नोएडा एयरपोर्ट के पास एस्कॉर्ट्स कुबोटा बनाएगी ऐसा प्लांट जो बदल देगी ट्रैक्टर इंडस्ट्री का चेहरा! जानिए ₹2000 करोड़ का पूरा प्लान

Noida Airport News: एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में अपने नए विशाल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए भूमि पूजन किया है। 19 अगस्त को गौतम बुद्ध नगर जिले के सेक्टर-10 में हुए इस शिलान्यास के साथ ही कंपनी ने 2000 करोड़ रुपये से अधिक के शुरुआती इन्वेस्टमेंट का भी ऐलान किया है।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक यह नया प्लांट 154 एकड़ में तैयार होगा। यह कंपनी द्वारा अब तक का सबसे बड़ा कैपिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर कमिटमेंट है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ जापानी मूल कंपनी कुबोटा के ग्लोबल एक्सपोर्ट को भी स्पीडअप करना है।

यहां पहले फेज में बनेंगे 60000 ट्रैक्टर

कंपनी इस इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग कैंपस को कई फेज में तैयार करेदी। पहले फेज में सालाना 60000 ट्रैक्टर और 15000 कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट यूनिट्स की कैपिसिटी तैयार होगी। इसके साथ सपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी फैसिलिटी भी डेवलप की जाएंगी। कंपनी के मुताबिक जब इसके सभी फेज पूरे हो जाएंगे, तो यह दुनिया भर में फैले कुबोटा ग्रुप के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में से एक बन जाएगा।

इस कैंपस में एक ही छत के नीचे ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और इंजन बनाए जाएंगे। यह प्लांट घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों के लिए काम करेगा और इस क्षेत्र में रोजगार के कई नए अवसर पैदा करेगा।

नोएडा एयरपोर्ट के पास होने का क्या है फायदा?

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित इस प्लांट को बेहतरीन लोकेशन एडवांटेज मिलेगा। यह साइट जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के करीब है। यह इलाका आने वाले समय में एक बड़ा रीजनल कार्गो हब बनने जा रहा है। ऐसे में इस प्लांट को देश भर में सामान भेजने के लिए मजबूत रोड कनेक्टिविटी और एक्सपोर्ट के लिए सीधा एयर कार्गो एक्सेस मिलेगा। इसके अलावा NCR में पहले से मौजूद विशाल इंजीनियरिंग और सप्लायर नेटवर्क का फायदा भी कंपनी को मिलेगा।

भारत पर कुबोटा का बड़ा दांव: 2030 का विजन

यह प्रोजेक्ट कुबोटा कॉरपोरेशन के मिड-टर्म बिजनेस प्लान 2030 का हिस्सा है। इसमें भारत को समूह के प्रमुख ग्रोथ मार्केट्स में शामिल किया गया है। कुबोटा कॉरपोरेशन के सीईओ शिंगो हानाडा के मुताबिक नए प्लांट का यह पैमाना कुबोटा की विकास रणनीति में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत अब कुबोटा के लिए सिर्फ एक बड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग हब बन रहा है।

आपको बता दें कि नवंबर 2025 में YEIDA ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ अगस्त 2024 में हुए एक एमओयू के आधार पर एस्कॉर्ट्स कुबोटा को 4500 करोड़ रुपये के कुल ट्रैक्टर निर्माण यूनिट के लिए लगभग 200 एकड़ जमीन आवंटित की थी। इससे 4000 नौकरियां मिलने का अनुमान था। हाल ही में जिस प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है, वह उसी बड़े विजन का पहला और संशोधित फेज्ड स्कोप है।

2030-31 तक फार्म मेकेनाइजेशन को नई दिशा देने का लक्ष्य

एस्कॉर्ट्स कुबोटा के सीएमडी निखिल नंदा ने कहा कि कंपनी प्रोडक्ट-लीड ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी ने इस साल अपने तीन ब्रांड्स के तहत 42 नए उत्पाद और पिछले दो सालों में 50 से अधिक उत्पाद लॉन्च किए हैं, जिससे धान की खेती, फोर-व्हील-ड्राइव और अन्य सेगमेंट्स में खाली जगहों को भरा गया है।

अप्रैल से जुलाई के दौरान कंपनी ने अपने संयुक्त पैन-इंडिया नेटवर्क के दम पर लगातार अपने मार्केट शेयर में बढ़ोतरी की है। निखिल नंदा ने कहा है कि एस्कॉर्ट्स कुबोटा भारत में फार्म मेकेनाइजेशन को स्पीडअप करना चाहती है। कंपनी का लक्ष्य 2030-31 तक एक ऐसा फुल-सॉल्यूशन एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म तैयार करना है जो सिर्फ कम कीमतों पर नहीं, बल्कि वैल्यू पर केंद्रित हो। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटलाइजेशन की बड़ी भूमिका होगी।

