पेपर लीक कैसे रोकेंगे! मल्लिकार्जुन खरगे ने क्यों कहा अधूरा बिल लाई सरकार

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill: संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में 'परीक्षा संशोधन बिल' पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला। खरगे ने सरकार की नीयत और बिल की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह नया संशोधन विधेयक युवाओं की समस्या को सुलझाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में उबल रहे छात्रों के गुस्से को ठंडा करने के लिए लाया गया है। उन्होंने साफ लहजे में पूछा कि जब इस बिल में यही नहीं बताया गया है कि असल में 'पेपर लीक' कैसे रोका जाएगा, तो फिर इस अधूरे बिल का क्या मतलब?

युवाओं के संघर्ष के आगे झुकी सरकार

राज्यसभा में चर्चा में भाग लेते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि बीते एक महीने से देश के युवा सड़कों पर धरने पर बैठे थे और अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। यह युवाओं और छात्रों के अनवरत संघर्ष की ही ताकत है कि आखिरकार सरकार को उनके सामने झुकना पड़ा। खरगे ने कहा कि सरकार ने खुद अपनी विफलता छिपाने और अपनी कुर्सी बचाने के लिए इस बिल को जल्दबाजी में पेश किया है। जो कदम सरकार आज उठा रही है, उसे 2024 की शुरुआत में ही क्यों नहीं उठाया गया? ALSO READ: सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

केवल आंकड़े बदले हैं, समस्या वहीं की वहीं

विधेयक की कमियों को उजागर करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस नए संशोधन बिल से जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदलने वाला। इसमें कानून की धाराओं और आंकड़ों में भले ही हेरफेर कर दी गई हो, लेकिन मूलभूत समस्या के समाधान पर यह बिल पूरी तरह मौन है। खरगे ने सवाल उठाया कि बिल में सजा और जुर्माने की बातें तो कह दी गईं, लेकिन 'पेपर लीक' के उस नेक्सस (गिरोह) को कैसे खत्म किया जाएगा और भविष्य में लीक रोकेंगे कैसे, इसका कोई खाका या उल्लेख इस पूरे बिल में है ही नहीं। यह बिल आधा-अधूरा और सिर्फ जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। ALSO READ: किसने दिया ऑर्डर?' पोस्टर लेकर संसद पहुंची कांग्रेस, छात्रों पर पैलेट गन मामले में अमित शाह से मांगा जवाब

पीएम और गृहमंत्री की चुप्पी पर सवाल

सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि देश का भविष्य यानी युवा सड़कों पर लाठियां खा रहा था, लेकिन न तो प्रधानमंत्री इस संवेदनशील मुद्दे पर कुछ बोले और न ही गृहमंत्री अमित शाह कहीं नजर आए। खरगे ने पूछा कि इतनी बड़ी-बड़ी धांधलियां और धांधलेबाजों के हौसले बुलंद होने के बावजूद गृहमंत्री आखिर क्यों चुप हैं? जब छात्र अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे, तो सरकार ने उन्हें 'अराजक' करार दे दिया। खरगे ने सवाल किया कि सरकार ने महीनों से प्रदर्शन कर रहे इन मासूम छात्रों से समय रहते बातचीत करने की जहमत तक क्यों नहीं उठाई? ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

'प्रधान' को हटाना पड़ा, पर व्यवस्था कब बदलेगी?

मल्लिकार्जुन खरगे ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर तंज कसते हुए कहा कि बढ़ते जनाक्रोश और चौतरफा घिरने के बाद आखिरकार सरकार को प्रधान को हटाना ही पड़ा। लेकिन सिर्फ चेहरे बदलने से या दिखावे के लिए ऐसा बिल लाने से काम नहीं चलेगा। जब तक पेपर लीक के सिंडिकेट को खत्म करने का पुख्ता मैकेनिज्म नहीं बनता, तब तक लाखों छात्रों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा।

विपक्ष ने बुलंद की छात्रों की आवाज

खरगे ने राज्यसभा के पटल से देश के युवाओं को भरोसा दिलाया कि विपक्ष उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सदन से लेकर सड़क तक छात्रों के हक की लड़ाई लड़ता रहेगा और सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत बिल्कुल नहीं देगा।

