Weather Update : हिमाचल में बादल फटा; असम में 68 मौतें, गुजरात में सेना का रेस्क्यू, IMD का 12 राज्यों में अलर्ट

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असम, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है तो गुजरात में भारी बारिश के कारण भारी तबाही हुई। सेना राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। मौसम विभाग ने अगले 2-3 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। ALSO READ: Top News 27 July: संसद में पेपर लीक संशोधन बिल, सोनम वांगचुक होंगे डिस्चार्ज, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

 

असम में 68 की मौत

असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। राज्य में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से अब तक 68 लोगों की मौत हो गई। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को फोन कर हालात की जानकारी ली। सोनोवाल बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्य के दौरे पर हैं।

 

गुजरात ने सेना ने संभाली कमान

गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश के बाद कई इलाकों में भीषण जलभराव की स्थिति बन गई है। विशेष रूप से अहमदाबाद जिले के बावला और सानंद क्षेत्र में जलजमाव के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सेना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों से 790 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है। राज्य में वर्षाजन्य हादसों में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें से 29 मौतें वलसाड और नवसारी जिलों में हुई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के मुख्यमंत्री के साथ टेलीफोन पर बातचीत कर बारिश के बाद के हालात की विस्तृत समीक्षा की। चर्चा के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाने और जल निकासी का काम तेजी से पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया। है। 

 

हिमाचल में फटे बादल

हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में शनिवार रात बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। इससे मयाड़ घाटी के सात गांवों का संपर्क टूट गया। भूस्खलन की वजह से राज्य में करीब 135 सड़कें बंद कर दी गई है। प्रदेश में लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड से 15 लोगों की मौत हुई है। मौसम विभाग ने 5 जिलों में 28 से 31 जुलाई के बीच भारी से बहुत भारी बारिश के लिए ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी किया है।

 

IMD का 12 राज्यों में अलर्ट

दिल्ली-एनसीआर, यूपी, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भारी बारिश के साथ ही तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

 

ओडिशा में रेड अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र रविवार को और गहरा होकर डिप्रेशन में बदल गया है। अगले 24 घंटे के दौरान इसके और मजबूत होकर उत्तर ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल के तटों को पार करने की संभावना है। इसके प्रभाव से 29 जुलाई तक सुंदरगढ़, क्योंझर और मयूरभंज जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है।

 

Top News 27 July: संसद में पेपर लीक संशोधन बिल, सोनम वांगचुक होंगे डिस्चार्ज, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

top news 27 july Photo : AI Generated

Top News 27 July : संसद में आज पेश होगा पेपर लीक संशोधन बिल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में एक्शन में पुलिस। सोनम वांगचुक को आज अस्पताल से छुट्टी मिलेगी। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया। मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दिलाया पहला गोल्ड। 27 जुलाई की बड़ी खबरें :
 

संसद में पेपर लीक संशोधन बिल

मोदी सरकार आज दोपहर 12 बजे संसद में पेपर लीक संशोधन बिल पेश करेगी। कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन खत्म होने के बाद संसद में सोमवार से विपक्ष युवाओं पर लाठीचार्ज के सवाल पर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाएगा। विपक्ष आज राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को भी सदन में उठा सकता है।

 

सोनम वांगचुक को मिलेगी अस्पताल से छुट्टी

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आज मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। वह लद्दाख रवाना होने से पहले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए राजघाट जाएंगे। नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक ने किया था 26 दिन का अनशन। 

 

पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में एक्शन में पुलिस

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और उससे जुड़ी हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक, भड़काऊ पोस्ट और वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किए गए ऐसे कंटेंट की पहचान कर संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं और उन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं। 

 

कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

असम, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है गुजरात में भारी बारिश के कारण भारी तबाही हुई। सेना राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। मौसम विभाग ने अगले 2-3 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

 

