नेपाल के दार्चुला जिले में शुक्रवार को भारी भूस्खलन के बाद चौलानी नदी का रास्ता बंद हो गया। निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। नदी का प्रवाह प्रभावित होने से आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है। वहीं, 26 अगस्त की बाढ़-लैंडस्लाइड के बाद से राहत-बचाव कार्य जारी है। त्रिशूली बाजार इलाके से 5 साल का बच्चे समेत तीन भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को बताया कि अब तक 169 भारतीयों को सुरक्षित निकाला है, जबकि 275 अब भी लापता हैं। इससे पहले शुक्रवार को बाढ़ के 9 दिन बाद त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 मजदूर जिंदा निकाले गए हैं। 40 लोग अब भी फंसे हैं। बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में करीब 900 मजदूर लापता हैं। इनमें लगभग 500 के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। नेपाल में अब तक करीब 1300 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला है। फिलहाल 5300 से ज्यादा लोग लापता हैं। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से 32,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। नेपाल आपदा से जुड़ी 3 तस्वीरें… चीन से 1,907 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंचे विदेश मंत्रालय ने बताया कि चीन से 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। चीन के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अब कोई भारतीय यात्री फंसा नहीं है। भारत ने 7 विमानों से भेजी 95 टन राहत सामग्री विदेश मंत्रालय के अनुसार, 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से भारत ने नेपाल को करीब 95 टन राहत सामग्री भेजी है। यह सामग्री 7 विमानों के जरिए पहुंचाई गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से बात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया था। इसके कुछ घंटे बाद भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी थी। भारत ने राहत-बचाव के लिए 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इनमें 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और 5 सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल है। भारतीय टीमें नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। नेपाल में 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज क्षतिग्रस्त स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ से मुख्य रूप से मध्य नेपाल में 35 मोटरेबल ब्रिज, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है। भारत ने कहा है कि वह नेपाल सरकार की जरूरत के अनुसार आगे भी मदद जारी रखेगा। इसके तहत फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज और अन्य जरूरी सामग्री भेजने की योजना है।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारत सहित कई देश नेपाल की मदद के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं और मलबों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्च अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के आपदा राहत विशेषज्ञ भी लोगों की तलाश में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नेपाल के लिए रवाना हुए। वहीं, इस भयानक आपदा के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने 36 लापता नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
बता दें कि 26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद नेपाल में आई अचानक बाढ़ में अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक, लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर 15 सदस्यों वाली ‘ऑस्ट्रेलियाई आपदा सहायता प्रतिक्रिया टीम’ को तैनात किया गया है। इस टीम में ज्यादातर सदस्य राज्य की आपातकालीन सेवाओं के ड्रोन पायलट हैं।
ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी ने दी जानकारी
न्यू साउथ वेल्स फायर एंड रेस्क्यू के कमिश्नर जेरेमी फ्यूट्रेल ने शुक्रवार को सिडनी एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, “हमें अभी भी उम्मीद है कि कुछ जगहों पर लोग जीवित हो सकते हैं और उम्मीद है कि यह टीम ऐसे लोगों का पता लगाने में मदद कर सकेगी।”
उन्होंने कहा, “इस टीम में मुख्य रूप से हमारे खास ड्रोन के पायलट शामिल हैं।” उन्होंने आगे बताया कि उनके पास अलग-अलग तरह के ड्रोन हैं जो हवा से बड़े इलाकों का सर्वे कर सकते हैं और ऐसी तंग जगहों पर भी जा सकते हैं जहां बचाव कर्मियों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
जेरेमी फ्यूट्रेल ने आगे कहा, “हम जो मदद दे रहे हैं, वह नेपाली अधिकारियों के अनुरोध पर दी जा रही है। इसके तहत उन्हें ऐसे कई साधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनसे उन्हें वाकई मदद मिलेगी।”
उन्होंने कहा, इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के 7 विशेषज्ञ भी शनिवार को नेपाल पहुंचेंगे। ये विशेषज्ञ आपदा में मारे गए या लापता लोगों की पहचान करने में मदद करेंगे।
