PoK Bandh: पीओके में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बगावत! फुल शटडाउन और खाली पड़ीं सड़कें, क्यों सुलग रहा है ये इलाका?

PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों ने शहबाज शरीफ की सरकार के अत्याचार के खिलाफ अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। PoK में बुधवार (9 सितंबर) को एक बार फिर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के ऐलान पर पूरे क्षेत्र में शटर-डाउन और व्हील-जाम हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। कई इलाकों में दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। जबकि सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर उतरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा।

JAAC लंबे समय से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की सरकार और इस्लामाबाद की नीतियों के खिलाफ आंदोलन चला रही है। संगठन में व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हैं। आंदोलन अब केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व, स्थानीय शासन और पाकिस्तान के कथित हस्तक्षेप जैसे मुद्दे भी इसके केंद्र में आ गए हैं।

12 आरक्षित सीटों को खत्म करने की मांग

JAAC की प्रमुख मांगों में क्षेत्रीय विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय आबादी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित होता है और पाकिस्तान समर्थित राजनीतिक प्रभाव को बढ़ावा मिलता है। यह मुद्दा हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान भी काफी विवादित रहा। चुनाव हिंसा, सुरक्षा प्रतिबंधों और JAAC के बहिष्कार के बीच हुए। कुछ क्षेत्रों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के कारण मतदान भी टालना पड़ा।

आंदोलन के केंद्र में ये मुद्दे

PoK में विरोध का एक बड़ा कारण आर्थिक समस्याएं भी हैं। प्रदर्शनकारी बिजली की दरों, खाद्य एवं गेहूं सब्सिडी, रोजगार, महंगाई और सरकारी सुविधाओं को लेकर लंबे समय से नाराजगी जाहिर करते रहे हैं। इससे पहले भी क्षेत्र में बिजली और गेहूं की कीमतों को लेकर बड़े आंदोलन हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप रहा है कि आम जनता आर्थिक दबाव झेल रही है, जबकि राजनीतिक और प्रशासनिक वर्ग को विशेष सुविधाएं हासिल हैं।

पाक सरकार ने JAAC पर लगाया बैन

आंदोलन बढ़ने के डर से पाकिस्तान-प्रशासित क्षेत्र की सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगाने का कदम उठाया है। सरकार ने इसके पीछे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। हालांकि, संगठन के नेताओं और समर्थकों ने सरकार के इस कदम को विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया। पिछले कुछ महीनों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आई हैं। इन घटनाओं में मौत और घायल होने की खबरों ने तनाव को और बढ़ाया है। कई इलाकों में आवाजाही और संचार पर भी प्रतिबंध लगाए गए।

इन इलाकों में बंद का व्यापक असर

बुधवार के बंद का असर PoK के कई हिस्सों में दिखाई दिया। खासतौर पर भिंबर, मीरपुर, रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और नीलम घाटी समेत प्रमुख क्षेत्रों में बाजार बंद रहे। इस दौरान परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। लोगों ने अपनी मांगों के समर्थन में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नारे लगाए। JAAC का कहना है कि जब तक उसकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

नई सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

PoK में यह विरोध ऐसे समय में हो रहा है जब हालिया विधानसभा चुनावों के बाद पाकिस्तान की सत्तारूढ़ तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) ने करीब एक दशक बाद क्षेत्र में सत्ता में वापसी की है। ऐसे में JAAC का आंदोलन नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। एक ओर सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

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वहीं, दूसरी ओर प्रदर्शनकारी राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक राहत और स्थानीय मामलों में अधिक आजादी की मांग पर पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि सरकार और JAAC के बीच बातचीत का रास्ता नहीं निकलता है, तो टकराव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। आपको बता दें कि पीओके में पिछले कई महीनों से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।

यूपी में NCR की तर्ज पर बनेगा SCR! लखनऊ समेत 6 जिलों का बेस मैप मंजूर, देखें डेवलपमेंट प्लान

UP SCR map: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास को अब शहर की सीमाओं से बाहर ले जाने की तैयारी तेज हो गई है। प्रस्तावित उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (UP SCR) ने मंगलवार (8 सितंबर) को अपनी पहली बड़ी बाधा पार कर ली। यूपी एससीआर ने इसकी रिव्यू कमेटी ने छह जिलों वाले इस क्षेत्र के लिए बेस मैप को मंजूरी दे दी। इसके बाद अब क्षेत्र के लिए GIS आधारित रीजनल मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

UP SCR का उद्देश्य लखनऊ के आसपास एक योजनाबद्ध और आपस में जुड़ा हुआ क्षेत्रीय विकास मॉडल तैयार करना है। इसमें राजधानी के साथ-साथ सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

ये 6 जिले होंगे शामिल

उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (UP SCR) में लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली जिले शामिल हैं। यह पूरा क्षेत्र करीब 26,741 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा। इसका उद्देश्य केवल लखनऊ का विस्तार करना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शहरी विकास, परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाना है।

