क्या है भारत का नया ड्रोन किलर Bhargavastra, जानिए दुश्मन के Drone Swarm को तुरंत कैसे करेगा तबाह

Bhargavastra updates: मॉडर्न हो रही मिलिट्रीज के ड्रोन्स ने सैन्य अभियानों का रूप पूरी तरह बदल दिया है। यूक्रेन-रूस के युद्ध से लेकर वेस्ट एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे वॉर तक, मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) ने निगरानी, रेकी और सटीक हमलों का तरीका बदल दिया है। भारत का ऑपरेशन सिंदूर भी इस बात का प्रतीक है कि कैसे ड्रोन्स और लॉइटरिंग म्यूनिशन ने अहम भूमिका निभाई थी। जैसे-जैसे ड्रोन्स युद्धक्षेत्र पर हावी हो रहे हैं, दुनिया भर की सेनाएं दुश्मन के ड्रोन्स को हमले से पहले ही पहचानने, ट्रैक करने और तबाह करने के लिए प्रभावी सिस्टम विकसित कर रही हैं। इसी दिशा में भारत का लेटेस्ट और बड़ा कदम है स्वदेशी ड्रोन किलर भार्गवास्त्र (Bhargavastra)।

24 जुलाई को भारतीय सेना के सामने हुआ प्रदर्शन

भारतीय सेना ने 24 जुलाई को भार्गवास्त्र के प्रदर्शन को देखा। यह एक स्वदेशी रूप से विकसित, वीकल-माउंटेड काउंटर-स्वाम ड्रोन सिस्टम है। इसे विशेष रूप से हथियारबंद ड्रोन्स, लॉइटरिंग म्यूनिशन और इंडिपेंडेंट ड्रोन झुंडों को बेअसर करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे मेक-II कार्यक्रम के तहत सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) द्वारा विकसित किया गया है। यह एक लेयर्ड हार्ड-किल काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जो दुश्मन के ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट करने के लिए अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स और सटीक-निर्देशित माइक्रो-मिसाइलों के कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करता है।

10 किमी दूर से पहचान और सेंसर सिस्टम

भार्गवास्त्र एक उन्नत C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस) आर्किटेक्चर से जुड़ा हुआ है। इसमें पहचान और ट्रैकिंग के लिए त्रिस्तरीय सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। बड़े UAVs को 10 किलोमीटर तक की दूरी पर और छोटे ड्रोन्स को कम दूरी पर डिटेक्ट कर सकता है। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सेंसर दिन और रात दोनों समय निगरानी और ट्रैकिंग के लिए हैं। इसका पैसिव रेडियो-फ्रीक्वेंसी सेंसर दुश्मन के सिग्नल और ड्रोन्स को बिना खुद की लोकेशन दिए ट्रैक कर लेता है।

नागपुर फैसिलिटी में हुआ प्रदर्शन

SDAL की नागपुर स्थित फैसिलिटी में प्रदर्शन के दौरान, इस सिस्टम ने ड्रोन्स के एक झुंड का सफलतापूर्वक पता लगाया और उसे ट्रैक किया। सिस्टम ने रियल-टाइम एयर पिक्चर जनरेट की, अलर्ट जारी किए और लॉन्चर को टारगेट असाइन किए। सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण लाइव रॉकेट फायरिंग नहीं की गई लेकिन मेक-II कार्यक्रम के तहत स्टेटस रिव्यू के हिस्से के रूप में भारतीय सेना की टीम के सामने पूरी एंगेजमेंट सीक्वेंस का प्रदर्शन किया गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स जैमिंग से आगे: ‘हार्ड-किल’ तकनीक

पारंपरिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या स्पूफिंग पर निर्भर करते हैं लेकिन भार्गवास्त्र को एक हार्ड-किल समाधान के रूप में तैयार किया गया है। यह उन ऑटोनॉमस ड्रोन्स के खिलाफ बेहद कारगर है जिन पर इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर या जैमिंग का असर नहीं होता। यह अपने स्वदेशी रॉकेट्स और सटीक माइक्रो-मिसाइलों के लेयर्ड आर्किटेक्चर के जरिए एकल ड्रोन्स और समन्वित ड्रोन झुंडों दोनों को नष्ट कर देता है।

