Russia-Ukraine War: यूक्रेन में लक्ष्मी मित्तल के स्टील प्लांट पर रूस का मिसाइल अटैक! 2 की मौत, ब्लास्ट-फर्नेस तबाह

Russian Attack on ArcelorMittal Ukraine: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल के स्वामित्व वाले ‘आर्सेलरमित्तल’ (ArcelorMittal) के यूक्रेन स्थित विशाल स्टील प्लांट पर रूस ने भीषण मिसाइल हमला किया है। यह हमला यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के गृहनगर क्रिवी रिह (Kryvyi Rih) में स्थित प्लांट पर हुआ, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई और 14 कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए।

रॉयटर्स के अनुसार, इस हमले से देश के सबसे बड़े स्टील प्लांट की पावर-जनरेशन और ब्लास्ट-फर्नेस इकाइयों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे प्लांट का उत्पादन आंशिक रूप से रोकना पड़ा है।

ब्लास्ट-फर्नेस और पावर यूनिट तबाह, उत्पादन ठप

कंपनी ने मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर जारी एक बयान में पुष्टि की कि रात के समय हुए इस मिसाइल हमले ने प्लांट के मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह ने कहा कि पावर जनरेशन और ब्लास्ट-फर्नेस सेक्टर की प्रमुख सुविधाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिसके कारण विनिर्माण प्रक्रियाओं को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।

यह प्लांट यूक्रेन के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक परिसरों में से एक है। ऊर्जा आपूर्ति और ब्लास्ट-फर्नेस को नुकसान पहुंचने से देश के स्टील उद्योग को बड़ा झटका लगा है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की का गृहनगर बना निशाना, दागे 62 मिसाइलें

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि रूसी सेना नागरिक और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार निशाना बना रही है। जेलेंस्की के मुताबिक, पिछले केवल एक हफ्ते में ही रूस ने यूक्रेन के शहरों पर 1,550 से अधिक अटैक ड्रोन, करीब 1,560 गाइडेड एरियल बम और 62 मिसाइलें दागी हैं। क्रिवी रिह के अलावा कीव और अन्य शहरों में हुए हमलों में भी कई नागरिक घायल हुए हैं और इमारतों में आग लग गई।

रूस ने कीव और क्रिवी रिह के सैन्य-औद्योगिक ठिकानों को बनाया निशाना

रूसी रक्षा मंत्रालय ने हमले की पुष्टि करते हुए अपनी दलील दी कि उसने क्रिवी रिह के मेटलर्जिकल प्लांट और कीव में स्थित सैन्य-औद्योगिक सुविधाओं को ही निशाना बनाया था। इसके साथ ही मॉस्को ने दावा किया कि उसने अपनी सीमा की ओर आ रहे 822 यूक्रेनी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया है।

जवाब में यूक्रेन का रूस पर भीषण ड्रोन हमला

यूक्रेन ने भी रूस के अंदर गहराई तक जाकर लंबी दूरी के ड्रोनों से करारा पलटवार किया है। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव के अनुसार, युद्ध की शुरुआत के बाद से यूक्रेन द्वारा किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला था, जिसमें 83 वर्षीय एक बुजुर्ग की मौत हो गई। पोडॉल्स्क में रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर ‘वाइल्डबेरीज’ (Wildberries) के एक बड़े गोदाम पर ड्रोन गिरा, जिससे वहां धुएं का विशाल गुबार उठता देखा गया।

बेलगोरोड शहर के पास एक बस पर हुए ड्रोन हमले में 1 व्यक्ति की मौत हुई, जबकि रोस्तोव (Rostov) क्षेत्र में यूक्रेन ने रूस की मिसाइल ईंधन उत्पादन इकाई को निशाना बनाने का दावा किया।

नाटो क्षेत्र में घुसा संदिग्ध रूसी ड्रोन, स्पेनिश लड़ाकू विमान ने मार गिराया

युद्ध का यह तनाव अब नाटो (NATO) देशों की सीमा तक पहुंच गया है। रोमानिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मोलदोवा की दिशा से एक ड्रोन रोमानियाई हवाई क्षेत्र में घुस आया।

नाटो के एयर-पुलिसिंग मिशन पर तैनात स्पेनिश वायुसेना के F-18 फाइटर जेट ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस ड्रोन को मार गिराया। नाटो प्रवक्ता के अनुसार यह एक संदिग्ध रूसी ड्रोन था। चालू वर्ष में रोमानियाई सीमा पर इस तरह की यह चौथी घटना है।

फ्रंटलाइन पर युद्ध की गति धीमी पड़ने और शांति वार्ताओं के अधर में लटके होने के कारण, अब रूस और यूक्रेन दोनों ही एक-दूसरे के ऊर्जा, औद्योगिक और आर्थिक ठिकानों को मिसाइल व ड्रोनों से नष्ट करने की रणनीति अपना रहे हैं। लक्ष्मी मित्तल के प्लांट पर हुआ यह हमला इस बात का प्रमाण है कि यह युद्ध अब वैश्विक और क्षेत्रीय व्यापार परिसंपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