‘बेस मैप’ को मंजूरी देने का फैसला लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के ‘पारिजात सभागार’ में हुई समीक्षा समिति की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने की। अब इस बेस मैप को UP SCR की कार्यकारी समिति के सामने रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद रीजनल मास्टर प्लान तैयार करने का काम शुरू होगा।

30 बड़े प्रोजेक्ट पर होगा फोकस

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब राज्य सरकार पहले ही UP SCR के लिए बड़े विकास कार्यों की पहचान कर चुकी है। मई में सरकार ने क्षेत्र के लिए प्रमुख परियोजनाओं की सूची तैयार कर संबंधित विभागों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी थीं।

मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में लोकभवन में हुई बैठक में परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्थव्यवस्था और पर्यटन से जुड़े 29 प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 परियोजनाओं तक पहुंच गई है। LDA के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के मुताबिक, इन परियोजनाओं का चयन क्षेत्र की भविष्य की विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

सिर्फ लखनऊ नहीं, पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी पर जोर

UP SCR का सबसे बड़ा लक्ष्य ऐसा विकास नेटवर्क तैयार करना है जिसमें केवल लखनऊ पर निर्भरता न रहे। इसके लिए क्षेत्र के अलग-अलग जिलों को बेहतर सड़क, रेल और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। प्रस्तावित योजनाओं में स्टेट कैपिटल माला रीजनल रोड नेटवर्क, एलिवेटेड पेरीफेरल रोड और मौजूदा सड़कों के अपग्रेडेशन जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।

इसके अलावा ट्रांसपोर्ट नगर, ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की भी योजना बनाई जा रही है। इसका मकसद भविष्य में बढ़ने वाली आबादी और हर रोज बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को संभालना और छह जिलों के बीच आवागमन को आसान बनाना है।

इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स हब भी होंगे विकसित

रीजनल प्लान में आर्थिक विकास को भी बड़ी प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स पार्क, फूड पार्क और आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। विशेष रूप से लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के आसपास कॉरिडोर आधारित विकास को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। इससे उद्योगों, कारोबार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

2,239 जगहों पर हुई मैप की जमीनी जांच

UP SCR के बेस मैप को तैयार करने में सिर्फ सैटेलाइट तस्वीरों पर निर्भर नहीं किया गया। मैप की सटीकता जांचने के लिए छह जिलों में बड़े स्तर पर फील्ड वेरिफिकेशन यानी ग्राउंड-ट्रुथिंग की गई।

धिकारियों और कंसल्टेंट्स ने 2,239 स्थानों पर जाकर जमीनी स्थिति की जांच की।

सैटेलाइट इमेजरी और मैप में दर्ज जानकारी की तुलना वास्तविक स्थिति से की गई, ताकि मास्टर प्लान तैयार करते समय जमीन से जुड़ी सही और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध हो। इस पूरी प्रक्रिया में 22 विभागों और एजेंसियों से भी विचार-विमर्श किया गया। इनमें विकास प्राधिकरण, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, रेलवे, वन विभाग, नगर निकाय, सिंचाई विभाग और नगर एवं ग्राम नियोजन से जुड़े विभाग शामिल रहे।

लखनऊ पर बढ़ता दबाव कम करने की कोशिश

UP SCR की सबसे बड़ी सोच यह है कि विकास का लाभ केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित न रहे। सरकार चाहती है कि आसपास के जिलों में भी रोजगार, कारोबार, शिक्षा, परिवहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं का विस्तार हो। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों के लोगों को अपने ही जिले या आसपास रोजगार और कारोबार के अवसर मिल सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर अंतर-जिला कनेक्टिविटी होने से लोगों को नौकरी और बेहतर सुविधाओं के लिए लखनऊ की ओर पलायन करने की जरूरत भी कम हो सकती है।

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अब बेस मैप को UP SCR की कार्यकारी समिति के सामने रखा जाएगा। इसके बाद इसकी अगली प्रक्रिया पूरी होने पर GIS आधारित रीजनल मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। यही मास्टर प्लान आने वाले वर्षों में छह जिलों में सड़क, रेल, मेट्रो, उद्योग, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और शहरी विस्तार जैसी प्रोजेक्ट्स के लिए दिशा तय करेगा।

योगी सरकार में युवाओं के लिए रोजगार का एक और बड़ा अवसर

योगी सरकार में युवाओं के लिए रोजगार का एक और बड़ा अवसर

उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को गति देने की दिशा में योगी सरकार की पहल लगातार जारी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने प्रदेश के अशासकीय अनुदानित सह-शिक्षा महाविद्यालयों एवं महिला महाविद्यालयों में सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) के 1,936 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 8 सितंबर 2026 से शुरू हो गई है।

 

आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए आवेदन प्रक्रिया में वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) व्यवस्था लागू की गई है। सहायक आचार्य पद के लिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को ओटीआर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। निर्धारित अर्हता एवं पात्रता रखने वाले अभ्यर्थी ही आवेदन करेंगे। उन्होंने बताया कि विज्ञापित पदों की अर्हता एवं पात्रता के संबंध में अलग से व्यक्तिगत परामर्श उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।

