Paper Leak Law 2026 : लोकसभा से पास हुआ नया एंटी पेपर लीक बिल, अब 10 साल की जेल और 10 रुपए करोड़ तक जुर्माना, क्या-क्या बदला

Paper Leak Law 2026

प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक को लेकर लगातार उठ रहे विवाद और संसद में कई दिनों तक चले राजनीतिक घमासान के बीच लोकसभा ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 (Public Examination (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026) को पारित कर दिया है। सरकार का दावा है कि यह नया कानून पहले से कहीं अधिक सख्त होगा और इससे पेपर लीक माफियाओं पर प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।

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संसद में विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने हाल के परीक्षा विवादों और छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा उठाया, जबकि सरकार ने कहा कि पेपर लीक किसी एक सरकार तक सीमित नहीं है और इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार के मुताबिक इस संशोधन का उद्देश्य केवल सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना और करोड़ों छात्रों के भविष्य की रक्षा करना है।

 

क्यों लाना पड़ा नया संशोधन?

 

केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट लागू किया था ताकि पेपर लीक और परीक्षा में धांधली को अपराध बनाया जा सके। हालांकि इसके बाद भी कई भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं, खासकर NEET पेपर लीक मामले, ने पूरे देश में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। सरकार का कहना है कि 2024 के कानून को लागू करने के दौरान जो कमियां सामने आईं, उन्हें दूर करने और दोषियों के खिलाफ तेज कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यह संशोधन लाया गया है।

 

संसद में सरकार ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि सरकार ने पूरी ईमानदारी से परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह संशोधन किया है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण न किया जाए क्योंकि विभिन्न राज्यों और अलग-अलग दलों की सरकारों के दौरान भी पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं।

 

उन्होंने बताया कि 2024 में कानून लागू होने के बाद से अब तक 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक से जुड़े मामलों के कारण होने वाली आत्महत्या की घटनाओं में भी कमी आई है।

 

नए एंटी पेपर लीक कानून में क्या-क्या बदलेगा?

1. हर राज्य में फास्ट-ट्रैक कोर्ट

 

अब प्रत्येक राज्य में पेपर लीक और परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। इससे मामलों का जल्द निपटारा हो सकेगा।

 

2. दो महीने में जांच पूरी करना होगा

 

विधेयक के अनुसार, पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी, ताकि चार्जशीट और ट्रायल में देरी न हो।

 

3. 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपए जुर्माना

 

यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक का दोषी पाया जाता है, तो उसे 10 साल तक की सजा और 50 रुपए लाख तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि इससे ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगेगी।

 

4. संगठित गैंग पर 10 करोड़ रुपए तक जुर्माना

 

यदि कोई संगठित गिरोह बड़े स्तर पर पेपर लीक रैकेट चलाता हुआ पाया जाता है, तो उस पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसका उद्देश्य पेपर लीक माफिया के पूरे नेटवर्क को खत्म करना है।

 

क्यों है यह कानून अहम?

 

देश में भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में लाखों छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक होने से न केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में देरी और पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं।

 

पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के आरोप लगे, जिसके बाद देशभर में प्रदर्शन, अदालतों में याचिकाएं और परीक्षा सुधार की मांग तेज हुई।

 

क्या नया कानून पूरी तरह खत्म कर देगा पेपर लीक?

 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक केवल कानून सख्त बनाने से पेपर लीक पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। इसके लिए परीक्षा प्रणाली की डिजिटल सुरक्षा मजबूत करनी होगी, प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग और वितरण प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना होगा, जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा और परीक्षा कराने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करनी होगी।

 

छात्रों के लिए क्या मायने?

