Unnamed Railway Station: भारत का एकमात्र रेलवे स्टेशन, जिसका नहीं है कोई नाम, वजह जान रह जाएंगे हैरान

भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन भी कहा जाता है। हर दिन ट्रेन से हजारों लोग अपने मंजिल पर पहुंचते हैं। वहीं भारत में रेलवे का बहुत बड़ा नेटवर्क है, जहां हजारों से ज्यादा रेलवे स्टेशन हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा भी रेलवे स्टेशन है, जिसका कोई नाम नहीं हैं। लेकिन यहां पर हर दिन कई ट्रेने भी रुकती है और बड़ी संख्या में यात्री सफर के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ये रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में स्थित है। यहां लगे साइनबोर्ड पर स्टेशन का नाम ही नहीं है, जिसकी वजह से यात्रियों को स्टेशन की पहचान करने में परेशानी होती है। पहली बार इस स्टेशन पर पहुंचने वाले लोग खाली बोर्ड देखकर हैरान रह जाते हैं। आइए जानते हैं इस अनोखे रेलवे स्टेशन के बारे में

पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में स्थित ये रेलवे स्टेशन बर्धमान से करीब 35 किलोमीटर दूर दक्षिण पूर्व रेलवे के बांकुरा-मैसग्राम ब्रॉड गेज रूट पर स्थित है। स्टेशन के बोर्ड पर नाम नहीं लिखा है, लेकिन यहां रोज करीब छह ट्रेनें रुकती हैं। इन ट्रेनों के जरिए आसपास के गांवों में रहने वाले लोग दूसरे शहरों और इलाकों तक आसानी से आ-जा पाते हैं।

जानें क्या है पूरा विवाद

इंडिया टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेशन का नाम न होने के पीछे रैना और रैनगर गांवों के बीच चल रहा पुराना विवाद बताया जाता है। पहले यहां नैरो-गेज रेलवे लाइन थी और स्टेशन का नाम रैनगर था। साल 2008 में नई ब्रॉड-गेज लाइन बनने के बाद स्टेशन की नई इमारत रैना गांव की जमीन पर बनाई गई। इसके बाद रैना के लोगों ने स्टेशन का नाम अपने गांव के नाम पर रखने की मांग की, जबकि रैनगर के लोगों का कहना था कि, स्टेशन का पुराना नाम ही बरकरार रखा जाए। इसी विवाद के कारण स्टेशन का नाम अब तक तय नहीं हो पाया है।

कोर्ट तक पहुंच गया मामला

रैना और रैनगर गांवों के बीच स्टेशन के नाम को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला रेलवे बोर्ड और कोर्ट तक पहुंच गया। दोनों गांवों के लोग अपनी मांग पर अड़े रहे और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने बीच का रास्ता निकालते हुए स्टेशन पर पीले रंग के बोर्ड तो लगाए, लेकिन उन पर किसी भी गांव का नाम नहीं लिखा। इसी वजह से आज भी स्टेशन का साइनबोर्ड खाली नजर आता है। स्टेशन पर नाम न होने से बाहर से आने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। उन्हें सही स्टेशन की पहचान के लिए आसपास के लोगों से पूछना पड़ता है। खाली पीले बोर्ड आज भी रैना और रैनगर गांवों के बीच चल रहे नाम के विवाद की याद दिलाते हैं।

रेलवे में दर्ज है ये नाम

वहीं इस स्टेशन की खास बात ये है कि स्टेशन के बोर्ड पर नाम भले ही नहीं लिखा हो, लेकिन रेलवे के रिकॉर्ड में इसे रायनगर (RNGR) के नाम से ही दर्ज किया गया है। यात्रियों के टिकट भी इसी नाम से जारी होते हैं। यानी कागजों में स्टेशन की पहचान मौजूद है, लेकिन जमीन पर लगे बोर्ड पर उसका नाम दिखाई नहीं देता। रैना और रैनगर गांवों के बीच नाम को लेकर विवाद अभी भी खत्म नहीं हुआ है, इसलिए स्टेशन बिना नाम के ही चल रहा है।

IRB Infrastructure: अगस्त में टोल रेवेन्यू 25% बढ़कर ₹807 करोड़, शेयरों पर रहेगी नजर

IRB Infrastructure: टोल और हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर कंपनी IRB Infrastructure Developers Ltd ने अगस्त 2026 के टोल रेवेन्यू के आंकड़े जारी किए हैं। कंपनी का ग्रॉस टोल रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 25% बढ़कर ₹807 करोड़ पहुंच गया। अगस्त 2025 में यह ₹646 करोड़ था।