रूस पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला:6 की मौत, मॉस्को के पास गोदाम में आग लगी; रूस ने 1400 ड्रोन मार गिराए

यूक्रेन ने रविवार को रूस पर युद्ध शुरू होने के बाद अब तक का सबसे बड़े ड्रोन हमला किया है। इसमें कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई। इन ड्रोन हमलों में मॉस्को के पास रूसी ई-कॉमर्स कंपनी वाइल्डबेरिज के डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर में आग लग गई। यह गोदाम करीब 2 लाख वर्ग मीटर में फैला है। सामने आई तस्वीरों में इमारत का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में दिखाई दिया। आसमान में दूर तक काला धुआं उठता नजर आया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसने पिछले 24 घंटे में 9 यूक्रेनी क्रूज मिसाइल और कुल 1,478 ड्रोन मार गिराए हैं। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने बताया कि करीब 600 ड्रोन राजधानी की ओर दागे गए थे। उन्होंने इसे पिछले दो साल में मॉस्को पर हुआ सबसे बड़ा हवाई हमला बताया। यूक्रेन ने 1,500 मील तक हमला करने की क्षमता बढ़ाई यूक्रेन ने 2026 में अपनी लंबी दूरी की ड्रोन और मिसाइल क्षमता में तेजी से इजाफा किया है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अब वह रूस की सीमा से करीब 1,500 मील दूर तक मौजूद ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है। यूक्रेन इन हथियारों से रूस के गोदामों, तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। इससे युद्ध में पहली बार रूस की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता को कड़ी चुनौती मिल रही है। दोनों देशों की एयर डिफेंस यानी हवाई हमलों को रोकने वाले सिस्टम पर भी लगातार दबाव बढ़ रहा है। वाइल्डबेरीज के ठिकाने क्यों निशाने पर? पिछले एक महीने में यूक्रेन ने वाइल्डबेरीज से जुड़ी कई इमारतों और सुविधाओं को निशाना बनाया है। कंपनी रूस के ऑनलाइन कारोबार में बड़ी भूमिका निभाती है और इसके डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर देशभर में फैले हैं। यूक्रेन के हमलों में करीब 20 गोदामों और दूसरी इमारतों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे हमलों का मकसद रूस की सप्लाई चेन और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है। रूस के हमलों में यूक्रेन में 7 लोगों की मौत इसी दौरान रूस ने यूक्रेन पर भी ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इन हमलों में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई। यूक्रेन के सूमी सीमा क्षेत्र में 2 लोगों की मौत हुई, जबकि देश के दूसरे हिस्सों में 3 और लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। रविवार सुबह करीब 3 बजे कीव पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया। इसमें 6 लोग घायल हुए और राजधानी में कई जगह आग लग गई। कीव के ओबोलोंस्की जिले में पेट्रोव्का बुक मार्केट का बड़ा हिस्सा जल गया। दुकानदारों के मुताबिक, आग में उनकी किताबों का पूरा स्टॉक नष्ट हो गया। जेलेंस्की बोले- रूस नागरिक इलाकों को निशाना बना रहा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इमरजेंसी सर्विस के कर्मचारियों की तारीफ की। उन्होंने रूस पर नागरिक इलाकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया। जेलेंस्की ने कहा कि रूस अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की पहुंच वाले इलाकों में नागरिक ढांचे पर हमला कर रहा है। उनके मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में रूस ने यूक्रेन के शहरों और दूसरे इलाकों पर 1,550 से ज्यादा ड्रोन, करीब 1,560 गाइडेड बम और 62 मिसाइल दागीं। इनमें बड़ी संख्या बैलिस्टिक मिसाइलों की थी। बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकना यूक्रेन के लिए बड़ी चुनौती यूक्रेन धीमी गति से आने वाले ड्रोन को रोकने में काफी हद तक सफल रहा है। लेकिन तेज गति से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकना उसके लिए बड़ी चुनौती है। ऐसी मिसाइलों को रोकने में अमेरिका की Patriot एयर डिफेंस प्रणाली अहम भूमिका निभाती है। हालांकि, लगातार हो रहे रूसी हमलों के कारण यूक्रेन के पास इन इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार सीमित हो गया है।

लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे साल नहीं पहुंचे खरगे और राहुल गांधी, क्या सीट विवाद है वजह?

लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे साल नहीं पहुंचे खरगे और राहुल गांधी, क्या सीट विवाद है वजह?

why rahul gandhi and mallikarjun kharge

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लाल किले पर आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार दूसरे साल शामिल नहीं हुए। 2024 में सीट व्यवस्था को लेकर हुए विवाद के बाद से यह मुद्दा फिर चर्चा में है। ALSO READ: युवाओं के लिए पीएम मोदी का बड़ा प्लान, 1 करोड़ को AI ट्रेनिंग, फ्री कोचिंग से लेकर स्पोर्ट्स टैलेंट हंट तक बड़े ऐलान

 

स्वतंत्रता दिवस समारोह में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को टेबल ऑफ प्रेसीडेंस के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों के ठीक बाद सीट दी जानी थी। हालांकि मुख्य कार्यक्रम से राहुल गांधी समेत संपूर्ण विपक्ष ने दूरी बनाई।

 

बैठने की व्यवस्था को लेकर हुआ था विवाद

गौरतलब है कि 2024 में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान बैठने की व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को परंपरा और प्रोटोकॉल से अलग हटकर दूसरी आखिरी पंक्ति में बैठाया गया था। ALSO READ: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के बड़े ऐलान, सप्तधारा से लेकर विजन विकसित भारत 2047 तक का प्रधानमंत्री के भाषण की 10 खास बातें

 

विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे जनता का अपमान करार दिया था, जबकि कार्यक्रम का आयोजन करने वाले रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी थी कि पेरिस ओलंपिक में भाग लेने वाले एथलीटों को सम्मानित करने और जगह देने के लिए बैठने के क्रम में बदलाव किया गया था।

 

बहरहाल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2025 के स्वतंत्रता दिवस समारोह से दूरी बनाई और इस बार भी वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। 2024 में हुए सीट विवाद को ही इस साल भी कार्यक्रम में न पहुंचने की वजह माना जा रहा है। ALSO READ: लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा विजन, ‘सप्तधारा’ की 7 शक्तियों से बदलेगा भारत; जानिए क्या हैं ये शक्तियां

भारतीय नौसेना का किलर ड्रोन प्लान, वॉरशिप से 1000 किमी दूर से ही दुश्मन का जहाज होगा तबाह! समझिए कैसे करेगा काम

लाल सागर में हाल के दिनों में हुए ड्रोन हमलों के बाद दुनियाभर की नौसेनाएं अपनी बेड़े की सुरक्षा और हमला करने की क्षमताओं की समीक्षा कर रही हैं। इसी बीच भारतीय नौसेना ने भी अपनी युद्धक क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है। नौसेना अपने युद्धपोतों के लिए 1000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाले शिप-लॉन्च्ड लॉइटरिंग म्यूनिशंस हासिल करने की योजना बना रही है। इस कदम से नौसेना को नौसैनिक चुनौतियों से निपटने और तटीय इलाकों में दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने की जबरदस्त क्षमता हासिल हो जाएगी।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने इन मध्यम दूरी के ड्रोनों की जरूरतों को हरी झंडी दे दी है। आपको बता दें कि 1000 किलोमीटर की विशाल रेंज से भारतीय नौसेना के सर्फेस फ्लीट की परिचालन पहुंच काफी हद तक बढ़ जाएगी। इसके जरिए भारतीय युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र के रणनीतिक इलाकों में तैनात रहकर परिचालन कर सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस क्षमता की बदौलत भारतीय युद्धपोत दुश्मन की तटीय मिसाइलों की पहुंच से काफी बाहर रहते हुए भी दुश्मन के तटीय और जमीनी ठिकानों पर विनाशकारी हमला कर पाएंगे।

हवा में 9 घंटे की स्टेमिना और 200 नॉट्स से अधिक गोता लगाने की रफ्तार

भारतीय नौसेना ऐसे स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम की तलाश में है जो हवा में 9 घंटे तक लगातार मंडरा सकें। लक्ष्य की पहचान होने पर ये ड्रोन 200 नॉट्स से अधिक की रफ्तार से दुश्मन पर सीधे गोता लगाकर हमला कर सकेंगे। इन किलर ड्रोनों में दिन और रात दोनों समय काम करने वाले इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सीकर लगे होंगे ताकि दिन हो या रात दुश्मन की पहचान कर उसे तबाह किया जा सके। नौसेना की शर्त है कि ये हथियार वन मीटर से कम सर्कुलर एरर प्रोबेबल के साथ अचूक और सटीक हमला करने में सक्षम होने चाहिए।

सबसे खास विशेषता यह है कि ये ड्रोन ऐसे कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम करेंगे जहां सैटेलाइट नेविगेशन सिग्नल को जाम कर दिया गया हो, स्पूफ किया गया हो या उनका सिग्नल पूरी तरह बंद कर दिया गया हो।

