PPF Calulator: हर साल PPF में ₹1.5 लाख डालने पर कितना पैसा मिलेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF Calulator: अगर आप हर साल ₹1.5 लाख कहीं ऐसी जगह लगाना चाहते हैं, जहां पैसा सुरक्षित रहे और धीरे-धीरे बढ़ता भी रहे, तो PPF एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें शेयर बाजार जैसा उतार-चढ़ाव नहीं होता। सरकार की गारंटी रहती है। साथ ही, लंबे समय तक पैसा छोड़ने पर कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। फिलहाल PPF पर 7.1% सालाना ब्याज है। सरकार इसे समय-समय पर घटा या बढ़ा सकती है।

अगर आप हर साल PPF में पूरे ₹1.5 लाख जमा करते हैं, तो 15 साल बाद आपके पास कितने पैसे होंगे? अगर यही निवेश 20 या 25 साल तक चलता रहे तो रकम कहां पहुंच जाएगी? आइए इसका पूरा हिसाब समझते हैं।

15 साल में करीब ₹41 लाख

PPF की सामान्य अवधि 15 साल होती है। इस दौरान अगर आप हर साल ₹1.5 लाख जमा करते हैं, तो अपनी जेब से कुल ₹22.50 लाख डालेंगे।

अब इसमें ब्याज जुड़ता जाएगा। 7.1% की दर को मानकर चलें तो 15 साल बाद रकम करीब ₹40.68 लाख हो सकती है। यानी ₹22.50 लाख आपने जमा किए और करीब ₹18.18 लाख ब्याज से जुड़ गए। यहीं से PPF की असली ताकत समझ आती है।

20 साल में रकम करीब ₹67 लाख

15 साल पूरे होने के बाद PPF को आगे भी जारी रखा जा सकता है। इसे 5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है। अब मान लीजिए आप 20 साल तक हर साल ₹1.5 लाख डालते रहे। तब आपकी कुल जमा रकम ₹30 लाख होगी।

7.1% की दर को पूरे समय समान मानें तो 20 साल बाद यह रकम करीब ₹66.58 लाख हो सकती है। यानी आपकी जमा रकम ₹30 लाख है, लेकिन ब्याज से करीब ₹36.58 लाख और जुड़ सकते हैं।

25 साल में ₹1 करोड़ से ज्यादा

अब सबसे दिलचस्प हिसाब 25 साल का है। हर साल ₹1.5 लाख के हिसाब से 25 साल में आप कुल ₹37.50 लाख जमा करेंगे। लेकिन अगर 7.1% ब्याज दर पूरी अवधि में बनी रहती है, तो रकम करीब ₹1.03 करोड़ तक पहुंच सकती है।

यानी आपने ₹37.50 लाख लगाए और करीब ₹65.58 लाख ब्याज से जुड़ गए। कुल रकम ₹1 करोड़ के पार निकल जाती है। इसी वजह से लंबी अवधि के निवेश में सिर्फ यह देखना ठीक नहीं होता कि आपने कितना पैसा जमा किया है। यह भी देखना चाहिए कि उस पैसे को बढ़ने के लिए कितना समय मिला।

15, 20 और 25 साल का पूरा हिसाब

अवधिहर साल जमाआपकी कुल जमा रकमअनुमानित ब्याजकुल रकम
15 साल₹1.50 लाख₹22.50 लाख₹18.18 लाख₹40.68 लाख
20 साल₹1.50 लाख₹30 लाख₹36.58 लाख₹66.58 लाख
25 साल₹1.50 लाख₹37.50 लाख₹65.58 लाख₹1.03 करोड़

नोट : ये आंकड़े 7.1% ब्याज दर को पूरे 15, 20 या 25 साल तक समान मानकर निकाले गए हैं। असल में PPF की ब्याज दर बदल सकती है। इसलिए भविष्य में मिलने वाली रकम भी अलग हो सकती है।

पैसा कब जमा करना बेहतर है?

PPF में ब्याज का कैलकुलेशन महीने की 5 तारीख से महीने के अंत तक खाते में मौजूद सबसे कम रकम के आधार पर होती है। इसलिए अगर आप साल की पूरी ₹1.5 लाख की रकम एक साथ जमा करने की सोच रहे हैं, तो महीने की 5 तारीख से पहले जमा करना फायदेमंद हो सकता है।

अगर हर साल पैसा एक साथ जमा करना मुश्किल है, तो पूरे साल में भी किस्तों में रकम जमा की जा सकती है। लेकिन सालाना ₹1.5 लाख की सीमा का ध्यान रखना जरूरी है।

PPF निवेश में किन बातों का ध्यान रखें?