प्रमुख टोल एसेट्स का प्रदर्शन

IRB MP Expressway का टोल रेवेन्यू अगस्त 2026 में बढ़कर ₹172.1 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹144.7 करोड़ था। वहीं, IRB Golconda Expressway का रेवेन्यू ₹73.7 करोड़ से बढ़कर ₹87.9 करोड़ हो गया।

IRB Ahmedabad Vadodara Super Express Tollway ने अगस्त में ₹80.3 करोड़ का टोल रेवेन्यू दर्ज किया। पिछले साल इसी महीने यह ₹69.1 करोड़ था। IRB Lalitpur Tollway का रेवेन्यू भी ₹36.1 करोड़ से बढ़कर ₹43.5 करोड़ हो गया।

इसके अलावा, IRB Tumkur Chitradurga Tollway का टोल रेवेन्यू ₹34.9 करोड़ से बढ़कर ₹38.4 करोड़ रहा। Udaipur Tollway का रेवेन्यू ₹26.3 करोड़ से बढ़कर ₹28.8 करोड़ हो गया।

नए एसेट्स से भी मिला योगदान

अगस्त 2026 में तीन ऐसे एसेट्स रहे, जिनका पिछले साल का तुलनात्मक आंकड़ा उपलब्ध नहीं था। IRB Harihara Corridors Tollway ने ₹41.7 करोड़, IRB Chandibhadra Tollway ने ₹20 करोड़ और Meerut Budaun Expressway ने ₹22.6 करोड़ का टोल रेवेन्यू दर्ज किया।

कुछ एसेट्स में रेवेन्यू घटा

सभी प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। IRB Kota Tollway का टोल रेवेन्यू ₹7.1 करोड़ से घटकर ₹6.3 करोड़ रह गया। Hapur Moradabad Tollway का रेवेन्यू ₹28.9 करोड़ से घटकर ₹22.3 करोड़ रहा।

वहीं, Kishangarh Gulabpura Tollway का टोल रेवेन्यू मामूली गिरावट के साथ ₹23 करोड़ से ₹22.5 करोड़ रह गया।

28 हाईवे एसेट्स का पोर्टफोलियो

कंपनी के मुताबिक, IRB Group के पास 13 राज्यों में 28 रेवेन्यू जेनरेटिंग हाईवे एसेट्स हैं। इन एसेट्स की कुल वैल्यू करीब ₹94,000 करोड़ है। रोजाना करीब 15 लाख व्हीकल इन हाईवे एसेट्स से गुजरते हैं।

कंपनी अपनी एसेट चर्न स्ट्रैटेजी के जरिए FY2029 तक एसेट बेस को बढ़ाकर करीब ₹1.4 लाख करोड़ करने की योजना बना रही है।

कंपनी ने क्या कहा?

IRB Infrastructure Developers के डिप्टी CEO अमिताभ मुराका ने कहा कि अगस्त में मजबूत टोल रेवेन्यू कंपनी के एसेट्स पर लगातार ट्रैफिक ग्रोथ को दिखाता है। ट्रैफिक बढ़ने के साथ FY27 की शुरुआत में लागू किए गए टैरिफ रिविजन से भी रेवेन्यू को सपोर्ट मिला है।

उन्होंने कहा कि मजबूत GDP ग्रोथ से आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। गणेश फेस्टिवल के साथ फेस्टिव सीजन भी शुरू हो चुका है। ऐसे में आने वाले महीनों में ट्रैफिक का पॉजिटिव मोमेंटम जारी रहने की उम्मीद है।

शेयर का हाल

IRB Infrastructure Developers का शेयर बुधवार को BSE पर 0.94% की गिरावट के साथ ₹19.07 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 9.84% गिरा है। इसका मार्केट कैप 11.50 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

AI के अलावा भी उभरते बाजारों में मौके, भारत को मिल सकता है फायदा: BNP Paribas

AI से जुड़े शेयरों में तेजी ने दुनियाभर के बाजारों का ध्यान खींचा है। लेकिन अब तस्वीर थोड़ी बदल रही है। निवेश के मौके सिर्फ AI तक सीमित नहीं रह गए हैं। उभरते बाजारों में दूसरी कंपनियों में भी कमाई के अनुमान बेहतर हो रहे हैं। इसका फायदा भारत को भी मिल सकता है।