19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद
बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गुरुवार को इनकी तैनाती की घोषणा की थी। विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि 19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद हैं, जिनमें कॉन्सुलर अधिकारी, मानवीय सहायता से जुड़े पुलिसकर्मी और रक्षा व पुलिस के जवान शामिल हैं।
गौरतलब है कि नेपाल के विदेश मंत्री ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें विशेष और तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है।
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है, लेकिन चीन की सीमा के पास बचाव कार्य जारी है।
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के कुछ रिश्तेदार भी खुद तलाश करने के लिए नेपाल गए हैं।
ऑस्ट्रेलिया के ट्रेजरर जिम चाल्मर्स ने शुक्रवार को बताया कि 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि रात भर में दो लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।
उन्होंने ABC न्यूज ब्रेकफास्ट को बताया, “हमें उन 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के बारे में अभी भी बहुत चिंता है जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है।”
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नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में इस आपदा से 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। शहरों, सड़कों, पुलों और कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के कुछ घंटों के भीतर ही भारत ने राहत सामग्री भेजनी शुरू कर दी थी। 3 सितंबर तक भारत पांच खेप में कुल 74 टन राहत सामग्री भेज चुका है, जिसमें करीब 5 टन जरूरी दवाइयां शामिल हैं। भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं रही। डॉक्टर, पैरामेडिक्स, बचाव दल, सुरंग विशेषज्ञ, बेली ब्रिज और फोरेंसिक एक्सपर्ट भी नेपाल भेजे गए हैं। यानी सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश से लेकर शवों की DNA जांच और पुनर्निर्माण तक भारत कई मोर्चों पर नेपाल की मदद कर रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी संसद में भारत की सहायता के लिए धन्यवाद दिया है। भारत की मदद से बना अस्पताल बाढ़ पीड़ितों के लिए बना सहारा नेपाल के नुवाकोट में नेपाल-भारत मैत्री भवन बाढ़ के बाद लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। इस इमारत में आयुर्वेद और वैकल्पिक अस्पताल भी है। भारत सरकार ने 2015 के भूकंप के बाद इस अस्पताल का पुनर्निर्माण कराया था। ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से भोटेकोशी बाढ़ में घर छोड़ने को मजबूर सैकड़ों लोगों ने यहां शरण ली है। अस्पताल में 11 डॉक्टर बाढ़ प्रभावित लोगों का इलाज कर रहे हैं। यहां से जिले के अलग-अलग राहत केंद्रों में पहुंचाए गए लोगों को भी मेडिकल मदद दी जा रही है। जहां पुल बह गए, वहां बेली ब्रिज से फिर जुड़ेंगे रास्ते बाढ़ में कई सड़कें और पुल बहने से दूरदराज के इलाकों का संपर्क टूट गया है। इसे बहाल करने के लिए भारत नेपाल को बेली ब्रिज भेज रहा है। बेली ब्रिज लोहे के हिस्सों से तैयार होने वाला अस्थायी पुल होता है। इसके हिस्सों को प्रभावित इलाके तक ले जाकर मौके पर जोड़ा जा सकता है। इससे स्थायी पुल बनने का इंतजार किए बिना सड़क संपर्क जल्दी बहाल किया जा सकता है। भारतीय दूतावास के मुताबिक, 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए उपकरण भी जल्द भेजे जाएंगे। इन्हें लगाने के लिए तकनीकी टीमें भी नेपाल पहुंचेंगी। हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में भारतीय एक्सपर्ट बाढ़ के बाद नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे मजदूरों को ढूंढना है। नेपाल सरकार के मुताबिक कई सुरंगों में करीब 900 से ज्यादा कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है। 30 अगस्त को भारतीय सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंची। टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हाइड्रोपावर सुरंगों में कर्मचारियों की तलाश कर रही है। दिल्ली-एनसीआर के ‘रैट माइनर्स’ की टीम ने भी नेपाल के बचाव अभियान में शामिल होने की पेशकश की है। इसी टीम ने 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। शवों के पहचान के लिए DNA जांच में भारत की मदद बाढ़ का पानी घटने के बाद अब नेपाल के सामने एक और बड़ी चुनौती बरामद शवों और लापता लोगों की पहचान करना है। इसके लिए भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाल भेजी है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाली टीम के साथ मिलकर DNA सैंपल की जांच कर रहे हैं। काठमांडू घाटी की दो लैब में यह काम किया जा रहा है। इनमें नेपाल पुलिस सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और खुमलटार की नेशनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी शामिल हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए जा चुके थे। इनमें करीब 400 मामलों में सिर्फ शरीर के कुछ हिस्से मिले हैं। ऐसे मामलों में DNA जांच के जरिए मृतकों की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है। बाढ़ में तबाह स्कूल को भी दोबारा बनाएगा भारत भारत की मदद राहत और बचाव अभियान तक सीमित नहीं है। भारत ने नुवाकोट के बिदुर में बाढ़ से क्षतिग्रस्त त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को दोबारा बनाने का फैसला भी किया है। यह स्कूल भारत-नेपाल सहयोग के लिहाज से भी अहम है। इसके पुराने भवन का संबंध भारत की विकास सहायता से रहा है। अब नई इमारत भी भारत के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बनाई जाएगी। आपदा के समय पड़ोसी देशों के साथ खड़ा रहा है भारत नेपाल में मौजूदा राहत अभियान आपदा के समय दूसरे देशों की मदद करने की भारत की नीति की एक और मिसाल है। नेपाल में इस बार भी भारत की भूमिका सिर्फ शुरुआती राहत तक सीमित नहीं है। इलाज से लेकर बचाव, सुरंगों में तलाश, टूटे रास्तों को जोड़ने, शवों की पहचान और पुनर्निर्माण तक भारत नेपाल की मदद में हर स्तर पर जुटा है। —————— नेपाल बाढ़ से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नेपाल बाढ़ में कैसे बचा 40 साल पुराना ‘हरा घर’: मालिक बोला- नींव मजबूत बनाई, नदी किनारे घर था इसलिए ज्यादा ध्यान दिया था नेपाल में 26 अगस्त को त्रिशूली नदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। तेज बहाव में गाड़ियां, इमारतें और लोगों के सामान बह गए, लेकिन नुवाकोट जिले में नदी किनारे बना 40 साल पुराना हरा घर लगभग सुरक्षित बच गया। पूरी खबर पढ़ें…
VIDEO Nepa Flood: नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले से रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है। बचावकर्मियों ने महज डेढ़ महीने के एक मासूम बच्चे को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला। फिर उसे रसुवा के धांगे कैंप पहुंचाया। भयंकर बाढ़ और मलबे के बीच राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। रसुवा और आसपास के इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ ने सड़कें, पुल और कई बस्तियां तबाह कर दी हैं, जिसके बाद सेना और सुरक्षा बलों की टीमें प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं।
डेढ़ महीने के इस मासूम का सुरक्षित रेस्क्यू ऐसे मुश्किल हालात में उम्मीद और राहत की बड़ी तस्वीर पेश करता है। नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार (1 सितंबर) को 987 हो गई। सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMA ने बताया कि अचानक आयी बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं। बाढ़ में कुल 279 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 168 लोगों को इलाज के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।
शव ले जाने के लिए प्रक्रिया जारी
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में मारे गए भारतीयों समेत विदेशी नागरिकों के शवों की शिनाख्त करने और उन्हें स्वदेश भेजने के लिए मंगलवार को विस्तृत प्रक्रिया जारी की। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई। हजारों लोग लापता हो गए। मकानों, सड़कों, पुलों तथा हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है।
दूतावास ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नेपाल सरकार ने विदेशी नागरिकों के शव सौंपने के लिए नौ चरणों वाली प्रक्रिया तय की है। इसमें जरूरी दस्तावेज तैयार करना, तस्वीरें और डिटेल्स दर्ज करना, पोस्टमार्टम, मृत्यु के कारण की पुष्टि और औपचारिक शिनाख्त शामिल हैं।
बयान के अनुसार, प्रक्रिया में उंगलियों के निशान, डीएनए और अन्य फॉरेंसिक सैंपल लेना, मृतक के पासपोर्ट या पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन, दूतावास या वाणिज्य दूतावास के स्तर पर समन्वय तथा शव सौंपने संबंधी ज्ञापन और रसीद जारी करना भी शामिल हैं। दूतावास ने बताया कि इस प्रक्रिया के पहले चार चरण नेपाल के अधिकारियों द्वारा पूरे किए जाएंगे।
यदि रिश्तेदार नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध तस्वीरों और डिटेल्स के आधार पर शव की शिनाख्त कर पाते हैं, तो भारतीय दूतावास उसे सौंपने और स्वदेश भेजने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में मदद करेगा।

दूतावास ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफना दिया है। ऐसे शवों की शिनाख्त के लिए सबसे नजदीकी परिजन से डीएनए का मिलान करना होगा।
VIDEO | Rasuwa, Nepal: One-and-a-half-month-old baby rescued from flood-affected area and brought to Rasuwa Dhange camp.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/d8jp61yd2p) pic.twitter.com/OUd2nEMbRq
— Press Trust of India (@PTI_News) September 1, 2026