 

आयोग की वेबसाइट पर विस्तृत विज्ञापन एवं निर्देश पुस्तिका उपलब्ध है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले विज्ञापन का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर सभी निर्धारित अर्हताएं पूरी करने के बाद ही आवेदन करें।

 

आयोग के उप सचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवेदन प्रक्रिया 8 सितंबर से प्रारंभ हो गई है। ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 7 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है, जबकि ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 11 अक्टूबर 2026 रहेगी। सहायक आचार्य पदों के लिए लिखित परीक्षा 19 एवं 20 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी।

 

परीक्षा से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम, परीक्षा केंद्र एवं अन्य आवश्यक दिशा-निर्देश आयोग की वेबसाइट पर समय-समय पर जारी किए जाएंगे। आयोग के अध्यक्ष ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे आवेदन से पहले विज्ञापन में दी गई शैक्षिक योग्यता, विषयवार पदों, आयु सीमा, आरक्षण, आवेदन प्रक्रिया एवं अन्य शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें और निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।

 

योगी सरकार की रोजगारपरक नीतियों के तहत प्रदेश में विभिन्न विभागों एवं संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। सहायक आचार्य के 1,936 पदों पर भर्ती से उच्च शिक्षा क्षेत्र में योग्य युवाओं को अवसर मिलने के साथ ही महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत : CM योगी

यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत : CM योगी

UP Textiles Conclave 2026

UP Textiles Conclave 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब अप यानी ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।

 

मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिष्ठित उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, प्रदेश के परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत और अभिनंदन किया।

फैब्रिक सेक्टर में यूपी चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक में काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं।

 

प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।

यूपी के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स प्रदेश में उपलब्ध है, जो टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

2017 से पहले वसूली की पर्ची लेकर लौट जाते थे निवेशक

मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की बन गई थी। हर जनपद में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। माफिया जहां हाथ रख देता, वह जमीन उसकी हो जाती और तत्कालीन सरकार मौन बनी रहती थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौट जाता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। अब किसी ने बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो उसके लिए दो ही जगह होंगी- जेल या जहन्नुम। अब कोई यूपी में खुलेआम पिस्टल लहरा कर नहीं चल सकता।

यूपी का नाम सुनकर दूरी बना लेते थे लोग

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट पैदा हो गया था। यूपी का नाम सुनकर प्रदेश के बाहर लोग यहां के नागरिकों को किराये पर मकान देने और होटल में कमरा देने तक से कतराते थे। किसी समाज और नागरिक के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है। यूपी का परिचय देने पर व्यक्ति को कई बार सामाजिक रूप से दूरी का सामना करना पड़ता था। यहां कोई पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से नहीं गुजरता था। उत्सव से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाता था। पूरे प्रदेश में लोग दंगों की आग में झुलसते थे। बरेली, मथुरा के कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे स्थानों पर बड़े दंगे हुए। व्यापक पैमाने पर पलायन हुआ और महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा।

अराजकता का शिकार बनीं कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें भी इसी अराजक व्यवस्था की शिकार बनीं। मगहर की कताई मिल 1977 में बनी और 1997 में बंद हो गई। बुनकरों और छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों को बैंक से ऋण मिलने में भी कठिनाई होती थी। डीबीटी की व्यवस्था के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ न तो नागरिकों तक पहुंचता था और न ही उद्यमियों तक। 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। अब यहां कानून का राज है।

यूपी के पास हैं 36 सेक्टोरल पॉलिसी

सीएम ने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 सेक्टोरल पॉलिसी हैं। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन यूपी में हो रहा है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के 6 स्ट्रेटेजिक नोड में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। प्रदेश में एमएसएमई के 12 प्लेज पार्क भी तैयार हो रहे हैं।

 

पिछले 9 वर्ष में यूपी पर कैपिटा इनकम तीन गुना करने और वूमेन वर्कफोर्स की भागीदारी भी तीन गुना बढ़ाने में सफल रहा है। यूपी पिछले 6 वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। यह निवेशकों का भरोसा है कि हमें पिछले 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। 65 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। हमने हर एमएसएमई को 5 लाख रुपये की सोशल सिक्योरिटी गारंटी दी है। आज यूपी में सर्वाधिक 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं।

नोएडा बन रहा है अपैरल सिटी

उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब केवल धागे, कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं है। डिफेंस, हेल्थकेयर, कृषि और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल तेजी से उभर रहा है। इसलिए उत्तर प्रदेश को ट्रेडिशनल टेक्सटाइल से आगे बढ़कर टेक्निकल टेक्सटाइल में भी अपनी ताकत बढ़ानी होगी। पीएम मित्र पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क जैसी पहल इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संतकबीरनगर और बिजनौर में परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित की गई है। सीतापुर, मऊ, कानपुर, झांसी और रायबरेली में टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