ऑपरेटर एक साथ नियंत्रित करेगा 10 ड्रोन

रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रणाली को इस तरह से डिजाइन किया जाना जरूरी है कि जहाज पर मौजूद सिर्फ एक ऑपरेटर एक मॉड्यूलर कंट्रोल कंसोल के जरिए एक साथ 10 ड्रोनों को नियंत्रित कर सके। हवा में उड़ रहे इन ड्रोनों का नियंत्रण एक जहाज से दूसरे जहाज या फिर जमीन पर बने स्टेशन के बीच भी आसानी से स्थानांतरित किया जा सकेगा।

मौसम की मार झेलने की क्षमता और 20 साल तक लाइफ

नौसेना ने इन प्रणालियों के लिए बहुत ही कड़े पर्यावरणीय मानक तय किए हैं। वेंडरों को यह साबित करना होगा कि ये ड्रोन बेहद कठिन मौसमी परिस्थितियों में भी काम कर सकते हैं ताकि 50 नॉट्स की तेज हवाओं और 95% की नमी के स्तर के दौरान भी इन्हें लॉन्च किया जा सके। ड्रोन के क्रिटिकल कंपोनेंट की लाइफ पर भी कम से कम 10 सालों की गारंटी होनी चाहिए, जिसे जरूरत पड़ने पर 20 सालों तक बढ़ाया जा सके।

बाय इंडियन कैटिगरी के तहत होगी खरीद, बढ़ेगी स्वदेशी ताकत

रक्षा मंत्रालय इन प्रणालियों को बाय इंडियन-आईडीडीएम (Buy Indian-IDDM – Indigenously Designed, Developed and Manufactured) कैटिगरी के तहत खरीदने की योजना बना रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य इंडिजिनस इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट और देश के अंदर ही मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।

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15 अगस्त पर लाल किले में दिखेगा नया इतिहास! जश्न में पहली बार दो ऐतिहासिक पल

15 अगस्त से पहले दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। लाल किले के पास दंगल पार्क में भारतीय सेना के जवानों ने पारंपरिक 21 तोपों की सलामी रिहर्सल की जा रही है। इस बार समारोह में ‘युवा शक्ति’, ‘विकसित भारत 2047’ और ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने को खास जगह दी जाएगी।

युवा शक्ति और Gen-Z

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इस बार लाल किले पर होने वाला स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की युवा शक्ति और Gen-Z पर फोकस रहेगा। इसमें युवाओं की अचीवमेंट, उनकी नई सोच और देश के डेवलपमेंट में उनके योगदान को सामने रखा जाएगा। साथ ही 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका को भी खास तरीके से दिखाया जाएगा। सेरेमनी में युवा अचीवर्स को स्पेशल गेस्ट के तौर पर बुलाया गया है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह

इस साल ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए स्वतंत्रता दिवस समारोह में इसे खास जगह दी जाएगी। पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से तिरंगा फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे।

टेक्नोलॉजी और साइंस

स्वतंत्रता दिवस समारोह में भारत की तकनीकी और वैज्ञानिक अचीवमेंट को भी दिखाया जाएगा। न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, स्पेस और मॉडर्न टेक्निक सेक्टर में देश ने जो प्रगति की है, उसकी झलक विजुअल्स के जरिए दिखाई जाएगी। इन्विटेशन कार्ड में ‘सेवा तीर्थ’ को प्रायोरिटी दी गई है, जो पब्लिक सर्विस और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को दिखाती है।

इंटर्नशिप और डेवलपमेंट स्कीम

इस बार समारोह में देश के युवा प्रतिभाओं को खास सम्मान दिया जाएगा। इंटरनेशनल फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और मैथमैटिक्स ओलंपियाड 2026 में मेडल जीतने वाले 19 स्टूडेंट्स को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा युवा इनोवेटर्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम के इंटर्न, स्किल डेवलपमेंट स्कीम का लाभ लेने वाले और MY भारत के वॉलंटियर्स जैसे युवा अचीवर्स भी समारोह में शामिल होंगे।

जल संरक्षण

इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में बैठने की जगहों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे जाएंगे। इसका मकसद लोगों का ध्यान जल संरक्षण और पानी बचाने की जरूरत की ओर अट्रैक्ट करना है।

इस बार का स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की परंपरा, युवाओं की ताकत और भारत की तरक्की की झलक एक साथ दिखाएगा। ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने से यह मौका और खास बन गया है। युवा प्रतिभाओं के सम्मान और देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ समारोह में विकसित भारत 2047 का संदेश भी मिलेगा।

जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से पैट्रियट मिसाइलें मांगी:बोले- यूक्रेन भेजो, गोदामों में न रखो; रूस के हमले में 9 की मौत