यह कहना है BNP Paribas Asset Management के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट और इन्वेस्टमेंट इनसाइट्स सेंटर के को-हेड डेनियल मॉरिस (Daniel Morris) का।

इमर्जिंग मार्केट्स पर ओवरवेट BNP Paribas

मॉरिस के मुताबिक, BNP Paribas इमर्जिंग मार्केट्स यानी उभरते बाजारों को लेकर ओवरवेट है। यहां सिर्फ AI से जुड़ी कंपनियों की कमाई के अनुमान बेहतर नहीं हो रहे हैं। नॉन-टेक कंपनियों के लिए भी तस्वीर सुधर रही है।

उनके मुताबिक, इससे उभरते बाजारों में निवेश के मौके ज्यादा संतुलित हो रहे हैं। भारत इस तस्वीर में नॉन-टेक हिस्से की तरफ नजर आता है। उन्होंने कहा कि AI और नॉन-टेक दोनों में मौकों का यह संतुलन पहले से बेहतर है।

भारत को मिल सकता है फायदा

मॉरिस ने कहा कि अगर उभरते बाजारों में निवेश बढ़ता है तो भारत को इसका फायदा मिल सकता है।

उनके मुताबिक, वैश्विक निवेश का माहौल भी बदल रहा है। पिछले साल निवेशकों का फोकस काफी हद तक अमेरिका पर था। अब तस्वीर ज्यादा संतुलित दिख रही है। अमेरिका के अलावा जापान और उभरते बाजारों में भी निवेश के मौके नजर आ रहे हैं।

जापान में भी बदल रहा निवेश का गणित

जापान में सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ रही है। इसका असर वहां के घरेलू निवेशकों के फैसलों पर पड़ सकता है। जापानी निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी के बजाय अपने देश के सरकारी बॉन्ड खरीद सकते हैं। इससे येन कैरी ट्रेड में कुछ कमी आ सकती है। जापान का अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में लगा पैसा भी कुछ हद तक वापस घरेलू बाजार में जा सकता है।

हालांकि, मॉरिस को इससे अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में बड़ी उथल-पुथल की उम्मीद नहीं है। उनके मुताबिक, इसे बाजार में पैसे के एक हिस्से के दूसरी जगह जाने के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने इसे रीबैलेंसिंग बताया है।

मजबूत येन का जापानी शेयरों पर असर

मजबूत येन का जापानी शेयर बाजार पर मिला-जुला असर हो सकता है। कमजोर येन का फायदा जापानी कंपनियों को लंबे समय से मिलता रहा है।

खासकर निर्यात पर निर्भर कंपनियों को कमजोर येन से फायदा होता है। विदेशी निवेशकों को भी जापानी शेयरों में तेजी के साथ करेंसी से फायदा मिल सकता है। ऐसे में येन मजबूत होने पर जापानी कंपनियों और विदेशी निवेशकों के लिए यह फायदा कुछ कम हो सकता है।

Railway Stocks: ₹20804 करोड़ के 8 प्रोजेक्ट मंजूर, इन रेलवे स्टॉक्स को मिल सकता है फायदा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Cabinet Decision: भारतीय रेलवे के इन 7 हाई डेंसिटी कॉरिडोर्स को 4 लाइन बनाने की मंजूरी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया पूरा प्लान

Railway Network Projects Cabinet Decision: भारतीय रेलवे अपने सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण 7 हाई डेंसिटी कॉरिडोर (High Density Corridors) की क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी में है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार (9 सितंबर) को बताया कि इन प्रमुख रेल रूट्स को क्वाड्रुपल यानी चार पटरियों वाला बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करना, ट्रेनों की आवाजाही को सुचारु बनाना और भविष्य में माल एवं यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ाना है।

रेल मंत्री के मुताबिक, रेलवे के इन हाई डेंसिटी कॉरिडोर पर करीब 2,000 किलोमीटर की लाइन को पहले ही क्वाड्रुपल किया जा चुका है। इसके अलावा लगभग 5,000 किलोमीटर के हिस्से का काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है। जबकि करीब 4,000 किलोमीटर अतिरिक्त रेल लाइन को फाइनल मंजूरी देने की प्रक्रिया चल रही है।

इन शहरों को होगा फायदा

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सात रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद ज्यादा ट्रैफिक वाले रेल कॉरिडोर को मजबूत करना है। मंजूर किए गए रूट में कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई और बिलासपुर-कटनी शामिल हैं। मंत्रिमंडल ने मुंबई-हावड़ा हाई-डेंसिटी नेटवर्क पर खड़गपुर और झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेलवे लाइन को भी मंजूरी दे दी है। 367 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 6,528 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

