ऑप्शन भाव में भारी उतार-चढ़ाव था। बाजार फिर रेंज में दिख रहा है। बाजार में 2 दिनों से एक जैसा पैटर्न है। सुबह बिकवाली और दोपहर में खरीदारी हो रही है। कल भी 24,450 के SL के साथ बिकवाली की रणनीति ने काम किया और फिर 24,250 के SL के साथ खरीदारी की रणनीति ने काम किया। आज देखते हैं क्या वही पैटर्न दोहराया जाएगा।

बाजार: आज कहां हो नजर?

अनुज सिंघल ने कहा कि आज शुक्रवार है, यानी एक्सपायरी का कोई डर नहीं है। आज अर्निंग्स सीजन का आखिरी दिन भी है। इसका मतलब अब स्टॉक स्पेसिफिक मौके भी कम होंगे। FIIs की लगातार इंडेक्स शॉर्टिंग जारी,कल भी शॉर्ट जोड़े गए हैं। India VIX भी Complacency Zone में है, ये थोड़ा खल रहा है। डिफेंस सबसे मजबूत सेक्टर है,इसके नतीजे भी शानदार हैं। पिछले 2 दिनों में निफ्टी का पैटर्न एक जैसा रहा है। दोनों दिन पहले शॉर्ट ट्रेड फिर लॉन्ग ट्रेड चली। 24,450 के SL से शॉर्ट और 24,250 के SL से लॉन्ग ने काम किया। बस एक फर्क था,परसों IT गिरा और बैंक चले थे। कल IT चला और बैंक गिरे थे। आज फिर चिप शेयरों में रैली और कोस्पी ऊपर है। आज देखना होगा कि IT शेयर और बैंक कैसे करते हैं।

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निफ्टी पर रणनीति

अनुज सिंघल के मुताबिक निफ्टी के लिए सबसे अहम सपोर्ट 24,250-24,300 पर है। इसमें खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 24,300-24,350 है। इसके लिए SL 24,250 पर रखें। निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24,400-24,450 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24,500-24,550 पर है। 24,400-24,450 के रिजेक्शन पर बिकवाली करें। SL 24,500 पर रखें। दोनों तरफ मुनाफा जल्दी बुक करें। अगर रेंज टूटी तो रणनीति फिर से देखेंगे।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 57,400-57,600 पर और बड़ा सपोर्ट 57,100-57,300 पर है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 57,800-58,000 पर और बड़ा रजिस्टेंस 58,000-58,200 पर है। बैंक निफ्टी में ट्रेड लेना इस समय काफी मुश्किल है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Solar Industries Share Price: शानदार तिमाही नतीजों के बाद 4% टूटा शेयर, ब्रोकरेज ने भी घटाई रेटिंग, आखिर क्या है वजह

Solar Industries Share Price: केमिकल सेक्टर की कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज़ इंडिया लिमिटेड (Solar Industries) के शेयरों में 14 अगस्त को गिरावट देखने को मिली। अच्छे तिमाही नतीजों के बाद भी शेयर 4 फीसदी टूटा है। कंपनी के नतीजों के बाद शेयर पर ब्रोकरेज फर्मों की अलग-अलग प्रतिक्रिया आई है। एक तरफ मॉर्गन स्टेनली ने स्टॉक को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है तो दूसरी तरफ कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने बिकवाली की राय दी है।

ओवरवेट’ रेटिंग की राय

मॉर्गन स्टेनली ने सोलर इंडस्ट्रीज़ पर अपनी ‘ओवरवेट’ रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹20,270 तय किया है। इसका मतलब है कि गुरुवार के क्लोजिंग प्राइस ₹20,325 से इसमें किसी तरह के बढ़त की उम्मीद नहीं है। ब्रोकरेज ने कहा कि कंपनी की कमाई उम्मीद से बेहतर रही। रेवेन्यू, EBITDA और एडजस्टेड PAT में क्रमशः 70%, 88% और 93% की बढ़ोतरी हुई।