  • PPF में कुछ शर्तों के तहत आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है। लेकिन इसे सेविंग अकाउंट की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
  • ब्याज दर हमेशा एक जैसी नहीं रहती। PPF की ब्याज दर सरकार तय करती है। भविष्य में यह बढ़ या घट सकती है।
  • हर साल निवेश जारी रखें। अकाउंट को चालू रखने के लिए हर वित्त वर्ष कम से कम ₹500 जमा करना जरूरी है।
  • नॉमिनी जरूर जोड़ें। इससे खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में रकम के क्लेम की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
  • PPF सुरक्षित निवेश है, लेकिन हर वित्तीय लक्ष्य के लिए अकेला PPF पर्याप्त नहीं। अपनी जरूरत और जोखिम के हिसाब से दूसरे निवेश विकल्प भी रखें।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

रूस की तरफ से मध्यस्थ बनेंगे पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़:यूक्रेन के सरकारी बैंक से चल रहा विवाद; रूस पर संपत्ति छीनने का आरोप

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के सरकारी बैंक ओश्चादबैंक से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला यूक्रेन और रूस के बीच 1998 में हुए द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत चल रहा है। ओश्चादबैंक का कहना है कि 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले की वजह से उसे दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में अपनी संपत्तियां और कारोबार गंवाना पड़ा। इन इलाकों में ओश्चादबैंक की बैंक शाखाएं, ATM, दफ्तर, जमीन, और दूसरे कारोबारी संसाधन थे। रूस के कब्जे के बाद बैंक इन संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सका। कई शाखाएं बंद हो गईं और बैंक का कारोबार ठप पड़ गया। बैंक के मुताबिक, इससे उसे भारी नुकसान हुआ। इस ही वजह से बैंक ने कई सौ मिलियन डॉलर का दावा किया है। तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा सुनवाई बैंक ने जुलाई 2025 में रूस को विवाद का नोटिस भेजा था। रूस की ओर से जवाब नहीं मिलने पर उसने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से पहले भी भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई पूर्व जज अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और ट्रिब्यूनल में अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पहले रूस के दो प्रस्तावों को ठुकरा चुके थे चंद्रचूड़ रूस इससे पहले भी डीवाई चंद्रचूड़ को दो बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश विवादों में अपनी ओर से मध्यस्थ बनाना चाहता था। रिपोर्ट के मुताबिक, पहला मामला जर्मनी की ऊर्जा कंपनी विंटरशाल डीया से जुड़ा था। इस कंपनी ने रूस पर आरोप लगाया था कि यूक्रेन युद्ध के बाद उसकी रूस में मौजूद गैस और तेल प्रोजेक्ट्स पर कब्जा कर लिया गया, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। दूसरा मामला यूक्रेन की सरकारी बिजली ट्रांसमिशन कंपनी उक्रएनरगो का था। कंपनी का आरोप है कि रूस के कब्जे वाले इलाकों में उसकी बिजली से जुड़ी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया या उन पर कब्जा कर लिया गया। इन दोनों मामलों में रूस ने डीवाई चंद्रचूड़ से अपनी ओर से मध्यस्थ बनने का अनुरोध किया था। हालांकि, उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की थी। अब तक दोनों मामलों का अंतिम नतीजा नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता क्या है? जब दो देशों की कंपनियों या किसी देश और विदेशी कंपनी के बीच कारोबार या निवेश को लेकर बड़ा विवाद हो जाता है, तो वे हर बार अदालत नहीं जाते। कई बार दोनों पक्ष मिलकर कुछ विशेषज्ञ चुनते हैं। यही विशेषज्ञ दोनों पक्षों की बात सुनते हैं और फैसला देते हैं। इसे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कहा जाता है। इसे आसान उदाहरण से समझिए मान लीजिए दो कंपनियों के बीच करोड़ों रुपये का विवाद हो गया। अगर वे कोर्ट जाएंगी, तो फैसला आने में कई साल लग सकते हैं। इसलिए दोनों मिलकर कुछ निष्पक्ष विशेषज्ञ चुन लेती हैं। ये विशेषज्ञ दोनों पक्षों की बात सुनते हैं और तय करते हैं कि किसका दावा सही है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में क्या होता है? 1. दोनों पक्ष अपने-अपने विशेषज्ञ चुनते हैं: आमतौर पर दोनों पक्ष एक-एक मध्यस्थ चुनते हैं। इसके बाद दोनों मिलकर तीसरे मध्यस्थ का चयन करते हैं। ये तीनों मिलकर एक ट्रिब्यूनल बनाते हैं। 2. दोनों पक्ष अपनी बात रखते हैं: दोनों पक्ष अपने दस्तावेज, सबूत और दलीलें ट्रिब्यूनल के सामने पेश करते हैं। 3. ट्रिब्यूनल फैसला सुनाता है: सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ट्रिब्यूनल अपना फैसला देता है। इसे ‘अवार्ड’ कहा जाता है। 4. फैसले का पालन करना होता है: ज्यादातर मामलों में ट्रिब्यूनल का फैसला दोनों पक्षों के लिए मानना जरूरी होता है। यह अदालत से कैसे अलग है? भारत से जुड़े दो चर्चित ट्रिब्यूनल मामले 1. केयर्न एनर्जी बनाम भारत क्या मामला था? ब्रिटेन की कंपनी केयर्न एनर्जी ने 2006 में भारत में अपने कारोबार में कुछ बदलाव किए थे। उस समय सरकार ने इस पर कोई टैक्स नहीं लगाया। लेकिन 2012 में भारत सरकार ने नया टैक्स कानून बनाया और कहा कि यह कानून पुराने सौदों पर भी लागू होगा। इसके बाद सरकार ने केयर्न से हजारों करोड़ रुपये का टैक्स मांगा और उसकी कुछ संपत्तियां भी अपने कब्जे में ले लीं। फैसला क्या आया? कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में शिकायत की। 2020 में ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत की टैक्स वसूली सही नहीं थी। उसने भारत को कंपनी को करीब 1.2 अरब डॉलर (करीब 9 हजार करोड़ रुपए) लौटाने का आदेश दिया। फिर क्या हुआ? 2021 में भारत सरकार ने यह पुराना टैक्स कानून वापस ले लिया। इसके बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया और मामला खत्म हो गया 2. वोडाफोन बनाम भारत क्या मामला था? 2007 में वोडाफोन ने भारत की एक मोबाइल कंपनी खरीदी थी। उस समय इस सौदे पर कोई टैक्स नहीं लगा। लेकिन 2012 में सरकार ने नया कानून बनाकर कहा कि पुराने सौदों पर भी टैक्स लगेगा। इसके बाद वोडाफोन से करीब 2.2 अरब डॉलर (करीब 16 हजार करोड़ रुपए) टैक्स मांगा गया। फैसला क्या आया? वोडाफोन भी अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल पहुंची। 2020 में ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत सरकार को इतने साल बाद पुराने सौदे पर टैक्स नहीं लगाना चाहिए था। इसलिए फैसला वोडाफोन के पक्ष में आया। फिर क्या हुआ? 2021 में भारत सरकार ने यह कानून वापस ले लिया। इसके बाद वोडाफोन और भारत के बीच विवाद भी खत्म हो गया। —————–