करीब 11 हजार km रेल नेटवर्क पर बड़ा विस्तार

रेल मंत्री के बयान के मुताबिक, अलग-अलग चरणों को जोड़ें तो करीब 11,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर चार पटरियों की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। इससे देश के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और महानगरीय क्षेत्रों के बीच रेल कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे के हाई डेंसिटी कॉरिडोर देश के सबसे अधिक व्यस्त रेल रूट्स में शामिल हैं। इन रूटों पर बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां चलती हैं। मौजूदा ट्रैक क्षमता पर दबाव के कारण कई बार ट्रेनों को प्राथमिकता देने, क्रॉसिंग और संचालन संबंधी चुनौतियां सामने आती हैं। चार पटरियां होने से एक ही दिशा में ट्रेनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।

मालगाड़ियों की रफ्तार और क्षमता बढ़ाने पर भी जोर

रेलवे के लिए यह विस्तार केवल यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं है। देश में माल ढुलाई को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी अतिरिक्त रेल क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है। ज्यादा ट्रैक उपलब्ध होने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के बीच कम रोकना पड़ेगा और माल परिवहन की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।

रेल मंत्री ने बताया कि इसका सीधा असर कोयला, स्टील, सीमेंट, खाद्यान्न और अन्य औद्योगिक सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है। रेलवे के लिए माल ढुलाई से होने वाली आय भी महत्वपूर्ण है। इसलिए हाई डेंसिटी रूटों की क्षमता बढ़ाना रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

ट्रेनों की आवाजाही होगी ज्यादा सुचारु

क्वाड्रुपलिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक ही रेल कॉरिडोर पर अलग-अलग तरह की ट्रेनों को चलाने के लिए ज्यादा क्षमता मिलेगी। इससे व्यस्त रूट्स पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकेगा। रेलवे का लक्ष्य भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए अभी से इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। करीब 2,000 किमी काम पूरा, 5,000 किमी पर काम या मंजूरी और 4,000 किमी अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में होना इस बड़े विस्तार की व्यापकता को दर्शाता है।

रेल नेटवर्क को भविष्य के लिए तैयार करने की कवायद

रेल मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क के आधुनिकीकरण, ट्रैक क्षमता बढ़ाने और तेज रेल परिवहन की दिशा में बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है। हाई डेंसिटी कॉरिडोर की क्वाड्रुपलिंग से रेलवे को न केवल मौजूदा ट्रैफिक संभालने में मदद मिलेगी। बल्कि आने वाले वर्षों में नई यात्री ट्रेनों और अधिक मालगाड़ियों को चलाने के लिए अतिरिक्त क्षमता भी मिल सकती है।

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Railway Special Trains: दिवाली-छठ पर घर जाने की टेंशन खत्म! रेलवे ने शुरू की स्पेशल ट्रेनें, यहां देखें पूरी लिस्ट

दिवाली और छठ के मौके पर अगर आप ट्रेन से घर जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। त्योहारों के दौरान ट्रेनों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने कई स्पेशल ट्रेन सेवाओं का संचालन शुरू करने का फैसला किया है। इन ट्रेनों के जरिए दिल्ली, मुंबई और अन्य बड़े शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों की ओर जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे।

रेलवे की ओर से जारी शेड्यूल के मुताबिक, इन स्पेशल ट्रेनों के लिए बुकिंग भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में अगर आपका सफर दिवाली या छठ के आसपास है, तो टिकट बुक करने में देरी करना भारी पड़ सकता है।

60 दिन पहले खुली बुकिंग, सुबह 8 बजे से मौका

रेलवे के 60 दिन के एडवांस रिजर्वेशन पीरियड यानी ARP नियम के तहत यात्री टिकट बुक कर सकते हैं। बुकिंग IRCTC की वेबसाइट, ऐप और रेलवे रिजर्वेशन काउंटर के जरिए की जा सकती है।

इस साल दिवाली 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। त्योहार के आसपास उत्तर और पूर्व भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में सीटें तेजी से भर सकती हैं और कई रूटों पर लंबी वेटिंग लिस्ट देखने को मिल सकती है।

किन रूटों पर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें?