मीराबाई चानू ने भारत को दिलाया पहला गोल्ड

राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारत ने ग्लास्को में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। मीराबाई चानू ने भारत को दिलाया पहला गोल्ड, भारोत्तोलक राजा मुथुपांडी और ऋषिकांता सिंह ने जीता रजत पदक। भारत के जादूमणि सिंह ने पाकिस्तान के मुक्केबाज सुमामा रेहमान को पुरुष 55 किग्रा के राउंड ऑफ 16 में हराया। 

जंतर-मंतर के बाद अब पंजाब में पेपर लीक पर हल्ला बोलेगी सीजेपी! अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बात

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने रविवार को पंजाब में कथित पेपर लीक मामले को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि संगठन इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी अगली योजनाओं की घोषणा करने के लिए थोड़ा समय चाहिए। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में दिपके ने कहा, “हमारा विरोध प्रदर्शन अभी कल ही खत्म हुआ है। कृपया हमें थोड़ा समय दीजिए, इसके बाद हम आगे की योजना साझा करेंगे।”

36 दिनों से चल रहा थी आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस साल की शुरुआत में संगठन की स्थापना की थी। यह कदम उस समय उठाया गया, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद दिपके ने युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए इस संगठन की शुरुआत की। 6 जून को अभिजीत दिपके अमेरिका से भारत लौटे और नीट पेपर लीक मामले के विरोध में जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया। इस दौरान संगठन ने उन 20 छात्रों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कथित तौर पर नीट पेपर लीक मामले से जुड़ी परिस्थितियों के बाद आत्महत्या कर ली थी। बाद में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े। उन्होंने घोषणा की कि जब तक प्रमुख मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रहेंगे। वांगचुक के शामिल होने के बाद आंदोलन को और अधिक समर्थन और गति मिली।

 

दिल्ली के जंतर-मंतर में हो रहा था प्रदर्शन

शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर 36 दिनों से चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया। यह फैसला केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लिया गया। मंत्री का इस्तीफा संगठन की प्रमुख मांगों में शामिल था, जिसे लेकर सीजेपी लगातार आंदोलन कर रही थी। कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना अभिजीत दिपके ने इस साल की शुरुआत में की थी। संगठन की शुरुआत उस समय हुई, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इसके बाद दिपके ने युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए इस मंच का गठन किया।आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने का ऐलान किया, जिसके बाद इस आंदोलन को देशभर में और अधिक समर्थन मिलने लगा।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने जारी किया एक और नया वीडियो, पेपर लीक को लेकर किया यह बड़ा ऐलान

Prime Minister Narendra Modi has issued video message regarding paper leak case

Prime Minister Narendra Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना ए‍क और वीडियो जारी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने तीसरे 'सेल्फी मोड' वर्टिकल वीडियो संदेश में कहा कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में परीक्षा सुधारों पर एक उच्चस्तरीय कार्य बल (High Level Task Force) का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और आधुनिक बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर काम करेगी, ताकि छात्रों को निष्पक्ष और बेहतर परीक्षा व्यवस्था मिल सके। प्रधानमंत्री ने ये वीडियो भी मोबाइल से सेल्फी कैमरे से रिकॉर्ड किया है।

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टास्क फोर्स का हुआ गठन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना ए‍क और वीडियो जारी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने तीसरे 'सेल्फी मोड' वर्टिकल वीडियो संदेश में कहा कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में परीक्षा सुधारों पर एक उच्चस्तरीय कार्य बल (High Level Task Force) का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और आधुनिक बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर काम करेगी, ताकि छात्रों को निष्पक्ष और बेहतर परीक्षा व्यवस्था मिल सके।

बनेगा नया कठोर कानून

प्रधानमंत्री ने ये वीडियो भी मोबाइल से सेल्फी कैमरे से रिकॉर्ड किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फ्रेंड्स विद्यार्थियों के भविष्य के लिए भारत सरकार लगातार अनेक कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम कल पार्लियामेंट के अंदर भी कठोर कानूनों के प्रावधान के साथ नया कानून बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन हमें भविष्य के लिए सोचना है। हमारी परीक्षा पद्धति विश्वस्त हो।