Trading plan : कच्चे तेल में तेजी और IT शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर बढ़ाया दबाव, जानिए कल के लिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

Trading plan : कच्चे तेल में तेजी और IT शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। निफ्टी 175 अंक से ज्यादा फिसलकर 24300 के नीचे आ गया है। बैंक निफ्टी की तेजी भी कम हुई है। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी नरमी देखने को मिल रही है। बाजार में गिरावट के बावजूद वौलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX में तेजी देखने को नहीं मिल रही है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रा ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा है कि वे फरवरी 2027 तक का कार्यकाल पूरा करेंगे। लेकिन फिर से नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। कंपनी के बोर्ड को उत्तराधिकारी पर फैसला लेना चाहिए। एन चंद्रा के इस्तीफे से TCS 5 फीसदी फिसलकर निफ्टी का टॉप लूजर बना है। टाटा ग्रुप के दूसरे शेयरों पर भी दबाव देखने को मिल रहा है।

IT शेयरों में आज सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली है। आईटी इंडेक्स दो फीसदी से ज्यादा फिसला है। TCS के साथ LTM, परसिस्टेंट और इंफोसिस में भी दबाव देखने को मिल रहा है। साथ ही कंज्यूमर ड्यूरेबल, रियल्टी और FMCG इंडेक्स करीब एक फीसदी फिसले हैं। वहीं दूसरी ओर आज सरकारी बैंकों में सबसे ज्यादा तेजी है। पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 1.5 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है।

हॉस्पिटल शेयरों में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिल रही है। मैक्स हेल्थ और अपोलो हॉस्पिटल 3-4 फीसदी टूटकर निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल हैं। उधर फोर्टिस भी करीब 6 फीसदी टूटा। हॉस्पिटल चार्जेज पर कैप लगाने की सिफारिश से दूसरे दिन भी इन शेयरों पर दबाव देखने को मिल रहा है।

नतीजों के लिहाज से कल बड़ा दिन है। कल निफ्टी की दो कंपनियों टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (TMPV) और मैक्स हेल्थ के रिजल्ट आएंगे। TMPV का रेवेन्यू तिमाही आधार पर 46% बढ़ सकता है। लेकिन कच्चे माल के दाम बढ़ने से मुनाफे और मार्जिन पर दबाव संभव है। साथ ही जुबिलेंट फूड, अंबर समेत वायदा की 5 कंपनियां भी रिजल्ट पेश करेंगी।

बाजार: खराब दिन

बाजार पर अपनी राय देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार के लिए आज एक खराब दिन रहा। सुबह-सुबह CNBC-आवाज़ पर इसी की चर्चा थी। कल ही बाजार ने चेतावनी के संकेत दिए थे। निफ्टी अब 24,350 के नीचे काम कर रहा है। हालांकि बैंक निफ्टी अभी भी अहम स्तरों के ऊपर है। लेकिन निफ्टी IT और बाकी बड़े शेयरों में गिरावट है। एन चंद्रा की टाटा संस वाली खबर से भी सेंटीमेंट खराब हुआ है। चंद्रा दोबारा चेयरमैन नहीं बनेंगे। अदाणी ग्रुप के शेयरों में भी बड़ी मुनाफावसूली देखने को मिली। हॉस्पिटल शेयरों में आज भी बड़ी गिरावट आई।

बाजार: अब क्या?