सरकार का कहना है कि नया संशोधन करोड़ों छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कानून का पालन कितनी प्रभावी और समयबद्ध तरीके से किया जाता है।

NEET protest case: NEET प्रोटेस्ट मामले में नया मोड़! रूस में होने के बावजूद बिहार के युवक पर FIR दर्ज, यूजर्स ने उठाए सवाल

NEET protest case: बिहार के किशनगंज जिले के एक युवक ने दावा किया है कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले सप्ताह हुए विरोध प्रदर्शनों के संबंध में राज्य पुलिस ने उसके खिलाफ FIR दर्ज की है। जबकि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है। किशनगंज निवासी मोहम्मद सदाकत ने रूस से बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जो वायरल हो गया है। हालांकि, पीटीआई द्वारा संपर्क किए जाने पर किशनगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) हरि मोहन शुक्ला ने न तो इस दावे की पुष्टि की और न ही खंडन किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को कोई शिकायत है, वे पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।

कथित वीडियो में मोहम्मद सदाकत ने अपने खिलाफ दर्ज मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह बहादुरगंज में पिछले सप्ताह नीट पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान मौजूद नहीं था, क्योंकि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है। उसने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और FIR से नाम हटाने की मांग की।

क्या बोली बिहार पुलिस?

एसपी शुक्ला ने सदाकत के कथित वीडियो के बारे में विशेष रूप से पूछे जाने पर न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “प्रदर्शनों से संबंधित जिन लोगों को कोई शिकायत है, वे उसके निवारण के लिए पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।” बता दें कि बिहार सरकार ने सोमवार को घोषणा की थी कि वह नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शनों के सिलसिले में दर्ज सभी मामलों को वापस लेगी और विभिन्न आरोपों में जेल भेजे गए लोगों को रिहा करेगी।

राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया था कि 26 जुलाई को सुबह छह बजे से पहले हुई घटनाओं के संबंध में दर्ज सभी FIR, शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा था कि इस संबंध में गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को तत्काल रिहा किया जाएगा। पिछले सप्ताह नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में आयोजित बिहार बंद के दौरान कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें लगभग आधे नाबालिग थे।

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युवक ने की जांच की मांग

वायरल वीडियो में मोहम्मद सदाकत ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि चूंकि वह चार महीने से रूस में रह रहे हैं, इसलिए उन्हें नीट प्रदर्शन में शामिल बताना गलत है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि जांच के बाद यदि उनका दावा सही पाया जाए तो उनका नाम FIR से हटाया जाए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद इस मामले को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

Audi Q9 : Audi की अब तक की सबसे बड़ी SUV से उठा पर्दा, 7-सीटर लग्जरी, Hands-Free Driving और V8 इंजन से होगी लैस

Audi SQ9 SUV

जर्मनी की लग्जरी कार निर्माता Audi ने अपनी पहली फुल-साइज लग्जरी SUV Audi Q9 से आधिकारिक तौर पर पर्दा उठा दिया है। यह अब तक की सबसे बड़ी Audi SUV है, जिसे खास तौर पर अमेरिका सहित वैश्विक बाजारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। कंपनी का कहना है कि नई Q9 स्पेस, प्रीमियम कम्फर्ट, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और दमदार परफॉर्मेंस का बेहतरीन मेल है। इसकी डिलीवरी 2026 की चौथी तिमाही से शुरू होगी।

 

Audi के CEO Gernot Döllner ने कहा कि Audi Q9 कंपनी की पहली फुल-साइज SUV है, जिसे अमेरिकी ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह मॉडल प्रीमियम क्वालिटी, शानदार इंटीरियर, आराम और सुरक्षा के नए मानक स्थापित करेगी।

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Audi की अब तक की सबसे बड़ी SUV

 

नई Audi Q9 की लंबाई 5.31 मीटर, चौड़ाई 2.21 मीटर (मिरर सहित), ऊंचाई 1.81 मीटर और व्हीलबेस 3.14 मीटर है। यही वजह है कि यह Audi के इतिहास की सबसे बड़ी SUV बन गई है। इसका बोल्ड फ्रंट डिजाइन और दमदार रियर लुक इसे सड़क पर बेहद आकर्षक बनाते हैं।

 

7-सीटर के साथ मिलेगा बिजनेस क्लास जैसा केबिन

 

Audi Q9 को स्टैंडर्ड रूप से 7-सीटर लेआउट में पेश किया गया है। वहीं, विकल्प के तौर पर 6-सीटर कॉन्फिगरेशन भी मिलेगा, जिसमें दूसरी पंक्ति में दो इलेक्ट्रिक एडजस्टेबल इंडिविजुअल सीटें दी गई हैं। इससे यात्रियों को बिजनेस क्लास जैसा अनुभव मिलेगा। तीसरी पंक्ति की सीटों को एक बटन दबाकर अलग-अलग फोल्ड किया जा सकता है। फ्रंट सीटों में वेंटिलेशन और मसाज फंक्शन भी मिलेगा।