गृहमंत्री से इस्तीफा मांगा

सरकार पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि पेपर बाजार में बिकता रहा और पता नहीं चला। क्या सरकार सो रही थी? हमारी खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं? उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब दें। यदि वे सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं तो इस्तीफा दे दें। यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं पीएम मोदी को उन्हें हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2016, 21, 24 और अब 26 में पेपर लीक हो चुके हैं। कहां है कड़ी से कड़ी सजा? उन्होंने पूछा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? इस्तीफे के बाद संसद में धर्मेन्द्र प्रधान के स्वागत को भी उन्होंने सरकार की नाकामी बताया। 

सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

Supreme Court Jantar Mantar Protest

Supreme Court Jantar Mantar Protest: संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए खौफनाक एक्शन और पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली सरकार को साफ-साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल छात्रों का इलाज सरकार अपने खर्चे पर कराएगी। 

 

सुप्रीम कोर्ट ने ने केंद्र सरकार को भी इस मामले में नोटिस जारी किया है और पैलेट गन की SOP पर जवाब मांगा है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम जल्द ही प्रोटोकॉल भी बनाने वाले हैं। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के हथियारों के इस्तेमाल के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है। ALSO READ: NEET विवाद, CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी, छात्रों के उत्पीड़न का लगाया आरोप

क्या है पूरा मामला?

बीती 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले पेपर लीक के खिलाफ निकले 'संसद मार्च' के दौरान पुलिस की कार्रवाई का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में गरमा गया है। आरोपों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने हक की आवाज उठा रहे निहत्थे छात्रों पर न केवल बेदर्दी से लाठियां भांजीं, बल्कि पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से जख्मी हुए, जबकि एक छात्र की आंखों की रोशनी जाने का दावा जा रहा है। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

CJI सूर्यकांत की बेंच का कड़ा रुख

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहाना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता और पैलेट गन के शिकार पीड़ितों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट में पुलिसिया कार्रवाई की खौफनाक तस्वीर पेश की। दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फौरन निर्देश जारी किया कि पैलेट गन से घायल याचिकाकर्ता समेत तमाम लोगों को बिना किसी देरी के सबसे बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ALSO READ: विदेशी मीडिया ने CJP की जीत पर क्या कहा, पाकिस्तान से लेकर मिडिल-ईस्ट और अमेरिका में सुर्खियों में 'कॉकरोच'

हथियारों के इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना होगा सुरक्षित

कोर्ट ने सिर्फ इलाज तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि पुलिस की कार्रवाई पर शिकंजा कसते हुए बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा इस्तेमाल किए गए तमाम हथियारों और कारतूसों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। 

 

पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और घायल छात्रों द्वारा दायर इस जनहित याचिका में धातु वाली पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPRD) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि बेहद असाधारण परिस्थितियों में पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल का अधिकार है। लेकिन, कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि वह 20 जुलाई की घटना में हुए पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच और सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।

PM मोदी की फेसबुक पोस्ट हटने के विवाद पर Meta का बड़ा कदम, अब VIP अकाउंट्स के लिए लागू किए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल

PM Modi post row: दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने भारत सरकार को एक पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य प्रमुख हस्तियों द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए लागू किए गए कड़े और एडवांस्ड सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी दी है। प्रधानमंत्री मोदी की फेसबुक पोस्ट कुछ समय के लिए हटाए जाने के विवाद के बाद Meta ने प्रमुख VIP अकाउंट्स की सुरक्षा के लिए नए प्रोटोकॉल लागू किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने गुरुवार (30 जुलाई) को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि कंपनी ने सरकार को इस बारे में जानकारी दी है।

उन्होंने बताया कि अगले 7 से 10 दिनों के भीतर इस मुद्दे पर एक विस्तृत बैठक भी होगी। पत्रकारों से बातचीत में एस. कृष्णन ने कहा कि Meta ने सरकार को बताया है कि 28 जुलाई की घटना के बाद नए सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से कुछ समय के लिए हट गया था, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया था। बता दें कि मेटा, फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाती है।

मेटा ने लेटर में क्या कहा?