सभी प्रमुख सेगमेंट में रेवेन्यू ग्रोथ उम्मीद से ज़्यादा रही। डिफेंस रेवेन्यू में 123% की बढ़ोतरी हुई (जबकि मॉर्गन स्टेनली का अनुमान 70% था), इंटरनेशनल एक्सप्लोसिव्स में 65% की बढ़ोतरी हुई (अनुमान 35% था) और घरेलू एक्सप्लोसिव्स में 52% की बढ़ोतरी हुई (अनुमान 19% था)।

ग्रॉस मार्जिन 110 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 49.2% हो गया, जबकि EBITDA मार्जिन 265 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 27.5% हो गया। मॉर्गन स्टेनली ने मार्जिन में सुधार का कारण डिफेंस मिक्स में अनुकूलता, इंटरनेशनल एक्सप्लोसिव्स में बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी और इन्वेंट्री से होने वाले फायदे को बताया।

कंपनी का ऑर्डर बुक लगभग ₹21,350 करोड़ का था, जिसमें डिफेंस बिज़नेस से ₹18,000 करोड़ से ज़्यादा का ऑर्डर शामिल था।FY27 के लिए, मॉर्गन स्टेनली को लगभग ₹14,000 करोड़ के रेवेन्यू और ₹2,050 करोड़ के नियोजित कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) की उम्मीद है। कंपनी Q1 के दौरान कैपेक्स पर पहले ही लगभग ₹450 करोड़ खर्च कर चुकी है।

45% की गिरावट संभव

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ ने सोलर इंडस्ट्रीज पर अपनी ‘Sell’ रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹11,200 तय किया है। इसका मतलब है कि गुरुवार के क्लोजिंग प्राइस से इसमें लगभग 45% की गिरावट आ सकती है।

कोटक ने Q1 के शानदार प्रदर्शन को माना। बेहतर काम-काज और प्रॉफिटेबिलिटी के कारण PAT उनके अनुमान से 18% ज़्यादा रहा। डिफेंस, इंटरनेशनल एक्सप्लोसिव्स और घरेलू एक्सप्लोसिव्स में ज़बरदस्त ग्रोथ के कारण रेवेन्यू सालाना आधार पर 70% बढ़कर लगभग ₹3,670 करोड़ हो गया। ब्रोकरेज के अनुसार, EBITDA मार्जिन सालाना आधार पर लगभग 170 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 27.9% हो गया।

हालांकि ₹21,400 करोड़ का ऑर्डर बुक खास तौर पर डिफेंस बिजनेस के लिए मीडियम-टर्म में अच्छी संभावना दिखाता है, लेकिन कोटक ने तिमाही के दौरान बेहतर काम-काज को देखते हुए FY27-29 के लिए EPS अनुमानों को 2-6% तक बढ़ा दिया है।

Solar Ind का Q1 परफॉर्मेंस

Solar Industries ने नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 92.7% की बढ़ोतरी दर्ज की, जो ₹338.7 करोड़ से बढ़कर ₹652.6 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 71.2% बढ़कर ₹3,688.2 करोड़ हो गया, जबकि EBITDA 93.6% बढ़कर ₹1,035.2 करोड़ हो गया।

EBITDA मार्जिन पिछले साल की इसी तिमाही के 24.8% से बढ़कर 28.1% हो गया।कंपनी ने FY27 के लिए ₹14,000 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट तय किया है।

मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO मनीष नुवाल ने कहा कि कंपनी ने Q1FY27 में अब तक का सबसे ज़्यादा तिमाही रेवेन्यू, EBITDA, PBT और PAT हासिल किया।नुवाल ने कहा कि ₹21,350 करोड़ से ज़्यादा के ऑर्डर बुक के दम पर कंपनी FY27 के लिए ₹14,000 करोड़ के रेवेन्यू गाइडेंस को हासिल करने की राह पर है। कंपनी इस साल कैपेक्स (capex) में ₹2,050 करोड़ निवेश करने की योजना बना रही है, जिसमें से ₹450 करोड़ Q1 में पहले ही लगाए जा चुके हैं।