 

Audi का सबसे बड़ा Panoramic Sunroof

 

नई Audi Q9 में कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा Panoramic Sunroof दिया गया है। इसका ग्लास एरिया 1.5 वर्ग मीटर से अधिक है। यह पूरी तरह खुल सकता है या टिल्ट मोड में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ बाजारों में इसमें Switchable Transparency Glass और पहली बार Ambient Lighting के अनुसार रंग बदलने वाली ग्लास रूफ इल्यूमिनेशन जैसी सुविधा भी मिलेगी।

 

Hands-Free Driving का मिलेगा फीचर

Audi Q9 में पहली बार Adaptive Cruise Assist Plus दिया गया है। इसकी मदद से 130 किमी/घंटा तक की स्पीड पर निर्धारित हाईवे पर ड्राइवर स्टीयरिंग से हाथ हटाकर भी सफर कर सकेगा। सिस्टम खुद स्टीयरिंग, एक्सेलरेशन और ब्रेकिंग को नियंत्रित करेगा। शुरुआत में यह फीचर अमेरिका, कनाडा और जर्मनी के चुनिंदा हाईवे पर उपलब्ध होगा।

Audi SQ9 SUV

नई Lighting Technology

 

Audi Q9 के रियर में दुनिया की पहली Curved Digital OLED Panels तकनीक दी गई है, जो पहले से अधिक बड़े आकार की है। वहीं, Digital Matrix LED Headlights में माइक्रो-LED मॉड्यूल का इस्तेमाल किया गया है।

 

रात में मोड़ लेते समय एडवांस टर्न सिग्नल सड़क पर दिशा का संकेत भी प्रोजेक्ट करेंगे, जिससे अन्य वाहन चालकों को वाहन की दिशा पहले से बेहतर तरीके से दिखाई देगी और सुरक्षा बढ़ेगी।

 

दमदार इंजन विकल्प

 

यूरोप में Audi Q9 को 3.0-लीटर V6 TDI डीजल इंजन के साथ पेश किया जाएगा, जो 220 kW और 180 kW के दो पावर विकल्पों में उपलब्ध होगा। इसमें MHEV Plus Mild Hybrid सिस्टम और इलेक्ट्रिक पावर्ड कंप्रेसर दिया गया है, जिससे बेहतर माइलेज और तेज एक्सेलरेशन मिलेगा। अमेरिकी बाजार के लिए इसमें 3.0-लीटर V6 टर्बो पेट्रोल इंजन दिया जाएगा। सभी V6 मॉडल Quattro ऑल-व्हील ड्राइव सिस्टम के साथ आएंगे।

 

Audi SQ9 भी होगी लॉन्च

 

Audi चुनिंदा बाजारों में हाई-परफॉर्मेंस SQ9 भी लॉन्च करेगी। इसमें 4.0-लीटर V8 ट्विन-टर्बो इंजन मिलेगा, जो 591 हॉर्सपावर और 590 lb-ft टॉर्क पैदा करेगा। यह SUV 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार केवल 4 सेकेंड में पकड़ लेगी। Q9 और SQ9 दोनों में Adaptive Air Suspension, Rear Axle Steering और 3,500 किलोग्राम तक की टोइंग क्षमता स्टैंडर्ड दी गई है।

स्लोवाकिया में होगा निर्माण

 

Audi Q9 का निर्माण Volkswagen Group के Bratislava (Slovakia) प्लांट में किया जाएगा। इसी फैक्ट्री में पहले से Audi Q7 और Audi Q8 का भी उत्पादन किया जाता है। कंपनी के अनुसार यह प्लांट अत्याधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण के लिए जाना जाता है।

Rahul Gandhi : राहुल गांधी के आरोपों से लोकसभा में हंगामा, अमित शाह पर छात्रों पर गोली चलवाने का आरोप, सरकार ने मांगा सबूत, पेपर लीक बिल पर तीखी बहस

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लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग और पैलेट गन चलाने का आदेश गृह मंत्री ने दिया था।

आज शाम 6 राहुल गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा कि मुझे बीजेपी ने बोलने नहीं दिया। उनके इस बयान पर सदन में भारी हंगामा मच गया और भाजपा सांसदों ने आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे। राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि गृह मंत्री ने हमारे छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया। उन्होंने छात्रों के शरीर में पैलेट पहुंचाए। छात्रों पर बल प्रयोग का आदेश केवल गृह मंत्री या प्रधानमंत्री ही दे सकते हैं।” उन्होंने अमित शाह की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्री सदन में आने का साहस नहीं दिखा रहे हैं और वे डरे हुए हैं।

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किरण रिजिजू ने पूछा- आरोप का आधार क्या है?