सूत्रों ने बताया कि मेटा ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय को सूचित किया है कि प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख हस्तियों द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट की अतिरिक्त निगरानी की जाएगी। साथ ही कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कई स्तरों पर इसकी समीक्षा की जाएगी। सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि मेटा की टीम इस सप्ताह के अंत में या अगले सप्ताह की शुरुआत में सरकारी अधिकारियों से उस घटना के संबंध में मिल सकती है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटा दिया गया था।

सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाए जाने के मुद्दे पर मंगलवार को मेटा के ग्लोबल हेड ऑफ पब्लिक पॉलिसी को तलब किया था। 23 जुलाई की पोस्ट में प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित किया था। उन्हें पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। अमेरिका स्थित सोशल मीडिया कंपनी ने इस घटना के लिए तकनीकी खराबी को जिम्मेदार ठहराते हुए माफी मांगी थी। हालांकि, IT मंत्रालय ने इस स्पष्टीकरण को अपर्याप्त माना था।

प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो संदेश शुरू में 23 जुलाई को इंस्टाग्राम पर साझा किया गया था। बाद में फेसबुक पर पोस्ट किया गया था। लेकिन मेटा ने इसे अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया था। सूत्रों के अनुसार, मेटा ने इस स्थिति के लिए अपने ऑटोमेटेड AI कंटेंट फिल्टर में तकनीकी खराबी को जिम्मेदार ठहराया। कंपनी ने कहा कि जो कंटेंट गलती से हटा दिया गया था, उसे बाद में बहाल कर दिया गया।

मेटा के अधिकारियों से इन पहलुओं पर होगी चर्चा

MeitY सचिव ने बताया कि प्रस्तावित बैठक में इस पूरे मामले के नीतिगत (Policy) और तकनीकी (Technical) दोनों पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही यह भी समीक्षा की जाएगी कि Meta ने सरकार की चिंताओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि Meta ने सरकार को एक लेटर लिखकर इस घटना पर खेद (Regret) भी जताया है। साथ ही यह बताया है कि किन कारणों से पोस्ट हटाई गई थी।

Meta के जवाब की जांच जारी

एस. कृष्णन ने कहा कि केंद्र सरकार अभी Meta द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण का अध्ययन कर रही है। इसके अलावा, यूजरनेम से जुड़े मुद्दे पर विभिन्न मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स द्वारा दिए गए सुझावों और प्रस्तुतियों की भी जांच की जा रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने प्रधानमंत्री की फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों को तलब किया था।

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सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार Meta के इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है कि पोस्ट ऑटोमेटेड सिस्टम की तकनीकी गलती (Automated Error) के कारण हटाई गई थी। सरकार और Meta के बीच इस मुद्दे पर बातचीत आगे भी जारी रहेगी।

कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला

पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला जारी है। अलग अलग कारणों से मंत्री इस्तीफा दे रहे हैं। कुछ और मंत्रियों का इस्तीफा होना है, जिसका इंतजार चल रहा है। हालांकि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थोड़ी अलग परिस्थितियों में हुआ है। इसकी तुलना यूपीए दो की सरकार में खेल मंत्री रहे सुरेश कलमाड़ी के इस्तीफे से की जा रही है। यूपीए दो की सरकार में कलमाड़ी सबसे पहले मंत्री थे, जिनको भ्रष्टाचार के आरोपों में इस्तीफा देना प़ड़ा था। उनके ऊपर कॉमनवेल्थ खेलों में ग़ड़ब़ड़ी के आरोप लगे थे। उसके बाद तो सिलसिला ही शुरू हो गया था। मंत्रियों के इस्तीफे और सांसदों की गिरफ्तारी का सिलसिला ऐसा चला कि पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन खड़ा हो गया और कांग्रेस 2014 का चुनाव बुरी तरह से हारी। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भ्रष्टाचार के आरोपों में नहीं हुआ है। लेकिन उनके ऊपर जिम्मेदारी के निर्वहन में अक्षमता के आरोप लगे। उनके कार्यकाल में दो बार नीट यूजी का पेपर लीक हुआ। इस साल पेपर लीक के बाद 21 छात्रों की जान गई। तब भी छात्रों और युवाओं के भारी दबाव में उनका इस्तीफा हुआ।

बहरहाल, प्रधान के इस्तीफे से ठीक पहले केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा हुआ था। उनका इस्तीफा स्वीकार हो गया है। गौरतलब है कि वे 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से पाला बदल कर भाजपा में गए थे और लोकसभा का चुनाव हार गए थे। इसके बावजूद उनको मंत्री बनाया गया था। बाद में राजस्थान से राज्यसभा के उपचुनाव में जीत कर उच्च सदन के सदस्य बने थे। इस बार उनको राज्यसभा की टिकट नहीं मिली है। कहा जा रहा है कि वे पंजाब में विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। उनसे पहले जॉर्ज कुरियन को राज्यसभा नहीं दी गई थी और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वे केरल के रहने वाले हैं और उनको मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था। केरल के चुनाव में भाजपा हार गई। फिर कुरियन को मध्य प्रदेश से राज्यसभा नहीं भेजा गया।