रूस के ताजा मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से तुरंत पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के इंटरसेप्टर मिसाइल भेजने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ये मिसाइलें लोगों की जान बचाने के लिए हैं, इसलिए इन्हें गोदामों में रखने के बजाय यूक्रेन भेजा जाना चाहिए। रूस ने शनिवार रात कीव समेत कई शहरों पर बड़े पैमाने पर हमला किया था। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक हमले में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 40 लोग घायल हुए हैं। जेलेंस्की बोले- पैट्रियट नहीं, इसलिए सिर्फ एक मिसाइल रोक पाए जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि रूस ने रातभर में 35 मिसाइलें, जिनमें 27 बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, और करीब 185-190 ड्रोन दागे। इनमें से यूक्रेन केवल एक बैलिस्टिक मिसाइल को ही रोक सका, क्योंकि पैट्रियट सिस्टम के लिए इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार लगभग खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा, “अमेरिका और यूरोप जानते हैं कि हमें क्या चाहिए। अब केवल राजनीतिक फैसला लेने की जरूरत है। बैलिस्टिक रोधी मिसाइलें लोगों की रक्षा करें, गोदामों में न पड़ी रहें। हर दिन की देरी रूस को हमारे लोगों की जान लेने का एक और मौका देती है।” जेलेंस्की बोले- रूस नई रणनीति अपना रहा, नए प्रतिबंध लगाएं जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस अब जेट इंजन से लैस शाहेद ड्रोन का अधिक इस्तेमाल कर रहा है और युद्ध लंबा खिंचने का फायदा उठाकर नई हमलावर रणनीतियां विकसित कर रहा है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों से रूस के मिसाइल, लॉन्चर और हथियार उद्योग से जुड़े लोगों और कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाने की भी अपील की। साथ ही कहा कि रूस के तेल शोधन और ईंधन क्षेत्र को मिलने वाली मदद रोकना भी जरूरी है, ताकि उसकी युद्ध क्षमता कमजोर हो सके। रूस बोला- सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि हमले में कीव स्थित यूक्रेन के सैन्य-औद्योगिक प्रतिष्ठानों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निशाना बनाया गया। वहीं यूक्रेन का कहना है कि हमले में रिहायशी इलाके और नागरिक भी प्रभावित हुए। जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अमेरिका के साथ होने वाली आगामी कूटनीतिक बातचीत की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यूक्रेन को हथियारों और वायु रक्षा प्रणाली को लेकर सहयोगी देशों से ठोस समर्थन मिलेगा। पैट्रियट मिसाइल सिस्टम क्या है पैट्रियट अमेरिका का अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और लड़ाकू विमानों को हवा में ही मार गिराने के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह बेहद कम समय में आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को भी इंटरसेप्ट कर सकता है। इसी वजह से रूस के लगातार बढ़ते मिसाइल हमलों के बीच यह यूक्रेन की सबसे अहम सुरक्षा ढाल माना जाता है। पैट्रियट सिस्टम में लॉन्चर, रडार, कमांड सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होती हैं। रडार पहले लक्ष्य की पहचान करता है, फिर कमांड सेंटर खतरे का आकलन कर इंटरसेप्टर मिसाइल दागता है, जो हवा में ही दुश्मन की मिसाइल को नष्ट कर देती है।

DRDO Apprentice Recruitment 2026: अप्रेंटिस भर्ती के लिए डीआरडीओ में आवेदन शुरू, जानें अप्लाई करने की लास्ट डेट और स्टाइपेंड की डिटेल

DRDO Apprentice Recruitment 2026: रक्षा अनुसंधान क्षेत्र में काम करने वाली डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) ने आईटीआई, डिप्लोमा और ग्रेजुएट अप्रेंटिस पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 21 अगस्त, 2026 तक बताए गए फॉर्मेट में अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। आधिकारिक विज्ञापन के अनुसार, अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण रक्षा मंत्रालय के तहत सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL), तिमारपुर, दिल्ली में आयोजित की जाएगी। ट्रेनिंग का समय 12 महीने का होगा, और चुने गए उम्मीदवारों को लागू नियमों के अनुसार स्टाइपेंड मिलेगा।

डीआरडीओ अप्रेंटिस भर्ती 2026: पदों का विवरण

डीआरडीओ अप्रेंटिस भर्ती अभियान के तहत आईटीटाई अप्रेंटिस, डिप्लोमा अप्रेंटिस और ग्रेजुएट अप्रेंटिस की तीन श्रेणियों में उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इसमें शामिल हैं

आईटीआई अप्रेंटिस – पदों की संख्या अलग-अलग ट्रेड के अनुसार तय की जाएगी।

डिप्लोमा अप्रेंटिस – 41 वैकेंसी

ग्रेजुएट अप्रेंटिस : विभिन्न विषयों में भर्ती की जाएगी।

डीआरडीओ ने स्पष्ट किया है कि लैबोरेटरी की जरूरतों के आधार पर अप्रेंटिसशिप पोजीशन की संख्या बदल सकती है।