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वे जेलों में सड़ रहे हैं

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। वे जेलों में सड़ रहे हैं। राजनीतिक जीवन से शुरू से ही तकनीकी का बेहतर इस्तेमाल करने वाले प्रधानमंत्री मोदी इंटरनेट मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म जैसे Facebook, WhatsApp, एक्स पर सक्रिय है और बड़ी संख्या में उनके फालोअर्स भी हैं।

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जब PM मोदी ने खुद संभाला मोर्चा 

इंस्टाग्राम पर भी प्रधानमंत्री मोदी 2016 से जुड़े हैं लेकिन इंस्टाग्राम के लिए अलग से कोई रील नहीं अपलोड किया जाता था, जबकि अधिकांश जेनजी इंस्टाग्राम पर ही सक्रिय हैं। हाल ही में पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बाद में खुद मोर्चा संभाला और इंस्टाग्राम पर रील डालकर जेनजी के साथ संवाद कायम किया।

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Gen Z को पसंद आया PM मोदी का नया अवतार

Gen Z को भी प्रधानमंत्री का नया अवतार पसंद आया और इंस्टाग्राम पर उनके 10 लाख से अधिक फॉलोअर्स बढ़ गए। Gen Z की ओर से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को उन्हें रील बनाकर थैंक्स (धन्यवाद) भी कहा। इसे भी 93 लाख से अधिक लोगों ने देखा और लाइक किया।

‘ हाई पावर टास्क फोर्स बनेगी …’, परीक्षा रिफॉर्म पर PM मोदी का बड़ा ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा सुधारों के लिया बड़ा फैसला किया है। पीएम मोदी ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, वे जेल भेजे जा चुके हैं और ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट भी बनाई गई हैं। उन्होंने बताया कि नंदन नीलेकणी की अगुवाई में हाई पावर टास्क फोर्स बनेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सरकार संसद में एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें परीक्षा से जुड़े अपराधों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान होंगे। उन्होंने कहा कि सिर्फ दोषियों पर कार्रवाई करना ही काफी नहीं है, बल्कि भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को भी पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाएगा। इसी उद्देश्य से सरकार ने देश के जाने-माने तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई पावर टास्क फोर्स बनाने का फैसला किया है। यह समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे, ताकि आने वाली सभी परीक्षाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकें।

कौन हैं नंदन निलेकणि

नंदन निलेकणि टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गज उद्यमी हैं। उन्हें इन्फोसिस के सह-संस्थापक और आधार कार्ड के जनक के रूप में जाना जाता है। वो 2002 से 2007 तक इन्फोसिस के CEO और MD रहे। बाद में 2017 में कंपनी के चेयरमैन के रूप में भी लौटे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2009 में नंदन नीलेकणि को UIDAI प्रोजेक्ट का चेयरमैन बनने के लिए आमंत्रित किया। नंदन ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। UIDAI को ‘डिजिटल इंडिया’ को आकार देने में एक अहम कदम माना जाता है। आज, आधार को दुनिया भर में सबसे बड़े बायोमेट्रिक सिस्टम के तौर पर पहचाना जाता है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री की सैलरी कितनी है? सरकारी बंगला और सुरक्षा के साथ-साथ मिलती हैं ये सुविधाएं

नीट पेपर लीक मामले को लेकर कई हफ्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को देश के शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस बदलाव के बाद लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें सरकार की ओर से कौन-कौन सी सुविधाएं और भत्ते दिए जाते हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य होने के साथ-साथ सांसद भी होते हैं। ऐसे में उन्हें केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित वेतन, विभिन्न प्रकार के भत्ते और कई आधिकारिक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

आइए जानते हैं कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हर महीने कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें सरकार की ओर से कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाती हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री की सैलरी

केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हर महीने 1 लाख रुपये बेसिक सैलरी मिलती है।