बाजार में ब्रेकआउट फेल होने के पूरे संकेत हैं और ऐसे में वापस रेंज के लो टेस्ट हो सकते हैं। अगर निफ्टी 24,300 के नीचे बंद हुआ तो बड़ा नेगेटिव होगा। कच्चा तेल नीचे आने को तैयार नहीं है और मामला सिर्फ तेल का नहीं, सप्लाई का है। होर्मुज से सप्लाई वापस ठप हो चुकी है। ऐसे में बाजार में वापस बड़े करेक्शन का रिस्क है। स्टॉक स्पेसिफिक मौके भी अब काफी कम हो रहे हैं और परसों अर्निंग सीजन भी खत्म हो रहा है। ऐसे में बाजार में थोड़ा सतर्क रहना बेहतर रहेगा। लेकिन अगर अच्छा ट्रेड मिले तो जरूर लें, जैसे कि आज नाल्को और PI इंडस्ट्रीज में मिली।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 24,150-24,250 पर सपोर्ट और 24,400-24,450 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 57,000-57,200 पर सपोर्ट और 57,800-58,000 पर रेजिस्टेंस है।

प्री-CAS रणनीति

शॉर्ट पोजिशन्स लेकर ना जाएं। शॉर्ट का नजरिया सिर्फ इंट्राडे का था।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trading Ideas : बाजार में रिकवरी की कोशिशें हो रही नाकाम, शॉर्ट टर्म में अच्छी कमाई के लिए इस ऑटो शेयर पर रहे नजर

Trading Ideas : बाजार में रिकवरी की कोशिशें नाकाम हो रही हैं। निफ्टी 110 अंक से ज्यादा फिसलकर 24400 के नीचे आ गया है। हालांकि बैंक निफ्टी में रिकवरी कायम है। यह इंडेक्स दिन के निचले स्तर से करीब 500 अंक से ज्यादा क उछला है। मिडकैप और स्मॉलकैप में फ्लैट कारोबार कर रहे हैं। INDIA VIX 12 के नीचे दिख रहा है। आज सरकारी बैंकों में सबसे ज्यादा तेजी है। पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 2 फीसदी मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है। 5 फीसदी की उछाल के साथ PNB वायदा के टॉप गेनर्स में शुमार है। साथ ही मेटल शेयरों में भी चमक देखने को मिल रही है। हिंडाल्को निफ्टी का टॉप गेनर बना है। लेकिन IT, FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी में बिकवाली नजर आ रही है।

पहली तिमाही में कमजोर नतीजों के बाद SENCO की चमक फीकी पड़ी है। यह शेयर 9 फीसदी से ज्यादा टूटा है। साथ ही TBZ में भी करीब 8 फीसदी की तेज गिरावट नजर आ रही है। लेकिन रिजल्ट के बाद बाटा 4 फीसदी दौड़ा है। हॉस्पिटल शेयरों में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिल रही है। मैक्स हेल्थ और अपोलो हॉस्पिटल 2-3 फीसदी टूटकर निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल हैं। उधर फोर्टिस भी करीब 4 फीसदी टूटा है। हॉस्पिटल चार्जेज पर कैप लगाने की सिफारिश की खबरों ने इन शेयरों पर दबाव बनाया है।

आगे के लिए क्या हो रणनीति?

मार्केट ट्रेंड पर बात करते हुए www.sethamit.com के अमित सेठ ने कहा कि निफ्टी पिछले 4-5 कारोबारी सत्रों से थोड़ा सा साइडवेज चल रहा है। इसको हम एक पुलबैक मोड कह सकते हैं। लेकिन अभी भी ये अपने अहम मूविंग एवरेजेज के ऊपर ट्रेड कर रहा है। यह एक अच्छी बात है। इस समय निफ्टी के लिए 24350-24400 पर सपोर्ट दिख रहा है। जब तक यह सपोर्ट कायम तब तक गिरावट पर खरीदारी की रणनीति काम करेगी। 24600 के ऊपर निकलने पर ही निफ्टी में नई तेजी आएगी। लेकिन अभी निफ्टी में खरीदारी करने के लिए 24350-24400 एक अच्छा सपोर्ट जोन है।

बैंक निफ्टी व्यू

अगर निफ्टी बैंक की बात करें तो यहां पर भी स्ट्रक्चर साइडवेज ही है। यह निफ्टी से थोड़ा कम मोमेंटम है। लेकिन निफ्टी बैंक ने भी कल 50 डेमा से एक रिवर्सल दिखाया है। इसके लिए सपोर्ट लगभग 57,000 के आसपास आता है। जब तक 57,000 का लेवल कायम है तब तक अगर कोई पोजीशन है तो उसमें बने रहना है।

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अमित सेठ की टॉप पिक

स्टॉक स्पेसिफिक स्ट्रेटेजी पर बात करते हुए अमित सेठ ने कहा कि ऑटो सेक्टर में अच्छा खासा स्ट्रेंथ दिख रहा है। इसमें भी अशोक लीलैंड काफी अच्छा लग रहा है। इस शेयर ने एक बेस बनाने के बाद अभी 4-5 दिन पहले लगभग 167-168 रुपए के लेवल से एक ब्रेकआउट दिया। यह डिलीवरी बेस्ड ब्रेकआउट काफी अच्छे वॉल्यूम के साथ आया था। उसके बाद इस स्टॉक में हमें थोड़ा सा साइडवेज मूव देखने को मिला। कल के सत्र में इसने 10 डेमा से एक रिवर्सल दिखाया है और काफी अच्छा कैंडलस्टिक और प्राइस एक्शन पैटर्न बना है। जब तक यह स्टॉक 173 रुपए के ऊपर बना रहेगा, इसमें 182 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह होगी।

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Godrej Consumer Share Price: गोदरेज कज्यूमर का शेयर क्रैश, क्या यह निवेशकों के लिए खरीदारी का बड़ा मौका है?