5,000 मीटर की ऊंचाई और रेगिस्तान में भी तैनाती योग्य

भार्गवास्त्र को भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसे रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और समुद्र तल से 5000 मीटर तक की अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। यह भारतीय सशस्त्र बलों के मौजूदा कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क के साथ आसानी से इंटिग्रेट हो सकता है, जिससे भविष्य में नेटवर्क-केंद्रित युद्ध अभियानों में मदद मिलेगी।

कम लागत और आर्थिक फायदा

भार्गवास्त्र का एक बड़ा फायदा इसकी किफायती लागत है। कम कीमत वाले ड्रोन्स को नष्ट करने के लिए अत्यधिक महंगी सरफेस-टू-एयर मिसाइलों का इस्तेमाल करने के बजाय, भार्गवास्त्र अपेक्षाकृत सस्ते रॉकेट और माइक्रो-मिसाइलों का उपयोग करता है। इससे काउंटर-ड्रोन युद्ध में खर्च में काफी कमी आती है।

भारत का वैश्विक ड्रोन हब बनने का विजन

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब भारत घरेलू ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर जोर दे रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस संबंध में कहा है कि हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि हम इस देश में वैश्विक स्तर का ड्रोन इकोसिस्टम विकसित करें। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण के लिए वैश्विक हब बनाने हेतु मिशन मोड में काम करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें देश की भविष्य की रक्षा क्षमताओं में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

यूक्रेन में शिप पर हमला, 4 भारतीयों की मौत:भारत ने कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना निंदनीय; यूक्रेन बोला- रूसी मिसाइलों से हमला हुआ

यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से रवाना हुए कार्गो जहाज ‘MV गोल्डन लियो’ पर रविवार को हुए हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। भारत सरकार ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह निंदनीय है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास लगातार यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है। उधर, यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, गोल्डन लियो जहाज ओडेसा से मक्का लेकर रवाना हुआ था। पोर्ट से निकलने के कुछ देर बाद उस पर तीन रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यूक्रेन की नौसेना ने कहा कि हमले के बाद जहाज में आग लग गई। रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्र में जहाज से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी बाद में पहचान हुई। हमले के बाद की 3 तस्वीरें… जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, 19 जुलाई की शाम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर हमला हुआ। उस समय जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर थे, जिनमें पांच भारतीय शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीयों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायल भारतीय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है। कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिक क्रू को निशाना बनाना या समुद्री व्यापार और नेविगेशन की आजादी में बाधा डालना निंदनीय है और इससे बचा जाना चाहिए। वहीं, यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण के मुताबिक घटना के बाद पूरी रात सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हमले में नौ क्रू मेंबर और एक समुद्री पायलट की मौत हुई, जबकि 17 में से आठ क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया। ब्लैक सी में बढ़ता तनाव, कारोबार पर असर यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब रूस और यूक्रेन के बीच ब्लैक सी और सी ऑफ एजोव में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे कारोबारी जहाजों और अनाज के निर्यात पर खतरा बढ़ गया है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद ब्लैक सी दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में शामिल हो गया। कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौतों से अनाज का निर्यात फिर शुरू हुआ था, लेकिन हाल के महीनों में बढ़े हमलों से यह व्यवस्था फिर प्रभावित हुई है। यूक्रेन लगातार रूस के ऊर्जा ढांचे और तेल टैंकरों को निशाना बना रहा है। वहीं रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, ईंधन भंडारण केंद्रों और कार्गो जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया है कि उसकी सेना ने ओडेसा बंदरगाह पर ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया। वैश्विक अनाज कारोबार पर भी असर यूक्रेन दुनिया के कुल गेहूं निर्यात का करीब 6% और मक्का निर्यात का लगभग 11% हिस्सा देता है। लेकिन लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण ब्लैक सी के जरिए होने वाला यूक्रेन का अनाज निर्यात करीब एक-तिहाई तक प्रभावित हुआ है। दूसरी तरफ यूक्रेनी हमलों का असर रूस के अनाज कारोबार पर भी पड़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों के कारण रूस को सी ऑफ एजोव के रास्ते होने वाली जहाजों की आवाजाही सीमित करनी पड़ी है। इसी रास्ते से रूस के करीब एक-चौथाई अनाज का निर्यात होता है। —————– ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन के हमले से रूस में भी होर्मुज जैसा संकट:एजोव सागर में जहाजों की आवाजाही रुकी, 9 दिन में 116 जहाजों पर हमले हुए यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बाद रूस को बड़ा झटका लगा है। इस सप्ताह हमलों की वजह से रूस को एजोव सागर के अहम समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इससे दुनिया के दूसरे देशों के साथ रूस का व्यापार प्रभावित होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…