इसके अलावा उन्हें कई तरह के भत्ते भी दिए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: अपने संसदीय क्षेत्र में जनता से संपर्क और क्षेत्रीय कामकाज के लिए हर महीने 70,000 रुपये।
  • कार्यालय भत्ता: कार्यालय चलाने, कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए हर महीने 60,000 रुपये।
  • दैनिक भत्ता: संसद या संसदीय समिति की बैठक में शामिल होने पर 2,000 रुपये प्रतिदिन का भत्ता दिया जाता है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री को मिलने वाली अन्य सुविधाएं

  • सरकारी आवास: केंद्रीय शिक्षा मंत्री को नई दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र में सरकारी बंगला दिया जाता है। इस आवास के लिए कोई किराया नहीं देना पड़ता। इसके रखरखाव और अन्य जरूरी खर्चों की जिम्मेदारी सरकार उठाती है।
  • सरकारी गाड़ी और सुरक्षा: आधिकारिक कामकाज के लिए मंत्री को सरकारी कार, ड्राइवर और ईंधन की सुविधा मिलती है। इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियों के खतरे के आकलन के आधार पर उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाती है। जरूरत के अनुसार पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (पीएसओ), एस्कॉर्ट वाहन और अन्य सुरक्षा इंतजाम भी किए जाते हैं।
  • यात्रा की सुविधा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री को सरकारी काम के लिए पूरे देश में यात्रा करने की सुविधा मिलती है। इसमें हवाई यात्रा के लिए एग्जीक्यूटिव क्लास और ट्रेन में फर्स्ट एसी से सफर करने की व्यवस्था शामिल होती है। सरकारी नियमों के अनुसार, पात्र परिवार के सदस्यों को भी यात्रा से जुड़ी कुछ सुविधाएं मिल सकती हैं।
  • चिकित्सा सुविधा: केंद्रीय मंत्री और उनके आश्रित परिवार के सदस्य सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के तहत इलाज की सुविधा प्राप्त करते हैं। इस योजना के तहत सूचीबद्ध सरकारी और मान्यता प्राप्त अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • कार्यालय और संचार सुविधाएं: सरकार मंत्री की मदद के लिए निजी सहायक (पर्सनल असिस्टेंट), सचिव और अन्य सहयोगी कर्मचारी उपलब्ध कराती है। इसके अलावा सरकारी आवास और कार्यालय में टेलीफोन, इंटरनेट तथा सरकारी कामकाज के लिए जरूरी अन्य संचार सुविधाएं भी दी जाती हैं।

पिता असम सरकार में मंत्री…बेटी छात्र प्रदर्शन में हुई शामिल, अब CM हिमंता सरमा ने कही ये बात

नीट पेपर लीक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन में असम के मंत्री केशव महंत की बेटी के शामिल होने के वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान सामने आया है। मुख्‍यमंत्री ने कहा, ”हो सकता है वो (कैब‍िनेट मंत्री की बेटी) अपने पिता की राजनीतिक विचारधारा को न मानती हों, इसके ल‍िए मेरे कैबिनेट सहयोगी को ट्रोल नहीं किया जाना चाहिएय़” बता दें कि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दावा किया गया कि दिबिसा महंता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगा रही हैं और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। हालांकि, इन वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने  की ये अपील

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने लोगों से अपील की कि मंत्री केशव महंता को उनकी बेटी के राजनीतिक विचारों के लिए निशाना न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी बालिग व्यक्ति की अपनी अलग सोच और राय हो सकती है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि केशव महंता की बेटी के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उनके पिता पर हमला करना या उन्हें ट्रोल करना सही है। हो सकता है कि उनकी बेटी की राजनीतिक सोच अपने पिता से अलग हो।” अपना उदाहरण देते हुए हिमंत सरमा ने कहा, “कल जब मेरा बेटा वकील बनेगा, तो हो सकता है कि वह ऐसे किसी व्यक्ति का पक्ष रखे जिसे मैं पसंद नहीं करता। इसका मतलब यह नहीं कि उसके फैसलों के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया जाए।”