Godrej Consumer Share Price: गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का शेयर 12 अगस्त को बाजार खुलते ही क्रैश कर गया। इसकी वजह कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ सुधीर सीतापति का अचानक इस्तीफा है। एक समय शेयर 10 फीसदी गिरकर 922.5 रुपये पर आ गया था। लेकिन, बाद में थोड़ा संभला। 10:45 बजे यह 9.52 फीसदी गिरकर 928.10 रुपये पर चल रहा था। इस साल यह शेयर अब तक 25 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। इस दौरान निफ्टी 50 में 6.4 फीसदी गिरावट आई है।

जेफरीज और सिटी की शेयरों में निवेश की सलाह

सीतापति का इस्तीफा तुरंत प्रभाव से लागू हो गया। आसिफ मलबरी को उनकी जगह नियुक्त कर दिया गया है। अचानक कंपनी की लीडरशिप में आए इस बदलाव पर ब्रोकरेज फर्मों ने अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दी है। जेफरीज और सिटी ने शेयर को खरीदने (buy) की अपनी सलाह बनाए रखी है। एचएसबीसी ने शेयर पर अपनी रेटिंग घटाकर ‘होल्ड’ कर दी है। सीएलएसए ने शेयर पर ‘अंडरपर्फॉर्म’ की रेटिंग दी है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि नई लीडरशिप की वजह से कंपनी की स्ट्रेटेजी में बदलाव नहीं होगा।

जेफरीज ने दिया 1400 रुपये का टारगेट प्राइस

जेफरीज ने गोदरेज कंज्यूमर के शेयर के लिए 1,400 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि 11 अगस्त के क्लोजिंग प्राइस से यह शेयर करीब 36 फीसदी चढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि नए सीईओ को एग्जिक्यूशन को मजबूत बनाने के साथ ही फैसले लेने की प्रक्रिया को तेज करना होगा। नए बिजनेस पर फोकस करने के साथ ही कंपनी को अपने पुराने इनसेक्टिसाइड्स और सोप बिजनेस पर ध्यान देना होगा।

सिटी ने भी दी शेयर में निवेश की सलाह

Citi ने भी शेयर को खरीदने की सलाह दी है। उसने शेयर के लिए 1,350 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। हालांकि, उसने कहा है कि लीडरशिप में बदलाव का असर स्टॉक पर शॉर्ट टर्म में पड़ सकता है। हालांकि, मलबरी की नियुक्ति से कंपनी की स्ट्रेटेजी की दिशा अपरिवर्तित रहेगी। कंपनी के FY27 के गाइडेंस और स्ट्रेटेजिक डायरेक्शन अपरिवर्तित रहेंगे।

एचएसबीसी ने रेटिंग घटाकर होल्ड किया

HSBC ने शेयर को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। उसने शेयर पर रेटिंग घटाकर होल्ड कर दी है। शेयर के लिए 1,120 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। उसने कहा है कि अचानक सीतापति के इस्तीफे से एग्जिक्यूशन को लेकर अनिश्चितता बनी है। ब्रोकरेज फर्म ने स्टॉक का वैल्यूएशन मल्टीपल भी घटाया है। टारगेट प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल को 45 गुना से घटाकर 40 गुना कर दिया है।

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सीएलएसए के मुताबिक शेयर 25% गिर सकता है

CLSA का रुख इस शेयर को लेकर और सावधानी भरा है। उसने शेयर पर ‘अंडरपरफॉर्म’ की रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर के लिए 772 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर 11 अगस्त के क्लोजिंग प्राइस से करीब 25 फीसदी गिर सकता है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पर्सनल वॉश और होम इनसेक्टिसाइड्स में कंपनी के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Share Market Crash: 370 प्वाइंट्स टूटा Sensex, सरकारी बैंकों की चमक नहीं थाम पाई गिरावट, 24400 के नीचे आया Nifty

Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहराने पर मार्केट में कोहराम मच गया। सेंसेक्सन 370 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24350 के करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी दबाव दिख रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप लाल है। अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:30 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 314.12 प्वाइंट्स यानी 0.40% की गिरावट के साथ 77,840.13 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 96.75 प्वाइंट्स यानी 0.40% की फिसलन के साथ 24,374.95 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 370.21 प्वाइंट्स टूटकर 77,784.04 और निफ्टी 114.20 प्वाइंट्स गिरकर 24,357.50 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव

होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्थिति सामान्य होने को लेकर अनिश्चितता ने मार्केट पर दबाव बनाया है। एक तरफ ट्रंप दावा कर रहे हैं कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है लेकिन ईरान का इससे इनकार है। इसके अलावा एक-दूसरे की मुआवजे की मांग ने दोनों देशों के बीच सुलह का रास्ता और मुश्किल कर दिया है। यमन के हूती विद्रोहियों के कमर्शियल जहाज पर हमले ने तनाव बढ़ा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में चार क्रू सदस्यों की जान चली गई और इसे अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद समुद्री जहाजों पर हूती हमले में पहली बड़ी जानलेवा घटना बताई जा रही है।

कच्चे तेल में उबाल

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर गहराने पर कच्चे तेल में और उबाल आया जिसकी आंच स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई।। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रू़ड उछलकर प्रति बैरल $90 के करीब पहुंच चुका है।