Solar Industries India के शेयर शुक्रवार को सुबह 10.33 बजे 3.17% गिरकर ₹19694 पर ट्रे़ड कर रहे है। 2026 में अब तक इनमें 67% से ज़्यादा की बढ़त हुई है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Morepen Labs Share Price: 52 हफ्ते के हाई से 4% दूर ये शेयर आज 10% उछला, जानिए क्या है वजह

Morepen Labs Share Price: फार्मास्यूटिकल्स कंपनी मोरपेन लैबोरेटरीज लिमिटेड (Morepen Laboratories Limited) के शेयरों में गुरुवार को जबरदस्त उछाल देखने को मिला। शेयर आज इंट्राडे में 10 फीसदी की छलांग लगाता नजर आया। गुड़गांव की इस कंपनी के शेयर की कीमत में यह उछाल 3 दिन की गिरावट के बाद आई है। इससे पहले, हफ्ते के शुरुआती 3 दिनों में कंपनी के शेयर में 8.5% से ज़्यादा की गिरावट आई थी।

अगस्त में नतीजे घोषित करने के बाद से ही कंपनी के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। 4 अगस्त और 7 अगस्त के बीच कंपनी के शेयरों में 35% से ज़्यादा की बढ़त हुई थी, जिसके बाद तीन दिन तक लगातार गिरावट का दौर चला था।

4 अगस्त को शेयरों में 20% की उछाल आई थी, जब इस स्मॉल-कैप कंपनी ने जून तिमाही के लिए शानदार नतीजे घोषित किए थे। कंपनी का नेट प्रॉफ़िट ₹56.4 करोड़ रहा, जो एक साल पहले के ₹10.8 करोड़ से कहीं ज़्यादा था। कंपनी की टॉपलाइन (कुल आय) सालाना आधार पर 34.1% बढ़कर ₹570.1 करोड़ हो गई।

इसके अलावा, EBITDA पिछले साल के ₹24.2 करोड़ से तीन गुना से भी ज़्यादा बढ़कर ₹82.5 करोड़ हो गया, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन पिछले साल की इसी तिमाही के 5.7% से बढ़कर तेज़ी से 14.5% हो गया।

कंपनी के एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (API) रेवेन्यू में 31% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें API एक्सपोर्ट 42% बढ़ा। इसकी वजह बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और इंटरनेशनल क्लाइंट्स की तरफ से बढ़ी हुई मांग थी।

कुल मिलाकर, एक्सपोर्ट रेवेन्यू दोगुने से भी ज़्यादा हो गया और इसमें सालाना आधार पर 111% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹4,402.81 करोड़ है। प्रमोटरों के पास कंपनी की 35.65% हिस्सेदारी है, जबकि FIIs के पास 1.46% और DIIs के पास 1.29% हिस्सेदारी है।

पिछले 10 ट्रेडिंग सेशन में से 6 बार शेयरों में बढ़त देखी गई है और अब ये अपने हालिया 52-हफ़्ते के हाई ₹83.5 से सिर्फ़ 4% दूर हैं। यह स्टॉक अभी 46.6 गुना के ‘वन-ईयर फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल’ पर ट्रेड कर रहा है, जबकि सेक्टर का औसत 47.99 गुना है।

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GMR Airports घाटे से आई मुनाफे में, फिर क्यों हुए शेयर धड़ाम, इस कारण लगा झटका