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि किसी भी माता-पिता को उनके बालिग बेटे या बेटी के राजनीतिक विचारों और उनके फैसलों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह प्रदर्शन के दौरान दिबिसा महंता की ओर से लगाए गए कथित नारों से सहमत नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “जब अगली बार मेरी उनसे मुलाकात होगी, तो मैं इस मुद्दे पर उनसे जरूर बात करूंगा और समझाने की कोशिश करूंगा कि उन्होंने जो बातें कही थीं, वे सही नहीं थीं।”

गुवाहाटी में भी हुआ था प्रदर्शन

गुवाहाटी में यह प्रदर्शन नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा में पारदर्शिता की मांग के साथ तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई थी।इस पूरे विवाद पर मंत्री केशव महंता की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उधर, कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों की कई प्रमुख मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 37 दिनों से चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा कर दी।

Pralhad Joshi: धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री क्यों बनाया गया? माने जाते हैं मोदी सरकार के भरोसेमंद संकटमोचक

Pralhad Joshi: केंद्र सरकार में वरिष्ठ मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने की चर्चाओं के बीच उनकी प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक अनुभव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मोदी सरकार में उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से संभाली हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया है। अब उनके सामने देश की परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लंबित सुधारों को गति देने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।

प्रह्लाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। संसद में विभिन्न दलों के बीच समन्वय बनाने, विधेयकों को आगे बढ़ाने और जटिल राजनीतिक परिस्थितियों से निपटने के कारण उन्हें सरकार का अनुभवी रणनीतिकार माना जाता है।

शिक्षा मंत्रालय के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां

शिक्षा मंत्रालय का दायित्व मिलने के बाद जोशी की सबसे पहली प्राथमिकता राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करना होगी। परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है।

इसके अलावा परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने, नए कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और छात्रों के बीच विश्वास बहाल करने की दिशा में भी तेजी से काम करना होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर रहेगा फोकस

संकट प्रबंधन के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के विभिन्न प्रावधानों को लागू करना, उच्च शिक्षा में सुधार, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना और केंद्र व राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी नई जिम्मेदारी का अहम हिस्सा माना जाएगा। सरकार की कोशिश होगी कि शिक्षा मंत्रालय की नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया और दीर्घकालिक सुधार योजनाओं पर किसी तरह का असर न पड़े और छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले समय पर लिए जाएं।

नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पदभार संभाल लिया है। धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार 25 जुलाई को पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया। जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह उपभोक्ता मामलों के मंत्री भी हैं।

‘विनम्रता के साथ जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं’

प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा कि उन्होंने दायित्व और विनम्रता की भावना के साथ यह जिम्मेदारी स्वीकार की है। शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। जोशी को उपभोक्ता मामलों के मंत्री की अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी है। मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य भावना और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं।”

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 12 वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया है…प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करूंगा।”

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इससे पहले, देशभर में CJP के नेतृत्व में नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है। पिछले 10 दिनों में सामने आई घटनाओं को देखकर वह परेशान हैं।

Raveena Tandon:’कुछ लोग तो वहां रील्स बनाने आए थे…’, रवीना टंडन बोलीं उपद्रवियों और राजनीतिक पार्टियों ने छात्र विरोध प्रदर्शनों को किया था हाईजैक

Raveena Tandon: एक्ट्रेस रवीना टंडन ने देश भर में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर अपनी राय शेयर की है। उन्होंने मिजोरम में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की तारीफ की, लेकिन साथ ही चिंता भी जताई कि दूसरी जगहों पर ऐसे आंदोलनों पर उन लोगों का कब्ज़ा हो गया जिनके अपने राजनीतिक मकसद थे या जो पब्लिसिटी चाहते थे। उनका यह पोस्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के एक दिन बाद आया है। प्रधान ने NEET-UG 2026 पेपर लीक के आरोपों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हफ़्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दिया था।