रेलवे ने अलग-अलग शहरों को जोड़ने वाली कई अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं की घोषणा की है। इनमें मुंबई से कटिहार, कानपुर से गुवाहाटी, कटिहार से अमृतसर और डिब्रूगढ़ से कोलकाता जैसे महत्वपूर्ण रूट शामिल हैं।

मुख्य स्पेशल ट्रेनों की सूची इस प्रकार है:

  • मुंबई सेंट्रल–कटिहार–मुंबई सेंट्रल (09189/09190): 5 सितंबर से 17 नवंबर के बीच 77 अतिरिक्त फेरे।
  • कानपुर सेंट्रल–गुवाहाटी–कानपुर सेंट्रल (04127/04128): 10 सितंबर से 11 दिसंबर के बीच 14 अतिरिक्त फेरे।
  • कटिहार–अमृतसर–कटिहार (05736/05735): 9 सितंबर से 27 नवंबर के बीच 12 अतिरिक्त फेरे।
  • डिब्रूगढ़–कोलकाता–डिब्रूगढ़ (05932/05931): 5 सितंबर से 30 नवंबर के बीच 13 अतिरिक्त फेरे।
  • वाराणसी–दिल्ली–वाराणसी (04209/04210)।
  • अयोध्या कैंट–आनंद विहार टर्मिनल (04213/04214): द्विसाप्ताहिक।
  • चंडीगढ़–पटना जंक्शन (04512/04511): साप्ताहिक।
  • फिरोजपुर कैंट–पटना जंक्शन (04616/04615): साप्ताहिक।
  • आनंद विहार टर्मिनल–जोगबनी (04008/04007): साप्ताहिक।
  • आनंद विहार टर्मिनल–मुजफ्फरपुर (04028/04027): द्विसाप्ताहिक।
  • दिल्ली–सीतामढ़ी–दिल्ली (04010/04009): साप्ताहिक।
  • नई दिल्ली–कानपुर सेंट्रल सुपरफास्ट (02456/02455)।
  • बरौनी–नई दिल्ली–बरौनी स्पेशल (02563/02564)।
  • दरभंगा–नई दिल्ली–दरभंगा स्पेशल (02569/02570)।

इन रूटों पर सबसे ज्यादा सीटों की मारामारी

दिवाली और छठ के दौरान बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ रहने की संभावना है। खासकर दिल्ली-पटना, मुंबई-पटना, बेंगलुरु-पटना, अहमदाबाद-पटना, दिल्ली-गोरखपुर, वाराणसी-दिल्ली और कानपुर-दिल्ली जैसे रूटों पर यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है।इन रूटों पर नियमित ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए यात्रियों के लिए स्पेशल ट्रेनों का विकल्प काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

कंफर्म टिकट के लिए पहले से कर लें ये तैयारी

त्योहारों के दौरान टिकट बुकिंग के समय कुछ मिनट की देरी भी सीट हाथ से निकलने की वजह बन सकती है। इसलिए बुकिंग शुरू होने से पहले कुछ जरूरी तैयारियां कर लेना बेहतर रहेगा।

Master List पहले ही तैयार रखें

IRCTC प्रोफाइल में यात्रियों के नाम, उम्र और बर्थ से जुड़ी जानकारी पहले से सेव कर दें। इससे बुकिंग के दौरान एक-एक जानकारी भरने में समय बर्बाद नहीं होगा।

समय से पहले IRCTC पर लॉगिन करें

बुकिंग शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही IRCTC वेबसाइट या ऐप पर लॉगिन कर लेना बेहतर है। आखिरी समय पर लॉगिन करने की कोशिश में सर्वर या इंटरनेट से जुड़ी परेशानी होने पर टिकट बुकिंग प्रभावित हो सकती है।

पेमेंट में न करें देरी

टिकट बुक करते समय भुगतान का विकल्प भी अहम होता है। तेज पेमेंट के लिए UPI या IRCTC Wallet जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इससे पेमेंट प्रक्रिया जल्दी पूरी करने में मदद मिल सकती है।

आखिरी समय का इंतजार पड़ सकता है भारी

दिवाली और छठ देश के सबसे ज्यादा यात्रा वाले त्योहारों में शामिल हैं। ऐसे समय में बड़ी संख्या में लोग नौकरी और कारोबार वाले शहरों से अपने घर लौटते हैं। इसलिए नियमित ट्रेनों के साथ स्पेशल ट्रेनों में भी सीटें तेजी से भरने की संभावना रहती है।

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Vande Bharat: 5 सितंबर को चलेगी 16-कोच वाली वंदे भारत, वेस्टर्न घाट से होकर दौड़ेगी ये शानदार हाई-स्पीड ट्रेन, जानिए कितना घटेगा टाइम