सबसे नजदीकी परिजन से आशय ऐसे पारिवारिक सदस्य से है जो वंशावली में एक पीढ़ी के अंतर पर हो। इसमें माता-पिता, सगे भाई-बहन और संतान शामिल हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन मामलों में शवों की शिनाख्त नहीं हो पाती या अवशेषों को अस्थायी रूप से दफना दिया गया है, वहां नेपाल सरकार डीएनए मिलान की सुविधा उपलब्ध कराएगी।
Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।
हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।
भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं
भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।
नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।
फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।
भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।
हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी
भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।
खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।
नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।
हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।
पीड़ितों की DNA से पहचान
नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।
भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।
वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।
नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।
इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।
रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।
वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।
भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में
भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।
विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।
काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।
सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।
बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।
बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।
रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।
वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।
इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।
वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में मृतकों की संख्या 700 के पार पहुंच गई है। अब हिमालयी देश के सामने एक और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मुर्दाघरों और अस्पतालों में शव रखने की जगह कम पड़ने लगी है। बड़ी संख्या में बरामद शवों को सुरक्षित रखने के लिए अस्पतालों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने फैसला किया है कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है और जिन पर कोई दावा करने वाला नहीं है, उन्हें एयरटाइट बैग में दफनाया जाएगा। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं शवों का सरकारी स्तर पर प्रबंधन किया जाएगा, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। दफनाने से पहले उनकी DNA और अन्य जरूरी साक्ष्य सुरक्षित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में उनकी पहचान स्थापित की जा सके।
दफनाने से पहले लिए जाएंगे DNA सैंपल
अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने से पहले अधिकारियों द्वारा उनके DNA सैंपल लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक शव को एक अलग पहचान या रेफरेंस नंबर दिया जाएगा और उस स्थान का टैग भी लगाया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया से भविष्य में परिवारों को अपने लापता परिजनों के शवों की पहचान करने और उन्हें वापस हासिल करने में मदद मिल सकेगी। शनिवार दोपहर तक 100 से अधिक शवों की DNA प्रोफाइलिंग पूरी की जा चुकी थी।
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1.5 मीटर गहराई में दफनाए जाएंगे शव
नेपाल सरकार के अनुसार, अज्ञात शवों को जमीन के करीब 1.5 मीटर नीचे दफनाया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बाद में निकाला जा सके। शवों के बीच करीब 40 सेंटीमीटर का अंतर रखा जाएगा, जिससे DNA मैच होने पर संबंधित शव को आसानी से निकाला जा सके।
दफन स्थल पर कंक्रीट प्लेटफॉर्म पर एक साइन बोर्ड भी लगाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि शवों से संबंधित जानकारी सुरक्षित रखी जा सके।
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चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद
बाढ़ और भूस्खलन के बाद सबसे ज्यादा शव चितवन जिले में बरामद किए गए हैं। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यहां अब तक 233 शव मिले हैं, लेकिन इनमें से केवल छह की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है।
अधिकारी पहचान प्रक्रिया को तेज करने में जुटे हैं। अब तक 135 शवों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं। इसके लिए चितवन के कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, चितवन मेडिकल कॉलेज, भरतपुर अस्पताल और काठमांडू तथा पाल्पा के मेडिकल कॉलेजों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