आईटी-एफएमसीजी सेक्टर का दबाव

दिग्गज सरकारी बैंकों के शेयरों में आज खरीदारी का अच्छा रुझान दिख रहा और इसका निफ्टी इंडेक्ल 2% से अधिक ऊपर चढ़ा है। हालांकि मेटल को छोड़ इसे बाकी अहम सेक्टर्स से अच्छा सपोर्ट नहीं मिल पा रहा। आईटी और एफएमसीजी सेक्टर अधिक दबाव डाल रहे हैं जिनके निफ्टी इंडेक्स में करीब 1-1% की गिरावट है। निफ्टी मेटल में करीब 1% की बढ़त है तो निफ्टी रियल्टी आधे फीसदी से अधिक कमजोर है और निफ्टी प्राइवेट बैंक भी लाल है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trading Plan : बाजार में आज हो सकती है रिकवरी की कोशिश, कमाई के सौदे पकड़ने के लिए इन अहम लेवल्स पर रहे नजर

Trading Plan : लगातार हो रहे कंसोलिडेशन और रेंजबाउंड ट्रेडिंग के बीच, मार्केट के पिछले दिन के निचले स्तर (low) को बनाए रखने और वापसी (rebound) करने की कोशिश करने की संभावना नजर आ रही है। हालांकि, हमारी नजर इस बात पर होगी की यह बढ़त कितनी टिकाऊ रहेगी। निफ्टी को आज 24,500–24,600 के दायरे में रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। अगर यह लगातार इस दायरे से ऊपर बना रहता है, तो इसके 24,700–24,800 के स्तर तक जाने का रास्ता खुल सकता है।

नीचे की तरफ, 24,429 का लेवल तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। अगर यह सपोर्ट लेवल टूटता है, तो इंडेक्स 24,350–24,200 की ओर गिर सकता है। वहीं, नीचे की तरफ, 24,429 का लेवल निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। अगर यह सपोर्ट कायम नहीं रह पाता तो यह 24,350–24,200 की ओर फिसल सकता है।

बैंक निफ्टी की बात करें तो इसके लिए 50-डे EMA (जो 57,100 पर है) पर मजबूत सपोर्ट दिख रहा है। अगर यह इस स्तर से नीचे जाता है, तो इसमें 56,800–56,500 तक की गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार जानकारों का यह भी कहना है कि अगर इसमें रिकवरी होती है तो 57,600–57,700 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। इसके बाद 58,100–58,250 के जोन में अगला अहम रेजिस्टेंस होगा।

निफ्टी आउटलुक और रणनीति

वेव्स स्ट्रैटेजी एडवाइजर्स के फाउंडर और CEO, आशीष क्याल का कहना है कि पिछले कारोबारी सत्र में निफ़्टी ने 4 अगस्त से बने ट्रायंगल पैटर्न के रेंज में रहने के बाद आखिरकार उससे नीचे की ओर ब्रेकडाउन दिया। इंडेक्स में दिन के हाई से लगभग 130 अंकों की तेज इंट्राडे गिरावट नजर आई। US-ईरान शांति वार्ता को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बाजार की परेशानी को और बढ़ा रही हैं।

इसके अलावा हाल ही में शुरू किए गए CAS सिस्टम की वजह से मार्केट के बड़े प्लेयर्स अभी वेट एंड वॉच मोड में हैं। हालांकि, जैसे-जैसे मार्केट इस नए सिस्टम का आदी होगा, इसमें धीरे-धीरे भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। तब तक तिमाही नतीजों औरअपडेट्स को ध्यान में रखते हुए चुनिंदा स्टॉक्स पर फोकस किया जा सकता है, बशर्ते निफ्टी में अहम जोन के नीचे कोई बड़ी गिरावट न आए।

डेली चार्ट पर निफ्टी कल पिछले दिन के निचले स्तर से नीचे और 24,429 के पिछले गैप-सपोर्ट जोन के पास बंद हुआ। अगर यह इस जोन के नीचे जाता है, तो इससे शॉर्ट टर्म टॉप बनने की संभावना बढ़ जाएगी। अभी, इंडेक्स 24 जुलाई से शुरू हुई पिछली रैली से 23.6 प्रतिशत नीचे आया है। अगर यह 24,429 के नीचे जाता है तो हमें 24,320 की ओर मूवमेंट आता दिख सकता है जो 38.2 फीसदी रिट्रेसमेंट लेवल है।

थ्री-कैंडलस्टिक रूल के आधार पर देखें तो मार्केट ट्रेंड नीचे की ओर बदलता हुआ दिख रहा है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए और बिकवाली (फ़ॉलो-अप सेलिंग) की जरूरत है। 24,429 के नीचे जाने पर बिकवाली और बढ़ सकती है, जिससे निफ्टी 24,320–24,300 के लेवल या उससे नीचे जा सकता है। ऊपर की ओर, 24,630 सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस है।

अहम रेजिस्टेंस (फ्यूचर्स): 24,630

अहम सपोर्ट (फ्यूचर्स): 24,250

स्ट्रैटेजी : निफ्टी फ्यूचर्स में 24,420 के नीचे शॉर्ट पोजीशन बनाई जा सकती है, जिसमें स्टॉप-लॉस 24,520 और टारगेट 24,320, उसके बाद 24,250 होगा।