GMR Airports Share Price: जीएमआर एयरपोर्ट्स के धमाकेदार कारोबारी नतीजे के बावजूद आज शेयर धड़ाम हो गए। जून तिमाही में कंपनी सालाना आधार पर घाटे से मुनाफे में आई तो रेवेन्य 24% बढ़ गया और साथ ही कंपनी ने ₹5000 करोड़ तक जुटाने की बात कही है। इसके बावजूद जीएमआर एयरपोर्ट्स के शेयर फिसल गए। फिलहाल बीएसई पर यह 1.01% की गिरावट के साथ ₹103.15 पर है। इंट्रा-डे में यह 1.44% गिरकर ₹102.70 तक आ गया था। पिछले एक साल में इसके शेयरों के चाल की बात करें तो पिछले साल 22 सितंबर 2025 को बीएसई पर यह एक साल के निचले स्तर ₹84.02 के भाव पर था जिससे 10 महीने में यह 37.59% उछलकर पिछले महीने 7 जुलाई 2026 को एक साल के हाई ₹115.60 पर पहुंच गया था।

GMR Airports Q1 Results: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में जीएमआर एयरपोर्ट्स कंसालिडेटेड लेवल पर सालाना आधार पर ₹212 करोड़ के घाटे से ₹91 करोड़ के मुनाफे में आ गई। इसे हाई रेवेन्यू और ऑपरेटिंग अर्निंग्स से सपोर्ट मिला। कंपनी का कंसालिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 24% बढ़कर जून तिमाही में ₹3,205 करोड़ से ₹3,964 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए इस दौरान 24% बढ़कर ₹1,165 करोड़ ₹1,447 करोड़ और EBITDA मार्जिन 36.3% से 36.5% पर पहुंच गया।

धमाकेदार नतीजे के बावजूद क्यों टूटा शेयर

जीएमआर एयरपोर्ट्स के शेयरों पर एक दबाव तो कमजोर मार्केट सेंटिमेंट से आया तो दूसरी वजह इसकी कारोबारी रिपोर्ट में ही है। इसकी निगेटिव इक्विटी ने इस पर दबाव डाला है तो EBITDA में डेप्रिसिएशन एंड एमॉर्टाइजेशन और फाइनेंस कॉस्ट की अधिक लागत ने भी झटका दिया है। निगेटिव इक्विटी को लेकर कंपनी ने बताया कि ऑपरेशंस से कैश फ्लो और ऑपरेटिंग परफॉरमेंस में सुधार के बावजूद जून के आखिरी में इसकी कुल इक्विटी नेगेटिव ₹1,428.65 करोड़ थी क्योंकि इसे मुख्य रूप से अनरियलाइज्ड फॉरेन-एक्सचेंज में उतार-चढ़ाव से नुकसान और पिछले वर्षों में कई प्रोजेक्ट्स के कैपिटलाइजेशन के बाद हाई डेप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट से झटका लगा।

हालांकि कंपनी ने उम्मीद जताई है कि आने वाले कंसेशन पीरियड के लिए दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट और GMR हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टैरिफ ऑर्डर के बाद रेवेन्यू और मार्जिन में सुधार होगा। कंपनी ने यह उम्मीद जताई कि अपनी देनदारियों को पूरा करने के लिए वह पर्याप्त फंड जुटा लेगी। बोर्ड ने इसे शेयर, बॉन्ड्स और वारंट्स इत्यादि के जरिए एक या अधिक किश्तों में ₹5 हजार करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। डेप्रिएशन एंड एमॉर्टाइजेशन से झटके की बात करें तो EBITDA में इसकी हिस्सेदारी जून 2026 तिमाही में ₹455.60 करोड़ थी तो फाइनेंस कॉस्ट ₹937.93 करोड़ थी।

LAPL Automotive IPO Listing: ₹135 पर लिस्ट ₹94 का शेयर, आईपीओ को मिली थी 344 गुना बोली

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LAPL Automotive IPO Listing: ₹135 पर लिस्ट ₹94 का शेयर, आईपीओ को मिली थी 344 गुना बोली

LAPL Automotive IPO Listing: दोपहिया से लेकर बस तक के लिए ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और एक्सेसरीज बनाने वाली एलएपीएल ऑटोमोटिव के शेयरों की आज BSE SME पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 344 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹94 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹135.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 43.62% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में थोड़ी फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹130.00 (LAPL Automotive Share Price)  पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 38.30% मुनाफे में हैं।