शवों को सड़ने से बचाने के लिए बनाए गए कूलिंग सेंटर
गर्मी और लंबे समय तक शव रखे जाने के कारण उनके खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने कुछ घरों को कूलिंग सेंटर में बदल दिया है, ताकि शवों को सुरक्षित रखा जा सके और उनकी पहचान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
734 लोगों की मौत, 2498 अब भी लापता
नेपाल सरकार के मुताबिक रविवार को बाढ़ और आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई। वहीं 2,498 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 4,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
इस बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचाव दलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने लोगों से एहतियाती कदम उठाने की अपील की है।
Nepal flood: नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शनिवार को भारत का धन्यवाद किया। उन्होंने 26 अगस्त को हिमालयी देश में आई भयानक अचानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और समर्थन के लिए आभार जताया। इस बाढ़ में 626 लोगों की मौत हुई है। नेपाल ने संकट के इस मुश्किल समय में मदद करने के लिए भारत के प्रयासों की भी तारीफ की। इस दौरान राष्ट्रपति पौडेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “बेहद उदार” बताया।
पौडेल ने मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया
X पर एक पोस्ट में, पौडेल ने आपदा के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चिंता और भारत सरकार की मदद के लिए उनका आभार जताया।
उन्होंने लिखा, “नेपाल सरकार और यहां के लोगों की ओर से मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उनकी चिंता और संवेदना के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं। साथ ही, नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत सरकार की ओर से दिए गए उदार समर्थन और सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त करता हूं।””
नेपाल के राष्ट्रपति ने आपदा में मारे गए भारतीय नागरिकों के प्रति भी शोक व्यक्त किया।
पौडेल ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “हम 26 अगस्त, 2026 की आपदा में भारतीयों की दुखद मौत पर भारत सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति भी व्यक्त करते हैं।”
नेपाल का कहना है कि भारत पुनर्निर्माण में मदद के लिए तैयार है
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने बताया कि भारत ने बाढ़ से हुई तबाही के बाद पुनर्निर्माण के लिए उदार मदद देने की बात कही है।
नेपाल ने इस भयानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और उसके तुरंत दिए गए समर्थन की भी तारीफ की है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में घरों और जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अब नेपाल के सामने इन इलाकों को दोबारा बसाने और बुनियादी सुविधाओं को ठीक करने की बड़ी चुनौती है।
इस आपदा से भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं और पौडेल ने उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया है।
बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई बाढ़
यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों के खिसकने (एवलांच) के कारण आई। इसके बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव बुधवार को मध्य नेपाल से होते हुए नीचे की ओर बढ़ा, जिससे कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई।
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Nepal Flood: नेपाल की भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर खोज, बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं और करीब 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, 187 से ज्यादा विदेशी नागरिकों समेत 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया गया है। इसके अलावा, रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन में आपातकालीन अभियान जारी हैं, और नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के लिए खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है।
626 शव बरामद, 2,400 लापता
भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है और बड़े पैमाने पर आपातकालीन राहत कार्य शुरू करने पड़े हैं।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, 626 शव बरामद किए गए हैं, जबकि लगभग 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, अब तक 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 187 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में तलाशी, बचाव और इमरजेंसी मेडिकल ऑपरेशन जारी हैं। अधिकारी अभी भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं और प्रभावित इलाकों में लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई जा रही है।