ये भी पढ़ें- Noida Airport: नोएडा एयरपोर्ट को मिला बड़ा रोड लिंक! 74 km का एक्सप्रेसवे जेवर को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा, एक्सपर्ट्स से समझिए रियल एस्टेट को कैसे मिलेगा बूस्ट

आपको बता दें कि साल 1944 में स्थापित एस्कॉर्ट्स कुबोटा भारत और वैश्विक बाजारों में फार्मट्रैक, पावरट्रैक और कुबोटा ब्रांड्स के तहत बिक्री करती है। वहीं 1890 में ओसाका (जापान) में शुरू हुई कुबोटा कॉरपोरेशन दुनिया के 120 से अधिक देशों में कृषि, कंस्ट्रक्शन और इंजन वर्टिकल्स में काम करती है और एस्कॉर्ट्स कुबोटा में मेजॉरिटी की हिस्सेदारी रखती है।

Indian Overseas Bank Recruitment 2026: आईओबी 250 लोकल बैंक ऑफिसरों की भर्ती, जानें कब से कब तक कर सकेंगे आवेदन

Indian Overseas Bank Recruitment 2026: इंडियन ओवरसीज बैंक ने 2026-27 के भर्ती चक्र के तहत 250 लोकल बैंक ऑफिसर के पदों के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके मुताबिक, ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया 8 अगस्त से शुरू हो गई है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 24 अगस्त, 2026 तक बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

चयनित उम्मीदवारों को जूनियर मैनेजमेंट ग्रेड स्केल-I में लोकल बैंक ऑफिसर के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। उन्हें उसी राज्य में पोस्ट किया जाएगा जिसके लिए वे आवेदन करेंगे। कैंडिडेट सिर्फ एक राज्य में वैकेंसी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती में तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात में खाली पद शामिल हैं। आईओबी ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में आवेदन सिर्फ ऑनलाइन मोड से ही लिए जाएंगे।

इंडियन ओवरसीज बैंक लोकल बैंक ऑफिसर भर्ती 2026: जरूरी तारीखें

लोकल बैंक ऑफिसर पदों के लिए आवेदन करते समय कैंडिडेट्स को इन तारीखों का ध्यान रखना चाहिए:

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू : 8 अगस्त, 2026

एप्लीकेशन फीस पेमेंट शुरू : 8 अगस्त, 2026

ऑनलाइन अप्लाई करने की आखिरी तारीख : 24 अगस्त, 2026

एप्लीकेशन फीस पेमेंट की आखिरी तारीख : 24 अगस्त, 2026

आईओबी लोकल बैंक ऑफिसर भर्ती 2026: सिर्फ चार राज्यों में होगी

बैंक ने चार राज्यों में कुल 250 वैकेंसी निकाली हैं। कैंडिडेट्स को अपने चुने हुए राज्य की बताई गई लोकल भाषा में अच्छी जानकारी होनी चाहिए।

तमिलनाडु : 100 पद; तमिल जरूरी भाषा है।

कर्नाटक : 50 वैकेंसी; कन्नड़ जरूरी भाषा है।

महाराष्ट्र : 50 वैकेंसी; मराठी जरूरी भाषा है।

गुजरात : 50 वैकेंसी; गुजराती जरूरी भाषा है।

उम्मीदवार सिर्फ एक राज्य के लिए आवेदन कर सकते हैं। मेरिट लिस्ट राज्य वार और श्रेणी वार अलग-अलग तैयार की जाएगी। चयनित उम्मीदवारों को उनके चुने हुए राज्य में सेवा के पहले 12 साल या बताए गए सीनियर ग्रेड में प्रमोशन होने तक, जो भी पहले हो, नियुक्त किया जाएगा।

आईओबी लोकल बैंक ऑफिसर भर्ती 2026: चयन प्रक्रिया

चयन प्रक्रिया में एक ऑनलाइन परीक्षा, लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट (जहां भी लागू हो), और पर्सनल इंटरव्यू शामिल होगा। ऑनलाइन परीक्षा में 200 अंकों के 140 सवाल होंगे और कुल तीन घंटे का समय होगा। इसमें रीजनिंग और कंप्यूटर एप्टीट्यूड, जनरल/इकोनॉमी/बैंकिंग अवेयरनेस, डेटा एनालिसिस और इंटरप्रिटेशन, और अंग्रेजी पर पकड़ देखी जाएगी। गलत जवाब के लिए पेनल्टी भी होगी। पर्सनल इंटरव्यू 100 मार्क्स का होगा। फाइनल सिलेक्शन ऑनलाइन एग्जाम और इंटरव्यू के आधार पर होगा। इनका वेटेज 80:20 का रहेगा।