शैक्षिक योग्यता

आईटीआई अप्रेंटिस : कैंडिडेट्स ने कक्षा 10 पास की हो और नीचे दिए गए किसी भी ट्रेड में आईटीआई में फर्स्ट डिवीजन हासिल की हो :

  • फिटर
  • इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक
  • इलेक्ट्रीशियन
  • कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (COPA)
  • मशीनिस्ट
  • कारपेंटर

डिप्लोमा अप्रेंटिस : कैंडिडेट्स के पास इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन या कंप्यूटर साइंस में फर्स्ट डिवीजन डिप्लोमा होना चाहिए, साथ ही क्लास 10 फर्स्ट डिवीज़न में होनी चाहिए।

ग्रेजुएट अप्रेंटिस : एप्लिकेंट्स के पास नीचे दिए गए किसी भी ट्रेड में फर्स्ट डिवीजन होनी चाहिए:

  • फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स या कंप्यूटर साइंस में बीएससी
  • बीए या बीकॉम
  • किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूशन से इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, वीएलएसआई या केमिकल इंजीनियरिंग में बीई/बीटेक

योग्यता मानदंड

जिन कैंडिडेट्स ने 2022, 2023, 2024, 2025 या 2026 में अपनी क्वालिफाइंग डिग्री या डिप्लोमा पूरा किया है, वे आवेदन करने के लिए योग्य हैं। 2022 से पहले पास हुए उम्मीदवार आवेदन न करें। सिर्फ वे कैंडिडेट ही अप्लाई कर सकते हैं जिन्होंने रेगुलर स्टूडेंट के तौर पर अपना क्वालिफाइंग कोर्स पूरा किया है।

डिप्लोमा और ग्रेजुएट अप्रेंटिस एप्लीकेंट को नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम (NATS) पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा, जबकि ITI कैंडिडेट को अप्लाई करने से पहले अप्रेंटिसशिप इंडिया पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा। SC, ST, OBC, PwD, और EWS कैंडिडेट्स के लिए रिजर्वेशन अप्रेंटिस एक्ट, 1961, अप्रेंटिसशिप रूल्स, 1992, और अप्रेंटिसशिप (अमेंडमेंट) रूल्स, 2015 के प्रोविज़न के अनुसार दिया जाएगा।

अप्लाई कैसे करें

कैंडिडेट्स को सही तरीके से भरा हुआ एप्लीकेशन फॉर्म सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी के साथ पोस्ट से इस पते पर भेजना होगा:

डायरेक्टर, SSPL

कृपया ध्यान दें: HRD

सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL)

डीआरडीओ, लखनऊ रोड, तिमारपुर, दिल्ली – 110054

एप्लीकेशन 21 अगस्त, 2026 को या उससे पहले लेबोरेटरी में पहुंच जाना चाहिए।

जरूरी बातें

  • अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग 12 महीने की होगी।
  • ऑफर लेटर सहित सभी कम्युनिकेशन सिर्फ ईमेल से भेजे जाएंगे।

चुने हुए कैंडिडेट्स को जॉइनिंग के बाद पुलिस वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट जमा करना होगा। अप्रेंटिसशिप पूरी होने से डीआरडीओ या एसएसपीएल में नौकरी की गारंटी नहीं मिलती। एसएसपीएल के पास बिना कोई कारण बताए अप्रेंटिसशिप की पोस्ट की संख्या बढ़ाने या घटाने या रिक्रूटमेंट प्रोसेस को कैंसिल करने का अधिकार है।

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स्पेन में समुद्र के रास्ते घुसे हजारों मुस्लिम शरणार्थी : पुलिस और कोस्ट गार्ड हुए बेहाल, अब सेना ने संभाला मोर्चा!

Spain migrant crisis

Spain migrant crisis: भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) और अटलांटिक महासागर के रास्ते यूरोप में अवैध प्रवासन (Illegal Migration) संकट एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। उत्तर अफ्रीकी देशों और उप-सहारा (Sub-Saharan) क्षेत्र से लकड़ी और रबर की नावों में सवार होकर आए हजारों शरणार्थियों ने स्पेन के तटीय इलाकों में अप्रत्याशित रूप से प्रवेश किया है।

 

अचानक हुए इस भारी जनसांख्यिकीय दबाव के कारण स्थानीय पुलिस और स्पेनिश कोस्ट गार्ड (Salvamento Marítimo) की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और तटीय क्षेत्रों में व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्पैनिश सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों और सशस्त्र बलों (Spanish Armed Forces) को मोर्चे पर तैनात कर दिया है।

कैसे पैदा हुए हालात? 