इनके अलावा दो और मंत्रियों के इस्तीफे का इंतजार हो रहा है। एक व्यक्ति, एक पद के हिसाब से इनका इस्तीफा होगा। केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली में संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। ये दोनों लोकसभा सांसद हैं और अभी दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बताया जा रहा है कि संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के साथ ही इनका इस्तीफा होगा। उसके बाद नरेंद्र मोदी की सरकार में फेरबदल होगी। 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के बाद किसी भी दिन सरकार में बड़ी फेरबदल होगी। 20 अगस्त की तारीख बताई जा रही है। गौरतलब है कि मोदी की तीसरी सरकार के दो साल पूरे हो गए हैं और अभी तक सरकार में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कम से कम पांच मंत्री पद खाली हो गए हैं या होने वाले हैं। इनके अलावा भी कई मंत्रियों को बदले जाने की चर्चा है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की वजह से ही पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम नहीं बन रही है। उनको अध्यक्ष बने छह महीने से ज्यादा हो गए। वे अब भी पुरानी टीम के साथ ही काम कर रहे हैं। उनको भी अगस्त में नई टीम मिलेगी। प्रधानमंत्री की टीम बिल्कुल नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाली होगी।

नीलेकणी क्या नीट खत्म करने की सिफारिश करेंगे?

इंफोसिस के सह संस्थापक और भारत में आधार क्रांति के सूत्रधार नंदन नीलेकणी के ऊपर केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने का जिम्मा सौंपा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ को भी इस उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का सदस्य बनाया गया है। पता नहीं लोगों को याद हो कि न हो, दो साल पहले इसरो के पूर्व प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। जैसे 2026 में नीट यूजी पेपर लीक के बाद यह कमेटी बनी है वैसे ही 2024 में नीट यूजी पेपर लीक के बाद वह कमेटी बनी थी। राधाकृष्ण कमेटी ने एक सौ ज्यादा सिफारिशें की थीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी 27 सिफारिशें ऐसी हैं, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया। कुछ सिफारिशें आंशिक तौर पर मानी गईं और 57 सिफारिशों को पूरी तरह से स्वीकार किया गया। लेकिन उसका क्या नतीजा निकला? दो साल के बाद फिर पेपर लीक हो गया!

राधाकृष्ण कमेटी ने सिफारिश की थी नीट यूजी सहित करीब 20 प्रतियोगिता परीक्षाएं कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए में विषय के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद भी पेपर लीक होना जारी है और दूसरी गड़बड़ियां भी हो ही रही हैं तो इसका अर्थ है कि एकमात्र समस्या यह नहीं है कि एनटीए में विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं। समस्या संरचनात्मक और व्यवस्थागत है। अगर नंदन नीलेकणी संरचनात्मक समस्याओं को समझ कर उसे ठीक करने का सुझाव देते हैं तब तो ठीक है अन्यथा इसका भी कोई मतलब नहीं होगा।

उनके सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती यह है कि क्या वे अखिल भारतीय परीक्षा के सिद्धांत को खत्म करने की सिफारिश करेंगे? क्या वे कहेंगे कि एक बार में 24 लाख छात्रों वाली नीट यूजी की परीक्षा नहीं होनी चाहिए? क्या वे यह सिफारिश कर सकते हैं कि मेडिकल में दाखिले की पुरानी व्यवस्था बहाल हो और नीट यूजी की बजाय राज्यों को अपने कॉलेजों में दाखिले का अधिकार पहले जैसा दिया जाए? यानी शिक्षा और परीक्षा के मामले में राज्यों की स्वायत्तता सुनिश्चित की जाए। अगर नंदन नीलेकणी की कमेटी नीट समाप्त करने और मेडिकल में दाखिले की परीक्षा का विकेंद्रीकरण करने की सिफारिश नहीं करती है तो उनकी सिफारिशों का स्कोप बहुत सीमित हो जाएगा और तब किसी बड़े सुधार की संभावना कम हो जाएगी।