ग्लोबल वैल्यू चेन पार्टनर बनें एमएसएमई

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि एमएसएमई केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर नहीं, ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। युवा केवल जॉब सीकर नहीं, टेक्सटाइल एंटरप्रेन्योर और इनोवेटर बनें तथा कारीगर केवल सप्लायर नहीं, अपने ब्रांड के मालिक बनें। ‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी और एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के मंत्र से प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान मिले। निफ्ट रायबरेली और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट कानपुर युवाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। यूपी आज पॉलिसी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और मार्केट हर स्तर पर तैयार है। अब प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक पूंजी में बदलना है। बुनकर का हुनर, उद्यमी का कारोबार, युवाओं का रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, निवेश और निर्यात बढ़ाकर उत्तर प्रदेश को दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में स्थापित किया जाएगा।

 

कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग अनिल कुमार सागर सहित देशभर के प्रमुख उद्यमी, निवेशक, निर्यातक और टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

दुनिया के सबसे ज्यादा कमाने वाले नेता की सैलरी बढ़ी:सिंगापुर के प्रधानमंत्री को हर साल ₹27 करोड़ मिलेंगे; यह PM मोदी से 135 गुना ज्यादा

सिंगापुर सरकार ने प्रधानमंत्री, मंत्रियों और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी बढ़ाने का फैसला किया है। दुनिया के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले नेताओं में शामिल प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग की सालाना कमाई अब करीब ₹11 करोड़ बढ़ जाएगी। वोंग को फिलहाल सालाना करीब 22 लाख सिंगापुर डॉलर (लगभग ₹16 करोड़) मिलते हैं। बढ़ोतरी के बाद उनका सालाना पैकेज करीब 36 लाख सिंगापुर डॉलर (लगभग ₹27 करोड़) हो जाएगा। यानी उनकी कमाई में 60% से ज्यादा का इजाफा होगा। तुलना करें तो भारत के प्रधानमंत्री मोदी की सालाना सैलरी करीब ₹20 लाख है। इस हिसाब से वोंग की नई सालाना कमाई मोदी की सैलरी से करीब 135 गुना ज्यादा होगी। मंत्रियों की सैलरी भी बढ़ेगी अभी सिंगापुर के मंत्रियों को सालाना करीब 11 लाख सिंगापुर डॉलर (₹8.20 करोड़) मिलते हैं। नई व्यवस्था में यह बढ़कर करीब 12 लाख डॉलर (₹8.95 करोड़) हो जाएगी। वोंग के मुताबिक, मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म होने तक ज्यादातर मंत्रियों की सालाना कमाई 13.5 लाख डॉलर (करीब ₹10 करोड़) तक पहुंच सकती है। सैलरी का कुछ हिस्सा सरकार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। रोजगार बढ़ाने, लोगों की आय बढ़ाने और GDP ग्रोथ जैसे लक्ष्यों को हासिल करने पर उनकी कमाई बढ़ सकती है। सरकार का तर्क- ज्यादा सैलरी से भ्रष्टाचार कम होगा सिंगापुर सरकार लंबे समय से मंत्रियों को ज्यादा सैलरी देने के फैसले का बचाव करती रही है। सरकार का कहना है कि मंत्रियों को अच्छी सैलरी मिलनी चाहिए, ताकि योग्य लोग राजनीति में आएं और भ्रष्टाचार से दूर रहें। सिंगापुर दुनिया के सबसे कम भ्रष्ट देशों में शामिल है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में भी वह लगातार ऊंची रैंकिंग पर रहा है। सरकार इसे अपनी ऊंची सैलरी वाली व्यवस्था के पक्ष में एक उदाहरण मानती है। आम लोगों में नाराजगी, नौकरी और महंगाई को लेकर चिंता सिंगापुर में मंत्रियों की इतनी ज्यादा सैलरी लंबे समय से विवाद का मुद्दा रही है। आम लोगों की कमाई इसके मुकाबले काफी कम है। देश में औसत सालाना आय 5,775 सिंगापुर डॉलर यानी करीब ₹4.30 लाख है। इस बार भी सैलरी बढ़ाने के फैसले की आलोचना हुई। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि सरकार ने आम लोगों की परेशानियों को नजरअंदाज किया है। लोगों को नौकरी जाने, नए ग्रेजुएट्स को नौकरी मिलने और बढ़ती महंगाई की चिंता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछली तिमाही में नौकरी गंवाने वालों की संख्या 5 साल से ज्यादा समय में सबसे ज्यादा रही।
हालांकि, कुछ लोगों ने सरकार के फैसले का समर्थन भी किया। उनका कहना था कि देश चलाने के लिए ‘सबसे अच्छे लोगों’ को जिम्मेदारी देना जरूरी है। ———————

3 दिन की बजाय 12 घंटे में पहुंचेगा सामान! जानिए वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर यूपी के दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक क्या-क्या बदलेगा