नेपाल ने खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है
नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के बीच खास अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है।
सुरंग से बचाव कार्यों के लिए भारत से 11 सदस्यों वाली एक तकनीकी टीम भेजी गई है। चीन से भी सुरंग से बचाव के लिए एक और खास टीम के आने की उम्मीद है।
भारत ने नेपाल की मदद के लिए 57 टन से ज्यादा राहत सामग्री भी भेजी है। चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी जरूरी सामान आ रहा है।
इस मदद से तुरंत बचाव और राहत कार्यों में सहायता मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अधिकारी आपदा के बड़े पैमाने से निपट रहे हैं।
विदेशी नागरिकों के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों की मदद के लिए एक खास इमरजेंसी कंट्रोल रूम बनाया है। यह कंट्रोल रूम परिवारों के साथ तालमेल बिठाएगा, पहचान की प्रक्रियाओं में मदद करेगा और स्वदेश वापसी से जुड़ी प्रक्रियाओं को संभालेगा।
बता दें कि बाढ़ से बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में उनके परिवारों और संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क और तालमेल बनाना राहत और बचाव अभियान का एक अहम हिस्सा बन गया है।
नुकसान का आकलन जारी
नेपाल सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है। यह आकलन मुख्य बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है, जिसमें पुल, सड़कें और पनबिजली परियोजनाएं शामिल हैं।
वहीं, बाढ़ से हुई भारी तबाही को देखते हुए, नेपाल को उम्मीद है कि लंबी अवधि में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय मदद भी अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए नेपाल सरकार न केवल तत्काल बचाव और राहत कार्यों के लिए, बल्कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भी मदद मांग रही है।
नेपाल ने विदेशी मदद ठुकराने की खबरों को गलत बताया
नेपाल सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि उसने अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार कर दिया था। सरकार ने फिर से कहा है कि आपदा के बाद बचाव, राहत और पुनर्निर्माण के कामों के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की बहुत जरूरत है।
अधिकारियों ने आम लोगों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से यह भी अपील की है कि वे सिर्फ आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई जानकारी पर ही भरोसा करें और बिना पुष्टि किए गए आंकड़ों को न तो छापें और न ही प्रसारित करें।
ध्यान दें कि राहत और पुनर्निर्माण के कामों में मदद के लिए सीधे प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में QR कोड या ऑनलाइन लिंक के जरिए योगदान दिया जा सकता है।
नेपाल पर्यटकों के लिए खुला है
बाढ़ से हुई तबाही के बीच, अधिकारियों ने साफ किया है कि नेपाल विदेशी यात्रियों और पर्यटकों के लिए खुला है और वहां कामकाज जारी है, खासकर उन इलाकों में जो बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं।
यह जानकारी ऐसे समय में दी गई है जब भोटे कोशी नदी की बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं।
वहीं, अधिकारी लापता लोगों की तलाश, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और प्रभावित समुदायों तक राहत पहुंचाने पर ध्यान दे रहे हैं, साथ ही बुनियादी ढांचे को हुए बड़े नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।
नेपाल में आई भयानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदलकर रख दी है। इस तबाही में कई परिवार अपनों से बिछड़ गए हैं। वहीं इस त्रासदी में कई बच्चे भी प्रभावित हुए है। वहीं इस बाढ़ के बीच 8 साल के जोयाल की कहानी काफी वायरल हो रही है। नेपाल में आई भयानक बाढ़ से बचने के लिए 8 साल के जोयाल जंगल की ओर भाग गया और कुछ समय तक पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई। इस दौरान उसकी मां बेहद परेशान थी। बाद में वह आखिरकार अपनी मां से मिल गया। लंबे इंतजार के बाद बच्चे के सुरक्षित मिलने से परिवार ने राहत की सांस ली है। आइए जानते हैं पूरी कहानी
सुरक्षित निकाला गया बाहर
बाढ़ से प्रभावित नेपाल के रसुवा जिले से जोयाल घाले को हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जोयाल के पैर में चोट लगी थी और चेहरे पर भी कई कट और चोट के निशान थे। उसकी 28 वर्षीय मां मैटी माया तमांग पूरे दिन राहत शिविरों और लोगों को जुटाने वाली जगहों पर अपने दोनों बेटों को तलाशती रहीं। काफी समय तक बच्चों का कोई पता नहीं चलने पर उन्हें डर सताने लगा था कि शायद दोनों की बाढ़ में जान चली गई है।
कैसे पता चला बेटा जिंदा है