यूक्रेन में शिप पर हमला, 4 भारतीयों की मौत:भारत ने कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना गलत; यूक्रेन बोला- रूसी मिसाइलों से हमला हुआ

यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से रवाना हुए कार्गो जहाज ‘MV गोल्डन लियो’ पर रविवार को हुए हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। भारत सरकार ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास लगातार यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है। उधर, यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक गोल्डन लियो जहाज ओडेसा से मक्का लेकर रवाना हुआ था। पोर्ट से निकलने के कुछ देर बाद उस पर तीन रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यूक्रेन की नौसेना ने कहा कि हमले के बाद जहाज में आग लग गई। रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्र में जहाज से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी बाद में पहचान हुई। हमले के बाद की 3 तस्वीरें… जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, 19 जुलाई की शाम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर हमला हुआ। उस समय जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर थे, जिनमें पांच भारतीय शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीयों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायल भारतीय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है। कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिक क्रू को निशाना बनाना या समुद्री व्यापार और नेविगेशन की आजादी में बाधा डालना निंदनीय है और इससे बचा जाना चाहिए। वहीं, यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण के मुताबिक घटना के बाद पूरी रात सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हमले में नौ क्रू मेंबर और एक समुद्री पायलट की मौत हुई, जबकि 17 में से आठ क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया। ब्लैक सी में बढ़ता तनाव, कारोबार पर असर यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब रूस और यूक्रेन के बीच ब्लैक सी और सी ऑफ एजोव में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे कारोबारी जहाजों और अनाज के निर्यात पर खतरा बढ़ गया है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद ब्लैक सी दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में शामिल हो गया। कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौतों से अनाज का निर्यात फिर शुरू हुआ था, लेकिन हाल के महीनों में बढ़े हमलों से यह व्यवस्था फिर प्रभावित हुई है। यूक्रेन लगातार रूस के ऊर्जा ढांचे और तेल टैंकरों को निशाना बना रहा है। वहीं रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, ईंधन भंडारण केंद्रों और कार्गो जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया है कि उसकी सेना ने ओडेसा बंदरगाह पर ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया। वैश्विक अनाज कारोबार पर भी असर यूक्रेन दुनिया के कुल गेहूं निर्यात का करीब 6% और मक्का निर्यात का लगभग 11% हिस्सा देता है। लेकिन लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण ब्लैक सी के जरिए होने वाला यूक्रेन का अनाज निर्यात करीब एक-तिहाई तक प्रभावित हुआ है। दूसरी तरफ यूक्रेनी हमलों का असर रूस के अनाज कारोबार पर भी पड़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों के कारण रूस को सी ऑफ एजोव के रास्ते होने वाली जहाजों की आवाजाही सीमित करनी पड़ी है। इसी रास्ते से रूस के करीब एक-चौथाई अनाज का निर्यात होता है। —————– ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन के हमले से रूस में भी होर्मुज जैसा संकट:एजोव सागर में जहाजों की आवाजाही रुकी, 9 दिन में 116 जहाजों पर हमले हुए यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बाद रूस को बड़ा झटका लगा है। इस सप्ताह हमलों की वजह से रूस को एजोव सागर के अहम समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इससे दुनिया के दूसरे देशों के साथ रूस का व्यापार प्रभावित होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…

Iran Kuwait Conflict: ईरान के हमले से कुवैत के पावर प्लांट में लगी भीषण आग, अमेरिका ने भी तेज किए वार। देखें वीडियो