 

राहुल गांधी के बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “आप इतने गंभीर आरोप किस आधार पर लगा रहे हैं? आपको यह जानकारी किसने दी? यह पूरी तरह गलत है। इस बयान को सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।” रिजिजू ने राहुल गांधी से माफी मांगने की भी मांग की और कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए इस तरह का निराधार आरोप लगाना संसदीय गरिमा के खिलाफ है।

 

RSS पर भी साधा निशाना

 

राहुल गांधी ने अपने भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय पर RSS का प्रभाव है और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान केवल एक प्रतीक थे। उन्होंने कहा, “शिक्षा मंत्रालय की आत्मा पर RSS का कब्जा है। मंत्रालय को वास्तव में RSS चला रहा है।”

 

राहुल गांधी ने हालिया छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि एक छात्र ने उन्हें समाज की तीन श्रेणियां बताईं—स्टूडेंट्स, इडियट्स और अंधभक्त। उन्होंने अंधभक्तों को लेकर की गई टिप्पणी भी दोहराई, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी की कई टिप्पणियों को असंसदीय बताते हुए कार्यवाही से हटाने (Expunge) का निर्देश दिया।

 

पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा से पारित

 

लोकसभा ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार का दावा है कि यह कानून पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाएगा।

 

डिंपल यादव ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल

 

समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि वर्ष 2024 में भी इसी विषय पर कानून पारित किया गया था और उसमें 101 सिफारिशें शामिल थीं। इसके बावजूद देशभर में लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीयत और नीति दोनों स्पष्ट नहीं हैं और पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार से प्रभावित हो चुका है। उनके मुताबिक केवल संशोधन लाने से कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा और इसका नुकसान देश के युवाओं को उठाना पड़ रहा है।

 

अनुराग ठाकुर बोले- राहुल गांधी युवाओं से माफी मांगें

 

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने छात्रों के लिए 'इडियट' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है, जिसके लिए उन्हें देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, “आंदोलन के दौरान कहीं भी गोली नहीं चली। राहुल गांधी ने गृह मंत्री पर झूठे आरोप लगाए हैं। उन्हें अमित शाह और देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए।”

 

प्रियंका गांधी बोलीं- देश ने सब देखा

 

लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर के बाहर कहा, “पूरे देश ने देखा कि क्या हुआ। एक छात्र की आंख चली गई।”

 

जितेंद्र सिंह का राहुल गांधी पर तंज

 

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि 21 जुलाई को वह प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर बैठ गए थे क्योंकि उनकी इच्छा वहां रहने की थी। उन्होंने कहा कि जब उन्हें वहां से हटाने की विनम्र कोशिश की गई तो उन्होंने स्वयं कहा कि उन्हें वहां से हटाया जाए।

 

अखिलेश यादव ने गृह मंत्रालय को ठहराया जिम्मेदार

 

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान पैलेट गन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि घायल छात्रों को विपक्ष के पहुंचने से पहले ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उनके मुताबिक दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बल गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं, इसलिए इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।

 

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पेपर लीक, छात्र आंदोलन और सरकार की कार्रवाई को लेकर संसद में तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। विपक्ष सरकार पर युवाओं के साथ अन्याय का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार विपक्ष पर भ्रामक और निराधार आरोप लगाने का आरोप लगा रही है।

लोकसभा में ऐसा क्या बोल गए राहुल गांधी…जिसपर मचा हंगामा, सरकार ने जताई कड़ी आपत्ति