Vande Bharat: बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच वंदे भारत ट्रेन चलाने की तैयारी तेज हो गई है। इसके तहत 5 सितंबर को 16 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल रन किया जाएगा। ट्रेन यशवंतपुर जंक्शन से मंगलुरु सेंट्रल के बीच चलेगी। वंदे भारत ट्रेन के ट्रायल के दौरान ट्रेन सुबह 6:05 बजे यशवंतपुर से रवाना होकर दोपहर 2:25 बजे मंगलुरु पहुंचेगी। इस दौरान करीब 8 घंटे 20 मिनट में सफर पूरा किया जाएगा। वहीं अभी बेंगलुरु से मंगलुरु तक जाने में करीब 10 घंटे तक का समय लगता है। इस ट्रायल के दौरान ट्रेन की रफ्तार, ब्रेक, सुरक्षा और घाट वाले रास्ते में चलने की क्षमता की जांच की जाएगी। अगर ट्रायल सफल रहा, तो इस रूट पर वंदे भारत की नियमित सेवा शुरू करने की अंतिम मंजूरी मिल सकती है।

कितने बजे से शुरू होगा ट्रायल

5 सितंबर को 16 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन सुबह 6:05 बजे यशवंतपुर जंक्शन से रवाना होगी। मंगलुरु जाने के रास्ते में ट्रेन हसन, सकलेशपुर और सुब्रह्मण्य रोड स्टेशनों पर तय समय के अनुसार रुकेगी। ट्रायल रन के दौरान वंदे भारत ट्रेन पडिल स्टेशन पर नहीं रुकेगी। ट्रेन के दोपहर करीब 1:50 बजे पडिल से गुजरने की संभावना है। इसके बाद मंगलुरु सेंट्रल पहुंचने पर यही ट्रेन दोपहर 3 बजे यशवंतपुर के लिए वापस रवाना होगी।

वंदे भारत ट्रायल रन का संभावित शेड्यूल

  • यशवंतपुर जंक्शन: सुबह 6:05 बजे रवाना होगी
  • हासन जंक्शन: सुबह 9:00 बजे पहुंचेगी और 9:05 बजे रवाना होगी
  • सकलेशपुर: सुबह 9:55 बजे पहुंचेगी और 10:00 बजे रवाना होगी
  • सुब्रह्मण्य रोड: दोपहर 12:30 बजे पहुंचेगी और 12:35 बजे रवाना होगी
  • पडिल: दोपहर करीब 1:50 बजे बिना रुके गुजरेगी
  • मंगलुरु सेंट्रल: दोपहर 2:25 बजे पहुंचेगी

वंदे भारत की वापसी का संभावित शेड्यूल

  • मंगलुरु सेंट्रल: दोपहर 3:00 बजे रवाना होगी
  • पडिल: दोपहर करीब 3:25 बजे बिना रुके गुजरेगी
  • सुब्रह्मण्य रोड: शाम 4:30 बजे पहुंचेगी और 4:35 बजे रवाना होगी
  • सकलेशपुर: शाम 6:30 बजे पहुंचेगी और 6:35 बजे रवाना होगी
  • हासन जंक्शन: शाम 7:20 बजे पहुंचेगी और 7:30 बजे रवाना होगी
  • यशवंतपुर जंक्शन: रात 11:00 बजे पहुंचेगी

5 सितंबर को होगा ट्रायल

ट्रायल रन में रेलवे की टीम वंदे भारत के ब्रेक, स्पीड कंट्रोल, इमरजेंसी स्थिति में रिस्पॉन्स और ढलान वाले रास्ते पर संचालन की जांच करेगी। घाट सेक्शन को ध्यान में रखते हुए ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) सुविधा वाली ट्रेन का इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रायल के दौरान सकलेशपुर और सुब्रह्मण्य रोड के बीच घाट सेक्शन पर खास ध्यान दिया जाएगा। इस रास्ते में कई मोड़ और ढलान हैं, इसलिए यहां ट्रेन की सुरक्षित रफ्तार और संचालन को परखना जरूरी होगा। जिससे नियमित सेवा शुरू होने पर सफर सुरक्षित रहे।

5 सितंबर को होने वाले इस परीक्षण में 16 कोच की खाली वंदे भारत रेक को चलाया जाएगा, ताकि अलग-अलग परिस्थितियों में ट्रेन के प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को परखा जा सके।

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