उत्तर प्रदेश के दादरी से नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट को जोड़ने वाला 1600 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर अब पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वडोदरा दौरे के दौरान वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तीन प्रमुख हिस्सों का उद्घाटन कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने का औपचारिक ऐलान किया। इस बीच नवी मुंबई के उरण में पत्रकारों से बात करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह कॉरिडोर देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लाएगा। इससे भारत की लॉजिस्टिक्स लागत घटकर करीब 7 फीसदी रह जाएगी। इससे भारत चीन को सीधी टक्कर दे सकेगा और ग्लोबल सप्लाई चेन का ज्यादा मजबूत हिस्सा बन सकेगा।

लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, चीन से मुकाबला होगा आसान

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि पहले भारत की लॉजिस्टिक्स लागत करीब 14 प्रतिशत थी जबकि चीन में यह 7 प्रतिशत थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 14 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत पर आई थी। अब इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने से यह लागत घटकर करीब 7 प्रतिशत रह जाएगी। इससे भारतीय उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और वैश्विक बाजार में चीन का मुकाबला आसानी से कर सकेंगे।

3 दिन का सफर अब महज 12 घंटे में होगा पूरा

फडणवीस ने दावा किया है कि इस फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने से माल ढुलाई के समय में भारी गिरावट आएगी। सड़क के रास्ते जिस सामान को दादरी से जेएनपीटी तक पहुंचाने में करीब तीन दिन का समय लगता था, वही सामान अब फ्रेट कॉरिडोर के जरिए सिर्फ 12 घंटे में अपनी मंजिल तक पहुंच जाएगा। इस कॉरिडोर पर डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनें (एक कंटेनर के ऊपर दूसरा कंटेनर रखकर) दौड़ेंगी। इस तरह की एक ट्रेन 250 ट्रकों के बराबर माल एक बार में ले जा पाएंगी। इस पूरे कॉरिडोर में इलेक्ट्रिक ट्रेनों चलेंगी। इससे पेट्रोल और डीजल की भारी बचत होगी। इसके अलावा पर्यावरण प्रदूषण में भी बड़ी गिरावट आएगी।

महाराष्ट्र और JNPT को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

कई राज्यों से होकर गुजरने वाले इस 1600 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का अंतिम स्टेशन नवी मुंबई का जेएनपीटी है। सीएम फडणवीस ने कहा कि इसका सबसे अधिक लाभ महाराष्ट्र को मिलेगा। जेएनपीटी अगले दो सालों के भीतर 1 मिलियन से अधिक TEUs (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) कंटेनर कार्गो को हैंडल करने वाला देश का पहला बंदरगाह बनने जा रहा है। इस परियोजना से आयात-निर्यात पर निर्भर उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, व्यापार को गति मिलेगी और महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस ऐतिहासिक परियोजना को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, भारत सरकार और फाइनेंशियल मदद देने वाली जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के साथ जापान सरकार का आभार भी जताया है।

Coal Gasification Scheme: ₹37500 करोड़ की सरकारी स्कीम! अदाणी, NTPC समेत 7 कंपनियों ने आवेदन दिए

Coal Gasification Scheme: देश में कोयला गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने की सरकार की कोशिश तेज हो रही है। कोयला गैसीफिकेशन का मतलब है, कोयले को सीधे जलाने के बजाय उससे गैस बनाना। सरकार की ₹37,500 करोड़ की योजना के पहले राउंड में 7 कंपनियों ने आवेदन किया है।

इनमें Adani Enterprises, NTPC, Talcher Fertilisers, Gallantt Ispat और Shyam Sel & Power शामिल हैं। कंपनियों ने यूरिया, सिंथेटिक नेचुरल गैस, सिंथेसिस गैस और डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन से जुड़े प्रोजेक्ट के प्रस्ताव दिए हैं।

Adani Enterprises ने 3 आवेदन दिए

Adani Enterprises ने तीन अलग-अलग आवेदन जमा किए हैं। तीनों आवेदन यूरिया प्रोजेक्ट से जुड़े हैं।

Gallantt Ispat ने डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन और सिंथेसिस गैस बनाने का प्रोजेक्ट रखा है। वहीं, NTPC ने सिंथेटिक नेचुरल गैस प्रोजेक्ट के लिए आवेदन किया है।

Shyam Sel & Power ने सिंथेसिस गैस बनाने का प्रस्ताव दिया है। Talcher Fertilisers ने यूरिया प्रोजेक्ट के लिए आवेदन किया है।

अब आवेदनों की जांच होगी

ये 7 आवेदन योजना के पहले राउंड में मिले हैं। अब सरकार इनकी विस्तार से जांच करेगी। इसके लिए योजना की गाइडलाइंस और RFP को आधार बनाया जाएगा।

कोयला मंत्रालय का कहना है कि आवेदनों से इंडस्ट्री का भरोसा दिखता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि योजना के लिए कोई आवेदन नहीं आने की खबरें जल्दबाजी में कही गई थीं।