Rahul Gandhi Speech: संसद के मानसून सत्र में बुधवार को एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। वहीं लोकसभा में ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक शब्द को लेकर सदन में तीखी बहस हो गई। राहुल गांधी ने अपने भाषण में “इडियट्स” (मूर्ख) शब्द का इस्तेमाल किया, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री ने तुरंत आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह शब्द असंसदीय है और इसे रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक की लगातार हो रही घटनाओं से देश के युवाओं में गहरी निराशा है। उन्होंने अपनी बात समझाने के लिए एक 18 साल के छात्र से हुई बातचीत का भी जिक्र किया और बताया कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों में भरोसा कम होता जा रहा है।

राहुल गांधी की इस शब्द पर आपत्ति

राहुल गांधी ने उस छात्र से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि छात्र ने लोगों को तीन हिस्सों में बांटा था। उसके मुताबिक, पहला वर्ग छात्रों का है, दूसरा “मूर्ख” लोगों का और तीसरा उन लोगों का है जो इन मूर्खों का बिना सोचे-समझे समर्थन करते हैं। राहुल गांधी के इतना कहते ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में ही आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल संसद की मर्यादा के खिलाफ है और इन्हें नहीं कहा जाना चाहिए। इसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच जोरदार बहस शुरू हो गई। किरेन रिजिजू ने कहा कि ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने “इडियट” (मूर्ख) शब्द का कई बार इस्तेमाल किया, जो असंसदीय है। उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

सराकर ने कही ये बात 

जब सत्ता पक्ष के सांसदों ने राहुल गांधी के बयान का विरोध किया, तब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आपत्ति जताने के बाद भी राहुल गांधी उसी असंसदीय शब्द का बार-बार इस्तेमाल कर रहे हैं। किरेन रिजिजू ने कहा, “वह बार-बार उसी शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं।” इस पर राहुल गांधी ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा किसी व्यक्ति को उस शब्द से संबोधित करने का नहीं था। उन्होंने कहा, “मैं किसी को ऐसा नहीं कह रहा हूं।” इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह आगे अपनी बात रखने के लिए कोई दूसरा शब्द इस्तेमाल करेंगे।

हालांकि, किरेन रिजिजू ने सरकार की आपत्ति दोहराते हुए कहा, “आपने असंसदीय शब्द का इस्तेमाल किया है, इसलिए हमने इसका विरोध किया।” इसके बाद राहुल गांधी ने अपना भाषण जारी रखा और छात्र की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि छात्र का मानना था कि सच्चा छात्र हमेशा सच के साथ खड़ा रहता है, जबकि कुछ लोग अपनी छवि बनाने में लगे रहते हैं। राहुल गांधी के इतना कहते ही सत्ता पक्ष के सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन में फिर हंगामा होने लगा। यह पूरा विवाद लोकसभा में ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर चर्चा के दौरान हुआ। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद यह विधेयक पहले से ही राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

राहुल गांधी के बयान पर भड़के किरेन रिजिजू, स्पीकर बिरला ने भी दी हिदायत

Loksabha News

Rahul Gandhi vs Kiren Rijiju: लोकसभा में बुधवार को उस समय भूचाल आ गया जब पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीधे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर बेहद संगीन आरोप लगाए। राहुल ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलीबारी और पैलेट गन चलाने का आदेश खुद गृहमंत्री ने दिया था और 'वह डरे हुए हैं'।

किरेन रिजिजू  की राहुल गांधी को चुनौती 

राहुल गांधी के इस बयान पर सत्तापक्ष उबल पड़ा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे सरासर झूठा आरोप करार देते हुए राहुल गांधी से तुरंत माफी मांगने या आदेश का सबूत दिखाने की चुनौती दे डाली। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सख्त रवैया अपनाया और राहुल गांधी की टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। ALSO READ: एक्टिविज्म करना है तो सजा के लिए तैयार रहें, नड्डा का खरगे पर पलटवार

 

संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक बिल पर जारी बहस के दौरान लोकसभा का माहौल अचानक बेहद तनावपूर्ण हो गया। दोपहर करीब 12:30 बजे बोलने खड़े हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ हुई पुलिसिया कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सीधे गृहमंत्री अमित शाह को निशाने पर ले लिया।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