Iran Kuwait Conflict: कुवैत में रविवार को हालात उस वक्त बिगड़ गए, जब ईरान ने अल-सुबिया पावर जनरेशन और वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। बता दें कि यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका ने लगातार नौवीं बार रात को ईरान के ठिकानों पर हमले किए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में अल-सुबिया प्लांट से उठता हुआ काला धुआं और आग की लपटें दिखाई दे रही हैं। ये वीडियो ओपन सोर्स इंटेल समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा शेयर किए गए हैं।

वहीं, ईरान के इस हमले पर कुवैत की सेना ने कहा कि उन्होंने दिन भर देश के हवाई क्षेत्र में दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोनों को रोका।

कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने एक बयान में कहा, “आज सुबह से ही सशस्त्र बलों ने कुवैत के हवाई क्षेत्र में दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का पता लगाया है, जिन्हें रोककर बेअसर कर दिया गया है।”

उन्होंने आगे कहा कि “ईरान की निंदनीय आक्रामकता देश में आम नागरिकों और जरूरी सुविधाओं को निशाना बना रही है।” उन्होंने बताया कि बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से जुड़े कुछ ठिकानों पर हमले किए गए, जिससे वहां आग लग गई और भारी नुकसान हुआ।

इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ नए दौर के हमलों की घोषणा की। CENTCOM ने X पर कहा, “उसने आज शाम 7 बजे (ET) ईरान के खिलाफ लगातार नौवीं रात नए हमले शुरू किए। ये हमले ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना जारी रखेंगे जिनका इस्तेमाल होर्मुज (Strait Of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।”

मरीन वन से रवाना होने से पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हालिया हमले उस संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की याद में किए गए थे।

ट्रंप ने कहा, “हमने आज रात फिर उन पर जोरदार हमला किया।” उन्होंने बताया कि ये हमले हाल के दिनों में मध्य पूर्व में मारे गए तीन अमेरिकी सैनिकों के “सम्मान में” किए गए थे।

बता दें कि यह ताजा हमला ऐसे समय हुआ है, जब इससे पहले शुक्रवार और शनिवार को भी कुवैत के बिजली और डिसेलिनेशन प्लांट्स पर हमलों की खबर सामने आई थी।

कुवैत, जो अपनी पानी की सप्लाई के लिए बड़े पैमाने पर खारे पानी को मीठा बनाने की प्रक्रिया (डिसैलिनेशन) पर निर्भर है, तेहरान द्वारा खाड़ी देश में अमेरिकी सेना की मौजूदगी से जुड़ी सुविधाओं को संभावित टारगेट के तौर पर पहचाने जाने के कारण अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव में फंसता जा रहा है।

यह तनाव ऐसे समय और गहरा गया है, जब जून में अमेरिका और ईरान के बीच बनी अस्थायी युद्धविराम की उम्मीदें कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों ने क्षेत्र में ऊर्जा और परिवहन से जुड़े ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।

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ब्रह्मोस से आकाश तक भारत के हथियारों का जलवा! समझिए कैसे स्वदेशी मिसाइल सिस्टम बना रहे हैं डिफेंस एक्सपोर्ट का नया रिकॉर्ड

India Defence Sector: दशकों तक दुनिया के सबसे बड़े रक्षा उपकरण आयातकों में शुमार रहने वाला भारत अब ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर एक बड़े डिफेंस एक्सपोर्टर के रूप में मजबूती से उभर चुका है। विदेशी सप्लायरों पर निर्भरता धीरे-धीरे घट रही है और अब भारत की स्वदेशी डिफेंस सिस्टम की डिमांड दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन 1।78 लाख करोड़ रुपये के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान देश के रक्षा निर्यात में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब यह रिकॉर्ड 38424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। ये इससे पिछले वित्त वर्ष में 23622 करोड़ रुपये था।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक पिछले एक दशक में भारत का रक्षा निर्यात लगभग 50 गुना बढ़ा है। ये वित्त वर्ष 2014 में सिर्फ 700 करोड़ रुपये हुआ करता था। जियो पॉलिटिकल टेंशन और बढ़ते सैन्य खर्चों के बीच स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की मजबूत वैश्विक स्वीकार्यता की वजह से कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2029 तक भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 50000 करोड़ रुपये हो जाएगा।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बना भारतीय हथियारों का मुख्य ठिकाना