दूसरे राउंड के आवेदन शुरू

योजना के दूसरे राउंड के आवेदन 8 सितंबर से शुरू हो गए हैं। इसके बाद हर दो महीने में आवेदन की नई विंडो खुलेगी।

मंत्रालय के मुताबिक, कई कंपनियां अपने प्रोजेक्ट की तैयारी पहले ही शुरू कर चुकी हैं। कुछ प्रोजेक्ट एडवांस स्टेज में हैं। ऐसे में अगले राउंड में और आवेदन आने की उम्मीद है।

पहले राउंड का RFP 7 जुलाई 2026 को जारी हुआ था। कोयला गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट बड़े होते हैं। इनमें काफी पूंजी लगती है। इसलिए आवेदन से पहले कंपनियों को कई स्तर पर तैयारी करनी पड़ती है।

इसमें प्री-फिजिबिलिटी स्टडी, टेक्नोलॉजी असेसमेंट, पर्यावरण से जुड़ी जांच और फाइनेंशियल प्लानिंग शामिल है।

₹37,500 करोड़ की योजना का मकसद क्या है?

योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली यूनियन कैबिनेट ने 13 मई 2026 को मंजूरी दी थी। इसका कुल वित्तीय आउटले ₹37,500 करोड़ है।

इसके तहत घरेलू कोयले और लिग्नाइट से ज्यादा वैल्यू वाले प्रोडक्ट बनाने को बढ़ावा दिया जाएगा। इनमें सिंथेसिस गैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया और हाइड्रोजन शामिल हैं।

सरकार का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीफिकेशन क्षमता तैयार करना है। इसमें 75 मिलियन टन क्षमता मौजूदा योजना के तहत विकसित करने का लक्ष्य है।

आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी

सरकार LNG, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल के आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है। कोयला मंत्रालय के मुताबिक, FY25 में इन प्रोडक्ट के आयात पर करीब ₹2.77 लाख करोड़ खर्च हुए थे।

सरकार को उम्मीद है कि योजना से ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ का निवेश आ सकता है। इससे वैल्यू चेन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा होने की उम्मीद है।

पहले से चल रही है ₹8,500 करोड़ की योजना

नई योजना National Coal Gasification Mission और जनवरी 2024 में मंजूर ₹8,500 करोड़ की वित्तीय प्रोत्साहन योजना को आगे बढ़ाती है। मंत्रालय के मुताबिक, पुरानी योजना के तहत 8 गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट पहले से लागू किए जा रहे हैं।

सरकार घरेलू कोयले से ज्यादा वैल्यू वाले प्रोडक्ट बनाने पर जोर दे रही है। इनका इस्तेमाल फर्टिलाइजर, इंडस्ट्रियल गैस, ईंधन और दूसरे प्रोडक्ट बनाने में किया जा सकता है।

पहले राउंड में मिले 7 आवेदन इस योजना के लिए इंडस्ट्री की शुरुआती दिलचस्पी दिखाते हैं। आने वाले राउंड में और प्रोजेक्ट सामने आ सकते हैं।

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सीएम डॉ. मोहन यादव ने की शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट के साथ मीटिंग, एमपी के शिपिंग-लॉजिस्टिक्स में मिल सकता है सपोर्ट

सीएम डॉ. मोहन यादव ने की शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट के साथ मीटिंग, एमपी के शिपिंग-लॉजिस्टिक्स में मिल सकता है सपोर्ट

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' (Annual Investment Meeting) के तीसरे दिन 8 सितंबर को ताज दुबई में शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर से अहम मुलाकात की। दोनों के बीच शिपिंग-लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में मध्यप्रदेश के हर सेक्टर में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कपूर को अगले साल होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर समिट (GIS) 2027 के लिए आमंत्रित किया। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर के बीच हुई बैठक में मध्यप्रदेश में रेल-साइडिंग युक्त लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसके लिए लगभग 30-50 मिलियन अमेरिकी डॉलर (250-450 करोड़ रुपये) के निवेश का प्रस्ताव है। इस परियोजना से लगभग 300-600 लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। बैठक में बताया गया कि कंपनी इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र में निवेश करने के लिए इच्छुक है। साथ ही, मध्यप्रदेश के अन्य संभावित स्थानों पर भी निवेश की संभावनाएं तलाशने के लिए तैयार है।

 

बैठक में इस प्रस्ताव पर हुई चर्चा-बैठक में मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, आधुनिक वेयरहाउसिंग और रीजनल डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स का विकास किए जाने पर चर्चा हुई। बैठक में कहा गया कि कंपनी एग्रीकल्चर, फूड, फार्मास्यूटिकल्स और ऑर्गनाइज़्ड रिटेल सप्लाई चेन के लिए कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगी। मध्यप्रदेश के उत्पादों के लिए एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कार्गो कंसॉलिडेशन और इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन तय करेगी। प्रमुख कमर्शियल और डेस्टिनेशन लोकेशन्स में रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और टूरिज़्म इन्वेस्टमेंट पर ध्यान देगी। कंपनी कुशल लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स के लिए सप्लाई-चेन टेक्नोलॉजी और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पार्टनरशिप करेगी। साथ ही, स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स, वेंडर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स को ग्रुप के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम से जोड़ेगी।