स्पेन के स्वायत्त शहरों— सेउटा (Ceuta) और मेलिला (Melilla)—के साथ-साथ केनरी द्वीप समूह (Canary Islands) और अंदालुसिया (Andalusia) के तटों पर बीते कुछ दिनों से नावों के आने का सिलसिला जारी है।

  • मानव तस्करी का नया रूट : तस्करों के नेटवर्क ने मोरक्को, अल्जीरिया और पश्चिमी अफ्रीका के तटों से समुद्र के रास्ते छोटे-छोटे जहाजों और रबर बोटों के जरिए हजारों प्रवासियों को समुद्र में उतारा।
  • कोस्ट गार्ड की सीमाएं : समुद्र में क्षमता से अधिक भरे जहाजों से कई बार हादसों का खतरा बना रहता है। स्पैनिश कोस्ट गार्ड लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन्स चला रहे हैं, लेकिन एक साथ सैकड़ों नावों के पहुंचने के कारण उनके संसाधन कम पड़ गए हैं।
  • स्थानीय बुनियादी ढांचे पर दबाव : तटीय क्षेत्रों में बने प्रोसेसिंग सेंटर (CIE – Centres for Internment of Foreigners) पूरी तरह भर चुके हैं। अस्पतालों और राहत शिविरों पर अत्यधिक दबाव देखा जा रहा है।

सेना की तैनाती और सरकार का रुख

स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पेनिश गृह और रक्षा मंत्रालय ने समन्वय बनाकर प्रभावित तटीय सीमाओं और सेउटा/मेलिला की जमीनी सीमा पर सेना की विशेष टुकड़ियों को तैनात किया है।

  • सीमा सुरक्षा मजबूत करना : सेना और गार्डिया सिविल (Civil Guard) मिलकर सीमाओं पर बाड़ (Fencing) की निगरानी बढ़ा रहे हैं ताकि अवैध रूप से प्रवेश करने वालों को रोका जा सके।
  • मानवीय सहायता और रसद : सशस्त्र बल प्रवासियों को प्राथमिक चिकित्सा, भोजन, अस्थायी टेंट और आपातकालीन राहत सामग्री पहुंचाने में भी नागरिक प्रशासन की मदद कर रहे हैं।
  • यूरोपीय संघ (EU) से मदद की गुहार : स्पेन ने यूरोपीय संघ (European Union) की सीमा एजेंसी Frontex से अतिरिक्त सुरक्षा बल और आपातकालीन वित्तीय सहायता की मांग की है।

भू-राजनीतिक और सामाजिक कारण 

यूरोप में शरणार्थियों का यह संकट कोई नई घटना नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में इसके पीछे कई बड़े कारण उभरकर सामने आए हैं:

  • अफ्रीका में राजनीतिक अस्थिरता व गरीबी : पश्चिम और उत्तर अफ्रीका के कई देशों में राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक संकट और सुरक्षा संबंधी खतरों के कारण लोग बेहतर भविष्य की तलाश में यूरोप का रुख कर रहे हैं।
  • यूरोपीय संघ की प्रवासन नीति (EU Migration Pact) : यूरोपीय संघ के देशों के बीच शरणार्थियों के पुनर्वास और सीमा नियंत्रण को लेकर खींचतान जारी है। इटली, ग्रीस और स्पेन जैसे अग्रिम सीमा वाले देश इस संकट का सबसे ज्यादा असर झेल रहे हैं।

आगे क्या होगा?

स्पेन सरकार एक ओर जहां कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रवासियों के कागजात की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर मोरक्को और अन्य पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत जारी है ताकि अवैध प्रवासन के नेटवर्क को शुरुआती बिंदु पर ही रोका जा सके। कानून और व्यवस्था बनाए रखना और इसके साथ ही मानवीय संवेदनाओं का संतुलन साधना वर्तमान में स्पेनिश प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

 

ईरान से जंग में कूदा सऊदी अरब! इराक में US संग मिलकर तबाह किए कई ठिकाने, कुरान की आयत का दिया हवाला

US Saudi Joint Airstrikes in Iraq: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बहुत बड़ा भू-राजनीतिक मोड़ आया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से अब तक दूरी बनाकर रख रहा सऊदी अरब अब इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल हो गया है। बुधवार को सऊदी ने अमेरिकी वायुसेना के साथ मिलकर पूर्वी इराक में सक्रिय ईरान-समर्थित उग्रवादी गुटों के ठिकानों पर भीषण एयरस्ट्राइक की।

सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इसे ‘आत्मरक्षा’ में की गई सैन्य कार्रवाई बताया है, लेकिन अपनी इस कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पवित्र कुरान की एक आयत का हवाला देकर यह साफ कर दिया है कि अगर उसकी संप्रभुता और तेल सुविधाओं पर हमला हुआ, तो वह खामोश नहीं रहेगा।

कुरान की आयत और UN चार्टर का दिया हवाला

हमलों के तुरंत बाद सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने लिखा कि सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने रियाद और पूर्वी प्रांत में स्थित तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने आ रहे कई ईरानी ड्रोनों को मार गिराया। ये ड्रोन इराक की सरजमीं से दागे गए थे।