क्या हमारी नौकरियां ले सकता है AI? जानें 5 ऐसी फील्ड जहां इंसानों की काबीलियत का मुकाबला नहीं कर सकेगा एआई

क्या हमारी नौकरियां ले सकता है AI? जानें 5 ऐसी फील्ड जहां इंसानों की काबीलियत का मुकाबला नहीं कर सकेगा एआई

आज के दौर में छोटे-बड़े पदों पर काम कर रहे कामगारों को एक सवाल सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है। एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या हमारी नौकरियां ले सकता है? कहने को यह सिर्फ मशीन है, लेकिन एंट्री लेवल कर्मचारियों से लेकर सीईओ तक इसके खौफ में जी रहे हैं। आए दिन मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा बड़ी संख्या में लोगों की छंटनी की खबरें आ रही हैं। ऐसे में ये सोचना लाजिमी है कि क्या एआई की वजह से इंसानों के काम करने के विकल्प सीमित होंगे या खतरा उतना बड़ा भी नहीं है, जितना इसका खौफ बन गया है? इस विषय पर बीबीसी हिंदी एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई सिर्फ नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि नई नौकरियां पैदा भी करेगा। जनवरी 2026 में जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एआई के कारण लाखों नई नौकरियां बनी हैं। कोई 12वीं छात्र एआई से जुड़े क्षेत्र में करियर बनाना चाहता है, तो इसके लिए सही कोर्स चुनना होगा। आइए जानें 5 ऐसे करियर विकल्प जहां एआई इंसानों का बाल भी बांका नहीं कर सकता है।

क्या होता है एआई?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन या कंप्यूटर की ऐसी क्षमता, जिससे ऐसा लगे कि वो इंसानों की तरह ही सोचने-समझने के काबिल है।” वह कहते हैं रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल हो रहे कंप्यूटर-मोबाइल एप्लिकेशन के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काम कर रहा है।

एआई के पांच टॉप कोर्स

दिल्ली में टेक पॉलिसी फोकस्ड थिंकटैंक इसिया सेंटर की डायरेक्टर और जानी-मानी एआई एक्सपर्ट मेघना बल कहती हैं, ”एआई उन लोगों के लिए खतरा नहीं है, जो खुद को अपडेट रखते हैं। बल्कि यह उनके लिए मौका है।” मेघना के मुताबिक एआई से संबंधित कुछ बेसिक स्तर के कोर्स सभी को करने चाहिए। सरकार के स्वयं पोर्टल के जरिए कई कोर्स फ्री में किए जा सकते हैं। लेकिन इस फील्ड में करियर बनाने में ये 5 कोर्स आपके काम आएंगे।

एमबीए/पीजी डिप्लोमा इन एआई एंड बिजनेस एनालिटिक्स : आईआईएम, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, और अपग्रैड, या ग्रेट लर्निंग जैसी एडुटेक कंपनियों के साथ जुड़कर ये कोर्स किया जा सकता है। इसकी फीस करीब ढाई से सात लाख रुपये तक हो सकती है। कोर्स करने के बाद संभावित सैलरी छह से बीस लाख रुपये के बीच हो सकती है।

एआई सर्टिफिकेट प्रोग्राम (ऑनलाइन): ये ऑनलाइन एडुटेक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसकी फीस डेढ़ लाख रुपये के आसपास है। ये उनके लिए है, जो एकदम शुरुआती चरण में हैं और एआई की बुनियादी समझ बनाना चाहते हैं। इस कोर्स के बाद सालाना 10 लाख तक सैलरी मिल सकती है।

एमसीए/एम टेक इन एआई एंड मशीन लर्निंग : आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और कई दूसरे प्रमुख विश्वविद्यालय से ये कोर्स किया जा सकता है। इसके अलावा आईआईटी में एआई से जुड़े कई क्रैश कोर्स भी उपलब्ध हैं। मास्टर्स की फीस सालाना एक लाख से दस लाख के बीच हो सकती है। इसे करने के बाद अनुमानित सैलरी 22 लाख रुपए हो सकती है।

बीएससी/बीटेक इन एआई एंड डेटा साइंस : दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एमिटी यूनिवर्सिटी, सेंट जेवियर्स कॉलेज, एनआईटी जैसे बड़े संस्थानों से ये कोर्स किया जा सकता है। पूरे प्रोग्राम की फीस एक लाख से बीस लाख रुपए के बीच हो सकती है। संभावित सैलरी 6 से 18 लाख रुपये तक जा सकती है।