सदन में राहुल गांधी ने कहा कि छात्र अपने डर से बाहर निकलकर सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन सरकार उनसे घबराई हुई है। उन्होंने कहा कि इस देश के कथित गृह मंत्री में सदन में आकर बैठने का साहस नहीं है। वह डरे हुए हैं और उन्होंने ही छात्रों पर गोली तथा पैलेट गन चलाने की अनुमति दी। ALSO READ: संसद में आर-पार, सपा सांसदों का दानपेटी प्रदर्शन, प्रियंका बोलीं मैंने कुछ गलत नहीं कहा

किरेन रिजिजू का करारा पलटवार

राहुल गांधी के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और कड़ा प्रतिवाद किया। रिजिजू ने कहा कि कोई भी सदस्य बिना किसी आधार या सबूत के इतने जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति पर झूठा आरोप नहीं लगा सकता। रिजिजू ने कहा कि आप ऐसे कैसे बोल सकते हैं? किस आधार पर आपने यह कहा? किसने बताया आपको? आप गृहमंत्री का लिखित ऑर्डर दिखाइए! अगर आपके पास सबूत नहीं है तो आपको सदन और देश से माफी मांगनी होगी। जब तक राहुल गांधी माफी नहीं मांगेंगे, तब तक सदन नहीं चलने दिया जाएगा।

 

रिजिजू ने तीखे अंदाज में तंज कसते हुए यह भी कहा कि क्या मैं बिना किसी सबूत के ऐसा कह सकता हूं कि राहुल गांधी ने किसी का मर्डर किया है? आप बिना आधार के ऐसे गंभीर आरोप कैसे लगा सकते हैं?

लोकसभा स्पीकर की सख्त हिदायत

हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दखल दिया और नेता प्रतिपक्ष को संसदीय मर्यादा की याद दिलाई। स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को हिदायत देते हुए कहा कि वह इस तरह सीधे नाम लेकर आरोप नहीं लगा सकते, वे केवल मामले की जांच की मांग कर सकते हैं। इसके साथ ही लोकसभा स्पीकर ने बड़ा फैसला सुनाते हुए गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े राहुल गांधी के आरोपों और टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने (का स्पष्ट निर्देश दिया।

 

सदन में जब सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए, तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीच-बचाव करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष ने कोई गंभीर सवाल उठाया है तो सरकार यह स्पष्ट कर दे कि आखिर किसके आदेश पर छात्रों पर कार्रवाई हुई। इस पर रिजिजू ने उन्हें जवाब देते हुए कहा कि सवाल पूछना अलग बात है, लेकिन झूठा आरोप लगाकर सनसनी फैलाना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एक्टिविज्म करना है तो सजा के लिए तैयार रहें, नड्डा का खरगे पर पलटवार

JP Nadda statement Rajya Sabha: संसद के मॉनसून सत्र में नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर बुधवार को राज्यसभा में भारी हंगामा हुआ। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पुलिस कार्रवाई और माकपा कार्यालय में पुलिस के प्रवेश को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। इस पर पलटवार करते हुए राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया और स्पष्ट कहा कि अगर किसी छात्र को एक्टिविज्म करना है, तो उसे इस तरह की कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए।

 

बुधवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाकर जोरदार हंगामा किया। सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने माकपा कार्यालय में दिल्ली पुलिस के दाखिल होने और जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने के प्रयास का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि 2021 के एक मामले में सादे कपड़ों में आई पुलिस टीम ने केवल इसलिए यह कार्रवाई की क्योंकि आइशी घोष ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में भाग लिया था। ALSO READ: संसद में आर-पार, सपा सांसदों का दानपेटी प्रदर्शन, प्रियंका बोलीं मैंने कुछ गलत नहीं कहा

खरगे का सरकार पर हमला

कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि एक राष्ट्रीय पार्टी के कार्यालय में घुसकर किसी को गिरफ्तार करने की कोशिश करना बेहद शर्मनाक है। क्या इससे लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ता? खरगे ने पुलिस टीम पर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे कदम देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर आघात हैं।