अब सवाल है कि अगर नीट समाप्त करने या नीट जैसी दूसरी अखिल भारतीय परीक्षाएं खत्म करने की सिफारिश नीलेकणी कमेटी नहीं करती है तो उसके पास क्या विकल्प बचेगा? सबसे अच्छा तो यही होगा कि नीट को समाप्त किया जाए। लेकिन अगर सरकार की ओर से कमेटी की सिफारिशों का जो स्कोप तय किया जाएगा यानी जो फ्रेमवर्क दिया जाएगा उसमें पहले ही यह स्पष्ट कर दिया जाए कि नीट की परीक्षा जारी रहेगी तो फिर नीलेकणी कमेटी को नीट को इंजीनियरिंग में दाखिले की परीक्षा जेईई की तरह दो चरणों में कराने की सिफारिश करनी चाहिए। ध्यान रहे अगले साल नीट की परीक्षा जेईई की तरह कंप्यूटर आधारित होगी और कई पालियों में होगी। हालांकि उसमें प्रश्नपत्रों की कठिनता के आधार पर अंकों के सामान्यीकरण की अलग समस्या आती है। फिर भी कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा पेपर लीक की संभावना को कम करती है। इसके साथ साथ अगर नीट की परीक्षा भी जेईई के तरह दो चरण में हो तो पेपर लीक की संभावना और कम हो सकती है। दो चरण का अर्थ है कि पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा हो और दूसरे चरण में एडवांस परीक्षा हो। पहले चरण में मल्टीपल च्वाइस वाले प्रश्न हों और दूसरे चरण में सब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाएं।

इसके अलावा नीलेकणी कमेटी को मेडिकल की पढ़ाई की फीस को नियमित करने के बारे में भी सुझाव देने चाहिए। अभी मेडिकल की परीक्षा में सबसे ज्यादा प्रश्न पत्र इसलिए लीक होते हैं कि एक बार में परीक्षा होती है और 720 अंकों की परीक्षा में अगर अच्छे अंक आ गए तो देश के प्रीमियम संस्थान में बहुत कम फीस में पढ़ने का मौका मिलता है। अन्यथा निजी कॉलेजों में फीस इतनी ज्यादा है कि लोग स्वाभाविक रूप से पेपर लीक पर पैसा खर्च करने के लिए प्रेरित होते हैं। खुद सरकार इसी वजह से इसे हाई स्टेक यानी बड़े दांव वाली परीक्षा मानती है। नीट के बचाव में तर्क दिया जाता है कि इसमें क्वालिफाई करके गरीब बच्चे भी मेडिकल की पढ़ाई कर सकते हैं। यह गलत है। निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस एक से डेढ़ करोड़ रुपए तक है। ऐसे में कौन गरीब अपने बच्चों को वहां पढ़ा पाएगा! अगर डोनेशन नहीं देना पड़े तब भी निजी कॉलेजों में मेडिकल की पढ़ाई का खर्च सामान्य लोगों की पहुंच से बाहर है।

बहरहाल, नीलेकणी कमेटी को सिर्फ नीट पर विचार नहीं करना है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के सुझाव देने हैं। इसकी शुरुआत एनटीए से हो सकती है। भारत सरकार ने एक देश, एक परीक्षा की महत्वाकांक्षी योजना के तहत एनटीए का गठन किया। इसके बाद एक एक करके परीक्षाओं को अखिल भारतीय स्वरूप दिया जाने लगा। मेडिकल की परीक्षा के साथ साथ केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए भी सीयूईटी की परीक्षा ली जाने लगी। इसमें अलग समस्याएं हैं। वास्तविकता यह है कि एनटीए देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में शून्य योगदान दे रहा है। सो, नीलेकणी कमेटी एनटीए को खत्म करने और पुरानी विकेंद्रित परीक्षा व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश करे। सवाल है कि अगर एनटीए को समाप्त करना उसके स्कोप ऑफ वर्क से बाहर हो तो क्या करना चाहिए? तब उसे एनटीए में सुधार की सिफारिश करनी चाहिए।

सबसे पहला सुधार तो यह जरूरी है कि एनटीए को कम से कम वैधानिक दर्जा दिया जाए। अगर सरकार चाहती है कि यूपीएससी की तरह इसकी परीक्षाएं विश्वसनीय बनें तो इसे संवैधानिक नहीं तो वैधानिक दर्जा दिया जाए। इसका अपना कैडर बने ताकि तदर्थ ढंग से काम नहीं हो। अभी इधर उधर से ले आकर अधिकारियों को रखा जाता है और गड़बड़ी होने पर बाद में उनको वापस अपने कैडर में भेज दिया जाता है। इससे जवाबदेही नहीं बनती है। इसके बाद ठेके पर नियुक्ति रोकने की सिफारिश की जाए और परीक्षा से जुड़े काम आउटसोर्स करने पर रोक लगे। यूपीएससी की तरह एनटीए का अपना बुनियादी ढांचा बने। विशेषज्ञों की नियुक्ति हो और पूरे साल इसका काम चले। जैसे यूपीएससी की परीक्षा में प्रश्न पत्र के ढेर सारे सेट बनते हैं और किसी को पता नहीं होता है कि परीक्षा में कौन से सेट का इस्तेमाल होगा वैसी व्यवस्था एनटीए द्वारा आय़ोजित की जाने वाली परीक्षाओं के लिए भी की जाए। एनटीए जिन परीक्षाओं का आयोजन करता है उसके अलावा भी कई एजेंसियां हैं, जो दाखिला और भर्ती परीक्षा आयोजित करती हैं। उनमें भी एनटीए की तर्ज पर ही सुधार की सिफारिश होनी चाहिए। हालांकि सिर्फ कमेटी की सिफारिशों से कुछ खास नहीं होगा। सरकार की मंशा और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी होनी चाहिए तभी जरूरी सुधार होंगे।