इंस्टाग्राम पर रवीना ने लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि आख़िरकार स्टूडेंट्स की आवाज सुनी जा रही है और ये विरोध प्रदर्शन देश की शिक्षा व्यवस्था में सार्थक बदलाव ला सकते हैं। रवीना ने इंस्टाग्राम पर कई तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि हाल ही में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट (छात्रों के विरोध प्रदर्शन) ने उन्हें उम्मीद दी है।

उन्होंने लिखा, “खुशी और गर्व है कि आखिरकार लोगों की आवाज़ सुनी जा रही है (#studentsprotest #Rishikeshprotest) और उम्मीद जगी है। अब तक पर्यावरण, कम्युनिटी के जानवरों, वाइल्डलाइफ और पेड़ों की कटाई के खिलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे थे और नाकाम हो रहे थे। लोग जागरूक हो रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों को यह समझना होगा कि हमारे पास यही एक ग्रह है। कोई ‘प्लैनेट B’ नहीं है। बस यही है। उनके भविष्य के लिए हमें इसी को बचाना है।”

इसके बाद रवीना ने मिज़ोरम के छात्रों के प्रदर्शन करने के तरीके की तारीफ़ की। एक्ट्रेस ने कहा कि मिज़ोरम और दूसरे राज्यों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों ने एक मिसाल कायम की है। उन्हें सलाम। अफ़सोस की बात है कि कुछ राज्यों में शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को गुंडों और राजनीतिक पार्टियों ने हाईजैक कर लिया, और कुछ लोग तो बस रील्स बनाने और लाइमलाइट पाने के मौके की तलाश में वहाँ मौजूद थे। आख़िरकार, यह जायज़ मांगों की जीत थी।”

एक्ट्रेस ने हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की भी निंदा की और कहा कि ऐसी हरकतें छात्रों के आंदोलन का हिस्सा नहीं थीं। “हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के पीछे निश्चित रूप से उपद्रवी तत्व थे। वे गैर-छात्र इस विरोध प्रदर्शन को पटरी से उतार सकते थे। फिर भी, इसके बाद मैं हमारी शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद और प्रार्थना कर रही हूं, जिसमें हमारे सरकारी स्कूलों से भी भ्रष्टाचार खत्म हो। सभी के लिए शिक्षा आसानी से उपलब्ध हो। मैं अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल कर रही हूँ। आपकी राय अलग हो सकती है, लेकिन मैं उसका भी सम्मान करती हूँ। जब पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया। जय हिंद। जय, हिंद की जनता-अवाम #indiafirst।”

NEET-UG 2026 परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देश भर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। दिल्ली के जंतर-मंतर और कई अन्य राज्यों में हज़ारों छात्र जमा हुए और उन्होंने जवाबदेही, परीक्षा में सुधार और ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की। इन विरोध प्रदर्शनों का नतीजा 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के रूप में सामने आया।

Vijay Varma: क्या विजय वर्मा ने आरक्षण और विशेषाधिकार के बारे में पोस्ट किया था शेयर? वायरल स्क्रीनशॉट पर एक्टर ने तोड़ी चुप्पी

Vijay Varma: कई दिनों से सोशल मीडिया पर विजय वर्मा की इंस्टाग्राम स्टोरी का एक स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में एक्टर आरक्षण और विशेषाधिकार पर अपनी राय रखते हुए दिखे, जिससे अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इस पर काफी चर्चा और बहस छिड़ गई। जैसे-जैसे यह स्क्रीनशॉट और ज़्यादा चर्चा में आ रहा है, विजय ने अब इस वायरल दावे पर अपनी बात रखी है।

जैसे ही सोशल मीडिया पर यह स्क्रीनशॉट फैला, कई लोगों ने इसे असली मान लिया और इसमें कही गई बातें विजय की बताईं। इस पोस्ट से ऑनलाइन चर्चा तेज़ हो गई। लेकिन, जैसे-जैसे अटकलें बढ़ीं, विजय ने शनिवार को X (जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था) पर आकर इस वायरल दावे पर सफाई दी।