एआई बूटकैंप और इंडस्ट्री प्रोग्राम : आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे और कई बड़े निजी संस्थान में ये कोर्स उपलब्ध है। इसकी फीस करीब 1 लाख से साढ़े तीन लाख रुपये हो सकती है। कोर्स के बाद संभावित पैकेज 6 से 18 लाख रुपए या उससे ज्यादा हो सकता है।

हेल्थ, सीए, कानून के पेशे में कम होगा एआई का असर

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई का खतरा उन पेशों पर कम होगा, जहां इंसानी कनेक्ट की जरूरत होगी। मेघना बल कहती हैं, “नर्स, हेल्थकेयर प्रोफेशनल, फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, टीचर के काम एआई नहीं कर पाएगा। इन कामों के लिए इंसान ही चाहिए। लोग सिर्फ ऑटोमेटेड जवाबों से संतुष्ट नहीं होंगे।”

इसके अलावा क्रिएटिव डायरेक्टर्स, लेखक या कॉन्टेंट स्ट्रैटेजिस्ट के काम में एआई मददगार हो सकता है, लेकिन इनकी जगह नहीं ले पाएगा। प्रोफेसर आकाश सिन्हा चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर, नर्स, एआई इंजीनियर, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, वकील के करियर को एआई से सुरक्षित मानते हैं। लेकिन इसमें अपनी विशेषज्ञता कायम रखनी होगी। ये करियर विकल्प पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, लेकिन आप खुद एआई टूल का इस्तेमाल करना सीखें, ताकि काम जल्दी कर सकें।

Bihar Police ASI Operation Result 2026: आधिकारिक वेबसाइट पर इस तरह चेक करें प्री परीक्षा की मेरिट लिस्ट, 462 पदों के लिए हुई थी परीक्षा

द्वारका में बनेगा दिल्ली का सबसे भव्य 5-Star होटल! 1000 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से मिलेंगी 800 नौकरियां

DDA Plan: दिल्ली के द्वारका सब-सिटी को एक इकॉनमिक, कॉर्मर्शियल और इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनाने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने एक बड़ा कदम उठाया है। डीडीए और जुनिपर होटल्स लिमिटेड ने द्वारका के सेक्टर-23 में एक भव्य 5-स्टार होटल बनाने के लिए MoU किया है। इस प्रोजेक्ट में 1000 करोड़ रुपये से अधिक का कैपिटल इन्वेस्टमेंट होगा। होटल बनने और इसके चलने करीब 800 लोगों के लिए डायरेक्ट एंप्लॉयमेंट के मौके तैयार होंगे। यह होटल दिल्ली-एनसीआर में गुणवत्तापूर्ण 5-स्टार आवास की उपलब्धता को काफी मजबूत करेगा।

यह प्रोजेक्ट जुनिपर द्वारा लाइसेंस शुल्क के आधार पर क्रियान्वित की जाएगी। इसके लिए जल्द ही जमीन जुनिपर होटल्स लिमिटेड को सौंप दी जाएगी। इस होटल को 2030 तक ऑपरेशनल करने का टारगेट बनाया गया है। 55 वर्षों की लाइसेंस अवधि के दौरान इस होटल से डीडीए के लिए 6000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व आने का अनुमान है।

गोल्फ कोर्स और यशोभूमि के पास प्राइम लोकेशन

जुनिपर होटल्स लिमिटेड, सराफ होटल्स और अंतरराष्ट्रीय हॉस्पिटैलिटी ब्रांड हयात के बीच एक रणनीतिक साझेदारी है। अभी यह भारत के प्रमुख स्थलों पर 245 सर्विस अपार्टमेंट्स सहित 1895 कमरों वाले सात होटलों का प्रबंधन करता है। कंपनी द्वारका में प्रस्तावित इस 5-स्टार होटल को हयात के साथ साझेदारी में अपने प्रीमियम ग्रैंड हयात ब्रांड के तहत विकसित और संचालित करेगी।

यह होटल देश के सबसे लंबे 18-होल वाले डीडीए द्वारका गोल्फ कोर्स के ठीक सामने स्थित होगा। इससे गोल्फ खिलाड़ियों और मेहमानों की विशेष जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। यह जगह क्षेत्रफल के हिसाब से भारत और एशिया के सबसे बड़े कन्वेंशन सेंटर यशोभूमि के बेहद करीब है। ये द्वारका स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से भी नजदीकी दूरी पर होगा। इसके अलावा यह होटल ठीक सामने प्रस्तावित डिप्लोमैटिक एन्क्लेव के मेहमानों की जरूरतों को भी पूरा करेगा।