भारत के रक्षा निर्यात के लिए इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र सबसे प्रमुख ठिकाना बनकर उभरा है। इसमें मुख्य रूप से म्यांमार, फिलीपींस और वियतनाम से आने वाली भारी मांग का बड़ा योगदान है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2020-2025 के दौरान भारत के कुल रक्षा निर्यात में इन तीनों दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों की हिस्सेदारी 70.1 प्रतिशत रही। इसके मुकाबले वर्ष 2014-2019 में यह हिस्सेदारी 16.5 प्रतिशत और 2008-2013 में सिर्फ 14.7 प्रतिशत थी। ये आंकड़े भारत के बदलते एक्सपोर्ट प्रोफाइल को साफ दिखाते हैं।

सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल की बढ़ती ग्लोबल डिमांड

भारत के रक्षा क्षेत्र को इस महीने की शुरुआत में एक और बड़ी कामयाबी तब मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान इंडोनेशिया ने भारत की स्वदेशी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने के समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए। फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया इस मिसाइल का तीसरा अंतरराष्ट्रीय खरीदार बन गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस मल्टि लेयर रणनीतिक रक्षा समझौते की कीमत 200 मिलियन डॉलर से 630 मिलियन डॉलर के बीच है। इसमें मिसाइल बैटरी, तटीय रक्षा प्रणाली और ऑपरेटरों की ट्रेनिंग शामिल है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी युद्ध प्रभावशीलता साबित करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल शक्तिशाली तटीय रक्षा और एंटी-शिप क्षमताएं प्रदान करती है। इसकी बेहद तेज गति होने की वजह से दुश्मन के लिए इसे इंटरसेप्ट करना बहुत कठिन होता है। ऐसे में ये दक्षिण चीन सागर जैसे रणनीतिक जलमार्गों में शत्रु नौसैनिक बलों के खिलाफ एक मजबूत डिटरेंट का काम करती है।

इस मिसाइल को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO Mashinostroyenia के जॉइंट वेंटर में तैयार किया गया है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है।

पिनाका रॉकेट सिस्टम की सफलता और फ्रांस की नजर

भारत की रक्षा निर्यात महत्वाकांक्षाओं में महाराष्ट्र के नागपुर प्लांट में तैयार होने वाला पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर एक नया मील का पत्थर साबित हो रहा है। आर्मेनिया ने साल 2022 में चार पिनाका रॉकेट लॉन्चर बैटरियों (अनगाइडेड, एक्सटेंडेड-रेंज और गाइडेड वेरिएंट) के लिए 2000 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। जुलाई 2023 से शुरू होकर एक साल के भीतर शुरुआती अनगाइडेड सिस्टम की डिलीवरी पूरी कर ली गई थी।

जनवरी 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मेनिया के लिए गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पिछले हफ्ते ही डीआरडीओ (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया। इसने 60 किमी की न्यूनतम दूरी पर अपने लक्ष्य को बेहद सटीकता से भेदा। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक आर्मेनिया के बाद अब फ्रांस भी अपने पुराने होते आर्टिलरी बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए इस स्वदेशी रॉकेट सिस्टम को खरीदने पर विचार कर रहा है।

आकाश एयर डिफेंस सिस्टम ने रचा इतिहास

भारत का रक्षा निर्यात अब सिर्फ आक्रामक मिसाइल प्रणालियों तक सीमित नहीं है। स्वदेशी रूप से विकसित सतह से हवा में मार करने वाली आकाश वेपन सिस्टम विदेश में बेची जाने वाली पहली स्थानीय एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म बन गई है। साल 2022 में आर्मेनिया ने आकाश मिसाइल सिस्टम के लिए 720 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसकी डिलीवरी साल 2024 में शुरू हुई। डीआरडीओ द्वारा विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित यह मध्यम दूरी की मोबाइल रक्षा प्रणाली लड़ाकू विमानों, ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों को मार गिराने के लिए डिजाइन की गई है।

आकाश मिसाइल प्रणाली ने पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान द्वारा किए गए लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम करने में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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