उन्होंने वायरल स्क्रीनशॉट को रीपोस्ट करते हुए लिखा, “मैंने कभी ऐसा पोस्ट नहीं किया। यह सब झूठ है।” एक्टर ने फिर से स्क्रीनशॉट रीपोस्ट किया और अपनी बात दोहराते हुए कहा, “मैंने कभी ऐसा पोस्ट नहीं किया। यह मेरी कहानी नहीं है।”

विजय के नाम से जुड़े वायरल स्क्रीनशॉट में लिखा था, “मेरे जन्म के समय मेरे पिता ने मारुति 800 खरीदी थी। जब मैं 12वीं क्लास में पहुँचा, तो उन्होंने मेरे लिए होंडा सिविक खरीदी। मैं उसी कार से कोचिंग जाता था, जबकि मेरा सबसे अच्छा दोस्त, जो मारवाड़ी परिवार से था, तब भी 12 साल पुरानी हीरो होंडा चलाता था। हमने एक सरकारी परीक्षा दी। उसके अच्छे नंबर आए लेकिन उसे सीट नहीं मिली। रिज़ल्ट वाले दिन वह रोते हुए अपनी बाइक से घर लौटा, जबकि मैं ठीक था। मुझे रिज़र्वेशन की ज़रूरत नहीं थी, लेकिन उसे थी। यह उसका अधिकार था। अगर वह नहीं, तो कम से कम उसे बराबरी का मौका तो मिलना ही चाहिए था।”

इस बीच, विजय ने कथित NEET पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हो रहे छात्र विरोध-प्रदर्शनों के लिए अपना समर्थन खुलकर ज़ाहिर किया है। उन्होंने छात्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर भी प्रतिक्रिया दी। इस घोषणा के बाद एक्टर ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने फ़िल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ के गाने ‘चन्ना मेरेया’ की एक लाइन का इस्तेमाल किया।

फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया (FTII) से ग्रेजुएट विजय ने ‘पिंक’, ‘राग देश’, ‘मंटो’ और ‘मिडल क्लास अब्बायि’ जैसी फिल्मों में छोटे रोल किए थे। इसके बाद उन्हें जोया अख्तर की ‘गली बॉय’ में एक छोटा लेकिन चर्चा में रहने वाला रोल मिला, जिससे उन्हें पहचान मिली। पिछले कुछ सालों में, विजय ने ‘डार्लिंग्स’, ‘दहाड़’ और ‘मिर्ज़ापुर’ जैसी फिल्मों और शो में अपने काम के लिए काफी तारीफें बटोरी हैं।

उन्हें आखिरी बार ‘मटका किंग’ में देखा गया था। 1960 के दशक के मुंबई पर आधारित ‘मटका किंग’ का पहला सीज़न एक महत्वाकांक्षी कॉटन व्यापारी की कहानी है, जो सम्मान और पहचान पाने का सपना देखता है। वह ‘मटका’ नाम का एक नया जुए का खेल शुरू करता है, जो जल्द ही पूरे शहर में छा जाता है और एक ऐसे बिज़नेस को बदल देता है जो पहले सिर्फ अमीर और प्रभावशाली लोगों तक ही सीमित था। इस शो को क्रिटिक्स और दर्शकों, दोनों से ही अच्छे रिव्यू मिले। विजय वर्मा के अलावा, इस सीरीज़ में कृतिका कामरा, साई ताम्हणकर, सिद्धार्थ जाधव, भूपेंद्र जदावत और गुलशन ग्रोवर ने भी अहम भूमिकाएँ निभाईं। इस साल की शुरुआत में, ‘मटका किंग’ सीज़न 1 को मिले ज़बरदस्त रिस्पॉन्स के बाद प्राइम वीडियो ने आधिकारिक तौर पर इस शो को दूसरे सीज़न के लिए रिन्यू किया।