यह भी पढ़ें: Sukhbir Singh Badal Attacked: पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर सिंह बादल पर जानलेवा हमला, नांदेड़ गुरुद्वारे के पास निहंग ने किया अटैक

14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

एक टेक प्रोफेशनल करीब 14 महीने से दो कंपनियों में एक साथ रिमोट जॉब कर रहा था और अब तक उसकी यह ‘डबल जॉब’ वाली व्यवस्था बिना किसी बड़ी परेशानी के चल रही थी। दोनों कंपनियां अलग थीं, काम का तरीका और टेक्नोलॉजी स्टैक भी अलग था, इसलिए उसे लगता था कि दोनों नौकरियों का राज आसानी से छिपा रहेगा। लेकिन अचानक एक ऐसा मोड़ आया, जिसने उसकी पूरी प्लानिंग हिला दी। उसे पता चला कि उसकी दोनों कंपनियां अब मर्ज होने जा रही हैं।

इसके बाद सबसे बड़ा डर यह है कि कंपनियों के सिस्टम और कर्मचारी रिकॉर्ड आपस में जुड़ते ही उसकी पहचान दोनों जगह सामने आ सकती है। खास बात यह है कि वह दोनों संस्थानों के कर्मचारियों के संपर्क में भी रहता है और दोनों कंपनियों की Slack डायरेक्टरी में उसका नाम मौजूद है। अब वह सोच रहा है कि नौकरी छोड़े या जोखिम लेकर इंतजार करे।

14 महीने तक आराम से चल रही थी दोहरी नौकरी

रेडिट पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, टेक कर्मचारी करीब 14 महीने से दो कंपनियों में एक साथ काम कर रहा था। दोनों नौकरियां पूरी तरह रिमोट थीं और दोनों में अलग-अलग टेक्नोलॉजी स्टैक इस्तेमाल होते थे।

उसका मानना था कि दोनों कंपनियों के कामकाज और टीमों के बीच इतना अंतर है कि किसी को उसके दूसरे रोजगार के बारे में पता चलने की संभावना बेहद कम है। इसी भरोसे के साथ वह दोनों नौकरियां संभालता रहा।

छोटी कंपनी को चुना था, ताकि न हो कोई टकराव

कर्मचारी के मुताबिक, उसकी एक कंपनी मिड-साइज SaaS कंपनी थी, जबकि दूसरी उसी सेक्टर में काम करने वाली अपेक्षाकृत छोटी कंपनी थी। उसने दूसरी कंपनी को इसलिए चुना था क्योंकि उसे लगता था कि छोटी कंपनी होने के कारण दोनों संस्थानों के बीच भविष्य में किसी तरह का कारोबारी संपर्क होने की संभावना काफी कम है। लेकिन जिस चीज को उसने सबसे कम संभावित माना था, वही आखिरकार उसके सामने आ गई।

CEO का एक ईमेल और बदल गया पूरा खेल

मुश्किल तब शुरू हुई जब उसे पहली कंपनी के CEO की ओर से ईमेल मिला। ईमेल में बताया गया था कि उसकी कंपनी दूसरी कंपनी का अधिग्रहण करने जा रही है। यानी जिस कंपनी में वह दूसरी नौकरी कर रहा था, अब वही उसकी पहली कंपनी के कॉरपोरेट दायरे में आने वाली थी। इसके बाद कर्मचारी को सबसे बड़ा डर अपने दोनों रोजगार रिकॉर्ड के आपस में जुड़ने का सताने लगा।

Slack डायरेक्टरी बनी सबसे बड़ी चिंता

टेक प्रोफेशनल ने बताया कि वह दोनों कंपनियों के कर्मचारियों के साथ नियमित रूप से बातचीत करता है। ऐसे में मर्जर के बाद उसके लिए छिपे रहना और मुश्किल हो सकता है। दोनों कंपनियों की Slack डायरेक्टरी में उसका नाम मौजूद है। हालांकि दूसरी कंपनी में उसने अपने नाम का थोड़ा अलग फॉर्मेट इस्तेमाल किया था, लेकिन उसे खुद भी शक है कि सिस्टम और कर्मचारी डेटाबेस के एकीकरण के बाद यह अंतर उसे बचाने के लिए काफी नहीं होगा।

असली डर

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों कंपनियों का इंटीग्रेशन कितनी जल्दी शुरू होगा। कर्मचारी को अंदाजा नहीं था कि पूरी प्रक्रिया में कई महीने लगेंगे या सिस्टम और कर्मचारी रिकॉर्ड का एकीकरण शुरुआत में ही शुरू हो जाएगा। अगर दोनों कंपनियों के HR सिस्टम, डायरेक्टरी और डेटाबेस जल्दी आपस में जुड़ गए, तो एक ही व्यक्ति का दो जगह कर्मचारी के तौर पर मौजूद होना आसानी से सामने आ सकता है।

नौकरी छोड़ दे या जोखिम लेकर इंतजार करे?