केन्द्रीय मंत्री नड्डा का पलटवार

खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का मजबूती से समर्थन किया। अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए नड्डा ने कहा कि ये बहुत ही सामान्य स्थिति है। मैं खुद स्टूडेंट एक्टिविस्ट रहा हूं। इमरजेंसी के दौरान मुझे कई बार क्लासरूम से उठाकर ले जाया गया, तब देश में कांग्रेस की सरकार थी। अगर किसी छात्र को एक्टिविज्म करना है तो उसे ये सब झेलना ही पड़ेगा। ALSO READ: Priyanka Gandhi : प्रियंका गांधी के बयान पर संसद में बवाल, प्रह्लाद जोशी पर टिप्पणी से मचा हंगामा, माफी की उठी मांग

 

नड्डा ने आगे कहा कि जब कोई कानून हाथ में लेता है, तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अपनी जिम्मेदारी निभानी ही पड़ती है। इसे गैर-जरूरी तरीके से सनसनीखेज बनाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने खुद दो बार गिरफ्तारी झेली है, इसलिए छात्र राजनीति में ऐसी सजाओं के लिए तैयार रहना पड़ता है।

NEET-UG Paper Leak : CBI ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट, आज फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। CBI के मुताबिक, सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। यह चार्जशीट CBI की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) ने दाखिल की है। यह मामला बुधवार को पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।

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इन धाराओं के तहत दर्ज है मामला

CBI के अनुसार, मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238 और 303(2) के तहत दर्ज किया गया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(a) तथा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की धारा 3, 4, 5, 10 और 11 भी आरोपियों पर लगाई गई हैं।

 देशभर में मचा था बवाल

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NEET-UG पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे और मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कई स्तरों पर जांच शुरू की गई थी। इसी विवाद के बीच 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद Cockroach Janta Party (CJP) ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और NEET पेपर लीक के विरोध में चल रहा अपना 36 दिन का आंदोलन वापस लेने की घोषणा की थी।

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लोकसभा में पेपर लीक बिल पर चर्चा 

लोकसभा में पेपर लीक से जुड़े 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 मंगलवार को पास नहीं हो सका। दोपहर 2 बजे से रात 11 बजे तक लगातार 9 घंटे बिल पर चर्चा हुई। विधेयक में 2024 में बने कानून में बदलाव का प्रस्ताव है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इससे पेपर लीक रोकने में मदद मिलेगी। चर्चा में अभी भी कई सांसदों का बोलना बाकी है। रात 11 बजे स्पीकर ने लोकसभा बुधवार 11 बजे तक स्थगित कर दी। अब बिल पर बुधवार को लोकसभा में फिर चर्चा और वोटिंग होगी। वहीं बिल राज्यसभा में भी पेश किया जाएगा।

जब देश में गर्म है छात्रों की पिटाई का मामला तब बिहार की इस महिला अफसर की क्यों हो रही तारीफ? जानिए कौन हैं IPS शैलजा दास

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर में चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में पटना में छात्रों ने बिहार बंद बुलाया था। इसकी वजह से शहर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहे। इसी दौरान पटना पूर्वी की सिटी एसपी और 2022 बैच की आईपीएस अधिकारी शैलजा दास का एक बयान चर्चा में है।

आईपीएस अधिकारी का बयान हो रहा वायरल

आईपीएस अधिकारी शैलजा ने कहा कि, “नागरिकों को अपनी बात रखने और अपनी राय व्यक्त करने का पूरा अधिकार है। वे जो कहना चाहते हैं, कह सकते हैं। जब तक वह हम पर बल प्रयोग नहीं करेंगे, तब तक हम भी उनके खिलाफ बल प्रयोग नहीं करेंगे।” सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वारयल हो रहा है। लोग आईपीएस अधिकारी शैलजा की काफी तारीफ भी कर रहे हैं। आइए जानते हैं कौन है आईपीएस अधिकारी शैलजा दास

कौन है आईपीएस शैलजा दास

आईपीएस शैलजा दास बिहार कैडर की 2022 बैच की अधिकारी हैं और फिलहाल पटना पूर्वी में सिटी एसपी के पद पर तैनात हैं। आईपीएस शैलजा दास को एक संवेदनशील और जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में जाना जाता है। सिविल सेवा परीक्षा 2021 में उन्होंने 83वीं रैंक हासिल की थी, जिसमें इतिहास उनका वैकल्पिक विषय था। पटना में तैनाती से पहले वह नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल में एसडीपीओ के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। पटना में हालिया छात्र प्रदर्शन के दौरान भी उन्होंने धैर्य के साथ स्थिति को संभालने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर माहौल शांत रखने का प्रयास किया।