पेपर लीक रोकने का बिल पास

नई दिल्ली। पेपर लीक रोकने के लिए लाया गया संशोधन बिल लोकसभा से पास हो गया। मंगलवार को दो बजे दिन में बिल पर चर्चा शुरू हुई और पहले दिन नौ घंटे का चर्चा हुई थी। बुधवार को फिर चर्चा शुरू हुई और उसके बाद बिल को ध्वनि मत से मंजूरी दी गई। गौरतलब है कि सरकार ने 2024 में पहली बार यह कानून बनाया था। तब भी सभी पार्टियों के समर्थन से इसे पास किया गया था। दो साल में दो बार नीट यूजी का पेपर लीक होने के बाद सरकार इसे ज्यादा सख्त प्रावधानों के साथ वापस ले आ रही है। ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रीवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ में सजा और जुर्माने के प्रावधान को बढ़ाया गया है और मामले की जांच व सुनवाई की समय सीमा तय की गई है।

बहरहाल, बिल पर बुधवार को विपक्ष की तरफ से राहुल गांधी करीब 50 मिनट बोले। उनके भाषण के बीच कई बार हंगामा हुआ। बाद में जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब दिया और विपक्ष के हंगामे के बीच बिल पास हुआ। इस बिल के कानून बनने पर पेपर लीक से जुड़े अपराधों में अधिकतम 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

बिल पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष बिल के नाम पर राजनीति कर रही है। उन्होंने राहुल के भाषण पर कहा, ‘नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिन अपशब्दों का इस्तेमाल किया वे असंसदीय हैं। माननीय सदस्य खुद को भी ईडियट समझें तो वह नहीं कह सकते। उन्हें नियमों की जानकारी नहीं है’। राहुल को लक्ष्य करके उन्होंने कहा, ‘यदि वे व्यक्ति विशेष के लिए ये शब्द नहीं बोल रहे तो क्या छात्रों के लिए ये शब्द थे। और यदि छात्रों को इडियट कहा जाए तो इससे दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं है’।

बहरहाल, लोकसभा में अपने भाषण के बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर में कहा, ‘गृह मंत्री शाह सदन में नहीं आए, जबकि उन्हें छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब देना चाहिए था’। राहुल ने कहा, ‘अगर गृह मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया है, तो उन्हें सदन में आकर साफ देनी चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया। सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे संसद में बोलने का अधिकार है और वह अधिकार मुझे मिलना चाहिए’।

उधर राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन विधेयक (2026) बिल पास हो गया। इसके जरिए राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ की तरह राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को कानूनी संरक्षण मिलेगा। अब ‘वंदे मातरम’ का अपमान, अनादर और गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध होगा। इस बिल के जरिए 1971 के मूल कानून में संशोधन का प्रावधान किया गया है। नए कानून में राष्ट्रगीत के अपमान के लिए तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों के प्रावधान हैं।

Donald Trump : ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी, जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले के बाद बोले- ‘करारा जवाब देंगे’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले के बाद ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस हमले का 'करारा जवाब' देगा। अमेरिकी सेना ने इस हमले को ईरान की ओर से किया गया 'अचानक हमला करने का प्रयास' बताया है, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया। फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने सभी आने वाली मिसाइलों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही सफलतापूर्वक मार गिराया। ट्रंप ने कहा, “हम उन्हें कड़ा सबक सिखाएंगे। हम उन पर पूरी ताकत से जवाबी कार्रवाई करेंगे।”

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CENTCOM ने किया हमले को नाकाम करने का दावा

 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।

 

ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी बलों के पास प्रतिक्रिया देने के लिए केवल कुछ मिनट ही थे, लेकिन उन्होंने तेजी से कार्रवाई करते हुए मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने उस अभियान का वीडियो देखा, जिसमें अमेरिकी सैनिक वास्तविक समय में मिसाइलों की स्थिति बताते हुए उन्हें इंटरसेप्ट कर रहे थे।

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जॉर्डन ने भी पांच मिसाइलें मार गिराने का दावा किया

 

इस बीच, जॉर्डन की सेना ने भी बुधवार को कहा कि उसने देश की ओर दागी गई पांच मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया। वहीं, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि इन मिसाइलों का निशाना जॉर्डन का मुवाफ्फाक साल्ती एयर बेस और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय था।

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ईरान समर्थित मिलिशिया पर भी कार्रवाई

इससे पहले CENTCOM ने पुष्टि की थी कि अमेरिकी और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त अभियान चलाकर हवाई हमले किए। ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई इराक सरकार के समन्वय से की गई और ईरान समर्थित मिलिशिया को “दुनिया के लिए कैंसर” बताया। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी सरकार ईरान समर्थित अन्य समूहों को भी कड़ी चेतावनी देने पर विचार कर रही है।

Abhijeet Dipke : ‘अगला आंदोलन पहले से बड़ा होगा’, जानें अभिजीत दिपके ने क्यों कही ये बात

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके ने बुधवार को कहा कि अगर छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो पार्टी फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। उनका कहना था कि हाल की घटनाओं के बाद भी छात्रों और लोगों में नाराजगी अब भी बनी हुई है। अभिजीत दिपके का यह बयान ऐसे समय आया है, जब लोकसभा में पेपर लीक से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पास हो गया है। इस विधेयक का उद्देश्य पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कानून को और सख्त बनाना है।

लोकसभा में पास हुआ विधेयक 

लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने वॉकआउट किया। वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणी को लेकर भी सदन में जोरदार हंगामा हुआ। इसके बाद यह विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

संशोधन विधेयक पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि सिर्फ कानून में बदलाव करने से समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा। उनका कहना था कि जब तक लोगों की सोच और नीयत नहीं बदलेगी, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “देश में कई सुधार किए जा रहे हैं, लेकिन अगर लोगों की नीयत नहीं बदलेगी, तो सिर्फ कानून बदलने से कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा।” अभिजीत दिपके ने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई फास्ट-ट्रैक कोर्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मामले की पहली सुनवाई इसलिए टालनी पड़ी, क्योंकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का वकील अदालत में मौजूद नहीं था। उनके मुताबिक, इससे जांच और सुनवाई की रफ्तार पर भी सवाल खड़े होते हैं।

FIR वापस नहीं हुई तो आंदोलन जारी रहेगा

अभिजीत दिपके ने कहा कि अगर छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अपना आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो अगला विरोध प्रदर्शन पहले से भी बड़ा होगा। दिपके ने आरोप लगाया कि छात्रों को लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “अगर छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं और उन्हें इसी तरह परेशान किया जाता रहा, तो हम दोबारा आंदोलन करेंगे। सरकार को यह समझना चाहिए कि छात्रों का गुस्सा अभी खत्म नहीं हुआ है।”

अभिजीत दिपके ने आगे कहा कि सरकार को यह नहीं मानना चाहिए कि सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से लोगों की नाराजगी खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा, “अगर सरकार को लगता है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लोगों का गुस्सा शांत हो जाएगा, तो ऐसा नहीं है। छात्रों और लोगों में अब भी काफी नाराजगी है। अगर जरूरत पड़ी, तो हम फिर से आंदोलन करेंगे और अगला प्रदर्शन पहले से भी बड़ा होगा।”

संसद से 500 मीटर दूर भारत के बच्चों को मारा, मैंने अमित शाह को फोन करते देखा, प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने लगाए आरोप

rahul gandhi

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीट पेपर लीग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन की 5 तस्वीरें दिखाईं। 'संसद से 500 मीटर दूर भारत के बच्चों को मारा है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के साथ बर्बरता की गई। मुद्दे उठाना मेरा अधिकार है। युवाओं पर पैलेट गन इस्तेमाल की गई है। मैंने अमित शाह को फोन करते हुए देखा है। मुझे लोकसभा में बोलने नहीं दिया। स्पीकर ने मुझे बोलने नहीं दिया। गृह मंत्री ने आदेश नहीं दिए तो किसने दिए। छात्रों को नुकीली लाठियां मारी गईं। 