यहीं से कर्मचारी की सबसे बड़ी दुविधा शुरू हुई। उसके सामने दो रास्ते थे दूसरी नौकरी से खुद इस्तीफा दे दे या फिर कुछ समय तक दोनों नौकरियां जारी रखकर हालात पर नजर रखे। पहला विकल्प उसे तुरंत संभावित जोखिम से बाहर निकाल सकता था। वहीं दूसरा विकल्प ज्यादा अनिश्चित था, लेकिन इसमें वह मर्जर की दिशा देखकर आगे फैसला लेने की उम्मीद कर रहा था।

Layoff हुआ तो Severance का भी सवाल

कर्मचारी के दिमाग में एक और संभावना आई। मर्जर के दौरान कंपनियां अक्सर restructuring करती हैं और कुछ पदों को खत्म भी किया जा सकते हैं। ऐसे में उसे लगा कि अगर वह इंतजार करता है और उसकी नौकरी restructuring में चली जाती है, तो शायद उसे severance मिल सके। हालांकि वह यह भी समझ रहा था कि इस रणनीति में बड़ा जोखिम है। अगर उससे पहले ही दोनों कंपनियों को उसके डबल एम्प्लॉयमेंट का पता चल गया, तो स्थिति उसके खिलाफ जा सकती है।

तनाव इतना बढ़ा कि सुबह 10 बजे ही खाने लगा Goldfish

अपनी पोस्ट के आखिर में टेक कर्मचारी ने अपनी स्थिति को मजाकिया अंदाज में बताते हुए कहा कि वह सुबह 10 बजे ही अपनी डेस्क पर बैठकर “stress eating goldfish” कर रहा था। उसने Reddit यूजर्स से पूछा कि ऐसी स्थिति में उसे क्या करना चाहिए। पोस्ट सामने आते ही लोगों ने इसे गंभीर सलाह के साथ-साथ मजाकिया नजरिए से भी लेना शुरू कर दिया।

इंटरनेट ने कहा

पोस्ट पर कई यूजर्स ने उसकी स्थिति पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने इसे “suffering from success” वाला मामला बताया। दूसरे ने मजाक करते हुए कहा कि वह दोनों कंपनियों की टीमों का परिचय कराने वाला व्यक्ति बन सकता है। किसी ने तो यहां तक सुझाव दे दिया कि वह अपना कानूनी नाम ही बदल ले। एक अन्य यूजर ने बेहद सीधे अंदाज में सलाह दी दूसरी नौकरी से इस्तीफा देकर भगवान से प्रार्थना करो। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि वे भी ऐसी ही “समस्या” झेलना चाहेंगे।

मर्जर ने खोल दिया Overemployment का सबसे बड़ा जोखिम

इस पूरे मामले की दिलचस्प बात यही है कि करीब 14 महीने तक दो रिमोट नौकरियां करने वाले इस कर्मचारी के लिए सबसे बड़ा खतरा काम का दबाव नहीं, बल्कि कंपनियों का आपस में जुड़ना बन गया। जब तक दोनों संस्थान अलग थे, अलग टेक स्टैक, अलग टीम और अलग सिस्टम ने उसकी दोहरी नौकरी को छिपाए रखा। लेकिन मर्जर के बाद वही अलग-अलग सिस्टम एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं। अब उसकी पूरी चिंता इसी बात पर टिकी है कि यह इंटीग्रेशन कितनी जल्दी होता है और दोनों कंपनियों के रिकॉर्ड कब एक-दूसरे के सामने आते हैं।

एआई के आते ही लगी चपत! ₹2 लाख कमाने वाले कॉपीराइटर की इनकम पहुंची 40 हजार पर

आज के बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना आम बात हो गई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल से काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। वहीं एआई के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से कुछ लोगों को अपनी जॉब से भी निकाला जा रहा है। वहीं इसकी वजह से कई लोगों को अपने करियर को लेकर चिंतित हैं। कुछ लोग AI को नए मौके मानते हैं, जबकि कई लोगों के मुताबिक इससे उनके करियर पर बड़ा असर पड़ा है। वहीं इन दिनों सोशल मीडिया पर एक कॉपीराइटर का एआई की वजह से कम हुई सैलरी को लेकर किया गया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