मैटी माया तमांग ने रॉयटर्स को बताया, “मुझे लगने लगा था कि मेरे दोनों बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं। मैं सिर्फ रो रही थी और खुद को संभाल नहीं पा रही थी।” बाद में उन्हें पता चला कि उनका बेटा जोयाल जिंदा है। रॉयटर्स की पत्रकार सहाना बजराचार्य ने उनसे संपर्क किया और बताया कि वह पास के नुवाकोट के एक अस्पताल में जोयाल से मिली थीं। जब तमांग को पता चला कि जोयाल जिंदा है और उसे इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया है, तो उन्हें इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “जब आपने बताया कि आपको पता है कि जोयाल कहां है, तो मुझे विश्वास नहीं हुआ। मैंने तो पहले ही उम्मीद छोड़ दी थी कि मैं उसे कभी ढूंढ पाऊंगी।” तमांग ने कहा, “जब मुझे अपने बड़े बेटे के बारे में पता चला, तो लगा जैसे मेरी जिंदगी वापस मिल गई हो।” तमांग को उनका छोटा बेटा भी सुरक्षित मिल चुका था।
हर तरफ फैले थे कीचड़
बुधवार सुबह जोयाल और उसका भाई स्कूल की गाड़ी से स्कूल गए थे, जबकि उनकी मां घर पर बुनाई का काम कर रही थीं। तभी उन्हें भूकंप जैसी तेज आवाज सुनाई दी। तमांग तुरंत स्कूल की ओर भागीं, लेकिन वहां पहुंचकर वह हैरान रह गईं। उन्होंने बताया, “समझ ही नहीं आ रहा था कि स्कूल कहां है और बाजार कहां था। हर तरफ सिर्फ पानी, पत्थर और कीचड़ नजर आ रहा था।” बाढ़ में स्कूल की पूरी इमारत तबाह हो गई थी। लेकिन, जोयाल किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहा। बाद में उसने बचावकर्मियों को बताया कि जब बाढ़ आई, तब वह पढ़ाई कर रहा था और अचानक चारों तरफ “बहुत ज्यादा अंधेरा” छा गया।
करीब 17 हजार बच्चे हुए प्रभावित
बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ता देख जोयाल अपने एक दोस्त के साथ स्कूल से निकलकर पास के जंगल में चला गया। दोनों बच्चों ने पानी से बचने के लिए पेड़ों पर चढ़कर शरण ली। जब आठ साल के जोयाल से पूछा गया कि क्या उस समय उसे डर लगा था, तो उसने सिर्फ सिर हिलाकर “नहीं” कहा। जोयाल और उसका भाई भी उन हजारों बच्चों में शामिल हैं जो नेपाल में आई बाढ़ के कारण मुश्किल में फंस गए। यूनिसेफ के मुताबिक, रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में करीब 17 हजार बच्चे बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। संस्था नेपाल सरकार के साथ मिलकर ऐसे बच्चों की जानकारी जुटा रही है जो अपने परिवार से अलग हो गए हैं। इन बच्चों की पहचान कर उन्हें रजिस्टर किया जा रहा है और उनके परिवारों से मिलाने की कोशिश की जा रही है।
बता दें, लांगटांग लिरुंग पहाड़ के पास ग्लेशियर का एक हिस्सा अचानक टूट गया, जिससे बाढ़ आ गई। इसके बाद बर्फ और पत्थर तेजी से नीचे आने लगे और घाटी में पानी, कीचड़ और मलबा भर गया

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे पैदा हुए मानवीय संकट को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। खरगे ने केंद्र सरकार से नेपाल को तत्काल मानवीय और आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए तेजी से कदम उठाने की मांग की है। ALSO READ: नेपाल में जलप्रलय से भारी तबाही, 626 लोगों की मौत; 2400 से ज्यादा लापता, 320 भारतीयों से संपर्क टूटा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में बाढ़ से हुए बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आपदा में 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता हैं। बड़ी संख्या में लोग भोजन, दवाइयों, आश्रय और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।
नेपाल में फंसे भारतीयों को लेकर जताई चिंता
खरगे ने कहा कि बाढ़ के कारण नेपाल के कई हिस्सों में भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग भी फंसे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से संबंधित अधिकारियों को बचाव और निकासी अभियान तेज करने के निर्देश देने का आग्रह किया, ताकि प्रभावित भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लाया जा सके।
खरगे ने विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से इन लोगों का पता लगाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास करने की अपील की। ALSO READ: नेपाल की त्रासदी में विदिशा की स्वाति बागरेचा लापता, 26 अगस्त से परिवार से संपर्क टूटा
नेपाल को तत्काल राहत सहायता देने की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बाढ़ प्रभावित लोगों तक पर्याप्त राहत और मानवीय सहायता पहुंचाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत को नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
अमित शाह को दिया सुझाव
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में तत्काल और व्यापक मानवीय एवं आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि नेपाल सरकार के साथ समन्वय करते हुए जरूरत के अनुसार राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें भी तैनात की जाएं, ताकि बचाव, निकासी और राहत कार्यों में मदद मिल सके।
खरगे ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार नेपाल के इस मानवीय संकट को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल आवश्यक कदम उठाएगी।