 

कंपनी के पास कई स्टोरेज यार्ड-कंपनी के प्रेसिडेंट कपूर ने बैठक में बताया कि कंपनी भारत में अपनी भारतीय सहायक कंपनी हिंद टर्मिनल्स प्राइवेट लिमिटेड (HTPL) के माध्यम से मौजूद है। कंपनी मल्टी-मॉडल एग्री-लॉजिस्टिक्स पार्कों की स्थापना एवं संचालन, रेल-रोड परिवहन तथा थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में कार्यरत है। एचटीपीएल इनलैंड कंटेनर डिपो के संचालन के साथ-साथ ताजे कृषि उत्पादों के संरक्षण के लिए कोल्ड-चेन समाधान भी उपलब्ध कराती है। कंपनी भारत में 35 मालवाहक ट्रेनों और लगभग 900 ट्रकों का संचालन कर रही है। कंपनी मध्यप्रदेश में अपना संचालन एवं प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए विशेष रूप से इच्छुक है। कंपनी के पास देश में पर्याप्त स्टोरेज यार्ड उपलब्ध हैं। कंपनी 69 देशों में काम कर रही है। उसका मुख्यालय दुबई है। कंपनी शिपिंग-लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन, रिटेल, ट्रैवल एवं टूरिज्म, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, फायनेंशियल सर्विसेज, हॉस्पिटेलिटी और रियल इस्टेट सेक्टर में काम करती है।

नेपाल-आंदोलन के एक साल बाद भी मुकदमे झेल रहे Gen-Z:पुरानी और मौजूदा सरकार में खास अंतर नहीं; संविधान-संशोधन जैसे मुद्दे अब भी अधूरे

नेपाल में भ्रष्टाचार खत्म करने और सुशासन की मांग को लेकर 8-9 सितंबर 2025 को हुए Gen-Z आंदोलन को एक साल पूरा हो गया है। आंदोलन के बाद सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी। इसके बाद बालेन के नेतृत्व वाली सरकार को भी 6 महीने हो चुके हैं। इसके बावजूद आंदोलन के दौरान उठाए गए कई मुद्दे अब तक अधूरे हैं। Gen-Z युवाओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे भी वापस नहीं लिए गए हैं। संविधान और शासन व्यवस्था में बदलाव, निर्वाचन प्रणाली में सुधार, Gen-Z युवा परिषद का गठन, आंदोलन के दौरान दमन करने वालों पर कार्रवाई, शहीद परिवारों को राहत, रोजगार और भ्रष्टाचार खत्म करने जैसे मुद्दों पर सरकार की गंभीरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शरीर में अब भी छर्रे, इलाज का खर्च खुद उठा रहे आंदोलन के दौरान घायल हुए लोगों को अब तक पर्याप्त इलाज नहीं मिल सका है। Gen-Z आंदोलन में सक्रिय अर्जुन चुंदाली के मुताबिक, कुछ घायल अपने खर्च पर भारत जाकर इलाज करा रहे हैं। कई लोगों के शरीर में अब भी गोलियों के छर्रे हैं। Gen-Z आंदोलन में दो दिनों के दौरान 77 लोगों की मौत हुई थी और 2,429 लोग घायल हुए थे। आंदोलन से करीब 84 अरब 45 करोड़ रुपए के बराबर आर्थिक नुकसान का अनुमान है। पहले दिन संसद भवन के सामने 20 से ज्यादा छात्रों की मौत हुई थी। गृहमंत्री बोले- मांगें पूरी करने में जुटे हैं आंदोलन के अगुआ रहे सुदन गुरुंग अब नेपाल के गृहमंत्री हैं। उन्होंने कहा, “हमने जो कसम खाई है, उसे पूरा करना है। कई काम बाकी हैं, लेकिन हम जुटे हुए हैं।” Gen-Z आंदोलन शहीद परिवार के अध्यक्ष नारायण श्रेष्ठ ने कहा कि आंदोलन के दौरान युवाओं पर अत्याचार करने वाले दोषियों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहीद और घायल परिवारों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की पूरी जिम्मेदारी राज्य को लेनी चाहिए। भास्कर एक्सपर्ट: नए लोगों को जनमत दिलाने तक सीमित रहा आंदोलन राजनीतिक विश्लेषक प्रो. डॉ. बासुदेव खनाल के मुताबिक, Gen-Z आंदोलन पुराने राजनीतिक दलों के प्रति आक्रोश पैदा करने और नए लोगों के पक्ष में जनमत बनाने तक सीमित रह गया। उनका कहना है कि Gen-Z युवा कानून के शासन के लिए लड़े थे, लेकिन आज भी देश कानून और नीति के बजाय आदेश और अध्यादेश से चलाया जा रहा है। इससे यह संदेश मिलता है कि असंगठित आंदोलन से नुकसान तो ज्यादा हो सकता है, लेकिन ठोस परिणाम हासिल करना मुश्किल है। कई मोर्चों पर सरकार की रफ्तार धीमी बहुदलीय शासन व्यवस्था की वापसी के बाद पदाधिकारियों की संपत्ति जांच के लिए बना आयोग भी अब तक काम शुरू नहीं कर सका है। सरकारी नियुक्तियों में नेताओं के करीबियों को तरजीह देने के आरोप भी लग रहे हैं। सरकारी तंत्र में डर का माहौल है। बड़े पदों से लगातार इस्तीफे हो रहे हैं, जिसे लेकर भी चिंता बढ़ रही है। आर्थिक मोर्चे पर भी हालात बेहतर नहीं हैं। बैंकों में निवेश के लिए पैसा मौजूद है, लेकिन निवेशक पैसा लगाने को तैयार नहीं हैं। विदेशी निवेश भी घटा है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… नेपाल बाढ़- 7 सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश जारी:अब तक 13 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू, 5 हजार अब भी लापता नेपाल में आई बाढ़ के 13 दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू टीम अलग-अलग 7 हाईड्रोपॉवर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Shukra Nakshatra Gochar: 11 सितंबर से 4 राशियों के जातकों को मिलेगा इतना पैसा कि भर जाएगी तिजोरी, राहू के स्वाति नक्षत्र में शुक्र करेंगे गोचर