एक वायरल Reddit पोस्ट में एक कॉपीराइटर ने अपनी नौकरी और कमाई में आए बड़े बदलाव का अनुभव शेयर किया। कॉपीराइटर के मुताबिक, पहले वह हर महीने करीब 2 लाख रुपये कमाते थे, लेकिन अब उनकी आय घटकर लगभग 40 हजार रुपये रह गई है। उन्होंने दावा किया कि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने उनके काम और करियर पर गहरा असर डाला।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

Reddit पर ये पोस्ट r/IndianWorkplace शेयर की गई थी। इस पोस्ट का टाइटल “2 लाख रुपये महीने से 40 हजार रुपये महीने की सैलरी पर पहुंचना” था। जिंदगी की सबसे बड़ी गिरावट।” पोस्ट में यूजर ने बताया कि फ्रीलांसिंग से शुरुआत करने के बाद उनकी कमाई 2 लाख रुपये महीने तक पहुंच गई थी, लेकिन कुछ ही हफ्तों में उनका करियर पूरी तरह बदल गया। यूजर ने लिखा, “करीब 8 साल पहले मैंने फ्रीलांसिंग शुरू की थी। 18 साल की उम्र में मुझे पहला फुल-टाइम रिमोट कॉन्ट्रैक्ट मिला और 22 साल की उम्र तक मैं घर से काम करते हुए हर महीने 2 लाख रुपये कमा रहा था।”

कम हो गई सैलरी

लेकिन,ये सफलता ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। यूजर ने बताया कि साल 2026 उनके करियर के लिए सबसे मुश्किल दौर साबित हुआ। उन्होंने लिखा, “2026 मेरे लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा। मेरी सभी नौकरियां और प्रोजेक्ट चले गए और सिर्फ दो हफ्तों के भीतर मेरी छह अंकों की मासिक कमाई घटकर लगभग शून्य हो गई।” यूजर के अनुसार, वर्कप्लेस पर AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने उनके करियर पर सबसे ज्यादा असर डाला। उन्होंने दावा किया कि इसी बदलाव की वजह से उनकी नौकरी भी चली गई।

एआई की वजह से गई नौकरी

पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैं एक लीड कॉपीराइटर था। मैंने बिल्कुल शुरुआत से अपना करियर बनाया। कॉलेज बीच में छोड़ दिया था और अपनी पूरी जिंदगी अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने में लगा दी। लेकिन फिर AI का दौर आ गया। मेरा मानना है कि मुझे इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि कंपनी ने AI को ट्रेन करने और अपने स्थायी कर्मचारियों को बनाए रखने का फैसला किया।”

2 लाख से 40 हजार हुई सैलरी

इनकम के एक रेगुलर सोर्स के लिए यूजर ने हैदराबाद की एक मार्केटिंग एजेंसी जॉइन की। जो तेलंगाना टूरिज्म के प्रचार से जुड़े काम संभालती है। उन्होंने बताया कि ज्यादा जिम्मेदारियां संभालने के बावजूद उनकी सैलरी पहले की तुलना में काफी कम है। यूजर ने बताया कि नई नौकरी में सबसे बड़ा झटका उन्हें सैलरी को लेकर लगा। उन्होंने लिखा, “मुझे सबसे ज्यादा हैरानी सैलरी देखकर हुई। ऐसा लगता है कि कई कंपनियां यहां लोगों के टैलेंट का पूरा फायदा उठाना चाहती हैं। पहले जिस काम के लिए मुझे 2 लाख रुपये महीने मिलते थे, अब उससे भी बड़ी जिम्मेदारी के लिए सिर्फ 40 हजार रुपये मिल रहे हैं। यह बात मुझे हर दिन परेशान करती है।”

लोगों में नहीं है उत्साह

यूजर ने कहा कि कम सैलरी के साथ-साथ दफ्तर का माहौल भी उन्हें निराश करता है, क्योंकि वहां लोगों में काम के प्रति जुनून और रचनात्मक सोच की कमी है। उन्होंने लिखा, “पैसों की समस्या के अलावा मुझे सबसे ज्यादा इस बात का दुख है कि मेरे आसपास क्रिएटिव माहौल नहीं है। ज्यादातर लोग सिर्फ काम पूरा करने के लिए काम करते हैं। उनमें न उत्साह दिखता है और न ही जुनून। इससे मेरा भी काम करने का मन कम हो जाता है, जबकि मैं अकेले कई लोगों का काम संभाल रहा हूं।”