सेंट स्टीफंस कॉलेज से की है पढ़ाई

शैलजा दास की शुरुआती शिक्षा अपने गृह नगर में हुई। उन्होंने वर्ष 2013 में बुद्धा पब्लिक स्कूल से दसवीं और बाद में दिल्ली पब्लिक स्कूल से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने 2021 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अखिल भारतीय 83वीं रैंक हासिल की और आईपीएस बनीं।

छात्र आंदोलन को पाकिस्तानी समर्थन के दावे पर भारत बोला:पाकिस्तानी सीमा पर आतंकवाद बंद करे, इंडियन GenZ भी यही चाहते हैं

भारत सरकार ने मंगलवार को उन खबरों पर प्रतिक्रिया दी, जिनमें कहा गया था कि पाकिस्तान के कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और GenZ समूहों ने दिल्ली में हुए CJP के छात्र आंदोलन का समर्थन किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान का सीमा पार आतंकवाद है। पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर्स ने समर्थन किया था पाकिस्तान के कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने CJP आंदोलन के समर्थन में पोस्ट किए थे। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के साझा इतिहास का जिक्र करते हुए छात्रों के साथ एकजुटता दिखाई। इंस्टाग्राम पर करीब तीन लाख फॉलोअर्स वाले पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर बिलाल हसन ने वीडियो जारी कर कहा कि दोनों देशों के बीच नफरत फैलाई गई है, लेकिन पाकिस्तान के लोग आंदोलन के पोस्टर, नारों और संदेशों को समझते हैं। उन्होंने कहा, “हम खुद को इस आंदोलन में देखते हैं। आखिर हम एक बंटे हुए परिवार के बच्चे हैं।” उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बहादुर बताया और कहा कि वे अपने देश का बेहतर भविष्य चाहते हैं। साथ ही छात्रों से अपील की कि वे एकजुट रहें और कोई भी जोखिम सोच-समझकर उठाएं। पाकिस्तानी क्रिएटर्स ने मीम्स और वीडियोज भी बनाए कई पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर्स ने आंदोलन पर वीडियो भी बनाए। कुछ ने मजाक में कहा कि उन्हें जंतर-मंतर पहुंचने से सिर्फ भारत-पाकिस्तान की सीमा रोक रही है। कुछ लोगों ने पाकिस्तानी पासपोर्ट के साथ प्रदर्शन में पहुंचने की कल्पना वाले वीडियो बनाए। एक अन्य वीडियो में एक पाकिस्तानी महिला ने कहा कि भारत के GenZ की वजह से उसके लिए भारत से नफरत करना मुश्किल होता जा रहा है। पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर महविश एजाज ने भी छात्र आंदोलन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों की संघर्ष की कहानियों ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया। वहीं, एक दूसरे पाकिस्तानी इंफ्लुएंसर अहसान मिर्जा ने कहा, “छात्रों को हमेशा छात्रों का साथ देना चाहिए। हम एक जैसे हैं। हमारे पूर्वजों ने एक ही रोटी खाई और अंग्रेजों के खिलाफ साथ लड़ाई लड़ी।” पाकिस्तान से चल रहे 480 से ज्यादा हैंडल्स पर सरकार की नजर पाकिस्तानी सरकार ने छात्र आंदोलन पर टिप्पणी नहीं की कुछ दिन पहले ही, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस आंदोलन पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से पूछा गया था कि क्या भारत में प्रदर्शनकारियों के साथ हुआ व्यवहार मानवाधिकार उल्लंघन माना जा सकता है। इस पर अंद्राबी ने कहा, “यह भारत का आंतरिक मामला है। हम ऐसे मामलों पर टिप्पणी नहीं करते।” NEET पेपर लीक विवाद से शुरू हुआ था आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्रों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और खास तौर पर NEET पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई सप्ताह तक प्रदर्शन किया। छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। आंदोलन में छात्र आत्महत्याओं का मुद्दा भी उठाया गया। 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद आंदोलन और तेज हो गया। बाद में 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने धरना खत्म करने का ऐलान किया।