बैंक निफ्टी आउटलुक और रणनीति

आशीष क्याल का कहना है कि पिछले हफ्ते बैंक निफ्टी ने वॉल्यूम प्रोफाइल के मेन ‘पॉइंट ऑफ कंट्रोल’ (POC) एरिया को छुआ और उसके पास उसे रुकावट (रेजिस्टेंस) का सामना करना पड़ा। उस लेवल से इंडेक्स धीरे-धीरे नीचे आ रहा है। बैंक निफ्टी पिछले तीन ट्रेडिंग सेशन से गिरावट के साथ बंद हो रहा है। इस गिरावट में प्राइवेट बैंकों की मुख्य भूमिका रही है। पिछले सेशन में यह इंडेक्स डेली चार्ट पर मिड-बोलिंगर बैंड के नीचे बंद हुआ, जिससे पता चलता है कि शॉर्ट-टर्म में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।

इंडेक्स अब उस ऊपर की ओर जाने वाली ट्रेंडलाइन के सपोर्ट को टेस्ट कर रहा है, जो अप्रैल 2026 के निचले स्तर से बनी हुई है। अगर यह मंगलवार के 57,100 के निचले स्तर से नीचे जाता है, तो यह सपोर्ट स्ट्रक्चर कमजोर हो जाएगा और बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

बैंक निफ्टी अपसाइड मोमेंटम कमजोर पड़ रहा है। यह रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर जाने के लिए संघर्ष कर रहा है। 57,100 के नीचे जाने पर फिर से बिकवाली शुरू हो सकती है, जिससे यह 56,680–56,700 के लेवल तक जा सकता है। ऊपर की तरफ, 57,650 का लेवल सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस है जिस पर नजर रखनी चाहिए।

अहम रेजिस्टेंस (फ्यूचर्स): 57,650

अहम सपोर्ट (फ्यूचर्स): 56,500

स्ट्रेटेजी : बैंक निफ्टी फ्यूचर्स में 57,100 के नीचे शॉर्ट पोजीशन बनाई जा सकती है, जिसमें स्टॉप-लॉस 57,350 और टारगेट 56,850, उसके बाद 56,700 होगा।

 

 

Market cues : मार्केट का ओवरऑल स्ट्रक्चर पॉजिटिव, रिकवरी आने पर 24600-24700 पर दिखेगा रेजिस्टेंस

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खुलने वाला है बड़ा मौका! ब्लैकस्टोन के निवेश वाली कंपनी का ₹2,600 करोड़ का आईपीओ जल्द, जानिए डेट्स और पूरी डिटेल

Horizon Industrial Parks IPO Details: ग्लोबल अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट फर्म ब्लैकस्टोन समर्थित भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचा ऑपरेटर ‘होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क’ ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास अपना रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने ऐलान किया है कि उसका ₹2,600 करोड़ का आईपीओ आगामी 17 अगस्त को दलाल स्ट्रीट पर उतरेगा।

यह अगले हफ्ते खुलने वाला चौथा मेनबोर्ड का आईपीओ होगा। इससे पहले ललिता ज्वैलरी मार्ट, सनशाइन पिक्चर्स और शंखेश ज्वैलर्स के आईपीओ भी कतार में हैं।

आईपीओ की महत्वपूर्ण तारीखें

  • एंकर बुक: 14 अगस्त 2026
  • आईपीओ ओपनिंग डेट: 17 अगस्त 2026
  • आईपीओ क्लोजिंग डेट: 19 अगस्त 2026
  • शेयर अलॉटमेंट फाइनल होना: 20 अगस्त 2026
  • शेयरों की लिस्टिंग: 24 अगस्त 2026

प्राइस बैंड की घोषणा 12 अगस्त को की जाएगी। इस आईपीओ में कोई भी ऑफर-फॉर-सेल (OFS) कंपोनेंट नहीं है, यानी पूरा इश्यू पूरी तरह से फ्रेश इश्यू है।

इश्यू साइज और रिजर्वेशन

कंपनी ने कर्मचारियों के लिए ₹5 करोड़ तक के शेयर आरक्षित किए हैं। इसके अलावा नेट इश्यू का स्ट्रक्चर इस तरह रहेगा:

  • संस्थागत निवेशक (QIB): अधिकतम 75 प्रतिशत हिस्सा
  • गैर-संस्थागत निवेशक (NII): 15 प्रतिशत हिस्सा
  • रिटेल निवेशक: शेष 10 प्रतिशत हिस्सा

कंपनी का बिजनेस और प्रमोटर होल्डिंग

हॉरिजन इंडस्ट्रियल पार्क देश के प्रमुख कंजम्पशन और इंडस्ट्रियल हब (जैसे- दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद, अहमदाबाद और नागपुर) में 45 संपत्तियों के जरिए 58.58 मिलियन वर्ग फीट में फैला हुआ मजबूत नेटवर्क प्रदान करता है।

इसकी प्रमोटर फर्म ब्लैकस्टोन अपनी तीन सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से कंपनी में 88.74% हिस्सेदारी रखती है। इसके अलावा राधाकिसन दमानी, 360 ONE और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस जैसे पब्लिक शेयरधारकों की इसमें 11.26% हिस्सेदारी है।

फंड का इस्तेमाल कैसे होगा?