सऊदी अरब ने अपनी कार्रवाई को धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों आधारों पर सही ठहराया। सऊदी मंत्रालय ने कुरान का संदर्भ देते हुए लिखा, ‘अगर कोई आप पर हमला/आक्रमण करे, तो उस पर उसी तरह हमला करो जैसे उसने आप पर हमला किया है।’ इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए सऊदी ने कहा कि हर देश को अपनी रक्षा और आत्मरक्षा का वैध अधिकार है।

अमेरिका और सऊदी का संयुक्त हमला: CENTCOM

अमेरिकी सेंट्रल कमान ने पुष्टि की कि अमेरिकी और सऊदी फाइटर जेट्स ने पूर्वी इराक में ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) द्वारा संचालित उग्रवादी अड्डों, हथियारों के गोदामों और लॉजिस्टिक्स हब को निशाना बनाया।

CENTCOM के अनुसार, यह कार्रवाई पिछले 72 घंटों में IRGC के इशारे पर सऊदी अरब और अमेरिकी ठिकानों पर किए गए 30 से अधिक हवाई ड्रोन हमलों के जवाब में की गई है। फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में यह पहली बार है जब सऊदी अरब ने इराक के भीतर किसी उग्रवादी समूह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने की बात खुलकर सार्वजनिक रूप से स्वीकार की है।

‘मजबूरी में लिया युद्ध में कूदने का फैसला’

न्यू यॉर्क टाइम्स से बातचीत में गल्फ इंटरनेशनल फोरम के सीनियर फेलो अब्दुलअजीज अल घशियान ने बताया कि सऊदी अरब अब तक संयम बरत रहा था, लेकिन ईरान और उसके समर्थक गुटों ने सऊदी के इस संयम को उसकी ‘कमजोरी या चुप्पी’ समझ लिया।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस एयरस्ट्राइक के जरिए सऊदी अरब अपने चारों तरफ मौजूद दुश्मनों को यह कड़ा संदेश देना चाहता है कि सऊदी इंफ्रास्ट्रक्चर या तेल सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

मध्य पूर्व से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट हसन अलहसन का कहना है कि हालांकि सऊदी इस युद्ध को और बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन यह हमला तेहरान के लिए एक सख्त चेतावनी है कि अगर उकसावे की कार्रवाई जारी रही, तो सऊदी को मजबूरी में अमेरिका के साथ मिलकर पूर्ण सैन्य मोर्चा खोलना पड़ेगा।

जंग में सऊदी अरब की एंट्री, अमेरिका के साथ मिलकर इराक पर की एयर स्ट्राइक

iran us war

डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर के बीच ईरान ने खाड़ी में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया है तो दूसरी तरफ सऊदी अरब के सब्र का भी बांध टूट गया है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि बुधवार 29 जुलाई को उसने अमेरिका के साथ मिलकर इराक में ईरान के समर्थित मिलिशिया ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, इन समूहों का संबंध सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर हुए हमलों से था। बता दें कि ईरान समर्थित PMF के 8 लड़ाके मारे गए हैं। वहीं, जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं हैं।

इससे पहले सऊदी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि उसने इराक से उड़ाए गए कई ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया। ये ड्रोन पूर्वी सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए भेजे गए थे। एक अलग बयान में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी कहा कि अमेरिका और सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में कई आतंकवादी ठिकानों, हथियारों के गोदामों और सामान पहुंचाने वाले ठिकानों पर हमला किया है। यह कार्रवाई लगातार हो रहे ड्रोन हमलों के जवाब में की गई।

एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान ने बिना किसी उकसावे के वीकेंड से ही सऊदी अरब के सहयोगियों पर हमले करवाए थे। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार उस अधिकारी ने कहा, “यह साफ संदेश है कि हम ऐसी कोशिशों का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेंगे”

उधर, सऊदी अरब ने अपने पूर्वी प्रांत के तेल ठिकानों की ओर बढ़ रहे कई ड्रोन मार गिराने का दावा किया। वहीं, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट में तीन तेल टैंकर रोकने का दावा किया है। इसके अलावा, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक सऊदी तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइल दागने की बात कही है।

ट्रंप- नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में मीटिंग : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मंगलवार (28 जुलाई) को डोनाल्ड ट्रंप से मिलने पहुंचे। राष्ट्रपति ट्रंप और नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में लंबी मीटिंग चली। इस दौरान दोनों के बीच युद्ध समेत कई मसलों पर बातचीत हुई। दावा किया जा रहा है कि इस मीटिंग में नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ नई सीक्रेट जानकारी शेयर की है, जो कि ईरान के लिए सिरदर्द बन सकती है।