LAPL Automotive IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

एलएपीएल ऑटोमोटिव का ₹32 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 6-10 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 344.31 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 200.23 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 433.26 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 387.78 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 34,46,400 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹19.56 करोड़ औरंगाबाद के औरिक सिटी में एक अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने, ₹4.79 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹3.24 करोड़ आईपीओ से जुड़े खर्चों को भरने और ₹4.81 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

LAPL Automotive के बारे में

एलएपीएल ऑटोमोटिव कई प्रकार के ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और एक्सेसरीज की डिजाइनिंग कर उन्हें बनाती है और सप्लाई करती है। इसे ऑटोमोटिव लाइटिंग और सिग्नलिंग प्रोडक्ट्स बनाने में महारत हासिल है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी महाराष्ट्र के औरंगाबाद में है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में लाइटिंग डिविजन के तहत टेल लैम्प्स, ब्लिंकर लैम्प्स और हेडलैम्प्स हैं तो मोटर डिविजन के तहक स्टार्टर मोटर्स, वाइपर मोटर्स और रोटर्स हैं। इसके अलावा कंपनी के प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो में मिरर डिविजन के तहत दोपहिया और तिपहिया गाड़ियों के लिए रियर-व्यू मिरर्स हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 99% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹8.63 करोड़ और टोटल इनकम 24% से अधिक के सीएजीआर से ₹94.32 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹7.84 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹16.45 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

VIP Industries की सात तिमाहियों के बाद बढ़ी सेल्स, लेकिन दो मोर्चे पर तगड़ा शॉक

VIP Industries Share Price: लगातार सात तिमाहियों के बाद जून तिमाही में वीआईपी इंडस्ट्रीज की सेल्स ग्रोथ पॉजिटिव रही, जिसका असर आज इसके शेयरों पर दिख सकता है। हालांकि यह भी ध्यान रहे कि कंपनी का घाटा दोनों मोर्च पर बना हुआ है, एक नेट प्रॉफिट और दूसरा ईबीआईटीडीए के ऑपरेटिंग मोर्चे पर। शेयरों की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले यानी 13 अगस्त को रिजल्ट आने के पहले कमजोर मार्केट सेंटिमेंट में इसके शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखा था। बीएसई पर इसके शेयर 1.74% की गिरावट के साथ ₹310.75 के भाव पर बंद हुए थे और कंपनी ने शाम में कारोबारी नतीजे पेश किए थे।

VIP Industries Q1 Results: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में वीआईपी इंडस्ट्रीज का रेवेन्यू सालाना आधार पर ₹561.43 करोड़ से 3% बढ़कर ₹578.36 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि 80 से अधिक नए प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग के दम पर 50% रेवेन्यू मिला। वहीं ऑपरेटिंग लेवल पर यह इस दौरान ₹24.65 करोड़ के ईबीआईटीडीए गेन से ₹11.12 करोड़ के ईबीआईटीडीए लॉस में आ गई। इस दौरान कंपनी का नेट लॉस भी ₹13.1 करोड़ से तेजी से बढ़कर ₹53.56 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि कच्चे माल की तेजी के चलते इसकी प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ा और कच्चे माल को कच्चे तेल की महंगाई से झटका लगा।

कंपनी के एमडी और सीईओ अतुल जैन का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कंपनी अपने हर एक ब्रांड्स- वीआईपी (VIP), स्काईबैग्स (Skybags), एरिस्टोक्रेट (Aristocrat), अल्फा (Alpha) और कैपरीस (Caprese) को मजबूत करने पर फोकस बनाए हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि पूरी कंपनी और चैनल नेटवर्क में इन्वेंट्री को ऑप्टिमाइज किया गया है, ब्रांड और प्राइसिंग से जुड़े नियम तय किए गए हैं, एक मजबूत लीडरशिप टीम बनाई गई और चैनल इकोसिस्टम में नई जान फूंकी गई जिसके दम पर पुरानी दिक्कतें काफी हद तक खत्म हो चुकी हैं और वीआईपी अब ग्रोथ के अगले चरण के लिए तेजी पकड़ रही है। बता दें कि कंपनी ने सात तिमाहियों के बाद जून तिमाही में सेल्स में अच्छी ग्रोथ दिखाई है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