कंपनी इस आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसों का मुख्य रूप से कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल करेगी। नेट इश्यू से मिलने वाले फंड में से ₹2,250 करोड़ का उपयोग कंपनी अपने कंसोलिडेटेड बकाया कर्ज (जो कि कुल ₹6,884.3 करोड़ है) को चुकाने में करेगी। बाकी बची हुई रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट कामकाज के लिए किया जाएगा।

फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

वित्तीय मोर्चे पर बात करें तो हॉरिजन इंडस्ट्रियल पार्क अभी एक घाटे में चल रही कंपनी है और इसका घाटा बढ़ रहा है। मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कंपनी का शुद्ध घाटा बढ़कर ₹203.6 करोड़ हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹178.7 करोड़ था। हालांकि, इसी अवधि के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 77.1% उछलकर ₹691.4 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल ₹390.3 करोड़ था।

इस आईपीओ के प्रबंधन के लिए कंपनी ने जेएम फाइनेंशियल, एक्सिस कैपिटल, आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स और 360 ONE WAM को मर्चेंट बैंकर नियुक्त किया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market cues : मार्केट का ओवरऑल स्ट्रक्चर पॉजिटिव, रिकवरी आने पर 24600-24700 पर दिखेगा रेजिस्टेंस

Trade setup for today : 11 अगस्त को निफ्टी में रेंज-बाउंड ट्रेडिंग के बीच 0.50 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। इंट्राडे में यह 4 अगस्त की रेंज के निचले स्तर यानी 24,430 के करीब पहुंच गया था। इसके बावजूद, मार्केट का ओवरऑल स्ट्रक्चर पॉजिटिव बना हुआ है। लेकिन कमजोर मोमेंटम इंडिकेटर्स कंसोलिडेशन जारी रहने के संकेत दे रहे हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने भी मार्केट को थोड़ा सतर्क कर दिया है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी मंगलवार की रेंज से नीचे गिरता है और वहीं बना रहता है तो 24,350 (50-डे EMA) और 24,200 (100-डे EMA) के स्तर तक गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि,अगर इसमें रिकवरी आती है तो 24,600-24,700 की रेंज में रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,436, 24,401 और 24,345

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,549, 24,584 और 24,640

डेली चार्ट पर निफ्टी ने कल एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई, जिसमें नीचे की तरफ एक छोटी शैडो देखने को मिली। इससे पता चलता है कि रेंज बाउंड ट्रेडिंग के बीच बिकवाली का दबाव बना रहा। हालिया की तेजी के बाद इंडेक्स 23.6 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल से थोड़ा नीचे आ गया है, लेकिन फिर भी सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है। RSI गिरकर 56.1 पर आ गया और इसमें ‘बेयरिश क्रॉसओवर’ देखने को मिला। जबकि MACD सिग्नल लाइन की ओर नीचे झुका और लगातार चौथे सेशन में हिस्टोग्राम पर हरा बार फीका पड़ गया। इन सभी बातों से मोमेंटम में सुस्ती और तेजड़ियों की ताकत कमजोर होने का संकेत मिल रहे हैं।

बैंक निफ्टी (57,446) के लिए अहम लेवल

पिवट प्वाइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,575, 57,681 और 57,853

पिवट प्वाइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,232, 57,126 और 56,955

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,247, 61,787

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,305, 56,441

डेली टाइमफ्रेम पर बैंक निफ्टी ने लॉन्ग लोअर शैडो वाली एक बेयरिश कैंडल बनाई, जिससे पता चलता है कि निचले स्तरों पर खरीदारी आई है। इंडेक्स ने जुलाई के निचले स्तर से हालिया रैली के 50 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट और 50-डे EMA पर सपोर्ट लिया और उन स्तरों से रिकवर होकर दिन के निचले स्तर के पास 0.42 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। इंडेक्स अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे बंद हुआ,लेकिन मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा। RSI गिरकर 49.95 पर आ गया और इसमें नेगेटिव क्रॉसओवर नजर आया। जबकि MACD में बेयरिश क्रॉसओवर दिखा और पिछले पांच सेशन में पहली बार हिस्टोग्राम लाल हो गया।

ये सभी इंडीकेटर बताते हैं कि नियर टर्म में तेजी की रफ़्तार धीमी पड़ सकती है और बाजार का रुख़ ‘साइडवेज़’ से ‘बेयरिश’ हो सकता है। हालांकि,अहम सपोर्ट लेवल से हुई रिकवरी यह बताती है कि निचले स्तरों से खरीदारी आ रही है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

11 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार तीसरे सेशन में ₹258 करोड़ के शेयर खरीदे और वे नेट बायर बने रहे,जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी भारतीय इक्विटी मार्केट में लगभग ₹25 करोड़ का निवेश किया और वे भी खरीदार बने रहे।

इंडिया VIX

मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने वाला वोलैटिलिटी इंडेक्स India VIX कल 3.18% गिरकर 11.85 पर आ गया और 27 जुलाई से अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है। यह बाजार में बुल्स के लिए सपोर्ट और अनिश्चितता कम होने का संकेत है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 11 अगस्त को पिछले सेशन के 0.99 से बढ़कर 1.00 हो गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: बंधन बैंक और SAIL

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

 

 

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

 

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