लोगों ने किया कमेंट

यूजर ने Reddit पर लोगों से सलाह मांगी, जिसके बाद कई यूजर्स ने उनका हौसला बढ़ाया और नई स्किल्स सीखने व बेहतर अवसर तलाशने की सलाह दी। एक यूजर ने लिखा, “हममें से ज्यादातर लोग सुरक्षित रास्ता चुनते हैं और जोखिम लेने से बचते हैं। आपने जोखिम लिया, सही समय पर सफलता भी मिली, लेकिन हर दौर हमेशा एक जैसा नहीं रहता। हर पीढ़ी में बड़े बदलाव आते हैं और इस बार AI ऐसा ही बदलाव लेकर आया है।” वहीं एक और यूजर ने सलाह दी, “अपनी स्किल्स को लगातार बेहतर बनाइए, नए लोगों से जुड़िए और दोबारा फ्रीलांसिंग शुरू कीजिए। इससे आपको बेहतर मौके मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।”

कॉल सेंटर वर्कर्स की जगह ले रहा AI; माइक्रोसॉफ्ट से उबर तक ने इस्तेमाल बढ़ाया; भारत को लग सकता है बड़ा झटका

AI Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कर्मचारियों की मदद करने वाला टूल नहीं रह गया है। बड़ी कंपनियां इसे लागत घटाने और कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए भी इस्तेमाल कर रही हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक Microsoft, Uber, Hyatt Hotels और Commonwealth Bank of Australia जैसी कंपनियां अब कस्टमर सर्विस का बड़ा हिस्सा AI चैटबॉट और ऑटोमेटेड फोन सिस्टम से संभाल रही हैं। इससे हजारों नौकरियां पहले ही खत्म हो चुकी हैं।

AI से सबसे ज्यादा खतरा किसे?

कॉल सेंटर इंडस्ट्री में लंबे समय से ऑटोमेशन का खतरा था। लेकिन जनरेटिव AI आने के बाद यह बदलाव काफी तेज हो गया है। अब कंपनियां उन कामों को भी AI से करा रही हैं, जिनके लिए पहले इंसानों की जरूरत पड़ती थी।

रिसर्च फर्म Forrester की एनालिस्ट केट लेगेट के मुताबिक, अमेरिका में कस्टमर सर्विस की नौकरियां लगातार घट रही हैं। उनका अनुमान है कि 2030 तक करीब आधी कस्टमर सर्विस नौकरियां AI से प्रभावित हो सकती हैं। सबसे ज्यादा असर फिलीपींस और भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जहां पश्चिमी कंपनियां बड़ी संख्या में कॉल सेंटर का काम आउटसोर्स करती हैं।

बड़ी कंपनियां कैसे घटा रही हैं लागत?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Microsoft ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कस्टमर सर्विस वर्कफोर्स करीब 50,000 से घटाकर 40,000 कर दी है। कंपनी का कहना है कि AI की मदद से उसे हर साल करीब 750 मिलियन डॉलर की बचत हो रही है। हालांकि, जटिल मामलों में अभी भी इंसानी कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।

वहीं, Uber ने हाल ही में अपनी कस्टमर सर्विस टीम में करीब 10% कटौती की। अब कंपनी ग्राहकों को ऐप के भीतर AI चैटबॉट के जरिए सहायता देने पर ज्यादा जोर दे रही है।

Commonwealth Bank of Australia ने भी AI अपनाने के बाद अपने चैट सपोर्ट से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों की जरूरत कम कर दी। इससे बैंक को हर साल करोड़ों डॉलर की बचत होने की बात कही गई है।

कॉल सेंटर इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव

Hyatt Hotels भी होटल बुकिंग में बदलाव, रसीद भेजने और दूसरे सामान्य अनुरोध AI से निपटा रही है। वहीं, होम सिक्योरिटी कंपनी Brinks Home ने AI की मदद से कॉल वॉल्यूम दो-तिहाई घटा दिया और कॉल सेंटर स्टाफ को करीब 800 से घटाकर 400 कर दिया।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, AI के बढ़ते इस्तेमाल का असर आउटसोर्सिंग कंपनियों पर भी दिखने लगा है। Teleperformance, Concentrix और TTEC जैसी कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि कम जटिल काम AI की वजह से तेजी से खत्म हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में कॉल सेंटर इंडस्ट्री में रोजगार पर दबाव और बढ़ सकता है।

HDFC बैंक को गवर्नेंस में बड़े सुधार करने होंगे, तभी बहाल होगा निवेशकों का भरोसा : एक्सपर्ट्स