वीआईपी इंडस्ट्रीज के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 17 अक्टूबर 2025 को बीएसई पर यह ₹473.30 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल पर शेयरों की तेजी थम गई और 7 महीने में यह 41.16% टूटकर 18 मई 2026 को ₹278.50 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

MRF Share Price : Q1 नतीजों के बाद शेयर में गिरावट जारी लेकिन ब्रोकरेज बुलिश, आगे शेयर लगा सकता है 26% की छलांग

MRF Share Price : जून तिमाही में खराब ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस के कारण MRF के शेयरों में बुधवार, 12 अगस्त को थोड़ी गिरावट देखी गई। जिससे पिछले सेशन की गिरावट का सिलसिला जारी रहा। हालांकि ब्रोकरेज फर्म CLSA ने टायर बनाने वाली इस कंपनी पर ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बनाए रखी है।

MRF का शेयर 0.26 फीसदी गिरकर 1,30,785 रुपये पर बंद हुआ। बता दें कि मंगलवार को कंपनी के Q1 FY27 के नतीजे घोषित करने के बाद शेयर में 2.04 फीसदी की गिरावट आई थी। 2026 में अब तक टायर बनाने वाली इस कंपनी के शेयर में 13.4 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में 6.5 फीसदी की गिरावट देखी गई। MRF का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग 55,450 करोड़ रुपये था।

CLSA ने स्टॉक पर क्या दिया तर्क

CLSA ने MRF पर ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बनाए रखी है और प्रति शेयर 1,65,240 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जिसका मतलब है कि मंगलवार की क्लोजिंग प्राइस से इसमें लगभग 26 फीसदी की बढ़त हो सकती है। ब्रोकरेज ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान मार्जिन पर भारी दबाव का ज़िक्र किया और बताया कि MRF का EBITDA मार्जिन क्रमिक रूप से 453 बेसिस पॉइंट्स गिर गया और उनके अनुमान से कम रहा। यह कमज़ोरी ग्रॉस मार्जिन में 566 बेसिस पॉइंट्स की क्रमिक गिरावट के कारण आई, क्योंकि कच्चे माल की लागत में 16-18 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई थी।

Q1 में मुनाफ़े में कमी के बावजूद, CLSA को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में मार्जिन पर दबाव कम होगा। ब्रोकरेज के अनुसार, टायर इंडस्ट्री पहले ही कीमतों में लगभग 7-9 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर चुकी है और Q2 FY27 के दौरान और बढ़ोतरी की योजना है।

CLSA को उम्मीद है कि MRF के मार्जिन में क्रमिक रूप से सुधार होगा क्योंकि कंपनी को कीमतों में बढ़ोतरी का पूरे तिमाही का फ़ायदा मिलेगा। कीमतों में और बढ़ोतरी और ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) पर बढ़ी हुई लागत का बोझ डालने से भी मार्जिन में सुधार में मदद मिलनी चाहिए।

कैसे रहे तिमाही नतीजें

MRF ने जून तिमाही में कमाई में गिरावट दर्ज की, क्योंकि रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद ज़्यादा लागत का असर मुनाफ़े पर पड़ा। EBITDA सालाना आधार पर 7.46% घटकर ₹1,070.43 करोड़ से ₹990.63 करोड़ हो गया, जबकि EBITDA मार्जिन एक साल पहले के 13.95% से घटकर 11.77% रह गया। रेवेन्यू सालाना आधार पर 9.64% बढ़कर ₹8,415.50 करोड़ हो गया। कम मुनाफ़े का असर मंगलवार को स्टॉक पर दिखा, जब नतीजों के बाद MRF के शेयर 2% से ज़्यादा गिर गए।

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