Shukra Nakshatra Gochar: ज्यातिष शास्त्र में ग्रहों का राशि या नक्षत्र परिवर्तन एक सामान्य घटना है, जो समय-समय पर होती रहती है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के स्थान बदलने का असर बहुत व्यापक माना जाता है। ग्रह चाहे राशि बदलें या नक्षत्र, उसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिलता है। वैदिक ज्योतिष में शुक्र को सुख, वैभव, सौंदर्य, प्रेम, कला और भौतिक समृद्धि का कारक माना जाता है। यह ग्रह 11 सितंबर को स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं। स्वाति नक्षत्र वायु तत्व और राहू ग्रह से संचालित नक्षत्र है, जो स्वतंत्रता, व्यापार, कूटनीति, रचनात्मकता और लचीलेपन का प्रतीक माना जाता है। यह नक्षत्र तुला राशि के अंतर्गत आता है, जो कि स्वयं शुक्र की स्वराशि है। इसलिए, जब शुक्र अपनी स्वराशि के स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसके विशेष परिणाम देखने को मिलते हैं:

शुक्र और राहू के नक्षत्र के संयोग से फैशन, संगीत, डिजाइनिंग, मीडिया और कला से जुड़े लोगों को अचानक बड़ी सफलता या नए विचार प्राप्त होते हैं। स्वाति नक्षत्र स्वतंत्रता और व्यवसाय का कारक है। इस दौरान स्वतंत्र व्यवसाय करने वालों या व्यापार में नई साझेदारी शुरू करने वालों को बड़ा लाभ होता है। जातक के व्यक्तित्व में निखार आता है, सामाजिक दायरा बढ़ता है और लोग बातचीत कला से प्रभावित होते हैं। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता तो आती है, लेकिन पार्टनर एक-दूसरे से स्वतंत्रता और स्पेस की मांग भी कर सकते हैं।

4 राशियों के जातकों की भरेगी तिजोरी

वृषभ राशि : शुक्र गोचर से वृषभ राशि वालों को अच्छे परिणामों की प्राप्ति होगी। नौकरी करने वाले कुछ जातकों को मेहनत का पूरा फल मिलेगा। उच्चाधिकारी आपके काम से प्रसन्न हो सकते हैं। प्रमोशन के साथ आय में वृद्धि के योग बन रहे हैं। सेहत के लिहाज से यह समय बहुत अच्छा रहेगा।

कर्क राशि : कर्क राशि के लिए शुक्र नक्षत्र परिवर्तन आर्थिक उन्नति लेकर आ सकता है। इस समय आपके धन की स्थिति में अच्छा बदलाव हो सकता है। भौतिक सुख-संपदा में वृद्धि होगी। आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा। आकर्षण के केंद्र बनेंगे। भूमि, भवन और वाहन की खरीदारी के प्रबल योग हैं।

तुला राशि : तुला राशि के वालों के लिए शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन बेहतरीन परिणाम प्रदान कर सकता है। स्वाति नक्षत्र में शुक्र के आने से आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। पराक्रम रंग लाएगा। रोजी-रोजगार में तरक्की करेंगे। धन से जुड़ी दिक्कतें दूर होंगी। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताएंगे।

कुंभ राशि : कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र नक्षत्र गोचर लाभकारी या शुभता का संकेत दे रहा है। इस समय आकस्मिक धन लाभ हो सकता है जिससे बैंक-बैलेंस में वृद्धि हो सकती है। कर्ज से छुटकारा मिलने की संभावना है। किसी सकारात्मक समाचार की प्राप्ति रिश्तेदार या परिवार के सदस्य से हो सकती है।

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