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि अमित शाह गृह मंत्री हैं। पैलेट गन का इस्तेमाल गृह मंत्री की इजाजत के बिना नहीं किया जाता है। गृह मंत्री ने ऑर्डर किया था पैलेट गन चलाने का या फिर इन्हें पता ही नहीं था कि ऐसा दिल्ली में हो रहा था। कोई भी कारण हो लेकिन इन्हें हटाया जाना चाहिए। ये लोकसभा में नहीं आ पाए हैं। हिंसा किसने की थी? दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि आज मैंने देखा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने की इजाज़त नहीं दी गई। कई बार संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को बोलने का मौका मिला लेकिन मुझे नहीं क्योंकि मैंने कहा था कि जो बर्बरता हुई, उसके लिए गृह मंत्री अमित शाह ज़िम्मेदार थे। अगर मैं माफ़ी मांगता तो मुझे बोलने की इजाज़त मिल जाती। मैं माफ़ी नहीं मांगूंगा। मेरे लिए सबसे अहम मुद्दा यह है कि दिल्ली की सड़कों पर हमारे छात्रों के साथ बर्बरता की गई। उन पर पैलेट गन से गोलियां चलाई गईं।

सवालों का जवाब नहीं मिला 

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 25 तारीख को मैंने गृह मंत्री को एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें मैंने 2 सवाल पूछे थे। पहला सवाल था कि आपने पैलेट गन इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी हां या न। दूसरा सवाल था कि सादे कपड़ों में जो लोग बच्चों को लाठियों से मार रहे हैं ये लोग कौन है? ये पुलिसवाले हैं या फिर कोई और? सवालों का जवाब नहीं मिला है।

जंतर-मंतर वाले वायरल अभिनव बिष्ट के इस वीडियो पर छिड़ी बहस, लोग पूछने लगे ये सवाल

Jantar Mantar Boy Abhinav Bisht: NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP के प्रदर्शन ने कई नए चेहरों को रातों-रात इंटरनेट स्टार बना दिया। इन्हीं में से एक नाम है अभिनव बिष्ट, जो वहां से पल-पल की लाइव अपडेट दे रहे थे। वहीं अब रातों-रात इंटरनेट सनसनी बने अभिनव बिष्ट को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है।

वायरल हुआ था ये वीडियो 

अभिनव ने टिकटॉक स्टाइल में वीडियोज बनाए, जो युवाओं को बेहद पसंद आए। RAF के जवानों के पीछे खड़े होकर दोस्तों के साथ बनाई गई उनकी एक रील ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस वीडियो को 16 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया, जिस पर 65 लाख लाइक्स और 1.34 लाख से अधिक कमेंट्स आए। इन वीडियो की वजह से उन्हें लाखों व्यूज़ मिले और उनके फॉलोअर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ गई।

8 लाख हुए फॉलोअर्स 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर कई यूजर्स का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान अभिनव बिष्ट के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स करीब 5,000 से बढ़कर 8 लाख से ज्यादा हो गए। उनकी कई छोटी वीडियो (रील्स) युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो गईं। इसी बीच उनका एक और वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह अपना कंटेंट वायरल होने के बाद नया मोबाइल फोन खरीदते नजर आए। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कई लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में आंदोलन से ज्यादा फायदा कुछ कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को मिला।

अब सोशल मीडिया पर छिड़ी ये बहस

यह मामला तब और चर्चा में आ गया, जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर यूज़र सुनैना होली ने आरोप लगाया कि कई कंटेंट क्रिएटर्स प्रदर्शन में मुद्दे का समर्थन करने के बजाय सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के लिए पहुंचे थे। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि ज्यादातर लोगों ने CJP प्रदर्शन में लाइक्स, व्यूज़, शेयर और फॉलोअर्स बढ़ाने के मकसद से हिस्सा लिया। उनका दावा था कि इससे छात्रों की लड़ाई से ज्यादा कुछ लोगों का निजी फायदा हुआ। सुनैना होली ने खास तौर पर अभिनव बिष्ट का नाम लेते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स 8 लाख से ज्यादा हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी रील्स को लाखों व्यूज मिले और इससे उन्हें आर्थिक फायदा भी हुआ। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभिनव बिष्ट का पढ़ाई या शिक्षा के मुद्दों से कोई सीधा संबंध नहीं है और वह मुख्य रूप से सोशल मीडिया कंटेंट बनाने का काम करते हैं।